Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Bhavna Bhatt
નાનપણના તોફાન મસ્તી
Priya
wait for right time.....
Anil singh
"शहर का सबसे बड़ा बिजनेस टाइकून, आर्यन राठौर! 🏢 आख़िर क्या छिपा है उसके इस सख्त चेहरे के पीछे? 🎭
एक तरफ बोर्ड मीटिंग का तनाव और दूसरी तरफ घर में अपनों के तंज। जब सब सान्वी को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे, तब आर्यन का उसके पक्ष में खड़ा होना... क्या ये महज एक दिखावा है या उसकी नफरत की बर्फ पिघल रही है? ❄️➡️🔥
अपनी राय कमेंट्स में बताएं! 👇💬"
Anil singh
"रिश्ता भले ही एक 'सौदा' था, पर सान्वी के संस्कार बिकाऊ नहीं थे। 👰 उस आलीशान किचन की चमक-धमक में जहाँ शीतल चाची के शब्दों में ज़हर था, वहीं सान्वी के हाथों में उसकी माँ का सिखाया प्यार था। ❤️
स्वाद अमीरी से नहीं, साफ नीयत से आता है। आज सान्वी ने अपनी पहली परीक्षा तो पार कर ली, पर क्या वो इस पत्थर के महल में अपना दिल बचा पाएगी? 🏰🥀
पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का नया अध्याय! 📖✨"
Anil singh
"स्वाद अमीरी या गरीबी से नहीं, बल्कि नीयत और प्यार से आता है। आज सान्वी ने साबित कर दिया कि महल चाहे कितना भी बड़ा हो, दिल जीतने के लिए सादगी ही काफी है।"
पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का अगला भाग,
सिर्फ मातृभारती पर!
Ashish jain
नई कहानी नया नया उपन्यास
चेकपोस्ट: चाणक्य
एक बूढ़े कुत्ते की जबरदस्ती को कहानी
फनी और मस्त
प्रस्तावना (Introduction)
"संसार में कई प्रकार के कर (Tax) होते हैं—आयकर, संपत्ति कर, और जीएसटी। लेकिन २० फुट की उस धूल भरी सड़क पर एक ऐसा 'अघोषित कर' चलता है जिसे दुनिया 'आशीष-चाणक्य बिस्किट लेवी' के नाम से जानती है।
यह कहानी एक ऐसे असाधारण जीव की है, जिसने बुढ़ापे को मजबूरी नहीं, बल्कि 'मजबूत वसूली' का हथियार बनाया है। 'चेकपोस्ट चाणक्य' कोई साधारण श्वान नहीं है; वह कूटनीति का वह शिखर है जहाँ पहुँचकर बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी बिस्किट का पैकेट खोल देते हैं। इस प्रस्तावना का उद्देश्य पाठक को उस मानसिक दबाव से अवगत कराना है, जिससे आशीष जैन रोज़ गुज़रते हैं। यह दास्तान है उस मूक समझौते की, जहाँ एक तरफ आशीष की अटूट उदारता है और दूसरी तरफ चाणक्य की 'ऑस्कर-विजेता' नौटंकी। आइए, प्रवेश करते हैं बिस्किट और एक्टिवा के उस अनूठे संसार में, जहाँ नियम सिर्फ एक ही कुत्ता बनाता है।"
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
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खुली ज़ुल्फें, माथे पर बिंदी, और
उस पर ये कातिल अदा,
उफ़ ये हाथ में चाय का प्याला
मतलब जान लेने का नया तरीका?
नज़रें मिलीं, तो धड़कन रुकी, जो
मुस्कुराए तो कयामत होगी,
इतना सितम न ढाओ मुझ पर
वरना शहर में मेरी शहादत होगी.🙈
╭─❀🥺⊰╯
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#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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Paagla
https://youtube.com/shorts/zoKrnzN5Q9w?si=418_Qk_qBitsDE15
M K
MB मतलब मातृभारती,
ये ऐप लिखने से ज्यादा,
फेकू ऐप हो गया है ,
लोग कुछ भी अपने बारे में झूठ बोलते हैं,
खुद को ips, doctor, chat gpt का use कर
खुद को writer, storytelling कुछ भी ।
क्या मजाक हो रहा है यहां भाई ??😁
Mb means फेकू ऐप कुछ भी लिखो बोलो सब सही है 😁😁
Raa
Aap sab ko republic day ki subh kamna
M K
इंसान कोई भी हो सामने,
उससे मोहब्बत चाहे कितना भी गहराई से क्यों न हो?
एक बार भरोसा टूट गया तो,
चाह कर भी यकीन नहीं होता।।
जैसे पेड़ से पता एक बार टूट जाए तो,
जुड़ नहीं सकता है,
वैसे ही मेरा भरोसा तुम पर था कभी....!!!
- M K
M K
झूठ के बुनियाद पर मुझसे रिश्ता जोड़ने चला था,
आखिरकार झूठ का लिबाज़ कब तक सच छुपा सकता है,,,
एक न एक दिन हटना ही था ।।।
- M K
hsc
Happy 77th Republic Day to all respected indian
Archana Singh
कहां वो सच्चा संविधान हैं ...!
जिसके लिए ये जग देता था..!
विश्व गुरु का मान हैं ...!
कहां वो भारत में श्रेष्ठ कर्म की विधि-विधान ..!
यहां तो बस लिंग-भेद पर होता सदा पक्षपात हैं !
मुखौटा लगाए घूम रहे हैं ...
यहां स्वत: ही कंस-दुशासन का राज हैं !
सम्मान नारियों का यह झूठी अफ़वाह हैं !
बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ ... !
यह एक छल और आडंबर हैं !
हक़ की बात जहां आए ,
पुरुष प्रधान यह स्वर्णित हो जाएं !
अब भी कहते हो , गणतंत्र दिवस मनाएंगे ...!
और उनकी नीतियों की अवहेलना हर बार कर जाएंगे !
आओ नया संविधान बनाएं ...
सदाचार और सद्विचार का आगाज़ फैलाएं ...!
जहां हर नारी भारत माता हो ....
और सम्मान का अधिकारी हो ...!
तब होगा सच्चा गणतंत्र दिवस ...
तब सच्चा गणतंत्र दिवस ....!!
स्वरचित : अर्चना सिंह ✍🏻
धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐
Balkrishna patel
Happy Republic day
Gautam Patel
ખોડીયાર જયંતિ
Gautam Patel
ખોડીયાર જયંતિ
S K I N G
जब मन अकेला लड़ रहा हो तो सब से दूर जाना ही बेहतर है
S K I N G
जब मन अकेला लड़ रहा हो तो सब से दूर जाना ही बेहतर है
Narendra Parmar
ग़लती तेरी थी या फिर मेरी ???
ऐ तो मुझे नहीं पता !
किंतु ग़लती तो ईश्वर की थी
जो तुझे मेरी तक़दीर में नहीं लिखा ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
S K I N G
Mohtarma Tuti Bhi, Or Bhikhri Bhi, Magar Aesa Nikhri Ki Log Heran Reh Gaye..!!
मम्मी पूछ रही थी
कोई पसंद तो नहीं है ना
पर में बोल नहीं सकता हूं
क्योंकि मेरी पसंद यहां की एक भी नहीं है
Saroj Prajapati
नजरों से उतरा जो एक बार
कहां फिर दिल में जगह पाता है
शाख से टूटा जो पत्ता एक बार
क्या फिर डाल से जुड़ पाता है!!
