Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Anjali Singh
चेहरे पर मुस्कान, दिल में हिसाब रखते हैं,
आजकल अपने भी दूरी का नकाब रखते हैं।
Narayan
एकटक निहारती वो आँखें, जैसे कोई सवाल पूछ रही हों,
चेहरे की उस उदासी में, जैसे हज़ारों दर्द पल रहे हों।
बिना कहे ही वो सब कुछ कह गई उस पल में,
जैसे बिछड़ने का सारा मंज़र, उसकी खामोशी में ठहर गया हो।
ziya
मौत से भी बढकर होता है
तन्हा बैठ कर बीते हुए पलो को याद करना
Raa
kon kon padai kar rahahe aabhi
Thakor Pushpaben Sorabji
રાત્રીએ અંધકાર ઘેરાઈ
જાય છે
ઉદાસી એ મન ભરાઈ
જાય છે
જય શ્રી કૃષ્ણ "પુષ્પ"
- Thakor Pushpaben Sorabji
SAYRI K I N G
हाथों ने पैरो से पूछा.... सब तुम्हे हीं प्रणाम करते हैं, मुझे क्यों नही..?
पैरो ने बोला, उसके लिए जमीन पर रहना पड़ता हैं, हवा मे नही..!!
Durgeshwari Sharma
Beautiful Roses...
उषा जरवाल
एक घर के आँगन में बहुत सारे पौधे लगे हुए थे जिन्हें इनके माली ने मेहनत, लगन और स्नेहमयी स्पर्श देकर सींचा था । समय के साथ उन पौधों के आँगन अलग हो गए और वे नई मिट्टी में जाकर अपनी - अपनी दुनिया में ख़ुशी से रहने लगे । सब एक - दूसरे से दूर थे लेकिन जब तक माली था तब तक अपनेपन की बयार ने उन्हें एक - दूसरे से जोड़कर रखा था ।
एक दिन माली चला गया और धीरे - धीरे उनके बीच जो अपनेपन की डोर थी वो खिंचती चली गई । डोर इतनी दूर तक खिंच चुकी थी कि अब हवा ने भी उनके बीच आना बंद कर दिया था लेकिन पता नहीं क्यों एक पौधे को विश्वास था कि चाहे जो भी हो जाए लेकिन एक शीतल बयार है जो उसके मुरझाते हुए शरीर में नई चेतना का संचार करती रहेगी । भले ही वह शीतल बयार अपनी राह बदल चुकी है लेकिन उस पौधे की आस अभी भी बनी हुई है ।
Chinmayee
सोचती हूं अपने इन अश्कों से अपनी प्यास बुझा लूं
आपकी इस तस्वीर को निहारते निहारते अपनी आस भुला लूं
पर यह कमबख्त आंखें बेवफा है
आपकी हर एक बात पर अपने अंदर सैलाब लिए फिरता है
नज़रे चुरा के नज़रे छुपा के चलता है ।
मासूम से दिल पर आपका यह सितम कैसा
पूर्णिमा के रात को समंदर की वो उमड़ती तरंग जैसा
बौने का चांद की चाहत जैसा।
दिल पेस किया था कोई खिलौना नही
फूल जैसा दिल था मेरा
आपको हमने दिल में समाया
और हमारा हश्र क्या ही बताएं
अपने हमें पैरों तले दफ़न कर दिया।
Mr.Sanket Gohil
પાંપણોને સપનાનો ભાર ના હોય...
ને પ્રેમમાં કોઈ ચોક્કસ વ્યવહાર ના હોય...
મળે ત્યારે મૌસમ વંસંત જ હોય...
ના મળે તો પાનખરની વાટ ના હોય ...
આનંદ દરેક ક્ષણનો શણગાર હોય...
ને વિરહમાં પણ મીઠાસનો અભાવ ના હોય...
જગત ભૂલવાની મજા પ્રેમમાં હોય...
ને પ્રેમમાં ત્યાગ નો ઇનકાર ના હોય...🖋
Beyondwords
भावनाओं का एक मेघ था मैं…....
"कभी-कभी प्रेम केवल समर्पण नहीं, एक गहरा विसर्जन होता है। जहाँ एक मेघ अपना समूचा आकाश छोड़कर सिर्फ इसलिए बरसता है कि कोई प्यासी कली खिल उठे। पर क्या होता है तब, जब बरसने वाले की पवित्रता, सामने वाले के लिए केवल एक 'बेचैनी' बन जाए? यह कविता उसी अनसुनी बारिश की कहानी है..."
भावनाओं का एक मेघ था मैं…
तेरी सादगी और तेरी ख़ुशबू में इतना खो गया
कि अपना आकाश, अपना अस्तित्व… सब भूल बैठा।
अपने हर धड़कन, हर दर्द, हर खुशी को
नाज़ुक शब्दों की बूँदें बनाकर
बस तेरे ऊपर ही बरसाता रहा—
इस यक़ीन के साथ कि
मेरे प्रेम की बारिश से तू और खिलेगी,
और मेरी बूँदों में अपना प्रतिबिंब ढूँढेगी।
पर क़िस्मत को कब वसंत महसूस हुआ है…
बरसने की चाह तो हर किसी में होती है,
पर भीगने की हिम्मत हर दिल में नहीं।
जब मेने देखा,
तो तू छाते की नीचे छिपी हुई थी—
जैसे बारिश तेरी पीड़ा हो,
और मेरा प्रेम कोई आशीर्वाद नहीं,
एक अनजानी, अनचाही बेचैनी हो।
तभी समझ आया—
भावनाएँ कितनी भी पवित्र हों,
अगर सामने वाला दिल
स्वीकार की एक धड़कन भी ना दे,
तो बूँदें छूती नहीं—
बस फिसलकर बह जाती हैं।
पानी जैसा शुद्ध प्रेम भी
अगर कोई उसे प्यास से न अपनाए,
तो वह जीवन नहीं देता…
सिर्फ़ एक बहाव बनकर रह जाता है।
मैं तो आज भी अपना आकाश छोड़कर
तेरे लिए बरसने को तैयार हूँ…
पर तू—
तूने अपने ऊपर भीगने का
अधिकार तक आने नहीं दिया।
"अंततः, प्रेम का होना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे समेटने की पात्रता भी चाहिए। बूँदें तो गिरती रहेंगी, पर जो भीगने का 'अधिकार' ही न दे, उसके लिए समंदर भी बस एक व्यर्थ बहाव है। मेघ आज भी खड़ा है, अपने खालीपन और भरे हुए मन के साथ—सिर्फ एक स्वीकार की धड़कन के इंतज़ार में।"
@beyond_word✍️
SAYRI K I N G
अरब खरब धन जोड़िए, करिए लाख फरेब।
धरा यहीं रह जाएगा, नहीं कफन में जेब।
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
kattupaya s
one of my Tamil short story "madumitha velaiku pogiral" will going to be published on matrubharti at 2.15pm on 22/3/2026.please read and expecting all your support
kattupaya s
என்னுடைய சிறுகதையான மதுமிதா வேலைக்கு போகிறாள் நாளை 22/3/26 matrubhatri யில் 2 15 pm வெளியாக உள்ளது. தவறாமல் வாசிக்கவும்.
Anjana Vyas
*मेरे पुरखो की सैकड़ों साल पहले की गई भविष्यवाणी -जब आएगा बीसा मोहम्मद रहेगा, ना ईसा।
संक्षेप में --युधिष्ठिर संवत् 5164 !! विक्रमसंवत 2077 - 57= 2020 ईस्वी सन् कोरोना और विक्रम संवत 2083- 57= 2026 ईस्वी स्थितियाँ !! आगे-आगे देखिये होता है क्या?
**अनंत कुमार व्यास मारवाड़ी **
- Anjana Vyas
mohansharma
वो अपने में खूब राज छुपाए बैठा था मोहन..
जो अपने आप को खुली किताब कहता था.
Chaitanya Joshi
ક્યારેક કવિના હૃદયને મળી જુઓ.
ને ધબકારા એના સાંભળી જુઓ.
ગાતું હૃદય ધરાવે છે કવિ મહાશય,
ક્યારેક લાગણીને સમજી જુઓ.
વહેતી ગંગા સમું ઉર છે એનું સદા,
ક્યારેક શબ્દો દ્વારા માણી જુઓ.
તમને ભોળું બાળક યાદ આવશેને,
એના દૈવતને કદી પીછાણી જુઓ.
શારદા વસી હશે એના શબ્દોમાં,
આવા કવિત્વને બિરદાવી જુઓ.
-ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.
Ajit
કવિતા દિવસની ખુબ ખુબ શુભેચ્છાઓ......😭🙏🙏🙏💐💐💐
Mukteshwar Prasad Singh
हर सांस में खुश्बू
हर आती जाती सांसों में, तेरी खुश्बू ही आती है।
वो बार बार तड़पाती है यादों की धूंध मिटाती है।
अनगिन कांटे हैं चुभी हुईं, अनगिन घावें हैं हरी अभी।
फिर भी तेरे स्पर्शों से, हर दर्द खुशी बन जाती है।
जिस रस्ते पर हैं चले साथ,जिन वादों की कस्में लिये हाथ।
बिखरे टूटे उन कस्मों से,तेरे आने की आहट आती है।
सूखी सूखी तेरे ओठों पे,कब खुशी की लाली आएगी।
कब दौड़ कर तू आ जाएगी,हर क्षण आभास कराती है।
*मुक्तेश्वर मुकेश
कविता दिवस,21 मार्च 2026
- Mukteshwar Prasad Singh
Rahul Raaj
मुझे तुमसे गले मिलना है और बहुत देर तक मिलना है,
जहाँ साँसें एक-दूसरे में खो जाएँ जहाँ शब्द अपनी जरूरत खो दें
जहाँ सिर्फ धड़कनों की आवाज बचे और वक़्त भी थम कर बस देखे कि दो लोग कैसे एक दूसरे में घर पा लेते है।
मुझे तुमसे ऐसे मिलना है जैसे कोई थका हुआ परिंदा आखिरकार अपनी शाख ढूंढ ले और फिर उसे उड़ जाने की कोई जल्दी न है
Beyondwords
કોઈને પ્રેમ કરવું,
મંદિરના પગથિયાં ચઢવા જેવું—
દરેક પગથિયે છે આશા, અનિશ્ચિતતા,
અને હૃદયની નાની નાની ઝંખના.
