Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
S K I N G
तुम्हे टूटकर प्यार करते करते तुम्हीं को खो देना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा था ।
Rajiv Jangid
पत्थर के शहर से,
भीड़ के शोर से,
मैं दूर जाना चाहता हूँ।
यहां रोक लेते है,
बीच चौराहे पर,
एक भीड़ को,
दूसरी भीड़ के लिए।
अनजानी भीड़ का,
मैं भी हिस्सा होता हूँ,
कभी इस ओर,
कभी उस ओर।
मैं ऊब चुका हूँ,
शहर के नियमों से,
थक सा गया हूँ,
भीड़ की नितियों से।
मैं जीना चाहता हूँ,
शहर से दूर,
भीड़ से अलग,
मन की दिशा में,
और एकांत में।
Dr. Damyanti H. Bhatt
પ્રજાસત્તાક પર્વની હાર્દિક શુભેચ્છાઓ 🌹🌹🙏🌹🌹
M K
कभी कभी,
मैं बोलती तो बहुत हूं ,
पर सिर्फ अपनों के सामने
लेकिन अपना और पराया कौन है
फर्क करना भूल चुकी हूं
दिल तोड़ने और भरोसे तोड़ने का
रिवाज़ निभाया जा रहा है...!!
- M K
M K
तुम मेरे हो ही नहीं तो, तुम पर अपना हक क्यों करूं??....
सफर छोटा ही सही मगर यादगार होगा ।।
- M K
Saroj Bhagat
વાહરે કિસ્મત!!
કાશ! તકદીર નામકી
કોઈ બલા ના હોતી ,
હોઠોપે ફરીયાદ,ઓર
દામનમે આંસુઓ કી
સોગાત ના હોતી.
ખુશીઓ કી કિલકારીઓસે
ઘરઆંગન ગુંજતે રહેતા.
સ્વપ્નોકી મુસકાનોસે
જીવન બાગ મહેકતા
રહેતા. કાશ!!!
bhavesh
@groww_with_bk_ 🙏Instagram follow please
rajan
The Unknown Island की कहानी का विस्तृत संस्करण ई-बुक के रूप में उपलब्ध है।
जो पाठक इस रहस्य की पूरी यात्रा और आगे की घटनाएँ जानना चाहते हैं, वे डिजिटल संस्करण देख सकते हैं।
Raushan kumar
#13. वो भी एक जवान हैं... 👨🌾
वो मौसम की हर परिस्थिति को जानता हैं, अकाल में भी वो हार नहीं मानता हैं,
अगर न हो जमीं पे पानी तो वो पसीने की नदियाँ बहाता हैं,
घुटने नहीं टेकता उसका हौसला हिमालय सा चट्टान हैं, हाँ वो किसान हैं इस देश का वो भी एक जवान हैं.....
फसलों की उपज से वो अपने घर को चलाता है, अपने परिवार के साथ साथ पशु पक्षियों को भी दाना खिलाता हैं,
नहीं हैं उसके पास दिव्य शक्ति कोई फिर भी वो हमारे लिए भगवान हैं, हाँ वो किसान हैं इस देश का वो भी एक जवान है.....
उसकी फसलों की कुछ ज्यादा कीमत नहीं हैं,इसका विरोध करने का अब उसके पास हिम्मत नहीं हैं,
सरकार ने उसको दबाया हैं अपने हीं घर में सताया है, वें भूल रहें हैं कि,
उसके हाथों में हीं देश का कमान हैं, हाँ वों किसान हैं इस देश का वो भी एक जवान हैं.....
फाड़ कर छाती वो जमीन का सोना उगलवाता हैं वर्षा की आश में तपती धुप में पैर जलाता है,
नहीं रहा उसको अब उम्मीद किसी से दे रहा वो खुद को बलिदान (आत्महत्त्या) हैं,
हाँ वो किसान हैं इस देश का वो भी एक जवान हैं.....
नही हैं उनके सीने पर कोई पदक फिर भी चेहरे पर रहता हैं एक चमक,
वो अंधेरी रात में जुगनू सा चमकता एक इंसान हैं वो शेर ए हिंदुस्तान हैं,
हाँ वो किसान हैं इस देश का वो भी एक जवान हैं....!
:- रौशन कुमार केसरी
24.01.2026
Awantika Palewale
હવે અર્થોની પળોજણથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે,
શબ્દોની બધી માયાજાળથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.
હતી જે વાચામાં ધાંધલ, હવે એ શાંત થઈ ગઈ છે,
કહેવાતા બધા જ વિવાદથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.
નથી કોઈ અપેક્ષા કે હવે કોઈ મનાવે આપણને,
દુનિયાના ખોટા વટ-વહેવારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.
કિનારો શોધતા'તા જે સતત ભીતરના દરિયે,
એ ડૂબવાના ડર અને મઝધારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.
હવે તો બસ ઉજાસ છે, કોઈ ભાષાની ક્યાં જરૂર છે?
અંધારાના એ જૂના પડઘારથી અમે પાર ઉતરી ગયા છે.
M K
जी नहीं ,,,
अब कोई बहाना नहीं सुनूंगी,,,
क्योंकि मुझे तुम पर भरोसा नहीं है,
मेरे आंखों में पानी तो है,
लेकिन तेरी वजह का कोई कहानी नहीं है...!!!!
- M K
M K
उसकी मोहब्बत ही झूठी थी,
मेरे सच्चे दिल को तोड़ दिया,,,
जा बदल जा तुम्हारी फ़िदरत ही थी बदलना,
हमने भी अब मोहब्बत करना छोड़ दिया,,,
- M K
M K
उसकी मोहब्बत ही झूठी थी,
मेरे सच्चे दिल को तोड़ दिया,,,
जा बदल जा तुम्हारी फ़िदरत ही थी बदलना,
हमने भी अब मोहब्बत करना छोड़ दिया,,,
- M K
Nilesh Rajput
अब वो नहीं वो ही चाहिए।♥️
kattupaya s
Goodnight friends..sweet dreams
S K I N G
हमें तलाश थी इक ऐसे शख़्स की उम्र भर जो भीड़ में हो, मगर भीड़ जैसा नहीं है।
Md Siddiqui
26 जनवरी का यह पावन अवसर हमारे देश की शान और हमारे लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
Md Ibrar Pratapgarhri
Lakshmanarao Kasarapu
"FEELINGS ARE THE ESSENCE OF YOUR LIFE"<br />
CHAPTER -1 <br />
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DISCOVERING THE POWER OF EVERY EMOTION.<br />
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Introduction: Your secret inner language<br />
Every day, people feel waves of fear, joy, anger, shame, love, excitement, and sadness—but most were never taught what these feelings really mean.<br />
Instead, many grew up hearing “don’t cry,” “be strong,” or “stop overreacting,” so they learned to hide emotions instead of listening to them.<br />
This chapter invites the reader to do something different: to see every emotion as a secret inner language that is trying to protect, guide, and energize their life.<br />
Imagine emotions like colors in a rainbow.<br />
If life only allowed one color—only happiness—everything would look flat and fake. <br />
In the same way, without the full range of feelings, a person’s life becomes narrow and lifeless, even if they smile on the outside.<br />
Emotions are not enemies, they are messengers<br />
Modern emotional psychology explains that emotions are signals created by the brain to help a person respond to what is happening around and inside them.<br />
For example, fear warns about danger, anger signals that a boundary was crossed, sadness shows that something valuable was lost, and joy tells the person “this is good, grow more of this.”<br />
When someone treats emotions like enemies—trying to crush or ignore them—those messages get buried but not erased.<br />
Buried feelings often return as stress, overthinking, body tension, or sudden angry outbursts, which makes life feel heavier and more confusing.<br />
Instead, when a person pauses and asks, “What is this emotion trying to tell me?”, they move from being controlled by feelings to being guided by them.<br />
This simple question begins to transform fear into wisdom, anger into clarity, sadness into healing, and joy into motivation.<br />
The hidden cost of running away from feelings<br />
Many adults and teens use distraction to escape their feelings—scrolling, binge watching, overeating, or constant busyness.<br />
On the surface it looks like relaxation, but inside, unprocessed emotions quietly build pressure like steam in a closed cooker.<br />
Research shows that constantly suppressing emotions is linked with more anxiety, depression, and poorer mental health.<br />
The mind spends energy trying not to feel, which leaves less energy for creativity, focus, and joy.<br />
Over time, people who avoid feelings may say “I feel empty” or “I don’t know who I am,” because they have been disconnected from their own emotional truth.<br />
They may react strongly to small triggers, because old, unhealed emotions keep returning to the surface looking for attention.<br />
Acceptance: The door to emotional freedom<br />
The good news is that emotional freedom does not start with changing feelings; it starts with accepting them.<br />
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•
Amrita Singh
मैं एक साधारण-सी लड़की हूँ,
सजने-संवरने का हुनर नहीं मेरा।
चेहरे पे वो चाँद-सा नूर नहीं,
साँवलेपन की नर्मी है—मैं अपनी राह में स्थिर हूँ।
भीड़ की रौनक मुझे भाती नहीं,
ख़ामोशी में मेरी दोस्ती बसती है।
मेरी आँखों में वो चमक नहीं,
जो हर ख़्वाब में तुम तलाशते हो।
मेरी नज़र बस सुकून की आदत में डूबी है,
तो फिर क्यों वक़्त ज़ाया करते हो मेरे पीछे?