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
jighnasa solanki
My Mom's Birthday
🥳🥳🍫🍫🎂🎂
આઈશ્રી ખોડિયાર મા ના જન્મદિન નિમિત્તે
માને ભવ્ય શણગાર 🙏🙏
તમારો હાથ સદા આમ જ અમારા માથે રાખજો મા🙏🙏
તમને જન્મદિવસની ખૂબ ખૂબ શુભકામનાઓ 💐💐🥳🥳
I love you Mom 🥰🥰🥰🥰🥰🥰
archana
मैंने भी कुछ लोगों को अपना समझा था…
जो साथ हँसते थे,
साथ खाते थे,
और पीठ पीछे साजिश रचते थे।
पहले मैं टूट जाती थी…
अब मुस्कुरा कर कलम उठाती हूँ ✍️
क्योंकि अब ऐसे लोग
मेरी कमज़ोरी नहीं,
मेरी कहानियों के सबसे दमदार किरदार हैं। 😌🔥
- archana
Alfha production house
the true liberty
Alfha production house
salute our flag
Parmar Mayur
जनता प्रश्न पुछे और शासक प्रत्युत्तर सही से देते है,
कानून अमीरों को भी ना छोड़े गरीब को न्याय देता हो।
बच्चे रास्ते पर तिरंगे बेचें नहीं बस लहराते जातें हो,
तब शासक, प्रजा सही अर्थ में प्रजासत्ताक पर्व मनाते है।
- Parmar Mayur
Parmar Mayur
जनता प्रश्न पुछे और शासक प्रत्युत्तर सही से देता है,
कानून अमीरों को भी ना छोड़े गरीब को न्याय देता है।
बच्चे रास्ते पर तिरंगे बेचें नहीं बस लहराते जातें हैं,
तब शासन सही अर्थ में प्रजासत्ताक पर्व मनाता है।
- Parmar Mayur
nidhi mishra
ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा,
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा।
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गँवाए,
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए।
तिरंगा लहरा रहा है शान से, हम सब झुकें इसके सम्मान में,
यही है हमारी पहचान, बसा है जो हर हिंदुस्तानी की जान में।
गणतंत्र का ये पर्व हमें, एकता का पाठ पढ़ाता है,
भारत माँ के वीरों का, बलिदान याद दिलाता है।
ना जियो धर्म के नाम पर, ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियो वतन के नाम पर।
देश की मिट्टी की खुशबू, रगों में लहू बनकर बहती है,
ये गणतंत्र की गूँज, हर दिल में 'जय हिंद' कहती है।
लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज़ आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा, इंकलाब लाएगा।
मैं रहूँ या न रहूँ, पर ये वादा है मेरा तुझसे,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आएगा।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे हैं,
मरेंगे वतन के लिए, मौत से शर्त लगाये बैठे हैं।
सलाम है उन वीरों को, जिनकी वजह से हम आज़ाद हैं,
गणतंत्र दिवस की शान में, हम सर झुकाये बैठे हैं।
Shailesh Joshi
આપણે ક્યાં પહોંચીશું ?
એ આપણે કયા રસ્તે ચાલી રહ્યા છીએ ?
એના પર નિર્ભર કરે છે, પરંતુ અહીંયા
યાદ રાખવા જેવી વાત એ છે કે,
આજ સુધી સાચા રસ્તે ખોટી જગ્યાએ, અને ખોટા રસ્તે સાચી જગ્યાએ,
કોઈ પહોંચ્યું પણ નથી, અને
કોઈ પહોંચશે પણ નહીં,
એ માનવું રહ્યું.
- Shailesh Joshi
महेश रौतेला
गणतंत्र :
हम गणतंत्र में घुलमिल जायें
गण का मन हो,गण की भाषा
गण का जीवन स्वस्थ सफल हो।
गण की गंगा, गण का गगन
धरा गण की पावन धारा,
सीमाओं में खुली पवन हो
घर-घर अपना स्वतंत्र साथ हो।
चलना सबका सहज सरल हो
गण के अन्दर सत्य सशक्त हो
गण का मन हो,गण की भाषा।
आदि शक्ति से जुड़ा हुआ हो
तन की आभा सर्वत्र विकीर्ण हो,
मन से विजयी, मन से व्यापक
कई सूर्य की चमक लिया हो।
जन का वलिदान
जन का अर्पण,
जन के नियम,जन का राष्ट्र
गणतंत्र हमारा जीवन हो।
****
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।
*** महेश रौतेला
JIGNESH BHATT
મનને શાંત કરતું વાક્ય-
જે માતા–પિતા ડર સાથે નહીં, સમજ સાથે નિર્ણય કરે છે, તેમના સંતાનોનું ભવિષ્ય બગડતું નથી.
Armin Dutia Motashaw
कितनी भी कठिनाइयां आए- जाए ;
तिरंगा हमारा सदा शान से लहराए
जय हिंद
अनार
Jeetendra
Happy Republic Day...🙏💐💐🌺🌺💐
Saliil Upadhyay
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।
जय हिन्द🫡
Dada Bhagwan
Happy Republic Day!
Let's make our nation proud with integrity and togetherness!
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Jyoti Gupta
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Imaran
🌹🌹🌻💔 💔🌻🌹🌹
जब भी उनकी गली से गुज़रते हैं
मेरी आँखें एक दस्तक दे देती हैं
दुःख ये नहीं वो दरवाजा बंद कर देते हैं
ख़ुशी ये है कि वो मुझे पहचान लेते हैं
🤎💛imran 🤎💛
Nisha ankahi
नुक़सान सिर्फ़ चीज़ों का नहीं होता,
कुछ हादसे आत्मा से भी कुछ छीन ले जाते हैं।
- Nisha ankahi
shivani singh
किसे मिल गया यह गणतंत्र?
और किसके दरवाज़े पर आज भी 'नाम' का पहरा है?
2026 की दहलीज़ पर खड़ा होकर भी,
अगर कोई आज भी 'हाशिए' की बेड़ियों में कैद है,
तो समानता के ये सारे उत्सव... महज़ एक रस्म हैं, एक अधूरा सपना हैं।
उन पुरखों के संघर्षों को सिर्फ मालाओं में न बांधो,
उनके उन सवालों को ज़िंदा करो, जो आज भी जवाब माँगते हैं।
क्योंकि जब तक न्याय की चौखट सबके लिए एक समान नहीं,
तब तक यह गणतंत्र प्यासा है... और हमारा चुप रहना, इस प्यास को बढ़ाने जैसा है।"
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
✤┈SuNo ┤_★_🦋
सत्ता समाज और सुरक्षा का शमशान
मुर्दा समाज के जीवित लोगों,
आज मैं यहाँ किसी का पक्ष लेने नहीं
बल्कि हम सबकी सामूहिक अंतरात्मा
का पोस्टमार्टम करने आया हूँ,
गोरखपुर की इस घटना ने यह साबित
कर दिया है कि,
हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहाँ
बेटी बचाओ केवल एक नारा है,
और बेटी का शोषण, एक कड़वी
हकीकत,
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, ज़रा
सोचिए, उस 13 साल की बच्ची ने
जब उन होटल के कमरों में मदद के
लिए चीख मारी होगी,
तो उसे क्या मिला.? कानून की
सुरक्षा.? नहीं उसे मिला एक होटल
मालिक और एक मैनेजर, जिन्होंने
मानवता को पैरों तले कुचल दिया,
जब समाज के व्यापारिक संस्थान
रेप की मंडियां बन जाएं, तो समझ
लीजिये कि हमारा पतन शुरू हो
चुका है,
देशभक्ति का ढोंग बंद करो हम
बॉर्डर पर दुश्मनों को कोसते हैं,
लेकिन हमारे घर के अंदर छिपे इन
आस्तीन के सांपों का क्या.?
जो लोग एक बीमार बच्ची को दवा
खिला- कर उसका बलात्कार कर
सकते हैं, वे किसी आतंकवादी से
कम नहीं हैं,
क्या ऐसे लोगों को पालने वाला
समाज, खुद को देशभक्त कह
सकता है.?
