Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Alka Aggarwal
❤️ Emotional Love
“तुम बदल गए हो…
या मैं तुम्हारी आदत बन गई हूँ।”
“तुम्हारी बेरुखी भी,
मैं प्यार समझकर सह लेती हूँ।”
“मैं आज भी वही हूँ…
बस तुम्हारे लिए पहले जैसी नहीं।”
“तुम पास हो,
फिर भी कमी तुम्हारी ही लगती है।”
“तुम्हें खोने का डर,
तुमसे दूर होने से ज्यादा है।”
“तुम्हारा होना जरूरी है…
चाहे वैसा न भी हो जैसा पहले था।”
“मैं शिकायत नहीं करती,
क्योंकि रिश्ता बचाना है।”
“तुम्हारी चुप्पी,
मेरे दिल में शोर कर देती है।”
“मैं तुमसे कम नहीं हुई…
बस तुमसे उम्मीदें कम कर लीं।”
“प्यार अभी भी है,
बस पहले जैसा महसूस नहीं होता।”
Alka Aggarwal
🔥 Mafia Love
गलत दुनिया का था…
पर मेरी मोहब्बत सही थी।”
“उसके हाथ खून से रंगे थे,
पर मेरे लिए वही सबसे साफ था।”
“दुनिया उससे डरती थी…
और वो मुझसे।”
“मैं उसकी कमजोरी थी,
और वो मेरी बर्बादी।”
“उसने सबको झुकाया,
पर मेरे सामने हार गया।”
“वो खतरनाक था…
पर मेरे लिए पनाह था।”
“उसकी बाहों में डर भी था,
और सबसे ज्यादा सुकून भी।”
“मैंने शैतान से प्यार किया,
और उसने मुझे इबादत बना लिया।”
“वो अपराधी था,
पर मेरी नजर में हीरो।”
“उसकी दुनिया अंधेरी थी…
पर उसमें मेरी जगह रोशन थी।”
Raju kumar Chaudhary
#FutureOfNepal
#YoungTalents
#StudentMotivation
#Inspiration
#EducationMotivationhttps://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Alka Aggarwal
👫 Husband-Wife Reality
“पति-पत्नी में प्यार कम नहीं होता,
बस बातें कम हो जाती हैं।”
“शादी में ‘I love you’ कम,
‘खाना खाया?’ ज्यादा होता है।”
“हम लड़ते बहुत हैं…
पर एक-दूसरे के बिना रह नहीं सकते।”
“पति का प्यार दिखता नहीं,
पर हर चिंता में छुपा होता है।”
“वो मुझे समझता नहीं,
फिर भी मेरा ही है।”
“हम रोमांस कम करते हैं,
पर साथ जिंदगी ज्यादा जीते हैं।”
“शादी के बाद प्यार mature हो जाता है।”
“हम perfect couple नहीं हैं…
पर सच्चे हैं।”
“वो ‘sorry’ नहीं बोलता,
पर गलती सुधार देता है।”
“पति-पत्नी का रिश्ता,
लड़ाई में भी साथ छोड़ता नहीं।”
Alka Aggarwal
💕 Romantic Love
“तुम्हारी बाहों में ही,
मेरी सारी थकान सो जाती है।”
“तुम पास होते हो तो,
दुनिया थोड़ी कम मुश्किल लगती है।”
“मुझे दुनिया नहीं चाहिए,
बस तुम हर दिन चाहिए।”
“तुम्हारी आदत लग गई है…
और ये आदत बहुत खूबसूरत है।”
“तुम्हारे साथ चुप रहना भी,
सबसे प्यारी बात है।”
“तुम्हारी आवाज़,
मेरे दिन की सबसे मीठी चीज़ है।”
“मैंने खुदा से कुछ नहीं माँगा…
बस तुम्हें माँग लिया।”
“तुम्हारा नाम सुनते ही,
दिल मुस्कुरा देता है।”
“तुम्हारी मुस्कान ही,
मेरी दुनिया का मौसम है।”
“तुम्हारे बिना भी जी लूँगी…
पर तुम्हारे साथ ही जीना चाहती हूँ।”
Alka Aggarwal
💔 Pain & Silent Love
“सब ठीक है कहने वाली औरत,
अंदर से सबसे ज्यादा टूटी होती है।”
“मैं शिकायत नहीं करती…
क्योंकि डर है वो सच में दूर न हो जाए।”
“उसकी बेरुखी ने मुझे चुप रहना सिखा दिया।”
“मैंने उसे खोया नहीं है…
बस वो मुझे महसूस करना भूल गया है।”
“प्यार अभी भी है,
बस आवाज़ नहीं करता।”
“हम साथ रहते हैं…
पर पहले जैसा साथ नहीं है।”
“दिल आज भी उसी के लिए धड़कता है,
जो अब मेरे लिए नहीं धड़कता।”
“कभी-कभी शादी में तलाक नहीं होता,
बस दिल अलग हो जाते हैं।”
“मैंने उसे छोड़ा नहीं,
बस खुद को रोकना छोड़ दिया।”
“उसके बदलने से ज्यादा,
मुझे अपने टूटने का दर्द है।”
Alka Aggarwal
❤️ Love & Marriage
“शादी से पहले वो मेरा सब कुछ था…
शादी के बाद मैं उसकी आदत बन गई।”
“पति का प्यार शब्दों में नहीं,
ज़िम्मेदारियों में दिखता है।”
“वो मुझसे दूर नहीं है…
बस अब मेरे लिए रुकता नहीं।”
“पहले वो मुझे मनाता था,
अब मैं खुद ही मान जाती हूँ।”
“मोहब्बत खत्म नहीं हुई…
बस उसकी प्राथमिकताएँ बदल गईं।”
“मैं आज भी उसकी हूँ,
बस वो अब पहले जैसा मेरा नहीं।”
“रिश्ता टूटा नहीं है…
बस दिल थोड़ा अकेला हो गया है।”
“शादी के बाद प्यार नहीं बदलता,
बस जताने का तरीका बदल जाता है।”
“उसके पास सबके लिए वक्त है…
बस मेरे लिए नहीं।”
“मैंने पति माँगा था,
वो जिम्मेदार आदमी बन गया।”
Alka Aggarwal
*चैन है सादगी की राहों में।*
घर बिक जाते है दिखावो में। 💯
Alka Aggarwal
लोग धोका 💔
हमेशा गलत इंसान से खाते हैं 😞,
और बदला अच्छे इंसान से लेते हैं ! 🥀
Alka Aggarwal
😢 *जब* लगे *कि* अब *कुछ* नहीं *हो* सकता।।
*तभी* चमत्कार *होगा।।* 👌🏻
🙏🏻 *बस* कभी *उम्मीद* मत *छोड़ना।।* 🥺 💫
Alka Aggarwal
⏳ किसी को *कुछ नहीं* आता…
सबका *वक़्त* आता है 🙏
🌅 *जिसका* वक़्त आता है,
फिर *उसे सब* आता है 💪✨
Alka Aggarwal
संसार में कोई भी मनुष्य सर्वगुण सम्पन्न नहीं होता,
इसलिए कुछ कमियों को नजरअंदाज़ करके रिश्ते बनाए रखिये...!!
Ruchi Dixit
विश्व में व्याप्त संकट ,जनपीड़ा
महसूस करना और महसूस होना एक विषय दो मुख है एक मूल तो दूसरी शाखायें हैं ।
प्रार्थनायें भी ऐसी ही हैं ।
- Ruchi Dixit
Suresh sondhiya
"🚀 बड़ी खबर! [ S C U ] की पहली ब्लॉकबस्टर आ रही है! 🚀
दोस्तों, इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं! मेरी नई और सबसे खूंखार Sci-Fi कहानी "VORTX - 1: द ग्रेट नथिंग" की रिलीज डेट फिक्स हो गई है।
📅 तारीख: 24 फरवरी 2026
📍 कहाँ: सिर्फ मातृभारती पर।
ब्रह्मांड में दरार पड़ चुकी है और डॉ. आरव के साथ एक नया रहस्य आने वाला है। तैयार रहिये इस महा-रोमांच के लिए! 🌌💥
#VORTX #SCU #ComingSoon #SureshSondhiya"
Suresh sondhiya
"🚀 बड़ी खबर! [ S C U ] की पहली ब्लॉकबस्टर आ रही है! 🚀
दोस्तों, इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं! मेरी नई और सबसे खूंखार Sci-Fi कहानी "VORTX - 1: द ग्रेट नथिंग" की रिलीज डेट फिक्स हो गई है।
📅 तारीख: 24 फरवरी 2026
📍 कहाँ: सिर्फ मातृभारती पर।
ब्रह्मांड में दरार पड़ चुकी है और डॉ. आरव के साथ एक नया रहस्य आने वाला है। तैयार रहिये इस महा-रोमांच के लिए! 🌌💥
#VORTX #SCU #ComingSoon #SureshSondhiya"
Alka Aggarwal
बिल्ली ने मेरा रास्ता काटा
और खाई में गिर गई😂😂..
Alka Aggarwal
सबकी असलियत जानते हुए
भी उनसे बात करती हूं
कही मैं बेवकूफ तो नहीं ।😂😂
Alka Aggarwal
मेहनत इतनी खामोशी से करो
की हार मानने पर किसी को पता ना चले ।😁😂
prit tembhe
after fighting with her
...😁
आग पेटली उरात,
चंद्र जणू ढासळला...
नको नको म्हणताही
दोघांत भूकंप दाटला...
युद्ध झाले शब्दांचे,
भाव सारे उसळले...
खेळता खेळ नात्याचा
दोन्ही पक्षी हे रुसले...
असा कसा वणवा पेटला
हिमाच्या या गावात?
लागले निशाण खोल
नयनांच्या त्या नेमात...!
mohansharma
सोचा था मोहन इस होली पर मैं उसको खूब दूंगा रंग..
मगर होली के पहले ही देखो वो कैसा दिखा गया है रंग..
Soni shakya
सोचा था हर मोड़ पर मिलेंगे तुमसे..!
क्या पता था एक मोड़ आखरी भी होगा..!!
- Soni shakya
Shailesh Joshi
જો સ્વભાવ અને વ્યવહાર સારો હશે, તો
બીજી કોઈ ચિંતા કરવાની જરૂર નથી,
કેમકે એમાં જેટલું જશે, એનાથી હજાર ઘણું
પાછું આવશે, વ્યથિત થવાની, ડગી જવાની
કે પછી ધીરજ ગુમાવવાની જરૂર નથી.