जाओ, ढूँढ लो वो चाँद-सा चेहरा कहीं,
इस दुनिया में हुस्न की कोई कमी नहीं।
तुम्हें मिल जाएगी वो नूर वाली,
आँखों में जादू लिए कोई और हसीन।
और मैं रहूँगी अपनी सादगी की छाँव में,
ख़ामोशी की रौशनी में, अपने रंगीन जीवन में।
writer by अमृता सिंह ✍🏽
Neha kariyaal
जिंदगी का मतलब हर बार जीतना नहीं होता,
कभी कभी ज़िंदा रहना होता है और
सांस लेना भी जीतना ही होता है।।
Vedanta Life Agyat Agyani
The human being is born outward,
and searches outward for itself.
Searching, wandering, circling the world—
it finally returns
to the subtle seed
from which the journey began.
Leaving home
to gain something,
to become something,
to prove something—
yet nothing remains in the hands.
When exhaustion silences the search,
it becomes clear:
the journey itself was home.
The world is searching
for a permanent happiness,
a fixed destination
where joy, safety, comfort
might last forever.
But nothing stays.
Because permanence does not exist outside.
On the journey
no god is found,
no deity appears,
no final destination waits.
First arises the illusion:
“I am the doer,
I am becoming greater.”
Then comes the second dream:
heaven, liberation, God.
And finally
these too fall away.
Then it is seen clearly—
Life itself is truth.
Life itself is God.
Life itself is liberation.
No ruler sits above,
no separate witness watches.
Living itself is the path.
Living itself is the answer.
When life is truly lived,
the future dissolves,
time grows thin,
age loses meaning.
Pain and sorrow
belong to the language of tomorrow.
For one who lives,
everything is already here.
To acquire is foolishness.
To achieve is foolishness.
To rest inside desire
is the deepest foolishness.
The present alone is real.
This alone is living.
Where life flows,
existence supports it—
because this is a matter of life itself,
not of any god.
Only one condition exists:
to live.
In living,
home is found,
wandering ends.
Then there is no age,
no time—
only childhood remains.
Eternal childhood
░V░e░d░a░n░t░a░ ░2░.░0░ ░L░i░f░e░
░=░ ░F░r░e░e░ ░f░r░o░m░ ░w░o░r░d░s░,░
░l░i░b░e░r░a░t░e░d░ ░f░r░o░m░ ░c░o░n░c░e░p░t░s░,░
░a░n░d░ ░i░n░ ░d░i░r░e░c░t░ ░c░o░n░t░a░c░t░ ░w░i░t░h░ ░l░i░f░e░.░
Kamini Shah
કેસરી ધવલ હરા રંગથી
લખાયેલી તિરંગાની કહાની
શહાદતને વરેલા જવાર્મંદોની
ઓળખ રહી સદા હિંદુસ્તાની…
-કામિની
Anup Gajare
पल्खा पल्खा
____________
पल्खा पल्खा
ओ मेरी पल्खा
कैसे कैसे
हूँ दूर मैं कैसे…
छोड़ूँ छोड़ूँ
कोई बातें
कोई मुलाक़ातें
पल्खा पल्खा
ओ मेरी पल्खा
तेरे तेरे
बिन तेरे
अधूरे अधूरे
हैं ख़्वाब अधूरे
न कोई
न कोई
भटके से किनारे
लहरें लहरें
अपनी उम्र भागे
समुद्र से पानी
पानी से पानी
नीला पल्खा
नीला पल्खा
छूते रास्ते
मुड़ी मंज़िलें
गुज़रे गुज़रे
ज़माने ज़माने
पल्खा पल्खा
कोई जादू
कोई खिलौना
टूटा सहारा
छूटा किनारा
अंधा दीवाना
खाली मकान
खुला मकान
टूटा मकान
घर था कभी ये
ये था कभी घर
पल्खा पल्खा
सो जा मेरी
नींद, सो जा
अब नहीं दुनिया
भटकी राहें
दूर निगाहें
कोई नहीं
वहाँ
वहाँ नहीं कोई
शैतान, मुसीबत
बुरी बला कोई
छूती नहीं तुझे
छूती नहीं मुझे
टूटी सड़क को
फिर कोई कैसे तोड़े
पल्खा पल्खा
सो मत जाना
कोई नहीं यहाँ
कोई नहीं यहाँ
तेरे सिवाय
तेरे सिवाय
मेरे सिवाय, मेरे सिवाय
कोई है क्या
नहीं है क्या
जुगनू बुझ गए
मकान टूटे
खाली सड़कें
भटके मुसाफ़िर
कोई सहारा
मेरा तेरा
तेरा मेरा
बुझते दिए को
आख़िरी दावत
किसने छोड़ी
मेरी उम्र
है क्या, क्या है
क्यों से आगे
अनंत के आगे
पीछे कोई
पीछे कोई
नहीं, नहीं
______________________________________________
Shraddha Panchal
ज़िंदगी की किताब का ,
“ एक पन्ना”
यूही ऐसा ही रह गया ,
नहीं पढ़ने की हिम्मत हुई,
और
नहीं उसे पलटने की❤️
Sohagi Baski
শেষ পৃষ্ঠার ডায়েরি নোট
আজ মনটা ভারী, অথচ কারণটা ঠিক ধরতে পারছি না। সবাইকে খুশি রাখতে রাখতে কোথাও গিয়ে নিজেকেই হারিয়ে ফেলেছি। কথা বলি, হাসি, দায়িত্ব নিই—তবু শেষে এসে দেখি আমি একা। মনে হয়, আমি কি তবে যথেষ্ট নই? নাকি আমার ভালোবাসার ভাষাটা কেউ বোঝে না? বারবার হৃদয় ভাঙে, প্রশ্নগুলো জমতে থাকে, উত্তর আর আসে না। আজ কোনো ব্যাখ্যা চাই না, কোনো উপদেশও না—শুধু চাই কেউ আমাকে নিঃশব্দে শক্ত করে জড়িয়ে ধরুক, যেন এই ক্লান্ত মনটা একটু কাঁদতে পারে। এতটুকু চাওয়া কি সত্যিই খুব বেশি?
এরপর আর কিছু চাওয়ার সাহস থাকে না। প্রশ্নগুলোও ধীরে ধীরে চুপ করে যায়, শুধু একরাশ নীরবতা বুকে জমে থাকে। বুঝতে পারি, সব কষ্টের নাম বলা যায় না, সব অভাবের ভাষা হয় না। কাউকে দোষ দিতেও ইচ্ছে করে না, নিজেকেও না—তবু এক ধরনের ক্লান্তি চারপাশ ঘিরে ধরে। যেন অনুভবগুলো বোঝা হয়ে গেছে, বহন করতে করতে হাঁপিয়ে উঠেছি। আজ আর অভিযোগ নেই, প্রত্যাশাও নেই—শুধু এই স্বীকারোক্তি যে আমি ভেঙে পড়েছি, নিঃশব্দে, গভীরভাবে। যদি কেউ না-ও আসে, তবু এই সত্যটা লিখে রাখি—আমি কষ্ট পেয়েছিলাম, অনেকটা, এবং একাই।
সব কথা আর লেখা হয় না। কিছু অনুভূতি শেষ পর্যন্ত বয়ে নিয়ে চলতে হয়, কাউকে না জানিয়ে। আজ এই শেষ পাতায় এসে বুঝি, আমি অনেক আগেই ক্লান্ত হয়ে পড়েছিলাম—হাসতে হাসতে, মানিয়ে নিতে নিতে। কেউ খেয়াল করেনি, আমিও আর জানানোর চেষ্টা করিনি। প্রত্যাশাগুলো একদিন একদিন করে চুপ করে গেছে, প্রশ্নগুলো উত্তরহীন থেকে গেছে। দোষ দেওয়ার মতো কাউকে আর খুঁজে পাই না, নিজেকেও না। শুধু এই স্বীকারোক্তিটুকু রেখে যাই—আমি ভেঙে পড়েছিলাম, গভীরভাবে, নিঃশব্দে। যদি কেউ কোনোদিন এই পাতাটা পড়ে, জানুক—এই নীরবতার ভেতরেও একসময় আমি খুব কষ্ট পেয়েছিলাম।
Sohagi Baski
"শেষ পৃষ্ঠার ডায়েরি নোট"
******
আজ মনটা ভারী, অথচ কারণটা ঠিক ধরতে পারছি না। সবাইকে খুশি রাখতে রাখতে কোথাও গিয়ে নিজেকেই হারিয়ে ফেলেছি। কথা বলি, হাসি, দায়িত্ব নিই—তবু শেষে এসে দেখি আমি একা। মনে হয়, আমি কি তবে যথেষ্ট নই? নাকি আমার ভালোবাসার ভাষাটা কেউ বোঝে না? বারবার হৃদয় ভাঙে, প্রশ্নগুলো জমতে থাকে, উত্তর আর আসে না। আজ কোনো ব্যাখ্যা চাই না, কোনো উপদেশও না—শুধু চাই কেউ আমাকে নিঃশব্দে শক্ত করে জড়িয়ে ধরুক, যেন এই ক্লান্ত মনটা একটু কাঁদতে পারে। এতটুকু চাওয়া কি সত্যিই খুব বেশি?
