Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Sudhir Srivastava

जीवन के आइने में ******** मृत्यु जीवन की एक प्रक्रिया, एक अनुभूति है, जिसका आनंद हम लेना ही नहीं चाहते बस! केवल डरते रहते हैं। जीवन की सबसे बड़ी ग़लती और जानबूझकर अपराध करते हैं। आखिर हम ऐसा क्यों करते हैं? मृत्यु को अपना क्यों नहीं मानते हैं? क्या बिगाड़ा है उसने आपका जो उसे दुश्मन समझते हैं। सच मानिए! बड़ी भूल कर रहे हैं, नाहक ही उससे दो-दो हाथ कर रहे हैं, आखिरकार हार भी हम जा रहे हैं। अपनी उम्र हम सब जीते हैं फिर भी मृत्यु से बचने की लगातार राह खोजते हैं पर सफल भी भला कहाँ होते हैं? जिससे बचने के लिए ताउम्र तमाम इंतजाम और जुगाड़ करते हैं, अंततः थक-हार कर मजबूरी में सही उसके शरणागत ही होते हैं, बड़ा सवाल है कि हम ऐसा क्यों करते हैं? या खुद को मृत्यु से बड़ा मानने की जिद में ही हम यह अपराध कर रहे हैं, मृत्यु के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं इसलिए नकारने का नाहक श्रम कर रहे हैं, और मृत्यु से दूर भागने की जिद में उसके और करीब होते जा रहे हैं, मृत्यु हर पल हमारा उपहास कर रही है जिसे हम वास्तव में देख ही नहीं पा रहे हैं, जीती मछली निगलकर खुश हो रहे हैं। अब सोचना हमें है कि बड़ा तीसमार खाँ बनकर हम कौन सा झँडे गाड़ रहे हैं, जीवन के आइने में मृत्यु को देखकर भी अनदेखा करते जा रहे हैं शायद खुद को खुद का खुदा समझ रहे हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Raju kumar Chaudhary

Smart School Nepal मा स्वागत छ 🙏 यो च्यानल विद्यालयस्तरका विद्यार्थीहरूको ज्ञान, प्रतिभा र आत्मविश्वास उजागर गर्ने एक शैक्षिक र प्रेरणादायी प्लेटफर्म हो। यहाँ तपाईंले पाउनुहुनेछ — 🎤 प्रभावशाली वक्तृत्वकला 📚 सजिलो र उपयोगी शैक्षिक भिडियो 🎭 मन छुने सांस्कृतिक कार्यक्रम 🏫 विद्यालयका विभिन्न गतिविधिहरू 🌟 विद्यार्थीहरूको लुकेको प्रतिभा हामी विश्वास गर्छौं — आजका विद्यार्थी नै भोलिको राष्ट्र निर्माता हुन्। त्यसैले शिक्षा, अनुशासन र प्रेरणालाई एकै ठाउँमा प्रस्तुत गर्छौं। 📌 ज्ञान बढाउन 📌 आत्मविश्वास जगाउन 📌 नयाँ कुरा सिक्न अहिल्यै Subscribe गर्नुहोस् र Smart Learning को यात्रामा हामीसँग जोडिनुहोस्। 🔔📺#FutureOfNepal #YoungTalents #StudentMotivation #Inspiration #EducationMotivation

Raju kumar Chaudhary

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Nensi Vithalani

જીવનને કાવ્ય સમજી💫🌸 ક્યારેક ગમતું મૂકવું પડે મૂકેલું છોડવું પડે છોડેલું હળવેથી સ્વીકારવું પડે સમયની સાથે ચાલવું પડે મનની ગતિને શાંતિથી સમજવું પડે નદી જેમ વળાંક લેતા શીખવું પડે થોડું અટકી પોતાને સાંભળવું પડે આશા હાથમાં રાખી રાહ જોવી પડે દરેક દિવસને નવી શરૂઆત માનવી પડે જીવનને કાવ્ય સમજી જીવવું પડે અને જે છે એમાં સૌંદર્ય શોધવું પડે 💫

Atul Bhatti

અરીસામાં જોવા અરીસાયે, સવાલ તરતો મૂક્યો છે, મેં ખુદને ખુદમાં ઉતારી, જવાબ વળતો મૂક્યો છે. ​છે ભેદ-ભ્રમ અહીં સૌના, રૂપે રગે સરખા મૂક્યા છે, વાડા ભલે આદમ કર્યા, રુધિર જ મળતો મૂક્યો છે. ​મૌન રહી સાધી નહિ શકું, અતુલ હવે આ દુનિયાને હું, મારા ભીતર દીવો ખુદ, ખ઼ુદાએ જળહળતો મૂક્યો છે.

Niya

અમે મળ્યા હતા પ્રેમ માટે, પણ રહી ગયા વેદના માટે…

Pallavi Tiwari

चार दीवारी की कहानी घर की चार दीवारी में, एक कहानी है मेरी अपनी रोज एक न‌ई जंग हूं मैं एक गृहणी हूं चूल्हे से लेकर चाबी तक,हर दिन एक नई कहानी पानी भरने से लेकर पोंछा लगाने तक हर काम में हैं मेरी कहानी,हर पल में हैं मेरी जवानी पर रात के अंधेरे बत्ती बुझाती और खुद को ढूंढती हूं और फिर एक पल ऐसा आता, खुद को ही भूल जाती पर अगली सुबह फिर वही गृहस्थी में लग जाती मैं इसलिए गृहणी कहलाती मैं तो कहो ये कहानी किसकी

JIGAR RAMAVAT

સાવ કોરી કિતાબ જેવી આ કહાની લાગે છે, દોસ્ત, તારા વગર જિંદગી અધૂરી લાગે છે. શ્વાસ ચાલે છે ને ધબકાર પણ છે છાતીમાં, પણ તું ના હોય તો હર શ્વાસમાં દૂરી લાગે છે. મહેફિલો ગુંજે છે, લોકો હસે છે ચારે કોર, એક તારી ગેરહાજરીથી સાંજ સુની લાગે છે. સુખ હોય કે દુઃખ, કોની પાસે જઈને ઠાલવું? તારા વિના તો હવે ખુશી પણ મજબૂરી લાગે છે. જગત આખું ભલેને આવીને ઉભું રહે પડખે, તું મળે તો જ મારી દુનિયા પૂરી લાગે છે. -J.A.RAMAVAT

Shraddha Panchal

शिकायतें बहुत है , इंसान की फ़ितरत में ….. कल धूप से परेशान था, तो आज बारिश से ।।।।……😇

Soni shakya

कैसे समझते तुम, तुम्हारे पास चाहतो की भीड़ थी.. और मेरी चाहत..."सिर्फ तुम" - Soni shakya

Kartik Kule

वो पल आखरी था वो दीन आखरी था नाजाने क्या पता वो दोस्त आखरी था समज न पाये हमे अस्केजेसा कोई तुम क्या जानो वो दौर आखरी था - Kartik Kule

Kartik Kule

ज्यांनी पुस्तक वाचल नाही तो पुस्तक लिहू शकतो मग ज्यांनी एवढ आयुष्य जगलं ते आयुष्य का घडवणार नाही अस वाटत - Kartik Kule

