Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Soni shakya
तेरा साथ ना मिला तो कोई ग़म नहीं..!
तेरा प्रेम मिल गया वो भी कम नहीं..!!
- Soni shakya
Ashok Bariya
સાબરમતીના સંત: ગાંધી બાપુ
હાથમાં લાકડી, આંખે ચશ્મા, સાદગીનો એ શણગાર,
સત્ય અહિંસાના શસ્ત્રો જેણે, જીત્યો આખો સંસાર.
નહોતી તોપ કે નહોતી તલવાર, બસ હૈયામાં હતી હામ,
ઝુકાવી દીધી બ્રિટિશ હકૂમત, એવું અમર એનું કામ.
સાબરમતીના સંત તમે, રેંટિયો તમારો સંગાથ,
ખાદીના વસ્ત્રો પહેરીને, ધર્યો ગરીબોનો હાથ.
ડર નહોતો કોઈ જેલનો, નહોતો કશાનો મોહ,
શાંતિના માર્ગે લડ્યા તમે, જગાવ્યો દેશપ્રેમનો છોહ.
બાપુ તમે છો અમર અમારા, ભારત માતાની શાન,
યુગો યુગો સુધી ગુંજશે, તમારું જ પુણ્યગાન.
કવિતાનો ટૂંકો સાર:
આ કવિતા ગાંધીજીના સાદા જીવન, તેમના સત્ય અને અહિંસાના સિદ્ધાંતો અને કેવી રીતે તેમણે કોઈપણ હથિયાર વગર દેશને આઝાદી અપાવવામાં મુખ્ય ભૂમિકા ભજવી તે દર્શાવે છે.
Hardik Galiya
મનગમતી મારી પતંગ, કોઈ ઉડાડી ગયું છે,
સૂતેલી મારી શ્રદ્ધા, કોઈ જગાડી ગયું છે.
નહોતી ખબર ઇશ્ક તણા,પેચો છે કેવા કઠિન,
આપીને શરત શ્વાસની,કોઇ રઝળાવી ગયું છે
જોઉં છું લાચાર થઈ , સૂનું ગગન હું તો હવે,
બાજી જીતેલી હતી, કોઈ બગાડી ગયું છે.
રાજી હતો હું એમ કે, છે દોર મારા હાથમાં,
કાપી પતંગ હવે કહો, કોણ તે કાપી ગયું છે?
બાકી રહી છે યાદ બસ, સૂની હથેળીએ હવે,
લુટાઈ ગયો જેના પર, તે જ તડપાવી ગયું છે
– હાર્દિક ગાળિયા
वात्सल्य
તારી નજરને કારણ હું દૂર ના જઈ શકયો
કે ના નજીક આવી શક્યો.
- वात्सल्य
Komal Arora
The worse thing in the world is waiting .......
जब मन का हाल कोई समझ ना पाए.......
या कहें कि खुद ही बेचैन से हो जाए......
बगैर किसी वज़ह के........
जिस से बात करनी हो वो साथ ही ना हो......
या यू कहे कि साथ हो कर भी ना हो........
तब जो समय खुद का खुद के साथ निकालना होता है........
that is worse.......
Nandini Agarwal
मेरा भारत महान ' मेरी संस्कृति मेरी धरोहर । क्या अब भी नियन्त्रण चल रहा है। मेरे ख्याल से नहीं। शॉपिंग के लिए जाओ। कपड़े खरीदने जाओ और "मै ' साडी मे सादा सिम्पल सरल स्वभाव तो बाहर से ही शोरूम मे जाने से पहले गार्ड कह देता है। मेम यहाँ वेस्टन कपड़े मिलते है। घुमते - घूममे बहुत देर हो गयी तेज बारिश होने लगी। "तो मन आया पास मे रेस्टोरेंट मे कुछ खा लेते हैं। वहां हम चेयर पर बैठे ही थे। वेटर बोला चाइनीज फूड ही मिलेगा । हम यू ही आ गये। ऐसा नही लग रहा था । हम अपनी देशी धरोहर में ही है। आते - आते रात हो गयी । काफी देर होने के बाद खाने का टाइम हो गया होटल मे खाने की टेवल पर बैठे । मैनयू कार्ड देखा सब कार्डी मांसाहारी व्यंजनों से भरा हुआ था। फिर तो वहाँ होटल मे पानी भी गले से नही उतरा । जो कि हमारे घर में प्याज लहसुन तक नही खाया जाता । वहाँ अण्डा , मांस तो एक हत्या पाप के बराबर है। ( कहाँ गया हमारा धर्म) ? जब बच्चो के स्कूल मे पेरेन्ट्स मिटिंग में जाती हूं। क्यास टीचर का व्यवहार जिस बच्चे की मम्मी स्टाइलिस्ट लुक दो चार वर्ल्ड इंगलिश में बोल दिया या फिर नौकरी पेशा वाली गाडी खुद ड्राइविंग कर के आयी तो उसकी बातो को ध्यानपूर्वक सुन कर मुस्कुरा कर जबाब दिया जा रहा था। और मैं सीधे स्वाभाव से पूछा मेरा बच्चा क्लास मे व्यवहार - पढाई ने कैसा चल रहा है ? तो मेरे बच्चे मे चार कमी निकाल कर जबाब दिया जाता है। जब कि हमारे हिसाब से हमारा बच्चा सही है। क्या व्यक्ति की पहचान दिखावे से होने लगी है। मन की सरलता अपनी पहचान सादगी से नही सोचो अभी ही हाल है। हिन्दू शासन मे साधे का परिणाम कितना घातक होगा।
