Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास औरत हूँ तो क्या औरत हूँ तो क्या बे - जुबान नहीं हूँ l एक स्वतंत्र इन्सान हूँ गुलाम नहीं हूँ ll मेरे भी मुँह में जबान दी है ईश्वर ने l तेरे हर सवालों का जवाब नहीं हूँ ll खुद के गुनाह की सज़ा पाना चाहती हूँ l इंसान हूँ ईश के जैसी महान नहीं हूँ ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Sonu Kumar

सद्दाम पसंद नहीं था , बम मार के हटा दिया गद्दाफी भी , बम मार के हटा दिया मादुरो भी , बम मार के उठा लिया ख़मानेई भी , बम मार के खत्म कर दिया कल भारत पर उनकी "पसंद" का दलाल नहीं बैठेगा तो वो उसे भी बम मारेंगे !! इसलिए उन्हें रोकना जरूरी | #वोटवापसी PM, CM, SP #हथियारबंद नागरिक समाज क़ानून की मांग

kattupaya s

Time for Breakfast

kattupaya s

Charlie Chaplin is the best example for enjoying life even in the sad part of life. life is crazy and believe in future

kattupaya s

The most sad person is the person who believe jokes can bring happiness to them. it's another sad story

kattupaya s

everyone waiting for a magic to be a happy person. sometimes it happens otherwise they say it's a black magic. I believe in black magic.

kattupaya s

Now a days notifications make people smile. matrubharti makes lot of notifications which brings sad smile

kattupaya s

Nothing is free except smile.. smile a lot enjoy your day

kattupaya s

a beautiful day starts with the message your salary credited.. I wish everyone the same.

संजय कुमार दवे

હર હર મહાદેવ 🙏🚩

Ajit

જેમના માટે હું જગત જીતવા નીકળ્યો હતો.... એમણે જ મારી હારનો હવાલો આપી દીધો...... ગયો હું ફરિયાદ કરવા એ ખુદા જોડે, એમને પણ કહ્યું તારા જ વ્યક્તિએ તને ત્યજી દીધો...... જિંદગી ની "યાદ"

Sonam Brijwasi

good morning friends..... kaise ho sab

Raj Phulware

IshqKeAlfaaz तेरी आंखों से....