Kartik Kule

की श्यामियनेकी महफिलोसे अच्छी मेरे दोस्तीकी कहावतेहि अच्छी है।। अमीरोकी बस्तीमे गरीबोकी दीवानगी ही अच्छी हे।। - Kartik Kule

Urvashi Oza

दिल करता है एक रात मैं सोजाउ और सुबह सबको मेरे लिए रोते देखू ( आसमान से )

Vrishali Gotkhindikar

.........वादळ...! ..छोटी मोठी..वादळे तर खुप आली आयुष्यात..आजपर्यंत.. ..छोट्या वादळातुन..तर सहजच पार पडले ................काही ही न गमावता... .................अगदी सहीसलामत..!!! ..मोठ्या वादळांनी शिकवले.. ....... स्वतःचा बचाव करुन ..परत उभारी धरायला..!! ..पण आता तुझ्या निघून जाण्याने जे वादळ आलय..घोंघावत..! त्यानं मला पार सैरभैर..केलय रे.. "बचाव"..आणी "उभारी".. हे तर सारे दुरच राहिलेय..................... मी स्वतःलाच कोंडुन घेतलय..माझ्या कोशात.. .........पाकळीही न उघडता..!!!! ....................... वृषाली

Priya

मेरी कहानी में हर एक शख्स धोखेबाज निकला हम वजूद उसका पाक समझते रहें जो खुद एक गुनेहगार निकला... Priya kashyap

તેજસ

જરૂરી નથી કે સમયની સમજણ અનુસાર દૃષ્ટિ હોય છે. તારી સાથે મારી દુનિયાથી અલગ સપનાની સૃષ્ટિ હોય છે. આંખોની આંખો સાથે તો કેટલીય વાતો થઈ ચૂકી છે પણ, તારા કીધા વગર કરાયેલા સ્પર્શની અલગ મસ્તી હોય છે. કહે છે દરેક માણસ કોઈક અને કંઈક ખોઈને જ બેઠો છે. પણ હું જ્યારે તારી સાથે હોઉં ત્યારે પૂર્ણ સંતુષ્ટિ હોય છે. લોકો ભલે ને કહેતા હોય કે ગુમ થયેલો માણસ છે પણ, તારાં આલિંગનમાં હોઉં તો મારી અલગ જ હસ્તી હોય છે. – તેજસ - તેજસ

Priya

रात गई बात गई...नहीं महादेव रात गई...बात दिल पर लग गई..।

Priya

हजार गम हैं खुलासा कौन करे मुस्कुरा देते हैं तमाशा कौन करें Priya kashyap...✍️

kajal Thakur

“उसे चाहा भी तो इस तरह चुपचाप,💔 कि मेरी खामोशी ही मेरा इज़हार बन गई। वो किसी और की दुनिया में खुश रहा, और मेरी पूरी दुनिया बस उसी के नाम रह गई।” 🥀 Kajal Thakur 😊

Kamini Shah

એટલું આસાન નથી મંઝિલે પહોંચવું ચિત્તાની ઝડપે છલાંગ મારી લક્ષ્યે પહોંચવું… -કામિની

M K

क्या बात है ...?? मेरे अंदर अब घमंड घर कर लिया है, जबकि पता है मुझे घमंड तो रावण का भी चूर हुआ था, मैं तो बस मामूली सी इंसान हूं ,,, रोते हुए आँखें जुबां को कड़वा कर दिया है मोल भाव की दुनियां में मेरे मासूम दिल का क्या काम?? अपनों के साथ साथ अनजानों को भी गलत लग रहे हैं, मुझे इसकी क्यों परवाह करनी ...??? मैं जैसी थी अब वैसी नजर नहीं आना चाहती, वक्त ने मुझे कुछ सिखाया है.....!!! - M K

Dada Bhagwan

दर्शन से मिले तृप्ति, त्रिमंदिर ये निष्पक्षपाती, जो भी यहाँ आए, पाए शाश्वत शांति! त्रिमंदिर यानी धर्म में निष्पक्ष दृष्टि की शुरुआत! त्रिमंदिर के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ विज़िट करें: https://dbf.adalaj.org/Ta2V8JjO #PranPratishtha #thane #trimandir #celebration #DadaBhagwanFoundation

Jyoti Gupta

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Shailesh Joshi

બાળપણથી લઈને કિશોરાવસ્થા અને કિશોરાવસ્થાથી લઈને યુવાવસ્થા સુધી જો આપણને જે જોઈએ, કે માંગીએ એ મળી જતું હોય, તો કમસેકમ આપણે એટલું તો સમજવું જોઈએ કે, એ ચીજવસ્તુ બજારમાંથી આપણા સુધી કેવી રીતે આવે છે, કે પહોંચે છે ? - Shailesh Joshi

Priya

अफसोस हैं मगर शिकवा नहीं मुझें एक शख्स साथ रहकर भी समझा नहीं मुझें - Priya

bhavesh

2026 માં આગળ વધવા માટે આ આદતો છોડો ✋👉✅

Shailesh Joshi

જ્યાં સુધી વિદ્યાર્થી જીવનથી લઈને ( પૃખ્તવયના ) વ્યવસાયિક જીવનની શરૂઆત ન કરીએ ત્યાં સુધી આ એક વાત યાદ રાખવી કે, હમણાં જો આપણને ઈચ્છા થાય એ પ્રમાણે જીવવાની આદત પડી જશે, તો બાકી જીવનમાં આપણે આપણી ઈચ્છા પ્રમાણેનું જીવન બિલકુલ નહીં જીવી શકીએ. - Shailesh J

Sarika Sangani

जिस आजादी को हमने इतनी जद्दोजहत से हासिल किया है, वही आजादी आज हमें फिर से गुलाम बनने की ओर ले जा रही है। काश इस देश में सख्ती से संविधान का पालन होता तो यह भटके हुए आजाद लोग यूं मनमानी न करते। - Sarika Sangani

Imaran

चाहा है तुम्हें अपने अरमान से भी ज्यादा, लगती हो हसीन तुम मुस्कान से भी ज्यादा, मेरी हर धड़कन हर साँस है तुम्हारे लिए, क्या माँगोगे जान मेरी जान से भी ज्यादा 🫶imran 🫶

Saliil Upadhyay

સ્માર્ટ, હોંશિયાર કે સમજદાર...? ગેરેજવાળો : મેડમ,તમે એક્ટિવા રોક્વા પગ કેમ ઘસો છો..? મેડમ : કારણકે, બ્રેક લાઇનર ૩૫૦ રુપિયાનુ આવે અને ચપ્પલ ૧૦૦ રુપિયાના....!

