Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Raju kumar Chaudhary

https://www.matrubharti.com/book/19986916/raju-kumar-chaudhary

Raven hart

agar me Bina kaanten ki gulab hoti kya tum meri raksha karte?

Ruchi Dixit

कथन है कि ईश्वर जब कृपा करते हैं तो दु:आ,आभाव ,पीड़ा मिलती है यह असत्य है ईश्वर केवल सुख और आनन्द का पर्याय है जिसकी वास्तविकता को समझाने हेतु वह अनुकूलता देता है,,, - Ruchi Dixit

kajal jha

कुछ रिश्ते लफ़्ज़ों से नहीं, ख़ामोशियों से निभाए जाते हैं, हम मुस्कुरा तो लेते हैं सबके सामने, मगर टूटे हुए दिल कहाँ दिखाए जाते हैं। - kajal jha

kattupaya s

Good afternoon friends. have a great lunch ..

kattupaya s

Thinking about life and it's difficulties. odd moments of happiness. most of the time we are not prepared for sudden changes. a sudden change may be good or bad life must go on.. keep on digging the infinite caves of life for stories. it's only way to survive and to forget all the past failures and disappointments

kattupaya s

The world is moving fast.we are trying to match the speed. but everything we connected with an emotions. we have to handle it like a glass. I already broken many glasses. now a days iam not interested in speed. let life be as on its own phase. slow and steady may bring you all the success. I prefer that.

રોનક જોષી. રાહગીર

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અનિકેત ટાંક

🔥 તક્ષશિલા : અતીત, રહસ્ય અને માનવીય મહત્ત્વાકાંક્ષાની ગાથા 🔥 તક્ષશિલા… માત્ર એક પ્રાચીન વિદ્યાપીઠ નહીં, પરંતુ એવું સ્થાન જ્યાં જ્ઞાન શક્તિ હતું, મૌન એક શસ્ત્ર હતું, અને સત્ય છુપાવવું જીવતરા માટે જરૂરી બનતું હતું. આ નવલકથા તમને એવી દુનિયામાં લઈ જાય છે જ્યાં એક નાનકડો વિચાર આખા સામ્રાજ્યને હચમચાવી શકે છે. તક્ષશિલા આધારિત મારી નવલકથા હવે 20 રોમાંચક ભાગ સુધી પહોંચી ગઈ છે. દરેક ભાગ સાથે રહસ્ય વધુ ઘેરું બને છે, અને વાર્તા વાચકને વધુ મજબૂત રીતે પકડી લે છે. આ કહાનીમાં મળશે — 🕯️ ખોવાયેલું જ્ઞાન અને ગુપ્ત ગ્રંથો ⚔️ તલવારથી નહીં, બુદ્ધિથી લડાતા યુદ્ધ 🧠 વિચાર બદલાવી નાખે એવા વળાંક ❤️ સત્તા, લાલચ, બલિદાન અને માનવ ભાવનાઓનું ઊંડું ચિત્રણ આ વાર્તા વાંચતી વખતે તમે માત્ર વાંચતા નથી, તમે ઇતિહાસને અનુભવો છો, તમે પોતાને પ્રશ્નો પૂછતા પકડો છો, અને અંતે એક જ વિચાર રહે છે — 👉 “જો આ સત્ય બહાર આવી જાય તો શું થશે?” આ નવલકથા મેં માત્ર લખવા માટે નથી લખી, પરંતુ વાચકને વિચારતા, અનુભતા અને જોડાયેલા રાખવા માટે લખી છે. પરંતુ કોઈ પણ સર્જન ત્યારે જ જીવંત બને છે જ્યારે વાચક તેનો પ્રતિભાવ આપે. 🙏 જો તમે વાંચી રહ્યા હો, તો કૃપા કરીને એક રિવ્યુ કે ટિપ્પણી જરૂર આપશો. તમારો એક શબ્દ પણ લેખક માટે પ્રેરણા છે, અને આવનારા અધ્યાયોને વધુ મજબૂત બનાવે છે. 📖 વાંચો — Matrubharti પર 💬 તમારો અભિપ્રાય આપો 🔥 અને તક્ષશિલાની આ રહસ્યમય યાત્રાનો ભાગ બનો ક્લિક કરો : https://www.matrubharti.com/novels/51360/takshshila-by-n-a

Raa

Muje shayri Sikhni he😂😂

Raj Brahmbhatt

"अनकहे एहसास" 🪷😌 https://whatsapp.com/channel/0029VbBgJYA1SWt3jmeneP2I

Shailesh Joshi

સફળતાની સીડી સારો વિચાર, એના પર અડગ વિશ્વાસ, ને એનો દિલથી અમલ, સાથે-સાથે યોગ્ય સમયે યોગ્ય મહેનત, અને અપાર ધીરજ... બસ આટલું જે પણ કોઈ એક વ્યક્તિમાં હોય, એવો વ્યક્તિ એના જીવનમાં સફળ થયા વગર નથી રહેતો. - Shailesh Joshi

Dada Bhagwan

National Youth Day Let good conduct, humility, and serving others guide you - not negative influences or intoxication. To download the mobile and desktop-size wallpaper, please visit: https://dbf.adalaj.org/GWXZmoJe #nationalyouthday #youthempowerment #youth #youthday #DadaBhagwanFoundation

Dipika

જિંદગીમાં કોઈ પોતાનું નથી હોતું ખાલી મનનો "વહેમ" છે. "વિશ્વાસ" તૂટ્યો તો માણસ" પારકો" થઈ જાય અને "શ્વાસ" રોકાયો તો "શરીર" પારકું થઈ જાય છે.

Kartik Kule

की एक तस्वीर को मैने इस तरा पढ़ना चाहा हे लोगोंको दिखाए बिना आखो मे छुपाना चाहा हे हातोमें तो हर वक्त लेकर घूमता था पर लोगोंको में पागल लगताथा क्या करे जनाब हमने उस तस्वीर को तो उसी कागज से चुराया था - Kartik Kule

Kartik Kule

की पन्न्होपर लिखना मेरी ख्वाइश थी असल जिंदगीको में पड़ न सका आयतों में कोरे कागज के साथ पर जातेवक्त पन्ना भरी सा लगा पलट कर देखा तो लिखावट नजर आई इसी लिखावट में मेरी पूरी जिंदगी गुजर गई - Kartik Kule

Kartik Kule

की कुछ बन्नेकी ख्वाइश ने मुझे इस तरह बदल दिया सामने जिंदगी होते हुवे भी मैने मौत को गले लगा लिया - Kartik Kule

DEVGAN Ak

एक खेळ , साधा नाही मृत्यूचा... आपल्या भेटीला लवकरच येत आहे.. GAME OF DEATH ☠️💀 भयकथा...

kattupaya s

யாதுமற்ற பெருவெளி நாவல் இறுதி பகுதி வெளியாகி உள்ளது. matrubharti க்கு என் நன்றி. உங்கள் அனைவரின் பின்னூட்டங்கள் மிகவும் முக்கியமானது. தவறாமல் அனுப்பவும். நன்றி

kattupaya s

yadhumatra peruveli final part is out now. Thanks to matrubharti for giving me the opportunity . The story may look like simple. but the pain and love is true. expecting all of your feedback about the novel. it's tea time just enjoy the climate with books.