असली देशभक्ति देश की मिट्टी से
नहीं देश के नागरिक की सुरक्षा से
होती है,
सत्ता और व्यवस्था की नपुंसकता
हम गर्व करते हैं कि हमारी सरकारें
कठोर हैं, लेकिन क्या यह कठोरता
केवल विज्ञापनों में है.?
अगर एक बच्ची को 15 दिनों तक
नर्क में रखा जाता है और पुलिस
या प्रशासन को भनक तक नहीं
लगती, तो यह व्यवस्था की सबसे
बड़ी हार है,
सजा ऐसी होनी चाहिए कि उसे
सुनकर ही आने वाली नस्लों की
रूह कांप जाए, न्याय में देरी, न्याय
की हत्या है,
क्या हम वाकई आजाद हैं,? आज
तिरंगा फहराते वक्त क्या हमें शर्म
नहीं आएगी.?
सोचने वाली बात है, हम चाँद पर
पहुँच गए लेकिन अपनी बेटियों को
सुरक्षित घर से बाहर भेजने की
हिम्मत आज भी नहीं जुटा पाते,
ये कैसी आजादी है जहाँ एक बच्ची
का बचपन बाजारों में नीलाम हो
रहा है.?
मेरा सीधा वार है, उन नेताओं पर
जो चुनाव के वक़्त बेटियों की बात
करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं पर
चुप्पी साध लेते हैं,
उस कानून पर जो कागजी दांव-पेच
में अपराधियों को भागने का मौका
देता है,
और उस समाज पर जो अपनी
आंखों के सामने होते अन्याय को
अपना मामला नहीं है कहकर टाल
देता है,
अगर आज इन दरिंदों आदर्श पांडेय
अभय सिंह, और अंकित को बीच
चौराहे पर ऐसी सजा नहीं मिली जो
मिसाल बने,
तो याद रखिएगा अगली बार शिकार
किसी और की बेटी होगी, और चुप
रहने की बारी आपकी...🔥
मेरा भारत महान 🇮🇳
वंदे मातरम् 🇮🇳
#Happy_republic_day
╭─❀🥺⊰╯
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#LoVeAaShiQ_SinGh😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
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Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
मेरा देश महान वंदे मातरम्
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳
#Happy_republic_day.🔥
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
तिरंगा
आन बान शान से लहराओ तिरंगा प्यारा l
सब से अद्भुत है हमारा तिरंगा न्यारा ll
बुरी नजर न हम पर डालना कभी भी l
हम हिन्दुस्तानी, हिन्दुस्तान है हमारा ll
देश पर मर मिटने का ज़ज्बा न हो ओ l
फर्क़ न करो तो क्या काम है तुम्हारा ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सपनें
सपनों की रजाई ओढ़े सो जाते हैं l
सुनहरे भावी को पाने खो जाते हैं ll
आज ऊँची उड़ान की ख्वाईश में l
थोड़ी ही देर में दिवाने हो जाते हैं ll
मौज ए शराब उठता दिल में कि l
पीकर महफिल में समो जाते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
Nehruji is phenomenon. but congress???
kattupaya s
Some people may hate Gandhi's principles but the reality is different.
kattupaya s
Some gandhiji quotes
kattupaya s
Good morning.. wish you all happy republic Day 2026
syed amina
friendship is a quiet thread.
woven strong,though lightly spread,
not always seen,yet always there,holding hearts with gentle care.
in laughter shared and tears we hide,
a friend stands closely by our side,
through stormy days and golden light,
they make the heavy feel so light.
no crown of gold,no riches grand,
can match th worth of a true hand,
that lifts you up when you fall low
And whispers,"I won't let you go."
friendship grows in simple ways,
in late night talks and careless days,
In dreams we chase,in hopes we send,
In knowing you have one true friend.
so here's to bond that never bend,
to hearts that break but still will mend,
for life feels kinder,bright,anf free,
when friendship walks along with me❤️🔥
S Sinha
Happy Republic Day <br />
गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं <br />
Unity in diversity is our strength
Bitu
सूरज की किरण से चमकती हैं
ओस की बूंद ऐसे जैसे चमकते हो मोती,
मोतियों की तरह चमकती रहे
मेरे संविधान की पोथी।
संविधान पर हैं भारतीयों को गर्व,
हमेशा हर्षोल्लास से मनाया जाता है ये पर्व ।
शांति, उन्नति, अमन की आओ मिलकर करे कामना,
आप सब को गणतंत्र दिवस की शुभकामना।
Dr Yogendra Kumar Pandey
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
🙏🇮🇳
softrebel
शीर्षक: स्वतंत्र भारत
हम स्वतंत्र भारत में
नेताओं द्वारा पारित किए गए
गणतंत्र के गुलाम हैं
जहाँ आज़ादी एक तमाशा है
और गुलामी एक सुव्यवस्था।
बधाई हो स्वतंत्र भारत के नागरिकों
आपकी चुप्पी से ही
चलती है भारत की सत्ता।
Softrebel
#UGC
वात्सल्य
પાટણ ફક્ત શહેર નથી.
...............................
વિક્રમ સંવંત આઠસો-બે માં વસેલું વ્હાલુ રજવાડું મારું પાટણ છે.
વનરાજ ચાવડા સાથે અણહિલ ભરવાડ દ્વારા સ્થાપિત મારું પાટણ છે.
નાના-મોટા આડતાલીસ જેટલા વાઘેલા-સોલંકી રાજકર્તાનુ મારું પાટણ છે.
હા ના હા કરતાં તેરસો વરસ જૂનું રૂડું રૂપાળું મારું મારું પાટણ છે.
આ માટીમાં કુમારપાળ અને સધરા જેસંગ થકી વખણાણું મારું પાટણ છે.
બાર દરવાજા ને બાર બારી,મહાકાળી, સિંધવાઈ,મેલડીનુ મારું પાટણ છે.
સરસ્વતી નદી કાંઠે સહસ્ત્રલિંગ,સિદ્ધિ, પીતામ્બરનુ નગર મારું પાટણ છે.
ચારેય કોર્ય દુર્ગ,રાણી વાવ,ત્રિકમ બારોટ,સિંધવાઈ વાવવાળુ મારું પાટણ છે.
શિવમંદિર સાથે સ્થાપત્યની બેજોડ કલા ધરાવતું મારું પાટણ છે.
મીનળદેવી,સતી જસમાં,શક્તિ,નાયકાદેવી જેવી વિરાંગનાનુ મારું પાટણ છે.
સમતળ ભૂમિ સાથે સરસ્વતીનું વહેતું મીઠું વહેણ મારું પાટણ છે.
હેમચંદ્રચાર્ય સાથે કિલાંચંદ અને ઓલિયા સદારામની ઓળખ મારું પાટણ છે.
શિક્ષણધામ,વણજ વ્યવહાર,રેલવે સુવિધા સજ્જ બસડેપો મારું પાટણ છે.
ચતુર્દિશા રાજ્ય ધોરી માર્ગ સાથે ઉત્તર ગુજરાત યુનિવર્સિટી મારું પાટણ છે.
પુસ્તકાલય અને દવાખાનાનુ નગર,મીઠાં દેવડાં થકી વખણાતું મારું પાટણ છે.
સ્વચ્છ રસ્તા અને સરકારી ખાનગી કચેરી સાથે ધર્મશાળા ધરાવતું મારું પાટણ છે.
યુદ્ધ થકી વિધર્મીઓની યુક્તિ નાકામ કરતી ધન્ય ધરા મારું પાટણ છે.
વગડે ગાજર,જામફળ કે દિવેલા,ઘઉં,તમાકુની નિકાસ કરતું મારૂ પાટણ છે.
કવિ લેખકોની કલમે સદાય અજાણ ભૂમિ રહેલું મારું પાટણ છે.