এরপর আর কিছু চাওয়ার সাহস থাকে না। প্রশ্নগুলোও ধীরে ধীরে চুপ করে যায়, শুধু একরাশ নীরবতা বুকে জমে থাকে। বুঝতে পারি, সব কষ্টের নাম বলা যায় না, সব অভাবের ভাষা হয় না। কাউকে দোষ দিতেও ইচ্ছে করে না, নিজেকেও না—তবু এক ধরনের ক্লান্তি চারপাশ ঘিরে ধরে। যেন অনুভবগুলো বোঝা হয়ে গেছে, বহন করতে করতে হাঁপিয়ে উঠেছি। আজ আর অভিযোগ নেই, প্রত্যাশাও নেই—শুধু এই স্বীকারোক্তি যে আমি ভেঙে পড়েছি, নিঃশব্দে, গভীরভাবে। যদি কেউ না-ও আসে, তবু এই সত্যটা লিখে রাখি—আমি কষ্ট পেয়েছিলাম, অনেকটা, এবং একাই।
সব কথা আর লেখা হয় না। কিছু অনুভূতি শেষ পর্যন্ত বয়ে নিয়ে চলতে হয়, কাউকে না জানিয়ে। আজ এই শেষ পাতায় এসে বুঝি, আমি অনেক আগেই ক্লান্ত হয়ে পড়েছিলাম—হাসতে হাসতে, মানিয়ে নিতে নিতে। কেউ খেয়াল করেনি, আমিও আর জানানোর চেষ্টা করিনি। প্রত্যাশাগুলো একদিন একদিন করে চুপ করে গেছে, প্রশ্নগুলো উত্তরহীন থেকে গেছে। দোষ দেওয়ার মতো কাউকে আর খুঁজে পাই না, নিজেকেও না। শুধু এই স্বীকারোক্তিটুকু রেখে যাই—আমি ভেঙে পড়েছিলাম, গভীরভাবে, নিঃশব্দে। যদি কেউ কোনোদিন এই পাতাটা পড়ে, জানুক—এই নীরবতার ভেতরেও একসময় আমি খুব কষ্ট পেয়েছিলাম।
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
{{ अनकहे जज़्बातों का सफ़र }}
अजनबी हो तुम, मगर दिल को न
जाने क्यों अपने लगते हो,
मुसाफ़िर हूँ मैं, और तुम थकी हुई
राहों का कोई सपना लगते हो,
तुमने जब जी कहा तो एक आदर
की दीवार खड़ी कर दी,
मगर मैंने चाहा था, कि वो सादगी
हो, जो रूह से जुड़ी रही,
मैं मुसाफ़िर, जिसकी कोई मंज़िल
नहीं, बस चलते जाना काम है,
पर तुमने हक़ से नाम जो दिया
अब वही मेरी नई पहचान है,
तुम्हारी उस ज़िद में, एक मासूम
सा अधिकार नज़र आता है,
जैसे कोई सूखा पत्ता, अचानक
सावन की बौछार पा जाता है,
एक नाम (P) भी आया जो लबों
तक आकर ठहर गया,
पुराना ज़ख्म था कोई जो फिर से
आँखों में उभर गया,
मैं तुम्हें पुकार न सकूँगा, उस
नाम से कुछ यादें पुरानी हैं,
मगर तुम्हारे लिए मेरे पास, एक
नई और पाक कहानी है,
तुम ज़िद्दी ही सही पर तुम्हारी ये
ज़िद दिल को छू जाती है,
मेरी वीरान सी मुसाफ़िरी में एक
मीठी सी धुन जगाती है,
सुनो हँसती रहना तुम कि तुम्हारी
हँसी ही मेरा सुकून-ए-क़ल्ब है,
मैं इक मुसाफ़िर ही भला, पर
तुम्हारा ये साथ ही मेरा अब सब है,
कोई रिश्ता हो न हो पर ये रूह का
गहरा साया है,
मैंने अपनी हर भटकन में, बस तुम
जैसा ही कोई पाया है…🤝😇
╭─❀🥺⊰╯
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#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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यूं ही बस एक ख्याल ऐसा भी..✍🏼😊
Bhavna Bhatt
નાનપણના તોફાન મસ્તી
Priya
wait for right time.....
Anil singh
"शहर का सबसे बड़ा बिजनेस टाइकून, आर्यन राठौर! 🏢 आख़िर क्या छिपा है उसके इस सख्त चेहरे के पीछे? 🎭
एक तरफ बोर्ड मीटिंग का तनाव और दूसरी तरफ घर में अपनों के तंज। जब सब सान्वी को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे, तब आर्यन का उसके पक्ष में खड़ा होना... क्या ये महज एक दिखावा है या उसकी नफरत की बर्फ पिघल रही है? ❄️➡️🔥
अपनी राय कमेंट्स में बताएं! 👇💬"
Anil singh
"रिश्ता भले ही एक 'सौदा' था, पर सान्वी के संस्कार बिकाऊ नहीं थे। 👰 उस आलीशान किचन की चमक-धमक में जहाँ शीतल चाची के शब्दों में ज़हर था, वहीं सान्वी के हाथों में उसकी माँ का सिखाया प्यार था। ❤️
स्वाद अमीरी से नहीं, साफ नीयत से आता है। आज सान्वी ने अपनी पहली परीक्षा तो पार कर ली, पर क्या वो इस पत्थर के महल में अपना दिल बचा पाएगी? 🏰🥀
पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का नया अध्याय! 📖✨"
Anil singh
"स्वाद अमीरी या गरीबी से नहीं, बल्कि नीयत और प्यार से आता है। आज सान्वी ने साबित कर दिया कि महल चाहे कितना भी बड़ा हो, दिल जीतने के लिए सादगी ही काफी है।"
पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का अगला भाग,
सिर्फ मातृभारती पर!
Ashish jain
नई कहानी नया नया उपन्यास
चेकपोस्ट: चाणक्य
एक बूढ़े कुत्ते की जबरदस्ती को कहानी
फनी और मस्त
प्रस्तावना (Introduction)
"संसार में कई प्रकार के कर (Tax) होते हैं—आयकर, संपत्ति कर, और जीएसटी। लेकिन २० फुट की उस धूल भरी सड़क पर एक ऐसा 'अघोषित कर' चलता है जिसे दुनिया 'आशीष-चाणक्य बिस्किट लेवी' के नाम से जानती है।
यह कहानी एक ऐसे असाधारण जीव की है, जिसने बुढ़ापे को मजबूरी नहीं, बल्कि 'मजबूत वसूली' का हथियार बनाया है। 'चेकपोस्ट चाणक्य' कोई साधारण श्वान नहीं है; वह कूटनीति का वह शिखर है जहाँ पहुँचकर बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बिस्किट का पैकेट खोल देते हैं। इस प्रस्तावना का उद्देश्य पाठक को उस मानसिक दबाव से अवगत कराना है, जिससे आशीष जैन रोज़ गुज़रते हैं। यह दास्तान है उस मूक समझौते की, जहाँ एक तरफ आशीष की अटूट उदारता है और दूसरी तरफ चाणक्य की 'ऑस्कर-विजेता' नौटंकी। आइए, प्रवेश करते हैं बिस्किट और एक्टिवा के उस अनूठे संसार में, जहाँ नियम सिर्फ एक ही कुत्ता बनाता है।"
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
खुली ज़ुल्फें, माथे पर बिंदी, और
उस पर ये कातिल अदा,
उफ़ ये हाथ में चाय का प्याला
मतलब जान लेने का नया तरीका?
