Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
kattupaya s
My novel yadhumatra peruveli last part 24 will be published on 12/1/26 @10am.please don't miss the final part. goodnight friends
vikram kori
“शिव का वैराग्य पार्वती के प्रेम से पूर्ण हुआ,
और पार्वती का समर्पण शिव की साधना में अमर बन गया।
जहाँ त्याग और प्रेम एक हो जाएँ,
वही शिव–शक्ति का सच्चा संबंध है।”
- vikram kori
उषा जरवाल
उन्मुक्त पंछी
उन्मुक्त पंछी वह नहीं, जो केवल आकाश में उड़ता है,
उन्मुक्त वही है, जो बंधन की कल्पना से भी मुक्त होता है।
जिसकी दृष्टि अवरोधों पर नहीं, शिखरों पर टिकी रहती है,
जिसकी चेतना भय की छाया को तिरस्कृत कर देती है।
आँधियाँ उसके पंखों को थकाने आती हैं,
पर वह उन्हें साधकर अपनी दिशा रच लेता है।
प्रहार उसे विचलित नहीं करते,
वे तो उसके संकल्प को और कठोर बनाते हैं।
वह गिरता है, टूटता है, फिर भी उठ खड़ा होता है,
क्योंकि उसकी आत्मा समझौते की भाषा नहीं जानती।
न पिंजरे की सुविधा उसे लुभाती है,
न सुरक्षित नीड़ उसे रोक पाता है।
उसकी उड़ान प्रश्नों से नहीं, उत्तरों से जन्म लेती है,
और उसका लक्ष्य क्षितिज नहीं—शिखर होता है।
जो हर बाधा को लाँघकर भी अपनी पहचान न खोए,
वही उन्मुक्त पंछी स्वतंत्रता का जीवंत घोष है।
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
उषा जरवाल
उन्मुक्त पंछी वह है, जो बंधन-भ्रम का त्याग कर देता है,
अपनी चेतना से भय और विघ्नों को लाँघ आगे बढ़ जाता है।
आघातों की ज्वाला में तपकर भी जिसकी उड़ान अक्षुण्ण है,
वह प्रत्येक अवरोध को तिरस्कृत कर शिखराभिमुख है।
जिसका संकल्प ही आकाश हो,
उसकी स्वच्छंद उड़ान ही उसकी पहचान है।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
उषा जरवाल
उन्मुक्त पंछी वह है, जो बंधन-भ्रम का त्याग कर देता है,
अपनी चेतना से भय और विघ्नों को लाँघ आगे बढ़ जाता है।
आघातों की ज्वाला में तपकर भी जिसकी उड़ान अक्षुण्ण है,
वह प्रत्येक अवरोध को तिरस्कृत कर शिखराभिमुख है।
जिसका संकल्प ही आकाश हो,
उसकी स्वच्छंद उड़ान ही उसकी पहचान है।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
kattupaya s
Another century from #Virat kohli loading...Sorry guys
उषा जरवाल
जो वास्तव में अपने होते हैं वो हमारी हर ख़ुशी में शामिल होने के मौक़े ढूँढ़ लेते हैं ।
निमंत्रण की आवश्यकता तो बेगानों को पड़ती है ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
Pithadiya Dhruv
"kis kis ko fictional story pasand hai jara comment karo supporters 👍🏻✨"
kattupaya s
500K downloads for my stories. Thank you readers for your continious support over two years.
Jyoti Gupta
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Soni shakya
"एक चेहरा..
जो आंखों से शुरू हुआ और ,
रूह में उतर गया ❤️"
- Soni shakya
anime lover
आप आए तो मुस्कुराने की वजह मिल गई आप गए तो जिंदगी जीने की सज़ा मिल गई।
- anime lover
anime lover
आप आए तो मुस्कुराने की वजह मिल गई आप गए तो जिंदगी जीने की सज़ा मिल गई।
anime lover
तुझे खुश देखना ही मेरे दिल की आरजू है दुनिया से ये मत कहना कि मैं बेवफ़ा हूं। तूने कहा था इसलिए ही तुझे छोड़ा है, मेरी वफ़ा की कदर करना, मुझे बेवफ़ा मत बनाना।
Fazal Esaf
किमान एखाद्या वळणापर्यंत तरी चालत राहायला हवे
शांततेलाही
कधी तरी आवाज मिळायला हवा,
प्रत्येक प्रश्नाला उत्तर नसेलही
पण एक ठोका तरी ऐकू यायला हवा।
प्रवास लांबचा असेल
तर काय झालं,
पावलांनी
किमान एखाद्या वळणापर्यंत तरी
चालत राहायला हवे।
भीती जर समोर उभी असेल
तर डोळे झुकवून
रस्ता बदलत नाही,
कधी तरी भीतीशीही
डोळ्यांत डोळे घालून
पाहायला हवे।
प्रत्येक लाट समुद्र होत नाही,
प्रत्येक अश्रू कथा सांगत नाही,
पण जे आतून उसळतं
त्याला बाहेर पडायला हवे।
नेहमी जिंकणं आवश्यक नाही,
हार देखील काही अपराध नाही,
फक्त एवढंच पुरेसं आहे
की प्रयत्न
जिवंत राहायला हवेत।
— फज़ल अबुबक्कर एस्सफ
ArUu
एक दिन मैं इस दुनिया के सारे बंधन तोड़ दूंगी
एक दिन मैं वो चुनूंगी
जो मुझे चाहिए
ArUu ✍️
Chaitanya Joshi
હરાય જાય છે આખ્ખેઆખું મન તને જોયા પછી.
ને હવે પથ્થર પણ લાગે છે સુમન તને જોયા પછી.
ખબર ના પડી કે પાનખર ક્યારે ચાલી ગઈ એકાએક,
ને ઓચિંતું થયું વસંત આગમન તને જોયા પછી.
ફરકવા લાગ્યા અંગ દક્ષિણ શુકનને સજાવતા જાણે,
મન પણ સાવ થયું જાણે મગન તને જોયા પછી.
શીતળતા વ્યાપી ગઈ બત્રીસ કોઠે એકાએક કેટલી,
થયું શમન સઘળી ઉરની અગન તને જોયા પછી.
થયા અધીર અધરોષ્ઠ કશુંક કહેવાને તલપાપડ રખે,
મહેંક રહી પ્રસરી કેવી ટનાટન તને જોયા પછી.
સ્નેહ એ સ્નેહ રહ્યો શબ્દ ના બની શક્યો બિચારો,
એના પગે જાણે મણનાં વજન તને જોયા પછી.