ખબર તો ક્યાં પડે,
કે અંતે ભગવાન મળશે કે નહીં?
તે જ રીતે,
દિલનો દીવો,
જેનાં માટે પ્રગટાવ્યો છે,
તેના સુધી પ્રકાશ પહોંચશે કે નહીં.
તોય છતાં,
હૃદયની અંદર એક અજ્ઞાત શક્તિ,
આગળ ધપાવતી રહે છે—
પૂરી શ્રદ્ધા, પૂરા વિશ્વાસ સાથે,
પ્રેમની નમ્ર યાત્રા આગળ વધતી રહે છે.
પ્રેમ એ ખાતરીનો માર્ગ નથી,
એ તો આસ્થા અને લાગણીઓની મુસાફરી છે
જ્યાં ચમત્કારો પગલાં રૂપે મળે,
અને અંતે સમજાય,
કે ભગવાન મળે કે ન મળે…
પ્રેમ નો અનુભવ થવો જ,
સૌથી મોટો દર્શન છે। .
ભગવાન અને તું બને સરખા છે
એ પણ મારી તારા પ્રત્યે ની લાગણી
ન સમજી શક્યા અને તું પણ
ના સમજી શકી....
@શબ્દો_ની_પાર✍️
Jitendra Singh
समय सबसे पहले हाथ थामता है,
समय सबसे पहले साथ छोड़ता है।
Beyondwords
रहने दो अब…
तुम मुझे पढ़ नहीं पाओगी,
मैं बारिश में गलता हुआ
एक आख़िरी कागज़ हूँ…
जिस पर लिखी हर पंक्ति
भीगकर धुँधली हो चुकी है,
अब तो मेरा नाम भी
पहचान में नहीं आता…
तुम समझती तो बहुत कुछ थी,
पर अब समझने को
कुछ बचा ही कहाँ है…
मैं पूरा का पूरा
बरसात में घुल चुका हूँ।
@beyond_word✍️
Beyondwords
ઘાઘરા ઝૂમે તો પવન પણ શરમાઈ જાય,
તારું રૂપ જોતા ચાંદ પણ છુપાઈ જાય… 🌙
તૂ ફરતી જાય તો ધરતી રાસ રચે,
પગલાં તારા રાતને સુગંધિત કરે હંમેશા… 💫
મારું દિલ ખોવાયું તારા નયનમાં,
જાણે કાજલમાં આખું આકાશ સમાઈ ગયું… 🌌
તું હસે તો દીપક જળે દિલમાં હજારો,
તું ચૂપ રહે તો પણ વાગે સંગીત વારંવાર… 🎶
એ સફેદ ઓઢણી, એ ગુલાબી અદા,
મારું મન હંમેશા તારા રંગમાં રંગાયુ… 💞
હવે કોઈ પળો નહીં, કોઈ ફૂલો નહીં,
ફક્ત તું, તારો સ્પર્શ, અને મારી આંખોમાં તારો જાદૂ રહી ગયો… ✨
@શબ્દો_ની_પાર✍️
archana
दिमाग…
एक ऐसी प्रयोगशाला,
जहाँ सिर्फ विचार नहीं,
पूरी-पूरी दुनियाएँ जन्म लेती हैं।
और जब यही दिमाग किसी लेखक का होता है,
तो ये प्रयोगशाला और भी खास बन जाती है…
लेखक का दिमाग कभी शांत नहीं रहता।
वो हर पल कुछ सोचता है,
कुछ गढ़ता है,
कुछ महसूस करता है…
कभी हँसी के दृश्य बनते हैं,
कभी आँसुओं की कहानी,
कभी एक मासूम किरदार जन्म लेता है,
तो कभी एक दर्द भरी दास्तान।
लेखक जब लिखने बैठता है,
तो वो सिर्फ शब्द नहीं लिखता…
वो अपने दिमाग की प्रयोगशाला में
नए-नए प्रयोग करता है।
सोचता है —
आज कौन सा किरदार जन्म लेगा?
कौन सी कहानी दिलों को छुएगी?
क्या नया होगा, जो पहले कभी नहीं हुआ?
कभी उसका दिमाग उसे आसमान तक ले जाता है,
तो कभी धरती के सबसे गहरे दर्द तक…
कभी वो कल्पना में उड़ता है,
तो कभी हकीकत से लड़ता है।
यही दिमाग की प्रयोगशाला है,
जो मनगढ़ंत कहानियाँ भी बना सकती है,
और सच्चाई को आईना भी दिखा सकती है।
कभी यही दिमाग ओवरथिंकिंग में उलझ जाता है,
पर यही उसकी ताकत भी है…
क्योंकि जो ज्यादा सोचता है,
वही कुछ नया रचता है।
जैसे वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में
नई खोज करता है,
वैसे ही लेखक अपने दिमाग में
नई दुनिया बना देता है।
लेखक का दिमाग ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है…
यहीं से शब्द जन्म लेते हैं,
और शब्दों से कहानियाँ…
और कहानियों से जुड़ती हैं भावनाएँ।
यही प्रयोगशाला एक साधारण इंसान को
“लेखक” बना देती है…
और उसी लेखक के शब्द,
किसी के दिल तक पहुँच जाते हैं। ✨
Imaran
मन करता है तुम्हें नजर में बसा लूँ,
औरों की नजरों से तुम्हें बचा लूँ..
कहीं चुरा ना ले तुम्हें मुझसे कोई,
आओ तुम्हें मैं अपनी धड़कन में छुपा लूँ
🤎💛imran 🤎💛
Gor Dimpal Manish
વિશ્વ કવિતા દિવસ
આ નભ જેટલું વિશાળ મન,
ને એમાં ઊંડા ભાવોના તરંગ.
સમજાય નહીં તોય કહ્યા કરવું
શબ્દોના ગૂંથણમા ભાવોના રંગ
ગઝલ,ગીત કે કવિતા ને હાઈકુ
કળા એ તો સંવેદના માનવીનો.
જય શ્રી કૃષ્ણ
શ્રી
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
Tr. Mrs. Snehal Jani
નથી સીધાં વાક્યો મારામાં,
છતાં વ્યકત કરું ઘણું.
કોઈ રચે મને નાનકડી,
તો કોઈ કરે લાંબી રચના.
થોડામાં ઘણું કહેવાની
ક્ષમતા મારી અજોડ.
હાઈકુ, છંદ, ગઝલ, સોનેટ,
શાયરી, કવિતા નામો મારા.
જેવી કવિની ક્ષમતા,
એવું મારું અસ્તિત્વ.
હું છું વાતો ઘણી કરતી,
લાગણીઓમાં વહેતી એક કવિતા.
વિશ્વ કવિતા દિવસની સૌ કવિઓને શુભેચ્છાઓ💐
महेश रौतेला
भीगे नयनों की बातें हैं
जो दुनिया में रहती हैं,
कुछ हाथ पकड़ कर आती हैं
कुछ पैर छू कर जाती हैं।
*** महेश रौतेला
Raa
mere khud lagaye ped ke amble khane
chalo
Kavyasharma
ठिक से दीदार भी न कर पाए उनका ‚
जिन्हें दिन भर निहरा करते थे ।।
Alfha production house
ch 9 (BEYOND CODE AND LIFE) WILL BE LIVE SOON WITH IN FEW DAYS.
"To my readers and followers, I want to sincerely apologize for the lack of updates and new book chapters lately. Alfha Production House has been facing some significant financial and professional hurdles recently. Navigating these rejections and setbacks has taken a lot of time and energy to resolve. Thank you for your patience and understanding while I work through this—I can’t wait to get back to sharing more stories with you soon."
Siboniso BoyBoy Dlamini
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Dada Bhagwan
व्यावहारिक जीवन में ऐसा कहा जाता है कि हम भगवान के बच्चे हैं और आत्मा भगवान का एक अंश है। यदि सचमुच में हम भगवान के अंश हैं तो फिर आत्मा क्या है? आत्मा की अवस्थाएँ क्या हैं? आइए, जानते हैं आत्मा के बारे में पूज्यश्री दीपकभाई से।
Watch here: https://youtu.be/diWyr3agnYU
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archana
“इल्ज़ाम सारे हम पर ही आए,
और चालें वो चलते रहे…” 😌
Dimple Das
hello everyone what's up I hope you all are doing good ❣️❣️❣️❣️❣️❣️
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And soon I will be posting motivational quotes here as well 🌟🌟
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Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz
shree
એક અણધાર્યા મોડ પર,
ભૂતકાળ સામે આવી ગયો,
તેના હાથમાં અન્યનો સંગાથ ને હોઠે મધુર સ્મિત હતું,
જાણે મારી જિંદગીનો જૂનો અધ્યાય, નવો અર્થ પામી ગયો.
હૃદયના ધબકાર વધ્યા ને નજર સ્થિર થઈ ગઈ પળવાર,
આચનક મળેલો એ આઘાત, મન ને મગજ હલાવી ગયો.
એનો ઉમંગ, મારા એકાંત પર સવાલો અનેક મૂકી ગયો.🥺
shree
એક વળાંક પર એ જૂનો ચહેરો દેખાયો,
જાણે મારો આખો ભૂતકાળ સામે આયો.
સાથે એની મંગેતર ને હાથમાં એનો હાથ હતો,
બંને બહુ ખુશ હતા,
જોઈને એને આમ, મારું હૈયું થોડું હારી ગયું,
કાલે પરીક્ષા છે ને મન મારું ક્યાંક ભટકી ગયું.
વર્ષો પછી જોયો તો પણ એ જ જૂનો અંદાજ,
પણ હવે એની ખુશીમાં મારો ક્યાં કોઈ સાદ?