नज़रें मिलीं, तो धड़कन रुकी, जो
मुस्कुराए तो कयामत होगी,
इतना सितम न ढाओ मुझ पर
वरना शहर में मेरी शहादत होगी.🙈
╭─❀🥺⊰╯
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#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
Paagla
https://youtube.com/shorts/zoKrnzN5Q9w?si=418_Qk_qBitsDE15
M K
MB मतलब मातृभारती,
ये ऐप लिखने से ज्यादा,
फेकू ऐप हो गया है ,
लोग कुछ भी अपने बारे में झूठ बोलते हैं,
खुद को ips, doctor, chat gpt का use कर
खुद को writer, storytelling कुछ भी ।
क्या मजाक हो रहा है यहां भाई ??😁
Mb means फेकू ऐप कुछ भी लिखो बोलो सब सही है 😁😁
Raa
Aap sab ko republic day ki subh kamna
M K
इंसान कोई भी हो सामने,
उससे मोहब्बत चाहे कितना भी गहराई से क्यों न हो?
एक बार भरोसा टूट गया तो,
चाह कर भी यकीन नहीं होता।।
जैसे पेड़ से पता एक बार टूट जाए तो,
जुड़ नहीं सकता है,
वैसे ही मेरा भरोसा तुम पर था कभी....!!!
- M K
M K
झूठ के बुनियाद पर मुझसे रिश्ता जोड़ने चला था,
आखिरकार झूठ का लिबाज़ कब तक सच छुपा सकता है,,,
एक न एक दिन हटना ही था ।।।
- M K
hsc
Happy 77th Republic Day to all respected indian
Archana Singh
कहां वो सच्चा संविधान हैं ...!
जिसके लिए ये जग देता था..!
विश्व गुरु का मान हैं ...!
कहां वो भारत में श्रेष्ठ कर्म की विधि-विधान ..!
यहां तो बस लिंग-भेद पर होता सदा पक्षपात हैं !
मुखौटा लगाए घूम रहे हैं ...
यहां स्वत: ही कंस-दुशासन का राज हैं !
सम्मान नारियों का यह झूठी अफ़वाह हैं !
बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ ... !
यह एक छल और आडंबर हैं !
हक़ की बात जहां आए ,
पुरुष प्रधान यह स्वर्णित हो जाएं !
अब भी कहते हो , गणतंत्र दिवस मनाएंगे ...!
और उनकी नीतियों की अवहेलना हर बार कर जाएंगे !
आओ नया संविधान बनाएं ...
सदाचार और सद्विचार का आगाज़ फैलाएं ...!
जहां हर नारी भारत माता हो ....
और सम्मान का अधिकारी हो ...!
तब होगा सच्चा गणतंत्र दिवस ...
तब सच्चा गणतंत्र दिवस ....!!
स्वरचित : अर्चना सिंह ✍🏻
धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐
Balkrishna patel
Happy Republic day
Gautam Patel
ખોડીયાર જયંતિ
Gautam Patel
ખોડીયાર જયંતિ
S K I N G
जब मन अकेला लड़ रहा हो तो सब से दूर जाना ही बेहतर है
S K I N G
जब मन अकेला लड़ रहा हो तो सब से दूर जाना ही बेहतर है
Narendra Parmar
ग़लती तेरी थी या फिर मेरी ???
ऐ तो मुझे नहीं पता !
किंतु ग़लती तो ईश्वर की थी
जो तुझे मेरी तक़दीर में नहीं लिखा ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
S K I N G
Mohtarma Tuti Bhi, Or Bhikhri Bhi, Magar Aesa Nikhri Ki Log Heran Reh Gaye..!!
मम्मी पूछ रही थी
कोई पसंद तो नहीं है ना
पर में बोल नहीं सकता हूं
क्योंकि मेरी पसंद यहां की एक भी नहीं है
Saroj Prajapati
नजरों से उतरा जो एक बार
कहां फिर दिल में जगह पाता है
शाख से टूटा जो पत्ता एक बार
क्या फिर डाल से जुड़ पाता है!!
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
jighnasa solanki
My Mom's Birthday
🥳🥳🍫🍫🎂🎂
આઈશ્રી ખોડિયાર મા ના જન્મદિન નિમિત્તે
માને ભવ્ય શણગાર 🙏🙏
તમારો હાથ સદા આમ જ અમારા માથે રાખજો મા🙏🙏
તમને જન્મદિવસની ખૂબ ખૂબ શુભકામનાઓ 💐💐🥳🥳
I love you Mom 🥰🥰🥰🥰🥰🥰
archana
मैंने भी कुछ लोगों को अपना समझा था…
जो साथ हँसते थे,
साथ खाते थे,
और पीठ पीछे साजिश रचते थे।
पहले मैं टूट जाती थी…
अब मुस्कुरा कर कलम उठाती हूँ ✍️
क्योंकि अब ऐसे लोग
मेरी कमज़ोरी नहीं,
मेरी कहानियों के सबसे दमदार किरदार हैं। 😌🔥
- archana
Alfha production house
the true liberty
Alfha production house
salute our flag
Parmar Mayur
जनता प्रश्न पुछे और शासक प्रत्युत्तर सही से देते है,
कानून अमीरों को भी ना छोड़े गरीब को न्याय देता हो।
बच्चे रास्ते पर तिरंगे बेचें नहीं बस लहराते जातें हो,
तब शासक, प्रजा सही अर्थ में प्रजासत्ताक पर्व मनाते है।
- Parmar Mayur
Parmar Mayur
जनता प्रश्न पुछे और शासक प्रत्युत्तर सही से देता है,
कानून अमीरों को भी ना छोड़े गरीब को न्याय देता है।
बच्चे रास्ते पर तिरंगे बेचें नहीं बस लहराते जातें हैं,
तब शासन सही अर्थ में प्रजासत्ताक पर्व मनाता है।
- Parmar Mayur
nidhi mishra
ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा।
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गँवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए।
तिरंगा लहरा रहा है शान से, हम सब झुकें इसके सम्मान में,
यही है हमारी पहचान, बसा है जो हर हिंदुस्तानी की जान में।
गणतंत्र का ये पर्व हमें, एकता का पाठ पढ़ाता है,
भारत माँ के वीरों का, बलिदान याद दिलाता है।
ना जियो धर्म के नाम पर, ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियो वतन के नाम पर।
देश की मिट्टी की खुशबू, रगों में लहू बनकर बहती है,
ये गणतंत्र की गूँज, हर दिल में 'जय हिंद' कहती है।
लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज़ आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा।
मैं रहूँ या न रहूँ, पर ये वादा है मेरा तुझसे,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, मौत से शर्त लगाये बैठे हैं।
सलाम है उन वीरों को, जिनकी वजह से हम आज़ाद हैं,
गणतंत्र दिवस की शान में, हम सर झुकाये बैठे हैं।
Shailesh Joshi
આપણે ક્યાં પહોંચીશું ?
એ આપણે કયા રસ્તે ચાલી રહ્યા છીએ ?
એના પર નિર્ભર કરે છે, પરંતુ અહીંયા
યાદ રાખવા જેવી વાત એ છે કે,
આજ સુધી સાચા રસ્તે ખોટી જગ્યાએ, અને ખોટા રસ્તે સાચી જગ્યાએ,
કોઈ પહોંચ્યું પણ નથી, અને
કોઈ પહોંચશે પણ નહીં,
એ માનવું રહ્યું.
- Shailesh Joshi
महेश रौतेला
गणतंत्र :
हम गणतंत्र में घुलमिल जायें
गण का मन हो,गण की भाषा
गण का जीवन स्वस्थ सफल हो।
गण की गंगा, गण का गगन
धरा गण की पावन धारा,
सीमाओं में खुली पवन हो
घर-घर अपना स्वतंत्र साथ हो।
चलना सबका सहज सरल हो
गण के अन्दर सत्य सशक्त हो
गण का मन हो,गण की भाषा।
आदि शक्ति से जुड़ा हुआ हो
तन की आभा सर्वत्र विकीर्ण हो,
मन से विजयी, मन से व्यापक
कई सूर्य की चमक लिया हो।
जन का वलिदान
जन का अर्पण,
जन के नियम,जन का राष्ट्र
गणतंत्र हमारा जीवन हो।
****
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।
*** महेश रौतेला
JIGNESH BHATT
મનને શાંત કરતું વાક્ય-
જે માતા–પિતા ડર સાથે નહીં, સમજ સાથે નિર્ણય કરે છે, તેમના સંતાનોનું ભવિષ્ય બગડતું નથી.