દેખાયું હાથવેંત ઇપ્સિતનું એકરારનામું વર્ષોથી ચહ્યું,
કરી રહ્યું હૈયું વિનસને કેવું નમન તને જોયા પછી.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
kattupaya s
#Virat playing like a warm up game. #Nz is out of bowlers #cricket
Raj Brahmbhatt
“ज़िंदगी: एक छोटी-सी यात्रा” 🍂⌛✨
https://whatsapp.com/channel/0029VbBgJYA1SWt3jmeneP2I
Sonam Brijwasi
संगीत वो दवा है जो हर दर्द मिटा देता है,
टूटे हुए दिल को भी फिर से जीना सिखा देता है।
लफ्ज़ कम पड़ जाएँ जब जज़्बात बताने में,
तब साजों का हर सुर दिल की बात सुना देता है। 🎶🎵
- Sonam Brijwasi
Nisha ankahi
एक मुस्कान ही माँगी थी ज़िंदगी से,
बेकार मुझसे लड़ पड़ी ज़िंदगी।
- Nisha ankahi
Nensi Vithalani
😂 રવિવાર – બહાર ન નીકળો તો શંકા! 😂
આજે ટ્રાફિક જોઈને એવું લાગ્યું,
રવિવાર બૈરાઓ માટે સીધો તહેવાર જ લાગ્યો 🚦
સોમથી શનિ સુધી “કાલથી” ચાલે,
રવિવાર આવે એટલે
બધાનું GPS આપમેળે જાગે 📍
રવિવાર એટલે પાણીપુરીવાળાનું ધનતેરસ,
પુરી ઓછી પડે,
પણ લાઈન એવી કે જાણે મફત પ્રસાદ વહેંચાય 😋
રવિવાર એટલે કપડાંની દુકાન પર મહાયુદ્ધ,
લેડીઝ કહે, “બસ એક જ બતાવો,”
એ “એક”માં
દુકાનવાળાનો આખો સ્ટોક બહાર આવી જાય 🤯😂
રંગ બદલો, સાઈઝ બદલો,
“આમાં બીજો શેડ હશે?” —
દુકાનવાળો અંદરથી બોલે,
“હે ભગવાન, આજ તો મારો રવિવાર છે!” 😵💫
રવિવાર એટલે હોટલવાળો ભગવાન,
૮ વાગે પહોંચો,
૯ વાગે પેટપૂજા કરીને
સીધા બહારનો રસ્તો બતાવે 🙏😆
આઈસ્ક્રીમવાળો તો રાત્રે ૧૨ વાગે પણ હીરો,
એના વગર રવિવાર અધૂરો 🍦
એક રવિવાર બહાર ન નીકળીએ તો,
ઘરવાળા પૂછે —
“તબિયત તો ઠીક છે ને?” 😐
બીજો રવિવાર પણ ઘરે રહી જાવ તો,
ટોના, ટિપ્પણી, ઉપાય
બધું એકસાથે શરૂ થઈ જાય 🧿😂
રવિવાર એટલે આરામનો ભ્રમ,
થાક તો ફ્રીમાં સાથે જ મળે 🎁
ઘરે બેસો તો શંકા,
બહાર નીકળો તો ટ્રાફિકમાં જીવનની ટેસ્ટ સિરીઝ! 🚦😂
महेश रौतेला
प्यार की बातों में अजब सी गुमसुदगी थी,
कहाँ-कहाँ ढूंढता, जिन्दगी एक पैमाना लिए खड़ी थी।
Jeetendra
पत्नी: “तुम्हें मुझमें सबसे अच्छा क्या लगता है?”
पति सोच में पड़ गया।
पत्नी: “जल्दी बोलो।”
पति: “तुम्हारा… टाइम पर गुस्सा उतर जाना।”
Raa
mera dada and bajrang das bapa ni dosti
મનોજ નાવડીયા
હું પણ ખોટો સાબિત થયો છું ઘણી વાર,
ભૂલનો સ્વીકાર કરી સાચો રસ્તો શોધ્યો છે,
અંધકાર ચૌતરફ ફેલાયેલો છે ઘણી વાર,
દીવો પડખે રાખી સાચો ઉજાસ શોધ્યો છે,
અહંકારના ભારથી પડ્યો છું ઘણી વાર,
નમ્રતાના માર્ગે જઈ પોતાને શોધ્યો છે,
શું કહેશે જગ જન એ વિચાર્યું નથી ઘણી વાર,
આત્મસ્વર સાંભળી જીવનનો અર્થ શોધ્યો છે.
મનોજ નાવડીયા
Nandini Agarwal
अरे . बहु जी ' बर्तन साफ होने में नही आ रहे है।
गर्म पानी दे जाओ ' प्रेमवती अपनी सेठानी को आवाज लगाती है। ' और सेठानी गर्म पानी लेकर बुढी ' अम्मा को पानी देती है। लो . अम्मा जी पानी अब साफ होंग बर्तन '
तभी प्रेमवती घूरते हुए। जै का सेठानी कटोरा भरकर झूठन इसे कूड़े मे डालोगी ' सेठानी हां अम्मा जी '
प्रेमवती अरे हम वार ' की बात कहो तो साची है।
पड़ी लिखी हो कर घर का आधा खाना बचा हुआ कुड़ेदान की जगह सड़क पर घूम रहे पशु पक्षी को डाल दो तो किसी का भला हो। सेठानी चौकते हुए हां अम्मा जी सही बोले है।
सेठानी को प्रेमवती के कहा बुरा न लगा। एक बर्तन मे झूठन ' व खराब खाना सब्जियो फल के छिलके बर्तन में इक्कट्ठे किये ' और बाहर सड़क के पशु को डालना शुरू कर दिया ।
सेठनी सोचने लगी जो बाते ' मोबाइल पर पढ़ती थी, मैसैस ' . कूड़ेदान मे मुंह डाल कर खाने से ' पशुओ को कितनी चोट लगती है। जो बात हर समय हाथ मे लगा, मोबाइल न समझा सका वो बात बूढी अम्मा ने सिखा दी।
Nandini Agarwal
सच्चे रिश्ते कुछ नहीं मांगते,
शिवाय वक्त और इज्जत के।
Nandini Agarwal
सपनों में भी तुम्हारे सिवा किसी और का ख्याल नहीं, आता । वे हिसाब प्यार करते है हम।
ख्वाबों मे भी तुम्हारा साथ निभाते है हम ,
तुम हो कि हर पल ठुकराते हों हमे,
हर पल तुम्हारे आने की आहट दरवाजे पर महसूस करते हैं हम ।
तमन्ना कभी पूरी नहीं हुई , '
फिर भी तेरी आंखें मे अपनी पूरी दुनिया देखते है हम ।
तुम से प्यारा कोई लगता नहीं हमे,
तुम्हारी आदत हो गयी है ,
कैसे जुदा हो कर - रहे हम।
एक पल तुम्हारी अवाज न सुने पल भर का समय सौ बर्ष के बराबर बीताते हम वही शादी से पहले वाली चाहत बन जाये हम।
हर पल सांसो पर तुम्हारा नाम हर संगीत मे गुनगुनाते है हम ,
सोलह श्रृंगार मेरे तेरे लिए जैसे भी हैं साजन की सजनी है आखिर हम ,
गिला शिकवा दुर करके तो देखो चाहत मे नजर फिर भी आयेगे हम ,
रूठो न हम से ऐसे फिर कभी लौट कर न आये हम।
अगले जन्म का वादा नही करते दुसरे घर से ढोली आयी , इस चौखट से अर्थी पर ही जाऊँगी मै ,
ज्यादा देर न हो जाये हमारी वफा को पहचान लो कदर , समझो बीच मंझधार मे न वि छडेगे हम।
Nandini Agarwal
क्यों समाज तूने यह रीत बनाई है
अपनी बिटिया हुई पराई है
न तू सीता है, न तू राधा है
त्याग की मूरत ऐसी बनाई है,
कितने बने महल-द्वारे
घर की चारदीवारी
चौखट बनी लक्ष्मण रेखा है,
देश को आजादी मिली
पर तू कभी आजाद न हुई है ,
गली-गली चौबारे पर बैठा बहरूपिया है
मौसम की तरह दुनिया रंग बदलती है
नारी तेरा रंग बदलना
दुनिया को रास न आया है,
अपनों को भूल न सके
पराए को अपनाया, समझ न सके
ऐसे भंवर में फंसी न रह सके
न निकल सके,
दिन गुजरे महीने बीते
दुखों की गिनती सालों में हो जाती है,
ऐसी रहती तू जैसे पंख काट दिए पंछी के,
क्यों जुर्म करें नारी पर ये लक्ष्मी है,
सरस्वती है,
जब अति हो जाए मां दुर्गा का अवतार है
औरत ही नानी, औरत ही दादी
औरत ही मां, बुआ, मौसी है
औरत न हो तो ये दुनिया अधूरी है।
smita
क्या है बनारस
सिर्फ़ घाट की सीढ़ियाँ नहीं,
समय की गोद में बैठी
एक अनंत कथा है बनारस...