હવે આંસુ લૂછીને મારે પુસ્તકોમાં ખોવાવું છે,
ભૂતકાળ ભૂલીને મારે મારા ભવિષ્યને સજાવવું છે.(2)
jihan
"તારી મજબૂરી "
મારી એક ભૂલ ની સજા બની તારી મજબૂરી,
આંખોને મારી હંમેશા માટે નમ બનાવી તારી મજબૂરી
તારી સાથે ના મારો છીનવી જાય સમય તારી મજબૂરી ,
સારો એક પળ વીતવા માટે તરસાવે છે તારીમજબૂરી ,
મન ભરીને એક નજર માટે તડપાવે તારી મજબૂરી
સ્મિતમાં પણ તારા વિરહ નું દરદુઃખ આંખમાં આંસુ આપે તારી મજબૂરી
જાન ના સમજ છે તારા હેતને અણસમજ કેમકે તે સમજે છે તારે મજબૂરી
એટલું જ માંગુ છું કે બસ ધીમે ધીમે પણ દૂર થઈ જાય તારી મજબૂરી
✍️ - jihan✍️
Sonam Brijwasi
Sangeeta si ho tum, suron ki pehchaan ho,
Dil ke har kone mein basi ek muskaan ho,
Tumse hi mehfil roshan ho jaati hai,
Tum ho to har pal ek naya armaan ho… 🌸
Anup Gajare
"धपाक"
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ढूंढते हुए पहुंचे थे
अनंत की दीवारों
में बनी सुरंग के रास्ते।
एक गली जिसकी लंबी
सड़क पर हर शाम कोई
अपने पद के चाप पीछे
छोड़ जाता।
मंदिर में ठीक सात बजे
गूंज उठती आरती की
लय।
घंटी के अनुवाद
करना मुश्किल था
सूक्ष्म कण सिमटे
हुए थे हवाओं में।
गरज़ते बादल
तूफान बस थोड़ी देर
पर रुका हुआ कोई मुसाफ़िर था।
किसी देवता की
आरती में खडे
वह बस तालिया पीटते हुए
कर रहा था प्रसाद का इंतजार।
मंदिर चौंकानी हिस्से में
प्रदक्षिणा करते हुए
हर अणु घूम रहा था।
इलेक्ट्रॉन हाथ ऊपर उठाते हुए
प्रोटॉन को छूने की लगातार कोशिश
करते रहे।
आरती के मंत्र
कानों में घूमते हुए
अपनी लकीर खींच रहे थे।
तभी वह विस्तृत
विस्फोट हुआ
पहले रौशनी दिखी थी
या आवाज आई।
न मालूम के बिच में
फंसी भिड़ के किनारे
वह अज्ञात खड़ा था।
उसे पैदल ही
अपना रास्ता प्राप्त करना था।
अगली सुबह
बारिश के चिन्ह
प्रूफ के भीतर बसे थे।
सड़क गिली हो चुकी थी
और मंदिर का हर कोना
अब खंडहर में तब्दील हो चुका था।
कोई बोला बम फूटा
लेकिन मैं जानता हु
ये धमाका वही था
जिससे विश्व का निरन्तर निर्माण हुआ।
दुनिया सिकुड़ गई थी
या फ़ैल रही थी
बचे हुए हिस्से लेकर।
वह धमाका सच था
या वह रौशनी
या आवाज।
कोई ठीक से बोल न सका
बस वजूद को उभरते हुए
राख के नीचे दबी अस्थियों
में जले शरीर उठाये जा रहे थे।
बारिश के कुंद
मौसम में
ये क्या हुआ था
इसका पता अबतक
नहीं हुआ।
राख अभी पूरी तरह ठंडी नहीं हुई थी
उसमें कुछ अंगारे
जैसे यादें
धीरे-धीरे सांस ले रही थीं।
वह अज्ञात
भीड़ के छूटते किनारों से
अंदर की ओर बढ़ा—
जहाँ आवाजें अब नहीं थीं
पर उनकी लहरें
दीवारों से टकराकर
वापस आ रही थीं।
एक टूटी हुई घंटी
मिट्टी में आधी दबी हुई
अब भी हिल रही थी—
किसी अंतिम स्पर्श की तरह।
उसने हाथ बढ़ाया
पर छुआ नहीं,
जैसे उसे डर हो
कि कंपन फिर शुरू हो जाएगा।
हवा में तैरते कण
अब भी गोल-गोल घूम रहे थे
जैसे प्रदक्षिणा अधूरी रह गई हो
और समय
उसी चक्र में अटका हो।
उसने ऊपर देखा—
आसमान वैसा ही था
या शायद थोड़ा और खाली।
बादल जा चुके थे
पर उनकी गूंज
अब भी पसरी हुई थी
हर उस जगह
जहाँ कुछ था…
और अब नहीं था।
एक बच्चा
राख के ढेर के पास बैठा
अपनी उंगलियों से
कुछ बना रहा था—
शायद घर
या शायद वही मंदिर।
वह अज्ञात
उसे देखता रहा
काफी देर तक,
जैसे पहली बार
निर्माण को
विनाश के बाद समझ रहा हो।
“धपाक”
फिर से कहीं भीतर हुआ—
इस बार बिना आवाज के।
उसे लगा
कि इलेक्ट्रॉन अब भी
प्रोटॉन तक पहुँचने की कोशिश में हैं
पर दूरी
पहले से थोड़ी और बढ़ गई है।
या शायद
वे मिल चुके हैं
और वही मिलन
यह सब बना रहा है।
उसने कदम आगे बढ़ाया
गीली सड़क पर
अपना एक निशान छोड़ा—
जो तुरंत ही
पानी में घुल गया।
जैसे
कोई कभी था ही नहीं।
पर फिर भी—
कहीं
किसी अदृश्य रजिस्टर में
वह दर्ज हो चुका था।
मंदिर अब नहीं था
पर उसकी परिक्रमा
अब भी चल रही थी
हर उस कण में
जो हवा में बचा रह गया था।
वह अज्ञात
अब भी चल रहा था—
बिना किसी दिशा के
पर शायद
पहली बार
किसी अर्थ की ओर।
और पीछे
राख के नीचे
कुछ हड्डियाँ
धीरे-धीरे
धूल में बदल रही थीं—
जैसे सृष्टि
फिर से
अपने पहले अक्षर लिख रही हो।
_____________________________________________
Wow Mission successful
Eid Mubarak 😍🌺
Harsh Bhatt
On Yesterday night, I just realised why I'm so borring?
I feel every time I leave every thing what I love and I wish for somebody's happiness and somebody's wish!
" why I don't fight for that things?"
That question hurt me every time and increase anger on myself that turned into self harming like portrait myself like joker.
From now I just do what I want to do and what I wish to do and it's for only myself....
rakesh
: *नव संवत्सर*
सावन बीता भादौ बीता, बीती रातें मावठ की,
कण- कण में मस्ती छाई ,चली हवा बहारों की ||
उषा की लालिमा बनकर,आई भोर मतवाली,
पंथी अपनी राहें भूले, फुल खिले हैं डाली -डाली ||
शान्त सरोवर लहरें शीतल,चहुँदिशि सुगंध बढ़ाए।
साँझ ढली हंसों का जोड़ा, खुशियों की सौगात बढ़ाए ||
नहीं यहाँ घर-बार मेरा, न चाहत मेरी, हजारों की बुनियाद है |
धरती पर लाया नव जीवन, किसने की फरियाद है ||
देख चुका मन कितने पतझर, अब छाई हरियाली है |
मस्त मगन पौधे लहराये, जैसे बजी कहीं शहनाई है ||
मधुर - मधुर भौरों का गुंजन,खिला -खिला आकाश।
इन्द्रधनुष सा नभ पर छाया, माधव बना प्रकाश।।
फूलों की माला लेकर,चाँद आया धरती पर |
उड़ते पंखेरू पनघट देखे,बादल या अंबर पर||
फूलों की दुनिया मे , झूमें पंछी कोयल गाये।
सूरज की किरणे भी, हँसती धरा नहलाये।।
टिमटिमाते ख़ुशी से तारे,रिमझिम-रिमझिम बूंदें आई |
पेड़ों के पत्तों ने मिलकर झूम-झूमकर तालियांँ बजाईं ||
महक उठी चहके चिड़िया, भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
फूलों से है सजी क्यारियाँ, मधुरस पीने को आ रहे हैं।
*राकेश कुमार पंवार*
swarnima varshney
Words written from the heart, now reaching many hearts ❤️
Feeling blessed to be featured again in Dainik Jagran 📰✨
rakesh
*नव संवत्सर*
सावन बीता भादौ बीता, बीती रातें मावठ की,
कण- कण में मस्ती छाई ,चली हवा बहारों की ||
उषा की लालिमा बनकर,आई भोर मतवाली,
पंथी अपनी राहें भूले, फुल खिले हैं डाली -डाली ||
शान्त सरोवर लहरें शीतल,चहुँदिशि सुगंध बढ़ाए।
साँझ ढली हंसों का जोड़ा, खुशियों की सौगात बढ़ाए ||
नहीं यहाँ घर-बार मेरा, न चाहत मेरी, हजारों की बुनियाद है |
धरती पर लाया नव जीवन, किसने की फरियाद है ||
देख चुका मन कितने पतझर, अब छाई हरियाली है |
मस्त मगन पौधे लहराये, जैसे बजी कहीं शहनाई है ||
मधुर - मधुर भौरों का गुंजन,खिला -खिला आकाश।
इन्द्रधनुष सा नभ पर छाया, माधव बना प्रकाश।।
फूलों की माला लेकर,चाँद आया धरती पर |
उड़ते पंखेरू पनघट देखे,बादल या अंबर पर||
फूलों की दुनिया मे , झूमें पंछी कोयल गाये।
सूरज की किरणे भी, हँसती धरा नहलाये।।
टिमटिमाते ख़ुशी से तारे,रिमझिम-रिमझिम बूंदें आई |
पेड़ों के पत्तों ने मिलकर झूम-झूमकर तालियांँ बजाईं ||
महक उठी चहके चिड़िया, भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
फूलों से है सजी क्यारियाँ, मधुरस पीने को आ रहे हैं।
*राकेश कुमार पंवार*
archana
**“कुछ महीने पहले…
मेरे बाल लगभग चले गए थे।
आज छोटे-छोटे बाल वापस आए हैं…
शायद किसी के लिए ये छोटी बात हो,
पर मेरे लिए ये बहुत बड़ी जीत है। ❤️
हाँ, मेरा ट्रीटमेंट अभी भी चल रहा है…
जैसे ही दवाई छोड़ती हूँ,
वही परेशानी फिर लौट आती है—
खुजली, बाल झड़ना, दर्द…
डॉक्टर भी अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं,
पर मैं हार नहीं मानी हूँ।
महंगी दवाइयाँ भी चल रही हैं,
और साथ में लोगों के ताने भी—
पर अब मैंने सीख लिया है,
दर्द से लड़ना… चुप रहकर भी मजबूत रहना।
मेरे बाल अभी थोड़े-थोड़े हैं,
टूटते भी हैं…
लेकिन हर नया बाल मुझे ये याद दिलाता है—
मैं हार नहीं रही, मैं ठीक हो रही हूँ। ✨
एक दिन सब ठीक होगा…
और मैं फिर से मुस्कुराऊँगी,
पूरे आत्मविश्वास के साथ।”** ❤️
Shailesh Joshi
बर्फ जैसी सर्दि हो, आग जैसी गर्मी हो, या फिर हो
जड़ से उखाड़ दे ऐसी हवाओं के साथ गिरती बारिश, ये सब कई सालों तक सहेने के बाद फिर कहीं जाकर, पेड़ पर फल फूल लगते हैं,
क्योंकि...अच्छी फसल ऐसे ही नहीं खिलती,
ठीक उसी तरह
हर बुरे दिन, बुरे वक़्त से लड़ने के लिए
खुद को तैयार रखना पड़ता है,
पसंदीदा जिंदगी ऐसे ही नहीं मिलती. डटे रहेंना पड़ता है.