Jyoti Gupta

#AnandDham #Mahadev #HarHarMahadev #ShivBhakti #Bholenath #ShivShankar #MahadevBhakt #ShivPooja #BhaktiReels #DevotionalReels #SanatanDharm #HinduReels #IndianReels #ViralReels #TrendingReels #ShortsViral #ReelsIndia #ExplorePage #ForYouReels #DivineVibes #SpiritualVibes

Sonu Kumar

#24 वोट वापसी मुख्यमंत्री यह प्रस्तावित क्रानून मुख्यमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाता है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। यह क़ानून आने से प्रत्येक मतदाता को एक बोट वापसी पासबुक मिलेगी। तब यदि आप मुख्यमंत्री के काम से संतुष्ट नहीं है, और उसे बदलना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका बोट नही है। बल्कि एक सुझाव है। इस कानून का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें- Tinyurl.com/VvpCm मुख्यमंत्री को बदलने की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निचे दिए है (1) मुख्यमंत्री के लिए आवेदन: 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर 10,000 रु का शुल्क लेकर उसे मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित करेगा, और एफिडेविट को मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा। (2) पदासीन मुख्यमंत्री निचे दी गयी दो स्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है: नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग। (3) यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों या मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 10 लाख अधिक हो जाती है तो विधायक सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री नियुक्त सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, 3 करोड़ आबादी एवं 200 विधानसभा सीटो के राज्य में X मौजूदा सीएम है, और उसे विधानसभा में 120 विधायको का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये, इन 120 विधायको को चुनाव में कुल 1 करोड़ मत मिले थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 80 लाख है। 1. मान लीजिये, Y सीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 90 लाख नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी x सीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन विधायको का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 1 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो x अपना इस्तीफा दे सकता है। 2. अब मान लीजिये, ४ को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि x सीएम के रूप में संतोषप्रद काम कर रहा है, अतः X की स्वीकृतियां बढ़कर यदि 1.15 करोड़ हो जाती है, तो भी X सीएम बना रहेगा। राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा - अथर्ववेद

archana

चाँद पर पहुँची… और हम? विदेश की महिलाएँ रॉकेट पकड़कर चाँद पर पहुँच गईं। और अपनी कुछ बहनें… अब भी मोहल्ले की बालकनी में खड़ी हैं, हाथ में दूरबीन नहीं – दूसरों की ज़िंदगी नापने का स्कैनर लेकर। “वो कितनी गोरी है…” “ये कितनी काली है…” “अरे! मैं तो उससे ज़्यादा सुंदर हूँ।” “मुझ पर तो लाखों मरते हैं।” “मैं खाना ऐसा बनाती हूँ कि गैस सिलेंडर भी इमोशनल हो जाए।” और उधर सामने वाली… “देखो कैसे चलती है।” “देखो कैसे कपड़े पहनती है।” “इसके चेहरे पर तो ऐंठन है, इसे ऐटिट्यूड कहते हैं।” मैंने कहा – “बहन, दुनिया मंगल और चाँद पर कॉलोनी बसाने की सोच रही है…” वो बोली – “अच्छा छोड़ो, पहले ये बताओ… उसकी साड़ी असली है या कॉपी?” विकास रॉकेट की स्पीड से भाग रहा है, और हम अब भी गोरी-काली, सुंदर-बदसूरत, रोटी-सब्ज़ी के स्टेशन पर उतरे खड़े हैं। इसलिए… वो चाँद तक पहुँच गईं, और हम… अब भी पड़ोस की छत तक ही सीमित हैं। 😂

Parmar Mayur

हमें जो स्वस्थ यौवन मिला है तो ईश्वर की 'श्रेष्ठ कृपा' है। ये यौवन किसी इंसान को काम आता है, तो यौवन सही अर्थ में 'सक्षम' है। जो बच्चों को अपनी बाहुओं से उठाकर 'ख़ुश' कर सकें, वो यौवन 'ममता का पर्याय' बन सकता हैं। कोई स्त्री जब हो संकट में और उसकी रक्षा कर सकें, सही में तब यह यौवन 'रक्षक' कहलाता है। किसी वृद्ध के 'बुढ़ापे का सहारा' बन सके, वो यौवन सही अर्थ में 'दयावान' है।

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

✤┈SuNo ┤_★_🦋 झुक जाने से अगर कोई, रिश्ता              संवर जाए, तो  बेहतर है  कि दिल से, वो        अंहकार उतर जाए, सही  और  गलत  की जंग में        अक्सर घर टूटते हैं, जीत ले कोई चाहे बहस, मगर           इंसान छूटते हैं, माफी वही मांगता है, जिसका        दिल महान होता है, वरना अकड़ में तो हर शख्स      खुद में भगवान होता है, मिट्टी का खिलौना है ये जीवन       क्यों इतना गुमान करें, चलो आज फिर से हम अपनों           का सम्मान करें, न तू बड़ा न मैं बड़ा,  बस  ये         साथ सलामत रहे, दिलों में नफरत नहीं बस खुदा          की इबादत रहे..❣ ✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥ #𝕁𝕒𝕚_𝕊𝕙𝕣𝕖𝕖_𝕂𝕣𝕚𝕤𝕙𝕟𝕒_🙏🏼 #𝐉𝐀𝐈_𝐒𝐇𝐑𝐄𝐄_𝐑𝐀𝐌.🚩 #𝔾𝕠𝕠𝕕_𝕄𝕠𝕣𝕟𝕚𝕟𝕘_🌞 ╭─❀🥺⊰╯  ✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥ ☞#motivatforself😊°   ⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪    ✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥

Raa

Jay badri vishal lal miss you Gurez

samiksha

किसी के साथ देने या न देने से क्या फ़र्क पड़ता है हम कल भी चल रहे थे और आज भी सफर में हैं!

Imaran

Kisi Ko Fulo Mai Na Basao Fool Mai Sirf Apne Bastey Hai. Agar Basna Hai To Dil Mai Basao. Kyuki Dil Mai Sirf Apne Bastey Hai. 🤎💛imran 🤎💛

kattupaya s

it's another beautiful day in winter.. what's next ? Just thinking about future.