हर पाप, हर पीड़ा को
अपने आँचल में समेटती,
माँ गंगा है बनारस.....
हर साँस में मंत्र,
हर मौन में विश्वास,
सब कुछ समेटा है बनारस...
काशी की पवित्रता,
अस्सी घाट का शोर,
शिव की नागरी है बनारस...
जहाँ चिता की आग भी
सिखा दे जीवन का पाठ,
वहीं मोक्ष का द्वार है बनारस...
हर गली, हर कोना
अपनी कहानी सुनाता है,
हर दीवार में लिपटा
इतिहास है बनारस...
सुबह की पहली रोशनी में
घंटियों की गूंज,
शाम के जलते दीपों में
आसमान की मुस्कान है बनारस...
हवा के झोंके में छुपा,
ज़िंदगी का गीत है बनारस...
शहर नहीं, प्रेम का दूसरा
नाम है बनारस...
Gautam Patel
નિઝામ ડાયમન્ડ
ભારતમાં મળી આવેલો બહુ જાણીતો હીરો નિઝામ ડાયમન્ડ
હતો, જેનું વજન ૩૪૦ કેરેટ એટલે કે કોહિનૂરથી પણ ૩૦
કેરેટ વધુ હતું. એક સ્થાનિક સોનીએ તેને માટલામાં સંતાડી
રાખ્યો હતો, માટે એમ ધારી શકાય કે નિઝામના હૈદરાબાદ
રાજ્યની ખાણમાંથી એ ચોરવામાં આવ્યો હતો. નિઝામના
દીવાન ચંદુલાલને ખબર પડી, એટલે તેણે હીરો મેળવીને
રાજ્યની તિજોરીમાં જમા કરાવી દીધો.
પહેલ માટે કટિંગ થયા પછી ૧૮૩૦ના અરસાનો તે હીરો
૨૭૭ કેરેટનો બન્યો. આ વજન પણ કટિંગ બાદના કોહિનૂરથી ૧૭૧.૪ કેરેટ વધારે હતું અને મૂલ્ય પણ વધારે હતું. કોહિનૂર આજે બ્રિટિશ તાજમાં છે, તો નિઝામ ડાયમન્ડ
નિઝામ મીર ઓસ્માન અલીના શાસનકાળ દરમ્યાન કે પછી એ પહેલાં નિઝામ ડાયમન્ડ લાપત્તા બન્યો. ઓગણીસમી સદીની અધવચ્ચે તત્કાલીન નિઝામ પર અંગ્રેજોનું લેણું હદપાર ગયું ત્યારે નિઝામે તે સમયના દીવાન અને ચંદુલાલના
અનુગામી નસીર-ઉદ-દૌલા મારફત જાન્યુઆરી ૧૩, ૧૮૫૨ના રોજ હીરો અંગ્રેજ રેસિડન્ટને મોકલાવ્યો. રેસિડન્ટે
તે સ્વીકાર્યો નહિ. ‘મદ્રાસ સ્પેક્ટેટર' નામના અખબારે પોતાના અહેવાલમાં લખ્યું કે નિઝામ ડાયમન્ડની કિંમત
બ્રિટનના ઝવેરીબજાર મુજબ ૬,૦૦,૦૦૦ પાઉન્ડ હતી. આ મૂલ્ય તે જમાના પ્રમાણે જેવું તેવું લેખાય નહિ.
આમ છતાં નિઝામના માથે રૂા. ૩૩,૦૦,૦૦૦નું દેવું ચડ્યું હતું
અને રેસિડન્ટ તે નાણાં રોકડા મેળવવાનો આગ્રહી હતો. નિઝામે અંતે પોતાનું બધું ઝવેરાત હૈદરાબાદની સ્ટેટ બેન્કમાં ગિરવે મૂકી રોકડેથી દેવું ચૂકવ્યું અને થોડા વર્ષ પછી નિઝામે ડાયમન્ડ સહિત બધું ઝવેરાત છોડાવી લીધું. નિઝામ ડાયમન્ડ ત્યાર પછી કદી જોવામાં આવ્યો નહિ. નિઝામનું જે શાહી ઝવેરાત જાન્યુઆરી, ૧૯૯૫માં ભારત સરકારે ખરીદ કર્યું તેમાં એ હીરો ન હતો.
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Bhavna Bhatt
જોરદાર ડાન્સ
Jeetendra
वो बोली,
“तुम्हारी बातें सुनकर दिमाग़ काम करना बंद कर देता है।”
मैंने कहा,
“क्योंकि कुछ चीज़ें दिमाग़ से नहीं, फील से समझी जाती हैं।”
वो बोली,
“तुम बहुत खतरनाक हो।”
मैंने कहा,
“खतरनाक नहीं… प्रैक्टिकल हूँ।” 😄
Lakshmi Narayan Panna
रास्ते में कभी कांटा कभी पत्थर भी आयेगा।
दूर मंजिल से पहले आदमी ठोकर भी खायेगा।।
मुश्किलें आइना हैं राह की तालीम देती हैं।
हौसला जीतने का हो अगर तो जीत जायेगा।।
- Lakshmi Narayan Panna
Prithvi Nokwal
अठारह दिनों के महायुद्ध ने द्रौपदी को अस्सी वर्ष की स्त्री-सी थका दिया था—
न केवल शरीर से, बल्कि आत्मा और चेतना से भी।
चारों ओर विधवाओं की भीड़ थी।
पुरुष गिने-चुने दिखाई देते थे।
अनाथ बच्चे दिशाहीन भटक रहे थे।
और उन सबके बीच—
हस्तिनापुर के राजमहल में,
महारानी द्रौपदी
निश्चेष्ट बैठी
शून्य को निहार रही थी।
तभी…
श्रीकृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं।
कृष्ण को देखते ही द्रौपदी संयम खो बैठती है।
वह दौड़कर उनसे लिपट जाती है।
कृष्ण उसके सिर पर हाथ फेरते रहते हैं—
कुछ कहते नहीं,
उसे रो लेने देते हैं।
कुछ क्षणों बाद
वे उसे अपने से अलग कर
पास के पलंग पर बैठा देते हैं।
द्रौपदी (कातर स्वर में):
“यह क्या हो गया, सखा?
मैंने तो ऐसा अंत कभी नहीं सोचा था…”
कृष्ण (गंभीर शांति से):
“नियति अत्यंत क्रूर होती है, पांचाली।
वह हमारे विचारों के अनुसार नहीं चलती।
वह केवल हमारे कर्मों को
परिणामों में बदल देती है।
तुम प्रतिशोध चाहती थीं—
और तुम सफल हुईं, द्रौपदी।
केवल दुर्योधन और दुःशासन ही नहीं,
सम्पूर्ण कौरव वंश समाप्त हो गया।
तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए।”
द्रौपदी (पीड़ा से):
“सखा,
क्या तुम मेरे घावों पर मरहम रखने आए हो
या उन पर नमक छिड़कने?”