- Shailesh Joshi
Narayan
भुलाना चाहूँ भी तो कैसे भुलाऊँ तुझे,
तू वो याद है जो हर सांस के साथ आती है।
- नारायण
Soni shakya
हमने तो पूरी शिद्दत से निभाई थी मोहब्बत,
पर किस्मत को मंजूर नहीं था संग..
वह अधूरी सी कहानी आज भी जिंदा है,
जिसमें मैं थी, तुम थे मगर नहीं था..
उस कहानी का कोई अंत..🍁
- Soni shakya
kajal jha
तेरी खामोशी में भी एक अजीब सा शोर है,
जैसे हर लफ़्ज़ में छुपा कोई राज़ गहरा और है।
तू पास होकर भी क्यों इतना दूर लगता है,
शायद ये मोहब्बत नहीं… कोई अधूरा सा दौर है।
- kajal jha
Sanjay Sheth
શબ્દોમાં રહે દિલ, દિલમાં રહે પ્રેમ,
નાની નાની વાતોમાં છુપાયેલું છે હેમ।
સવાર કહે ધીમે થી, “આજ નવું કંઈ કર”,
ગઈકાલ ભૂલીને તું, ખુશીથી આગળ વધ।
રસ્તો જો કઠિન હોય, તો ડરતો નહિ યાર,
હિંમત રાખી આગળ વધ, જીત તારી તૈયાર।
પ્રેમ સૌથી મીઠી વાત, ગુસ્સાથી દૂર રહેજે,
હસીને બધાને મળજે, આનંદથી જીવતો રહેજે।
કવિતા એટલે ભાવ, સરળ શબ્દોનો સંગ,
ઓછા શબ્દોમાં કહી જાય, જીવનનો સારો રંગ।
વિશ્વ કવિતા દિવસ ની હાર્દિક શુભકામના.
Narayan
बेवजह नहीं रोता कोई इश्क में ऐ दोस्त,
जिसे खुद से बढ़कर चाहा हो, वो रुलाता ज़रूर है।
- नारायण
MASHAALLHA KHAN
आप सभी को तहे दिल से ईद मुबारक .
-MASHAALLHA
Riddhi Gori
जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं,
अपनों के अपनों पर यहां इल्जाम बहुत है,
शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं,
लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है.!
- Riddhi Gori💙🤍
archana
**"मेरी आवाज़ शायद इतनी अच्छी नहीं है,
मेरी एडिटिंग भी परफेक्ट नहीं है…
कैमरा भी साधारण है, इसलिए फिल्टर का सहारा लेना पड़ा।
लेकिन… मेरे भाव सच्चे हैं ❤️
मैंने ये वीडियो दिल से बनाई है,
अपनी मन की आवाज़, अपने एहसासों के साथ…
ये मेरी पहली कोशिश है,
तो अगर कहीं कमी रह जाए तो माफ़ कर देना 🙏
बस एक ही चाहत है…
कि आप सबका प्यार और आशीर्वाद मिले,
ताकि मैं और बेहतर बनती जाऊँ।"** ✨
Vrishali Gotkhindikar
. कविता
.हल्ली..हे काय होवुन बसलय बघ...
माझ्या आयुष्यातल्या..प्रत्येक..क्षणावर...
तुझा कबजा झालाय....!!!
सकाळी ऊठल्यापासुन...अगदी रात्री..झोपेपर्यंत...
फक्त... तुझ्याच...आठवणी.....
..तु काय करत असशील......
....तु काय बोलत असशील..
....तु कोणत्या रुपात. कशी दिसत असशील..
..तुझं रुप..तुझं वागणं..तुझं दिसणं..तुझे विचार..
..पुरत..झपाटलय मला...या गोष्टीनी...!!
तुझ्या विचारात..दिवस ..रात्रीचा..पत्ताच लागेना झालाय बघ..!!
लोक म्हणतात..मी सार काही विसरतोय..हल्ली..
पण तुझे विचार..मात्र.. विसरतच... नाहीत ना...!!!!
उद्या...आस्तित्वच..तुझं जर वजा झाल...
माझ्या आयुष्यातुन.......
तर काय होईल ग माझं..!!!!!
.................व्रुषाली..
******१२/१२/११
Vrishali Gotkhindikar
तुझ्या ..डोळ्यात...
...जगताना..तेच तेच जीवनाचे" गाणे..."
..कीती अडचणी..किती संकटांचे.".बहाणे..'.
...हरघडी तर अडवतात..नवे नवे" तराणे.."
सारे,,सारे ..सहन करता करता..मन होते ग केविलवाणे.!
................................तरी पण तुला सांगु...
......................................खुशहाल मी रहातो.
................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो..!!
,,काहीच होत नाही ग आपल्या,, मनासारख..
..सदा वागायच..दुसर्याच्या..मनासारख..
हा काय म्हणेल..?याला काय वाटेल??..विचार कर करुन
..सगळी,..सगऴी..धडपड यातच जाते संपुन..
.....................................तरी पण तुला सांगु..
...................................मनपसंत वागायला पहातो
..................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो..!!!
.पाहीलेली सुंदर ..सुंदर..स्वप्ने..डोळ्या समोर विरुन जातात..
..भेटलेली...आणी ...आपलीशी वाटलेली माणस..
..क्षणार्धात..परकी होवुन जातात..!
.......................................तरी पण तुला सांगु..
..................................पुन्हा पुन्हा नव्या जोमाने उभा रहातो
...................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो!!!
वृषाली **
Saliil Upadhyay
આ વીકેન્ડ સારો જાય એટલે મેં મારી પત્નિને આજે સવારે ચા પીતાં થોડાક રોમેન્ટિક થતાં કહ્યું...
ચા ખૂબ જ સરસ બની છે..આખા શરીરમાં તાજગી આવી ગઈ... માય ડાર્લિગ તું તો હજારમાં એક છે...એમ કહી એક ફ્લાઇંગ કીસ આપી...!
તો કહે બાકીની ૯૯૯ કોણ છે એ કહો...!
તાજગી અને રોમાંસની એક સાથે હવા નીકળી ગઈ...!
તમને કહેવાય નહીં તમે તો તાળી પાડી ખડખડાટ હસવાના છો મને ખબર છે...
હસતા રહો અને મસ્ત રહો
Vrishali Gotkhindikar
“सबब
माझ्या वर खूप “जीव ..आहे तुझा
माहीत आहे मला
पण तुझ्या सबबी तर संपत च नाहीयेत
सकाळी फोन केला तुला
“वाजत च राहतो ..
मग मेसेज येतो
अग कीती गडबड सकाळची
वेळ च नाही झाला फोन उचलायला
दुपारी निवांत वेळी बोलावे वाट्ते पण ..
तुझ्या त्या मिटींग्स
तुझ्या ऑफिसचे प्रोब्लेम
तुला तर डबा पण खायला वेळ नसतो
संध्याकाळी मात्र उचलतोस तु फोन
पण तुझा चिडलेला आवाज .
अग कीती ट्राफिक आहे
कसे बोलणार तुझ्याशी आतां .
रात्रीचा वेळ तर
फक्त तुझ्या “कुटुंबां साठीच असतो ना ..!
रविवार असतो तसा निवांत ..
पण सकाळ पासून तुझे मेसेज वर मेसेज असतात फक्त
भाजी आणायला जातोय् .
मुलांना क्लास ला सोडायचे आहे
........
दुपार तर माझ्याच हातून निसटून जाते
संध्याकाळी ..
आता पाहुणे आहेत
मुलांना बाहेर घेवून जातोय आता
वगैरे वगैरे मेसेज ..च फोन वर धडकत असतात
असेच कीती तरी दिवस संपत असतात ..
तुझ्या वर रागावत नाही मी कधीच ..
पण आता मीच शोधतेय “सबब ..तुला फोन न करण्याची !!
वृषाली
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
मनुज अपयशी है अगर, मिले न उसको मान। वह जीवित है जगत में, पर वह मृतक समान।।
दोहा --456
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-------गणेश तिवारी 'नैश'
N¡k¡t@
Rashtriya bhojan...just for knowledge..