Ashish jain

लाइफ की करप्ट विंडो मेरे मदरबोर्ड (ईश्वर) ने जब, ये पुर्जा नया बनाया, ठोक-बजाकर हार्ड डिस्क (आत्मा) का, एक पीस लगाया। सन् दो हजार छह की वो, 'विंडो एक्स पी' वाली रात थी, नया सिस्टम, नया जोश, और खुशियों की शुरुआत थी। सीडी-रोम (मम्मी-पापा) ने इसमें, संस्कार का सॉफ्टवेयर भरा, एंटीवायरस बनकर गुरु आए, ताकि सिस्टम रहे खरा। पर हाय रे किस्मत! कुछ गलत दोस्तों के 'वायरस' आ गए, कुछ गर्लफ्रेंड के 'मैलवेयर', मेरा सारा रैम (RAM) खा गए। इंटरनेट से फाइल अटैच हुई, जिसे शादी कहते हैं, अपडेट हुआ एंटीवायरस (नौकरी), अब हम ऑफिस में रहते हैं। कॉपी-पेस्ट के चक्कर में, एक नई फाइल (बच्चा) डाउनलोड हुई, खुशियाँ तो बहुत मिलीं, पर मेमोरी थोड़ी ओवरलोड हुई। अब महँगाई की डायन ने, फाइलें ऐसी करप्ट कीं, सिस्टम होने लगा हैंग, और विंडो ही इरप्ट (Erupt) की। अब दुनिया जब भी पूछती है— "आशीष भाई, क्या हाल है?" तो मेरा सॉफ्टवेयर बस एक ही, एरर कोड (Error Code) उगलता है: "माफ़ करना भाई, 'योर पासवर्ड इज़ इनकरेक्ट',मेरा दिल अब हैग है, और दिमाग डिसकनेक्ट!"

Ashish jain

शीर्षक: बेलन और ब्रह्मांड का युद्ध सुबह सवेरे गरम चाय की, माँग जो मैंने कर दी, पत्नी ने गुस्से की ज्वाला, आँखों में अपनी भर दी। बोली— "चाय चाहिए या फिर, अपना सिर फुड़वाना है? आज सफाई का दिन है, या फिर बहाना बनाना है?" लड़ाई ऐसी छिड़ गई जैसे, सरहद पर घमासान हो, वो थी सुलगती झाँसी की रानी, मैं डरा हुआ इंसान हो। मैंने कहा— "ओ प्रिये! ज़रा तो, रहम इस दिल पर खाओ," वो बोली— "चाय छोड़ो, पहले ये मकड़ी का जाला हटाओ!" वो उठी तो लगा कि कोई, भारी तूफ़ान आएगा, बेलन हाथ में देख लगा, मेरा भूगोल बदल जाएगा। मैंने आवाज़ उठाई तो वो, 'सुनामी' बनकर आई, एक घंटे तक फिर घर में, मेरी 'सर्जिकल स्ट्राइक' हुई। मैदान-ए-जंग में खड़ा मैं, बस आहें भरता रहा, अपनी ही शादी के फैसले पर, मन ही मन मरता रहा। आशीष! अब हालत ऐसी है कि, कोना ढूँढ के बैठा हूँ, शेर था कल तक घर का, आज भीगी बिल्ली बना बैठा हूँ। अब वो उस कमरे में बैठी, 'मौन व्रत' का तीर चलाती है, मैं इस कमरे में बैठा, जैसे सज़ा-ए-मौत काटता हूँ। दोस्ती करने जाऊं तो, वो 'नागपाश' सी डसती है, और मेरी इस हालत पर, मोहल्ले की कामवाली हँसती है! Adv. आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

कविता: दरिया का फासला नदी के उस किनारे पर, वो बनकर आस बैठी है, दबाकर दिल में अरमानों की, मीठी प्यास बैठी है। इधर हम हैं कि सूनी रेत पर, चुपचाप बैठे हैं, लगाकर ज़ख्म लहरों का, कोई इतिहास बैठे हैं। हमारी कश्ती तो उस पार, जाने से ही रूठ गई,मझधार में ही किस्मत की, वो डोरी टूट गई।जो लेकर जाती उस साहिल पे, वो कश्ती ही डूब चुकी,मिलन की हर हसीं ख़्वाहिश, दरिया में ही ऊब चुकी। न आवाज़ वहाँ पहुँचे, न कोई राह दिखती है, तड़प ये फासले वाली, न कागज़ पर लिखी जाती है। वो सुध-बुध खोके बैठी है, हम आहें भरके बैठे हैं, दबे अरमान सीने में, कई पत्थर से बैठे हैं। कैसे हो बात अब उनसे, कि दरिया बीच में गहरा,लगा है बेबसी का आज, यादों पर कड़ा पहरा।वो बस एक अक्स जैसी है, जो लहरों पर चमकती है,मगर छूने को बढ़ते हैं, तो ये दुनिया धमकती है। नदी बहती ही जाती है, जुदाई को जताने को, कोई 'आशीष' तो दे दे, इस टूटे आशियाने को। वो उस तट पर, हम इस तट पर, बस निहारा करते हैं, बिना पतवार के हम, उम्र सारा गुजारा करते हैं। Adv.आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

गज़ल: आँखों की ज़ुबान हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते, तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इकरार से डरते। अजब ये कशमकश थी... हम बस आँखों से बात करते रहे, ठंडी आहें भरते रहे... मिलने का इंतज़ार करते रहे। कभी हम चुप रहे... कभी तुम चुप रहे, ख़ामोशी बोलती रही, नज़र से दिल की जो बातें थीं... वो हर पल होती रहीं। मगर जब बात लबों तक आई... तो हम संसार से डरते, तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इज़हार से डरते। अजब सी प्यास थी आँखों में... अजब सा एक साया था, कि जैसे रूह ने मेरी... तुम्हें अपना बनाया था। मगर खोने के डर से हम... खुद अपनी पुकार से डरते, हृदय में प्रेम जागा था... मगर इकरार से डरते। तड़प दिल की ये 'आशीष'... आँखों ही आँखों में पलती रही, मोहब्बत की ये शमा... बस धड़कनों में जलती रही। ग़ज़ल बन कर जो छलका दर्द... तो हम झंकार से डरते, हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते। adv.आशीष जैन 7055301422

Parmar Mayur

वह कानून हमेशा 'अधूरा' रहता है। जो बच्चे को 'बिस्कुट की चोरी' में, जेल में बंद कर दे, जबकि उस बच्चे को उसके हक के पैसे, ना देने वाले वेपारी के 'अन्याय पर मौन' रहे। इंसाफ का तराजू 'तटस्थ, सम्मानित और सत्य' पर टीका होना आवश्यक है।

Deepak Bundela Arymoulik

ये सफ़र उनका है जो चल न सके, ये शहर उनका है जो संभल न सके। हमने तो ठहर कर भी हार मान ली, वो गिर-गिर कर भी खुद को बदल न सके। आर्यमौलिक

Deepak Bundela Arymoulik

ये सफ़र उनका है जो चल न सके, ये शहर उनका है जो संभल न सके। हमने तो ठहर कर भी हार मान ली, वो गिर-गिर कर भी खुद को बदल न सके। आर्यमौलिक

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

पुत्र नहीं वश में रहे, रहे न पत्नी पास। धन से भी पीड़ित हुआ, हुआ नरक का वास।। दोहा --४०० (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास कोहरा दिल में यादों का कोहरा छाया हुआ हैं l चैन सुकून हरने का इलाज पाया हुआ हैं ll मुलाकातों के हसीन लम्हें ताजा होते ही l चहेरे पर मुस्कराहट को बोया हुआ हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Mayur CHAUDHARY