कृष्ण:
“नहीं द्रौपदी,
मैं तुम्हें सत्य से परिचित कराने आया हूँ।
हम अपने कर्मों के दूरगामी परिणाम
पहले नहीं देख पाते…
और जब वे सामने आते हैं,
तब उन्हें रोकने का कोई उपाय नहीं रहता।”
द्रौपदी (कंपित स्वर में):
“तो क्या इस युद्ध की
पूर्ण उत्तरदायित्व केवल मेरा है, कृष्ण?”
अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह
कृष्ण:
“नहीं, द्रौपदी।
स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो।
किन्तु यह सत्य है—
यदि तुम अपने कर्मों में
थोड़ी-सी भी दूरदर्शिता रखती,
तो स्वयं इतना कष्ट न पाती।”
द्रौपदी:
“मैं क्या कर सकती थी, सखा?”
कृष्ण (धीमे किंतु स्पष्ट स्वर में):
“तुम बहुत कुछ कर सकती थीं।
जब तुम्हारा स्वयंवर हुआ था—
तब यदि तुम कर्ण का अपमान न करतीं
और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर देतीं,
तो संभव है परिणाम भिन्न होते।
जब कुंती ने तुम्हें
पाँच पतियों की पत्नी बनने का आदेश दिया—
यदि तुम उसे अस्वीकार करतीं,
तो परिस्थितियाँ कुछ और दिशा ले सकती थीं।
और फिर—
अपने महल में
दुर्योधन से यह कहना
कि ‘अंधों के पुत्र अंधे होते हैं’—
यदि वह वाक्य न कहा गया होता,
तो चीरहरण की वह विभीषिका
संभवतः घटित न होती।”
कृष्ण क्षण भर रुकते हैं,
फिर कहते हैं—
“द्रौपदी,
हमारे शब्द भी हमारे कर्म होते हैं।
और हर शब्द को बोलने से पहले
उसे तौलना अनिवार्य है।
क्योंकि शब्दों के दुष्परिणाम
केवल बोलने वाले को ही नहीं,
पूरे परिवेश को
दुख और विनाश में झोंक देते हैं।”
वे दृष्टि उठाकर कहते हैं—
“इस संसार में
केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है
जिसका ज़हर उसके दाँतों में नहीं,
उसके शब्दों में होता है।
इसलिए—
शब्दों का प्रयोग
सदैव सोच-समझकर करो।”
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
चूड़ी, पायल, गजरा, काजल, बिंदीकी तुझे क्या जरूरत?
अपनी जुल्फे जरा कसके बांधलो, और एक लट गालोपे खुली छोड़दो।
- स्पंदन
ddz
કયા લીખું તેરે દિલ કે બજાર મે મેરા દામ યા તેરા પ્યાર…..
kattupaya s
Waiting for right ideas
Sonu Kumar
क्यों हम साधारण नागरिक रिकालिस्ट्स बन गए?
तो किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया? हमें नहीं पता कि, किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया। न ही हम यह जानते है कि हमारे द्वारा लिखे गए विवरणों को पढ़कर कई कार्यकर्ता क्यों रिकालिस्ट्स बन गए। न ही हमें इस कारण का कोई अंदाजा कि क्यों 1920 में महात्मा चन्द्रशेखर आजाद रिकालिस्ट्स बन गए, और क्यों 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी रिकालिस्ट बन गए थे। हालांकि इस सम्बन्ध में हमारे पास कोई ठोस कारण नहीं है, कि किस विचार ने हमें रिकालिस्ट्स बनने की प्रेरणा दी। लेकिन जितना हम देख पाते है, हमें इसके दो संभावित कारण नज़र आते है;
1. सहज बोध यानी कॉमन सेन्स (Common sense)
2. अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा बांग्लादेश आदि से होने वाले युद्ध का भय।
(2.1) सहज बोधः पहला कारण सीधा सादा सहज बोध है। सामान्य समझ, जो कि हर मनुष्य में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होती है। सबसे पहले हम आपसे एक सवाल करना चाहेंगे। यदि आप इस सवाल का जवाब देने से इंकार करते है, तो हम आपको अपनी बात नहीं समझा पाएंगे। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप इस सवाल का अपने विवेक से जवाब दें। इसके उपरान्त ही आगे पढ़े।
मान लीजिये कि आप एक कारखाने के मालिक है, जिसमे 1000 कर्मचारी और प्रबंधक वगेरह कार्य करते है। और अचानक सरकार निम्नांकित क़ानून लागू कर देती है:
1. आप किसी भी प्रबंधक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले, तथा किसी भी कर्मचारी को 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं
निकाल सकेंगे।
2. आपको सभी कर्मचारियों को अगले 5 वर्ष के लिए और प्रबंधको को उनकी 35 वर्षीय सेवाकाल के लिए देय वेतन हेतु अग्रिम भुगतान के चेक देने होंगे।
3. यहां तक कि यदि कोई आपके कारखाने से सामान की चोरी कर रहा है तो, किसी न्यायधीश की अनुमति बिना, न तो आप उसे निकाल सकेंगे न ही दंड दे सकेंगे, न ही उसे आपके कारखाने में आने से रोक सकेंगे।
हमारा आपसे सवाल है कि ऐसी स्थिति में 'अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'?
कृपया इस सवाल का जवाब देने के बाद ही आप आगे पढ़े। हम अपना प्रश्न फिर से दोहराते है: 'क्या इन कानूनो के आने के बाद, अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में कर्मचारियों और प्रबंधको के अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'?