SAYRI K I N G
एक बात तो अब तक समझ नहीं आई
ये आयोडेक्स वाले
लड़की की कमर क्यों दिखाते है
हम लड़कों की कमर क्या सीमेंट से बनी है
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
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aakanksha
अधूरी मोहब्बत
राहुल का जीवन हमेशा शांत और अलग था। स्कूल के गलियारों में लोग उसे देखते, लेकिन कोई उसके दिल की गहराई तक नहीं पहुँच पाता। वह बातों में कम और नजरों में गहरी होती थी। उसके दोस्तों की संख्या कम थी, पर वह जिसे जानता था, उसे समझता था—गहरी समझ, बिना कहे। लोग कहते—“उसका दिल सख्त है, कोई पास नहीं आने देता।”
आकांक्षा पहली बार उसे बारिश के दिन मिली। लाइब्रेरी की खिड़की पर बूंदें गिर रही थीं, और राहुल अपनी किताब में खोया हुआ था। उसकी आँखों में हल्की उदासी थी, जो किसी से साझा नहीं की गई थी। आकांक्षा ने महसूस किया कि उसके भीतर भी कुछ नर्म बचा है, जो किसी को दिखाई नहीं देता।
शुरुआत में, आकांक्षा सिर्फ उसे दूर से देखती। कभी लाइब्रेरी में, कभी बाग़ में। राहुल हमेशा अकेला रहता, पर आकांक्षा की नजरें धीरे-धीरे उसे महसूस करने लगीं।
एक दिन बारिश के बाद, बाग़ की चट्टानों पर हरी घास चमक रही थी। आकांक्षा ने कहा,
“तुम कहते हो दिल सख्त हो गया है, पर मैंने देखा है—बरसात के बाद चट्टानों पर भी हरी ज़िद उग आती है।”
राहुल ने पहली बार उसकी बातों में रुचि दिखाई। उसने पूछा,
“तुम हमेशा इतनी गंभीर बातें क्यों करती हो?”
“क्योंकि मैं देख सकती हूँ कि जो तुम कहते हो, उससे कहीं ज़्यादा कुछ है जो तुम छुपाते हो।”
समय के साथ, आकांक्षा ने राहुल की दुनिया में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई। कभी उसकी पसंदीदा चाय लेकर, कभी उसकी किताबों पर हल्की हँसी छोड़कर। राहुल ने महसूस किया कि उसकी चुप्पियाँ अब अकेली नहीं थीं।
एक शाम, बगीचे की छाया में, आकांक्षा ने कहा—
“अगर इजाज़त हो, तो मैं तुम्हारे दिल में पूरी नहीं, बस अधूरी-सी मोहब्बत बनकर ठहर जाऊँ।”
राहुल ने उसकी आँखों में देखा। कोई दबाव नहीं, कोई मांग नहीं। बस शांति और अपनापन। पहली बार उसने महसूस किया कि किसी के लिए उसका सख्त दिल भी मुलायम हो सकता है।
उनकी मोहब्बत अधूरी थी। कोई वादा नहीं, कोई पूरा होने का दबाव नहीं। सिर्फ थोड़ी-सी नर्मी, थोड़ी-सी उम्मीद, और अधूरी मोहब्बत का सौंदर्य।
आकांक्षा और राहुल की दिनचर्या में छोटी-छोटी बातें शामिल हो गईं। बारिश में भीगकर किताबें पढ़ना, चाय के कप के पास बैठकर खामोशी में बातें करना, और बस एक-दूसरे की उपस्थिति महसूस करना। कभी-कभी वे झगड़ते भी—राहुल की चुप्पियों और आकांक्षा की उत्सुकता के कारण। पर हर झगड़े के बाद उनकी नज़दीकियाँ और बढ़ती।
समय बीतता गया। राहुल ने समझा कि आकांक्षा की मौजूदगी ने उसकी जिंदगी को बदल दिया है। वह अब अकेला नहीं था। उसकी चुप्पियाँ अब खाली नहीं थीं। और आकांक्षा ने समझा कि कभी-कभी मोहब्बत को पूरा करने की ज़रूरत नहीं होती—बस महसूस करने की होती है।
उनकी अधूरी मोहब्बत, उनकी छोटी-छोटी आदतें, उनकी खामोशियाँ, और उनके साझा पल—सबकुछ उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गए।
कभी-कभी, वे बस बगीचे में बैठते और बारिश के बाद की नमी को महसूस करते। राहुल कहता,
“तुम्हारी नमी मेरे भीतर पहुँच जाती है।”
और आकांक्षा मुस्कुराकर जवाब देती,
“बस यहीं, अधूरी मोहब्बत बनकर, ठहर जाओ।”
कभी-कभी अधूरा होना ही सबसे पूरा महसूस होता है। और उनके लिए, यही अधूरी मोहब्बत—सदा के लिए, पर हमेशा अधूरी—सबसे खूबसूरत एहसास बन गई
SAYRI K I N G
उन महिलाओं को भी नवरात्रि की शुभकामनाएं जो हमेशा काली के अवतार में रहती हैं..!!
Chaitanya Joshi
હૃદયના તાર ઝણઝણે અને લખાય કવિતા.
ઉરથી આવે એ આંગણે અને લખાય કવિતા.
ખાટા મીઠા અનુભવો જીવનને ઘડનારા હોય,
જેને બસ પોતાના ગણે અને લખાય કવિતા.
ક્યારેક ફફડે તો ક્યારેક તો થઈને આનંદિત,
અંતર જ્યાં ગણગણે અને લખાય કવિતા.
થાય અનુસંધાન ઈશથી અલ્પ સમય માટે,
એક એક પંક્તિને ચણે અને લખાય કવિતા.
પ્રેરણા પરમેશની પ્રેમથી પેપરે પાંગરતી પૂરી,
સંદેશો એ પ્રભુનો ગણે અને લખાય કવિતા.
-ચૈતન્ય જોષી 'દિપક'પોરબંદર.
Irfan Khan
दोस्तो आज अयान एक नफरत की आग या वजूद की तलाश की दूसरा पार्ट आने वाला है--
अगर आप एक सस्पेंस थिल्रर पढ़ना की शोख रखते है तो आप हमारी प्रोफाइल को फॉलो करे। एक पार्ट के पीछे हमारी 3 दिन की मेहनत होती है दोस्तो!
अगर आप को हमारी कहानी पसन्द आए तो अच्छे रेटिंग दे कर हमारी जोश को और बढ़ाए ताकि हम अयान की जिंदगी के हिस्से को ऐसे ही आगे बढ़ाते रहे।
धन्यवाद।
Irfan Khan
तमाम गिले-शिकवे भुला कर गले मिल जाओ आज,
मोहब्बतों का पैगाम है ईद, इसे खुशी से मनाओ आज।"
आप अभी को हमारी तरफ से ईद की ढेर सारी शुभकामनाएं।
Mara Bachaaaaa
हकीकत और सपनों में
यही तो अंतर है,
आंख खुलते ही
ओझल हो जाते हैं सपने।
- Mara Bachaaaaa
Imaran
aap sabhi dosto ko mere tarf se
id mubarak
pure sal mere se jane anjane se koi
bhol hogai ho to mafi chahta hu
🩵💛❤️🤎imran🩵💛❤️🤎
SAYRI K I N G
जब भावनायें "शुद्ध " हो और मन "पवित्र " हो तो " प्रेम "कभी भटक ही नहीं सकता
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सुकून के पल
सुकून के पल छीन लिये यादों ने l
बहुत इंतजार करवाया है वादों ने ll
मुस्किल से आँख बंध की थी ओ l
नीद उड़ा दी ख्वाबों के जालों ने ll
हुस्न की मल्लिका को देखकर ही l
नशीली महफ़िल सज़ाई साजो ने ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Rashmi .k
“When You Came Like Rain”
You came into my life like silent rain,
Soft, unexpected, yet washing away pain.
No thunder warned me, no storm in sight,
Just gentle drops falling in quiet night.
I didn’t know a heart could feel this way,
Until your words chose my soul to stay.
Like clouds that travel miles apart,
You slowly gathered inside my heart.
Every moment with you feels so new,
Like morning skies touched with dew.
Even silence speaks when you are near,
In every pause, I still hear you clear.
Are you a dream or something true?
A passing breeze… or my forever view?
Because in your presence, I lose all fear,
And find a world where you are here.
Like rain that kisses the waiting earth,
You gave my lonely world new birth.
And if someday you fade away,
Like clouds that never choose to stay…
I’ll still remember every drop, every line,
Because for a moment… you were mine. ❤️
Sonu Kumar
चुनाव आयोग कितना निष्पक्ष है?
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मेरा मानना है कि यदि कोई व्यक्ति भारत के 3 सबसे भ्रष्ट आदमियों की सूची बनाता है तो वह बिना आगे पीछे देखे सीधे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश, चुनाव आयुक्त एवं रिजर्व बैंक गवर्नर का नाम नाम क्रमश: 1, 2, 3 नंबर पर लिख सकता है। पीएम वगेरह जैसे पदों का नाम बहुत बाद में आता है।
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केंचुआ का मुख्य टारगेट भारत में EVM को जारी रखना एवं छोटी पार्टियों के रास्ते में पत्थर फेंकना है, ताकि उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए केंचुआ ने कितने और किस किस तरह के क़ानून छापे हुए है, ये आपको सिर्फ तब ही पता चलता है, जब आप चुनाव लड़ने जाते हो। फिलहाल मैंने निचे केंचुआ की एक हरकत का ब्यौरा दिया है, जिससे आप अंदाजा लगा सकते हो केंचुआ किस तरह काम करता है।
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PMP02* के नेता मोदी साहेब ने 2018 में गेजेट में फाइनेंस बिल का लेबल लगाकर एक इबारत छापी। यह इबारत कहती है कि –
कोई भी भारतीय या विदेशी व्यक्ति बैंक में पैसा जमा करके एवज में इलेक्टोरल बांड ले सकता है, और ये बांड किसी भी राजनैतिक पार्टी को दे सकता है। राजनैतिक पार्टी ये बांड अपने बैंक खाते में जमा करेगी और नियत राशि अमुक पार्टी के खाते में जमा हो जाएगी !!