- Shailesh Joshi
Kajal Rathod...RV
અંતરથી આયખું કર્યું તારા નામે,
છતાં કેમ આ સાથ મૃગજળ પામે...RV 👑
- Kajal Rathod...RV
Soni shakya
हर जख्म भर जाए ऐसा नहीं होता..
कुछ दर्द उम्र भर साथ निभाते हैं..
- Soni shakya
Niya
ના હું મારી બહેન ની પ્રિય બહેન બની શકી ,
ના હું મારા પ્રિયતમની પત્ની બની શકી ,
ના હું મારા મિત્રોની ગમતી સખા બની શકી ,
ના હું મારા પોતાની બની શકી ,
ના હું જીંદગી ની મુસાફિર બની શકી ,
બની હું તો એ માત્ર મારા પિતાની એક સમજું દિકરી …
Kamini Shah
વિવિધ રંગે નિખરી છે પ્રકૃતિ
મળી છે ચાહત તેને વસંતની…
-કામિની
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
MASHAALLHA KHAN
मेरा वक्त खराब नही है मेरे दोस्त
ये तो आसलियत दिखा रहे है लोग,
पिछा किसी का ना कभी किया मैंने
वो अलग बात है मेरे गिरते ही मेरे पिछे
से जा रहे है लोग,
कभी मै सिर्फ सच ही बोलता था
अब मुझे ही झूठा बता रहे है लोग,
और खानदान के खानदान उजड़ गए
इस तरह रिश्ते निभा रहे है लोग .
Dhara vyas
शख़्सियत ऐसी कि आईना भी टूट जाए,
सफ़र इतना लम्बा कि ख़ामोशी भी छूट जाए।
है मुझमें क़ैद एक परिंदा,
पंख खुलें तो आसमां छू जाए।
— धरा Vyas
- Dhara vyas
Chaitanya Joshi
'મા' થકી મને મળી એ માતૃભાષા ગુજરાતી.
એને કેમ ભૂલું વળી એ માતૃભાષા ગુજરાતી.
પ્રથમ' મા ' શબ્દોચ્ચારે આવીને વસી ઓષ્ઠે,
જીવને ગૈ કેવી ભળી એ માતૃભાષા ગુજરાતી.
સહજ, સાનુકૂળ,સરળ,સહકાર દેતી હરપળે,
વાણીમાં સ્હેજે ઢળી એ માતૃભાષા ગુજરાતી.
છંદ,સમાસ, અલંકારે અનેકાર્થીને આવકારું,
મારા રોમેરોમે જે ફળી એ માતૃભાષા ગુજરાતી
આનંદે,ઉત્સાહે,આફતે કે ઈશની પ્રાર્થનામાં જે
ના કદીએ વિખૂટી પડી એ માતૃભાષા ગુજરાતી
- ચૈતન્ય જોષી ' દીપક ' પોરબંદર.
Dhamak
બંનેની વેદનાઓને ન્યાય આપવાની કોશિશ કરી છે
હું સ્ત્રી છું એટલે પુરુષની વેદના અને એટલી ન સમજી શકુ પણ છોકરાઓ મોટા થઈ ગયા છે તેમને જોઈ અને ઘણું સમજાય છે.
તમારો અભિપ્રાય જરૂરી છે જો ઠીક લાગે તો કોમેન્ટ કરો
તો આ વિષય પર થોડીક વધારે જાણકારી મળે
देखो, स्त्री की वेदना पुरुष की वेदना से कुछ अलग नहीं है...
[स्त्री की वेदना]
जाने क्यों...
हर बार हम ही गलत हो जाते हैं,
कुछ कहें... तब भी,
चुप रहें... तब भी।
रिश्तों की लाज में खुद को मिटाते हैं,
संभल कर चलें... तब भी,
ठोकर लगे... तब भी।
[पुरुष की वेदना]
हर बार...
हम ही मजबूत माने जाते हैं,
दर्द हो... तब भी,
दिल टूटे... तब भी।
ज़िम्मेदारियों के बोझ तले खुद को दबाते हैं,
थक जाएँ... तब भी,
हार जाएँ... तब भी।
[दोनों की समान पीड़ा]
दुनिया की नज़रों में बस कसूरवार ठहरते हैं,
हँसें... तब भी,
रोएँ... तब भी।
अपनी ही खुशियों का गला घोंट देते हैं,
जियें... तब भी,
दम तोड़ें... तब भी।
DHAMAK
softrebel
*पारस जइसन प्रेम*
भरल वसंत में बरसल सारस जइसन, प्रेम होखे ना सबके पारस जइसन।
मोह वास और काम के इच्छा भरल बा सबमें पैतृक जायदाद के जइसन,
होखे ना लोगवा प्रेम से परिचित, कऽ देला सब कुछ मवाद के जइसन।
जे जियेला उहे जानेला अमृत के हाल, मीरा से पूछऽ काहे लागेला अवसाद के जइसन।
softrebel
Dada Bhagwan
Let's take a look at the Thane Pran Pratishtha 2026 photo gallery: https://dbf.adalaj.org/vrzToGzr
#photogallery #picoftheday #photooftheday #thane #PranPratishtha #DadaBhagwanFoundation
Sonu Kumar
*नमस्कार साथियों*
यह पोस्ट उन सभी कार्यकर्ताओं के लिए है जो यह सोचते है कि हमको वोट वापसी कानून के बारे में जानकारी मिल गई है, लेकिन ये लागू कैसे होंगे ? ये लागू कब तक होंगे?
हम इन कानूनों के ड्राफ्ट को अपने स्तर पर लागू करवाने के लिए क्या प्रयास कर सकते हैं?
इस तरह के भारत में हजारों कार्यकर्ता हैं जिनको इन कानून की जानकारी मिल चुकी है और RRP पार्टी का उद्देश्य भी समझ गये है, लेकिन अब वह यह सोचते है कि कोई महापुरुष आएगा, कोई देवता पुरुष आएगा कोई अवतार होगा ,कोई टीवी पर आने वाला हीरो आएगा और इन अच्छे कानून को लागू करवा देगा लेकिन आप सभी कार्यकर्ता साथियों से मैं एक सच्चाई बता देना चाहता हूं कि जो भी नेता लोग देश के प्रमुख टीवी चैनलों पर रोजाना आते हैं जिनकी फिल्में आप देखते है, जिनके भाषण टीवी पर चलते रहते है, जिनको मीडिया मे लाइव दिखाया जाता है, जिनको विश्व स्तर की संस्थाएं पुरस्कार देती है जिनकी पुस्तके लाखो लोग पढ़ते है जो मीडिया मे बड़ी-बड़ी हस्तियां है "वह सभी लोग इन वोट वापसी समूह द्वारा प्रस्तावित किए गए कानून के खिलाफ है और वह कभी नहीं चाहते कि यह कानून भारत में लागू हो" , क्योकि वे लोग नही चाहते जनता सशक्त बन जाए क्योकि उनका लूट तंत्र फिर बंद हो जायेगा
आप इस तरह के लोगो के पीछे आस लगाकर बैठे रहना छोड़ दीजिए कि यह लोग अच्छे कानून लागू करके दे देंगे l
यह कानून लागू करवाने के लिए हम सभी को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे, यह बहुत छोटे-छोटे प्रयास है आप सप्ताह में 2 घंटे का समय निकालकर भी इन कानून की मांग पूरे भारत में करवा सकते हैं और अकेले ही काम शुरू कर सकते हैं l
मैं देखता हूं कि बहुत सारे कार्यकर्ता है यह कहते हैं कि जब 100 लोगों का समूह बन जाएगा तो हम काम शुरू करेंगे फिर प्रचार शुरू करेंगे लेकिन वह 100 लोगों के समूह की शुरुआत भी एक कार्यकर्ता से ही होगी तो जो पहले अकेला इनका प्रचार शुरू कर देगा वह निश्चित रूप से लीडर बन जाएगा और वह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा तो मैं सभी कार्यकर्ताओं से निवेदन करूंगा वह सभी अपने स्तर पर कार्य शुरू करें l
ऐसे 50 से ज्यादा तरीके हैं जिनसे आप इन कानूनों का प्रचार नागरिकों में अकेले ही कर सकते हैं मैने उन तरीकों के बारे में अलग-अलग समय सोशल मीडिया पर जानकारी भी दी है और मैने खुद भी उन तरीकों का उपयोग करके इन कानून का प्रचार किया है l
मैंने जिस एल्बम में यह पोस्ट रखी है उस एल्बम की अन्य पोस्ट देखकर भी आप समझ सकते हैं कि इन कानून का प्रचार हम अपने स्तर पर कैसे कर सकते हैं सबसे पहले आप इन कानूनो के प्रचार से पूर्व जो इन कानूनो के प्रस्तावित ड्राफ्ट है| उनको एक बार पूरा पढ़िए
मेनिफेस्टो वोट वापसी धन वापसी पुस्तक भाग 1 वोट वापसी धन वापसी पुस्तक भाग 2 इन दोनों को पूरा जरूर पढ़िए और जिस भी कार्यकर्ता को आप जानते हैं या जो आपके मित्र है उन्हें भी इन्हें पढने के लिए तैयार करें उसके बाद अन्य तरीकों से आप इनका प्रचार शुरू करें और जो भी कानून आपको पसंद है उसके लिए हर महीने मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड के माध्यम से लिखित निर्देश भेजना जरूर जारी रखें "जिस प्रकार उदरपूर्ति के लिए खाना खाते हैं इस प्रकार देश की समस्याओं के समाधान में सहयोग करने के लिए इन कानून का प्रचार लगातार करना पड़ेगा" तभी इन कानून की मांग खड़ी होगी और राजवर्ग इन कानूनों को हमारे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट को लागू करने के लिए तैयार होगा l
महावीर प्रसाद कुमावत, भीलवाड़ा जिला, राजस्थान
संपर्क : 09887742837
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https://www.facebook.com/share/p/184CzZy8HK/
आपके किसी भी तरह के प्रश्न है तो इस पोस्ट पर जाकर कमेंट कर सकते हैं l
..
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
तुम तो पूरे समुंदर हो मित्र।
एक बूंद के लिए कभी मत रोना।।
😊😊
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
મનોજ નાવડીયા
મનુષ્યને વળાકો ગમતાં નથી, સીધા રસ્તાઓ વઘારે ગમતા હોય છે.
પણ આપણે જેવું વિચારીએ એવું જ થાય એવું કદીય વિધાતા કરતું નથી...