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास नक़ाब महफिल में रुख़ पे नक़ाब रहने दो l न कोई सवाल-ओ-जवाब रहने दो l सब अनपढ़ बैठे हुए हो वहां पर l अब नहीं पढ़नी किताब रहने दो ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Ruchi Dixit

जब तक पूर्ण परिचय अन्तर में प्रकट न हो सब असत्य सा ही प्रतीत होता है । - Ruchi Dixit

Ruchi Dixit

बाहरी व्यवहार मेरी वास्तविकता से पृथक है शायद एकान्त ही मेरा सच है । - Ruchi Dixit

Soni shakya

"दुनिया करती है जिनका वंदन अटूट है शिव पार्वती के प्रेम का बंधन" 🙏💞💞🙏 - Soni shakya

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

Ruchi Dixit

यादों के कैदी बनाकर रखने के बजाय भूलने का निरन्तर प्रयास बेहतर है,, - Ruchi Dixit

Ruchi Dixit

जाने देना ही बेहतर है जो नई राह चुनकर नये सफर आत्मविकास की तैयारी में हैं । नई कहानी लिखने को । - Ruchi Dixit

गिरीश

vishnu sahsranam https://youtu.be/tnCmg9M3q8E?si=sPqWqkdMuisAXO0Q

वात्सल्य

આલ્બમ ખોલી જોયું તારી તસવીર જોઈ રાત્ત તો સુધરી સાથે સવાર પણ.....!!! *દિવુ"એવું તો શું તારા મુખમાં ખેંચાણ કે દીકરી બની સાસરે પ્રયાણ.....!!! . - વાત્સલ્ય

Pithadiya Dhruv

new psychological thriller, mysterious, suspense book is ready for the readers ☠️☄️✨

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Yamini

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Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

Yamini

Pencil Sketch Art By, P.YBS

બદનામ રાજા

बे-रहम हादसों से गुजरना पड़ता हे, बाजुओं पर ताविज बांधने से जमीर मजबूत नहीं होते...

MOU DUTTA

জীবনের অন্ধকারে নেই কোনো আশা, কাছে এসে যা কিছু দূরে যায় তা সকলই ভালোবাসা। হয়তো তুমি ভীষন দূরে আমি ও ভীষন ক্লান্ত, নেই জীবন দুজনেরই কোনো ভাবে শান্ত। হয়তো তুমি দূরের পাখি দূর আকাশে ওরো। আমি ও আছি নিচে বসে ভাবছি এবার ফেরও। তবু যদি না ফেরো দেখা দিও প্রিয়, নির্বিশেষে মনে রাখবো এ কথা যেনো। হয়তো তোমার হাতে আমার জীবন আমি সপেছি। হয়তো তোমায় পেয়ে হৃদয় জীবন আমার গড়েছি। তবু যদি তোমায় পেতাম রাখতাম অনেক যত্নে কি আর করার নেই যে কিছু আর অবশিষ্ট এ। তাও তোমায় চাইবে হৃদয় বাসবে ভালো রোজ। হৃদয় আমার পুড়বে তবু বাসবে ভালো নিখোঁজ। তবু তোমায় ভেবে যেনো হৃদয় আমার কাপে যেনো তোমায় ভেবে আমার শান্তি মনে নামে। যেনো তোমায় ভেবেই হৃদয়ে ফুল ঝড়ে। যেনো সে ফুলে তোমার সকল স্বপ্ন গড়ে। যেনো তোমায় ভালবেসে স্তব্ধ হয় হৃদয়। শান্ত হয় মন, নরম হয় চোখ। আর হৃদয় হোক পাগল।শুধু তোমাকেই ভালোবেসে।

Narendra Parmar

में आपको पहचानने में धोखा खा गया में तो फ़ालतू में ??? आपका गोरा चेहरा देखकर मुस्कुरा गया ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Armin Dutia Motashaw

Darling Ma, Twenty long years, from me you are away; I send you my love n prayers; to Heaven, where you now stay. You know, in my heart, dwell you do always; for ever. Years cannot this everlasting, precious loving bond of ours sever Do you, Vispi n other dear ones sometimes meet? Does he occupy a neighboring seat? I love you, and always will do so, and this, many times in the day, I repeat. Yours Anar

Hardik Galiya

કોને કહેવી, મનભર કથા, પ્રાણ જેવો હતો તું, પ્રીતી આખી, અધવચ મહીં, તોડી ચાલ્યો ગયો તું. સાથે ગાળી, પળ પળ સખી, યાદ આવે હજી એ, હાથોમાંથી, કર મજવતે, છોડી ચાલ્યો ગયો તું. શૂન્ય ભાસે, જગત સઘળું, સાથ તારો નથી જ્યાં, શ્વાસ મારો, સ્મરણ કને, જોડી ચાલ્યો ગયો તું. ભીની આંખે, હૃદય રડતું, છોડી ચાલ્યો ગયો તું, કાચું સાચું, સગપણ બધું, તોડી ચાલ્યો ગયો તું. યાદો તારી, હ્રદય મહીં આ, ‘હાર્દિક’ ભીની રહી, બંધન જૂનું, સગપણ બધું, તોડી ચાલ્યો ગયો તું. – હાર્દિક ગાળિયા

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ सुना है, अब वो पत्थर हो गई है          ज़माने की खातिर, पर अकेले में मेरी तस्वीर आज          भी जलाती होगी, वो जो कहती थी, कि  बिछड़ेंगे          तो मर जाएंगे हम, अब गैरों के नाम का सिंदूर माथे            पे लगाती होगी, बड़ी शिद्दत से उसने सीखी है ये                दुनियादारी, मगर ख़्वाबों में मुझसे आज भी           नज़रें चुराती होगी, मेरे ज़िक्र पे जो अब होंठों को            सिकोड़ लेती है, वही नाम अपने हाथ की लकीरों       में, छुपकर ढूँढती होगी, अजीब ज़िद है कि अब मुझे याद              भी नहीं करना, पर हिचकियाँ उसे मेरा पता रोज़            बताती होंगी…🔥 ╭─❀💔༻  ╨─────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦ #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨─────────━❥

Mrs Farida Desar foram

पसंदीदा शक्स से, जी नहीं भरता कभी, तुमने बहुत आसानी से, ये कैसे सोच लिया, मेरा दिल तुम से भर गया.....

Deepak Bundela Arymoulik

तुम लिखते रहो, मैं पढ़ता रहूँ तुम लिखते रहो, मैं पढ़ता रहूँ, हर शब्द में छुपा एक एहसास पकड़ता रहूँ। तुम्हारी कलम जब भी ख़ामोशियाँ तोड़े, मैं उन ख़ामोशियों की आवाज़ बनता रहूँ। मैं लिखता रहूँ, तुम पढ़ते रहो, मेरे जज़्बातों का मतलब समझते रहो। जो कह न सका मैं आँखों से कभी, तुम अक्षरों में उसे महसूस करते रहो। तुम्हारे लिखे हर लफ़्ज़ में मैं मिल जाऊँ, मेरे लिखे हर सच में तुम झलक जाओ। ना मिलना हो तो भी क्या ग़म है यहाँ, हम लिखने-पढ़ने में ही रोज़ मिल जाएँ। तुम लिखते रहो, मैं पढ़ता रहूँ, वक़्त की धूप में भी साया करता रहूँ। मैं लिखता रहूँ, तुम पढ़ते रहो, यही रिश्ता रहे—कलम और दिल का रहे। आर्यमौलिक