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी X वालमार्ट या जिंदाल से 50 करोड़ का चंदा लेना चाहती है, और यह भी चाहती है कि वालमार्ट का नाम सामने नहीं आये। तो वालमार्ट बैंक में जाकर 50 करोड़ के इलेक्टोरल बांड खरीदेगा और X को दे देगा। चुनावी बांड प्रोमेसरी नोट की तरह होता है, और इस पर दाता का नाम नहीं लिखा होता। फिर X अपने बैंक को ये बांड देगा और बैंक X के खाते में 50 करोड़ ट्रांसफर कर देगा।
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अब X को अपनी लॉग बुक में सिर्फ यह लिखना है कि उसने 50 करोड़ इलेक्टोरल बांड से प्राप्त किये। X को यह नहीं बताना है कि उसे ये बांड किसने दिए थे !! और न ही केंचुआ उससे पूछेगा कि X को ये बांड किसने दिए थे !!
Now, foreign poll funding won’t be scrutinised
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साफ़ है कि मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको ने इस क़ानून को सिर्फ इसीलिए लागू किया, ताकि बड़ी पार्टियाँ विदेशियों से गुमनाम पैसा ले सके !! और अब वे विदेशियों से पैसा ले भी रहे है।
.
सबूत ?
.
माफ़ कीजिये, लेकिन उन्होंने क़ानून ही इस तरह से बनाया है कि इसका कभी कोई सबूत नहीं जुटाया जा सकता !!
.
मोदी साहेब ने जब यह क़ानून छापा तो PMP01* की नेता सोनिया जी एवं PMP03* के नेता अरविन्द केजरीवाल जी ने भी इस क़ानून का पूरा समर्थन किया था !! यह बिल बिना किसी चर्चा के सीधे पास हुआ। जब यह क़ानून छपा तो पेड मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि, इस क़ानून के आने के बाद राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता आएगी !!!
( PMP01* = में PMP से आशय पेड मीडिया पार्टी है, और 01 कोंग्रेस का कोड है। बीजेपी=संघ का कोड 02 एवं आम आदमी पार्टी का कोड 03 है। पेड मीडिया पार्टी से आशय ऐसी पार्टी से होता है, जो पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के समर्थन में रहती है। पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है, इस बारे में फिर किसी जवाब में। ).
पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले किसी भी बुद्धिजीवी या जीनियस से आप इस बारे में पूछेंगे कि फाइनेंस बिल क्या है, तो वह आपको आज भी यही बतायेगा कि इस बिल से चुनावी भ्रष्टाचार कम होगा, और चंदे में पारदर्शिता आएगी !! पारदर्शिता कैसे आएगी, इस बारे में ये बुद्धिजीवी आपको कुछ नहीं बताएँगे। क्योंकि पेड मीडिया ने भी इन्हें इस बारे में कुछ नहीं बताया है। पेड मीडिया ने इन्हें सिर्फ इतना ही बताया है कि, इससे पारदर्शिता आती है !! बस !!
.
कांग्रेस एवं बीजेपी को 2010 में हाई कोर्ट ने विदेशियों से चंदा लेने का दोषी ठहराया था। तब से इस मामले पर कार्यवाही लंबित थी। अत: मोदी साहेब ने इस क़ानून को भूतलक्षी प्रभाव ( Retrospectively ) के साथ छापा। यदि मोदी साहेब इस क़ानून को 10 साल पीछे जाकर यानी 2008 से भी लागू करते तो कांग्रेस एवं बीजेपी दोनों ही इस भ्रष्टाचार की चपेट में आने से बच जाते। किन्तु कांग्रेस को उनके अन्य पुराने पापो से बचाने के लिए मोदी साहेब और भी पीछे गए !!
.
कितना पीछे ?
.
मोदी साहेब ने इस बिल को 42 साल पीछे जाकर यानी 1976 से लागू किया !! मतलब 2010 में कांग्रेस-बीजेपी ने जो अपराध किया था और जो मामला अभी चल रहा है , वह अपराध अब गैर कानूनी नहीं रह गया है , बल्कि कानूनी हो गया है !! और 1976 के बाद में किये गए ऐसे सभी अपराध भी अब अपराध नहीं रहे !! बताइये !!
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जब मोदी साहेब ने यह क़ानून छापा था तो राईट टू रिकॉल पार्टी ने इस क़ानून का विरोध किया था और उनके कार्यकर्ताओ ने पीएम को ट्विट भेजे थे कि इस बकवास क़ानून को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। किन्तु उन्होंने इस क़ानून को जारी रखा।
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अब 2020 में केंचुआ एवं पेड मीडिया की हरकत देखिये :
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आज से 4 दिन पहले यानी 10 फरवरी 2020 को पेड नेशनल हेराल्ड एवं Paid The Print ने यह खबर लगाईं कि – चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बांड से पैसा जुटाने वाली जिन पार्टियों की सूची का एफिडेविट दिया है उनमे राईट टू रिकॉल पार्टी का नाम भी है !!
Unrecognised parties receive funds via electoral bond scheme
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These parties don't have a fixed symbol but still got cash through electoral bonds
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They include Sabse Badi Party, Rashtriya Peace Party, Hindustan Action Party, Nagarik Ekta Party, Bharat Ki Lok Jimmedar Party, Vikas India Party and Right to Recall Party, according to a submission made by the Election Commission (EC) in the Supreme Court this week.
A registered but unrecognised political party cannot contest elections on a fixed symbol of its own. It chooses from a list of symbols the Election Commission provides. This makes it difficult to track the electoral history of such parties.
सुप्रीम कोर्ट में केंचुआ (EC) द्वारा प्रस्तुत एफिडेविट के अनुसार, इसमें सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रीय शांति पार्टी, हिंदुस्तान एक्शन पार्टी, नगरिक एकता पार्टी, भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी, विकास इंडिया पार्टी और राइट टू रिकॉल पार्टी शामिल है।
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पेड नेशनल हेरल्ड एवं पेड द प्रिंट ने हवाला दिया है कि, केंचुआ ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया है। अब या तो केंचुआ का यह शपथपत्र पूरी तरह से झूठा है, या फिर पेड नेशनल हेरल्ड एवं पेड द प्रिंट को झूठी खबर लगाने के लिए भुगतान किया गया है।
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सबूत ?
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क्योंकि राईट टू रिकॉल पार्टी के पास कोई बैंक खाता नहीं है। और पार्टी के पास पहले भी कोई खाता नहीं रहा है। RRP ने आज तक कभी भी कोई बैंक एकाउंट नहीं खुलवाया। यह पार्टी पैसो का कोई लेनदेन करती ही नहीं है। जब से पार्टी बनी है, तब से पार्टी के पास शून्य रूपये है। कोई बैंक खाता नहीं, कोई एनजीओ नहीं, कोई ट्रस्ट नही, कोई चंदा नहीं , कोई कैश नहीं। राईट टू रिकॉल पार्टी ने आज तक कभी किसी भी रूप में कोई चंदा भी नहीं लिया है !!
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और यह बात केंचुआ को भी मालूम है कि, राईट टू रिकॉल पार्टी के पास न तो कोई खाता है, और न ही इनके पास पैसा है। कैसे ?
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यदि पार्टी किसी चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारती है तो उन्हें ऑडिट करके चुनावी खर्चे का हिसाब केंचुआ को भेजना पड़ता है। तो हर विधानसभा में चुनाव में RRP पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ते है, और फिर केंचुआ को हिसाब भी भेजा जाता है। अभी तक जितनी भी बार उन्हें हिसाब भेजा गया है, उसमे राईट टू रिकॉल पार्टी की सभी एंट्रियाँ शून्य, शून्य, शून्य या Nil, Nil Nil होती है। और हिसाब की लॉग बुक में लिखा जाता है कि – कोई बैंक खाता नहीं, कोई अनुदान नहीं, कोई चंदा नहीं, कोई नकदी नहीं !!
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और RRP अभी तक इस तरह 4 चुनावों का हिसाब भेज चुकी है। RRP के उम्मीदवारों को चुनाव खुद के खर्चे पर लड़ना होता है, और उन्होंने जितना खर्चा किया उसका हिसाब एक उम्मीदवार के रूप में वे सीधे केंचुआ को भेजते है।
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इलेक्टोरल बांड को भुनाने के लिए इसे एकाउंट में जमा करना होता है। जब पार्टी के पास बैंक खाता ही नहीं है तो फिर पार्टी इलेक्टोरल बांड को कहाँ जमा करेगी, और कहाँ से पैसा लेगी !! बताइये !!!
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यह खबर क्यों लगवायी गयी ?
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इसके पीछे 2 वजहें है :
1. छवि ख़राब करना : कुछ 40 से 50 लाख पाठको तक उन्होंने यह जानकारी पहुंचा दी है कि इन लोगो को गुमनाम पैसा मिल रहा है। और पाठको की खोपड़ी में यह कील भी ठोक दी है कि, बड़ी पार्टियों को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिले तो कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि उन्हें तो ट्रेक किया जा सकता है। पर जिन पार्टियों को परमानेंट सिम्बल नहीं मिला है उन्हें ट्रेक नहीं किया जा सकता, अत: यदि छोटी पार्टियों को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिले तो यह खतरनाक है !!
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खबर को फिर से पढ़ें कि इसे किस तरह ड्राफ्ट किया गया है --
A registered but unrecognised political party cannot contest elections on a fixed symbol of its own. It chooses from a list of symbols the Election Commission provides. This makes it difficult to track the electoral history of such parties.
एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल अपने स्वयं के निर्धारित प्रतीक पर चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह केंचुआ द्वारा प्रदान किए गए प्रतीकों की एक सूची चिन्ह चुनता है। इससे ऐसी पार्टियों के चुनावी इतिहास को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
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( स्थायी चुनाव चिन्ह हासिल करने के लिए किसी राज्य या लोकसभा चुनाव में कुल मतों के 5% वोट लाने होते है !! )
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मतलब, न्यूज पाठक के दिमाग में यह बात डालती है कि यदि मान्यता प्राप्त पार्टी को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिलता है तो कोई भ्रष्टाचार नहीं होता है, किन्तु छोटी पार्टियों को यदि बांड से पैसा मिले तो यह दुरूपयोग है !! क्यों ? क्योंकि स्थायी चिन्ह नहीं होने के कारण इनके इतिहास को ट्रेक नहीं किया जा सकता !! मतलब क्या है इस बात का !!