दूसरे शब्दों में, यदि हम नागरिको के पास जजो, सांसदों, विधायको, मंत्रियो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं हुआ तो, ये सभी पदाधिकारी भ्रष्ट और अनुशासनहीन हो जाएंगे। इसीलिए महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने 1925 में कहा था कि वोट वापसी कानूनो के अभाव में लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा'। ठीक यही बात महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के प्रथम पृष्ठ में कही थी कि -
यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं हुआ तो, वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा।
जूरी प्रक्रियाएं ग्रीस में 600 ईसा पूर्व लागू हुयी थी। जिसके परिणामस्वरूप ग्रीस अपने आप को इतना ताकतवर बना पाया कि उन्होंने सिर्फ 1 लाख सैनिको की मदद से अपने साम्राज्य का विस्तार तुर्की से लेकर यमुना नदी के किनारे तक कर लिया था। अमेरिका में 1750 ईस्वी में बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाएं लागू हुई, और यह मुख्य कारण था जिससे अमेरिका इराक़, सऊदी अरब, पाकिस्तान और लीबिया को कब्जे में कर पाया। अमेरिका की सूची में अगले नाम ईरान और भारत है। लेकिन किसी सामान्य समझ के व्यक्ति को वोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओं की उपयोगिता समझने के लिए इतिहास की किताबो के पन्ने पलटने या अमेरिका के उदाहरण देखने की जरुरत नहीं है - क्योंकि बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओ का महत्त्व समझने के लिए जिस चीज की आवश्यकता है, वह 'कॉमन सेन्स' है।
हमारे देश से जुडी नागरिक समस्याएं किसी भी प्रकार से उस कारखाने की स्थिति से अलग नहीं है, जहां कारखाने के मालिक को अपने कर्मचारियों और प्रबंधको को 5-35 वर्ष तक नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है। हमारे देश की समस्याओ का समाधान भी वही है, जो कि अमुक कारखाने की समस्याओ का समाधान है 'भ्रष्ट जजो, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के बहुमत को दे दिया जाए'। यह पुस्तक जूरी प्रक्रियाओ एवं बोट वापसी कानूनो के बारे में है, जिनकी सहायता से भारत के नागरिक "बहुमत का प्रदर्शन" करके भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओ को नौकरी से निकाल सकेंगे। पुस्तक में वे विवरण भी दर्ज किये गए है, जिनका पालन करके इन प्रक्रियाओ को जन साधारण देश में लागू करवा सकेंते है ।
*The Greatest Revolutionary Book in the history of mankind " VOTEVAPSI DHANVAPASI " describing root cause of every problem our society/ Country is facing as a whole & most importantly permanent solutions to end the same* 🇮🇳 🔥
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सूचना : *वोटवापसी जूरी खंबा आंदोलन(राईट टू रिकॉल पार्टी इसका एक हिस्सा है)का राष्ट्रिय घोषणा पत्र* अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है :
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पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* "
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वोट वापसी धन वापसी भाग -1
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Bubai
মনের কথায় নেচো নারে ভাই
মন যে বড় ছলনা ময়।
অন্যের দিকে দৃষ্টি কেবল
নিজের দিকে কভু নয় ।
কখনো হাসে কখনো কাঁদে
কখনো করে লোভ হিংসা।
উপরের দিকে দৃষ্টি নাই তার
কেবলই দৃষ্টি নিচে তে।
সারাক্ষণ কেবল বক বক করে
চুপটি কখনো হয় না।
মনের কথায় নেচেছে যে
পড়েছে সে গভীর গর্তে।
যে নাচিয়েছে মনকে সে
করেছে বিশ্ব জয় ।
Gori
सब में कमियां है कोई यहां बेहतरीन नही होता...
बात नजरिए की है कोई चहेरा यहा हसीन नही होता...
जनाजे उठ चुके हैं इस कदर भरोसे के...
अब कोई कसमें भी खा ले तो यकीन नहीं होता...!!
- Gori💙🤍(^-^)
Zalri
अगर दुश्मन हर राज़ से वाकिफ है,
तो समझ लेना, दोस्त गद्दार है।
- Zalri
Paagla
✨ PAAGLA – Quotes That Speak Your Heart ✨ Daily Quotations • Monday to Saturday
Sunday Special Shayari
वो शख़्स मेरे लिए आज भी ख़ास है
Shailesh Joshi
❤️દિલને❤️
સૌથી વધારે નુકશાન પહોંચાડી શકે
એવું બીજું કશું હોય તો એ છે...
👉દિમાગ👈
પછી એ આપણું હોય,
કે પછી અન્ય કોઈનું✍️
માટે એનો ઉપયોગ
ખૂબજ સમજદારી પૂર્વક કરીએ🤔 Shailesh Joshi
Sakshi Sunil Rane
एकांतात राहू दे,
कोणी सोबत नको,
आपले आपण सांगाती बनू,
नाही कोणाला सांगू,
नाही कोणावर रुसू…
जगणं कठीण होईल,
थोडे दिवस तरी,
पण जिद्द मात्र सोडू नको,
आपले आपण सांगाती बनू…
Nilesh Rajput
मुझे हर किसी ने reject किया—
बालकनी में खड़ी परी-सी कोई लड़की हो,
या दूरी ओढ़े किसी शहर में बसी कोई लड़की,
चार साल का पुराना प्यार हो,
या पहला-पहला इश्क़,
हाथों से बंधे धागे हों,
या उन्हीं हाथों की किस्मत की लकीरें,
कहीं ऑफिस में बैठा HR हो,
या अपना कहने वाला परिवार,
लेकिन मैं इन सबसे हटने वाला नहीं हूँ,
क्योंकि यही rejection
मुझे खुद को सोचने पर मजबूर करता है—
और यक़ीन है,
ये ठोकरें आज भले चुभती हों,
पर एक दिन
मेरी चाल का भरोसा बनेंगी,
और तब
मैं इन्हीं सारे rejection पर
बिना कड़वाहट के
मुस्कुराऊँगा।
- Nilesh Tank
Awantika Palewale
तेरे ताल से मेरा ताल मिले ये ज़रूरी नहीं है,
तेरे आगे मेरी नज़र झुक जाए ये संभव नहीं है।
हम अपने ही उसूलों पे जीना जानते हैं,
हर मोड़ पे तेरे क़दमों की ज़रूरत नहीं है।
तेरी हर बात को सच मान लूँ, ये भी क्या कम है?
मगर मेरे हर ख़्वाब में तेरी ही तस्वीर नहीं है।
ख़ामोशी मेरी कमज़ोरी समझ लेना भूल है,
हर चुप्पी के पीछे हार की दास्तान नहीं है।
मैं तन्हा सही, मगर मुकम्मल हूँ अपने आप में,
किसी सहारे की अब मुझको दरकार नहीं है।
तेरे साथ चलूँ तो शर्तों में चलूँ, ये मंज़ूर नहीं,
मोहब्बत अगर क़ैद बने तो वो इश्क़ नहीं है।
SUNIL ANJARIA
આ રાજનગરની રમણી.
ચંચળ શાણી સમજુ ચતુરા, નાજુક ને વળી નમણી
આ રાજનગરની રમણી.
સરખી ચાર મળે સહેલી
મારગમાં વાતોની હેલી.
ટ્રાફિકવાળાને મુશ્કેલી
પણ જરા ન એ કોઈ ખસેલી
ઘડીક ચાલે ડાબે ને ઘડીક જતી જમણી
વાતો ચાલે માટેમોટેથી આસપાસ અવગણી
આ રાજનગર ની રમણી.
જંપે એની ન જીભ જરાકે
દુકાનનો વેપારી થાકે
સાંજે સ્વામી તણું શીશ પાકે
પણ વાતો એની ન થાકે.
પણ રંગોળી પ્રીત તણી
એ પૂરી જાણે પદમણી
આ રાજનગરની રમણી.
બુદ્ધિમતિ ને સાહિત્ય રસિકા.
વાંચવામાં વહાલી નવલિકા
કરી જાણે તમતમતી ટીકા
સમજે બધું પૂરી રસિકા
કલાકૃતિનું કરી કચુંબર ખાંતે નાખે ખમણી
આ રાજનગરની રમણી.
પુરુષ સંગ સ્પર્ધા કરનારી
એ તો છે નવયુગની નારી
દલીલોમાં પૂરી તૈયારી
વાર્યે થાયે બમણી
આ રાજનગરની રમણી.
સાડી પહેરી સરસ સજાવટ
અલંકાર સજવાની ફાવટ
પ્રગતિમાં ન રાખે રૂકાવટ
સ્વામી કમાય તેમાં સમાણી
આ રાજનગરની રમણી.
મુરબ્બો પાપડ વડી અથાણાં
વર્ણન વાનગીઓનાં મઝાનાં
પ્રગટ કરે અખબારી પાનાં
ભરત ભર્યા પાલવ શી વરણી
આ રાજનગરની રમણી.
અગાશીએ રેલાય ચંદા
કોમળ કંઠ સ્વરે મૃદુ જો મંદા
અલકમલકની વાતો કરતી
પતિની શ્રમહરણી
આ રાજનગરની રમણી.