Nandini Agarwal

लाइफ में, कुछ तो, सिक्रेट होना चाहिये । वरना लोग हमारी, व्येलू करना छोड देते हैं।।

kattupaya s

if you want to read my novel yadhumatra peruveli please don't read it from middle or random page. you may get confused. try to read it from first part. thanks. that's my humble request.

kattupaya s

இது வரை யாதுமற்ற பெருவெளி நாவல் வாசிக்காதவர்கள் நடுவில் இருந்து வாசித்தால் குழப்பம் அடைவீர்கள். நாவலின் முதல் பகுதியில் இருந்து வாசிக்க தொடங்குமாறு கேட்டு கொள்கிறேன். நன்றி

kattupaya s

என்னுடைய யாதுமற்ற பெருவெளி நாவல் இறுதி பகுதி 24 நாளை 12/1/26 காலை 10மணிக்கு வெளியாக உள்ளது. இறுதி பகுதியை தவற விட வேண்டாம் என கேட்டு கொள்கிறேன். இரவு வணக்கம்

Deepak Bundela Arymoulik

वो गलियां अब सुनी हैं जहां कभी सब चला करते थे, हंसी की गूंज थी हर मोड़ पर, आज सन्नाटे वहां पला करते हैं। दीवारों ने पहचान दी थी हमें, कदमों की आहट से दरवाज़े खुलते थे, अब वही दरवाज़े खामोश खड़े, जैसे सवाल पूछते—तुम लौटोगे कब? शामें पहले नाम पुकारती थीं, चाय की भाप में सपने घुलते थे, आज धूल में दबी हैं वो शामें, और सपने किसी और शहर में सुलगते हैं। वो गलियां अब सुनी हैं, पर यादें अब भी जागती हैं, कभी-कभी हवा बतियाती है— “सब यहीं था, बस वक़्त बदल गया।” आर्यमौलिक

Deepak Bundela Arymoulik

बीत रही उम्र… सवाल अभी खड़े हैं बीत रही उम्र, सवाल अभी खड़े हैं, वक़्त की दहलीज़ पर कुछ पल जड़े हैं। जो सोचा था कभी, वो पूरा न हो सका, उसी अधूरेपन में सपने पड़े हैं। पुरानी यादों के आँसू अब भी पड़े हैं, दिल के किसी कोने में चुपचाप अड़े हैं। हँसी की परतों में छुपा दर्द कहता है, हम आज भी कल की टीस में गड़े हैं। जिन राहों पर चलना कभी सीखा था, आज वही राहें अजनबी लगती हैं। अपने ही फैसलों की छाया में खड़े, क्यों ये खामोशियाँ इतनी गहरी लगती हैं? हर शाम हिसाब माँग लेती है जीवन से, हर सुबह कोई जवाब अधूरा छोड़ जाती है। चलती साँसों के बीच थमी हुई सी आत्मा, बस उम्र बढ़ती है, कहानी नहीं बदल पाती है। फिर भी उम्मीद की एक नन्ही सी लौ, इन सवालों के अंधेरे में जलती है। शायद किसी मोड़ पर मिल जाए सुकून, इसी भरोसे पर ज़िंदगी आज भी चलती है। आर्यमौलिक

Deepak Bundela Arymoulik

जहाँ शब्दों की अहमियत नहीं… जहाँ शब्दों की अहमियत नहीं, वहाँ क्या लिखें अपने एहसासों को? जहाँ ख़ामोशी ही जवाब बन जाए, वहाँ कौन समझे इन जज़्बातों को? जब बोलने से अर्थ खो जाए, और कहने से सच अधूरा लगे, तब आँखों की नमी ही काफ़ी है, हर बात लफ़्ज़ों से ज़्यादा लगे। कुछ रिश्ते शब्द नहीं माँगते, बस मौजूदगी की धूप चाहिए, एक चुप सा साथ, एक ठहरा पल, जहाँ वक़्त को भी साँस चाहिए। वहाँ एहसास हवा बन जाते हैं, जो छूकर भी दिखाई नहीं देते, दिल समझ लेता है दिल की भाषा, जहाँ होंठ कुछ भी कह नहीं देते। तो वहाँ लिखना भी क्या लिखना है, जहाँ महसूस करना ही काफी हो, जहाँ शब्द हार मान लेते हैं, और ख़ामोशी ही सबसे बड़ी गवाही हो। आर्यमौलिक

kattupaya s

My novel yadhumatra peruveli last part 24 will be published on 12/1/26 @10am.please don't miss the final part. goodnight friends

vikram kori

“शिव का वैराग्य पार्वती के प्रेम से पूर्ण हुआ, और पार्वती का समर्पण शिव की साधना में अमर बन गया। जहाँ त्याग और प्रेम एक हो जाएँ, वही शिव–शक्ति का सच्चा संबंध है।” - vikram kori

उषा जरवाल

उन्मुक्त पंछी उन्मुक्त पंछी वह नहीं, जो केवल आकाश में उड़ता है, उन्मुक्त वही है, जो बंधन की कल्पना से भी मुक्त होता है। जिसकी दृष्टि अवरोधों पर नहीं, शिखरों पर टिकी रहती है, जिसकी चेतना भय की छाया को तिरस्कृत कर देती है। आँधियाँ उसके पंखों को थकाने आती हैं, पर वह उन्हें साधकर अपनी दिशा रच लेता है। प्रहार उसे विचलित नहीं करते, वे तो उसके संकल्प को और कठोर बनाते हैं। वह गिरता है, टूटता है, फिर भी उठ खड़ा होता है, क्योंकि उसकी आत्मा समझौते की भाषा नहीं जानती। न पिंजरे की सुविधा उसे लुभाती है, न सुरक्षित नीड़ उसे रोक पाता है। उसकी उड़ान प्रश्नों से नहीं, उत्तरों से जन्म लेती है, और उसका लक्ष्य क्षितिज नहीं—शिखर होता है। जो हर बाधा को लाँघकर भी अपनी पहचान न खोए, वही उन्मुक्त पंछी स्वतंत्रता का जीवंत घोष है।

Raju kumar Chaudhary

https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

उषा जरवाल

उन्मुक्त पंछी वह है, जो बंधन-भ्रम का त्याग कर देता है, अपनी चेतना से भय और विघ्नों को लाँघ आगे बढ़ जाता है। आघातों की ज्वाला में तपकर भी जिसकी उड़ान अक्षुण्ण है, वह प्रत्येक अवरोध को तिरस्कृत कर शिखराभिमुख है। जिसका संकल्प ही आकाश हो, उसकी स्वच्छंद उड़ान ही उसकी पहचान है। उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’

उषा जरवाल

उन्मुक्त पंछी वह है, जो बंधन-भ्रम का त्याग कर देता है, अपनी चेतना से भय और विघ्नों को लाँघ आगे बढ़ जाता है। आघातों की ज्वाला में तपकर भी जिसकी उड़ान अक्षुण्ण है, वह प्रत्येक अवरोध को तिरस्कृत कर शिखराभिमुख है। जिसका संकल्प ही आकाश हो, उसकी स्वच्छंद उड़ान ही उसकी पहचान है। उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’

kattupaya s

Another century from #Virat kohli loading...Sorry guys

उषा जरवाल

जो वास्तव में अपने होते हैं वो हमारी हर ख़ुशी में शामिल होने के मौक़े ढूँढ़ लेते हैं । निमंत्रण की आवश्यकता तो बेगानों को पड़ती है । उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’

Pithadiya Dhruv

"kis kis ko fictional story pasand hai jara comment karo supporters 👍🏻✨"

kattupaya s

500K downloads for my stories. Thank you readers for your continious support over two years.