kattupaya s

Good morning friends..have a great day

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या "देवो देवनामसि" ऋग्वेद- 1-14-13 अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है। विस्तृत भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी देवता (प्रकाश देने वाले, शक्तियाँ देने वाले) माने जाते हैं—उन सबका मूल कारण और अधिपति परमेश्वर ही है। वही सबको शक्ति, तेज और सामर्थ्य देता है। इसलिए वह देवों का भी देव है। शब्दार्थ : देवः — प्रकाशमान, दैवी शक्ति वाला देवानाम् — देवताओं का असि — तू है भाव : परमेश्वर ही सभी दैवी शक्तियों का मूल स्रोत है और उसी से सब देवताओं की शक्ति प्रकट होती है। वेदों में प्रमाण--- १. ऋग्वेद मन्त्र : हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ — ऋग्वेद १०.१२१.१ अर्थ : सृष्टि के प्रारम्भ में हिरण्यगर्भ (परमात्मा) ही था। वही समस्त प्राणियों का एकमात्र स्वामी था। उसी ने पृथ्वी और आकाश को धारण किया। हम उस परम देव की उपासना करें। २. ऋग्वेद मन्त्र : महद्देवानामसुरत्वमेकम्॥ — ऋग्वेद ३.५५.१ अर्थ : समस्त देवताओं की महान शक्ति वास्तव में एक ही परम सत्ता से आती है। ३. यजुर्वेद मन्त्र : तदेवाग्निस्तदादित्यस्तद्वायुस्तदु चन्द्रमाः। तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म ता आपः स प्रजापतिः॥ — यजुर्वेद ३२.१ अर्थ : वही परमात्मा अग्नि है, वही आदित्य है, वही वायु है, वही चन्द्रमा है; वही ब्रह्म है, वही जल है और वही प्रजापति है। ४. यजुर्वेद न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यशः॥ — यजुर्वेद ३२.३ अर्थ : उस परमेश्वर की कोई प्रतिमा या समान नहीं है, जिसका नाम महान और यशस्वी है। ५. ऋग्वेद मन्त्र : इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुः अथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान्। एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति अग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः॥ — ऋग्वेद १.१६४.४६ अर्थ : ज्ञानी लोग एक ही परम सत्य को अनेक नामों से पुकारते हैं — कोई उसे इन्द्र, मित्र, वरुण, अग्नि आदि कहते हैं। सार-- इन वेद मन्त्रों से स्पष्ट होता है कि एक ही परमात्मा सभी देवताओं का मूल कारण, स्वामी और शक्ति का स्रोत है। इसी कारण उसे देवों का देव कहा जाता है। उपनिषदो में प्रमाण-- (1) यो देवानां प्रभवश्चोद्भवश्च विश्वाधिपो रुद्रो महर्षिः। हिरण्यगर्भं जनयामास पूर्वं स नो बुद्ध्या शुभया संयुनक्तु॥ — श्वेताश्वतर उपनिषद ३.४ अर्थ : जो समस्त देवताओं का कारण और उत्पत्ति का स्रोत है, जो सम्पूर्ण विश्व का स्वामी है — वही परमेश्वर है। वही पहले हिरण्यगर्भ को उत्पन्न करता है और वह हमें शुभ बुद्धि प्रदान करे। (२) न तस्य कार्यं करणं च विद्यते न तत्समश्चाभ्यधिकश्च दृश्यते। परास्य शक्तिर्विविधैव श्रूयते स्वाभाविकी ज्ञानबलक्रिया च॥ — श्वेताश्वतर उपनिषद ६.८ अर्थ : उस परमेश्वर का कोई कार्य करने वाला अंग या साधन नहीं है और न ही उसके समान या उससे बढ़कर कोई है। उसकी अनेक दिव्य शक्तियाँ स्वाभाविक रूप से कार्य करती हैं। (३) ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ — ईशोपनिषद-- १ अर्थ : इस सम्पूर्ण जगत में जो कुछ भी है वह सब परमेश्वर से व्याप्त है। इसलिए त्याग की भावना से इसका उपयोग करो और किसी के धन का लोभ मत करो। (४) यः सर्वज्ञः सर्वविद् यस्य ज्ञानमयं तपः। तस्मादेतद्ब्रह्म नाम रूपमन्नं च जायते॥ — मुण्डक उपनिषद १.१.९ अर्थ : जो सर्वज्ञ और सब कुछ जानने वाला है, जिसकी तपशक्ति ज्ञानमय है — उसी परम ब्रह्म से यह सम्पूर्ण जगत, नाम और रूप उत्पन्न होते हैं। (५) एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा। कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च॥ — श्वेताश्वतर उपनिषद ६.११ अर्थ : एक ही परम देव सब प्राणियों में गुप्त रूप से स्थित है। वह सबमें व्याप्त, सबका अन्तर्यामी, सब कर्मों का अध्यक्ष, सबका आधार, साक्षी और चेतन है। (६)नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानाम् एको बहूनां यो विदधाति कामान्॥ — कठ उपनिषद २.२.१३ अर्थ : वह परमात्मा नित्य वस्तुओं में नित्य है, चेतन प्राणियों में सर्वोच्च चेतन है और वही एक परमेश्वर अनेक प्राणियों की आवश्यकताओं को पूर्ण करता है। (७) सर्वं खल्विदं ब्रह्म॥ — छान्दोग्य उपनिषद ३.१४.१ अर्थ : यह सम्पूर्ण जगत वास्तव में ब्रह्म (परमात्मा) ही है। (८) यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते येन जातानि जीवन्ति यत्प्रयन्त्यभिसंविशन्ति तद्विजिज्ञासस्व तद्ब्रह्म॥ — तैत्तिरीय उपनिषद ३.१ अर्थ : जिससे ये सभी प्राणी उत्पन्न होते हैं, जिससे जीवित रहते हैं और अंत में जिसमें विलीन हो जाते हैं — उसी को जानने का प्रयत्न करो; वही ब्रह्म है। (९) तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय॥ — श्वेताश्वतर उपनिषद ३.८ अर्थ : केवल उसी परमात्मा को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार हो सकता है; मुक्ति का अन्य कोई मार्ग नहीं है। सार-- इन उपनिषद मन्त्रों से स्पष्ट होता है कि एक ही परमात्मा सबका आधार, अन्तर्यामी और सर्वोच्च देव है — अर्थात वही देवों का देव है। पुराणों में प्रमाण-- (१) अहमेवासमेवाग्रे नान्यद्यत्सदसत्परम्। पश्चादहं यदेतच्च योऽवशिष्येत सोऽस्म्यहम्॥ — श्रीमद्भागवत महापुराण २.९.३३ अर्थ : सृष्टि के प्रारम्भ में केवल मैं ही था, मेरे अतिरिक्त कोई भी सत् या असत् नहीं था। सृष्टि के बाद भी मैं ही हूँ और अंत में जो शेष रहेगा वह भी मैं ही हूँ। (२) नारायणाद्ब्रह्मा जायते नारायणाद्रुद्रो जायते। नारायणादिन्द्रो जायते नारायणात्प्रजापतिः॥ — नारायणीय उपाख्यान (शान्ति पर्व) अर्थ : नारायण से ब्रह्मा उत्पन्न होते हैं, नारायण से रुद्र उत्पन्न होते हैं, नारायण से इन्द्र और प्रजापति उत्पन्न होते हैं। (३) यन्नाभिपद्मादभवन्महात्मा प्रजापतिर्विश्वसृजां पतिः। — वायु पुराण अर्थ : जिस परमात्मा की नाभि के कमल से प्रजापति ब्रह्मा प्रकट हुए, वही सम्पूर्ण सृष्टि का मूल कारण है। (४) यः कारणं कारणानां सर्वेषां परमेश्वरः। स एव देवदेवेशः सर्वलोकनमस्कृतः॥ — लिंग पुराण अर्थ : जो सभी कारणों का कारण और समस्त जगत का परमेश्वर है, वही देवों का देव और सब लोकों द्वारा पूजनीय है। (५) देवदेव जगन्नाथ लोकनाथ नमोऽस्तु ते। — स्कन्द पुराण अर्थ : हे देवों के देव, हे जगत के स्वामी और लोकों के नाथ! आपको नमस्कार है। भगवद्गीता से प्रमाण-- (१) अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः॥ — भगवद्गीता १०.८ अर्थ : मैं ही समस्त जगत का मूल कारण हूँ, मुझसे ही सब कुछ उत्पन्न और संचालित होता है। यह जानकर ज्ञानी लोग श्रद्धा से मेरी भक्ति करते हैं। (२) परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान्। पुरुषं शाश्वतं दिव्यम् आदिदेवं अजं विभुम्॥ — भगवद्गीता १०.१२ अर्थ : आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं। आप शाश्वत दिव्य पुरुष, आदि देव और अजन्मा हैं। (३) देवानां अस्मि वासवः॥ — भगवद्गीता १०.२२ अर्थ : देवताओं में मैं इन्द्र हूँ (अर्थात् देवताओं की श्रेष्ठ शक्तियों का मूल भी मैं ही हूँ)। (४) यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥ — भगवद्गीता ७.२१ अर्थ : जो भक्त जिस देवता की श्रद्धा से पूजा करना चाहता है, उसकी श्रद्धा को स्थिर भी मैं ही करता हूँ। (५) येऽप्यन्यदेवताभक्ता यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम्॥ — भगवद्गीता ९.२३ अर्थ : हे अर्जुन! जो लोग अन्य देवताओं की श्रद्धा से पूजा करते हैं, वे भी वास्तव में मेरी ही पूजा करते हैं, यद्यपि विधि के अनुसार नहीं। सार-- भगवद्गीता के इन श्लोकों से स्पष्ट होता है कि परमात्मा ही सभी देवताओं का मूल कारण, आधार और सर्वोच्च सत्ता है — इसलिए उसे देवों का देव कहा गया है। महाभारत में प्रमाण-- १. नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत्॥ — महाभारत (आदि पर्व १.१) अर्थ : नारायण, श्रेष्ठ पुरुष नर और देवी सरस्वती को नमस्कार करके ही महाभारत का वर्णन आरम्भ करना चाहिए। (२) नारायणः परो देवः नारायणः परं ब्रह्म। नारायणः परो धाता नारायणः परं तपः॥ — महाभारत (शान्ति पर्व, नारायणीय उपाख्यान) अर्थ : नारायण ही परम देव हैं, वही परम ब्रह्म हैं, वही जगत के धारण करने वाले हैं और वही परम तप हैं। (३) यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥ — महाभारत (शान्ति पर्व) अर्थ : जिससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण जगत व्याप्त है, उसी परमात्मा की अपने कर्मों द्वारा उपासना करके मनुष्य सिद्धि प्राप्त करता है। (४) देवदेव जगन्नाथ लोकनाथ नमोऽस्तु ते। — महाभारत (अनुशासन पर्व, स्तुति प्रसंग) अर्थ : हे देवों के देव, हे जगत के स्वामी और लोकों के नाथ! आपको नमस्कार है। (५) यस्य स्मरणमात्रेण पापं नश्यति तत्क्षणात्। तं नमामि जगन्नाथं देवदेवं सनातनम्॥ — महाभारत (स्तुति प्रसंग) अर्थ : जिसके स्मरण मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं, उस सनातन देवों के देव जगन्नाथ को मैं नमस्कार करता हूँ। सार-- महाभारत में भी स्पष्ट बताया गया है कि परमात्मा ही ब्रह्मा, इन्द्र आदि सभी देवताओं के मूल कारण और सर्वोच्च स्वामी हैं, इसलिए उन्हें देवदेव (देवों का देव) कहा गया है“देवो देवानामसि” (परमात्मा देवों का देव है) । स्मृति-ग्रन्थों में प्रमाण-- १--यत्प्रसादादिमं लोकं भुङ्क्ते सर्वं चराचरम्। तं नमामि जगन्नाथं देवदेवं सनातनम्॥ — पराशर स्मृति अर्थ : जिस परमेश्वर की कृपा से यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत स्थित और संचालित होता है, उस सनातन देवों के देव जगन्नाथ को मैं नमस्कार करता हूँ। २.--स एव सर्वभूतानां कर्ता धाता सनातनः। स एव देवदेवेशः सर्वलोकनमस्कृतः॥ — याज्ञवल्क्य स्मृति अर्थ : वही परमेश्वर सब प्राणियों का कर्ता और पालन करने वाला सनातन स्वामी है। वही देवों का देव है और सभी लोकों द्वारा पूजित है। ३--एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सनातनः। तं नमामि जगन्नाथं देवदेवं महेश्वरम्॥ — दक्ष स्मृति अर्थ : एक ही परम देव सब प्राणियों में स्थित है, वही सर्वव्यापी और सनातन है। उस देवों के देव महेश्वर को नमस्कार है। ४--यस्याज्ञया जगत्सर्वं वर्तते सचराचरम्। स देवः परमेशानो देवानां परमः प्रभुः॥ — अत्रि स्मृति अर्थ : जिसकी आज्ञा से सम्पूर्ण चर-अचर जगत चलता है, वही परमेश्वर देवताओं का भी सर्वोच्च स्वामी है। सार--- स्मृति-ग्रन्थों में भी स्पष्ट बताया गया है कि परमात्मा ही सभी देवताओं का मूल कारण और स्वामी है, इसलिए उसे देवदेव (देवों का देव) कहा गया है। नीति ग्रन्थों में प्रमाण -- १. चाणक्य नीति न देवो विद्यते काष्ठे न पाषाणे न मृन्मये। भावे हि विद्यते देवः तस्माद्भावो हि कारणम्॥ — चाणक्य नीति अर्थ : ईश्वर लकड़ी, पत्थर या मिट्टी में नहीं होता; वह सच्चे भाव में निवास करता है। इसलिए भावना ही मुख्य कारण है। २. भर्तृहरि नीति शतक दिक्कालाद्यनवच्छिन्नानन्तचिन्मात्रमूर्तये। स्वानुभूत्येकमानाय नमः शान्ताय तेजसे॥ — नीतिशतक अर्थ : जो दिशा, काल आदि से रहित, अनन्त और शुद्ध चेतन स्वरूप है तथा जिसे आत्मानुभूति से जाना जाता है — उस शान्त और तेजस्वी परमात्मा को नमस्कार है। ३. विदुर नीति एकः सृष्टिमिमां सर्वां देवदेवः सनातनः। स एव सर्वभूतानां हृद्देशे तिष्ठति प्रभुः॥ — महाभारत (विदुर नीति, उद्योग पर्व) अर्थ : एक ही सनातन देवों का देव इस सम्पूर्ण सृष्टि का स्वामी है और वही सभी प्राणियों के हृदय में स्थित है। सार--- चाणक्य, भर्तृहरि, विदुर आदि आचार्यों के ग्रन्थों में भी यह सिद्ध होता है कि एक ही परमेश्वर सर्वोच्च सत्ता है और वही देवों का देव है। “देवो देवानामसि” (परमात्मा देवों का देव है) — इस भाव का समर्थन अन्य आर्ष ग्रन्थों जैसे रामायण, गर्ग संहिता, हितोपदेश, पंचतंत्र, योगवाशिष्ठ आदि में भी मिलता है। कुछ प्रमाण श्लोक, ग्रन्थ और अर्थ सहित इस प्रकार हैं — १. वाल्मीकि रामायण-- नमस्ते देवदेवेश जगन्नाथ नमोऽस्तु ते। त्रैलोक्यनाथ सर्वेश प्रसीद मम सुव्रत॥ — वाल्मीकि रामायण (युद्धकाण्ड) अर्थ : हे देवों के देव, हे जगत के स्वामी! आपको नमस्कार है। हे तीनों लोकों के नाथ और सर्वेश्वर! मुझ पर प्रसन्न हों। २. गर्ग संहिता देवदेव जगन्नाथ भक्तानुग्रहकारक। त्वमेव सर्वलोकानां नाथो देवः सनातनः॥ — गर्ग संहिता अर्थ : हे देवों के देव, हे जगत के स्वामी! आप भक्तों पर अनुग्रह करने वाले हैं। आप ही सभी लोकों के सनातन स्वामी हैं। ३. हितोपदेश नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत्॥ — हितोपदेश अर्थ : नारायण, श्रेष्ठ पुरुष और देवी सरस्वती को नमस्कार करके ही कार्य का आरम्भ करना चाहिए। ४. पंचतंत्र-- यस्य स्मरणमात्रेण विघ्नाः नश्यन्ति तत्क्षणात्। तं नमामि जगन्नाथं देवदेवं सनातनम्॥ — पंचतंत्र अर्थ : जिसके स्मरण मात्र से विघ्न नष्ट हो जाते हैं, उस सनातन देवों के देव जगन्नाथ को मैं नमस्कार करता हूँ। ५. योगवाशिष्ठ-- एको देवः सर्वभूतेषु चेतनरूपेण संस्थितः। तमेव शरणं यान्ति ज्ञानी मोक्षपरायणाः॥ — योगवासिष्ठ अर्थ : एक ही परम देव सभी प्राणियों में चेतना के रूप में स्थित है। मोक्ष की इच्छा रखने वाले ज्ञानी उसी की शरण लेते हैं। सार----- रामायण, गर्ग संहिता, हितोपदेश, पंचतंत्र और योगवाशिष्ठ आदि ग्रन्थों में भी यह सिद्ध होता है कि एक ही परमात्मा सबका स्वामी है और वही देवों का देव है। -----+-------+-----+--------++---+