"વાત્સલ્ય" ની વાણી જ્યાં ટૂંકી,મોટાં માથાના માનવીની ભૂમિ મારું પાટણ છે.
. - વાત્સલ્ય
( નીચેનો પીક હાલના શહેર વચ્ચેના ત્રણ દરવાજાનો પીક છે )
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
जिस सुत ने मां को दिया, सोच-समझकर त्रास। नहीं बढ़ेगा पुत्र वह, पितु को किया निरास।।
दोहा--३९८
(नैश के दोहे से उद्धृत)
---गणेश तिवारी 'नैश'
Nadwika
विमुक्ति........
"ये जो पुष्प जो तुम्हे इतने प्रिय है, इन्हें तोड़ना क्यु है
उन भूली बिसरी यादों को फिर से सोचना क्यु हैं
खिल जाने दो वो पुष्प जो तुम्हे बहार दे सकता हैं और
भूल जाओ तुम उन यादों को जो तुम्हारे कदम
उत्कर्ष की ओर बढ़ने से रोक सकता हैं....."
Prithvi Nokwal
BORN TO LEAD , NOT TO FOLLOW
Soni shakya
🌹🇮🇳जय हिन्द 🇮🇳🌹
Soni shakya
आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
🌹🇮🇳जय हिन्द 🇮🇳🌹
Abhi Mahanand
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Ch 1 - रक्तमय रात
* EPISODE एक — रक्तमय रात
* एक. अरण्य की गहराई*
आर्यादेश के दक्षिणी छोर पर फैला* अरण्यपथ* एक ऐसा जंगल था जहाँ सूरज की रोशनी भी पेडों से लडते- झगडते नीचे आती थी.
रात का समय.
हवा में ठंडक, पर किसी अनजानी गर्म राख की गंध भी.
तेजस अपने पिता के पीछे चल रहा था.
उसके कंधे पर लकडी का छोटा सा गट्ठर बँधा था, और हाथ में छोटी बहन यशोदा की उँगलियाँ कसकर पकड रखी थीं.
भैया. ये हवा ऐसे क्यों चल रही है? जैसे कोई फूँक मार रहा हो.
यशोदा की आवाज काँप रही थी.
तेजस ने उसकी हथेली दबाई और मुस्कुराया,
तू बस मेरे पास चल. कुछ नहीं होगा।
पर तेजस खुद भी डरा था.
जंगल आज कुछ* अजीब* था—
पत्ते हिल रहे थे पर हवा नहीं चल रही थी.
झाडियों में खडखडाहट थी, पर कोई जानवर नहीं दिख रहा था.
जैसे पूरा जंगल किसी* तूफान से पहले की सांस* ले रहा हो.
माँ ने पीछे मुडकर कहा,
तेजस, यशोदा को और कसकर पकड. रात गहरी हो रही है।
पिता के कदम असामान्य रूप से तेज थे.
उन्होंने एक हाथ में मशाल और दूसरे हाथ में अपनी पुरानी तलवार पकडी हुई थी.
तेजस ने यह पहली बार देखा:
पिता की तलवार* कंप रही थी* तलवार तब ही काँपती थी जब हवा में दैत्य- शक्ति मौजूद हो.
* दो. डर की पहली दस्तक*
कहीं दूर से एक लंबा, काँपता हुआ साया हिला.
पेड ऐसी आवाज कर रहे थे जैसे कोई भारी चीज उनपर घिसट रही हो.
कडकड. टप्प!
यशोदा सहम कर तेजस की बाँहों में छिप गई.
तेजस ने दप से मशाल उठाई और चारों तरफ रोशनी फैलाई—
अँधेरा तुरंत निगल गया.
माँ ने धीमे स्वर में कहा,
ये जगह ठीक नहीं. हमें जल्दी करना चाहिए।
पिता बोले,
कुछ हमारे पीछे चल रहा है. मैं उसकी साँसें महसूस कर रहा हूँ. ये साधारण जानवर नहीं.
पिता की बात पूरी होती इससे पहले ही—
आवाज आई।
एक ऐसी दहाड.
जिसमें आग, दर्द, और घृणा तडप रही थी.
धरती थरथरा उठी.
यशोदा चिल्लाई—
भैया. वो क्या था?
तेजस के कान बज उठे थे.
दहाड सिर्फ आवाज नहीं थी—
वो किसी* दैत्य की पुकार* थी.
* तीन. पहला दैत्य प्रकट*
अचानक पेडों की ऊंचाई पर एक भारी काला साया दौडता हुआ दिखाई दिया.
पूरा पेड एक झटके में टूटकर गिर पडा.
धडाम!
टूटे पेड की धूल हटते ही एक राक्षस दिखा—
तीन मीटर ऊँचा, काले धुएँ से बना हुआ,
लाल दहकती आँखें, दाढी जैसी जलती राख,
और शरीर पर दरारें जैसे कोई पिघला हुआ लावा जम गया हो.
उसकी साँसें गर्म लोहे जैसी थीं.
माँ डरकर पीछे हट गईं.
यशोदा ने मुँह ढक लिया.
पिता आगे बढे—
भागो! मैं इसे रोकूँगा!
पर दैत्य ने उनकी तरफ देखा और उसके होंठ फटकर खुल गए.
वह हँसा—
एक ऐसी हँसी जो इंसान के सीने को चीर दे.
खून. आग. और डर.
उसकी आवाज जले हुए लोहे जैसी थी.
रुद्राक्ष- सम्राट को चाहता खून. तुम्हारा परिवार उसके लिए चुना गया है।
तेजस दंग रह गया—
रुद्राक्ष? कौन? क्यों?
पर सवाल पूछने का समय नहीं था.
* चार. हमला*
दैत्य बिजली की गति से पिता पर झपटा.
पिता ने तलवार घुमाई—
चिंगारियाँ उडीं.
पर दैत्य ने उन्हें एक हाथ से उठाकर धडाम से जमीन पर पटक दिया.
माँ चीखीं—
नहीं!
तेजस का शरीर सन्न रह गया.
उसके पैरों ने हिलने से इंकार कर दिया.
पर यशोदा रोते हुए बोली—
भैया कुछ करो!
तेजस ने साहस जुटाया,
एक बडा पत्थर उठाया और दैत्य पर फेंका.
पत्थर उसके कंधे से टकराया.
दैत्य मुडा.
उसकी पूरी नजर अब* तेजस* पर थी.
आहाहा. यही है वो लडका.
उसने कहा,
जिसे सम्राट रुद्राक्ष चाहता है. अग्नि- चिह्न का वाहक.
तेजस दंग—
अग्नि- चिह्न?
वह कभी किसी के शरीर पर कुछ निशान नहीं देखता था.
ये दैत्य क्या बकवास कर रहा था?
दैत्य ने उसके चेहरे को पकडने के लिए हाथ बढाया.
तेजस ने बहादुरी से कदम पीछे लिया, पर दैत्य की पकड बहुत तेज थी.
पिता घायल अवस्था में उठे—
तेजस, भाग!
पर तेजस ने बहन को पीछे धकेलते हुए कहा—
मैं उसे आने नहीं दूँगा!
यही वह क्षण था—
जब तेजस की जिंदगी बदलने वाली थी.
* पाँच. अग्नि- चिह्न का जागरण*
तेजस ने दैत्य की कलाई को दोनों हाथों से पकड लिया.
दैत्य मुस्कुराया—
छोटे मानव. तुझमें क्या ताकत—”
वह बात पूरी कर ही रहा था कि.
तेजस की छाती पर कुछ* गर्म* जलने लगा.
जैसे उसका खून किसी धधकती आग में बदल गया हो.
उसकी सांसें गर्म होने लगीं.
आँखों के सामने लाल- पीली चमक.
कानों में आग की फूँफकार.