Jyoti Gupta

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Soni shakya

"एक चेहरा.. जो आंखों से शुरू हुआ और , रूह में उतर गया ❤️" - Soni shakya

anime lover

आप आए तो मुस्कुराने की वजह मिल गई आप गए तो जिंदगी जीने की सज़ा मिल गई। - anime lover

anime lover

आप आए तो मुस्कुराने की वजह मिल गई आप गए तो जिंदगी जीने की सज़ा मिल गई।

anime lover

तुझे खुश देखना ही मेरे दिल की आरजू है दुनिया से ये मत कहना कि मैं बेवफ़ा हूं। तूने कहा था इसलिए ही तुझे छोड़ा है, मेरी वफ़ा की कदर करना, मुझे बेवफ़ा मत बनाना।

Fazal Esaf

किमान एखाद्या वळणापर्यंत तरी चालत राहायला हवे शांततेलाही कधी तरी आवाज मिळायला हवा, प्रत्येक प्रश्नाला उत्तर नसेलही पण एक ठोका तरी ऐकू यायला हवा। प्रवास लांबचा असेल तर काय झालं, पावलांनी किमान एखाद्या वळणापर्यंत तरी चालत राहायला हवे। भीती जर समोर उभी असेल तर डोळे झुकवून रस्ता बदलत नाही, कधी तरी भीतीशीही डोळ्यांत डोळे घालून पाहायला हवे। प्रत्येक लाट समुद्र होत नाही, प्रत्येक अश्रू कथा सांगत नाही, पण जे आतून उसळतं त्याला बाहेर पडायला हवे। नेहमी जिंकणं आवश्यक नाही, हार देखील काही अपराध नाही, फक्त एवढंच पुरेसं आहे की प्रयत्न जिवंत राहायला हवेत। — फज़ल अबुबक्कर एस्सफ

ArUu

एक दिन मैं इस दुनिया के सारे बंधन तोड़ दूंगी एक दिन मैं वो चुनूंगी जो मुझे चाहिए ArUu ✍️

Chaitanya Joshi

હરાય જાય છે આખ્ખેઆખું મન તને જોયા પછી. ને હવે પથ્થર પણ લાગે છે સુમન તને જોયા પછી. ખબર ના પડી કે પાનખર ક્યારે ચાલી ગઈ એકાએક, ને ઓચિંતું થયું વસંત આગમન તને જોયા પછી. ફરકવા લાગ્યા અંગ દક્ષિણ શુકનને સજાવતા જાણે, મન પણ સાવ થયું જાણે મગન તને જોયા પછી. શીતળતા વ્યાપી ગઈ બત્રીસ કોઠે એકાએક કેટલી, થયું શમન સઘળી ઉરની અગન તને જોયા પછી. થયા અધીર અધરોષ્ઠ કશુંક કહેવાને તલપાપડ રખે, મહેંક રહી પ્રસરી કેવી ટનાટન તને જોયા પછી. સ્નેહ એ સ્નેહ રહ્યો શબ્દ ના બની શક્યો બિચારો, એના પગે જાણે મણનાં વજન તને જોયા પછી. દેખાયું હાથવેંત ઇપ્સિતનું એકરારનામું વર્ષોથી ચહ્યું, કરી રહ્યું હૈયું વિનસને કેવું નમન તને જોયા પછી. - ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.

kattupaya s

#Virat playing like a warm up game. #Nz is out of bowlers #cricket

Raj Brahmbhatt

“ज़िंदगी: एक छोटी-सी यात्रा” 🍂⌛✨ https://whatsapp.com/channel/0029VbBgJYA1SWt3jmeneP2I

Sonam Brijwasi

संगीत वो दवा है जो हर दर्द मिटा देता है, टूटे हुए दिल को भी फिर से जीना सिखा देता है। लफ्ज़ कम पड़ जाएँ जब जज़्बात बताने में, तब साजों का हर सुर दिल की बात सुना देता है। 🎶🎵 - Sonam Brijwasi

Nisha ankahi

एक मुस्कान ही माँगी थी ज़िंदगी से, बेकार मुझसे लड़ पड़ी ज़िंदगी। - Nisha ankahi

Nensi Vithalani

😂 રવિવાર – બહાર ન નીકળો તો શંકા! 😂 આજે ટ્રાફિક જોઈને એવું લાગ્યું, રવિવાર બૈરાઓ માટે સીધો તહેવાર જ લાગ્યો 🚦 સોમથી શનિ સુધી “કાલથી” ચાલે, રવિવાર આવે એટલે બધાનું GPS આપમેળે જાગે 📍 રવિવાર એટલે પાણીપુરીવાળાનું ધનતેરસ, પુરી ઓછી પડે, પણ લાઈન એવી કે જાણે મફત પ્રસાદ વહેંચાય 😋 રવિવાર એટલે કપડાંની દુકાન પર મહાયુદ્ધ, લેડીઝ કહે, “બસ એક જ બતાવો,” એ “એક”માં દુકાનવાળાનો આખો સ્ટોક બહાર આવી જાય 🤯😂 રંગ બદલો, સાઈઝ બદલો, “આમાં બીજો શેડ હશે?” — દુકાનવાળો અંદરથી બોલે, “હે ભગવાન, આજ તો મારો રવિવાર છે!” 😵‍💫 રવિવાર એટલે હોટલવાળો ભગવાન, ૮ વાગે પહોંચો, ૯ વાગે પેટપૂજા કરીને સીધા બહારનો રસ્તો બતાવે 🙏😆 આઈસ્ક્રીમવાળો તો રાત્રે ૧૨ વાગે પણ હીરો, એના વગર રવિવાર અધૂરો 🍦 એક રવિવાર બહાર ન નીકળીએ તો, ઘરવાળા પૂછે — “તબિયત તો ઠીક છે ને?” 😐 બીજો રવિવાર પણ ઘરે રહી જાવ તો, ટોના, ટિપ્પણી, ઉપાય બધું એકસાથે શરૂ થઈ જાય 🧿😂 રવિવાર એટલે આરામનો ભ્રમ, થાક તો ફ્રીમાં સાથે જ મળે 🎁 ઘરે બેસો તો શંકા, બહાર નીકળો તો ટ્રાફિકમાં જીવનની ટેસ્ટ સિરીઝ! 🚦😂

महेश रौतेला

प्यार की बातों में अजब सी गुमसुदगी थी, कहाँ-कहाँ ढूंढता, जिन्दगी एक पैमाना लिए खड़ी थी।