જોતાં દિલમાં જગાડે દંગલ
અજવાળે જીવનનાં જંગલ
જંગલમાં પ્રગટાવે મંગલ
વિપત્તિમાં કરે માર્ગ ઝટ
જેમ જળમાં તરતી તરણી
આ રાજનગરની રમણી.
છો રીજે કે ખીજે પણ એ સ્નેહ નીતરતી નિર્ઝરણી
આ રાજનગરની રમણી.
- નાથાલાલ દવે. કાવ્ય સંગ્રહ “ઉપદ્રવ" માંથી.
સંકલન સુનીલ અંજારીયા
Imaran
Mujhko phir wahi suhana nazara mil gaya,
Nazron ko jo deedar tumhara mil gaya,
Aur kisi cheez ki tamanna kyun karu,
Jab mujhe teri baahon me sahara mil ગયા
💞imran 💞
Shefali
#shabdone_sarname__
Maharshi Trivedi
https://www.matrubharti.com/book/19986920/immense-emotion-a-personal-enemy
મિત્રો મારી આ લેખ ને આપ ની વચ્ચે રજૂ કરું છું....બને તો આપ આ લેખ ને વાચી મને આપનો અભિપ્રાય જણાવશો
Gajendra Kudmate
आप भी कमाल करते हो
चोरी से दिल के मेहमान बन गए
दिल पर हमारे कब्ज़ा कर के
मासूमियत से फ़िर अनजान बन गए
गजेंद्र
Parag gandhi
*👉 પ્રેમ પરિવાર અને પૈસો 👈*
*ક્યારેય એક થતાં નથી*
*એક ને સાચવવામાં બીજો*
*હાથમાંથી નીકળી જાય*
*જ્યારે ત્રણેય માંડ ભેગા થાય*
*ત્યારે જિંદગી નીકળી જાય*
**
Ankithamohan
hello everyone
how are you all
మధుర story will be updating soon ❤️
Parmar Mayur
हमें कुछ ऐसे इंसानों को,
समझना चाहिए।
जिनकी वजह से हमारे जीवन में,
कुछ अच्छा बदलाव आया हो।
जिन्होंने हमारी जिंदगी को संवारने,
में बदलने में एक 'अहम् योगदान' दिया हो।
हम जब भी निराश हो,
तब हमारा होंसला बढ़ानेवाले लोगों।
हमें जो ऐसे लोग मिले हैं तो पहले हमें
ईश्वर का भी हृदय से धन्यवाद करना चाहिए।
बाद में ऐसे सभी लोगों को हृदय से एकबार "धन्यवाद या thank you" कहना चाहिए।
कुछ अल्फाज रिश्तों में जान भरते हैं,
मेरा लिखा हुआ पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏🙏
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/17dyspyjPr/
ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़
✤┈SuNo ┤_★_🦋
खामोश रहना हर जगह, इबादत
नहीं होती,
सिर्फ सहते रहने से, हिफाजत
नहीं होती,
माना कि धैर्य रखना, कान्हा की
सीख है,
पर जो बुजदिली बन जाए, वो
शराफत नहीं होती,
जब जुल्म की हद हो, तो
सुदर्शन उठाना सीख,
अन्याय को सहना भी, कोई
आदत नहीं होती,
हर बार झुक के मिलना जरूरी
नहीं माधव,
जहाँ मान न मिले वो मोहब्बत
नहीं होती,
पत्थर भी टूट जाता है इक चोट
के बाद,
जो कभी न जागे, वो इंसानियत
नहीं होती,
अन्याय के आगे जो, डट कर
खड़ा रहे,
उससे बड़ी दुनिया में, कोई
इबादत नहीं होती..❣
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
#𝕁𝕒𝕚_𝕊𝕙𝕣𝕖𝕖_𝕂𝕣𝕚𝕤𝕙𝕟𝕒_🙏🏼
#𝐉𝐀𝐈_𝐒𝐇𝐑𝐄𝐄_𝐑𝐀𝐌.🚩
#𝔾𝕠𝕠𝕕_𝕄𝕠𝕣𝕟𝕚𝕟𝕘_🌞
╭─❀🥺⊰╯
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
☞#motivatforself😊°
⎪⎨➛•ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी°☜⎬⎪
✤┈┈┈┈┈★┈┈┈┈━❥
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
रहनुमा
रहनुमा हो तो साथ सफ़र क्यूँ नहीं करते?
जिंदगी बन हमसफ़र बसर क्यूँ नहीं करते?
बारहा लोगों से क्यूँ रास्ता पूछते रह्ते हो l
आज गूगल मेप से गुजर क्यूँ नहीं करते?
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
என்னுடைய யாதுமற்ற பெருவெளி நாவல் இறுதி பகுதி 24 நாளை வெளியிட திட்டமிடபட்டு உள்ளது. தவறாமல் வாசிக்க வேண்டுகிறேன். அன்புக்கும் ஆதரவுக்கும் நன்றி
kattupaya s
My novel yadhumatra peruveli last part 24 will be scheduled for publishing tomorrow. don't miss the final part. Thanks for your support and love.
kattupaya s
Good morning friends.. have a happy Sunday
Meghna Sanghvi
આજના દિવસે એક સ્પેશલ યાદ
😊😊😊
મેસેજની વણજાર
શબ્દો સાથે લાગણીઓનો
વરસાદ
⬇️
- Meghna Sanghvi
संजय कुमार दवे
हर हर महादेव 🙏🚩
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Meghna Sanghvi
એક યાદગાર દિવસ....
😊😊😊
અમુક દિવસ, અમુક તારીખ અને અમુક મહિના આપણા માટે કેટલાં ખાસ હોય છે એ આપણું હ્રદય જ જાણતું હોય છે. આ દિવસો સાથે જોડાયેલી યાદોં આપણા માટે ખુબ કિંમતી હોય છે. સાચું કઉં આપણા પ્રિય વ્યક્તિનો જન્મદિવસ આપણા માટે ખુબ ખાસ હોય છે એ દિવસ એની સાથે વિતાવવો એ નસીબની વાત હોય છે.
RajniKant H.Joshi
*🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿*
✨ "जो मिल रहा है तुम्हें,
वही तुम्हारे लिए *बेहतर* है..!!
ये तुम नहीं जानते,
पर *देने वाला* बखूबी जानता है..!!" 🌸
*--------------------------------*
- RajniKant H.Joshi
Sarkar Sarkar
yyyyyy
- Sarkar Sarkar
GIRLy Quotes
🌿 “પુરુષો ધોખો કેમ આપે છે પણ પત્ની ને કેમ નથી છોડી શકતા? (સત્ય જે સ્ત્રીને સાંભળવું ગમતું નથી)” 🌿
ઘણી સ્ત્રીઓ આ પ્રશ્નમાં અટવાઈ જાય છે
જો તે ધોખો આપે છે,
તો છોડી કેમ નથી દેતો?
સત્ય એ છે કે
ધોખો બહુ વખત પ્રેમના અભાવથી નથી થતો,
પણ અંદરની ખાલી જગ્યાથી,
અસંતોષથી,
અપરિપક્વતા અને જવાબદારીથી ભાગવાની વૃત્તિથી થતો હોય છે.
કેટલાક પુરુષો
પત્ની સાથેના જીવનની સુરક્ષા છોડવા માંગતા નથી
પરિવાર, સમાજ, સ્થિરતા,
સુવિધાઓ અને ઓળખ ગુમાવવા નથી માંગતા.