और अचानक—
उसकी छाती पर एक चमकदार* अग्नि- चिह्न* उभर आया!
गोल, घूमता हुआ, चारों तरफ लौ जैसी रेखाएँ.
दैत्य पीछे हट गया—
ये. ये आग- वंश का चिह्न है?
तेजस को खुद नहीं पता क्या हो रहा है.
उसके हाथों से गर्मी निकल रही थी.
पैरों के आसपास राख उडने लगी.
फिर—
उसके शरीर से पहली बार* अग्नि- विस्फोट* निकला!
धडाम!
तेजस के चारों तरफ हवा जल सी उठी.
दैत्य कई कदम पीछे फेंका गया.
पत्ते जल उठे.
धरती लाल पड गई.
यशोदा स्तब्ध थी—
उसने अपने चौदह वर्षीय भाई को ऐसा कभी नहीं देखा था.
माँ ने डर और आश्चर्य के बीच कहा—
ये. ये तो अग्नि- वंश की दैवी शक्ति है.
पिता ने कांपते हुए साँस ली—
मैंने तो सोचा था ये शक्ति नष्ट हो चुकी है.
तेजस भी घबरा गया.
उसे लगा वह खुद जल जाएगा.
उसके हाथ काँप रहे थे.
आँखों में आग झिलमिला रही थी.
पर दैत्य अब और क्रोधित था.
तुझमें चिह्न जाग गया. इसका मतलब है तेरा खून बहुत कीमती है!
* छह. यशोदा का श्राप*
दैत्य पागल की तरह झपटा—
लेकिन इस बार सीधे* यशोदा* पर.
तेजस चिल्लाया—
नााऽऽह!
पर दैत्य ने अपनी लंबी, काली, धुएँ भरी जिह्वा लडकी की गर्दन पर रख दी.
काला धुआँ उसके शरीर में दाखिल होने लगा.
यशोदा ने दर्द में तडपकर चीख मारी.
उसकी नसें काली पडने लगीं.
आँखें नीली से गहरी जामुनी होने लगीं.
दाँत तेज होने लगे.
वह अर्ध- दैत्य बनने लगी थी।
तेजस रोता हुआ बहन की ओर भागा—
यशोदा! छोड उसे!
पर दैत्य ने उसे धक्का देकर दूर कर दिया.
तेजस मिट्टी में लुढक गया, पर उठा तुरंत.
यशोदा के माथे पर काला चिह्न उभर आया.
वह बेहोश होकर गिर गई.
दैत्य ने कहा—
अब ये लडकी हमारी है. रुद्राक्ष सम्राट इसे अपने दाहिने हाथ की तरह इस्तेमाल करेगा।
तेजस टूट गया.
इससे अधिक दर्द उसने कभी महसूस नहीं किया था.
* सात. परिवार का अंत*
पिता दैत्य पर टूट पडे—
पर दैत्य ने उन्हें पकडकर पेड से दे मारा.
उनकी साँसें उसी क्षण थम गईं.
माँ उनकी ओर दौडीं,
पर दैत्य ने उनके सीने पर वार कर उन्हें भी गिरा दिया.
तेजस के सामने—
उसका पूरा परिवार, खून में लथपथ.
उसने चीखते हुए दैत्य पर झपट्टा मारा.
पर दैत्य ने सिर्फ एक ठोकर मारी—
तेजस फिर गिर पडा.
जब तू बडा होगा. तो तेरे अंदर का अग्नि- चिह्न पूर्ण जागेगा.
तब हम तुझे खुद लेने आएँगे।
दैत्य हँसा.
और अपने साथियों के साथ अंधेरे में गायब हो गया.
सिर्फ खून.
टूटे पेड.
और राख की गंध पीछे छूट गई.
तेजस घुटनों पर गिर गया.
उसने बहन के सिर को अपनी गोद में रखा.
आँसू जमीन पर टपकते रहे.
उसने टूटी आवाज में कहा—
मैं तुम्हें नहीं खोऊँगा, यशोदा.
तू दैत्य नहीं बनेगी.
मैं तुझे वापस लाऊँगा.
और पूरे दैत्य- कुल का अंत करूँगा.
ये तेजस की प्रतिज्ञा है।
उसी समय—
कदमों की भारी आहट आई.
एक लंबा, विशालकाया व्यक्ति तलवार हाथ में लिए अँधेरे से निकला.
उसकी आँखों में साहस, चेहरे पर चोटों के निशान.
वह था—
* गुरु ध्रुव — दानव- वध संघ का महान योद्धा*
ध्रुव ने जमीन पर पडे परिजनों को देखा.
यशोदा के शरीर से उठते काले धुएँ को महसूस किया.
और तेजस के अग्नि- चिह्न को पहचान लिया.
उन्होंने धीरे से कहा—
लडके. तेरे अंदर आग है.
तू रुद्राक्ष का दुश्मन बनेगा.
अगर बदला चाहिए. तो मेरे साथ चल।
तेजस ने आखिरी बार माँ- पिता को देखा.
बहन को अपनी गोद में उठाया.
और खून से भरी आँखों में एक नई आग चमक उठी.
वह उठ खडा हुआ.
मैं सीखना चाहता हूँ.
मैं दैत्य- वध चाहता हूँ.
मैं रुद्राक्ष का अंत चाहता हूँ।
ध्रुव ने सिर हिलाया.
तो फिर अग्नि- पथ पर चलने के लिए तैयार हो जाओ।
और इस तरह—
अग्नि- वंश का अंतिम वंशज जन्मा.
तेजस अरण्यवी
Vishakha Mothiya
Grammy Awards | Music Award
ફિલ્મ અને મનોરંજન ક્ષેત્રમાં જેમ ઓસ્કર એવોર્ડ સર્વોચ્ચ કક્ષાનો ગણાય છે, એવી જ રીતે સંગીત ક્ષેત્રમાં ગ્રેમી એવોર્ડ સર્વોચ્ચ કક્ષાનો એવોર્ડ ગણાય છે. બ્લોગમાં જાણીશું, ગ્રેમી એવોર્ડ સમારોહમાં અપાતા એવોર્ડ્સ વિશે તેમજ વિજેતા પસંદગીની પ્રક્રિયા વિશે.
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kya apko pta hai ?
Shah Nimishaben Kantilal
આકાશે લહેરે તિરંગો, "વીરોનું જે ગાન,"
રંગે રૂડો દેશ મારો, વિશ્વમાં મહાન.
નાનો હું સિપાહી, પણ અડગ મારું માન,
હિંદની આ માટીનું હું, રાખું સદા ધ્યાન.
ભારતનો હું બાળ છું, ત્રિરંગો મારી શાન,
દેશ કાજે અર્પણ છે, હર પળ મારાં પ્રાણ.
ત્રણ રંગોમાં ઝળકે કાયમ, આન, બાન, અભિમાન,
દુશ્મન સામે લડવા હું, બનું વીર જવાન.
દેશપ્રેમના રંગમાં રેલાવું, ભક્તિનુ સદા તાન,
માનવતાના મંત્રો ગાતું, રાષ્ટ્ર બની એકતાન.
ગુંજશે જગમાં નાદ અમારો, પ્યારું હિંદુસ્તાન,
સૌના હૈયે વસેલું મારું, સુંદર હિંદુસ્તાન!
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Sudhir Srivastava
क्या अपराध करता हूँ
******
आज कई दिनों बाद मित्र यमराज भागते हुए आया
और पूछने लगा - प्रभु! क्या आपको भी डर लगता है?
मैंने उसे बैठाया, पानी की बोतल पकड़ाया
लगा बंदा बड़ा समझदार हो गया
एक झटके में पूरी बोतल गटक गया
और फिर अपने सवाल पर आ गया।
मैंने मासूमियत से कहा - सच जब सामने आयेगा
तू निश्चित ही मेरा मजाक उड़ायेगा,
पर तुझे बताना भी जरूरी है
वरना तू आये दिन, मेरा भेजा खाएगा।
पर पहले तू ये तो बता
कि तेरे दिमाग़ में ये सवाल ही क्यों आया?