पुरुष को अपनी शैशवावस्था का बोध तब होता है जब उस पर माँ भगवती कृपा करती हैं। इसके बाद ही वह जगत की स्त्रियों में विद्यमान शक्ति की अनुभूति करके उनके समक्ष मस्तक झुका सकता है। वास्तविक ब्रह्मचर्य यही है। शरीर के स्तर पर जो लंगोट करके शक्तिसंचय कर रहे होते हैं, लुट ही जाते एकदिन।

Urvashi Oza

मैं पेड़ से गिरे हुए उस पत्ते की तरह हु जो सूखा भी है और हरा भी ना चूर हो सकता है ना तो पेड़ से लग सकता है ( बस ज़मीन पर पड़े रहना ही किस्मत है )

S K I N G

यक़ीन कैसे करूँ, अपनी ही किस्मत पर, कि फलक छोड़ कर, चाँद आया है चौखट पर। Good morning

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

Bk swan and lotus translators

This image is a stylized "poster" that uses a mix of photography and digital overlays to convey a message about individuality. It feels like a personalized piece of motivational content or a conceptual film poster. Here is an in-depth analysis of the visual and thematic elements: 1. Composition and Subject * Central Figure: The man is the clear focal point, positioned vertically in the center of the frame. His posture—arms crossed and a steady gaze—projects confidence and composure, aligning with the "standout" theme. * The Setting: The background appears to be a school or institutional hallway with stairs and a door. The presence of other people (blurred or in the background) provides a literal "crowd" for the subject to contrast against. 2. Visual Effects & Symbolism * Geometric Overlay: There is a translucent, crystalline or diamond-shaped geometric pattern superimposed over the subject's chest and torso. This is a literal visual metaphor for the "diamond" mentioned in the text. * Lighting and Glow: A soft, white glow emanates from the center of the subject, creating a "halo" effect that separates him from the darker, more muted tones of the background. * The "Diamond" Metaphor: * Uniqueness: Diamonds are formed under pressure and are prized for their clarity. * Refraction: The geometric shapes suggest light being refracted, implying that the individual "shines" differently than those around them. 3. Typography and Messaging * Text Hierarchy: The bold, sans-serif white text is placed directly over the midsection and feet. * "Don't get blended in the crowd" (The Warning) * "Standout like a diamond" (The Call to Action) * Directness: The message is simple and aspirational, typical of motivational social media content or "hero" archetypes in cinema. 4. Branding and Metadata * Production Tag: The bottom of the image credits "A Brillance Films Production," which suggests this might be promotional material for a video project, a short film, or a personal branding exercise. * Timestamp: The bottom right displays a very recent timestamp (January 28, 2026), indicating this is a "live" or current piece of content. Summary The image successfully uses visual contrast—turning the background dim and adding a glowing geometric heart—to reinforce its message. It’s an empowering visual that focuses on the idea of maintaining one's brilliance despite a mundane or crowded environment.

Ashish jain

कोंकणी: सगांलो इष्ट (सबकी दोस्त) कोंकणच्या दर्या देगेर, गाजता आमची कोंकणी मायेची, उतरां ताचीं शेंकड्यां वरसां, गोडसाण जशें आसा साकरेची। ना कोणाकडेन झगडीं, ना कोणाकडेन कसलेंच वैर, सगळ्यां भासां कडेन तिचें नातें, जशें काळजांतलें सैर। आशीष म्हणटा, ही भास आसा सगळ्यांची मोगाची लाडकी, कानडी आसूं वा हेर कोण, उघडी दवरता आपली घरकी। मेळोवन घेता सगळ्यांक, न्हय कोणाचो तिरस्कार, आमची कोंकणी आसा, साऱ्या जगाचो सत्कार! adv. आशीष जैन 7055301422

Bk swan and lotus translators

This image features a clever Telugu pun that plays on the literal and figurative meanings of the word "hands." It’s a classic motivational thought that shifts the focus from destiny to effort. Translation & Core Meaning The text in red reads: > "భవిష్యత్తు మన చేతుల్లో... కాదు, కాదు చేతల్లో..." > (Bhavishyattu mana chethullo... kaadu, kaadu chethallo...) > * Literal Translation: "The future is in our hands... no, no, it is in our actions..." * The Wordplay: In Telugu, Chethulu (చేతులు) means "hands," while Chethalu (చేతలు) means "deeds" or "actions." In-Depth Analysis 1. The Myth of Palmistry vs. Reality The background shows an open palm, which usually symbolizes palmistry—the belief that one's future is written in the lines of the hand. By starting with "The future is in our hands," the author initially leans into that cliché. However, the immediate correction ("No, no, it is in our actions") subverts the expectation. It suggests that while the lines are on your palm, they don't move unless your hands are working. 2. Empowerment through Agency The quote is a call to take responsibility. It moves the concept of "Future" from something passive (luck/fate) to something active (hard work/behavior). It tells the viewer that destiny isn't a pre-written script you hold; it's a sculpture you carve with your actions. 3. Linguistic Nuance The transition from Chethullo to Chethallo is a subtle phonetic shift (just one vowel sound difference), which makes the message catchy and memorable. It’s a common rhetorical device used in Telugu "Sukthulu" (good sayings) to drive home a moral point. Summary The message is clear: Don't just look at your hands and wonder about your luck; use those hands to work and create your own luck.

Ashish jain

तुजी याद आयली, (तेरी याद आई,) आनी मोजे काळीज रडलें, (और मेरा दिल रो पड़ा,) तुवें म्हाकाच इबाडलें, (तुमने मुझे ही बर्बाद कर दिया,) मोज्या मोगान तुका न्हाययलें, (मेरे प्यार ने तुम्हें नहलाया था,) पुण तुवें मोज्या जिविताचो उजो केलो। (पर तुमने मेरी जिंदगी की आग लगा दी।) कोंकणी भास मोज्या रगतांत आसा, (कोंकणी भाषा मेरे खून में है,) ती अमृता सारकी गोड आसा, (वह अमृत जैसी मीठी है,) मराठी परस चड तिखट आनी सुंदर, (मराठी से कहीं ज्यादा तीखी और सुंदर,) मोज्या गोयांची हीच तर खरी वळख आसा। (मेरे गोवा की यही तो असली पहचान है।)

Ashish jain

कलम का स्वाभिमान दंभ के महलों में बैठकर, वो खुद को खुदा समझते हैं, मातृभाषा की आड़ में, वो हिंदी को 'गदा' समझते हैं। नफरत की इस राजनीति ने, साहित्य का आँगन मैला किया, जोड़ने वाली विधा को, भाषाई जंग का अखाड़ा किया। वो समझते हैं हम भिखारी हैं, शब्दों की भीख मांगते हैं, शायद भूल गए वो 'दिनकर' को, जो सोए शेर जगाते हैं। हमारी खामोशी को हमारी, मजबूरी मान बैठे वो, हिंदी के विशाल सागर को, एक छोटी क्यारी मान बैठे वो। तुम करो नौटंकी अपनी, हम अपनी साख बचाएंगे, तुम नफरत की भाषा लिखो, हम प्रेम का राग सुनाएंगे। इतिहास गवाह है वक्त का, हर घमंड एक दिन टूटता है, कलम जब सच लिखती है, तो सिंहासन भी छूटता है। भिखारी वो नहीं जिसके पास 'व्यूज' की कमी है, भिखारी वो है जिसकी सोच में, संस्कारों की कमी है। रचना की उम्र लंबी है, ये शोर तो बस दो दिन का है, साहित्य वही अमर हुआ, जो हर भाषा में जन-जन का है। adv. आशीष जैन 7055301422