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सभी रजिस्टर्ड पार्टियों की पूरी कुंडली केंचुआ के पास रहती है। 800 पेज का एप्लीकेशन जमा करना पड़ता है, तब जाकर वे साल भर में पार्टी को रजिस्टर्ड करते है। कौन पार्टी कितने उम्मीदवार उतार रही है, कहाँ से उतार रही है, सब की सूचना देनी होती है। हर उम्मीदवार को 28 पेज का एफिडेविट देना पड़ता है। चुनाव के दौरान दिन में 2 बार केंचुए को रिपोर्ट करना पड़ता है।
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क्या पेम्पलेट छपवा रहे हो, किधर प्रचार कर रहे हो इत्यादि प्रकार की सभी सूचनाएं देनी होती है। इन सब से वो ट्रेक नहीं कर सकते !! लेकिन स्थायी सिम्बल मिलने के बाद वे ट्रेक कर लेंगे !! तो ठीक है, 5% वोट लाने का क़ानून निकाल दो और रजिस्टर्ड पार्टियों को परमानेंट सिम्बल दे दो, ताकि छोटी पार्टियों को भी ट्रेक कर सको। पर ऐसा तो उनने करना नहीं है !! क्योंकि इससे बड़ी पार्टियों की ताकत कम हो जायेगी।
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और PMP02 एवं PMP01 के पास तो परमानेंट सिम्बल है न, तो बताओ PMP02 को पिछले साल जो 950 करोड़ और PMP01 को जो 150 करोड़ का चंदा इलेक्टोरल बांड से मिला है, उसका सोर्स क्या है ? कौनसा अखबार या केंचुआ बतायेगा कि PMP01 एवं PMP02 ये 1100 करोड़ किधर से लेकर आई है !! ट्रेक करो और बता दो !! है हिम्मत ?
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2. टाइम ख़राब करना : अभी एक लेटर केंचुआ को लिखना पड़ेगा और एक-एक लेटर पेड नेशनल हेरल्ड एवं Paid The Print को भी लिखना पड़ेगा। मतलब 12 से 14 घंटें तो इसमें ही फुंक जायेंगे। केंचुआ की यह सबसे मुख्य नीति है, छोटी पार्टियों के प्राण पीने की। वो हर महीने किसी न किसी टाइप का एक पटाका फेंकता रहता है, ताकि टाइम चूसा जा सके। वे जानते है कि, छोटी पार्टियों के पास स्टाफ वगेरह नहीं होता, तो वे उन्हें इस तरह के क्लर्की वर्क में उलझाकर रखते है। अब केंचुआ तो इस तरह के पुरजो का कोई जवाब भेजता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट जायेंगे तो वहां इनके भी बाप बैठे हुए है।
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इसके बाद राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ताओं को आगे भी हमेशा के लिए यह स्पष्टीकरण देते रहना पड़ेगा कि, RRP को इलेक्टोरल बांड से कोई पैसा नहीं मिला। लेकिन ज्यादातर लोग RRP की बात का विश्वास नहीं करेंगे। वे केंचुआ, नेशनल हेरल्ड की बात को ही विश्वसनीय मानेंगे। तो RRP के कार्यकर्ताओ को अब आने वाले कई सालों तक भी लगातार यह स्पष्टीकरण देते रहना पड़ेगा !! और इसमें RRP के कार्यकर्ताओ के लाखों घंटे बर्बाद होते रहने वाले है !!
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बुद्धिजीवी यह तर्क देंगे कि आप लोग केंचुआ एवं मीडिया हाउस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नही गए, मानहानि का दावा क्यों नहीं किया आदि। पर बुद्धिजीवियों को इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट में पाँव रखने में भी 25 हजार का खर्चा हो जाता है, जो कि छोटी पार्टियों के लिए एक बड़ी राशि होती है।
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भारत में 3 संस्थाएं ऐसी है जो 1950 से ही अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के कंट्रोल में रही। 2002 तक यह नियंत्रण बढ़ता-घटता रहा, किन्तु पेड मीडिया की शक्ति बढ़ने के कारण आज यह निर्णायक स्तर तक बढ़ गया है। इन तीनो संस्थाओ के मुखिया की नियुक्ति अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों यानी कि पेड मीडिया के प्रयोजको से कंसल्ट करने के बाद की जाती है। यदि पीएम इन 3 संस्थाओ को कंट्रोल करने की कोशिश करेगा तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों एवं पीएम के बीच तनाव बढ़ जाएगा, और वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करके पीएम को गिराने की कार्यवाही करना शुरू कर देंगे। ये तीन संस्थाएं है :
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायधीश
चुनाव आयुक्त
रिजर्व बैंक गवर्नर
इन तीनो संस्थाओ के पास पीएम को डिस्टर्ब करने और यहाँ तक की गिराने की ताकत भी है।
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने पेड मीडिया के माध्यम से इन तीनो संस्थाओ का ऐसा हव्वा खड़ा किया हुआ है कि न तो इन संस्थाओ के मुखिया पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा सकता है, न ही इनके खिलाफ कभी कोई जांच खोली जा सकती है, न ही इन्हें दण्डित किया जा सकता है।
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यदि पीएम इनसे पंगा लेने जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों द्वारा नियंत्रित पेड मीडिया इन 3 संस्थाओ के साथ खड़ा हो जायेगा और पूरे देश में इस तरह का ड्रामा स्टेज किया जाएगा कि पीएम इन “निष्पक्ष एवं संवैधानिक” संस्थाओ को दबाने या नियंत्रित करने के प्रयास कर रहा है, और पीएम की यह हरकत लोकतंत्र की हत्या है, असंवैधानिक, है आदि आदि !!
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और उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम से नागरिको के दिमाग में भी यह बात बहुत अच्छी तरह से डाली हुई है कि ये संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षक है, इन पर हमला करना मतलब संविधान पर हमला है, आदि आदि, और इसी टाइप की फालतू बातें। तो जब भी पीएम एवं इन संस्थाओं के बीच आपस में टकराव आएगा तो पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित सभी बुद्धिजीवी इन संस्थाओ के समर्थन में चले जाते है। केंचुआ एवं भ्रष्ट जजों का इस्तेमाल करके पीएम को गिराने का एक अच्छा उदाहरण आप इस जवाब में पढ़ सकते है – क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं?
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केंचुआ किस तरह पीएम एवं अन्य राजनैतिक दलों को कंट्रोल करता है ?
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पहली बात तो अकेला केंचुआ अपने बूते पर पीएम का कुछ उखाड़ नहीं सकता। किन्तु पेड मीडिया के प्रायोजक केंचुआ+सुप्रीम कोर्ट+पेड मीडिया की सहायता से पीएम को 3 दिन में जमा कर सकते है। वे ऐसा कैसे करते है और कैसे कर सकते है, इसका जवाब बहुत लम्बा हो जाएगा। अत: निचे मैंने इसे संक्षेप में बताया है।
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EVM पर कंट्रोल : पेड मीडिया द्वारा EVM के बारे में नागरिको को काफी अफीम पिलाई गयी है। पेड मीडिया द्वारा इसमें से एक सबसे बड़ा झूठ यह है कि PMP02 पार्टी EVM को हैक करके चुनाव जीतती है !! यह एकदम बकवास आरोप है ।
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(a) असल में पीएम कभी भी EVM को कंट्रोल नहीं कर सकता।
चुनावों की घोषणा होने के बाद पीएम केंचुआ के दफ्तर में न तो कदम रख सकता है, न ही उन्हें कोई निर्देश दे सकता है !! केंचुआ पूरी तरह से पीएम के कंट्रोल से बाहर होता है। निम्नलिखित फैसले सिर्फ केंचुआ लेता है और पीएम का इसमें शून्य दखल होता है :
EVM का डिजाइन केंचुआ तय करता है
EVM कहाँ बनेगी केंचुआ तय करता है
EVM कहाँ स्टोर होगी केंचुआ तय करता है
इसके ट्रांसपोर्टेशन का ठेका किस कम्पनी को जाएगा, केंचुआ तय करता है
यदि EVM में वोटो की हेराफेरी का कोई आरोप है, तो खुद की जांच भी केंचुआ खुद ही करता है, और खुद को क्लीन चिट भी जारी करता है !!
EVM के बारे में पीएम कोई जांच नहीं खोल सकता।
यदि पीएम केंचुआ से EVM का डिजाइन मांगे तो केंचुआ नहीं देगा
पीएम के पास केंचुआ का सिर्फ यह इलाज है कि, पीएम सुप्रीम कोर्ट के पास जा सकता है। किन्तु यदि सुप्रीम कोर्ट और केंचुआ एक ही पाले में है तो पीएम के हाथ में कुछ नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट केंचुआ से भी आगे की आयटम है, और पीएम के काबू से बाहर है। कैसे ?
सुप्रीम कोर्ट अपनी नियुक्ति खुद ही करता है। और खुद की नियुक्ति खुद करने की इस प्रक्रिया पर आपको आपत्ति है तो इसकी अपील भी खुद सुप्रीम कोर्ट में ही होती है। मतलब वे खुद के मुकदमे खुद ही सुनते है और खुद ही खुद को बरी कर देते है !!
यदि पीएम कोई क़ानून छापता है तो सुप्रीम कोर्ट के पास अमुक क़ानून को केंसल करने की संवैधानिक शक्ति है
सुप्रीम कोर्ट पीएम के खिलाफ कोई भी जाँच खुलवा सकता है, और पीएम के खिलाफ जांच करने वाली एजेंसी यानी सीबीआई को सीधे अपनी निगरानी में ले सकता है।
सुप्रीम कोर्ट पीएम के खिलाफ कोई भी मुकदमा स्वीकार करके पीएम को दोषी ठहरा सकता है, और पीएम को जेल भी भेज सकता है !!