यमराज हाथ जोड़कर खड़ा हो गया -
माफी हूजूर! सवाल आया नहीं
मुझे धमकी देकर गया पकड़ाया।
मैंने भी अपना तीर चलाया
ओह!अब मुझे सब समझ में आया
पर उसके पास जाने का ख्याल ही तुझे क्यों आया?
या उसने चाय नहीं पिलाया सिर्फ धमकाया,
नहीं प्रभु! उसके लाड़ प्यार ने ही तो मुझे रुलाया,
आपका नाम लेकर खाने पर था बुलाया,
इसीलिए मैं भागते हुए आपके पास आया
जब मेरे जेहन में ये सवाल कुलबुलाया।
ओह! अब तो समझ में आया
या अब भी बताना पड़ेगा
कि मैं किसी से तो डरता हूँ?
यमराज बोल पड़ा -इतना समझदार तो हूँ ही
पर इस रहस्य का मतलब नहीं समझ आया।
मैंने उसे विस्तार से समझाया-
यह तो मैं भी आज तक नहीं जान पाया,
पर उसकी बात ही निराली है, जिसकी ग़ज़ब कहानी है
कहने को तो वो मुझसे छोटी,
पर मेरे लिए माँ, बहन और बेटी है,
सच कहूँ तो उससे मेरा दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है,
पर अब लगता है जैसे
पूर्वजन्मों का हम दोनों का नाता है,
जिसके चरणों में शीश भी मैं झुकाता हूँ
सच कहूँ तो बड़ा सूकून पाता हूँ।
उसकी चिंता मुझे रुलाती है, मेरा बीपी, शुगर, बढ़ाती है
उसका लाड़ प्यार जिम्मेदारियों की याद दिलाता है,
भटकने से पहले उसका चेहरा सामने आ जाता है,
उसका रक्षा सूत्र, रक्षा कवच का सा बोध कराता है।
जब उसका हाथ मेरे शीश पर होता है
तब ये संसार मुझे बौना सा लगता है।
यूँ तो वो बुलंद हौसलों की मीनार है
पर उसके आँसू मुझे झकझोर देते हैं,
बस इसीलिए हम उससे इतना डरते हैं,
मगर ये भी उस पर कोई एहसान नहीं करते हैं।
उसके अधिकार, कर्तव्य, विश्वास को मान देते हैं
बेटी, बहन, माँ सदृश उसे स्थान देते हैं
लड़ते, झगड़ते और शिकवा शिकायत भी करते हैं
मन के सारे भेद भी खोल कर रखते हैं,
उसने मुझे प्रेरित और मेरे आत्मबल को मजबूत किया।
अपने कर्तव्यों का वह पूरी तरह पालन करती है,
सच कहूँ तो बेटी-बहन होकर भी
एक माँ की तरह कदम-कदम पर ध्यान रखती है,
जितना लाड़ प्यार दुलार करती है
उतना ही समय देखकर डाँटकर मगन भी हो लेती है,
फिर हँसती, मुस्कुराती, रोती और गले भी लगाती है
अब तू ही बता प्यारे - क्या हम कोई अपराध करते हैं?
आखिर अपनी छुटकी से ही तो डरते हैं,
दुनिया जानती है कि इस डर में भी
जीवन का नया अध्याय भी तो
हम जैसे डरपोक ही लिखते हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
व्यंग्य -आस्तीन का सांप
***********
नाहक परेशान हैं आप
इधर-उधर खोजते हैं आस्तीन के सांप,
या फिर बेरोजगार अथवा एकदम बेकार हैं
या शायद बिना आस्तीन के हैं।
तभी तो आस्तीन के सांप भी
आपके करीब फटकते तक नहीं हैं।
पर मुझे तो लगता है कि आप
बेवकूफ हैं, नादान हैं, पर इंसान नहीं हैं
तभी तो आपको इनकी पहचान नहीं है।
वैसे यह भी अच्छा है,
कि कम से कम भारत रत्न के
असली हकदार तो आप नहीं हैं,
वैसे भी आपके आस्तीन में सांप
भला पलेंगे भी तो कैसे?
उन जहरीले सांपों के कथित, स्वयंभू परवरदिगार
रहनुमा और सरदार भी जब आप हैं।
यह और बात है कि आप गिरगिट को भी मात दे रहे हैं,
समय-समय पर रंग बदलने में बड़े माहिर लग रहे हैं।
कौन कहता है, आप पीड़ित हैं, डसे जा रहे हैं
भगवान भला करें, आप और आपकी फौज का,
सौभाग्य से हम तो आपके चंगुल से आजाद घूम रहे हैं,
पर राज की एक बात भी सुन लो प्यारे
हम आपसे से बड़े और भारी-भरकम
कद-काठी वाले आस्तीन के सांप हैं,
शायद आप जानते ही कि हम
अपने आप में किसी शहँशाह ह कम नहीं हैं,
हमारी छाया में तुम जैसे जाने कितने पलते हैं
यह और बात है कि हम तुम्हें नजर नहीं आते हैं
पर तुम्हें कभी अपनी नजरों से
ओझल भी नहीं होने देते हैं,
बड़ी सफाई से तुम्हें गुमराह करते हैं,
क्योंकि आस्तीनों के सांपों के आस्तीन में भी
तुम जैसे सांप पलते रहते हैं
और घमंड में सिर्फ फुफकारते रहते हैं,
क्योंकि उनके दांत तो हमने पहले से ही तोड़ रखें हैं
या यूँ समझ लो हमने अपने स्वार्थ की खातिर
और भीड़ बढ़ाने के लिए तुम जैसों को पाल रखे हैं,
सुधीर श्रीवास्तव
Priyanshu Sharma
*_And then i realised -_*
*"Kuch baaton se anjan rehna bhi achaa hain, Sab kuch jaan lena bhi takleef deti hain."*😊
@Priyanshusharma8476
Sudhir Srivastava
चौपाई - सतगुरु महिमा
आओ सतगुरु सुमिरन कर लें।
सतगुरु का पूजन हम कर लें।।
जीवन को निर्द्वंद्व बनाएं।
सतगुरु ऐसी राह दिखाएं।।
सतगुरु जो भी राह दिखाएं।
आँख मूँद उस पर बढ़ जाएं।।
शिकवा और शिकायत तेरी।
सतगुरु शरण डाल दे ढेरी।।
जिसने महिमा सतगुरु जानी।
वो ही बन जाता है ज्ञानी।।
उसकी बनती राम कहानी।
जिसको कहते मुनिजन वाणी।।
*****
चौपाई -हिंदी
********
विश्व दिवस हिंदी का आया।
फिर अपना संदेशा लाया।।
समझ नहीं पाते हम माया।
बस इसका माखौल उड़ाया।।
सुधीर श्रीवास्तव
Shalini Gautam
fauji ki wife hona itna bhi aasan nahi...
dil today kar rakh deta hai unki judai ka gam,
koi din nhi gujarta jab aankh na ho nam,
tum sarhad ke us Paar or is paar hai hum,
na jane kab hoga ye intezar khatam.
Shalini Gautam
Apne desh ke liye itna khush hona to Banta hai....aakhir hum bhi to is desh ki janta hai...