Anup Gajare

🎬🎵 फ़िल्मी गीत : तुम हो के नहीं __________________________________________ मुखड़ा (Big Hook – Repeatable) तुम हो के नहीं मेरे हर कहीं पास हो के भी लगते अजनबी तुम हो के नहीं यादों में यहीं टूटे से ख़्वाबों की आख़िरी ज़मीं अंतरा 1 गुज़रता कारवाँ रुकता ही नहीं भटके हैं रास्ते मंज़िल भी नहीं तुम्हारे आख़िरी ख़त अब किसके लिए लफ़्ज़ तो ज़िंदा हैं पर मतलब नहीं प्री-कोरस (Build-up) शाम क्यों ढलती नहीं ये रात क्यों थमती नहीं दिल पूछता हर बार तू मेरा था या नहीं मुखड़ा (Repeat – Full Music) तुम हो के नहीं मेरे हर कहीं पास हो के भी लगते अजनबी अंतरा 2 जो चाहा वो पाया या पाया नहीं जो देखा वो सच था या सपना कहीं किसने निभाया किसने छोड़ा किसका पानी किसकी कश्ती डूबा ब्रिज (High Emotion – Silence → Music Drop) भुला-खोया कुछ मालूम नहीं क्या ढूँढा पता कुछ नहीं तुम्हारे निशान हैं या नहीं ये सवाल भी अब मेरा नहीं अंतरा 3 (Soft → Rise) ख़ुद का चेहरा सफ़ेद सा बर्फ़ बनकर रुक गया आईने भी पूछें आज यही तू था यहाँ या था ही नहीं फाइनल मुखड़ा (Key Change / High Note) तुम हो के नहीं मेरी ज़िंदगी हो के भी क्यों पूरी नहीं तुम हो के नहीं तुम हो के नहीं ये दिल माने अब और नहीं आउट्रो (Fade / Reprise) तुम हो के नहीं… हो के भी नहीं…

Sandeep Raj Thakur

vakt Ke Taraju Se har koi Tolta hai

Raju kumar Chaudhary

पागलपनhttps://youtube.com/@smartschoolnepal?si=_BGK0BK-hJUxxzzqSmart School Nepal मा स्वागत छ 🙏 यो च्यानल विद्यालयस्तरका विद्यार्थीहरूको ज्ञान, प्रतिभा र आत्मविश्वास उजागर गर्ने एक शैक्षिक र प्रेरणादायी प्लेटफर्म हो। यहाँ तपाईंले पाउनुहुनेछ — 🎤 प्रभावशाली वक्तृत्वकला 📚 सजिलो र उपयोगी शैक्षिक भिडियो 🎭 मन छुने सांस्कृतिक कार्यक्रम 🏫 विद्यालयका विभिन्न गतिविधिहरू 🌟 विद्यार्थीहरूको लुकेको प्रतिभा हामी विश्वास गर्छौं — आजका विद्यार्थी नै भोलिको राष्ट्र निर्माता हुन्। त्यसैले शिक्षा, अनुशासन र प्रेरणालाई एकै ठाउँमा प्रस्तुत गर्छौं। 📌 ज्ञान बढाउन 📌 आत्मविश्वास जगाउन 📌 नयाँ कुरा सिक्न अहिल्यै Subscribe गर्नुहोस् र Smart Learning को यात्रामा हामीसँग जोडिनुहोस्। 🔔📺#FutureOfNepal #YoungTalents #StudentMotivation #Inspiration #EducationMotivation

Raju kumar Chaudhary

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Mayur CHAUDHARY

भलई किसी औरत ने आज तक ताजमहल न बनवाया हो, लेकिन उन्होंने घर करोड़ों बनाए हैं।

hsc

हर हर महादेव 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿 - hsc

hsc

मौत तो देह का अंत है, पर स्त्री की हाय... आत्मा की थकान से और रूदन से जन्म लेती है। जब वह प्रतिदिन अपने भीतर थोड़ी-थोड़ी मरती है और फिर भी संसार के सामने जीवित होने का अभिनय करती है, तब उसकी हाय प्रार्थना बनकर ईश्वर के चरणों तक पहुँचती है, बिना शब्दों के, बिना शिकायत के। ईश्वर स्त्री की हाय को कभी बद्दुआ नहीं मानते, वो उसे कर्म का लेखा समझते हैं। जहाँ अन्याय होता है, जहाँ सहनशीलता को कमजोरी समझा जाता है, वहीं से उसका दण्ड रूपी फल धीरे-धीरे आकार लेने लगता है। न तुरंत, न प्रत्यक्ष, पर अचूक। क्योंकि जो पीड़ा मौन में सह ली जाती है, वो समय के गर्भ में न्याय बनकर पलती है। स्त्री की हाय, किसी का विनाश नहीं चाहती, वो तो संतुलन चाहती है। वो चाहती है कि, जो बोया गया है, वही लौटे। मौत एक बार को क्षमा हो सकती है, पर स्त्री की हाय... ईश्वर का मौन हस्तक्षेप है— जो देर से सही, पर अन्याय को उसके ही भार से झुका देता है। दण्डित कर देता है...!!

M K

अब सब कुछ छूट रहा है पीछे कही, मैं उसे संभालने की कोशिश नहीं करती हूं। रोज आंखों की शिकायत होती है मुझसे, चुप होठों को ख़ामोश रहने देती हूं...!! - M K

pink lotus

इंसान बदलते नही है वक्त और परिस्थितिया उन्हे ऐसा बना देती है

rajan

Kaun hai Ashwin? Aur wo yahan kaise pahucha? Samundar ke beech, is anjaan jagah par uski kahani shuru kaise hui… jaane ke liye Matrubharti par padhiye 📖 The Unknown Island by author rajan

Hardik Boricha

कुछ जिंदगियां बसंत का इंतज़ार करती रह जाती हैं.. और अचानक बिदाई की धूप में झुलस जाती हैं.. ख़्वाबों की कली खिलने से पहले ही ज़िम्मेदारियों की आँच पर पका दी जाती है... हर बेटी को कली रहने का मौसम मिले.. बसंत सिर्फ़ ऋतु नहीं, हर भाग्य में उतरे... 💯🌷❤️🙏

Hardik Boricha

❤★┼●#जब से तेरी #निगाहों का नूर #देखा है #खुद को #इश्क के हाथों #मजबूर देखा है●┼★❤ ❤┼●ना #देखा था #तुमसा कोई #दिलनशी पहले तेरी #आँखों में मैने वो #सुरूर देखा है ●┼★❤