પણ સાથે સાથે
તેઓ પોતાની જરૂરિયાતો,
ધ્યાન, સ્વાર્થ અને લાગણીની ભૂખ
કોઠે તો બીજી જગ્યાએ પૂરી કરવા જાય છે.
અહીં સૌથી મોટું દુઃખ કોને થાય છે?
એ સ્ત્રીને
જે વફાદારી આપે છે,
સહન કરે છે,
સમજાવે છે
અને હજુ પણ પોતાની જાતને જ દોષ આપે છે.
પણ યાદ રાખો
તેનો ધોખો
તમારી કાબેલિયત,
તમારી કિંમત
અથવા તમારા પ્રેમની ખામી નથી.
એ તેની અંદરની ખોટ છે.
કેટલાક લોકો
ન તો પૂરાં છૂટા થવાની હિંમત રાખે છે,
ન તો સાચા થવાની હિંમત.
તેઓ વચ્ચે અટવાઈને
બીજાનું જીવન તૂટી પાડે છે.
જો તમે આ સત્યમાંથી પસાર થયા છો,
અનાદર, અપમાન,
અને તૂટેલા વિશ્વાસની પીડા અનુભવી છે
તો જાણો,
તમે એકલા નથી.
તમારી પીડા સમજાય એવી છે.
અને તમને ઉપચાર, સન્માન
અને સાચા પ્રેમનો સંપૂર્ણ અધિકાર છે. 💛✨
જે તમારા માટે બધા ને છોડી
પોતાના જીવન અને સમાજમાં તમને અપનાવી
પત્ની તરીકે સ્વીકારી ઈઝ્ઝત ના કરી શકે તેનાથી સમયસર કિનારો કરી લેવો જ સારો.
મઝધાર માં અટવાય જવા કરતા એક કિનારે પહોંચવું સારું છે બને કિનારા ની લાલસા માં ક્યારે ખાલી જ રહી જવાઈ
એના કરતાં જ્યાં ઈઝ્ઝત આપી ને સાચવી શકે જીવનભર મળે ત્યાં તેની સાથે જીવવું ને રહેવું સારું..
MOU DUTTA
তোমার বুকের মাঝ খানে তে একটু দিও ঠাঁই,
নিরুপায় আমি বলবো না গো
এটাই আমার চাই।
স্তব্ধ যখন হবে হৃদয়
ক্লান্ত হবে চোখ।
সেদিন ও আমি বলবো তোমায়
হৃদয় তোমারই হোক।
তবু তুমি চাও যদি
অন্য কারো হই?
সেদিন ও আমি শান্ত হয়ে
বলবো আমি তুমি কই।
তাও যদি তুমি না বোঝো
হৃদয়ের ব্যাকুলতা,
সেদিন ও আমি শান্ত হয়ে বলবো আমি তোমারই তা।
সেদিনও তুমি আমায় চেয়েও
পিছিয়ে যাবে জানি,
সেদিন ও তুমি আমায় পেয়ে হারিয়ে ফেলবে মানি।
তবু আমি চাইবো তোমায়
ভুলবো কোনো কিছু
সেদিন ও তোমায় ভালোবাসবো
ছাড়বো না তোমার পিছু।
না ধরেও অনুভব করা যায়
তোমার স্পর্শে হাত।
স্নিগ্ধ করা চোখের মাঝে
ডুব দিয়ে হৃদয় বলে থাক।
তবু তুমি না চাইলেও আছি আমি যেনো
তবু তুমি ভুলে গেলেও আমি আছি এটা মেনো।
kapila padhiyar
મને એકલતાનો નશો ચડ્યો લાગે છે !
કોઈનો અણસાર પણ હવે ખટકે છે.
નવા બંધન કેમ કરી અપનાવું ?
જુના સંબંધો પણ ખૂંચે છે કલ્પી .
મનમાં વહેમ પાળીને બેઠા છે લોકો,
કોઈક તો છે સફરનો સાથી,
એમને કેમ સમજાવું કલ્પી ?
એકલતા છે મારી સફરની હમસફર.
ના હું કાઈ આવી નો'તી સાવ કલ્પી,
બસ, સંજોગોએ સજાવી છે મને.
Nisha ankahi
न चाहत की लहर, न उम्मीद का साया,
अब बस विरक्ति है ,और गहरा सन्नाटा।
- Nisha ankahi
S A Y R I K I N G
किसी ने पूछा कितनी उम्र है तुम्हारी
मैने मुस्कुरा के कहा
जितनी तेरे साथ गुजरी
Gohil Takhubha ,,Shiv,,
મોહિની
.........
દુર ગગનમાં ટકટકી લગાવી જોયું ખુલ્લા આકાશમાં
હોય કોઈ મનનો માણીગર આવે બહોળા હ્લદયમાં
ઉંચા પહાડોની વચ્ચે આવી નજરે એ છબી વાદળમાં
મનમોર બની થનગાટ કરે અને કાળજું ઝંખે પીંજરામાં
કાળી ઘનઘોર ઘટા છવાઈ,ખુલ્લા કેશ કરીને વદનમાં
પ્રકૃતિ ખીલી ઉઠી અનહદ ભરી રાખું સદાય નયનમાં
વળી થયો સળવળાટ ઉડી રહ્યું એક પંખીડું એકલામાં
થયો વીચાર હૈયું ધબકતું બંદ થયું ઘડીએ પલભરમાં
સંજોગ કેવો, સાથ હોવા છતાં કાળજ રહ્યું કલ્પાંતમાં
પારાવાર સંપદા વસુંધરા તણી,વીના પ્રિતમ તલભારમાં
મોહીની લાગી "તખત"ની મીરાને વાંસળી કૃષ્ણ બનવામાં
"શિવ"સદાય સહારો બને,ઓરતાં ઉભરે અહીં હદયમાં
Gohil Takhubha ,,Shiv,,
સતગુરુએ ઐસી કરી, જૈસી કરે ના કોઈ. જૈસે કોવા જહાજ કા,મુજે ઔર ના સુજે કોઈ
- Gohil Takhubha ,,Shiv,,
महेश रौतेला
पत्र तुमने पढ़ा नहीं
लिखा था," गगन में असंख्य नक्षत्र हैं
असंख्य तारों में दूरी बड़ी है,
धरती पर गाँव बसे हैं
इधर-उधर शहर जुड़े हैं,
प्यार के लिए अथाह जगह है।
जंगल में डर छुपा है
नदी में भँवर विचित्र है,
घरों के नाम बड़े हैं
पर मनुष्य का आवास न्यून है।
रखने को प्यार बहुत था
ममता का उधार बड़ा था,
पत्र जो पढ़ा नहीं
एक शब्द उसमें अदृश्य,गहन था।
बातें अक्षुण्ण थीं
सारांश संक्षिप्त था,
लोक-परलोक का विवरण लिखा था
मन ने मन को पढ़ा जहाँ था।
कथा कहने का मन हुआ
तुमने जिसे अनसुना किया,
घर से निकलना कठिन था
राह का मिलना जटिल था।
जीजिविषा जागी हुई थी
समय में संघर्ष छुपा था,
पत्र जो मैंने लिखा था
प्यार में प्रकट हुआ था।
***
*** महेश रौतेला
samiksha
मां !!
जिसकी ममता सूर्य सा चमकता बना दें
वो प्रशंसा मां के नाम !!