Armin Dutia Motashaw
कितनी भी कठिनाइयां आए- जाए ;
तिरंगा हमारा सदा शान से लहराए
जय हिंद
अनार
Jeetendra
Happy Republic Day...🙏💐💐🌺🌺💐
Saliil Upadhyay
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।
जय हिन्द🫡
Dada Bhagwan
Happy Republic Day!
Let's make our nation proud with integrity and togetherness!
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Jyoti Gupta
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Imaran
🌹🌹🌻💔 💔🌻🌹🌹
जब भी उनकी गली से गुज़रते हैं
मेरी आँखें एक दस्तक दे देती हैं
दुःख ये नहीं वो दरवाजा बंद कर देते हैं
ख़ुशी ये है कि वो मुझे पहचान लेते हैं
🤎💛imran 🤎💛
Nisha ankahi
नुक़सान सिर्फ़ चीज़ों का नहीं होता,
कुछ हादसे आत्मा से भी कुछ छीन ले जाते हैं।
- Nisha ankahi
shivani singh
किसे मिल गया यह गणतंत्र?
और किसके दरवाज़े पर आज भी 'नाम' का पहरा है?
2026 की दहलीज़ पर खड़ा होकर भी,
अगर कोई आज भी 'हाशिए' की बेड़ियों में कैद है,
तो समानता के ये सारे उत्सव... महज़ एक रस्म हैं, एक अधूरा सपना हैं।
उन पुरखों के संघर्षों को सिर्फ मालाओं में न बांधो,
उनके उन सवालों को ज़िंदा करो, जो आज भी जवाब माँगते हैं।
क्योंकि जब तक न्याय की चौखट सबके लिए एक समान नहीं,
तब तक यह गणतंत्र प्यासा है... और हमारा चुप रहना, इस प्यास को बढ़ाने जैसा है।"
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
सत्ता समाज और सुरक्षा का शमशान
मुर्दा समाज के जीवित लोगों,
आज मैं यहाँ किसी का पक्ष लेने नहीं
बल्कि हम सबकी सामूहिक अंतरात्मा
का पोस्टमार्टम करने आया हूँ,
गोरखपुर की इस घटना ने यह साबित
कर दिया है कि,
हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ
बेटी बचाओ केवल एक नारा है,
और बेटी का शोषण, एक कड़वी
हकीकत,
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, ज़रा
सोचिए, उस 13 साल की बच्ची ने
जब उन होटल के कमरों में मदद के
लिए चीख मारी होगी,
तो उसे क्या मिला.? कानून की
सुरक्षा.? नहीं उसे मिला एक होटल
मालिक और एक मैनेजर, जिन्होंने
मानवता को पैरों तले कुचल दिया,
जब समाज के व्यापारिक संस्थान
रेप की मंडियां बन जाएं, तो समझ
लीजिये कि हमारा पतन शुरू हो
चुका है,
देशभक्ति का ढोंग बंद करो हम
बॉर्डर पर दुश्मनों को कोसते हैं,
लेकिन हमारे घर के अंदर छिपे इन
आस्तीन के सांपों का क्या.?
जो लोग एक बीमार बच्ची को दवा
खिला- कर उसका बलात्कार कर
सकते हैं, वे किसी आतंकवादी से
कम नहीं हैं,
क्या ऐसे लोगों को पालने वाला
समाज, खुद को देशभक्त कह
सकता है.?
असली देशभक्ति देश की मिट्टी से
नहीं देश के नागरिक की सुरक्षा से
होती है,
सत्ता और व्यवस्था की नपुंसकता
हम गर्व करते हैं कि हमारी सरकारें
कठोर हैं, लेकिन क्या यह कठोरता
केवल विज्ञापनों में है.?
अगर एक बच्ची को 15 दिनों तक
नर्क में रखा जाता है और पुलिस
या प्रशासन को भनक तक नहीं
लगती, तो यह व्यवस्था की सबसे
बड़ी हार है,
सजा ऐसी होनी चाहिए कि उसे
सुनकर ही आने वाली नस्लों की
रूह कांप जाए, न्याय में देरी, न्याय
की हत्या है,
क्या हम वाकई आजाद हैं,? आज
तिरंगा फहराते वक्त क्या हमें शर्म
नहीं आएगी.?
सोचने वाली बात है, हम चाँद पर
पहुँच गए लेकिन अपनी बेटियों को
सुरक्षित घर से बाहर भेजने की
हिम्मत आज भी नहीं जुटा पाते,
ये कैसी आजादी है जहाँ एक बच्ची
का बचपन बाजारों में नीलाम हो
रहा है.?
मेरा सीधा वार है, उन नेताओं पर
जो चुनाव के वक़्त बेटियों की बात
करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं पर
चुप्पी साध लेते हैं,
उस कानून पर जो कागजी दांव-पेच
में अपराधियों को भागने का मौका
देता है,
और उस समाज पर जो अपनी
आंखों के सामने होते अन्याय को
अपना मामला नहीं है कहकर टाल
देता है,
अगर आज इन दरिंदों आदर्श पांडेय
अभय सिंह, और अंकित को बीच
चौराहे पर ऐसी सजा नहीं मिली जो
मिसाल बने,
तो याद रखिएगा अगली बार शिकार
किसी और की बेटी होगी, और चुप
रहने की बारी आपकी...🔥
मेरा भारत महान 🇮🇳
वंदे मातरम् 🇮🇳
#Happy_republic_day
╭─❀🥺⊰╯
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
मेरा देश महान वंदे मातरम्
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳
#Happy_republic_day.🔥
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
तिरंगा
आन बान शान से लहराओ तिरंगा प्यारा l
सब से अद्भुत है हमारा तिरंगा न्यारा ll
बुरी नजर न हम पर डालना कभी भी l
हम हिन्दुस्तानी, हिन्दुस्तान है हमारा ll
देश पर मर मिटने का ज़ज्बा न हो ओ l
फर्क़ न करो तो क्या काम है तुम्हारा ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सपनें
सपनों की रजाई ओढ़े सो जाते हैं l
सुनहरे भावी को पाने खो जाते हैं ll
आज ऊँची उड़ान की ख्वाईश में l
थोड़ी ही देर में दिवाने हो जाते हैं ll
मौज ए शराब उठता दिल में कि l
पीकर महफिल में समो जाते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
Nehruji is phenomenon. but congress???
kattupaya s
Some people may hate Gandhi's principles but the reality is different.
kattupaya s
Some gandhiji quotes
kattupaya s
Good morning.. wish you all happy republic Day 2026
syed amina
friendship is a quiet thread.
woven strong,though lightly spread,
not always seen,yet always there,holding hearts with gentle care.
in laughter shared and tears we hide,
a friend stands closely by our side,
through stormy days and golden light,
they make the heavy feel so light.
no crown of gold,no riches grand,
can match th worth of a true hand,
that lifts you up when you fall low
And whispers,"I won't let you go."
friendship grows in simple ways,
in late night talks and careless days,
In dreams we chase,in hopes we send,
In knowing you have one true friend.
so here's to bond that never bend,
to hearts that break but still will mend,
for life feels kinder,bright,anf free,
when friendship walks along with me❤️🔥
S Sinha
Happy Republic Day <br />
गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं <br />
Unity in diversity is our strength
Bitu
सूरज की किरण से चमकती हैं
ओस की बूंद ऐसे जैसे चमकते हो मोती,
मोतियों की तरह चमकती रहे
मेरे संविधान की पोथी।
संविधान पर हैं भारतीयों को गर्व,
हमेशा हर्षोल्लास से मनाया जाता है ये पर्व ।
शांति, उन्नति, अमन की आओ मिलकर करे कामना,
आप सब को गणतंत्र दिवस की शुभकामना।
Dr Yogendra Kumar Pandey
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
🙏🇮🇳
softrebel
शीर्षक: स्वतंत्र भारत
हम स्वतंत्र भारत में
नेताओं द्वारा पारित किए गए
गणतंत्र के गुलाम हैं
जहाँ आज़ादी एक तमाशा है
और गुलामी एक सुव्यवस्था।
बधाई हो स्वतंत्र भारत के नागरिकों
आपकी चुप्पी से ही
चलती है भारत की सत्ता।
Softrebel
#UGC
वात्सल्य
પાટણ ફક્ત શહેર નથી.
...............................
વિક્રમ સંવંત આઠસો-બે માં વસેલું વ્હાલુ રજવાડું મારું પાટણ છે.