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

मेल करो मत शत्रु से, वह रखता है दर्प। दूध पिलाओगे मगर, डस लेगा वंह सर्प।। दोहा---४४५ (नैश के दोहे से उद्धृत) -------गणेश तिवारी 'नैश'

वात्सल्य

मिलने आया था आपको के आप बहोत दुःखी हो जानकर l आकर देखा आपने दोस्त समझकर,आप बहोत सुखी हो देखकर ।। - वात्सल्य

ASHISH KUMAR

​"शहर सारा शोर करता है, पर हम तुम में खोए रहते हैं, लोग ज़माने की कहते हैं, हम दिल की बात कहते हैं। तुम्हारी एक मुस्कुराहट ही काफी है मेरा दिन बनाने को, हम तो बस तुम्हारी आँखों के समुंदर में बहते रहते हैं।"

ASHISH KUMAR

"अभी तो बस नज़रें मिली हैं, बातें तो अभी बाकी हैं, दिल के सहरा में मोहब्बत की बरसात अभी बाकी हैं। थाम कर हाथ मेरा तुम ठहर जाना बस यहीं, इस हसीं शाम के बाद एक लंबी रात अभी बाकी है।"

ASHISH KUMAR

"ज़मीन पर रहकर भी आसमान की बात करते हैं, हम हर धड़कन में तेरा ही नाम भरते हैं। ये कैसी कशिश है तेरी सोहबत में ऐ हमदम, कि हम खुद को भूलकर भी तुझसे प्यार करते हैं।"

ASHISH KUMAR

"डिजिटल इस दौर में भी दिल वही पुराना रखते हैं, हम आज भी यादों का एक सयाना खज़ाना रखते हैं। वीडियो कॉल की भीड़ में भी वो सादगी ज़िंदा है, हम नज़रों से दिल का हाल बताने का वही ज़माना रखते हैं।"

ASHISH KUMAR

"हुनर की चमक है तो अंधेरों से घबराना क्या, जब खुद पर हो यकीन तो ज़माने को आज़माना क्या। मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं जो रास्तों से दोस्ती कर लें, वरना हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाने में हर्ज़ ही क्या।"

ASHISH KUMAR

"वो कागज़ पीला पड़ गया पर जज़्बात आज भी ताज़ा हैं, धड़कन के हर पन्ने पर बस तेरा ही अंदाज़ा है। अधूरा खत मुकम्मल हुआ एक उम्र गुज़र जाने के बाद, हमें चैन मिला तो सही, मगर सब खो जाने के बाद।"

ASHISH KUMAR

"तुम्हारी मुस्कुराहट में जो सुकून का साया है, मैंने अपनी सारी दुनिया को बस वहीं पाया है। यूँ तो हज़ारों लफ़्ज़ हैं मेरे पास सुनाने को, पर तुम्हारी आँखों ने मुझे चुप रहना सिखाया है।"

ASHISH KUMAR

"वो कागज़ पीला पड़ गया पर जज़्बात आज भी ताज़ा हैं, धड़कन के हर पन्ने पर बस तेरा ही अंदाज़ा है। अधूरा खत मुकम्मल हुआ एक उम्र गुज़र जाने के बाद, हमें चैन मिला तो सही, मगर सब खो जाने के बाद।" - ASHISH KUMAR

ASHISH KUMAR

​"हुनर की चमक है तो अंधेरों से घबराना क्या, जब खुद पर हो यकीन तो ज़माने को आज़माना क्या। मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं जो रास्तों से दोस्ती कर लें, वरना हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाने में हर्ज़ ही क्या।" - ASHISH KUMAR

SARWAT FATMI

रिश्ते रिस्तो में एक दूसरे की समझदारी ज्यादा जरूरी होती है किसी भी रिश्ते में ये सवाल अकसर पूछ लेना चाहिए "क्या हुआ,सब ठीक है ना, कोई परेशानी तो नहीं " ताकि कभी खुद में भी सवाल ना खड़ा हो के काश.... पूछ लेते" क्या हुआ था "??? क्यों की खामोशी अचानक नहीं आती धीरे धीरे आपके रिश्ते में पन्मति है इसलिए जो बातें हो वह पूछ लो कल का क्या है???... अक्सर कोई आपका है और वह पूछ रहा है "क्या हुआ सब ठीक है कोई दिक्कत तो नहीं " तो आप बहुत किस्मत वाले हो वरना कुछ रिश्ते में ऐसा होता नहीं और अफसोस ही रह जाता है की क्या हुआ था हमें पता ही नहीं चला 🥰Sarwat Fatmi🥰

A singh

मोहब्बत का ये कैसा सफर रहा हमारा, न किनारा मिला, न ही कोई सहारा, किस्मत का खेल तो देखिए ज़रा, वो जीत गए सब कुछ, और मैं सब कुछ हारा। _ A singh

SARWAT FATMI

PTM जब हम सब मायें स्कूल जाते हैं रिपोर्ट कार्ड लेने तो सिर्फ हम रिपोर्ट कार्ड नहीं लेते हम टीचर से सिर्फ पढ़ाई की बातें नहीं सुनते हम तो अपनी उम्मीदों को हल सुनने जाते हैं कभी-कभी अपने बच्चों की तारीफ सुनकर आंखें नम हो जाती हैं तो कभी चुपचाप कुछ सोचते हुए स्कूल से लौटी है और दिल ही दिल में कहती है कोई नहीं फिर से मैं कोशिश करूंगी इस बार हार गई अब नहीं हारूंगी फिर हम अपने बच्चों का हाथ कसकर थाम लेते हैं उसे वापस से तैयार करने के लिए और अपनी उम्मीदों का हाल सुनाने के लिए हम मायें है हारना कहां सीखा है खुद को हिम्मत देकर,चेहरे पर मुस्कान रख,फिर सुबह हिम्मत के साथ खड़ी हो जाती है 🥰sarwat Fatmi🥰

A singh

माँ की ममता अगर प्यार है, तो पापा का संघर्ष हमारी ताकत है। उनकी मेहनत और दुआओं से ही हमारी हर राह आसान बन जाती है। Love you Papa ❤️ ✍️ A Singh

A singh

पापा वो साया हैं जो हर धूप में साथ खड़े रहते हैं, खुद थक जाते हैं मगर हमें कभी थकने नहीं देते हैं। हमारी हर खुशी के लिए अपनी खुशियाँ भूल जाते हैं, बिना कहे ही हमारे हर दर्द को समझ जाते हैं। _ A singh

A singh

माँ वो है जो बिना कहे सब समझ जाती है, हमारी हर छोटी खुशी में मुस्कुराती है। जब दुनिया थका देती है तानों और मुश्किलों से, माँ की गोद ही हमें सुकून दे जाती है। _ A singh

A singh

जब भी मुश्किलों ने मुझे घेरा है, माँ की दुआओं ने मुझे बचाया है। किस्मत भी झुक जाती है उस इंसान के आगे, जिसके साथ उसकी माँ का साया है। _ A singh

ASHISH KUMAR

​लक्ष्य की ओर ⌛ ​मंज़िलें उन्हें नहीं मिलतीं, जिनके ख्वाब बड़े होते हैं, मंज़िलें उन्हें मिलती हैं, जो अपनी जिद पर अड़े होते हैं। ​तूफान क्या बिगाड़ेगा तेरा, जब तूने हौसले को पाला है, हर ठोकर एक सबक देगी, तू खुद अपनी किस्मत का उजाला है। ​वक्त बुरा है, तू नहीं, ये दौर भी गुज़र जाएगा, धैर्य की चाबी से ही, किस्मत का ताला खुल पाएगा। ​कुछ मुख्य बातें: ​अनुशासन: मोटिवेशन शुरुआत देता है, लेकिन अनुशासन आपको अंत तक ले जाता है। ​धैर्य: बड़ी जीत रातों-रात नहीं मिलती। ​आत्मविश्वास: दुनिया आप पर तब यकीन करेगी, जब आप खुद पर करेंगे।

ASHISH KUMAR

​खामोश प्रेम 💗 ​शब्दों की अब ज़रूरत क्या, जब आँखों से इकरार हो जाए, बिना कहे जो समझ ले दिल, वही तो सच्चा प्यार हो जाए। ​वो साथ तेरा, वो मीठी बातें, जैसे तपती धूप में छाँव है, तेरे संग हर रस्ता सीधा, वरना मंज़िल दूर का गाँव है। ​धड़कन में तुम, साँसों में तुम, एक प्यारा सा अहसास हो, भीड़ तो बहुत है दुनिया में, पर तुम सबसे खास हो। ​एक छोटी सी बात: प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और साथ निभाने में होता है।