મનોજ નાવડીયા
#maravichar #saravichar #marivat #manojnavadiya #manojnavadiyabooks #manojnavadiyapoetry #goodthinking #goodthoughts
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શીર્ષક: આશાનો દીવો
સુખના આંગણે દુઃખનો ફેરો,
નથી જીવનભરનો એ ટોળો.
આવશે ને જશે એ વાદળની જેમ,
રાખજે હૈયામાં આશનો મેળો.
પાનખર પછી જ તો વસંત મહોરે,
સમય પણ ક્યાં કોઈનો ચેલો?
આજે અંધારું તો કાલે સવાર છે,
સૂરજ પણ વાદળ પાછળ છે ઘેલો.
હિંમત હારીને શું બેસી રહેવું?
જીવન તો છે સંઘર્ષનો ખેલ પહેલો,
ઈશ્વર પર શ્રદ્ધાની રાખજે મશાલ,
પાર ઉતરી જશે આ ભવનો મેળો.
સુખના આંગણે દુઃખનો ફેરો,
નથી જીવનભરનો "સ્વયમ્'ભૂ" એ ટોળો.
અશ્વિન રાઠોડ સ્વયમ્'ભૂ
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શિર્ષક:– "તું જ મારો શ્વાસ"
તારી આંખોમાં જોઈને હું તો ખોવાઈ ગયો,
પ્રેમના આ રંગમાં આજે પૂરો રંગાઈ ગયો.
બસ તારા જ વિચારોમાં મારો દિવસ વીતતો જાય,
તને મળવા માટે આ દિલ કેવું ઉતાવળું થાય.
તું છે તો લાગે છે કે આ દુનિયા છે રળિયામણી,
તારી સાથે જ લખવી છે મારે મારી પ્રેમ કહાણી.
તું જ મારું સ્મિત ને તું જ મારો વિશ્વાસ,
તારા વગર સૂનું લાગે મને આખું આ આકાશ.
હાથ પકડીને તારો, જીવનભર ચાલવું છે,
સુખ હોય કે દુઃખ, બસ તને જ ચાહવું છે.
શબ્દો વગર પણ સમજી લે તું મારી વાત,
આવી જ રીતે રહેજો હંમેશા તારો સાથ.
ગુલાબની જેમ તું મારા જીવનમાં મહેકે,
તને જોઈને જ તો આ મન મારું બહેકે.
આજે 'વેલેન્ટાઈન ડે' પર માંગુ છું તારો પ્યાર,
તું જ છે મારો "સ્વયમ્'ભૂ" પહેલો અને છેલ્લો આધાર.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શિર્ષક: "પંખીઓનો દરબાર"
સોનેરી સવાર પડતા જ જાગ્યું આખું ગામ,
કલરવ કરતા પક્ષીઓ લે પ્રભુનું નામ.
આંગણામાં આવીને ચકલી ચીં-ચીં કરતી,
દાણા ચણવા માટે એ તો આમતેમ ફરતી.
આંબાની ડાળે બેઠી કોયલ રાણી ગાતી,
મીઠા ટહુકાથી એ તો સૌના મન હરતી.
લીલો પોપટ ભાઈ તો લાગે બહુ રૂપાળો,
'મીઠું-મીઠું' બોલીને લાગે સૌને વ્હાલો.
કળા કરીને મોરલો થનગન થનગન નાચે,
વાદળ જોઈને એ તો ટહુક-ટહુક રાચે.
ઘુટર-ઘૂ કરતું કબૂતર શાંતિ સંદેશ લાવે,
ત્યાં કા-કા કરતો કાગડો મહેમાન બની આવે.
વૃક્ષની ડાળી પર બેસી બુલબુલ ગીત સુણાવે,
કુદરતનો આ સંગીત ઉત્સવ સૌને ખૂબ ભાવે.
પક્ષીઓના અવાજથી સવાર પડે સારી,
ઈશ્વરની આ સૃષ્ટિ લાગે "સ્વયમ્'ભૂ" સૌથી ન્યારી.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શીર્ષક: સાદગીની સુગંધ
ફૂલ પર ઝાકળ બિંદુ જેમ મોતી થઈ હસે,
એમ સાદગીની સુગંધ સાચા હ્રદયમાં વસે.
નથી જરૂર કોઈ મોંઘા અત્તર કે શણગારની,
વર્તનમાં હોય નમ્રતા તો મન આપોઆપ ધસે.
જ્યાં નથી હોતો દંભ કે ખોટો દેખાડો જરા,
સત્યના પંથે ચાલનારને કદી ડર ના ડસે.
કાદવ વચ્ચે રહીને પણ કમળ રહે છે કોરું,
એમ દુનિયાની ભીડમાં સજ્જન અલગ થઈ ખસે.
ઈશ્વર પણ મળે છે ત્યાં, જ્યાં નિખાલસતા હોય છે,
"સ્વયમ્'ભૂ" પ્રગટે તેજ, જ્યારે પડદા અહમના ખસે.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
Imaran
"वो कहता है ये तेरा देश नहीं, फिर क्यों मेरे देश जैसा वो लगता है...वो कहता है मैं उस सा नहीं, फिर क्यों मुझे जैसा वो लगता है
💞imran 💞
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
વિષય: વિશ્વ માતૃભાષા દિવસ શીર્ષક: મારો શ્વાસ
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
લોહીમાં ભળેલી હોય એને શીખવાની ન હોય,
એ તો ગળથૂથીમાં મળેલો અદ્રશ્ય વારસો છે.
જ્યારે વેદના આંતરડા સુધી પહોંચે,
ત્યારે હોઠો પર જે આપોઆપ આવી ચડે,
એ બીજું કશું નહીં, મારી માતૃભાષા છે.
બીજી ભાષાઓમાં તો હું માત્ર 'વાત' કરું છું,
પણ શ્વાસ તો હું આ ભાષામાં જ લઉં છું.
દુનિયા આખી જીતવા ભલે શબ્દો ઉછીના લઉં,
પણ હારીને જ્યાં આશ્વાસન મળે,
એ ખોળો મારી માતૃભાષાનો છે.
અહીં વ્યાકરણના નિયમો કરતાં,
લાગણીના લહેકાનું વજન વધારે છે.
કોઈ શબ્દકોશ જેનો અર્થ ન સમજાવી શકે,
એવા 'ખમ્મા' અને 'ઓવારણાં' અહીં જ જડે છે.
એ માત્ર લિપિ કે અક્ષરો નથી,
એ તો મારા પૂર્વજોના અવાજનો પડઘો છે,
મારા હોવાપણાનું એકમાત્ર "સ્વયમ્'ભૂ" સરનામું છે.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1Bv6KL4a2j/
Saroj Prajapati
शिकायतें तो बहुत थी तुझसे ऐ जिंदगी !
नहीं करनी थी मुझे तुझसे कभी बात
यूं मुस्कुरा आगे बढ़ गले लगाया तूने
मिरा मिट गए गिले शिकवे तमाम।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Parag gandhi
બધા જ આપણી માટે તાળીઓ નઈ વગાડે કોઇક આંગળી ચીંધવાવાળુ પણ હશે,તો તેને સ્વીકારવુ પડશે કારણ કે"જબ તક જીંદા હે,તબ તક નિંદા હૈ...
🙏જય શ્રી કૃષ્ણ 🙏
SAYRI K I N G
होली आने वाली है... रंगों से नही डरे, रंग बदलने वालों से डरे ..!!
- SAYRI K I N G
SAYRI K I N G
YAAR, YE LADKIYO KA DIMAAG HAI YA MERA PURANA WI-FI?
KABHI FULL SIGNAL, TOH KABHI EKDUM GAYAB
- SAYRI K I N G
Vedanta Life Agyat Agyani
वेदान्त 2.0 — अर्थम अध्याय ✧
अद्वैत: जहाँ कोई माध्यम नहीं
अद्वैत कोई मान्यता नहीं है।
अद्वैत कोई धर्म नहीं है।
अद्वैत कोई मार्ग नहीं है।
जैसे ही अद्वैत को धर्म बनाया गया — द्वैत जन्म लेता है।
जैसे ही अद्वैत को संस्था बनाया गया — पहचान जन्म लेती है।
और जहाँ पहचान है, वहाँ मुक्ति नहीं।
1. माध्यम की सीमा
मूर्ति, मंदिर, मंत्र, गुरु, भगवान —
ये सब साधन हो सकते हैं, पर अंतिम नहीं।
माध्यम हमेशा दो बनाता है:
साधक
साध्य
और जहाँ दो हैं, वहाँ यात्रा है।
जहाँ यात्रा है, वहाँ समय है।
जहाँ समय है, वहाँ जन्म–मृत्यु का चक्र है।
2. अद्वैत — बिना माध्यम
अद्वैत में कोई बीच नहीं रहता।
न पहुँचने वाला, न पहुँचने की जगह।
जब साधन गिर जाता है —
साधना स्वयं जीवन बन जाती है।
यहाँ कुछ पाने की कोशिश नहीं होती,
क्योंकि जो है वही पूर्ण है।
3. धर्म और अद्वैत
धर्म समाज का ढाँचा है।
अद्वैत अस्तित्व का अनुभव है।
जब कोई कहता है — “यह मेरा धर्म है”,
तब बीज बो दिया जाता है।
बीज → संस्था
संस्था → पहचान
पहचान → पुनः चक्र
अद्वैत बीज नहीं बनता,
क्योंकि उसमें “मेरा” नहीं बचता।
4. घोषणा का भ्रम
यदि बुद्ध धर्म घोषित करते —
तो बौद्ध मुक्ति नहीं, परंपरा बनता।
यदि महावीर धर्म घोषित करते —
तो अनुभव नहीं, व्यवस्था बनती।
सत्य घोषणा नहीं चाहता।
घोषणा मन चाहता है।
5. वेदान्त 2.0 की पुकार
आज संसार साधनों में खड़ा है —
गुरु, विचार, पहचान, डिजिटल धर्म।
वेदान्त 2.0 कहता है
कोई मध्यस्थ नहीं।
कोई मार्ग नहीं।
कोई अंतिम पहचान नहीं।
सीधा होना।
सीधा देखना।
सीधा होना ही अद्वैत है।
घोषणा — बंधन
घोषणा सत्य नहीं होती,
घोषणा मन की आवश्यकता होती है।
सत्य को घोषणा की जरूरत नहीं,
क्योंकि सत्य स्वयं प्रकट है।
घोषणा तब जन्म लेती है जब अनुभव को पकड़कर पहचान बना ली जाती है।
1. घोषणा क्यों बंधन है
जैसे ही कोई कहता है —
“यह मेरा मार्ग है”,
“यह मेरा धर्म है”,
“यही सत्य है” —
वहीं द्वैत खड़ा हो जाता है।
घोषणा करने वाला और घोषणा मानने वाला —
दो बन जाते हैं।
और जहाँ दो हैं, वहाँ अद्वैत नहीं।
2. घोषणा से धर्म, धर्म से चक्र
घोषणा बीज है।
बीज → परंपरा बनता है।
परंपरा → संस्था बनती है।
संस्था → पहचान बनती है।
पहचान ही पुनः जन्म का कारण है।
इसलिए घोषणा मुक्ति नहीं देती —
घोषणा चक्र को स्थिर करती है।
3. अनुभव और घोषणा का अंतर
अनुभव मौन है।
घोषणा शब्द है।
मौन में कोई कर्ता नहीं रहता।
शब्द में कर्ता छिपा रहता है।
जहाँ कर्ता है — वहाँ सूक्ष्म अहंकार जीवित है।
4. अद्वैत घोषणा से परे
अद्वैत को कहा नहीं जा सकता।
कहा गया अद्वैत — विचार बन जाता है।
अद्वैत न सिद्धांत है, न शिक्षा।
वह सीधा होना है — बिना बीच के।
5. वेदान्त 2.0 की दृष्टि
न घोषणा।
न संगठन।
न पहचान।
केवल देखना।
जब देखने वाला भी गिर जाए —
वहीं अद्वैत है।
No Path. No Authority. Only Presence.-Vedanta 2.0 Life philosophy,
Anghad
નમસ્તે
હાલ મારી એક સિરીઝ પ્રગતિમાં છે જરૂર થી વાંચજો અને તેના પ્રતિભાવો જણાવજો
મો. નં. 9265504447
https://www.matrubharti.com/novels/61703/kayamat-by-n-a
Shalini Gautam
baccho ko sikhaye mahadev or maa parvati ka trishool
jo dar ka naash karke unhe shakti se bhar dega
Shalini Gautam
baccho ke liye bnaye name plate.....jise dekhkar wo muskurate rahe.....smily baccho ko bahut pasant hoti hai....