Shalini Gautam
Apne desh ke liye itna khush hona to Banta hai....aakhir hum bhi to is desh ki janta hai...
kajal jha
ना जाति, ना मज़हब — बस एक पहचान,
संविधान के पन्नों में लिखा हिंदुस्तान।
26 जनवरी का ये पावन त्योहार,
हर दिल में जगाए देशभक्ति का विचार।
- kajal jha
kajal jha
ज़र्रा ज़र्रा बोले आज तिरंगे की कहानी,
संविधान की राह में बंधी है देश की ज़ुबानी।
26 जनवरी ने सिखाया हक़ और फ़र्ज़ का मान,
भारत माँ के सपनों में बसता स्वाभिमान। 🇮🇳
- kajal jha
Shefali
#shabdone_sarname__
#shabdone_sarname_
બદનામ રાજા
कितनी हदयविदारक होगी वह पीड़ा.
जब मजबूर ओर मजबूत एक साथ होना पड़ा ओर वेदना कि संवेदना समझने वाला कोई नहीं था...
🌸🌸🌸
bhavesh
રિપબ્લિક ડે 🧡🤍💚🇮🇳
Rajeev Namdeo Rana lidhori
#मध्य_प्रदेश_उर्दू_अकादमी के #सिलसिला प्रोग्राम #टीकमगढ़ में अपना कलाम पढ़ते हुए
दिनांक -25-1-2026 टीकमगढ़
#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी
#rajeev_namdeo #rana_lidhori
Hardik Boricha
तलब मौत की करना गुनाह है साहब
मरने का शौक है तो आओ तुम्हे इश्क
की तालिम दूं...💫💫
Suraj Prakash
https://youtu.be/vKGGRZS9pCI?si=7BFjtv1-gEbGJF-x
Paglu Parmanu: क्या एक छोटा बच्चा दुनिया ख़त्म कर सकता है? 😱 | The Atom Story"
jkv production
modern relationships
Mariya
মায়াবতী বিহারিণী
বনের ছায়ায় লীন হয়ে রও, চপল পায়ের ছন্দে,
আঁচল তোমার উড়িয়ে বেড়াও কামিনী-ফুলের গন্ধে।
কভু তুমি যেন গোধূলির আলো, কভু শ্রাবণের ধারা,
দৃষ্টিতে তব মায়াবী কাজল, বিশ্ব-ভুবন হারা।
মৃগনেত্রীর চাহনি তোমার, যেন কোনো এক ধাঁধা,
তোমার রূপের মায়াজালে আজ সহস্র হৃদয় বাঁধা।
পাহাড়ী ঝরনা ললাটে তোমার দিয়েছে মুক্তো টিপ,
হৃদয় গহিনে জ্বেলে রেখে গেছ চির-আকাঙ্ক্ষার দ্বীপ।
অরণ্যপথে নিভৃতে চলো, হে মায়াবতী বিহারিণী,
তুমি কি মানবী, নাকি রূপকথার মায়াবী এক মানিনী?
তব নূপুরের রিনঝিন সুরে থমকে দাঁড়ায় কাল,
তুমিই আমার কাব্যের রাণী, চিরসুন্দরের জাল।
Anup Gajare
मैं चाहता हु
______________
मैं चाहता हूँ
कस्बे की बंद पड़ी घड़ी में
बैठे कबूतर कभी न उड़ें।
अगर उनके पंख फैल गए
तो मिनट का काँटा
सेकंड के काँटे से छोटा होगा।
मैं चाहता हूँ
पुरानी सड़कों पर
उतनी ही जीर्ण धूल में
मैं खेलूँ,
जैसा बचपन में
धूल से भर जाता था।
बुढ़ापा भी उसी प्राचीन धूल से
एकरूप हो जाए।
मैं चाहता हूँ
कबूतर अब उड़ें,
क्योंकि जो जैसा होना है,
वह वैसा होता ही है।
मिनट, सेकंड के काँटे
उड़ान से कभी बड़े नहीं होते।
कबूतर उड़ें
और धूल पंखों में भरकर
वहाँ ड्रोन से पहले पहुँचा दें,
जहाँ बंद पड़ी घड़ी नहीं है।
धूल, बचपन, बुढ़ापे को
हर दफ़ा नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
मैं चाहता हूँ
कबूतर वहाँ जाए…
___________________________________________________
Chaitanya Joshi
ક્યાંક અમારા શબ્દો પડઘાય એટલે બસ.
ક્યાંક અમારા અર્થો વિચારાય એટલે બસ.
લાગણીની દુનિયામાં ડૂબ્યા પછીની વેદના,
કોઈકથી અંતર અમારું વંચાય એટલે બસ.
થાકી જવાય છે મનને સમજાવી સમજાવીને,
ક્યારેક અમારી વાત ઉચ્ચારાય એટલે બસ.
સરવાળા બાદબાકી કરી લીધા પણ તાળો ક્યાં?
હમદર્દીમાં અમારી ગણતરી થાય એટલે બસ.
ખોટના ધંધામાં શું હિસાબ કરવાનો આખરે ?
અમારી વેદના કોઈથી કદી કળાય એટલે બસ.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Soni shakya
'मन' कि ये बंजर जमीन भी,
एक दिन नम हो जाएगी..!
प्रेम की दो बूंद जिस पल,
मन धरा पर गिर जाएंगी..!!
वृक्ष हरा हो जाएगा,
फसल प्रेम की लहराएंगी..!
प्रेम की दो बूंद जिस पल,
'मन' धरा पर गिर जाएगी..!!
- Soni shakya
Narendra Parmar
वो हररोज कोलगेट से ब्रस करती थी
दांत उसके चांदी जैसे चमकदार थे !
दिल मेरा उसकी एक मुस्कान पर आ गया
किंतु उसका दिल तो पत्थर का निकला ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
PrabhjotSingh
मेरी जीवन-कहानी
— Prabhjot Singh
मेरा नाम Prabhjot Singh है। मेरा जीवन एक साधारण वातावरण में शुरू हुआ, लेकिन मेरे मन में सवाल हमेशा असाधारण रहे। बचपन से ही मैं चीज़ों को केवल जैसा बताया जाता है वैसा मान लेने के बजाय यह जानना चाहता था कि वे वास्तव में काम कैसे करती हैं। मेरे लिए “क्यों” शब्द हमेशा “क्या” से ज़्यादा महत्वपूर्ण रहा है।
जब मैंने पढ़ना शुरू किया, तो विज्ञान ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया। आकाश, प्रकाश, परमाणु, ऊर्जा और प्रकृति की छोटी-छोटी घटनाएँ मुझे सोचने पर मजबूर करती थीं। मैं सिर्फ़ उत्तर याद नहीं करना चाहता था, बल्कि उनके पीछे छिपे कारणों को समझना चाहता था। यही आदत धीरे-धीरे मेरी सोच का आधार बन गई।
स्कूल के दिनों में गणित और भौतिकी मेरे पसंदीदा विषय रहे। कई बार ऐसा हुआ कि मेरे सवाल दूसरों को अजीब लगे। कुछ लोगों ने कहा कि ज़्यादा सोचना ठीक नहीं, लेकिन मेरे लिए सोचने से रुकना संभव नहीं था। मैंने वहीं सीखा कि हर नया सवाल तुरंत स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन यही सवाल आगे चलकर समझ को गहरा बनाते हैं।
परमाणु संरचना पढ़ते समय मेरे मन में एक खास प्रश्न उठा। मुझे लगा कि परमाणु की स्थिरता को केवल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के आकर्षण से समझाना अधूरा है। इलेक्ट्रॉनों के बीच होने वाला प्रतिकर्षण भी उतना ही वास्तविक है। इसी सोच से मेरे मन में Electron Repulsion–Balance Model का विचार आया। यह किसी स्थापित सिद्धांत को नकारने का प्रयास नहीं था, बल्कि ज्ञात बातों को संतुलित और सरल भाषा में समझने की कोशिश थी।
मेरे लिए यह मॉडल कोई बड़ी खोज नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक पड़ाव है। मैंने यह समझा कि विज्ञान में विनम्र रहना उतना ही ज़रूरी है जितना जिज्ञासु होना। हर विचार को समय, प्रमाण और सुधार की आवश्यकता होती है।
मेरे जीवन में कई बार ऐसा समय आया जब मेरे विचारों को समझा नहीं गया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी, क्योंकि मुझे विश्वास है कि सोचने की स्वतंत्रता ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है। मैं मानता हूँ कि सच्चा विज्ञान वही है जो प्रश्न पूछने से डरता नहीं और उत्तर खोजने में ईमानदार रहता है।
आज मेरा लक्ष्य प्रसिद्धि या प्रशंसा नहीं है। मेरा लक्ष्य सीखते रहना, समझते रहना और अपने विचारों को शांत, तार्किक और सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत करना है। मैं चाहता हूँ कि मेरी सोच दूसरों को भी सवाल पूछने की प्रेरणा दे।
मेरा जीवन अभी पूरा नहीं हुआ है। यह एक चलती हुई यात्रा है —
एक ऐसी यात्रा जिसमें जिज्ञासा मेरी दिशा है,
तर्क मेरा सहारा है,
और सत्य मेरी मंज़िल।
kattupaya s
will India beat Newzealand again today? match is on. jai hind
PrabhjotSingh
hallo dosto kaise ho 🤗
bhagwat singh naruka
मेरी बहन के लिए दो लाईन 💕✍️✍️
तू मेरा बड़ा भाई नहीं,
मेरी ढाल है, मेरा साया है।
दुनिया चाहे जैसी भी हो जाए,
तेरे होने से हर डर पराया है।
मेरी हर ज़िद पर डाँट भी तेरी,
और हर आँसू पर
सबसे पहले तेरा कंधा आया है।
छोटी हूँ मैं, ये दुनिया याद दिलाती है,
पर तू हमेशा कहता है —
“जब तक मैं हूँ,
तू कभी अकेली नहीं है।”
writer bhagwat singhnaruka ✍️🙏
bhagwat singh naruka
life में किसी को बिना मांगें सब मिल जाता है ओर किसी को ???