सुप्रीम कोर्ट पर कोई आरोप भी नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाना भी गैर कानूनी है !! मतलब वे अवमानना के मामले में आपको जेल में डाल देते है !!
सार यह है कि, पीएम केंचुआ से इसीलिए नहीं भिड़ सकता क्योंकि केंचुआ के पीछे एनाकोंडा खड़ा है । और जैसे ही पीएम केंचुआ एवं सुप्रीम कोर्ट से टकराव लेगा वैसे ही पेड मीडिया के प्रायोजको से इशारा मिलने के बाद देश के सभी पेड पत्रकार, पेड संपादक, पेड बुद्धिजीवी, सभी राजनैतिक पार्टियो के नेता पीएम पर आरोप लगाना शुरू कर देंगे, कि पीएम संवैधानिक संस्थाओ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है !!
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दुसरे शब्दों, में पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में EVM को जारी रखना चाहते है, ताकि EVM के माध्यम से पीएम एवं अन्य राजनैतिक पार्टियों के नेताओ की घड़ी दबाकर रखी जा सके। केंचुआ एवं सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से वे EVM को कंट्रोल करते है और EVM के माध्यम से नेताओं को। और पेड मीडिया के माध्यम से ही वे आपको यह पुड़िया देते है कि, पीएम EVM को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है !! जबकि सच यह है कि पीएम तो खुद EVM का विक्टिम है !!
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वे अपनी सभी प्रायोजित पार्टियों को समय समय पर साँसे देकर एक संतुलन बनाकर रखते है। यदि PMP02 कंट्रोल से बाहर जाने लगेगी तो वे EVM का इस्तेमाल करके PMP03 का वोट शेयरिंग बढाने लगेंगे, और PMP03 उनके एजंडे से बाहर जायेगी तो फिर से PMP01 का वोटिंग काउंट बढ़ने लगेगा। 2023 तक पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे PMP03 को राष्ट्रिय स्तर पर स्थापित कर देंगे और तब PMP03 2024 के चुनावों में PMP02 के नेताओं के लिए किल स्विच का काम करेगी।
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(b) EVM को हैक किया जा सकता है।
यह दूसरी बकवास है जिसे पेड मीडिया द्वारा EVM मुद्दे की बैंड बजाने के लिए फैलाया गया है। सच्चाई यह है कि, EVM एक इलेक्ट्रोनिक डिवाइस है, और यह उसी के इशारों पर काम करती है, जिसने इसे प्रोग्राम किया हो। मतलब EVM को प्रोग्राम किया जा सकता है, किन्तु इसे हैक नहीं किया जा सकता
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EVM की प्रोग्रामिंग केंचुआ करता है, अत: EVM ठीक उसी तरह से काम करेगी जिस तरह केंचुआ चाहेगा। उन्होंने प्रोग्रामिंग शब्द को साइड में करने के लिए हैकिंग शब्द को इस तरह से फैलाया जिससे लगे कि जिस तरह इंटरनेट में हैकिंग होती है, उसी तरह से EVM भी हैक हो सकती है। जो कि एक झूठी बात है। यह थ्योरी इसीलिए गढ़ी गयी ताकि इस तथ्य को चर्चा से बाहर रखा जा सके कि केंचुआ खुद ही EVM में वोटो की हेरा फेरी करता है, और केंचुआ के अलावा यह हेरा फेरी और कोई कर भी नहीं सकता।
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(c) केंचुआ जब बुलाता है तो कोई EVM का कोई हैकर नहीं जाता।
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केंचुआ न तो EVM खोलने देता है, और न ही इसका डिजाइन देता है। केंचुआ का स्टेंड रहता है कि EVM में प्रोग्राम मेरा रहेगा और तुम EVM को हैक करके दिखाओ !! चूंकि केंचुआ EVM को खोलने नहीं देता, अत: कोई भी इंजीनियर उसके चेलेंज में नहीं जाता है। और इंजीनियर्स को जादू आता नहीं है !!
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इस वीडियो में सोफ्टवेयर इंजीनियर राहुल मेहता जी ने जन्तर मंतर पर पब्लिक डेमो में बताया है कि, EVM में केंचुआ कैसे धांधली करता है। कृपया वीडियो देखें - https://www.youtube.com/watch?v=jnazWH5715Q&fbclid=IwAR3odKoAuVCl7B1-lfSa0pjvMkxO7c5ew8ddS2rNY-wnHO3dxp5WP8YD08o
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केंचुआ किस तरह EVM में वोटो की हेराफेरी करता है इस बारे में यह जवाब पढ़ें – Pawan Kumar Sharma का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है?
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समाधान ?
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(1) पेड मीडिया द्वारा इस तरह की फर्जी ख़बरें छापने एवं केंचुआ द्वारा इस तरह के झूठे एफिडेविट देने जैसी हरकतें रोकने के लिए जूरी कोर्ट की जरूरत है। अभी पेड मीडिया कुछ भी उल्टा पुल्टा छाप सकता है, क्योंकि उन्हें पता है कि कोई सजा तो होने वाली नहीं है। जूरी कोर्ट आने के बाद इस तरह के मामलो की सुनवाई नागरिको की जूरी करने लगेगी, अत: पेड मीडिया एवं केंचुआ इस तरह की हरकत करने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
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(2) हमें EVM केंसल करके बेलेट पेपर की तरफ लौट आना चाहिए। जब तक भारत में EVM शुरू रहेगी तब तक पीएम एवं सभी राजनैतिक पार्टियाँ पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढाने के लिए बाध्य है। यदि वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाएंगे तो पेड मीडिया EVM का इस्तेमाल करके उन्हें चुनाव हर देगा।
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पेड मीडिया के प्रयोजको का एजेंडा क्या है, और कैसे वो भारत के पीएम को कंट्रोल करते है इस बारे में विस्तृत रूप से मैं फिर किसी जवाब में लिखूंगा।
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aakanksha
देखा उसे जब पहली बार, गुस्से का पारा चढ़ा हुआ था,
चेहरे पर सख्ती ऐसी थी, जैसे हर लम्हा अड़ा हुआ था।
आंखों में उसकी अजीब सी, एक चुभन सी झलक रही थी,
पर जाने क्यों उस चुभन में भी, एक कहानी छुप रही थी।
भौंहें तनी, लब खामोश थे, पर दिल कुछ कह जाता था,
उसका हर एक अंदाज़ मुझे, अपनी ओर खींच जाता था।
ना हंसी, ना कोई बात, बस खामोशी का साया था,
फिर भी उस अनजाने चेहरे में, कुछ अपना सा पाया था।
शायद वो गुस्सा झूठा था, या दिल कहीं टूटा होगा,
उसकी उस खामोशी के पीछे, कोई दर्द जरूर छुपा होगा।
अजीब सा रिश्ता बन गया, पहली ही उस मुलाकात में,
गुस्से वाला वो चेहरा बस, बस गया मेरी हर बात में।
कभी सोचा ना था ऐसा भी, कोई दिल को भा जाएगा,
गुस्से में भी कोई इतना, खास नजर आ जाएगा।
आज भी याद है वो पल, जब पहली बार देखा था,
उसके गुस्से में ही मैंने, अपना सुकून लिखा था। ✨
ziya
बदलते हुए मौसम और बदलता हुआ इंन्सान
बहुत कुछ सीखा देता है 💯💯💯💯💯💯
ziya
अकेले चलना सिख लो क्योंकि
सहारा कितना भी सच्चा हो
एक दिन साथ छोड़ ही देता है
Bhavna Bhatt
મારું મણિનગર
Beyondwords
દુખમાં માણસ એકલો જ હોય છે,
પણ નિર્ણય લે ત્યારે ભીડ ઊભી થઈ જાય છે.
સલાહ આપનારા બહુ હોય છે,
પણ દુખ વહેંચનારા બહુ ઓછા.
આથી જીવન પોતાના વિચારથી જીવવું પડે,
કારણ કે રસ્તો પણ આપણો છે
અને સંઘર્ષ પણ આપણો જ છે.
@શબ્દો_ની_પાર
Beyondwords
पानी में रहो, मगर ग़म को छूने न दो,
कमल-सा खिलो, कीचड़ को छूने न दो।
दुनिया की हवाओं में झोंके तो लाख हों,
दिल की रौशनी को कभी बुझने न दो।
रिश्तों के समंदर में डूबे रहो सदा,
मगर नफ़रत की लहरों को छूने न दो।
गंदगी जहाँ भर गई उस जहाँ में भी,
ख़ुद की ख़ुशबू को फीका होने न दो।
@beyond_word
Vartikareena
प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः — एक झलक
mohansharma
इश्क़ में मोहन जिसने भी चोट खाई है..
शायरी बस उसी के समझ में आई है..
N¡k¡t@
ye sach he....yaa nhi...??🤔..me confusion me hu....
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
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Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
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ek archana arpan tane
માણસ પોતાની નજર માં સાચો હોવો જોઇએ નહીંતર દુનિયા તો ભગવાન થી પણ દુખી જ છે.
- ek archana arpan tane
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SAYRI K I N G
आंटी को अपने से आधी उम्र का लड़का चाहिए
और लड़की को पैसे वाला अंकल चाहिए...
आज कल ऐसे ही केस में उलझा हुं
अब उलझू या सुलझू
Tr. Mrs. Snehal Jani
નાની અમસ્તી હું,
કરતી ચીં ચીં આખો દિ'.
જોઈએ મને જરા અમસ્તી જગ્યા,
રહી લઉં નાનકડાં માળામાં.
જોખમમાં છે અસ્તિત્વ આજે,
મારા આખાય સમાજનું.
કરું વિનંતિ ઓ માનવી તને,
બચાવી વૃક્ષો અને પર્યાવરણ,
અટકાવી દે અમને લુપ્ત થતાં!
વિશ્વ ચકલી દિવસે એક ચકલીની માનવી સમક્ષ વ્યથા.
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