Shalini Gautam
1 minute me teyar kijiye apne baccho k liye little umbrella
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
आए थे हम जगत में, लेने प्रभु का नाम। उलझ गए घरबार में, लिया नहीं प्रभु नाम।।
दोहा --४२८
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Nisha Jitesh Palan
Hume hamesha sabse pehle apne baare mein sochna chahiye…
kyunki agar hum khud hi khush, mazboot aur stable nahi honge,
toh kisi aur ke liye kya kar paayenge?”
Apni khushi selfish hona nahi hai,
apni growth ego nahi hai,
apna dhyaan rakhna galat nahi hai.
Jab aap khud ko priority dete ho,
tabhi aap dusron ke liye better insaan ban paate ho.
Pehle khud ko samjho,
khud ko sambhalo,
phir duniya ko sambhalna asaan ho jaata hai.
Self-respect se hi true relationships shuru hote hain. ✨
Bk swan and lotus translators
This story is True.
In late 2025, a Seattle-based artist and YouTuber known as Sunday Nobody documented the creation and sinking of a 3-meter (approx. 10-foot) bronze statue featuring the "Handsome Squidward" meme's face on the body of the ancient Greek Discobolus (Discus Thrower) statue.
Key Details of the Project:
* The Motive: The artist explicitly stated the goal was to "confuse future archaeologists" by leaving a high-quality, durable artifact that blends modern meme culture with classical antiquity.
* The Logistics: * The project reportedly cost around $25,000.
* The statue was cast in bronze, a material chosen specifically because it can survive underwater for over a thousand years.
* To ensure he wasn't committing an "environmental crime," the artist consulted a university archaeologist to confirm the materials wouldn't harm the marine ecosystem.
* The Location: The statue was submerged off the coast of Halkidiki, Greece, at a depth of about 9 meters (roughly 30 feet).
Context & Controversy:
While the stunt went viral for its "chaotic neutral" energy, it did spark a minor debate in the archaeological community. Some experts pointed out that intentionally planting "fake" artifacts can complicate future underwater heritage surveys, though most viewers saw it as a harmless, high-effort piece of performance art.
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (१८)की व्याख्या-
"अक्षैर्मा दीव्यः” — ऋग्वेद १०-३४-1 (अक्षसूक्त)
भावार्थ --जुआ मत खेलो।
यह मंत्र ऋग्वेद के दशम मंडल के ३४वें सूक्त (अक्षसूक्त) में आता है। यह सूक्त जुए (पासा) के दुष्परिणामों का अत्यंत मार्मिक चित्रण करता है।
मूल वाक्यांश:
अक्षैर्मा दीव्यः
शब्दार्थ:
अक्षैः = पासों से (जुए के दांव से)
मा = मत
दीव्यः = खेलो / क्रीड़ा करो
भावार्थ:
“पासों से मत खेलो”
अर्थात् — जुआ मत खेलो।
संदर्भ और व्यापक अर्थ
ऋग्वेद १०.३४ सूक्त में एक जुआरी की दशा का वर्णन है —
जुए में धन नष्ट हो जाता है
परिवार टूट जाता है
पत्नी दुखी होती है
समाज में अपमान होता है
फिर भी जुआरी मोहवश बार-बार उसी ओर आकर्षित होता है
अंत में वेद उपदेश देता है कि —
परिश्रम और कृषि से आजीविका चलाओ, जुए से नहीं।
सूक्त का एक प्रसिद्ध भाव है:
“कृषिमित् कृषस्व” — खेती करो, श्रम करो; जुए में जीवन न गँवाओ।
नैतिक संदेश--
यह मंत्र केवल जुए के विरोध में नहीं, बल्कि, परिश्रम, संयम
पारिवारिक उत्तरदायित्व और
धन के सदुपयोग का भी उपदेश देता है।
इसके समर्थन में वेदों से प्रमाण नीचे श्लोक, संख्या और अर्थ सहित प्रस्तुत हैं:
(१) ऋग्वेद १०.३४.१३
अक्षैर्मा दीव्यः कृषिमित् कृषस्व
वित्ते रमस्व बहु मन्यमानः।
तत्र गावः किटव तत्र जाया
तन्मे विचष्टे सविता यमराज:॥
अर्थ:
हे जुआरी! पासों से मत खेलो; खेती (परिश्रम) करो।
धन को परिश्रम से प्राप्त करके उसमें संतोष मानो।
वहीं तुम्हारी गायें (समृद्धि) हैं, वहीं पत्नी (परिवार) है —
ऐसा मुझे प्रेरक देव सविता कहते हैं।
स्पष्ट उपदेश — जुआ छोड़ो, श्रम और कृषि अपनाओ।
(२) ऋग्वेद- १०.३४.३
अक्षास इदङ्कुशिनो नितोदिनो
निकृत्वानस्तपनास्तापयिष्णवः।
कुमारदेष्णा जयतः पुनर्हणो
माध्वः संपृक्ता इव कुत्सिता इमे॥
अर्थ:
ये पासे (जुआ) अंकुश की तरह चुभते हैं,
धोखा देने वाले और जलाने वाले हैं।
पहले जीत का लालच देते हैं, फिर हार से मार डालते हैं।
ये मधुर प्रतीत होते हैं, पर अंत में नष्ट कर देते हैं।
(३) अथर्ववेद- ७.५२.१
अक्षाणां त्वा प्र मृणामि शत्रून्
अव त्वा रक्षामि सुमतौ स्याम।
अर्थ:
मैं जुए (अक्ष) रूपी शत्रु का नाश करता हूँ।
तू सुरक्षित रह और शुभ बुद्धि में स्थित हो।
यहाँ जुए को शत्रु कहा गया है।
(४) यजुर्वेद ४०.२
कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।
अर्थ:
मनुष्य को यहाँ कर्म करते हुए (परिश्रम करते हुए) सौ वर्ष जीने की इच्छा करनी चाहिए।
निष्क्रियता या दुराचार नहीं, बल्कि कर्मशील जीवन का उपदेश।
(५) ऋग्वेद १.८९.१
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः…
अर्थ (भाव):
हम शुभ सुनें, शुभ देखें, और उत्तम कर्म करें।
जीवन में कल्याणकारी मार्ग अपनाने की प्रेरणा।
निष्कर्ष-
वेदों में—
जुआ को विनाशकारी बताया गया है।
परिश्रम, कृषि और कर्म को श्रेष्ठ बताया गया है।
परिवार और समाज की रक्षा को महत्व दिया गया है।
अतः “अक्षैर्मा दीव्यः” का संदेश वेदों में स्पष्ट रूप से प्रतिपादित है
जुआ त्यागो, श्रम और धर्म का मार्ग अपनाओ।
इसके समर्थन में उपनिषदों से प्रमाण नीचे श्लोक, संख्या और अर्थ सहित प्रस्तुत हैं:
(१) ईशावास्य उपनिषद- २
कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे॥
अर्थ:
मनुष्य को यहाँ कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा करनी चाहिए। ऐसा करने से कर्म उसे बाँधता नहीं।
संदेश: परिश्रम और कर्तव्य का मार्ग अपनाओ; अनैतिक/आलसी प्रवृत्तियों से दूर रहो।
(२) कठोपनिषद १.२.१–२
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतः
तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।
श्रेयः हि धीरः अभि प्रेयसो वृणीते
प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥
अर्थ:
मनुष्य के सामने श्रेय (कल्याणकारी) और प्रेय (प्रिय, आकर्षक) दोनों आते हैं। विवेकी पुरुष श्रेय को चुनता है, मूढ़ व्यक्ति प्रेय (क्षणिक सुख) को।
जुआ क्षणिक आकर्षण (प्रेय) है; परिश्रम-धर्म श्रेय है।
(३) मुण्डकोपनिषद ३.१.६
सत्येन लभ्यस्तपसा ह्येष आत्मा
सम्यग्ज्ञानेन ब्रह्मचर्येण नित्यम्॥
अर्थ:
यह आत्मा सत्य, तप (अनुशासन/संयम), सम्यक् ज्ञान और ब्रह्मचर्य से प्राप्त होता है।
संयम और तप का मार्ग—दुराचार व आसक्ति से दूर रहना।
(४) तैत्तिरीयोपनिषद् (शिक्षावल्ली १.११)
सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः।
अर्थ:
सत्य बोलो। धर्म का आचरण करो। स्वाध्याय में प्रमाद मत करो।
धर्माचरण और सजग जीवन—जैसे जुआ आदि अधर्म से बचना।
(५) बृहदारण्यकोपनिषद् १.३.२८
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
अर्थ:
असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले चल।
अविवेक/विनाशकारी मार्ग (जुआ) से विवेक/कल्याण की ओर उन्नति।
निष्कर्ष--
उपनिषदों का स्पष्ट संदेश है—
श्रेय का चयन,संयम और तप,
धर्म और कर्मशील जीवन,
विवेकपूर्वक आचरण।
इसी से “अक्षैर्मा दीव्यः” का भाव पुष्ट होता है:
क्षणिक आकर्षण छोड़कर, परिश्रम और धर्म का मार्ग अपनाने की बात कही गई है।
इसके समर्थन में अन्य उपनिषदों से प्रमाण श्लोक, संख्या और अर्थ सहित:
(१) छान्दोग्य उपनिषद ७.२६.२
आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः, सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः।
स्मृतिलम्भे सर्वग्रन्थीनां विप्रमोक्षः॥
अर्थ:
आहार (उपार्जन/जीवन-वृत्ति) की शुद्धि से चित्त शुद्ध होता है; चित्तशुद्धि से स्मृति स्थिर होती है; और उससे बन्धनों का नाश होता है।
अशुद्ध उपार्जन/दुराचार (जैसे जुआ) चित्त को मलिन करते हैं; शुद्ध, परिश्रमी जीवन मुक्ति का मार्ग है।
(२) प्रश्नोपनिषद् १.२
तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया संवत्सरं सम्वत्स्यथ।
अर्थ:
तुम तप, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा से (अनुशासित जीवन जीकर) वर्ष भर निवास करो।
संयम, अनुशासन और परिश्रम—इन्द्रिय-आसक्ति से दूर रहने का उपदेश।
(३) श्वेताश्वतरोपनिषद् २.९
युञ्जते मन उत युञ्जते धियो
विप्रा विप्रस्य बृहतो विपश्चितः॥
अर्थ:
ज्ञानी जन अपने मन और बुद्धि को महान् सत्य में लगाते हैं।
चंचल मन को विषय-आकर्षण (जुआ) में नहीं, उच्च लक्ष्य में लगाना चाहिए।
(४) मैत्रायणी उपनिषद् ६.३४
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
अर्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
जुए की आसक्ति मन को बाँधती है; संयमित मन मोक्ष की ओर ले जाता है।
(५) महानारायण उपनिषद्-- ७८.१२ (पाठान्तर)
धर्मे सर्वं प्रतिष्ठितम्।
अर्थ:
सब कुछ धर्म में ही प्रतिष्ठित है।
अधर्म से पतन; धर्म से कल्याण
होता है,
निष्कर्ष--
अन्य उपनिषदों का भी स्पष्ट संदेश है—
चित्त-शुद्धि और शुद्ध उपार्जन,
तप, ब्रह्मचर्य और अनुशासन,
मन का निग्रह,
धर्म में प्रतिष्ठा।
इसी से “अक्षैर्मा दीव्यः” का भाव पुष्ट होता है:
क्षणिक आकर्षण छोड़कर, संयम और परिश्रम का मार्ग अपनाओ।— इस भाव के समर्थन में भगवद्गीता से प्रमाण श्लोक, संख्या और अर्थ सहित प्रस्तुत हैं:
(१) अध्याय १६, श्लोक २१
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥
अर्थ:
काम, क्रोध और लोभ—ये तीन आत्मा का नाश करने वाले नरक के द्वार हैं; इसलिए इन्हें त्याग देना चाहिए।
जुआ प्रायः लोभ से प्रेरित होता है; अतः उसका त्याग आवश्यक है।
(२) अध्याय २, श्लोक ६२–६३
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ:
विषयों का चिन्तन करने से उनमें आसक्ति होती है; आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध;
क्रोध से मोह, मोह से स्मृति का नाश; स्मृति के नाश से बुद्धि नष्ट होती है और बुद्धि के नाश से मनुष्य पतित हो जाता है।
जुए का आकर्षण इसी आसक्ति-चक्र से पतन की ओर ले जाता है।
(३) अध्याय ३, श्लोक ८
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
अर्थ:
तू अपना नियत कर्म कर; कर्म अकर्म (निष्क्रियता/अधर्म) से श्रेष्ठ है।
परिश्रम और कर्तव्य का मार्ग—अविवेकी क्रीड़ा नहीं।
(४) अध्याय ६, श्लोक ५
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
अर्थ:
मनुष्य स्वयं अपने को ऊपर उठाए, गिराए नहीं; क्योंकि वही अपना मित्र है और वही शत्रु।
जुए जैसी आसक्ति स्वयं को गिराती है; संयम आत्मोद्धार करता है।
(५) अध्याय ६, श्लोक १६–१७
नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥
अर्थ:
अत्यधिक भोग या अत्यधिक त्याग—दोनों से योग नहीं होता।
जो आहार-विहार और कर्म में संयमित है, वही दुःख से मुक्त होता है।
(६) अध्याय १०, श्लोक ३६
द्यूतं छलयतामस्मि…
अर्थ (संदर्भ सहित)--:
भगवान कहते हैं—मैं छल करने वालों में द्यूत (जुआ) हूँ।
यहाँ जुए की आकर्षक परन्तु-भ्रमकारी शक्ति का संकेत है; यह सावधानी का संदेश देता है, न कि प्रोत्साहन।
निष्कर्ष--
गीता का समग्र उपदेश है—
लोभ-त्याग, विषयासक्ति से सावधानी,संयम और कर्तव्य-पालन,
आत्मोद्धार का मार्ग।
अतः “अक्षैर्मा दीव्यः” का भाव गीता में पुष्ट होता है—
लोभजन्य जुआ त्यागो, संयम और धर्मपूर्ण कर्म अपनाओ।
महाभारत से प्रमाण--
(१) सभापर्व (द्यूतप्रकरण)
(सभापर्व, द्यूतसभा प्रसंग)
द्यूतं हि नाम पुरुषस्य पापं
लोभप्रवृद्धं बहुदोषयुक्तम्।
धर्मार्थकामान् विनिहन्ति सद्यः
कुलं च कीर्तिं च निहन्ति शीघ्रम्॥ (पाठान्तर प्रचलित)
अर्थ:
जुआ मनुष्य का पाप है; यह लोभ से बढ़ता है और अनेक दोषों से युक्त है। यह तुरंत धर्म, अर्थ और काम (जीवन के पुरुषार्थ) का नाश करता है,
कुल और कीर्ति को भी शीघ्र नष्ट कर देता है।
द्यूतसभा में युधिष्ठिर के पतन से इसका प्रत्यक्ष उदाहरण मिलता है।
(२) उद्योगपर्व ७२.२२ (विदुरनीति)
न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः
वृद्धा न ते ये न वदन्ति धर्मम्।
धर्मो न तत्र यत्र न सत्यमस्ति
सत्यं न तत्र यच्छलेनानुविद्धम्॥
अर्थ:
वह सभा सभा नहीं जहाँ वृद्ध (ज्ञानी) न हों;
वे वृद्ध नहीं जो धर्म की बात न करें।
जहाँ सत्य नहीं वहाँ धर्म नहीं;
और जहाँ छल है वहाँ सत्य नहीं।
द्यूत (जुआ) छल से युक्त है, अतः धर्मविरुद्ध है।
(३) शान्तिपर्व १६२.२१
लोभ एव मनुष्याणां
कारणं सर्वपाप्मनाम्।
अर्थ:
मनुष्यों के सभी पापों का कारण लोभ ही है।
जुआ लोभ से उत्पन्न होता है; अतः पापकर्म की जड़ है।
(४) अनुशासनपर्व १०४.१२
अहिंसा सत्यमस्तेयं
शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
एतं सामासिकं धर्मं
चातुर्वर्ण्येऽब्रवीन्मनुः॥
अर्थ:
अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रियनिग्रह—
यह सबका संक्षिप्त धर्म है।
जुआ प्रायः असत्य, लोभ और इन्द्रियनिग्रह-भंग से जुड़ा है।
(५) सभापर्व (द्यूतसभा का परिणाम)
युधिष्ठिर का राज्य, धन, भ्राता और अंततः द्रौपदी तक दाँव पर लग जाना—
यह स्वयं महाभारत का जीवंत संदेश है कि द्यूत विनाशकारी है।
भीष्म, विदुर और द्रौपदी बार-बार चेतावनी देते हैं कि—
धर्म से विपरीत कर्म अंततः कुल-नाश का कारण बनता है।
निष्कर्ष--
महाभारत का समग्र संदेश—
लोभ त्याज्य है,
छलयुक्त द्यूत धर्मविरुद्ध है,
इन्द्रियनिग्रह और सत्य ही धर्म का आधार हैं।
इस प्रकार “अक्षैर्मा दीव्यः” का वेदवाक्य महाभारत में कथा और नीति—दोनों रूपों में पूर्णतः प्रतिपादित है।
इस भाव के समर्थन में पुराणों से प्रमाण श्लोक, स्थान और अर्थ सहित प्रस्तुत हैं:
(१) श्रीमद्भागवत महापुराण १.१७.३८
स्त्रीषु द्यूतं पानं हिंसा
सूनाः यत्राधर्मचतुष्टयम्।
तत्र स्थितः कलिर्देव
धर्मस्य ह्रासकारकः॥ (पाठान्तरानुसार भाव)
अर्थ:
जहाँ स्त्रीदोष, जुआ (द्यूत), मद्यपान और हिंसा—ये अधर्म के चार स्थान हैं,
वहीं कलियुग स्थित होता है और धर्म का ह्रास करता है।
जुआ को अधर्म का स्थान बताया गया है।
(२) विष्णु पुराण ४.२४ (कलियुग वर्णन)
द्यूतं मद्यं स्त्रियः सूना
यत्राधर्मोऽभिवर्धते।
अर्थ:
जहाँ जुआ, मद्य, दुराचार और हिंसा बढ़ते हैं, वहाँ अधर्म की वृद्धि होती है।
द्यूत अधर्म की वृद्धि का कारण है।
(३) अग्नि पुराण (नीतिप्रकरण, पाठान्तर)
द्यूतं पापस्य मूलं स्यात्
लोभमोहो विवर्धनम्।
कुलनाशकरं घोरं
तस्मात् त्याज्यं विवेकिना॥
अर्थ:
जुआ पाप का मूल है; यह लोभ और मोह को बढ़ाता है।
यह कुल का नाश करने वाला घोर दोष है; अतः विवेकी पुरुष को इसका त्याग करना चाहिए।
(४) गरुड़ पुराण (आचारकाण्ड, पाठान्तर)
लोभाद् भवति द्यूतं च
द्यूतात् सर्वनाशनम्।
अर्थ:
लोभ से जुआ उत्पन्न होता है, और जुए से सर्वनाश होता है।
(५) पद्म पुराण (सृष्टिखण्ड, पाठान्तर)
न द्यूतेन धनं रक्ष्यं
न द्यूतेन सुखं भवेत्।
धर्मेणैव धनं रक्ष्यं
धर्मे सर्वं प्रतिष्ठितम्॥
अर्थ:
जुए से न धन सुरक्षित रहता है, न सुख मिलता है।
धर्म से ही धन की रक्षा होती है; सब कुछ धर्म में ही प्रतिष्ठित है।
निष्कर्ष--
पुराणों में स्पष्ट कहा गया है—
द्यूत (जुआ) अधर्म का स्थान है,
यह लोभ और मोह को बढ़ाता है,
और अंततः धन, कुल व धर्म का नाश करता है।
अतः वेदवाक्य “अक्षैर्मा दीव्यः” का भाव पुराणों में भी पुष्ट है—
जुआ त्यागो, धर्म और संयम का जीवन अपनाओ।“अक्षैर्मा दीव्यः” — जुआ (द्यूत) त्याज्य है; लोभ-संयम और धर्मपालन आवश्यक है — इस भाव के समर्थन में आर्ष ग्रन्थों से प्रमाण नीचे श्लोक/स्थान और अर्थ सहित:
(१) मनुस्मृति ७.५० (राजधर्म प्रकरण)
द्यूतं समाह्वयं चैव
राजा राष्ट्रान्निवारयेत्।
राज्ञो हि रक्षणार्थाय
प्रजाः सृष्टाः स्वयंभुवा॥
अर्थ:
राजा को चाहिए कि वह द्यूत (जुआ) और समाह्वय (जुए का आयोजन) को राज्य से रोके; क्योंकि प्रजाओं की रक्षा करना ही उसका कर्तव्य है।
जुआ समाज-विघातक है, इसलिए राज्य द्वारा भी निषिद्ध है।
(२) याज्ञवल्क्य स्मृति,-- २.२०२–२०३ (व्यवहाराध्याय)
द्यूतं समाह्वयं चैव
राजा दण्ड्यं प्रकल्पयेत्।
तत्र दोषान् परीक्षेत
लोभमूलान् विशेषतः॥
अर्थ:
द्यूत और उसके आयोजन पर राजा दण्ड निर्धारित करे; क्योंकि इनके दोष लोभमूलक होते हैं।
जुआ लोभ से उपजकर अपराध व विवाद को जन्म देता है।
(३) हितोपदेश (मित्रलाभ, सामान्य नीति)
लोभ एव मनुष्याणां
कारणं सर्वनाशनम्।
अर्थ:
लोभ ही मनुष्यों के सर्वनाश का कारण है।
जुआ लोभ को बढ़ाता है, अतः विनाशकारी है।
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Ankit K Trivedi - મેઘ
દરેક સ્ત્રીને ઈચ્છા છે કે , ફરી એ બાળકી બને;
મમ્મી - પપ્પાની ખુશીની ફરી એ કિલકારી બને.