S K I N G

अगर मुश्किलों से लड़ना चाहते हो तो सर्दी में ठंडे पानी से नहाना सीखो

Hardik Boricha

💞 एक तेरा ही अहसास, दिल ♥️ में तेरा वास.... मुकम्मल ना सही, मगर ये अहसास तो बाकी है तेरी यादों का मेरे दिल ❤️ में निवास तो बाकी है वो जो अधूरे रह गये हमारे दर्मियां किस्से उन अनकहे लफ्ज़ो की मिठास बाकी है जरूरी तो नहीं हर दुआ को मंजिल मिल जाए कि मुसाफिरों के पास सफर की प्यास तो बाकी है इश्क मुकम्मल ना हुआ तो, मलाल कैसा ? मैरी रूह में तेरे नाम का वास तो बाकी है। 💞💞💞💞

Archana Singh

गर्दिश में सितारें सहीं हम कहां सूरज सा चमकना चाहते हैं ! हम तो बस अपने महादेव का आशीर्वाद चाहते हैं !! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Apurv Adarsh

जिन्दगी को मजे से जीना चाहिए, पर क्या वो मजा किसी भी कीमत का होना चाहिए? नहीं ।

Bk swan and lotus translators

यह जानकारी वैज्ञानिक रूप से काफी हद तक सही है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण बातें भी हैं जो आपको जान लेनी चाहिए: तथ्यों की जांच (Fact Check): * क्या शराब का बादल मौजूद है? हाँ, वैज्ञानिकों ने 1995 में Aquila (गरुड़) तारामंडल में एक विशाल गैस के बादल की खोज की थी, जिसे G34.3 नाम दिया गया है। इसमें वास्तव में एथिल अल्कोहल (पीने वाली शराब) और मिथाइल अल्कोहल (जहरीली शराब) मौजूद है। * मात्रा: यह दावा कि इसमें 400 ट्रिलियन-ट्रिलियन (400 septillion) पिंट अल्कोहल है, वैज्ञानिक गणनाओं पर आधारित है। यह बादल हमारे सौर मंडल के व्यास से 1000 गुना बड़ा है। * क्या इसे पिया जा सकता है? बिल्कुल नहीं। भले ही इसमें एथिल अल्कोहल है, लेकिन यह शुद्ध नहीं है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन साइनाइड और अमोनिया जैसी बेहद जहरीली गैसें मिली हुई हैं। साथ ही, यह पृथ्वी से लगभग 10,000 प्रकाश वर्ष दूर है। * छवि की सत्यता: आपके द्वारा शेयर की गई तस्वीर एक काल्पनिक (AI द्वारा बनाई गई) ग्राफिक है। अंतरिक्ष में यह बादल इस तरह एक "शराब के गिलास" या रंगीन पेड़ जैसा नहीं दिखता। वास्तविक अंतरिक्ष बादल (Nebula) दूरबीन से देखने पर गैस के धुंधले धब्बों जैसे दिखते हैं। निष्कर्ष: अंतरिक्ष में अल्कोहल के बादल होने की बात सच है, लेकिन पोस्ट में दिखाई गई फोटो सिर्फ एक कलाकृति है और यह "शराब" पीने लायक या सुरक्षित नहीं है। जहां तक फोटो की बात है, मेरी जांच के अनुसार इसे Google AI से नहीं बनाया गया है, हालांकि यह मुमकिन है कि इसे किसी अन्य AI टूल का उपयोग करके तैयार किया गया हो।

InkImagination

Good night 🥰🥰

Jyoti Gupta

#26January #RepublicDay #RepublicDaySpecial #Deshbhakti #JaiHind #MeraBharat#AnandDham #MandirDarshan #BhaktiVideo #SpiritualIndia #TempleVibes#DeshAurDharma #BharatMataKiJai #VandeMataram ##26January #RepublicDay #RepublicDaySpecial #Deshbhakti #JaiHind #MeraBharat#AnandDham #MandirDarshan #BhaktiVideo #SpiritualIndia #TempleVibes#DeshAurDharma #BharatMataKiJai #VandeMataram #IndianCulture

Amir Ali Daredia

ज़खमे जुदाई देकर चले गये थे वो। फिर लौट कर हे आए अब पुछ रहे हैं वो क्या अब भी दर्द हो रहा है?। आंसू छिपाकर अपने बस इतना ही कह पाया जबसे जुदा हुआ हु बेजान जिस्म हूं मे मुझको दर्द कहां?।

ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

તું શીદને તરફરતો ખાબોચિયામાં, સમુંદરની લહેરોમાં તું ઊછળ્યો છે. તનમાં ભડકેલી આગમાં તું શીદને બળતો, તું તો તપતપતો લાવામાં રમ્યો છે. આ જાતને તું કેમ રણની રેત કરતો, ફળદ્રુપ જંગલોને પોષતું અંતર થઈને આવ્યો છે. તું ક્યાં ફૂલોની કોમળતા ધરીને બેઠો છે, એ તો પળમાં કરમાય જવાની રીત છે, તું તો કાંટાઓની પીડામાં સિંચાઈને ઊગતું પ્રભાત ખીલવ્યું છે. નિષ્કારણ કેમ કરીને તું આમ થાકી જાય, એ આભને પણ અજવાળું ધરવા ચમકારો બન્યો છે. - ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત

Mayur CHAUDHARY

जिन्हें इंतजार आता है, उन तक बसंत खुद चल कर आता है।

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/mLt8Y4vzRs0?si=JLjqe0oLrtOeoplk "आपके कपड़े आपके राज़ जानते हैं? 😨 भारतीय फैशन का काला सच!" #viral

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/rbNZU-Mjaes?si=iVPHkwIHJEZrbADm जेब में छेद या 30,000 का जादू? सच जानकर चौंक जाएंगे!" #viral

Abantika

एक 180 दिनों का कॉन्ट्रैक्ट... और एक न बुझने वाली आग!" ⛓️❤️ रात का सन्नाटा, हवेली की बालकनी और हाथ में कड़क चाय का प्याला... अभिमान ने अन्वेषा को घेरे में लेते हुए कहा— "ये चाय सुकून नहीं, आज रात तुम्हारी नींद हराम करने का बहाना है।"अन्वेषा ने आँखों में आँखें डालकर जवाब दिया— "हुकुम, नींद उनकी हराम होती है जिनके इरादे कमज़ोर हों, डीएम की कलम नहीं!" ​👉 अभी पढ़िए 'सफ़र-ए-दिल' के सभी धमाकेदार एपिसोड! (रेटिंग देना और फॉलो करना न भूलें!) 🖋️✨

naam me kya rkha hai

चेहरे से पता नहीं चलता दिल के गहरे ज़ख्मों का, ये मुस्कान तो बस एक तरीका है दर्द छुपाने का। आँखों में अक्सर ठहरा रहता है खामोश सा समंदर, हर किसी को हुनर नहीं होता ग़म पहचान पाने का।कोई साहिल पर खड़े होकर क्या समझे लहरों का दर्द,उसे क्या पता बोझ क्या होता है अंदर डूब जाने का। हम भी हँसते हैं महफ़िल में सबके साथ मगर, अंदर चलता रहता है सिलसिला टूटते जाने का। हर शख्स यहाँ पूरा नहीं होता जैसा दिखता है, किसी को शौक नहीं होता यूँ अंदर से बिखर जाने का। कुछ ज़ख्म आवाज़ नहीं करते, बस चुपचाप रहते हैं, फिर भी वक़्त लगता है दिल को फिर से संभल जाने का।

kajal jha

टूटे हुए दिल की आवाज़ कोई सुन न पाया, जिसे अपना समझा उसी ने हमें पराया बनाया। हम मुस्कुराते रहे दर्द छुपाने के लिए, और अंदर ही अंदर हर रोज़ खुद को मिटाया। - kajal jha