વનરાજ ચાવડા સાથે અણહિલ ભરવાડ દ્વારા સ્થાપિત મારું પાટણ છે.
નાના-મોટા આડતાલીસ જેટલા વાઘેલા-સોલંકી રાજકર્તાનુ મારું પાટણ છે.
હા ના હા કરતાં તેરસો વરસ જૂનું રૂડું રૂપાળું મારું મારું પાટણ છે.
આ માટીમાં કુમારપાળ અને સધરા જેસંગ થકી વખણાણું મારું પાટણ છે.
બાર દરવાજા ને બાર બારી,મહાકાળી, સિંધવાઈ,મેલડીનુ મારું પાટણ છે.
સરસ્વતી નદી કાંઠે સહસ્ત્રલિંગ,સિદ્ધિ, પીતામ્બરનુ નગર મારું પાટણ છે.
ચારેય કોર્ય દુર્ગ,રાણી વાવ,ત્રિકમ બારોટ,સિંધવાઈ વાવવાળુ મારું પાટણ છે.
શિવમંદિર સાથે સ્થાપત્યની બેજોડ કલા ધરાવતું મારું પાટણ છે.
મીનળદેવી,સતી જસમાં,શક્તિ,નાયકાદેવી જેવી વિરાંગનાનુ મારું પાટણ છે.
સમતળ ભૂમિ સાથે સરસ્વતીનું વહેતું મીઠું વહેણ મારું પાટણ છે.
હેમચંદ્રચાર્ય સાથે કિલાંચંદ અને ઓલિયા સદારામની ઓળખ મારું પાટણ છે.
શિક્ષણધામ,વણજ વ્યવહાર,રેલવે સુવિધા સજ્જ બસડેપો મારું પાટણ છે.
ચતુર્દિશા રાજ્ય ધોરી માર્ગ સાથે ઉત્તર ગુજરાત યુનિવર્સિટી મારું પાટણ છે.
પુસ્તકાલય અને દવાખાનાનુ નગર,મીઠાં દેવડાં થકી વખણાતું મારું પાટણ છે.
સ્વચ્છ રસ્તા અને સરકારી ખાનગી કચેરી સાથે ધર્મશાળા ધરાવતું મારું પાટણ છે.
યુદ્ધ થકી વિધર્મીઓની યુક્તિ નાકામ કરતી ધન્ય ધરા મારું પાટણ છે.
વગડે ગાજર,જામફળ કે દિવેલા,ઘઉં,તમાકુની નિકાસ કરતું મારૂ પાટણ છે.
કવિ લેખકોની કલમે સદાય અજાણ ભૂમિ રહેલું મારું પાટણ છે.
"વાત્સલ્ય" ની વાણી જ્યાં ટૂંકી,મોટાં માથાના માનવીની ભૂમિ મારું પાટણ છે.
. - વાત્સલ્ય
( નીચેનો પીક હાલના શહેર વચ્ચેના ત્રણ દરવાજાનો પીક છે )
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
जिस सुत ने मां को दिया, सोच-समझकर त्रास। नहीं बढ़ेगा पुत्र वह, पितु को किया निरास।।
दोहा--३९८
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'
Nadwika
विमुक्ति........
"ये जो पुष्प जो तुम्हे इतने प्रिय है, इन्हें तोड़ना क्यु है
उन भूली बिसरी यादों को फिर से सोचना क्यु हैं
खिल जाने दो वो पुष्प जो तुम्हे बहार दे सकता हैं और
भूल जाओ तुम उन यादों को जो तुम्हारे कदम
उत्कर्ष की ओर बढ़ने से रोक सकता हैं....."
Prithvi Nokwal
BORN TO LEAD , NOT TO FOLLOW
Soni shakya
🌹🇮🇳जय हिन्द 🇮🇳🌹
Soni shakya
आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
🌹🇮🇳जय हिन्द 🇮🇳🌹
Abhi Mahanand
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Ch 1 - रक्तमय रात
* EPISODE एक — रक्तमय रात
* एक. अरण्य की गहराई*
आर्यादेश के दक्षिणी छोर पर फैला* अरण्यपथ* एक ऐसा जंगल था जहाँ सूरज की रोशनी भी पेडों से लडते- झगडते नीचे आती थी.
रात का समय.
हवा में ठंडक, पर किसी अनजानी गर्म राख की गंध भी.
तेजस अपने पिता के पीछे चल रहा था.
उसके कंधे पर लकडी का छोटा सा गट्ठर बँधा था, और हाथ में छोटी बहन यशोदा की उँगलियाँ कसकर पकड रखी थीं.
भैया. ये हवा ऐसे क्यों चल रही है? जैसे कोई फूँक मार रहा हो.
यशोदा की आवाज काँप रही थी.
तेजस ने उसकी हथेली दबाई और मुस्कुराया,
तू बस मेरे पास चल. कुछ नहीं होगा।
पर तेजस खुद भी डरा था.
जंगल आज कुछ* अजीब* था—
पत्ते हिल रहे थे पर हवा नहीं चल रही थी.
झाडियों में खडखडाहट थी, पर कोई जानवर नहीं दिख रहा था.
जैसे पूरा जंगल किसी* तूफान से पहले की सांस* ले रहा हो.
माँ ने पीछे मुडकर कहा,
तेजस, यशोदा को और कसकर पकड. रात गहरी हो रही है।
पिता के कदम असामान्य रूप से तेज थे.
उन्होंने एक हाथ में मशाल और दूसरे हाथ में अपनी पुरानी तलवार पकडी हुई थी.
तेजस ने यह पहली बार देखा:
पिता की तलवार* कंप रही थी* तलवार तब ही काँपती थी जब हवा में दैत्य- शक्ति मौजूद हो.
* दो. डर की पहली दस्तक*
कहीं दूर से एक लंबा, काँपता हुआ साया हिला.
पेड ऐसी आवाज कर रहे थे जैसे कोई भारी चीज उनपर घिसट रही हो.
कडकड. टप्प!
यशोदा सहम कर तेजस की बाँहों में छिप गई.
तेजस ने दप से मशाल उठाई और चारों तरफ रोशनी फैलाई—
अँधेरा तुरंत निगल गया.
माँ ने धीमे स्वर में कहा,
ये जगह ठीक नहीं. हमें जल्दी करना चाहिए।
पिता बोले,
कुछ हमारे पीछे चल रहा है. मैं उसकी साँसें महसूस कर रहा हूँ. ये साधारण जानवर नहीं.
पिता की बात पूरी होती इससे पहले ही—
आवाज आई।
एक ऐसी दहाड.
जिसमें आग, दर्द, और घृणा तडप रही थी.
धरती थरथरा उठी.
यशोदा चिल्लाई—
भैया. वो क्या था?
तेजस के कान बज उठे थे.
दहाड सिर्फ आवाज नहीं थी—
वो किसी* दैत्य की पुकार* थी.
* तीन. पहला दैत्य प्रकट*
अचानक पेडों की ऊंचाई पर एक भारी काला साया दौडता हुआ दिखाई दिया.
पूरा पेड एक झटके में टूटकर गिर पडा.
धडाम!
टूटे पेड की धूल हटते ही एक राक्षस दिखा—
तीन मीटर ऊँचा, काले धुएँ से बना हुआ,
लाल दहकती आँखें, दाढी जैसी जलती राख,
और शरीर पर दरारें जैसे कोई पिघला हुआ लावा जम गया हो.
उसकी साँसें गर्म लोहे जैसी थीं.
माँ डरकर पीछे हट गईं.
यशोदा ने मुँह ढक लिया.
पिता आगे बढे—
भागो! मैं इसे रोकूँगा!
पर दैत्य ने उनकी तरफ देखा और उसके होंठ फटकर खुल गए.
वह हँसा—
एक ऐसी हँसी जो इंसान के सीने को चीर दे.
खून. आग. और डर.
उसकी आवाज जले हुए लोहे जैसी थी.
रुद्राक्ष- सम्राट को चाहता खून. तुम्हारा परिवार उसके लिए चुना गया है।
तेजस दंग रह गया—
रुद्राक्ष? कौन? क्यों?
पर सवाल पूछने का समय नहीं था.
* चार. हमला*
दैत्य बिजली की गति से पिता पर झपटा.
पिता ने तलवार घुमाई—
चिंगारियाँ उडीं.
पर दैत्य ने उन्हें एक हाथ से उठाकर धडाम से जमीन पर पटक दिया.
माँ चीखीं—
नहीं!
तेजस का शरीर सन्न रह गया.
उसके पैरों ने हिलने से इंकार कर दिया.
पर यशोदा रोते हुए बोली—
भैया कुछ करो!
तेजस ने साहस जुटाया,
एक बडा पत्थर उठाया और दैत्य पर फेंका.