ASHISH KUMAR

उम्मीद का सूरज 🌜 धुंधली सी है राह मगर, चलना ही पहचान है, थक कर बैठना मत ऐ राही, अभी मुट्ठी में आसमान है। ​रात कितनी भी काली हो, भोर का आना तय है, काँटों के बीच रहकर भी, फूलों का खिलना जय है। ​नदी की लहरों से सीखो, बस आगे बढ़ते जाना, खुद को तराश कर पत्थर से, एक नया रूप पाना।

Vishakha Mothiya

Colourful life VS Minimalist life How far our choices have changed. Our living standards, and even our lives, shifted from colourful to black and white. We lost colours... Choose to be minimalist in everything.... Modernity is now minimalistic, not detailed. We lost structure, art, and so on. Now, more seems like a mess, and less seems like perfection. - Vishakha

Sonu Kumar

Nitish Kumar और Narendra Modi दोनों 100% देशी-विदेशी एलीट लोगों के प्रति वफादार हैं। फिर देशी-विदेशी एलीट लोगों ने नीतीश कुमार से इस्तीफा क्यों दिलवाया? . जल्द ही कई मुस्लिम देशों को मजबूर होकर ईरान के साथ मिलकर अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो सकता है। जो पाकिस्तानी सेना पर दबाव डाले कि वह ईरान की सेना का पूरी तरह समर्थन करे और युद्ध में उसका पूर्ण सहयोगी बन जाए। जब तीसरा विश्व युद्ध (WW3) शुरू होगा, तब विदेशी एलीट चाहते हैं कि भारत में धर्म के आधार पर एक बड़ा गृहयुद्ध हो। ताकि हिंदुओं को यह समझाया जा सके कि वे अमेरिका-यूके-पश्चिमी देशों (US-UK-WME) के आक्रमण का सक्रिय रूप से समर्थन करें। क्योंकि अगर भारत में कोई गृहयुद्ध नहीं होगा, तो अधिकांश हिंदू तटस्थ (न्यूट्रल) रहने का समर्थन करेंगे। . यह ओरिजनल पोस्ट Rahul Mehta द्वारा लिखा गया है, जिसे मैने हिंदी में अनुवाद किया है। राहुल मेहता जी ने हीं भारत में पहली बार - EVM BLACK CLASS डेमो मशीन का आविष्कार किया है।।

Narendra Parmar

क्या करें ??? कभी कभी हमारी शराफ़त उसे राज नहीं आती है हम मोहब्बत करते हैं और वो हमारी हंसी उड़ातीं है ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "

mohansharma

कोई अपना होता तो करते भी बात उसकी.. गैरों की बात करना भी भला कोई बात हुईं..

Narendra Parmar

इंसान इंसान में भी फ़र्क होता है सुबह में किसी का मुंह देखकर अपना पूरा दिन सुधर जाता है ! तो किसी इंसान का मुंह देखकर अपना पूरा दिन बिगड़ जाता है ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Meera Singh

उसने इजहार भी न किया और इंकार भी न किया मगर ये भी सच है उसने मुझे कभी प्यार भी न किया। इंतजार इलतजा गुजारिश सब की हमने मगर न उसने मुझे छोड़ा और न ही अपनाया।। मीरा सिंह

Ajit

છેલ્લે સહન કરવાની તાકાત સાથે આવા સંબંધો નિભાવવા..... ગમે જેટલું રાખશો એકલતાની તૈયાર સાથે સંબંધો નિભાવવા ની તાકાત રાખો.......🙏🙏🙏 મારા અનુભવની ડાયરી માંથી 🙏🙏🙏

PRASANG

मौन का राज़। जो जानता है सो पहचानता, बताने की ज़रूरत क्या, हक़ीक़त ख़ुद उजागर हो, जताने की ज़रूरत क्या। भीतर जब उजियारा फूटे, मिट जाएगा ये भ्रम सारा, सूरज को दीप दिखलाकर चमकाने की ज़रूरत क्या। अनुभव का अमृत मिल जाए चेतन गहरे सागर में, लफ़्ज़ों के वन बोकर अर्थ उगाने की ज़रूरत क्या। साँसों में जब बस जाए स्वर उस एक अटल सच्चाई का, माला लेकर सबके आगे गीत सुनाने की ज़रूरत क्या। अहंकार का पर्दा गिर जाएगा निर्मल अंतर आँगन में, माया के रंग फिर जीवन में सजाने की ज़रूरत क्या। मौन बने जब पथ सच्चाई का, मन पाए उजली दृष्टि, “प्रसंग” फिर लोगों को बातें दोहराने की ज़रूरत क्या। - प्रसंग प्रणयराज रणवीर

ek archana arpan tane

વાતચીત અમારી સાથે અને ખ્યાલો માં કોઈક બીજું હાલ તમારો અમારી પાર્થના જેવો જ છે. - ek archana arpan tane

vaanya

தேடி வந்த பேரன்பே... உயிரின் அர்த்தம் நீயே... படித்து பார்த்து... கமெண்ட் பண்ணுங்க... - vaanya

Ajit

નિભાવવા વાળા તો મર્યા પછી પણ નિભાવી જાય છે.... છોડવા વાળા એક પળમાં પલાયન થઈ જાય છે....

kattupaya s

Goodnight friends.. sweet dreams

A singh

ऐसी कौन-सी चीज़ है जो पानी पीते ही मर जाती है? 👉 जल्दी बताइए… कमेंट में।

A singh

एक आदमी के पास 10 आम थे। उसने 2 खा लिए। बताइए उसके पास अब कितने आम हैं? 👉 कमेंट में जवाब दीजिए। soch samajh kar answer de😆

A singh

एक आदमी बिना पैराशूट के हवाई जहाज़ से कूद गया, फिर भी उसे ज़रा सा भी चोट नहीं आई। आख़िर ऐसा कैसे हो सकता है? 🤔 बताइए… आपका जवाब क्या है? कमेंट में ज़रूर बताइए।

A singh

तुम्हें देख फिर इस चाँद को देखता हूँ, और सोचता हूँ कौन ज़्यादा ख़ूबसूरत है… चाँद तो बस आसमान में दूर से चमकता है, पर तुम्हारी मुस्कान तो मेरे दिल को रोशन कर जाती है। चाँद में तो दाग भी हैं, पर तुम तो मेरी नज़रों में बिल्कुल बेदाग हो। सच कहूँ तो हर रात चाँद को देखकर यही लगता है, काश तुम पास होती… तो चाँद को देखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। 🌙✨ _ A singh

Rinki Singh

न जाने कैसा सफ़्हा है तहरीर-ए-ज़िंदगी का दर्दों ने दिल पे दस्तख़त ही कर दिए हों जैसे ~रिंकी सिंह #ख़याल #matrubharti