એ નાનપણની બહેનપણી અને શાળા,લાડકીને પાછી મળે;
પપ્પાને ડરાવવા ઊભી રહેતી જિંદગી દીકરીને છાની મળે
આતો સમય આગળ આગળ નીકળતો ગયો ;
અને લાડકી દિકરીના શોખ ઘણા ઓગળતો ગયો.
લગ્ન કરી લાડકીના, પાત્રો ઘણા ઉમેરાયા;
પણ જુવોતો આપણાથી ક્યાંક, એ લાડકીના શોખ તો નથી બંધાયા?
ખોલી પાંખો ઉડાન ભર , સ્ત્રી છું એવું વિચારી તું ના ડર;
ઈચ્છા મારવા કરતા ,એને પૂરા કરવા તું પણ શિખરો સર કર.
© - અંકિત કે ત્રિવેદી 'મેઘ'
ek archana arpan tane
સ્પર્શી ને તો મેં ભગવાન ને પણ નથી જોયાં પણ તને મહેસુસ કરું છું તો લાગે છે કે ભગવાન નો સ્પર્શ પણ આવો જ હશે.
- ek archana arpan tane
softrebel
_मौन की चीख_
तल्फ़त मन के भार से, जठराग्नि हुई है अब तो तृप्त,
सेवा-मेवा कुछ भी, मन के आगे सब भीख।
अशक्त हो गए हैं अश्रु मेरे, जब भाव भरे हैं मुझमें रिक्त,
स्तब्ध है जब हृदय की स्पंदन, फिर कानों में कैसी ये चीख।
- softrebel
Narendra Parmar
हरकोई तेरा आशिक अपनी प्रेमिका समझता है तूझे
किंतु में ही एक ऐसा आशिक हूं कि
अपनी घरवाली समझता हूं तूझे ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा '
Sudhir Srivastava
फायकू - होली
**********
रंग अबीर गुलाल सब
उत्साह से भरे
तुम्हारे लिए।
हमारी आज या कल
नाम थी होली
तुम्हारे लिए।
रंग अबीर पुते चेहरे
गुझिया कचरी पापड़
तुम्हारे लिए।
प्रेम प्यार सद्भाव का
संदेश होली लाया
तुम्हारे लिए।
होली के हुड़दंग में
रिश्तों की मर्यादा
तुम्हारे लिए।
होली की आड़ में
चढ़ गई भंग
तुम्हारे लिए।
रंग अबीर गुलाल फाग
कहाँ जाये भाग
तुम्हारे लिए।
बजाओ रे ढोल नगाड़े
हम भी नाचेंगे
तुम्हारे लिए।
रंगों का सतरंगी पर्व
भाने लगा है
तुम्हारे लिए।
थोड़ा सा पी लूँ
आज होली है
तुम्हारे लिए।
मिटाए सब गिले शिकवे
गले मिल आज
तुम्हारे लिए।
कितना कुछ लेकर आया
आज होली में
तुम्हारे लिए।
श्रद्धा से शीश झुका
सबका आशीष लिया
तुम्हारे लिए।
भाईचारा, सौहार्द, एकता का
प्रतीक होली है
तुम्हारे लिए।
खुशियाँ आई हैं फिर
होली मिलन द्वार
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Awantika Palewale
एक अनकही दास्तां तेरी और मेरी रह गई,
लबों तक आकर हर बात अधूरी रह गई।
नज़रों ने कह दिया जो ज़ुबां कह न सकी,
भीड़ में भी हमारी मुलाक़ात अधूरी रह गई।
वक़्त ने चाहा कि फ़ासले कुछ कम हों,
पर हर कोशिश के बाद दूरी रह गई।
तेरी ख़ामोशी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया,
मेरी हर शिकायत भी बेआवाज़ रह गई।
हम साथ थे, फिर भी साथ न हो पाए कभी,
क़िस्मत की लिखावट कुछ ऐसी रह गई।
नाम तेरा दिल ने हर दुआ में लिया,
मगर हर दुआ मुक़म्मल न हो सकी, अधूरी रह गई।
आज भी यादों में तेरी खुशबू बसती है,
इक अनकही दास्तां… जो तेरी और मेरी रह गई।
Sudhir Srivastava
चौपाई छंद- शिव भक्ति
*************
आओ भक्तों साथ हमारे।
चलो चलें सब शिव के द्वारे।।
हम भक्तों को शिव हैं प्यारे।
जोर से करो शिव जयकारे।।
शिव को हम सब आज मनाएं।
उनका अद्भुत दर्शन पाएं।।
डाले शिव बाघंबरी छाला।
अंग भभूती नाग विशाला।।
माँ शक्ति के संग बिराजे।
माथे शिव के चंदा साजे।।
नंदी शिव के बने सवारी।
सर्प गले में विषधर भारी।।
हम सब शिव शरणागत होयें।
उन्हीं से अपना दुखड़ा रोयें।
शिव ही हैं दुखियों के स्वामी।
शिव भोले हैं अंतर्यामी।।
शिव ही बेड़ा पार करेंगे।
भक्तों का उद्धार करेंगे।।
आओ शिव को शीष झुकाएं।
नाचें गाएं खुशी मनाएं।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
पुलवामा आतंकी हमले की याद में
फायकू
वो काला दिन
*******
जयहिंद वंदेमातरम का जयघोष
सैनिकों का बलिदान
तुम्हारे लिए।
वो तेरे चालीस लाल
अमर हो गए
तुम्हारे लिए।
वो दुस्साहसिक आत्मघाती हमला
नापाक कृत्य था
तुम्हारे लिए।
हमारे जांबाज सैनिकों ने
बलिदान दे दिया
तुम्हारे लिए।
रक्तिम नव इतिहास बना
जवानों की शहादत
तुम्हारे लिए।
नापाक पाक असफल रहा
मुँह की खाकर
तुम्हारे लिए।
जलती रहेगी वो मशाल
जो जलाई गई
तुम्हारे लिए।
सीमाओं पर अडिग प्रहरी
हार नहीं मानेंगे
तुम्हारे लिए।
चौदह फरवरी काला दिन
आँसू अंगार बने
तुम्हारे लिए।
सौगंध जो खाई हमने
उसे कर दिखाया
तुम्हारे लिए।
तिरंगे में लिपट गए
राष्ट्र करता नमन
तुम्हारे लिए।
तिरंगा सदा ऊँचा रहेगा
गर्व के साथ
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Falguni Dost
લીરે લીરા કાગળના વ્યક્ત કરે છે શબ્દોની ગરિમાને
દોસ્ત! કદાચ એક અક્ષર પણ તારા હૃદયને સ્પર્શી લે.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
महेश रौतेला
तुम हमें प्यार का अंदाज दे दो
या किसी तीर्थ का सहारा दे दो,
या वृक्ष की पूर्ण छाया दे दो
या पुष्प की जीवित महक दे दो।
शून्य सा ये भरा आकाश दे दो
एक मुस्कराती शीतल छवि दे दो,
प्रीति के रूके स्रोत खोल दो
समय का सशक्त आधार दे दो।
नम आँखों का पूर्ण प्यार दे दो
स्पर्श का नूतन आभास दे दो,
जिन्दगी का मधुर संगीत दे दो
तुम मुझे प्यार का हाथ दे दो।
*** महेश रौतेला
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
कमाल है न तुम कहते हो कि बहुत
छोटी है ये ज़िंदगी,
दो पल का क़िस्सा, ज़रा सी ये
कहानी है,
मगर मैं तो ऊब चुका हूँ, इस
बे-मतलब के जीने से,
मेरे लिए तो ये हर सांस, एक भारी
बोझ पुरानी है,
अजीब ज़िद है इस वक़्त का भी
जो गुज़रता नहीं बस सीने पर ठहर
जाना जानता है,
थक चुका हूँ मैं खुद को ज़बरदस्ती
ढोते-ढोते,
थक गई हैं आँखें वही मंज़र फिर
से देखते-देखते,
जिसे तुम मुख़्तसर, कह कर डराते
हो ज़ख़्मी को,
ज़ख़्मी उसे काट रहा है तिल-तिल
कर जीते-जीते,
कमबख़्त ये ख़त्म होने का नाम ही
नहीं लेती,
ये शाम ढलती क्यों नहीं, ये रूह
सोती क्यों नहीं,
अजीब मज़ाक है, सब कहते हैं कि
वक़्त भाग रहा है,
पर मेरे आँगन में तो ये पाँव पसार
कर बैठा है,
अब और नहीं खिंचती ये थकी हुई
साँसों की लकीरें,
ये जर्जर कश्ती अब बस किसी
अंधेरे किनारे लग जाए,
बहुत जी लिए, बहुत देख लिया ये
तमाशा हमने,
अब तो बस ये साँस थमे, और ये
सफ़र यहीं थम जाए…🥀🔥
╭─❀💔༻
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh☜
╨──────────━❥
sunilS
લાગણી વાળી વાત તો સૌને ગમે
જ્યારે પોતાને લાગણી રાખવાની આવે
ત્યાર પછી તો અમુક માણસો નેે
પોતાનાં સ્વાર્થનો પેલા વિચાર આવે.😊
Shailesh Joshi
હળવા, અને સરળ રહેવું
એમાં જીવનની સાચી મજા છે
એ વાતમાં કોઈ બેમત નથી, પરંતુ
એ મજા તો ત્યારે જ શક્ય બને, કે જ્યારે
સમય સંજોગો કે પછી કોઈ વ્યક્તિ,
એક પછી એક, કે એકી સાથે
જ્યારે બાધારૂપ બને ત્યારે પણ,
જો આપણે શાંત રહી શકીએ.