पत्थर उसके कंधे से टकराया.
दैत्य मुडा.
उसकी पूरी नजर अब* तेजस* पर थी.
आहाहा. यही है वो लडका.
उसने कहा,
जिसे सम्राट रुद्राक्ष चाहता है. अग्नि- चिह्न का वाहक.
तेजस दंग—
अग्नि- चिह्न?
वह कभी किसी के शरीर पर कुछ निशान नहीं देखता था.
ये दैत्य क्या बकवास कर रहा था?
दैत्य ने उसके चेहरे को पकडने के लिए हाथ बढाया.
तेजस ने बहादुरी से कदम पीछे लिया, पर दैत्य की पकड बहुत तेज थी.
पिता घायल अवस्था में उठे—
तेजस, भाग!
पर तेजस ने बहन को पीछे धकेलते हुए कहा—
मैं उसे आने नहीं दूँगा!
यही वह क्षण था—
जब तेजस की जिंदगी बदलने वाली थी.
* पाँच. अग्नि- चिह्न का जागरण*
तेजस ने दैत्य की कलाई को दोनों हाथों से पकड लिया.
दैत्य मुस्कुराया—
छोटे मानव. तुझमें क्या ताकत—”
वह बात पूरी कर ही रहा था कि.
तेजस की छाती पर कुछ* गर्म* जलने लगा.
जैसे उसका खून किसी धधकती आग में बदल गया हो.
उसकी सांसें गर्म होने लगीं.
आँखों के सामने लाल- पीली चमक.
कानों में आग की फूँफकार.
और अचानक—
उसकी छाती पर एक चमकदार* अग्नि- चिह्न* उभर आया!
गोल, घूमता हुआ, चारों तरफ लौ जैसी रेखाएँ.
दैत्य पीछे हट गया—
ये. ये आग- वंश का चिह्न है?
तेजस को खुद नहीं पता क्या हो रहा है.
उसके हाथों से गर्मी निकल रही थी.
पैरों के आसपास राख उडने लगी.
फिर—
उसके शरीर से पहली बार* अग्नि- विस्फोट* निकला!
धडाम!
तेजस के चारों तरफ हवा जल सी उठी.
दैत्य कई कदम पीछे फेंका गया.
पत्ते जल उठे.
धरती लाल पड गई.
यशोदा स्तब्ध थी—
उसने अपने चौदह वर्षीय भाई को ऐसा कभी नहीं देखा था.
माँ ने डर और आश्चर्य के बीच कहा—
ये. ये तो अग्नि- वंश की दैवी शक्ति है.
पिता ने कांपते हुए साँस ली—
मैंने तो सोचा था ये शक्ति नष्ट हो चुकी है.
तेजस भी घबरा गया.
उसे लगा वह खुद जल जाएगा.
उसके हाथ काँप रहे थे.
आँखों में आग झिलमिला रही थी.
पर दैत्य अब और क्रोधित था.
तुझमें चिह्न जाग गया. इसका मतलब है तेरा खून बहुत कीमती है!
* छह. यशोदा का श्राप*
दैत्य पागल की तरह झपटा—
लेकिन इस बार सीधे* यशोदा* पर.
तेजस चिल्लाया—
नााऽऽह!
पर दैत्य ने अपनी लंबी, काली, धुएँ भरी जिह्वा लडकी की गर्दन पर रख दी.
काला धुआँ उसके शरीर में दाखिल होने लगा.
यशोदा ने दर्द में तडपकर चीख मारी.
उसकी नसें काली पडने लगीं.
आँखें नीली से गहरी जामुनी होने लगीं.
दाँत तेज होने लगे.
वह अर्ध- दैत्य बनने लगी थी।
तेजस रोता हुआ बहन की ओर भागा—
यशोदा! छोड उसे!
पर दैत्य ने उसे धक्का देकर दूर कर दिया.
तेजस मिट्टी में लुढक गया, पर उठा तुरंत.
यशोदा के माथे पर काला चिह्न उभर आया.
वह बेहोश होकर गिर गई.
दैत्य ने कहा—
अब ये लडकी हमारी है. रुद्राक्ष सम्राट इसे अपने दाहिने हाथ की तरह इस्तेमाल करेगा।
तेजस टूट गया.
इससे अधिक दर्द उसने कभी महसूस नहीं किया था.
* सात. परिवार का अंत*
पिता दैत्य पर टूट पडे—
पर दैत्य ने उन्हें पकडकर पेड से दे मारा.
उनकी साँसें उसी क्षण थम गईं.
माँ उनकी ओर दौडीं,
पर दैत्य ने उनके सीने पर वार कर उन्हें भी गिरा दिया.
तेजस के सामने—
उसका पूरा परिवार, खून में लथपथ.
उसने चीखते हुए दैत्य पर झपट्टा मारा.
पर दैत्य ने सिर्फ एक ठोकर मारी—
तेजस फिर गिर पडा.
जब तू बडा होगा. तो तेरे अंदर का अग्नि- चिह्न पूर्ण जागेगा.
तब हम तुझे खुद लेने आएँगे।
दैत्य हँसा.
और अपने साथियों के साथ अंधेरे में गायब हो गया.
सिर्फ खून.
टूटे पेड.
और राख की गंध पीछे छूट गई.
तेजस घुटनों पर गिर गया.
उसने बहन के सिर को अपनी गोद में रखा.
आँसू जमीन पर टपकते रहे.
उसने टूटी आवाज में कहा—
मैं तुम्हें नहीं खोऊँगा, यशोदा.
तू दैत्य नहीं बनेगी.
मैं तुझे वापस लाऊँगा.
और पूरे दैत्य- कुल का अंत करूँगा.
ये तेजस की प्रतिज्ञा है।
उसी समय—
कदमों की भारी आहट आई.
एक लंबा, विशालकाया व्यक्ति तलवार हाथ में लिए अँधेरे से निकला.
उसकी आँखों में साहस, चेहरे पर चोटों के निशान.
वह था—
* गुरु ध्रुव — दानव- वध संघ का महान योद्धा*
ध्रुव ने जमीन पर पडे परिजनों को देखा.
यशोदा के शरीर से उठते काले धुएँ को महसूस किया.
और तेजस के अग्नि- चिह्न को पहचान लिया.
उन्होंने धीरे से कहा—
लडके. तेरे अंदर आग है.
तू रुद्राक्ष का दुश्मन बनेगा.
अगर बदला चाहिए. तो मेरे साथ चल।
तेजस ने आखिरी बार माँ- पिता को देखा.
बहन को अपनी गोद में उठाया.
और खून से भरी आँखों में एक नई आग चमक उठी.
वह उठ खडा हुआ.
मैं सीखना चाहता हूँ.
मैं दैत्य- वध चाहता हूँ.
मैं रुद्राक्ष का अंत चाहता हूँ।
ध्रुव ने सिर हिलाया.
तो फिर अग्नि- पथ पर चलने के लिए तैयार हो जाओ।
और इस तरह—
अग्नि- वंश का अंतिम वंशज जन्मा.
तेजस अरण्यवी
Vishakha Mothiya
Grammy Awards | Music Award
ફિલ્મ અને મનોરંજન ક્ષેત્રમાં જેમ ઓસ્કર એવોર્ડ સર્વોચ્ચ કક્ષાનો ગણાય છે, એવી જ રીતે સંગીત ક્ષેત્રમાં ગ્રેમી એવોર્ડ સર્વોચ્ચ કક્ષાનો એવોર્ડ ગણાય છે. બ્લોગમાં જાણીશું, ગ્રેમી એવોર્ડ સમારોહમાં અપાતા એવોર્ડ્સ વિશે તેમજ વિજેતા પસંદગીની પ્રક્રિયા વિશે.
વાંચવા માટે અહીં ક્લિક કરો - https://vishakhainfo.wordpress.com/2026/01/25/grammy-awards/
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kya apko pta hai ?
Shah Nimishaben Kantilal
આકાશે લહેરે તિરંગો, "વીરોનું જે ગાન,"
રંગે રૂડો દેશ મારો, વિશ્વમાં મહાન.
નાનો હું સિપાહી, પણ અડગ મારું માન,
હિંદની આ માટીનું હું, રાખું સદા ધ્યાન.
ભારતનો હું બાળ છું, ત્રિરંગો મારી શાન,
દેશ કાજે અર્પણ છે, હર પળ મારાં પ્રાણ.
ત્રણ રંગોમાં ઝળકે કાયમ, આન, બાન, અભિમાન,
દુશ્મન સામે લડવા હું, બનું વીર જવાન.