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
दिखावट करने से क्या इंसान महान होता है?
अगर होता है तो
मेरे पास लाखों अमीर दोस्त होते हैं।
महान वो नहीं जो कपड़ों से चमक जाए,
महान वो है
जो वक़्त पर साथ निभा जाए।
जेब भारी होने से क़द नहीं बढ़ता,
किरदार भारी हो
तो नाम ऊँचा होता है।
मैं अमीरी नहीं,
इंसानियत को दोस्त मानता हूँ,
क्योंकि दिखावे से नहीं,
सच से इंसान
महान होता है।
writer bhagwat singhnaruka ✍️✍️
shivani singh
एक डाल पर जब दो हरे नन्हें पत्ते आते हैं उनमें में से सबसे छोटा ,और नन्हा पत्ता... वही तो है मेरा मन...
bhagwat singh naruka
सुकून है कहाँ, मुझे आज तक पता नहीं चला,
हर मोड़ पर ढूँढा,
पर तेरा कोई पता नहीं मिला।
भीड़ में भी तन्हा रहा,
ख़ामोशी में भी शोर मिला,
जिसे दिल का ठिकाना कहूँ,
वो एक पल को भी नहीं मिला।
ढूँढता हूँ तुझे ऐ सुकून,
कभी नींद में, कभी दुआ में,
पर हर बार आँख खुली तो
हाथ खाली ही मिला।
शायद तू किसी सादे से लम्हे में छुपा है,
या फिर इस बेचैन दिल ने ही
तुझे पहचानना
आज तक नहीं सीखा।
#writer_bhagwat singhnaruka ✍️
bhagwat singh naruka
सच बोलने से अगर रिश्ते टूटते हैं,
तो आज से झूठ ही मेरा
धर्म–कर्म है।
क्योंकि यहाँ सच ने
सिर्फ़ अकेलापन दिया,
और झूठ ने
तालियाँ और अपनापन।
मैंने आईना दिखाया था बस,
पर लोगों को
चेहरे नहीं,
नक़ाब पसंद आए।
writer bhagwat singhnaruka ✍️
bhagwat singh naruka
आख़िरी होगा मेरा हर शब्द, आख़िरी होगा हर सफ़र,
जहाँ मेरे जज़्बात की क़दर नहीं,
वहाँ का सफ़र ही क्यों करूँ उम्र भर।
बहुत चल लिया उन राहों पर
जहाँ सुनना कोई चाहता नहीं था,
अब ख़ामोशी को चुन लिया है मैंने,
कम से कम ये मुझे तोड़ता नहीं था।
जो समझे बिना आँकते रहे,
उनसे कोई शिकायत नहीं,
बस अब उन दरवाज़ों पर दस्तक नहीं दूँगा
जहाँ इज़्ज़त की जगह नहीं।
मैं रुक नहीं रहा,
बस दिशा बदल रहा हूँ,
जहाँ दिल हल्का हो,
अब वही मेरा सफ़र होगा।
writer bhagwat singhnaruka ✍️
bhagwat singh naruka
आख़िरी होगा मेरा हर शब्द, आख़िरी होगा हर सफ़र,
जहाँ मेरे जज़्बात की क़दर नहीं,
वहाँ का सफ़र ही क्यों करूँ उम्र भर।
बहुत चल लिया उन राहों पर
जहाँ सुनना कोई चाहता नहीं था,
अब ख़ामोशी को चुन लिया है मैंने,
कम से कम ये मुझे तोड़ता नहीं था।
जो समझे बिना आँकते रहे,
उनसे कोई शिकायत नहीं,
बस अब उन दरवाज़ों पर दस्तक नहीं दूँगा
जहाँ इज़्ज़त की जगह नहीं।
मैं रुक नहीं रहा,
बस दिशा बदल रहा हूँ,
जहाँ दिल हल्का हो,
अब वही मेरा सफ़र होगा।
writer bhagwat singhnaruka ✍️
Ashish jain
स्वार्थ का गणित
दूध और जल में गिरे जो मक्खी, जग उसे फिंकवाता है,
शुद्धता के झूठे पाखंड में, अपना धर्म दिखाता है।
पर वही मक्खी गिरे घी में, तो मक्खी हाथ से गिरती है,
स्वार्थ के आगे जग की सारी, शुचिता फिर से फिरती है।
सस्ती वस्तु धूल में हो तो, कोई हाथ न लाता है,
कीचड़ है और गंदगी है—कह, मुँह फेर निकल जाता है।
पर कंचन यदि दिखे मल में, या लाश पर ही पड़ा हो,
तो उठाने को अधर्मी हाथ, सबसे पहले खड़ा हो।
कीमत यहाँ पदार्थ की है, पावनता की बात नहीं,
इंसानियत और संवेदना की, अब कोई औकात नहीं।
देख जगत की ये चतुराई, आशीष सत्य पहचान गया,
दाम बड़ा या इंसान बड़ा? ये द्वंद्व हृदय में ठान गया।
करुणा बिन जो ज्ञान मिला, वो केवल मन का भारीपन,
स्वार्थ के इस महाजाल में, खोया सबका अपनापन।
Adv. Ashish jain
7055301422
Paagla
https://youtube.com/shorts/pJ-O-ZviGmA?si=bbde1bN833hTXlW2
Rahul Raaj
गुज़ार दिए होंगे तुमने, कई दिन, महीने, साल.. जो काट ना सकोगे वो एक रात मैं हूँ।
की होगी गुफ्तगू, तुमने कई दफा कई लोगों से, दिल पर जो लगेगी वो एक बात मैं हूँ।
भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे, अपनेपन का एहसास जो करा दे, वो एक साथ मैं हूँ।
बिताये होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में जो भुला नहीं पाओगे, वो एक याद मैं हूँ..!!
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