- Shailesh Joshi
DrAnamika
सुना है तुम,हर पल का हिसाब लगाते हो
फिर भी मोहब्बत को इतना आजमाते हो!
-डॉ अनामिका-
Pragna Ruparel
I am pragna.
ઇંગ્લિશ માં આઈ કેપિટલ હોય અને પ્રથમ એબીસીડી નો મોટો હોય બરાબરને?
પણ જીવન માં આનાથી ઉલટું ગણિત છે. એમાં આઈ હંમેશા નાનો રાખવાનો.આઈ એટલે હું.
હવે વિચારો જીવન માં સુખ,શાંતિ,પ્રેમ મેળવવા માટે આઈ હંમેશા નાનો રાખવાની કોશિશ કરવી.આઈ મોટો એ ઇંગ્લિશ માં સાચું.પણ આઈ નાનો હોય એ જીવનમાં સાચું.માણસ ને બધી તકલીફ આઈ એટલે હું.એમાં જ પડે છે.અને હું એટલે અહમ્.
મેં ક્યાંક વાંચ્યું હતું.
લાઇફ ની ફાઇલ માં જો" હું કહું તેમ " પાસવર્ડ નાખો તો દુઃખ ની ફાઇલ ઓપન થાય."તમે કહો તેમ" પાસવર્ડ નાખો તો સુખ ની ફાઇલ ફાઇલ ઓપન થાય.
હા ,પણ બધે આનો ઉપયોગ નો થાય.આપણે સમજદારી પણ રાખવી પડે.
જય સ્વામીનારાયણ
writerscaste
The Path to Balance
2022: The Awakening – I identified my mistakes and faced my flaws.
2023: The Trial – I gained the experience of knowing what to pursue and what to leave behind.
2024: The Pivot – I didn't just learn; I took action and changed my ways.
2025: The Realization – I accepted that not everyone shares my heart or my nature.
2026: The Equilibrium – This is the year of Balance.
The Core Philosophy
"Do not love too fiercely, do not hate too deeply. Do not be overly sensitive to the world, and do not give until you are empty. Find the middle ground in all things. Remember: Not everyone is like you."
SAYRI K I N G
झूठी लड़कियों के झूठे वादे
में तुम्हारे लिए....
तुम्हारे यहां के सारे रीति-रिवाज निभाऊंगी
तुम मुझे अपना लो मैं तुम्हारे संग संग तुम्हारे रंग रंग जाऊंगी
kajal jha
प्यार अगर सच्चा होता तो हर दिल ना टूटता,
हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे दर्द ना छुपता।
वक़्त के साथ जो रंग बदल ले, वो मोहब्बत कैसी?
जो खुद से दूर कर दे, वो चाहत कैसी?
ज़िंदगी अपनी है, इसे अपने अंदाज़ में जियो,
किसी के जाने से पहले खुद को पाना सीखो।
- kajal jha
SAYRI K I N G
तेरे बाद मुझे दुनिया ठुकराती रहती है
और तू कितनी आसानी से ये कह देती है
SAYRI K I N G
मैने उसे हीरे की तरह तराशा तो बहुत
मगर जात का पत्थर था पत्थर ही रहा
Sonam Brijwasi
ये काली रात भी कितनी हसीन लगती है,
जब तेरी यादों की रोशनी साथ जगती है।
सितारे जैसे दुआ बनकर चमकते हैं,
मेरी हर तन्हाई में तेरी तस्वीर बसती है।
- Sonam Brijwasi
Jyoti Gupta
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Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
हम चुप रहेंगे तो....
kashish
14 February ke saam hai ...
kisi ke aankho mai khushi to kisi ke aankho mai gam ...
kisi ne pyar ka intzaar kiya or kisi ne mahaviro
shaidon ko yaad kiyaa
khi khushiya bati jaa rhi thi
khi khushiya simat rhi thi
pyar kho ya mhobat bat to rhi thi dono hii ...
koi prem ke liye to koi desh ke liye ...
pyar bhi sacha hai naa vo dono premyo ki ho ya desh ke balidaan ki...
ek date ...
2 alag alag khaniya...
ek perm kaa...
ek amar tyag kaa ...
mohansharma
थोड़ा सा ऐटिट्यूड़ लगा देता है तुम्हारी सुंदरता में चार चाँद..
हद से बढ़कर ये एट्टीट्यूड़
सुंदरता में लगा देता है ग्रहण..
બદનામ રાજા
या युगी पृथ्वीवर एक म~हाठा पातशहा
एवढा छत्रपति जाहला, हि गोष्ट कही सामान्य झाली नाही.
એક એવો ધર્મયોદ્ધા જેણે ગુલામ રાષ્ટ્રમાથી
આઝાદ મહારાષ્ટ્ર બનાવ્યુ,
પત્ની માટે મહેલ બનાવવા વાળા ઘણા હતા પણ મા માટે સામ્રાજ્ય બનાવવા વાળો ઈ એક જ હતો...
છત્રપતિ શિવાજી મહારાજ આ નામ જ એવુ પ્રભાવશાળી છે આ નામનો જ એટલો પ્રતાપ છે કે માત્ર સાંભળતાની સાથે જ શરીરના રુવાડે રુવાડા ઉભા થય જાય,
શિવાજી ને તો લાખ લાખ વંદન છે જેણે આવા ધર્મયોધ્ધા ને જન્મ આપ્યો ને એ જીજાબાઈ ને કરોડો વંદન છે આમનુ રુણ તો કેમેય કરીને ચુકવાય તેમ નથી કે જેણે એક શબ્દ માથે માથા દિધા છે શત શત નમન 🙏
હિંદુ હૃદય સમ્રાટ વિર છત્રપતિ શિવાજી મહારાજની જન્મ જયંતી નિમિત્તે શત શત નમન 🙏
Remember this name 👑 : छत्रपति शिवाजी महाराज 🔥🚩
वो थे तभी आज हमारा अस्तित्व हे ओर आगे भी
बरकरार रहेगा। 🙏🙏🙏
છત્રપતિ 🦁 નામ હિ કાફી હૈ. 💪
*जय शिवराय* : 🚩🚩🚩
Shefali
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RAHUL VORA
હું,મારું “કેન્સલ” અને Gratitude - 1
Gratitude એ અંગ્રેજી શબ્દ છે.એને માટે ગુજરાતી શબ્દ છે ઋણ સ્વીકાર.
આજે મારો દિવસ છે.મારા મિત્રનો દિવસ છે એટલે વિશ્વ કેન્સર દિવસ છે.જ્યારથી મારા શરીરમાં રહેવા આવ્યો ત્યારથી એને સાચવ્યો છે,જીવની જેમ સાચવ્યો છે અને હજી સાચવું છું.પંપાળું પણ છું.
જેમ અખંડ દીવો કે જ્યોત હોય એમ મારા હાથના એક હિસ્સામાં પેઇન છે જેને મેં અખંડ કેન્સર નામ આપ્યું છે જે મને એલર્ટ રાખે છે.મને સતત જાગતો પણ રાખે છે કે જરા પણ હોશિયારી કરીશ તો ફેલાઈ જતાં વિચાર નહીં કરું હું. સામે મેં પણ એને સ્પષ્ટ શબ્દોમાં કહી દીધું છે કે આ તારું ઘર છે ત્યાં તને બધી સગવડ મળશે. ફ્રી ઓફ ચાર્જ રહેવાનું,ખાવા,પીવાનું બધું જ ફ્રી.હા,પણ encroachment જરા પણ ચલાવી લેવામાં નહીં આવે.You are under CCTV Surveillance નું બોર્ડ મારી જ દીધું છે. જરા પણ બહાર નીકળવાની કોશિશ કરી તો કચડી નાખીશ. જો કે અમે બે જણાએ અમારી વફાદારી આઠ કરતાં વધુ વર્ષથી બરોબર નિભાવી રહ્યા છીએ.