Jeetendra

पत्नी: “तुम्हें मुझमें सबसे अच्छा क्या लगता है?” पति सोच में पड़ गया। पत्नी: “जल्दी बोलो।” पति: “तुम्हारा… टाइम पर गुस्सा उतर जाना।”

Raa

mera dada and bajrang das bapa ni dosti

મનોજ નાવડીયા

હું પણ ખોટો સાબિત થયો છું ઘણી વાર, ભૂલનો સ્વીકાર કરી સાચો રસ્તો શોધ્યો છે, અંધકાર ચૌતરફ ફેલાયેલો છે ઘણી વાર, દીવો પડખે રાખી સાચો ઉજાસ શોધ્યો છે, અહંકારના ભારથી પડ્યો છું ઘણી વાર, નમ્રતાના માર્ગે જઈ પોતાને શોધ્યો છે, શું કહેશે જગ જન એ વિચાર્યું નથી ઘણી વાર, આત્મસ્વર સાંભળી જીવનનો અર્થ શોધ્યો છે. મનોજ નાવડીયા

Nandini Agarwal

अरे . बहु जी ' बर्तन साफ होने में नही आ रहे है। गर्म पानी दे जाओ ' प्रेमवती अपनी सेठानी को आवाज लगाती है। ' और सेठानी गर्म पानी लेकर बुढी ' अम्मा को पानी देती है। लो . अम्मा जी पानी अब साफ होंग बर्तन ' तभी प्रेमवती घूरते हुए। जै का सेठानी कटोरा भरकर झूठन इसे कूड़े मे डालोगी ' सेठानी हां अम्मा जी ' प्रेमवती अरे हम वार ' की बात कहो तो साची है। पड़ी लिखी हो कर घर का आधा खाना बचा हुआ कुड़ेदान की जगह सड़क पर घूम रहे पशु पक्षी को डाल दो तो किसी का भला हो। सेठानी चौकते हुए हां अम्मा जी सही बोले है। सेठानी को प्रेमवती के कहा बुरा न लगा। एक बर्तन मे झूठन ' व खराब खाना सब्जियो फल के छिलके बर्तन में इक्कट्ठे किये ' और बाहर सड़क के पशु को डालना शुरू कर दिया । सेठनी सोचने लगी जो बाते ' मोबाइल पर पढ़ती थी, मैसैस ' . कूड़ेदान मे मुंह डाल कर खाने से ' पशुओ को कितनी चोट लगती है। जो बात हर समय हाथ मे लगा, मोबाइल न समझा सका वो बात बूढी अम्मा ने सिखा दी।

Nandini Agarwal

सच्चे रिश्ते कुछ नहीं मांगते, शिवाय वक्त और इज्जत के।

Nandini Agarwal

सपनों में भी तुम्हारे सिवा किसी और का ख्याल नहीं, आता । वे हिसाब प्यार करते है हम। ख्वाबों मे भी तुम्हारा साथ निभाते है हम , तुम हो कि हर पल ठुकराते हों  हमे, हर पल तुम्हारे आने की आहट दरवाजे पर महसूस करते हैं हम । तमन्ना कभी पूरी नहीं हुई , '  फिर भी तेरी आंखें मे अपनी पूरी दुनिया देखते है हम । तुम से प्यारा कोई लगता नहीं  हमे, तुम्हारी आदत हो गयी है , कैसे जुदा हो कर - रहे हम। एक पल तुम्हारी अवाज न सुने पल भर का समय सौ बर्ष के बराबर बीताते हम वही शादी से पहले वाली चाहत बन जाये हम। हर पल सांसो पर तुम्हारा नाम हर संगीत मे गुनगुनाते है हम , सोलह श्रृंगार मेरे तेरे लिए जैसे भी हैं साजन की सजनी है आखिर हम , गिला शिकवा दुर करके तो देखो चाहत मे नजर फिर भी आयेगे हम , रूठो न हम से ऐसे फिर कभी लौट कर न आये हम। अगले जन्म का वादा नही करते दुसरे घर से ढोली आयी , इस चौखट से अर्थी पर ही जाऊँगी मै , ज्यादा देर न हो जाये हमारी वफा को पहचान लो कदर , समझो बीच मंझधार मे न वि छडेगे हम।

Nandini Agarwal

क्यों समाज तूने यह रीत बनाई है अपनी बिटिया हुई पराई है न तू सीता है, न तू राधा है त्याग की मूरत ऐसी बनाई है, कितने बने महल-द्वारे घर की चारदीवारी चौखट बनी लक्ष्मण रेखा है, देश को आजादी मिली पर तू कभी आजाद न हुई है , गली-गली चौबारे पर बैठा बहरूपिया है मौसम की तरह दुनिया रंग बदलती है नारी तेरा रंग बदलना दुनिया को रास न आया है, अपनों को भूल न सके पराए को अपनाया, समझ न सके ऐसे भंवर में फंसी न रह सके न निकल सके, दिन गुजरे महीने बीते दुखों की गिनती सालों में हो जाती है, ऐसी रहती तू जैसे पंख काट दिए पंछी के, क्यों जुर्म करें नारी पर ये लक्ष्मी है, सरस्वती है, जब अति हो जाए मां दुर्गा का अवतार है औरत ही नानी, औरत ही दादी औरत ही मां, बुआ, मौसी है औरत न हो तो ये दुनिया अधूरी है।

smita

क्या है बनारस सिर्फ़ घाट की सीढ़ियाँ नहीं, समय की गोद में बैठी एक अनंत कथा है बनारस... हर पाप, हर पीड़ा को अपने आँचल में समेटती, माँ गंगा है बनारस..... हर साँस में मंत्र, हर मौन में विश्वास, सब कुछ समेटा है बनारस... काशी की पवित्रता, अस्सी घाट का शोर, शिव की नागरी है बनारस... जहाँ चिता की आग भी सिखा दे जीवन का पाठ, वहीं मोक्ष का द्वार है बनारस... हर गली, हर कोना अपनी कहानी सुनाता है, हर दीवार में लिपटा इतिहास है बनारस... सुबह की पहली रोशनी में घंटियों की गूंज, शाम के जलते दीपों में आसमान की मुस्कान है बनारस... हवा के झोंके में छुपा, ज़िंदगी का गीत है बनारस... शहर नहीं, प्रेम का दूसरा नाम है बनारस...