Raju kumar Chaudhary

“जयपुर की बारिश में खोई यादें”जयपुर ट्रिप के दौरान अचानक अपने एक्स-हस्बैंड से मिलने के बाद, मैं कमज़ोर हो गई और उनके साथ एक मज़ेदार रात बिताई… जयपुर की वह रात असामान्य रूप से शांत थी, लेकिन आसमान जैसे अपने भीतर दबे हुए किसी दर्द को बरसात की मोटी बूंदों में बाहर निकाल रहा था। मानसून की बारिश होटल की ऊँची खिड़कियों से टकराकर ऐसी आवाज़ कर रही थी मानो किसी पुराने गीत की उदास धुन बज रही हो। मैं होटल के बार के कोने में अकेली बैठी थी। मेरे सामने आधी पिघली हुई मार्गरीटा का गिलास था। उसके किनारों पर जमी नमक की परत धीरे-धीरे नमी से घुल रही थी। सॉफ्ट जैज़ म्यूज़िक हल्के-हल्के बज रहा था, और उसके साथ मिलकर बारिश की बूंदें एक अजीब सा सुकून और उदासी पैदा कर रही थीं। मेरा नाम अनिका है। चौंतीस साल की, एक सफल महिला, अपनी मेहनत से बनाई हुई जिंदगी के साथ। लोग कहते हैं मैं मजबूत हूं, आत्मनिर्भर हूं। लेकिन सच यह है कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो बाहर से नहीं दिखते। तीन साल पहले मेरा तलाक हुआ था। कागज़ पर वह बस एक कानूनी प्रक्रिया थी। लेकिन दिल के अंदर… वह किसी तूफान से कम नहीं था। तीन साल बीत चुके थे, फिर भी कुछ यादें ऐसी थीं जो पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं। मैं जयपुर काम के सिलसिले में आई थी — कम से कम यही आधिकारिक वजह थी। असल में, शायद मैं अपने खाली अपार्टमेंट से भागना चाहती थी। उन दीवारों से, जो अभी भी अतीत की गूंजों से भरी हुई थीं। घड़ी ने रात के ग्यारह बजाए। मैंने गिलास को हल्के से घुमाया और खिड़की के बाहर गिरती बारिश को देखने लगी। तभी अचानक मेरे पीछे से एक आवाज़ आई। “अनिका? क्या वह तुम हो?” मेरे हाथ वहीं रुक गए। वह आवाज़… मेरी रीढ़ में जैसे ठंडी लहर दौड़ गई। यह आवाज़ इतनी परिचित थी कि एक पल के लिए मुझे लगा मैं सपना देख रही हूँ। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन मैं तुरंत मुड़ी नहीं। क्योंकि अगर मैं मुड़ती… और वह वही होता… तो? धीरे-धीरे मैंने अपनी कुर्सी घुमाई। और अगले ही पल मेरी सांसें रुक गईं। मेरे सामने खड़ा था— अर्जुन। मेरा पूर्व पति। तीन साल पहले अदालत के उस ठंडे कमरे में जिस आदमी ने मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए निकल जाने का फैसला सुनाया था… वही आदमी आज मेरे सामने खड़ा था। वह पहले से भी ज्यादा परिपक्व और आकर्षक लग रहा था। नेवी ब्लू सूट, हाथ में रेड वाइन का गिलास, और चेहरे पर वही आधी मुस्कान… जो कभी मेरे दिल की धड़कन बढ़ा देती थी। “अर्जुन…?” मेरे मुंह से बस इतना ही निकल पाया। वह मुस्कुराया और मेरे पास वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया। “कितना अजीब संयोग है,” उसने कहा। “तीन साल बाद… और तुम यहाँ।” उसकी खुशबू हवा में घुल रही थी — वही चंदन की हल्की खुशबू जिसे मैं कभी पहचान सकती थी, चाहे भीड़ कितनी भी बड़ी क्यों न हो। पहले कुछ मिनट अजीब चुप्पी में बीते। फिर बातचीत शुरू हुई। पहले औपचारिक सवाल — काम कैसा चल रहा है, जिंदगी कैसी है, स्वास्थ्य कैसा है। लेकिन जैसे-जैसे शराब के घूंट बढ़ते गए, बातचीत भी गहराई में उतरने लगी। अर्जुन ने बताया कि वह अब दिल्ली में रहता है। उसका रियल एस्टेट बिज़नेस बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स, विदेश यात्राएं, नए अवसर। मैं बस सुनती रही। कभी-कभी उसकी आँखें मेरी आँखों में टिक जातीं, जैसे वह मेरे चेहरे पर कोई पुरानी याद ढूंढ रहा हो। फिर उसने अचानक पूछा— “और तुम? तुम्हारी जिंदगी में कोई नया है?” मैं हँस पड़ी। “नहीं,” मैंने कहा। “शायद काम ही काफी है।” अर्जुन ने गहरी सांस ली। फिर उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया… और मेरे हाथ को हल्के से छू लिया। उस स्पर्श में कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर दबी हुई यादों को जगा दिया। “अनिका…” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “मुझे माफ कर दो।” मैं ठिठक गई। क्योंकि तीन साल में पहली बार… अर्जुन ने अपनी गलती स्वीकार की थी। उसकी आँखों में पछतावा था। या शायद… मुझे ऐसा लगा। उस रात बारिश बाहर गिरती रही, संगीत बजता रहा… और हमारी बातचीत धीरे-धीरे हमें उस अतीत के करीब ले जाने लगी जिसे हमने कभी पीछे छोड़ दिया था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह मुलाकात सिर्फ एक संयोग नहीं थी… बल्कि एक ऐसी रात की शुरुआत थी जो मेरी जिंदगी की सबसे खतरनाक सच्चाई को सामने लाने वाली थी। 👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

kajal jha

जिंदगी ने सिखाया है कि भरोसा सोच-समझकर करना, क्योंकि अपने भी कभी-कभी अजनबी बन जाते हैं। समय के साथ सब बदल जाता है, बस यादें हैं जो दिल में ठहर जाती हैं। - kajal jha

Paagla

https://youtube.com/shorts/2bUHfy6-GgQ?si=kdtmYrP8fbq4GJbf Go Through The Link and watch the video

Saroj Prajapati

खुशियां इतनी महंगी भी नहीं जितना कहते हैं लोग फुर्सत निकाल कर देखिए ये बिखरी आपके चारों ओर। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

pink lotus

control what you can and let go of what you can't by:Pinklotue 🌸❣️

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૭: ડ્રાફ્ટ (Draft) ​એના વોટ્સએપમાં એક મેસેજ છેલ્લા ચાર મહિનાથી 'ડ્રાફ્ટ'માં પડ્યો હતો. ​"આજે તારી બહુ યાદ આવે છે, શું આપણે ફરી એકવાર વાત કરી શકીએ?" ​આ શબ્દો ટાઈપ કરતી વખતે આંગળીઓ ધ્રૂજતી હતી, પણ 'સેન્ડ' (Send) બટન સુધી પહોંચતા પહોંચતા મન હારી જતું. ડ્રાફ્ટ એટલે હૃદય અને હિંમત વચ્ચેનું યુદ્ધ. જે વાત આપણે દુનિયાને નથી કહી શકતા અને જે વાત આપણે એ વ્યક્તિને કહેવા માંગીએ છીએ જેને હવે આપણામાં રસ નથી, એ બધું જ 'ડ્રાફ્ટ'માં કેદ થઈ જાય છે. ​જૂના ડ્રાફ્ટ્સ તપાસો ત્યારે ખબર પડે કે જિંદગીમાં આપણે કેટલું બધું કહેવાનું બાકી રાખ્યું છે. ક્યારેક ગુસ્સો, ક્યારેક માફી અને ક્યારેક બેહદ પ્રેમ—બધું જ એક નાનકડા ખાનામાં ધૂળ ખાતું હોય છે. આપણી ગેલેરી ફોટાઓથી ભરેલી હોય છે, પણ આપણું અસલી વ્યક્તિત્વ તો એ ડ્રાફ્ટ્સમાં છુપાયેલું હોય છે જે આપણે ક્યારેય 'પબ્લિક' નથી કરતા. ​ક્યારેક એ ડ્રાફ્ટ ડિલીટ કરી દેવા સારા, કારણ કે જે વાત સમયસર ન કહેવાય એ પછી માત્ર એક 'બોજ' બની જાય છે. રિયાએ આજે એ ચાર મહિના જૂનો મેસેજ સિલેક્ટ કર્યો અને એક ઝાટકે 'ડિલીટ' કરી દીધો. ​જિંદગીમાં ક્યારેક 'સેન્ડ' કરવા કરતાં 'ડિલીટ' કરવામાં વધુ શાંતિ મળે છે. જે વાત ડ્રાફ્ટમાંથી બહાર ન આવી શકી, એ કદાચ ક્યારેય કહેવા માટે બની જ નહોતી.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૬: બાય (Bye) ​તેણે ગાડીનો દરવાજો ખોલતા પહેલાં માત્ર એક જ શબ્દ કહ્યો, "બાય." ​આકાશને એ 'બાય' બહુ વસમું લાગ્યું. 'બાય' તો આપણે એને પણ કહીએ છીએ જે સાંજે ફરી મળવાનું હોય, અને એને પણ કહીએ છીએ જે કદાચ હવે જિંદગીમાં ક્યારેય નહીં મળે. પણ આ 'બાય' માં એક ઠંડક હતી, એક એવું પૂર્ણવિરામ હતું જેણે આગળના બધા જ સંવાદો પર કાળી શાહી ફેરવી દીધી હતી. ​આધુનિક સંબંધોમાં 'બાય' હવે માત્ર વિદાયનો શબ્દ નથી રહ્યો, પણ એક હથિયાર બની ગયો છે. જ્યારે સામેની વ્યક્તિ પાસે દલીલો ખૂટી જાય અથવા લાગણી ઓસરી જાય, ત્યારે એ 'બાય' કહીને સંવાદનો દરવાજો જોરથી પછાડી દે છે. એ એક શબ્દ પાછળ કેટલાય 'પ્લીઝ રોકાઈ જા' અને કેટલાય 'કેમ આમ કરે છે?' જેવા સવાલો ગુંગળાઈને મરી જાય છે. ​ગાડી જતી રહી. રસ્તા પર માત્ર ધૂળ અને પેલો અધૂરો શબ્દ હવામાં તરતો રહ્યો. આકાશને સમજાયું કે સૌથી વધુ પીડા એ 'બાય' નથી આપતું જે બોલાઈ ગયું છે, પણ એ 'બાય' આપે છે જે સાંભળ્યા પછી આપણે 'ઉભા રહો' કહેવાની હિંમત હારી જઈએ છીએ. ​ક્યારેક 'બાય' નો અર્થ 'આવજો' નથી હોતો, પણ 'હવે ક્યારેય ન આવતા' એવો હોય છે. અને એ સ્વીકારી લેવામાં જ સમજદારી છે.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૫: સ્ક્રીનશોટ ​એણે ફોનની ગેલેરી ખોલી. હજારો ફોટાઓની ભીડમાં એક છુપાયેલું ફોલ્ડર હતું—'Screenshots'. ​એમાં કોઈ સુંદર પહાડો કે ચહેરાના ફોટા નહોતા, પણ જૂની ચેટના ટુકડાઓ હતા. એ રાતોના સંવાદો, જે અત્યારે હકીકતમાં ક્યાંય અસ્તિત્વ ધરાવતા નહોતા. એક સ્ક્રીનશોટમાં લખ્યું હતું, "તું ચિંતા ન કર, હું તારી સાથે જ છું." નિશા એ વાક્યને તાકી રહી. જે વ્યક્તિ આજે 'અજાણી' બનીને રસ્તેથી પસાર થઈ જાય છે, એના વચનો આજેય ગેલેરીમાં કેદ હતા. આપણે ફોટા તો ડિલીટ કરી નાખીએ છીએ, પણ આ સ્ક્રીનશોટ એ પથ્થર પરની લકીર જેવા હોય છે જે આપણને આપણી જ ભીની ક્ષણોની યાદ અપાવતા રહે છે. ​સ્ક્રીનશોટ એટલે શું? એક એવો પુરાવો જે આપણે આપણી જ જાતને આપતા હોઈએ છીએ કે, "જો, એક સમય એવો પણ હતો જ્યારે હું કોઈ માટે સર્વસ્વ હતી." એ આપણી જૂની ખુશીઓના દસ્તાવેજ છે જે વર્તમાનમાં માત્ર કડવાશ જ આપે છે. ​તેણે એક ઊંડો શ્વાસ લીધો અને 'Delete' બટન પર આંગળી મૂકી. તેને સમજાયું કે જે સંબંધોનો 'રિફ્રેશ રેટ' શૂન્ય થઈ ગયો હોય, એના સ્ક્રીનશોટ સાચવીને આપણે હકીકતમાં આપણી જિંદગીની સ્પેસ રોકી રહ્યા છીએ. ક્યારેક નવી યાદોને જગ્યા આપવા માટે જૂના પુરાવાઓ ભૂંસવા બહુ જરૂરી હોય છે.