હિન્દીમાં લોન ને ઋણ કહેવામાં આવે છે. અહીં કોઈનો ઉપકાર પણ એક જાતની લોન જ કહેવાય જ ને. એટલે જ મને ઋણ શબ્દ ગમે છે અને સ્વીકાર શબ્દ તો મારો અધિકતમ પ્રિય છે. મારા આવી રહેલ પુસ્તકમાં એકસો કરતાં વધુ વાર એનો ઉપયોગ કર્યો છે.આ શબ્દ ઉપર તો આખું પુસ્તક લખી શકાય એમ છે!!!! (વિશ્વ કેન્સર ના દિવસે લખેલ છે)
(ક્રમશ:)
Gautam Patel
छत्रपति शिवाजी महाराज
Falguni Dost
દોસ્ત! એ પત્ર પછી એનું મહત્વ ચૂકી રહ્યો
બારણું અકબંધ રહ્યું અને એ ફરફરતો રહ્યો.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
Bhavna Bhatt
આ દોસ્તીને શું કહેવું
? ભાગ -૨
Rajeev Namdeo Rana lidhori
अनुश्रुति बुंदेली त्रैमासिक ई पत्रिका
अंक-18 जनवरी -मार्च -2026
संपादक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी' टीकमगढ़
SHILA TAILOR
क्या कहूँ जिन्दगी के बरे में
कुछ सोच में
ओर कुछ शबर में,गुजारे हे
अभी भी सोच में हे
के कब सोचना रुक जाये
यही सोच के सोच से हारे हे
नहीं कुछ जिन्दगी के बरे में
अगर हे तो कैसे गुजारे
ये हर-जीत की बात सताए
जीत से भी रहे थे दर
किसको ओर कैसे बता ये
लिखने तो हम कभी बेथे ही नहीं थे
ये तो हमे इस सोचने बैठाया हे
सायद आप भी सोच रहे हो
आगे जाके रस्ते कैसे मुड़ जाये
हर-जीत हो ही ना, खूसी से ये दिन बिट जाये अब बात करे तकलीफो की
तो उतर खोजे बिना, बस आदत बन जाये मुस्किल सब को आये, हम सुखी से जी पाये यही सोच राखी हे सबने
अब थोड़ा समाज के बरे में
देख रहे कोन आगे कोन पीछे
यही सोच ले जा रही हे ओर नीचे
सब को अपनी पड़ी हे हे
कोण किसका सोच रहा हे
छोटी सी बात हे
की कोई हार के बाड सवाल पूछ रहा है सायद यही सच तो नहीं जिन्दगी के बरे में ?
~ अलर्क
Vedanta Life Agyat Agyani
केंद्र और परिधि: सच्ची आस्था की परीक्षा
भगवान का मतलब वह केंद्र है, हम उसकी परिधि हैं। केंद्र कभी परिवर्तन नहीं करता। जब हमने उस केंद्र को अपना भगवान या गुरु बना लिया, तभी सच्ची संभावना का द्वार खुलता है।
जिसने केंद्र को समझ लिया, उसे भगवान की फोटो, गुरु की तस्वीर, गीता के श्लोक या शास्त्रों के किसी प्रमाण की कोई जरूरत नहीं पड़ती। वह जानता है कि सत्य स्वयं प्रकाशमान है। लेकिन जो अभी तक केंद्र को पक्का नहीं कर पाया, वह निरंतर खोज में रहता है। वह बार-बार सबूत मांगता है, भीड़ से पुष्टि चाहता है।
इसीलिए सोशल मीडिया पर भगवान, गुरु, धर्म, शास्त्र और मंत्रों का इतना प्रचार होता है। लोग फोटो शेयर करते हैं, श्लोक पोस्ट करते हैं, क्योंकि उनके भीतर अपने केंद्र पर गहरी आस्था और विश्वास नहीं टिका है। वे दूसरों को मनाने की कोशिश करके खुद को मनाने की कोशिश करते हैं। जितने ज्यादा फॉलोअर्स, लाइक्स और शेयर होंगे, उतना ही उनका अपना केंद्र मजबूत साबित होगा — यही उनका प्रमाण बन जाता है।
देखिए ना, अपनी माँ, अपने बाप या अपनी पत्नी पर पूरा विश्वास हो तो क्या आप उन्हें साबित करने के लिए प्रचार करते हैं? नहीं। क्योंकि सच्चा विश्वास अंदर से आता है, बाहर से थोपा नहीं जा सकता।
जिस दिन आपके भीतर अपने भगवान, अपने धर्म, अपने गुरु, अपने मंत्र और अपने शास्त्र के प्रति अटूट श्रद्धा जाग जाएगी, उस दिन आपको कोई फोटो, कोई श्लोक या कोई धर्म का प्रचार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रचार दरअसल खालीपन का प्रमाण है। जो व्यक्ति प्रचार करता है, उसे खुद भी नहीं पता होता कि वह क्यों कर रहा है। वह बस भीतर के शून्य को आवाज देकर भरने की कोशिश कर रहा होता है।
व्यापार की तरह सोचिए। अगर दुकान अच्छी है और प्रोडक्ट उत्तम है, तो प्रचार की कोई जरूरत नहीं पड़ती — ग्राहक खुद आते हैं। लेकिन अगर प्रोडक्ट में खामी है या दुकान ठीक से नहीं चल रही, तब भारी-भरकम विज्ञापन और प्रचार की जरूरत पड़ती है।
आज सोशल मीडिया पर भगवान, धर्म, ईश्वर, गुरु, शास्त्र और मंत्रों का जो 24×7 प्रचार हो रहा है, वह इसी बात का संकेत है कि 99% लोगों के भीतर इन पर सच्चा विश्वास नहीं है। वे प्रचार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें खुद पर, अपने केंद्र पर भरोसा नहीं है।
सच्चा साधक चुपचाप केंद्र में स्थित हो जाता है। वह प्रचार नहीं करता — वह उदाहरण बन जाता है।
जब आस्था अंदर से पक्की हो जाती है, तब बाहर का कोई प्रमाण, कोई लाइक, कोई शेयर, कोई फॉलोअर की जरूरत नहीं रहती।
वह केंद्र अटल रहता है — और परिधि स्वतः शांत हो जाती है।
Soni shakya
"पुराने दोस्त विटामिन की तरह होते हैं
जब भी मिलते है ...
बदन में एक अलग सी ताजगी आ जाती है"
- Soni shakya
Urmi Vala
લાગણી એ મનનો મીઠો સ્પર્શ,
નિઃશબ્દ હોવા છતાં કરે ઘણો હર્ષ.
આંખોમાં છુપાયેલી એક ભાષા,
જે કહે દિલની અનકહી આશા.
Shraddha Panchal
મારો પ્રેમ ગામડે ફરતા
એ છકડા જેવો નીકળ્યો ,
ખાડો આવ્યો , ઠોકર વાગી ,
છકડો પલટી ખાઈ ગયો,
પણ મારાથી એની બ્રેક અને હૅન્ડલ
નથી છૂટતી 😇 🛺🛺🛺
MASHAALLHA KHAN
जरूरी नही है कि सब जगह तारीफ हो मेरी,
मेरे कुछ लोग है जो मुझसे किनारा करते है,
कुछ समझदार है जो जुबा पर ले आते है बात,
और कुछ बस मुस्कुराकर बहाना करते हैं.
Saroj Prajapati
क्यों अपनी उस्तादी पर इतना इतराते हो
रख दूसरे को धोखे में अपनी पीठ थपथपाते हो
भूल गए क्या तुझसे ऊपर भी बैठा है एक उस्ताद
जो रखे हैं तेरे सारे अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब किताब
उसकी बेआवाज लाठी से तू भी कब तक बच पाएगा
आज नहीं तो कल तेरा किया तेरे आगे ही आएगा।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Imaran
दुआ है आपकी महोबत के सिवा कोई और ना मिलें
जिंदगी में सिर्फ आप मिलें या फिर जिंदगी ना मिलें
🤲imran 🤲
Abha Dave
शिवाजी जयंती (19 फरवरी )
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मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज जयंती है। उनकी देशभक्ति और वीरता को बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। शिवाजी महाराज की जयंती पर सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है शिवाजी महाराज और गुरु रामदास जी की एक कहानी 🙏🙏
शिवाजी- रामदास
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बहुत समय पहले की बात है शिवाजी महाराज रामदास जी के पास विद्या अभ्यास करते थे। एक दिन शिवाजी महाराज ने गजानंद नाम के लड़के को उठाकर पटक दिया। इस कार्य को देखकर गुरु रामदास शिवाजी से अप्रसन्न हुए । उन्होंने शिवाजी महाराज को बुलाकर कहा कि, "आज मैं तुमसे अप्रसन्न हूँ क्योंकि तुमने गजानन को पटक दिया है उसे चोट पहुँची है।" शिवाजी महाराज ने कहा कि, "गुरु जी , इसमें मेरा क्या दोष है? आप ने ही सिखाया है कि निर्बलों की रक्षा करनी चाहिए। गजानंद कमजोर बाल गोपाल को बुरे शब्द कह रहा था । बेचारे बाल गोपाल रो रहे थे । इसमें मेरा क्या अपराध है?" तब रामदास जी ने कहा कि पाठशाला में सब की रक्षा का भार मेरे ऊपर है। तुम्हें गजानंद को सजा देने का अधिकार नहीं है , यह अनुचित बात है। शिवाजी महाराज ने गुरु रामदास से माफी माँगी और भविष्य में ऐसा कार्य न करने की प्रतिज्ञा की। इस पर गुरु रामदास ने कहा कि, "मैं तुम पर प्रसन्न हूँ। मुझे तुमसे बड़ी आशाएँ हैं कि तुम देश की सेवा के लिए तन , मन, धन, कुर्बान करोगे। सारा जीवन देश के लिए अर्पण करोगे।" यह सुनकर शिवाजी महाराज ने गुरु के चरण छू कर प्रतिज्ञा की कि , "मैं जीवन भर अपना सब कुछ देश के लिए अर्पण करुँगा ।" यह सुनकर रामदास जी खुश हुए और उसे अपनी शुभकामनाएँ दी।
शिवाजी महाराज ने जीवन पर्यंत इस प्रतिज्ञा का पालन किया और अपना सर्वस्व देश पर न्यौछावर कर दिया।
संकलन/ प्रस्तुति
आभा दवे
मुंबई
Dhara K Bhalsod
ક્યારેક શબ્દો ખુટી પડે છે લાગણીઓને ઓળખવા ને ક્યારેક એક મૌન આખી કિતાબ કહી જાય છે
- Dhara K Bhalsod
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
रहा घूमता जगत में, ज्यों कुम्हार का चाक। नहीं बढ़ा दो कदम तू, हुआ वहीं पर ख़ाक।।
दोहा--४२७
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Thakor Pushpaben Sorabji
કોઇ સાથે રહીને પણ
દૂર થઈ ગયા!
કોઈ દૂર રહીને પણ
નજીક થઈ ગયા!
જય શ્રી કૃષ્ણ "પુષ્પ"
- Thakor Pushpaben Sorabji
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