દેશપ્રેમના રંગમાં રેલાવું, ભક્તિનુ સદા તાન,
માનવતાના મંત્રો ગાતું, રાષ્ટ્ર બની એકતાન.
ગુંજશે જગમાં નાદ અમારો, પ્યારું હિંદુસ્તાન,
સૌના હૈયે વસેલું મારું, સુંદર હિંદુસ્તાન!
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Sudhir Srivastava
क्या अपराध करता हूँ
******
आज कई दिनों बाद मित्र यमराज भागते हुए आया
और पूछने लगा - प्रभु! क्या आपको भी डर लगता है?
मैंने उसे बैठाया, पानी की बोतल पकड़ाया
लगा बंदा बड़ा समझदार हो गया
एक झटके में पूरी बोतल गटक गया
और फिर अपने सवाल पर आ गया।
मैंने मासूमियत से कहा - सच जब सामने आयेगा
तू निश्चित ही मेरा मजाक उड़ायेगा,
पर तुझे बताना भी जरूरी है
वरना तू आये दिन, मेरा भेजा खाएगा।
पर पहले तू ये तो बता
कि तेरे दिमाग़ में ये सवाल ही क्यों आया?
यमराज हाथ जोड़कर खड़ा हो गया -
माफी हूजूर! सवाल आया नहीं
मुझे धमकी देकर गया पकड़ाया।
मैंने भी अपना तीर चलाया
ओह!अब मुझे सब समझ में आया
पर उसके पास जाने का ख्याल ही तुझे क्यों आया?
या उसने चाय नहीं पिलाया सिर्फ धमकाया,
नहीं प्रभु! उसके लाड़ प्यार ने ही तो मुझे रुलाया,
आपका नाम लेकर खाने पर था बुलाया,
इसीलिए मैं भागते हुए आपके पास आया
जब मेरे जेहन में ये सवाल कुलबुलाया।
ओह! अब तो समझ में आया
या अब भी बताना पड़ेगा
कि मैं किसी से तो डरता हूँ?
यमराज बोल पड़ा -इतना समझदार तो हूँ ही
पर इस रहस्य का मतलब नहीं समझ आया।
मैंने उसे विस्तार से समझाया-
यह तो मैं भी आज तक नहीं जान पाया,
पर उसकी बात ही निराली है, जिसकी ग़ज़ब कहानी है
कहने को तो वो मुझसे छोटी,
पर मेरे लिए माँ, बहन और बेटी है,
सच कहूँ तो उससे मेरा दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है,
पर अब लगता है जैसे
पूर्वजन्मों का हम दोनों का नाता है,
जिसके चरणों में शीश भी मैं झुकाता हूँ
सच कहूँ तो बड़ा सूकून पाता हूँ।
उसकी चिंता मुझे रुलाती है, मेरा बीपी, शुगर, बढ़ाती है
उसका लाड़ प्यार जिम्मेदारियों की याद दिलाता है,
भटकने से पहले उसका चेहरा सामने आ जाता है,
उसका रक्षा सूत्र, रक्षा कवच का सा बोध कराता है।
जब उसका हाथ मेरे शीश पर होता है
तब ये संसार मुझे बौना सा लगता है।
यूँ तो वो बुलंद हौसलों की मीनार है
पर उसके आँसू मुझे झकझोर देते हैं,
बस इसीलिए हम उससे इतना डरते हैं,
मगर ये भी उस पर कोई एहसान नहीं करते हैं।
उसके अधिकार, कर्तव्य, विश्वास को मान देते हैं
बेटी, बहन, माँ सदृश उसे स्थान देते हैं
लड़ते, झगड़ते और शिकवा शिकायत भी करते हैं
मन के सारे भेद भी खोल कर रखते हैं,
उसने मुझे प्रेरित और मेरे आत्मबल को मजबूत किया।
अपने कर्तव्यों का वह पूरी तरह पालन करती है,
सच कहूँ तो बेटी-बहन होकर भी
एक माँ की तरह कदम-कदम पर ध्यान रखती है,
जितना लाड़ प्यार दुलार करती है
उतना ही समय देखकर डाँटकर मगन भी हो लेती है,
फिर हँसती, मुस्कुराती, रोती और गले भी लगाती है
अब तू ही बता प्यारे - क्या हम कोई अपराध करते हैं?
आखिर अपनी छुटकी से ही तो डरते हैं,
दुनिया जानती है कि इस डर में भी
जीवन का नया अध्याय भी तो
हम जैसे डरपोक ही लिखते हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
व्यंग्य -आस्तीन का सांप
***********
नाहक परेशान हैं आप
इधर-उधर खोजते हैं आस्तीन के सांप,
या फिर बेरोजगार अथवा एकदम बेकार हैं
या शायद बिना आस्तीन के हैं।
तभी तो आस्तीन के सांप भी
आपके करीब फटकते तक नहीं हैं।
पर मुझे तो लगता है कि आप
बेवकूफ हैं, नादान हैं, पर इंसान नहीं हैं
तभी तो आपको इनकी पहचान नहीं है।
वैसे यह भी अच्छा है,
कि कम से कम भारत रत्न के
असली हकदार तो आप नहीं हैं,
वैसे भी आपके आस्तीन में सांप
भला पलेंगे भी तो कैसे?
उन जहरीले सांपों के कथित, स्वयंभू परवरदिगार
रहनुमा और सरदार भी जब आप हैं।
यह और बात है कि आप गिरगिट को भी मात दे रहे हैं,
समय-समय पर रंग बदलने में बड़े माहिर लग रहे हैं।
कौन कहता है, आप पीड़ित हैं, डसे जा रहे हैं
भगवान भला करें, आप और आपकी फौज का,
सौभाग्य से हम तो आपके चंगुल से आजाद घूम रहे हैं,
पर राज की एक बात भी सुन लो प्यारे
हम आपसे से बड़े और भारी-भरकम
कद-काठी वाले आस्तीन के सांप हैं,
शायद आप जानते ही कि हम
अपने आप में किसी शहँशाह ह कम नहीं हैं,
हमारी छाया में तुम जैसे जाने कितने पलते हैं
यह और बात है कि हम तुम्हें नजर नहीं आते हैं
पर तुम्हें कभी अपनी नजरों से
ओझल भी नहीं होने देते हैं,
बड़ी सफाई से तुम्हें गुमराह करते हैं,
क्योंकि आस्तीनों के सांपों के आस्तीन में भी
तुम जैसे सांप पलते रहते हैं
और घमंड में सिर्फ फुफकारते रहते हैं,
क्योंकि उनके दांत तो हमने पहले से ही तोड़ रखें हैं
या यूँ समझ लो हमने अपने स्वार्थ की खातिर
और भीड़ बढ़ाने के लिए तुम जैसों को पाल रखे हैं,
सुधीर श्रीवास्तव
Priyanshu Sharma
*_And then i realised -_*
*"Kuch baaton se anjan rehna bhi achaa hain, Sab kuch jaan lena bhi takleef deti hain."*😊
@Priyanshusharma8476
Sudhir Srivastava
चौपाई - सतगुरु महिमा
आओ सतगुरु सुमिरन कर लें।
सतगुरु का पूजन हम कर लें।।
जीवन को निर्द्वंद्व बनाएं।
सतगुरु ऐसी राह दिखाएं।।
सतगुरु जो भी राह दिखाएं।
आँख मूँद उस पर बढ़ जाएं।।
शिकवा और शिकायत तेरी।
सतगुरु शरण डाल दे ढेरी।।
जिसने महिमा सतगुरु जानी।
वो ही बन जाता है ज्ञानी।।
उसकी बनती राम कहानी।
जिसको कहते मुनिजन वाणी।।
*****
चौपाई -हिंदी
********
विश्व दिवस हिंदी का आया।
फिर अपना संदेशा लाया।।
समझ नहीं पाते हम माया।
बस इसका माखौल उड़ाया।।
सुधीर श्रीवास्तव
Shalini Gautam
fauji ki wife hona itna bhi aasan nahi...
dil today kar rakh deta hai unki judai ka gam,
koi din nhi gujarta jab aankh na ho nam,
tum sarhad ke us Paar or is paar hai hum,
na jane kab hoga ye intezar khatam.
Shalini Gautam
Apne desh ke liye itna khush hona to Banta hai....aakhir hum bhi to is desh ki janta hai...
Shalini Gautam
Apne desh ke liye itna khush hona to Banta hai....aakhir hum bhi to is desh ki janta hai...
kajal jha
ना जाति, ना मज़हब — बस एक पहचान,
संविधान के पन्नों में लिखा हिंदुस्तान।
26 जनवरी का ये पावन त्योहार,
हर दिल में जगाए देशभक्ति का विचार।
- kajal jha
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