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૪: બ્લુ ટિક ​તેણે પૂછ્યું હતું, "શું આપણે બધું ભૂલીને ફરી એકવાર શરૂ કરી શકીએ?" ​સામેથી કોઈ જવાબ ન આવ્યો, પણ મેસેજ પર બે વાદળી લીટીઓ—'બ્લુ ટિક'—ચમકી ગઈ. એ વાદળી લીટીઓ કોઈ ધારદાર હથિયાર જેવી લાગતી હતી. મેસેજ વંચાઈ ગયો હતો, પણ સ્વીકારાયો નહોતો. સાહિલ પાછલા બે કલાકથી એ સ્ક્રીનને તાકી રહ્યો હતો, જાણે પેલી વાદળી લીટીઓ હમણાં કંઈક બોલશે. ​પહેલાના સમયમાં લોકો પત્રોના જવાબ ન આપીને મૌન જાળવતા, આજે લોકો મેસેજ વાંચીને 'સીન' (Seen) છોડી દે છે. આ આધુનિક મૌન છે, જે કોઈપણ ચીસ કરતાં વધુ જોરથી વાગે છે. બ્લુ ટિકનો અર્થ હવે માત્ર 'મેસેજ વંચાઈ ગયો' એવો નથી રહ્યો, પણ એનો અર્થ છે કે—"તમારી લાગણી મારી સામે આવી તો ખરી, પણ મને એમાં કોઈ રસ નથી." ​મોડી રાત્રે સાહિલને સમજાયું કે જે સંબંધમાં શબ્દોની કિંમત ઘટી જાય, ત્યાં વાદળી લીટીઓનો અર્થ શોધવો નકામો છે. મૌન જ્યારે ડિજિટલ બને ને, ત્યારે એ અવાજ કરતાં પણ વધુ વસમું લાગે છે. જે વ્યક્તિ આપણને 'Reply' આપવા જેટલો સમય પણ ફાળવી શકતી નથી, તેની પાસે જિંદગી માંગવી એ આપણી જ જાતનું અપમાન છે. ​તેણે ચેટ ક્લિયર કરી અને ફોન ઊંધો મૂકી દીધો. ક્યારેક 'બ્લુ ટિક' એ મેસેજ વંચાયાની સાબિતી નથી હોતી, પણ એક એવો પૂર્ણવિરામ હોય છે જે આપણને આગળ વધવાનો સંકેત આપે છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી અનકહી કોફી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૩: અનબ્લોક ​આંગળી 'Unblock' બટન પર આવીને થંભી ગઈ હતી. ​બે વર્ષ સુધી એ નામ 'બ્લેક-લિસ્ટ' ના અંધારા ખૂણામાં કેદ હતું. આજે અચાનક એ જૂના જખમ પરથી પાટો ઉખેળવાની ઈચ્છા થઈ. જેવું બટન દબાયું, કે તરત જ તેનો હસતો ચહેરો ડિસ્પ્લે પિક્ચર (DP) માં ચમકી ઉઠ્યો. તે હજુય એવો જ હતો—નિર્મળ અને શાંત, બસ હવે એ ફોટામાં તેની સાથે કોઈ બીજું હતું. ​મન સવાલ પૂછતું હતું, "શું કામ અનબ્લોક કર્યું?" શું એ જાણવા કે એ તારા વગર કેટલો ખુશ છે? કે પછી એ સાબિત કરવા કે હવે તને એના હોવા કે ન હોવાથી કોઈ ફેર નથી પડતો? ​અનબ્લોક કર્યા પછી જ અહેસાસ થયો કે, બ્લોક લિસ્ટમાં તો વ્યક્તિ સુરક્ષિત હતી. ત્યાં એની યાદો પર આપણો હક હતો, આપણે ધારીએ ત્યારે એને યાદ કરી શકતા. પણ અનબ્લોક થતા જ એ હકીકત પછડાઈ કે હવે એ વ્યક્તિ માત્ર આપણી પહોંચની બહાર જ નથી, પણ આપણી દુનિયાની બહાર છે. ​ડિજિટલ દુનિયામાં કોઈને અનબ્લોક કરવું સહેલું છે, પણ મનના કોઈ ખૂણે જામી ગયેલા એના અસ્તિત્વને મુક્ત કરવું બહુ અઘરું છે. પાંચ મિનિટ એ ફોટાને તાક્યા પછી, નિધિએ ફરીથી એ જ નામ 'Block' કરી દીધું. આ વખતે ગુસ્સામાં નહીં, પણ ગંભીરતાથી. ​ક્યારેક કોઈને હંમેશા માટે ભૂલી જવા માટે, એક વાર અનબ્લોક કરીને એની જિંદગીમાં આપણી 'ગેરહાજરી' જોવી બહુ જરૂરી હોય છે. અનકહી કોફી લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૨: અધૂરો કપ ​કાફેના ખૂણાના ટેબલ પર કોફીના બે કપ હતા. એક ખાલી હતો અને બીજો અડધો ભરેલો. ​ખાલી કપ આકાશનો હતો. એણે બધું જ કહી દીધું હતું—તર્ક, કારણો અને છેવટે 'છૂટા પડવાનો' નિર્ણય. એણે પોતાની વાત પૂરી કરી, બિલ ચૂકવ્યું અને ઊભો થઈ ગયો. એની કોફી પણ પૂરી થઈ ગઈ હતી અને એની દલીલો પણ. ​રિયાનો કપ હજુ અડધો ભરેલો હતો. એ સ્તબ્ધ થઈને કોફીની સપાટી પર તરતા ફીણને જોઈ રહી હતી. ફીણ ધીમે ધીમે ઓગળી રહ્યું હતું, બિલકુલ એના વિશ્વાસની જેમ. એની પાસે કહેવા માટે શબ્દોનો દરિયો હતો, પણ સાંભળવા વાળો કિનારો જ જતો રહ્યો હતો. ​લોકો કહે છે કે મુલાકાતો અધૂરી રહી જાય છે, પણ હકીકતમાં તો વાતો જ અધૂરી રહેતી હોય છે. કોફીનો પ્યાલો ખાલી કરવો સહેલો છે, પણ ભરેલા હૃદયને ખાલી કરવું અઘરું છે. રિયાએ ચમચીથી કોફી હલાવી. કોફી હવે ઠરી ગઈ હતી. સંબંધોમાં જ્યારે ગરમાવો જતો રહે, ત્યારે મોંઘી કોફી પણ કડવી ઝેર જેવી લાગે છે. ​એણે એ અધૂરો કપ ટેબલ પર જ છોડી દીધો. જિંદગીમાં ક્યારેક બધું પૂરું કરવા માટે કપ ખાલી કરવો જરૂરી નથી હોતો; ક્યારેક કોઈ વાર્તાને 'અધૂરી' છોડી દેવામાં જ એની ગરિમા સચવાતી હોય છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી ( અનેરી ) અનકહી કોફી

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૧: ટાઈપિંગ... ​રાતના બે વાગ્યા હતા. આખું શહેર સૂઈ ગયું હતું, પણ નીરવના ફોનની સ્ક્રીન પર એક નામ સતત ચમકતું હતું— 'ચાર્મી'. ​ચેટ વિન્ડોમાં ઉપર લખાઈને આવતું હતું: Typing... ​નીરવ શ્વાસ રોકીને જોઈ રહ્યો. એ 'ટાઈપિંગ' શબ્દમાં કેટલીય અપેક્ષાઓ, કેટલીય માફીઓ અને કેટલાય અધૂરા સવાલો છુપાયેલા હતા. તેને થયું કે હમણાં લાંબો મેસેજ આવશે, કદાચ બે વર્ષનો હિસાબ આજે આ એક મેસેજમાં પૂરો થઈ જશે. ​પાંચ મિનિટ થઈ... દસ મિનિટ થઈ. પેલું 'Typing...' દેખાતું અને વળી પાછું અદૃશ્ય થઈ જતું. સાચું કહીએ તો, સામે છેડે ચાર્મી મેસેજ ટાઈપ નહોતી કરતી, પણ પોતાની હિંમત એકઠી કરી રહી હતી. ​અચાનક, 'Typing...' દેખાતું બંધ થઈ ગયું. નીરવને થયું કે હમણાં નોટિફિકેશન આવશે. પણ ના, તેને બદલે ઉપર 'Online' દેખાવું પણ બંધ થઈ ગયું. એણે માત્ર 'Last Seen' જોયું—જે હમણાંનું જ હતું. ​આધુનિક પ્રેમની આ સૌથી મોટી કરુણતા છે; જ્યાં સૌથી વધુ કહેવું હોય છે, ત્યાં જ આંગળીઓ 'બેકસ્પેસ' પર આવીને અટકી જાય છે. દિલમાં હજારો પાનાઓ ટાઈપ થાય છે, પણ જિંદગીની સ્ક્રીન પર માત્ર 'મૌન' જ સેન્ડ થાય છે. લેખિકા માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી "અનકહી કોફી " ભાગ 1 🙏