Gautam Patel

નિઝામ ડાયમન્ડ ભારતમાં મળી આવેલો બહુ જાણીતો હીરો નિઝામ ડાયમન્ડ હતો, જેનું વજન ૩૪૦ કેરેટ એટલે કે કોહિનૂરથી પણ ૩૦ કેરેટ વધુ હતું. એક સ્થાનિક સોનીએ તેને માટલામાં સંતાડી રાખ્યો હતો, માટે એમ ધારી શકાય કે નિઝામના હૈદરાબાદ રાજ્યની ખાણમાંથી એ ચોરવામાં આવ્યો હતો. નિઝામના દીવાન ચંદુલાલને ખબર પડી, એટલે તેણે હીરો મેળવીને રાજ્યની તિજોરીમાં જમા કરાવી દીધો. પહેલ માટે કટિંગ થયા પછી ૧૮૩૦ના અરસાનો તે હીરો ૨૭૭ કેરેટનો બન્યો. આ વજન પણ કટિંગ બાદના કોહિનૂરથી ૧૭૧.૪ કેરેટ વધારે હતું અને મૂલ્ય પણ વધારે હતું. કોહિનૂર આજે બ્રિટિશ તાજમાં છે, તો નિઝામ ડાયમન્ડ નિઝામ મીર ઓસ્માન અલીના શાસનકાળ દરમ્યાન કે પછી એ પહેલાં નિઝામ ડાયમન્ડ લાપત્તા બન્યો. ઓગણીસમી સદીની અધવચ્ચે તત્કાલીન નિઝામ પર અંગ્રેજોનું લેણું હદપાર ગયું ત્યારે નિઝામે તે સમયના દીવાન અને ચંદુલાલના અનુગામી નસીર-ઉદ-દૌલા મારફત જાન્યુઆરી ૧૩, ૧૮૫૨ના રોજ હીરો અંગ્રેજ રેસિડન્ટને મોકલાવ્યો. રેસિડન્ટે તે સ્વીકાર્યો નહિ. ‘મદ્રાસ સ્પેક્ટેટર' નામના અખબારે પોતાના અહેવાલમાં લખ્યું કે નિઝામ ડાયમન્ડની કિંમત બ્રિટનના ઝવેરીબજાર મુજબ ૬,૦૦,૦૦૦ પાઉન્ડ હતી. આ મૂલ્ય તે જમાના પ્રમાણે જેવું તેવું લેખાય નહિ. આમ છતાં નિઝામના માથે રૂા. ૩૩,૦૦,૦૦૦નું દેવું ચડ્યું હતું અને રેસિડન્ટ તે નાણાં રોકડા મેળવવાનો આગ્રહી હતો. નિઝામે અંતે પોતાનું બધું ઝવેરાત હૈદરાબાદની સ્ટેટ બેન્કમાં ગિરવે મૂકી રોકડેથી દેવું ચૂકવ્યું અને થોડા વર્ષ પછી નિઝામે ડાયમન્ડ સહિત બધું ઝવેરાત છોડાવી લીધું. નિઝામ ડાયમન્ડ ત્યાર પછી કદી જોવામાં આવ્યો નહિ. નિઝામનું જે શાહી ઝવેરાત જાન્યુઆરી, ૧૯૯૫માં ભારત સરકારે ખરીદ કર્યું તેમાં એ હીરો ન હતો. https://www.facebook.com/share/p/1HkV1MaH1u/

Bhavna Bhatt

જોરદાર ડાન્સ

Jeetendra

वो बोली, “तुम्हारी बातें सुनकर दिमाग़ काम करना बंद कर देता है।” मैंने कहा, “क्योंकि कुछ चीज़ें दिमाग़ से नहीं, फील से समझी जाती हैं।” वो बोली, “तुम बहुत खतरनाक हो।” मैंने कहा, “खतरनाक नहीं… प्रैक्टिकल हूँ।” 😄

Lakshmi Narayan Panna

रास्ते में कभी कांटा कभी पत्थर भी आयेगा। दूर मंजिल से पहले आदमी ठोकर भी खायेगा।। मुश्किलें आइना हैं राह की तालीम देती हैं। हौसला जीतने का हो अगर तो जीत जायेगा।। - Lakshmi Narayan Panna

Prithvi Nokwal

अठारह दिनों के महायुद्ध ने द्रौपदी को अस्सी वर्ष की स्त्री-सी थका दिया था— न केवल शरीर से, बल्कि आत्मा और चेतना से भी। चारों ओर विधवाओं की भीड़ थी। पुरुष गिने-चुने दिखाई देते थे। अनाथ बच्चे दिशाहीन भटक रहे थे। और उन सबके बीच— हस्तिनापुर के राजमहल में, महारानी द्रौपदी निश्चेष्ट बैठी शून्य को निहार रही थी। तभी… श्रीकृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं। कृष्ण को देखते ही द्रौपदी संयम खो बैठती है। वह दौड़कर उनसे लिपट जाती है। कृष्ण उसके सिर पर हाथ फेरते रहते हैं— कुछ कहते नहीं, उसे रो लेने देते हैं। कुछ क्षणों बाद वे उसे अपने से अलग कर पास के पलंग पर बैठा देते हैं। द्रौपदी (कातर स्वर में): “यह क्या हो गया, सखा? मैंने तो ऐसा अंत कभी नहीं सोचा था…” कृष्ण (गंभीर शांति से): “नियति अत्यंत क्रूर होती है, पांचाली। वह हमारे विचारों के अनुसार नहीं चलती। वह केवल हमारे कर्मों को परिणामों में बदल देती है। तुम प्रतिशोध चाहती थीं— और तुम सफल हुईं, द्रौपदी। केवल दुर्योधन और दुःशासन ही नहीं, सम्पूर्ण कौरव वंश समाप्त हो गया। तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए।” द्रौपदी (पीड़ा से): “सखा, क्या तुम मेरे घावों पर मरहम रखने आए हो या उन पर नमक छिड़कने?” कृष्ण: “नहीं द्रौपदी, मैं तुम्हें सत्य से परिचित कराने आया हूँ। हम अपने कर्मों के दूरगामी परिणाम पहले नहीं देख पाते… और जब वे सामने आते हैं, तब उन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं रहता।” द्रौपदी (कंपित स्वर में): “तो क्या इस युद्ध की पूर्ण उत्तरदायित्व केवल मेरा है, कृष्ण?” अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह कृष्ण: “नहीं, द्रौपदी। स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो। किन्तु यह सत्य है— यदि तुम अपने कर्मों में थोड़ी-सी भी दूरदर्शिता रखती, तो स्वयं इतना कष्ट न पाती।” द्रौपदी: “मैं क्या कर सकती थी, सखा?” कृष्ण (धीमे किंतु स्पष्ट स्वर में): “तुम बहुत कुछ कर सकती थीं। जब तुम्हारा स्वयंवर हुआ था— तब यदि तुम कर्ण का अपमान न करतीं और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर देतीं, तो संभव है परिणाम भिन्न होते। जब कुंती ने तुम्हें पाँच पतियों की पत्नी बनने का आदेश दिया— यदि तुम उसे अस्वीकार करतीं, तो परिस्थितियाँ कुछ और दिशा ले सकती थीं। और फिर— अपने महल में दुर्योधन से यह कहना कि ‘अंधों के पुत्र अंधे होते हैं’— यदि वह वाक्य न कहा गया होता, तो चीरहरण की वह विभीषिका संभवतः घटित न होती।” कृष्ण क्षण भर रुकते हैं, फिर कहते हैं— “द्रौपदी, हमारे शब्द भी हमारे कर्म होते हैं। और हर शब्द को बोलने से पहले उसे तौलना अनिवार्य है। क्योंकि शब्दों के दुष्परिणाम केवल बोलने वाले को ही नहीं, पूरे परिवेश को दुख और विनाश में झोंक देते हैं।” वे दृष्टि उठाकर कहते हैं— “इस संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसका ज़हर उसके दाँतों में नहीं, उसके शब्दों में होता है। इसलिए— शब्दों का प्रयोग सदैव सोच-समझकर करो।”

વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા

चूड़ी, पायल, गजरा, काजल, बिंदीकी तुझे क्या जरूरत? अपनी जुल्फे जरा कसके बांधलो, और एक लट गालोपे खुली छोड़दो। - स्पंदन

ddz

કયા લીખું તેરે દિલ કે બજાર મે મેરા દામ યા તેરા પ્યાર…..

kattupaya s

Waiting for right ideas

Sonu Kumar

क्यों हम साधारण नागरिक रिकालिस्ट्स बन गए? तो किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया? हमें नहीं पता कि, किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया। न ही हम यह जानते है कि हमारे द्वारा लिखे गए विवरणों को पढ़कर कई कार्यकर्ता क्यों रिकालिस्ट्स बन गए। न ही हमें इस कारण का कोई अंदाजा कि क्यों 1920 में महात्मा चन्द्रशेखर आजाद रिकालिस्ट्स बन गए, और क्यों 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी रिकालिस्ट बन गए थे। हालांकि इस सम्बन्ध में हमारे पास कोई ठोस कारण नहीं है, कि किस विचार ने हमें रिकालिस्ट्स बनने की प्रेरणा दी। लेकिन जितना हम देख पाते है, हमें इसके दो संभावित कारण नज़र आते है; 1. सहज बोध यानी कॉमन सेन्स (Common sense) 2. अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा बांग्लादेश आदि से होने वाले युद्ध का भय। (2.1) सहज बोधः पहला कारण सीधा सादा सहज बोध है। सामान्य समझ, जो कि हर मनुष्य में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होती है। सबसे पहले हम आपसे एक सवाल करना चाहेंगे। यदि आप इस सवाल का जवाब देने से इंकार करते है, तो हम आपको अपनी बात नहीं समझा पाएंगे। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप इस सवाल का अपने विवेक से जवाब दें। इसके उपरान्त ही आगे पढ़े। मान लीजिये कि आप एक कारखाने के मालिक है, जिसमे 1000 कर्मचारी और प्रबंधक वगेरह कार्य करते है। और अचानक सरकार निम्नांकित क़ानून लागू कर देती है: 1. आप किसी भी प्रबंधक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले, तथा किसी भी कर्मचारी को 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। 2. आपको सभी कर्मचारियों को अगले 5 वर्ष के लिए और प्रबंधको को उनकी 35 वर्षीय सेवाकाल के लिए देय वेतन हेतु अग्रिम भुगतान के चेक देने होंगे। 3. यहां तक कि यदि कोई आपके कारखाने से सामान की चोरी कर रहा है तो, किसी न्यायधीश की अनुमति बिना, न तो आप उसे निकाल सकेंगे न ही दंड दे सकेंगे, न ही उसे आपके कारखाने में आने से रोक सकेंगे। हमारा आपसे सवाल है कि ऐसी स्थिति में 'अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? कृपया इस सवाल का जवाब देने के बाद ही आप आगे पढ़े। हम अपना प्रश्न फिर से दोहराते है: 'क्या इन कानूनो के आने के बाद, अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में कर्मचारियों और प्रबंधको के अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? दूसरे शब्दों में, यदि हम नागरिको के पास जजो, सांसदों, विधायको, मंत्रियो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं हुआ तो, ये सभी पदाधिकारी भ्रष्ट और अनुशासनहीन हो जाएंगे। इसीलिए महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने 1925 में कहा था कि वोट वापसी कानूनो के अभाव में लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा'। ठीक यही बात महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के प्रथम पृष्ठ में कही थी कि - यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं हुआ तो, वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा। जूरी प्रक्रियाएं ग्रीस में 600 ईसा पूर्व लागू हुयी थी। जिसके परिणामस्वरूप ग्रीस अपने आप को इतना ताकतवर बना पाया कि उन्होंने सिर्फ 1 लाख सैनिको की मदद से अपने साम्राज्य का विस्तार तुर्की से लेकर यमुना नदी के किनारे तक कर लिया था। अमेरिका में 1750 ईस्वी में बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाएं लागू हुई, और यह मुख्य कारण था जिससे अमेरिका इराक़, सऊदी अरब, पाकिस्तान और लीबिया को कब्जे में कर पाया। अमेरिका की सूची में अगले नाम ईरान और भारत है। लेकिन किसी सामान्य समझ के व्यक्ति को वोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओं की उपयोगिता समझने के लिए इतिहास की किताबो के पन्ने पलटने या अमेरिका के उदाहरण देखने की जरुरत नहीं है - क्योंकि बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओ का महत्त्व समझने के लिए जिस चीज की आवश्यकता है, वह 'कॉमन सेन्स' है। हमारे देश से जुडी नागरिक समस्याएं किसी भी प्रकार से उस कारखाने की स्थिति से अलग नहीं है, जहां कारखाने के मालिक को अपने कर्मचारियों और प्रबंधको को 5-35 वर्ष तक नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है। हमारे देश की समस्याओ का समाधान भी वही है, जो कि अमुक कारखाने की समस्याओ का समाधान है 'भ्रष्ट जजो, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के बहुमत को दे दिया जाए'। यह पुस्तक जूरी प्रक्रियाओ एवं बोट वापसी कानूनो के बारे में है, जिनकी सहायता से भारत के नागरिक "बहुमत का प्रदर्शन" करके भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओ को नौकरी से निकाल सकेंगे। पुस्तक में वे विवरण भी दर्ज किये गए है, जिनका पालन करके इन प्रक्रियाओ को जन साधारण देश में लागू करवा सकेंते है । *The Greatest Revolutionary Book in the history of mankind " VOTEVAPSI DHANVAPASI " describing root cause of every problem our society/ Country is facing as a whole & most importantly permanent solutions to end the same* 🇮🇳 🔥 *भारत के इतिहास में सबसे बड़े आंदोलन/क्रांति की मेनिफेस्टो बुक Amazon, Flipkart व Notion press में जाहिर हो चुकी है कृपया आप इसे लिंक से खरीद ले* 👇🔥🇮🇳 सूचना : *वोटवापसी जूरी खंबा आंदोलन(राईट टू रिकॉल पार्टी इसका एक हिस्सा है)का राष्ट्रिय घोषणा पत्र* अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है : . पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* " . भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ . (1) Notion press store : . Discount coupon code : RECALLIST . वोट वापसी धन वापसी भाग -1 . https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1 . वोट वापसी धन वापसी भाग - 2 . https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2 . ------------ . पीडीऍफ़ डाउनलोड - tinyurl.com/SolutionRTR . -----------

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