ArUu

चली जा रही हूं जाना किस तरफ है ... नहीं जानती बस... चली जा रही हूं जिस मोड़ मुड़ी वो सही है या गलत... नही जानती बस... चली जा रही हूं जहां जा रही वहा खुशी है या गम ... नहीं जानती बस... चली जा रही हूं क्या चाहिए जिंदगी से नहीं जानती बस... चली जा रही हूं

Archana Singh

गर्दिश में सितारें सही , हम कहां सूरज सा चमकना चाहते हैं ! कोई साथ दें या ना दें ...! हम तो बस ,महादेव का आशीर्वाद चाहते हैं ! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/EQvCgeP_B2k?si=q6mgrnHvm8bEjCsq नहीं ढूंढ पाया 'गुड़िया गैलेक्सी' का यह डरावना सच!" #youtubeshorts #kuwar

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/pg27z8YYF44?si=M29aq7l5OoEVhPIb वो शापित जूते जो पहनते ही इंसान गायब? जंगल का अनसुना रहस्य!"#हिंदीकहा

Shefali

#shabdone_sarname__ #shabdone_sarname_

Raju kumar Chaudhary

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M K

तेरा जाना ही सही था, मेरा टूट जाना भी सही था, जब सब सही था तो , मैं बुरी कब बनी तेरी निगाहों में, जो भी था, तेरा छोड़ जाना भी सही था....!! - M K

Rajesh Pali

तुम दिल के करीब हो, लेकिन आंखों से दूर हो।

rajan

Ashwin akela kaise bacha? Baaki sab ke saath kya hua? Aur kya Captain Vikram Pratap is sach tak pahunch paayega? 📖 The Unknown Island — Full Edition available on Kindle eBook

M K

मेरे हिस्से का प्यार सिर्फ मुझे मिले, ये दुआ मुकम्मल भी शायद नहीं होगी... उस शख्स ने मुझे खुद से और खुदा दोनों से राब्ता छोड़वा दिया,,,,, - M K

Raj Phulware

IshqKeAlfaaz तू पास है...

Saroj Prajapati

ठोकर खाने से क्यों घबराना माना थोड़ी चोट जरूर लगेगी लेकिन कदमों को मजबूती भी मिलेगी सीख जाओगे थोड़ा संभलकर चलना पहले से कहीं बेहतर दिखने लगेगा हौसलों को एक नया आयाम मिलेगा अपने पराए का भेद पता चलेगा जिंदगी में एक नया तजुर्बा जुड़ेगा। सरोज प्रजापति - Saroj Prajapati

Abantika

तस्वीरें बोलती हैं, बस सुनने वाला चाहिए, सुकून यहीं कहीं है, बस ठहरने का बहाना चाहिए। ​न जाने कौन सी दौलत है इन छोटी चीज़ों में, हज़ार खुशियाँ वार दूँ, सादगी के इन लम्हों में। ✨️धूप, यादें और ये गुलाबी सर्दी✨️ ​सर्दियों की वो नर्म धूप जब आंगन में उतरती है, तो अपने साथ ढेर सारी पुरानी यादें और एक अजीब सा सुकून लेकर आती है। आज की भागती-दौड़ती दुनिया में, जहाँ हम घड़ी की सुइयों के गुलाम बन चुके हैं, ये तस्वीरें हमें 'Slow Life' यानी ठहरकर जीने का सलीका सिखाती हैं। ​सर्दियों का असली मज़ा किसी बड़े मॉल या शोर-शराबे में नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी चीज़ों में है जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। सिल-बट्टे पर पिसती चटनी की वो सोंधी महक, अंगीठी की गर्माहट में सुखाए गए ऊनी कपड़े, और हाथ में चाय का वो गर्म प्याला जिसकी भाप में शायद हमारी आधी थकान उड़ जाती है। Slow Life का जादू... पेड़ की ऊँची टहनियों में फंसी वो लाल पतंग शायद हम सबकी बचपन की उन ख्वाहिशों जैसी है, जो कहीं पीछे छूट गई हैं। पर आज भी, जब हम ठहर कर उसे देखते हैं, तो वो बचपन फिर से ज़िंदा हो जाता है। ​ज़िंदगी बस यही है—धीमी आंच पर पकती हुई चाय, दरवाज़े पर बैठी एक शांत बिल्ली और अपनों के हाथों से मिलती हुई खुशियाँ। चलिए, इस सर्दी थोड़ा कम भागते हैं और थोड़ा ज़्यादा महसूस करते हैं।

ek archana arpan tane

પ્રેમ કરો તો એવો કે પ્રેમ ભગવાન બની જાય પણ જેને કરો એને ભગવાન ના બનાવો. - ek archana arpan tane

Mayur CHAUDHARY

बंजर जमीन से उग के आया हू, ये पतझड़ मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाएंगे...!!!

Mrs Farida Desar foram

इतना तो फख्र हे मुजे, अपने आप पर, की, बेवफाई नहीं की मैने कभी, मुहब्बत के नाम पर... - Mrs Farida Desar foram

Paagla

https://youtube.com/shorts/45Di7K1e9Hw?si=wkMeTWFx4b8MqKI3

cat

और फिर आखिर में, वो मनपसंद शख्स... " मेरे मन से उतर गया..।" written by me....🥀🥀

Ashish jain

मुखौटों का शहर पॉश गली की कोठियों में, ऊँचे-ऊँचे द्वार थे, बाहर दरिंदे घूम रहे, भीतर सब 'संस्कार' थे। चीख गूँजी रात में, पर बंद खिड़की-कान थे, इंसानियत चुप थी खड़ी, पत्थर हुए इंसान थे। कोई न आया बचाने को, बस एक बेजुबान लड़ा, हौसला उस जीव का, उन कायरों से था बड़ा। नोचते थे वे बदन, वह क्रोध में चिल्ला रहा, चीख को सुन-सुन के वह, बस रोना अपना पा रहा। भौर होते ही अचानक, जाग उठीं संवेदनाएं, हाथ में कैंडल लिए, अब दे रहे सब दुआएं। कैमरों के सामने, कुछ अश्क भी छलका दिए, पाप जो कल रात थे, वे मोम से झलका दिए। वही गवाह 'अशुभ' है, जो सत्य पर है भौंकता, पाखंड की इस भीड़ को, जो आईना है सौंपता। 'मनहूस' कहकर उस वफ़ा को, दूर सबने कर दिया, झूठ की चादर तले, फिर सच को उसने भर दिया। धिक्कार है उस सभ्यता पर, जहाँ रक्षक मौन है, खुद से पूछो ऐ मनुज, अब जानवर यहाँ कौन है? मोमबत्ती मत जलाओ, गर लहू ठंडा पड़ा, इंसान से तो आज वह, 'मनहूस' कुत्ता ही बड़ा। Adv. आशीष जैन 705301425