Mansi Desai Shastri

વાર્તા ૩૫: ૧૦ હેડફોન (The Loop) ​તેણે ધીમેથી પોતાના હેડફોન કાન પર ચઢાવ્યા અને બહારના ઘોંઘાટને જાણે એક જ સેકન્ડમાં સ્વીચ ઓફ કરી દીધો. બસ ટર્મિનલની ભીડ, રિક્ષાના હોર્ન અને લોકોની નકામી વાતો—બધું જ એકાએક શાંત થઈ ગયું. હવે તેની પાસે પોતાની એક ખાનગી દુનિયા હતી, જેમાં માત્ર તે અને તેનું ગમતું સંગીત હતું. ​પ્લેલિસ્ટમાં સેંકડો ગીતો હોવા છતાં, તેની આંગળીએ એ એક જ ગીત પસંદ કર્યું. એ ગીત જે તેના હૃદયના કોઈ ખૂણે ધરબાયેલી યાદને ફરી જીવતી કરતું હતું. તેણે 'રીપીટ' બટન દબાવ્યું. ગીત લૂપ પર શરૂ થયું. ​આખી દુનિયાથી કપાઈ જવું કેટલું સહેલું છે ને? બસ, બે ઈયરબડ્સ કાનમાં નાખો અને તમે તમારા ભૂતકાળમાં, તમારા સપનામાં કે તમારી કોઈ અધૂરી ઈચ્છામાં ખોવાઈ શકો છો. લૂપ પર વાગતું એ ગીત એના માટે માત્ર સંગીત નહોતું, પણ એક સુરક્ષિત કવચ હતું. એ ગીતની દરેક લાઇન તેને કોઈના અવાજની, કોઈના સાથની કે કોઈ જૂની સાંજની યાદ અપાવતી હતી. ​જ્યારે આપણે એક જ ગીત વારંવાર સાંભળીએ છીએ, ત્યારે એનો અર્થ એ છે કે આપણે એ ગીતની લાગણીમાંથી બહાર નીકળવા નથી માંગતા. આપણે એ હૂંફને પકડી રાખવા માંગીએ છીએ. હેડફોન પહેરીને ભીડમાં ચાલતી એ વ્યક્તિ ભલે એકલી દેખાતી હોય, પણ એની અંદર યાદોનું એક આખું સરઘસ ચાલતું હોય છે. ​આધુનિક યુગમાં હેડફોન એ 'ડિસ્ટર્બ ન કરો' (Do Not Disturb) નું જીવતું જાગતું બોર્ડ છે. એ આપણને પરવાનગી આપે છે કે આપણે આપણી પોતાની મરજીથી, આપણી પોતાની લયમાં જીવી શકીએ. ભલે દુનિયા ગમે તેટલી ઝડપથી દોડતી હોય, પણ એ ગીતના લૂપમાં સમય જાણે થંભી જાય છે. ​ક્યારેક આખી દુનિયાનો અવાજ સાંભળવા કરતાં, હેડફોન લગાવીને પોતાના મનનો અવાજ સાંભળવો વધુ જરૂરી હોય છે. ​અનકહી કોફી

Naresh Bokan Gurjar

तुम बारिश होती तो तुम्हें सहेज लेता तुम मौसम होती तो तुम्हें समेट लेता तुम फिजा होती तो तुम्हारी खुशबू चुरा लेता तुम तुम हो तुम्हारा मैं कुछ कर नहीं सकता - Naresh Bokan Gurjar

A singh

कान्हा, आपके जीवन में कितनी ही कठिनाइयाँ आईं, कभी मथुरा की साज़िशें, कभी वृंदावन से बिछड़ने का दर्द। फिर भी हर परिस्थिति में आपने धैर्य रखा, और होठों पर वही मधुर मुस्कान बनाए रखी। हे कृष्ण मुरारी, हम तो छोटी-छोटी बातों में ही टूट जाते हैं, कभी हालात से, कभी अपनों की बातों से बिखर जाते हैं। मन कई बार थक जाता है इस दुनिया की उलझनों से, और दिल भी खामोशी में अपने दर्द छुपा लेता है। बस इतनी सी कृपा कर दो कान्हा, कि आपके जैसा धैर्य और हिम्मत हमें भी मिल जाए। आपकी कृपा का एक दीपक दिल में जल जाए, तो अंधेरी राहों में भी उजाला मिल जाए। आपका नाम ही हमारा सहारा बन जाए, और हर मुश्किल में भी होठों पर मुस्कान आ जाए। जय श्री कृष्ण 🌸 — A. Singh ✨

A singh

आजकल वो कहते हैं — बदली-बदली सी लगती हो तुम, उन्हें कौन समझाए कि ये उनकी ही मेहरबानी है। जो दर्द उन्होंने दिया है हमें, उसी ने हमारी मुस्कान तक बदल डाली है। — A. Singh ✨

A singh

मैं पूरी दुनिया से लड़ने की हिम्मत रखती हूँ, बस अपनों के सामने ही हार जाती हूँ। क्योंकि अपनों से जीतने की नहीं, उन्हें खो देने की डर से चुप रह जाती हूँ। — A. Singh ✨

A singh

अपनों की बातें ही अक्सर दिल को घायल कर जाती हैं, गैरों में कहाँ इतना दम जो हमें रुला जाए। ये तो अपनों की नाराज़गी का असर है वरना, दुनिया की क्या औकात जो हमें झुका जाए। _ A singh

A singh

​"दिल तो सिर्फ अपनों से टूटता है, गैरों की क्या हिम्मत जो आँखों में आँसू ला सकें।" _ A singh

A singh

"ज़ख्म वही गहरे देते हैं जो दिल के करीब होते हैं, वरना गैरों को क्या पता कि हमारी कमज़ोरी क्या है।" _ A singh

Soni shakya

तेरे होठों की हर लकीर याद है मुझे.. देखो कितनी मोहब्बत से पढ़ा है मैंने तुझे.. - Soni shakya

Raju kumar Chaudhary

“अरबपति पिता ने सोचा—मेरी पत्नी और बेटी मुझे सिर्फ एटीएम समझती हैं… लेकिन जिस रात उनकी फ्लाइट कैंसल हुई और वे बिना बताए घर लौटे, दरवाज़े की दरार से जो देखा… उसने उनका दिल हमेशा के लिए बदल दिया।” राजेश अग्रवाल एक अरबपति थे। देश की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी उनके नाम पर थी। दुनिया भर में उनके ऑफिस थे, उनके जहाज़ समुद्रों पर राज करते थे। लेकिन अपने ही घर में… वे लगभग मेहमान बन चुके थे। राजेश को लगता था कि प्यार दिखाने का सबसे अच्छा तरीका है—पैसा। इसलिए उन्होंने अपने परिवार को हर चीज़ दी। उनकी पत्नी प्रिया को लग्ज़री लाइफ मिली। उनकी बेटी आराध्या को सबसे महंगा स्कूल, सबसे सुंदर कमरे और ढेर सारे खिलौने मिले। लेकिन राजेश ने कभी यह नहीं सोचा कि शायद उनके परिवार को इन सब चीज़ों से ज्यादा… उनकी मौजूदगी की जरूरत है। राजेश का मन धीरे-धीरे कठोर होता गया। उन्हें लगता था कि उनके परिवार को उनसे नहीं, बल्कि उनके पैसों से प्यार है। जब भी फोन आता, उन्हें लगता — फिर कोई खर्चा होगा। जब भी बेटी पास आती — उन्हें लगता, फिर कोई नया खिलौना मांगा जाएगा। इसलिए उन्होंने खुद को काम में और ज्यादा डुबो दिया। एक दिन उनका सिंगापुर का ट्रिप तय था। लेकिन आखिरी पल में फ्लाइट कैंसल हो गई। राजेश ने अचानक फैसला किया— आज घर चलते हैं… बिना बताए। उनके मन में एक अजीब सा विचार चल रहा था। “देखता हूं… मेरे बिना घर में क्या हो रहा है।” रात को जब वे घर पहुंचे… तो उन्हें कुछ बहुत अजीब लगा। पूरा महल शांत था। कोई पार्टी नहीं। कोई मेहमान नहीं। बस… सन्नाटा। तभी घर की पुरानी आयाह लक्ष्मी सामने आईं। लेकिन राजेश को देखकर उन्होंने जोर से स्वागत नहीं किया। उन्होंने तुरंत उंगली होंठों पर रखी। “साहब… प्लीज़… आवाज मत कीजिए।” राजेश चौंक गए। “क्यों? क्या चल रहा है यहां?” आयाह लक्ष्मी ने कुछ नहीं कहा। बस उनका हाथ पकड़कर उन्हें धीरे-धीरे फैमिली रूम के दरवाजे तक ले गईं। फिर फुसफुसाकर बोलीं— “साहब… अंदर मत जाइए। पहले बस देख लीजिए…” राजेश ने दरवाजे की छोटी सी दरार से अंदर झांका। उन्होंने सोचा था— शायद वहां पार्टी होगी। शायद उनके पैसों से जश्न चल रहा होगा। लेकिन कमरे के अंदर जो था… उसने उनके दिल को एक पल में हिला दिया। 👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Soni shakya

तुम्हारे जाने से इतना फर्क हुआ , पहले ये घर था अब सिर्फ दीवारें रह गई.. तुम्हारे जाने से जैसे, मेरी तो रूह ही निकल गई.. मैं सांसे तो ले रही हूं, मगर जिंदगी कहीं ठहर गई.. - Soni shakya

SAYRI K I N G

इसकी ईटों में है मोहब्बत की खुश्बू इसकी रूह में प्यार बसता है इसके संगमरमर में रहती है आशिकी ये ताज़ है, इश्क़ यही रहता है - SAYRIKING

SAYRI K I N G

इजहार जलील कर देता है कोई पसंद आये तो खामोश रहना चाहिए

mohansharma

ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे.. तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..