जिसकी चांद सी छांव शालीनता सिखा दें
वो राहत मां के नाम !!
जिन्हें हमेशा ही भगवान से ऊपर रखा गया
वो दर्जा मा के नाम !!
जिनका व्याख्यान आज तक किसी कवि से न पूरा हुआ
वो सफलता मां के नाम !!
जिन्होंने उपवास रखा केवल हमारे अच्छे दिन के लिए
वो तपस्या मां के नाम !!
परिवार की भरी मेहफिल में भी जिसकी कमी का अहसास हो जाए
वो योग्यता मां के नाम!!
Jyoti Gupta
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kattupaya s
it's too cold.. Goodnight friends. sweet dreams
Rushi Joshi
जब कुछ न हो तब, यही तो बेहतर है ।
Ganesh Kumar
...अगर आपको लोगों को वश में करना है तो कुछ बेहतरीन तरीके बताता हूं।
अगर आपको कोई लालची इंसान मिले तो उसे धन दीजिए
और अगर आपको कोई घमंडी इंसान मिले तो उसके सामने हाथ जोड़ लीजिए।
अगर आपको कोई मूर्ख व्यक्ति मिले तो उसकी बातों को मान लीजिए
और अगर आपको कोई विद्वान मिले तो उससे हमेशा सच कहिए।
अगर आपको कोई अकेला इंसान मिले तो उसे प्रेम दीजिए
और अगर आपको कोई भूखा इंसान मिले तो उसे भोजन दीजिए।
अगर आपको कोई बच्चा मिले तो उसे खिलौना दीजिए और अगर गुरु मिले तो उन्हें सम्मान दीजिए।
ch Devendra
जिंदगी की राह में सफलता की चाह में हम इस कदर आगे बढ़ गए कि अपनी जिम्मेदारियां उदर ही छोड़ आ गए , उन्नति और नाम कि चाह में बंधनों से इतनी दूर आ गए कि अब वह दिखना ही बंद हो गए।
Rajeev Namdeo Rana lidhori
https://youtu.be/zsZ6VM8IwEs?si=HfDK3n2FGQn-qmom
#Bundeli Doha competition-250th results and #certificates of #winners*
*Coordinator- #Rajeev_namdeo #Rana_lidhori #Tikamrarh*
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#jai_bundeli_sahitya_samoh_tikamgarh #बुन्देली_दोहा_प्रतियोगिता #बरबों #rajeev_namdeo
chavda mital
શ્વાસનું સત્ય
કયારેય કયારેય વિચારું છું, ઈશ્વર સાથે છે,
શ્વાસે શ્વાસે લાગણી બનીને બેઠો છે.
જીવન અને મૃત્યુ વચ્ચેનું જે અંતર છે,
એ નાનકડા અંતરમાં આખું જીવન વસે છે.
ન દેખાય આંખે, ન સ્પર્શાય હાથોથી,
તોય હૃદયના દરેક ધબકારમાં એ છે.
દુઃખ ની રાતે જ્યારે શબ્દો પણ થાકી જાય,
ત્યારે મૌન બનીને મને સાંભળે છે.
હારી ગયેલી હું જ્યારે પોતેથી પોતે,
ત્યારે અજાણ્યા બળ બનીને ઊભો છે.
રસ્તા ભટકાય, દિશાઓ પણ ચૂપ રહે,
ત્યારે વિશ્વાસનો દીવો એ જ જળે છે.
શ્વાસ તૂટે ત્યાં સુધી જ તો આ સફર છે,
એ પછી તો શાશ્વત શાંતિનો પ્રદેશ છે.
હું એને શોધું છું જળસ્થળમાં,
પણ મારા અંતરઆત્મા ના શ્વાસમાં એ વસે છે
kattupaya s
All i have savings as books. it's gave me everything. life, love and satisfied with happiness
Kartik Kule
कि वक्त से बड़ा घाव शायद
ही कोई दे पता
साथ रखकर्भी हमारा न हुआ
इसे भी ज़्यादा और शायद ही
कुछ होजता
रखेंगे तुमको साथ हम एक फुलकी तर पर शायद ही हमे कोई बताए कि
वक्त बतानेके लिए घड़ीमे काटेभी होने जरूरी हे
- Kartik Kule
kattupaya s
I will forget my past, future and present only through books. iam living on floating world
kattupaya s
a great book doesn't mean to change your life. it change your attitude towards life
Kartik Kule
की जाना नहीं हमे छोड़कर
क्योंकि हम आपके दीवाने हे
बात कर लेना हमसे क्योंकि जमानेके हम बहने हे
की झूठतो ज़माना बोलता हे
हम तो दीवाना पन चाहते हे
इस मशहूर जिंदगिने हम आपका सहारा बना चाहते हे
- Kartik Kule
kattupaya s
For a real life iam a failure. with book lovers iam the king.
Kartik Kule
की वो जमाना हि क्या जो हमारा न हुआ
वो वक्त ही क्या जो पुराना न हुआ
अक्सर हमारी चीजों को संभालनेवाला
हमारीही जान का खरीदार हो गया
- Kartik Kule
Kartik Kule
की रूठ जाएंगे वो जमाने जो हमे ख्वाबोमे याद करते थे
आयेंगे मिलने वापस पर जनजेमे लिपटे दिखेंगे
- Kartik Kule
kattupaya s
My desires are deep. like to live by reading want to die while reading.
kattupaya s
Create your own paradise and hell with the books. iam waiting for you.
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
વિષય: સંગીત માટેની રચના
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
શીર્ષક: "શબ્દો જ્યાં ઓગળી જાય છે..."
એક મૌન અને કોલાહલની વચ્ચે,
જ્યાં ભાષા ટૂંકી પડે છે,
ત્યાંથી જ તો સંગીતનો પ્રવાસ શરૂ થાય છે.
પેલા તબલાની શાહી પર પડતી થાપ,
જાણે સમયના હૃદયના ધબકારા,
એક લયમાં જીવનની ગતિ માપતા હોય.
ને પેલી વાંસળીના પોલાણમાં,
શ્વાસ જ્યારે રાગ બનીને ગુંજે છે,
ત્યારે લાગે છે કે હવાને પણ હવે બોલવું છે.
ખૂણામાં પડેલું હાર્મોનિયમ,
એની ધમણમાં ભરેલાં કેટલાય નિસાસા,
કાળી અને સફેદ પટ્ટીઓ પર,
સુખ અને દુઃખની જેમ આંગળીઓ નાચતી રહે છે.
સિતારના તંગ તાર પર,
જ્યારે મિઝરાબનો સ્પર્શ થાય,
ત્યારે વીણાની ગંભીરતા પણ,
ઝણઝણાટી બનીને રોમે-રોમમાં વ્યાપી જાય.
ક્યારેક શરણાઈનો મંગલ સૂર,
તો ક્યારેક વાયોલિનનું ભીનું દર્દ,
મૃદંગના ઘેરા અવાજ સાથે ભળીને,
એક આખું બ્રહ્માંડ રચી દે છે.
અને ઓલા...
મંજીરાના રણકારમાં,
બધું જ એકાકાર થઈ જાય છે,
વાદ્યો તો માત્ર બહાનું છે,
અસલમાં તો "સ્વયમ’ભુ"આત્મા પરમાત્માને સાદ કરે છે.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ’ભુ"
kattupaya s
I live through the book. all book lovers were my friends. This is my world.
kattupaya s
I have deep thoughts about books. I miss them always. the love is infinite
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