Ashish jain

शब्द-संवाद ये शब्द ही हैं जो घाव देते, ये शब्द ही मरहम बनते हैं, कभी ये आँखों के आँसू, कभी हंसी का संगम बनते हैं। जब क्रोध की 'लड़ी' में पिरोकर, ये ज़ुबान से झड़ते हैं, तब अपनों से ही अपनों के, भीषण युद्ध छिड़ते हैं। जब तड़-तड़ करती बोली से, मर्यादा की सीमा टूटती है, तब रिश्तों की नाजुक डोरी, पल भर में ही छूटती है। शोर बहुत है इन शब्दों में, जो कानों को फाड़ देते हैं, बने-बनाए जीवन को भी, ये तिनका-तिनका उजाड़ देते हैं। पर यही शब्द जब प्रेम में ढलकर, हो जाते हैं 'फुलझड़ी', तब अंधियारे जीवन में भी, जगमगाती है खुशियों की घड़ी। ये शोर नहीं करते दिल में, बस धीमी चमक बिखेरते हैं, भटके हुए राही के चेहरे, मधुरता से फेरते हैं। फिजा बदलती, महक उठती, जब वाणी में मिठास आती है, शब्दों की कोमल झिलमिल, मन का हर कोना हर्षाती है। चुन लो तुम भी, तुम्हें क्या बनना—विस्फोटक या प्रकाश, शब्दों से ही पाताल मिले, और शब्दों से ही आकाश। Adv. आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

उम्मीद का दीया चहुँ ओर अंधेरा गहरा है, अन्याय का सख्त पहरा है, न्याय की चौखट धूल भरी, और सच का चेहरा उतरा है। माना कि रक्षक सोए हैं, ईमान कहीं हम खोए हैं, पर अंतर्मन की गहराई में, विश्वास के अंकुर बोए हैं। कलम बिकी, कानून बिका, इंसानियत का जून बिका, मंदिर की सीढ़ी पर बैठ यहाँ, आस्था का पावन खून बिका। सन्यासी की झोली खाली नहीं, ये त्याग वाली दिवाली नहीं, पर फिर भी मन ये कहता है, कि रात अभी मतवाली नहीं। उठेंगे पैर, रुकेंगे नहीं, हम जुल्म के आगे झुकेंगे नहीं, जब तक न आए वो भोर नई, हम हक की राह तजेंगे नहीं। वो 'राम राज्य' फिर आएगा, हर मन पावन हो जाएगा, इसी भरोसे की लौ को, ये 'आशीष' सदा जलाएगा। Adv. आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

॥ आल्हा: अर्जुन का मान-मर्दन ॥ सुमिरन करूँ मैं सरस्वती माँ का, सुर में दे दे ज्ञान महान, आशीष लेखक की वाणी से, गाऊँ योद्धाओं का गान। कुरुक्षेत्र की उस माटी में, मय मय मचा घमासान, आमने-सामने खड़े हुए थे, अर्जुन और कर्ण बलवान ॥ कर्ण ने खींचा धनुष कान तक, मारो बाण बिजली की ढाल, अर्जुन का रथ दस हाथ खिसका, डोल गया सारा पाताल। फिर अर्जुन ने गांडीव ताना, साधे बाण अग्नि की धार, पंद्रह हाथ कर्ण को ठेला, बोले पार्थ मरो हुंकार ॥ अट्टहास कर बोले अर्जुन, "देखो माधव! मेरा जोर, मेरा बाण है सबसे भारी, कर्ण का बल अब हुआ थोर। वो तो बस दस हाथ हटा पाया, मैंने पंद्रह दिया खिसकाय, मुझसा योद्धा इस दुनिया में, दूजा नजर न कोई आय" ॥ मुस्कुराए तब कृष्ण कन्हैया, बोले "पार्थ! सुनो धरि ध्यान, मूरख जैसी बातें छोड़ो, तज दो अपना ये अभिमान। तेरे रथ पर वीर हनुमान, जो लांघ गए थे सातौ सिन्धु, शेषनाग ने थामे पहिए, मैं हूँ खड़ा जगत् का बन्धु" ॥ "ब्रह्मांड का भार लिए बैठा हूँ, मैं त्रिलोकी का करतार, फिर भी कर्ण ने रथ को ठेला, धन्य-धन्य वो वीर अपार। अगर न होते हम इस रथ पर, उड़ता रथ बन कर के धूल, कर्ण के बाणों की मार से, उड़ जाते तेरे सब मूल" ॥ ग्लानि से भर गए धनंजय, झुका दिया चरणों में शीश, अहंकार जब-जब बढ़ा जग में, तब-तब सीख दिए 'आशीष'। हाथ जोड़ अर्जुन तब बोले, "कर्ण है योद्धा महा-महान", बिना हरी की कृपा के जग में, सब है कोरा ही अभिमान ॥ Adv. आशीष जैन 7055301425

Ashish jain

अहंकार का रथ: रण-भूमि में खड़ा धनुर्धर, गांडीव हाथ में ताने, कर्ण और अर्जुन भिड़े परस्पर, मृत्यु न किसी की माने। कर्ण मारता बाण वेग से, रथ दस हाथ हट जाता, अर्जुन के प्रहार से तो, रथ कोसों पीछे जाता। हँसकर बोला पार्थ कृष्ण से, "देखो मेरा जोर, कर्ण खिसक गया पंद्रह हाथ, मचा युद्ध में शोर। मेरा रथ तो टस से मस, बस दस हाथ ही हुआ, क्या सूतपुत्र के बाणों में, बस इतना बल ही मुआ?" मुस्कुराए त्रिलोकी तब, बोले— "सुन लो पार्थ, व्यर्थ कर रहे हो तुम जग में, अपना ये पुरुषार्थ। जिस रथ पर कपिराज स्वयं, हैं ध्वजा थाम कर बैठे, शेषनाग ने थामे पहिए, क्यों तुम इतना ऐंठे?" "स्वयं चराचर का जो स्वामी, सारथी बना खड़ा है, उस रथ को जो दस हाथ हटा दे, वो योद्धा बड़ा है। अगर न होते हम इस पर, तो ब्रह्मांड पार तुम होते, कर्ण के केवल एक बाण से, तुम जीवन अपना खोते।" टूटा तब अभिमान पार्थ का, नयनों में जल आया, वीर कर्ण के चरणों में, उसने अपना शीश झुकाया। कहे 'आशीष' पुकार के, तज दे तू अभिमान, सत्य वही जो कृष्ण कहें, और विमल कर दे ज्ञान। Adv. आशीष जैन 7055301422

Pushp Saini

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