Avinash

हेलो दोस्तो, मेरी फर्स्ट किताब कल 10 मार्च को आ रही है । किताब का नाम "अधूरी धुन" है कृपया करके आप यह किताब पढ़े और आपके विचार प्रस्तुत करे। धन्यवाद 💫❤️

kattupaya s

Time for short Nap..😴

Dr.Namrata Dharaviya

"જીત નક્કી હોય તો અર્જુન કોઈ પણ બની શકે, પણ જ્યારે મૃત્યુ નક્કી હોય ત્યારે અભિમન્યુ બનવું પડે." 🏹🔥 કલમના સથવારે ✍️ - Dr.Namrata Dharaviya

Kaushik Dave

"धरती कहे पुकार के", को मातृभारती पर पढ़ें :, https://www.matrubharti.com भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!

Kaushik Dave

માતૃભારતી પર વાંચો - ""બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :" "બારી પર ટપકતું લોહી", ને માતૃભારતી પર વાંચો :, https://www.matrubharti.com વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!

Shailesh Joshi

અમુક કામો થશે, કે નહીં થાય ? એ વિચારવામાં આપણો જેટલો સમય જાય છે, એના કરતાં અજમાવી લેવામાં, આપણા ઘણા બધા કામો થઈ જાય છે, અને બાકી વધેલા કામો, કેટલા, અને કેમ રહી જાય છે ? એની પણ આપણને ખબર પડી જાય છે, બાકી તો, જે વિચારવામાં જ રહી જાય છે, એ રહી જ જાય છે.

Kaushik Dave

​हां, मैं ही झूठी हूं नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं। ​हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं। ​हां, आप तो वो हो नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं। ​हां, मैं जिद पर अड़ी हूं नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं। ​हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं। ​हां, मुझमें हजार कमियां होंगी नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं। ​हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।

A singh

लिखने बैठी थी दिल का हाल, पर कलम ही रुक गई, ✨ शायद मेरे ज़ख्मों की गहराई देखकर स्याही भी झुक गई। वो जो कहते थे कि हम साया बनकर साथ चलेंगे, 👣 आज उन्हीं की यादों में मेरी हर मुस्कान कहीं खो गई। जिसे अपना समझा था, वही दूरियों का कारण बन गया, और मेरी खामोशियों में छुपा हर दर्द मेरा हमसफ़र बन गया। — A Singh

Sunita bhardwaj

"उसकी अच्छाई" ------------------- वो बहुत अच्छा इन्सान हैं, शायद इसलिए मैं भी अपनी अच्छाई बचाए रख सकी जब भी रास्ते धुंधले हुए, और मन थोड़ा भटकने लगा, पर उसकी बातों ने संभाल लिया। उसने मुझे बदला नहीं, बस याद दिलाया कि मैं कैसी थी और कैसी रह सकती हूं उसने कभी मुझे रोका नहीं बस इतना कहा...... "तुम जैसी हो,वैसी ही अच्छी हो, खुद को मत बदलना।" और शायद वही शब्द थे जिन्होंने मुझे बिगड़ने नहीं दिया। दुनिया में लोग अक्सर एक दूसरे को बदल देते हैं, पर कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो हमारी अच्छाई को बचाए रखते हैं। अगर मैं आज भी वैसी ही हू जैसी पहले थी, तो उसमें मेरी कोशिश कम और उसकी सीख ज्यादा है। क्योंकि कुछ लोग हमारी जिंदगी में आकर हमे बदलते नहीं.... बस हमे बेहतर इंसान बने रहने कि वजह दे जाते है। _Sunita

Awantika Palewale

એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે, નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે. તારી નજર પડે તો વસંત ખીલી ઉઠે છે, નહિતર દરેક ઋતુમાં અજબ શીત થાય છે. તારા શબ્દોથી દિલને અજબ શાંતિ મળે છે નહિતર મનમાં કેટલી અનકહી પ્રીત થાય છે. તું નજીક હોય ત્યારે સમય પણ થંભી જાય છે પળ પળ જાણે પ્રેમની નવી જીત થાય છે. તું દૂર હોવા છતાં મારાં અહેસાસમા સાથે છે. એટલે જ આ દિલને થોડી રાહત મળી જાય છે. તારી યાદ આવે તો રાત ચાંદની બની જાય છે નહિતર આ આંખોમાં અંધકારનો વસવાટ થાય છે. તું મળ્યો ત્યારથી મને જીવનનો અર્થ મળ્યો છે, નહિતર આ સફર બસ એક અજાણી રીત થાય છે. તારા સાથમાં પીડા પણ સંગીત બની જાય છે, તારાં વિના ખુશી પણ ક્યારેક હાર બની જાય છે. દિલમાં હવે તો એક જ દુનિયા બનાવી છે, જ્યાં તારાં જ અહેસાસનો દરબાર ભરાય છે. મારા દિલની વાત કલમથી લખી દઉં છું, એક તારાં જ નામથી દરેક પ્રીત થાય છે. એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે, નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.

મોરલો

#INTERNATIONAL WOMAN'S DAY #2K26

Shailesh Joshi

ઉચ્ચ વિચારો, ઊંચું ધ્યેય, કંઈક વિશેષ કરવાની લગન, સતત કાર્યશીલતા, પ્રામાણિકતાની સાથે-સાથે પરોપકારની ભાવના, આ બધાજ..... આપણી જીંદગીની છબીને એડિટ કરી ચમકાવવા માટેના ટુલ્સ છે.

Dada Bhagwan

જે માણસ પારકાંને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી, તે પોતાની જાતને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી! - દાદા ભગવાન વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: www.dadabhagwan.in #quoteoftheday #quote #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

Imaran

अपना चाँद सा चेहरा देखने की इजाज़त दे दो, इस खूबसूरत शाम को और सजाने की इजाज़त दे दो ✨imran ✨

Imaran

कशिश हो शायरी की तुम, गजल की जान लगती हो, खुदा के नूर जैसी हो, नजर की शान लगती हो, मेरे अल्फाज में तुम हो, मेरे अंदाज में तुम हो, मेरे हर खूबसूरत नज्म की, पहचान लगती हो, 🫶imran 🫶

Viru

poem " spellbound ” ये कमल से मुख पे कैश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे। जे होजा तू आज मेरी, तो करवादूं में ऐश तेरे। तेरी आंखों का नूर,दे जाता है संदेश तेरे। तेरी यादों की छांव तले, कट जाए दिन शेष मेरे। मैं छीन लूं रातें सारी, नाम करू सवेरे तेरे। इतने दिन हम आधे थे, अब हो गये अवशेष तेरे। ये कमल से मुख पे केश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे। तेरी चाल पे दिल हार गया, लबों ने नरसंहार किया, आंखों ने लूटा आधा था, अब शेष भी तुझपे हार गया। मैं भवसागर भी पार गया, जैसे मीरा ने प्यार किया, आंखों ने लूटा आधा था, अब शेष भी तुझपे हार गया। हां मैने तुझसे प्यार किया, शब्दों से ना इजहार किया, अब शेष भी तुझपे हार गया, अब शेष भी तुझपे हार गया। हां इतने दिन हम आधे थे, अब हो गए अवशेष तेरे। ये कमल से मुख पे केश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे, जे होजा तू आज मेरी, तो करवा दूं मैं ऐश तेरे। viru.... virendra lora

Hetu P

જે વ્યક્તિ એક દિવસ એવું કહેતો હોય કે, નથી જોવાતું તારૂ દુઃખ હું તને રડતા નથી જોઈ શકતો, પછી એજ વ્યક્તિ .. આપણને રડાવે છે !... આજ સત્ય છે.💔😊

Dr.Namrata Dharaviya

જિંદગીની નવી શરૂઆત માટે કોઈ મુહૂર્ત નથી હોતું, બસ, મન મનાવી લો તો એ જ શ્રેષ્ઠ ક્ષણ છે." -કલમ ના સથવારે ✍️ - Dr.Namrata Dharaviya

Std Maurya

मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए। शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए। आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं। क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं। आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए। मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए। आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है। जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है। एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है, "बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है। लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

शत्रु उसी को कहे जग, जो करता नुकसान। अवसर पाते ही तुरत, करता वह अपमान।। दोहा--444 (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास महानगर महानगर ने चुरा ली है जिंदगी मेरी l यहाँ किसीने न देखी है बेबसी मेरी ll नया मिला तो पुराना हुआ है याराना ll चुराके दिल अब ठुकराई दोस्ती मेरी ll जला दिया आशियाँ अपने हाथों से हमने l खुदी को मार दिया देख सादगी मेरी ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status