Nandini Agarwal
तस्वीर
घर में ' दीवाली कीथा सफाई करते - करते एक पुरानी तस्वीर हाथ लग गयी। वो तस्वीर में मुस्कुराती ' आँखो में सपने लिय कोई राजकुमार ' सालीनता , चहकता चेहरा कितनी खूबसूरत व सादगी भरा ' उस तस्वीर मे मैं जैसे खो सी गयी। क्या' दौर हुआ करता था। कितनी मधुरता हुआ करती थी ' रिश्तों में । कोई' भेद-भाव तुलनात्मक जीवन नहीं था। जो जैसा है। वैसा सही है। आस -पास
जात - पात ऊँच - नीच काम-काज में कोई भी नजरिया अलग नहीं था। उसी पर व्यक्ति धेर्य बांध कर जीता था।
डिप्रेशन नाम की कोई चीज नहीं थी। जिस लड़के के साथ विवाह कर दिया । उसी को अपना फर्ज अपना कर निभा लिया करती थी। (करते थे) दो समय की रोटी,
दो जोड़ी कपड़े ' सर के नीचे छत पर खुश रहता था।
ताजी हवा पानी का तो क्या कहना, रगो मे मिट्टी की खुशब कही भी बैठ जाओ। धरती माँ का एहसास होता । बस यू कहां जाये प्रकृति से जुड़ा हुआ हर व्यक्ति जो एक हिन्दूतानी होने पर गर्व महसूस करता था। तभी शकुनतला " की कोहनी से आईना नीचे गिर टूट गया।
शकुनतला की चेतना जागी ' मैं भी कहां खो गयी। आईने के टुकड़ों मे अपने आप को देखा , जितने आईने के टुकड़े हर एक टुकड़ा कुछ कहता था। जीवन मे तरह -तरह के रिश्ते निभाये ' तस्वीर से आईने मे झांका और देखा वही लड़की । जिसका चेहरा झाइयों से घिर गया। हर एक झाई में जीवन का तर्जुवा था। परिवार को पचास पचपन साल दिये । अन्त में वही आ गयी जहाँ से शुरू किया। मैं और मेरे पति महोदय । सालो साल हो जाते है। बेटे-बहू पोते पोती के मुँह देखे बिना विदेश मे नौकरी करने से ' लोगो की मानसिक सोच है। कामयाबी '
बेटी मेरी सोन चिड़ियां पंक्षी की तरह उड़ गयी। अपनी गृहस्थी से जब समय होता है। तब आना ' सारा घर काटने को दौड़ता है। अरे भाग्यवान आओ साथ मे खाना खाते हैं। मैने आलू पराठा बना लिया और साथ मे दही
जब तक श्वांस है तब तक तो साथ है। पति - शकुनतला अब थोड़ा मुस्कुरा दो, जिस मुस्कान पर मैं फिद हूं।
Bhavna Bhatt
સુંદર અભિવ્યક્તિ
M K
चुप रह कर बोलना सिख गई,
मैं मोहब्बत हूं, टूटना सीख गई
कोई बताए उसे मोहब्बत में सौदेबाजी नहीं होता है
झूठ के कलम से कहानी लिखी नहीं जाती ...!!
- M K
M K
खुद को खोने से डर नहीं लगा मुझे,
तो तुम्हे खोने से कैसे लगेगा??
जरूरी नहीं तुम झूठे निकले,
गलती शायद मेरी थी, मुसाफ़िर को अपना कहा ।।
भूल गई थी मुसाफ़िर का कोई ठिकाना नहीं होता है,
हर किसी को अपना कहता है,
लेकिन किसी का अपना नहीं होता है....!!
- M K
Raj Brahmbhatt
"अनुभूति" 🍂✨
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swati
बहूत कुछ खोया मैने ,
मंजिल तुझे पाने के लिए
एक तू है कि अब तक ना मिली,
अब भी लगे हैं डटकर हम ,
दिन रात सुबह ओ शाम ,
उम्मीद मे तुम्हारे ,
अब मर्जी तेरी ,
देख लेना फिर में तुमसे ,
आगे मैं मिलूं के नहीं .....✍️✍️
Saroj Prajapati
धूप का वो एक कतरा बैठा कुछ जुदा सा है
मालूम होता है वो जिंदगी से कुछ खफा सा है।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
રોનક જોષી. રાહગીર
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Dhamak
(સાધારણ બોલો છો તે શું છે)
હું ....સમજાવું 😊.
સાધારણ થી સુંદર બીજું કાંઈ નથી,
નાનું ફૂલ પણ એ જ કહી જાય છે.
(એટલે સાધારણ હોવું કાંઈ ખોટું નથી)😀
(ઢમક) DHAMAK
Tr. Mrs. Snehal Jani
હવામાં ઊંચે ઉડતો પતંગ એક જ વાત શીખવે છે કે જેમ પવનનો સાથ મળતાં એ ઊંચે ઉડે છે અને સમય પૂર્ણ થતાં નાશ પામે છે એમ જ આપણે પણ જિંદગીમાં મળતી તક યોગ્ય રીતે વાપરી ઉચ્ચ પદે પહોંચવું. સાથે સાથે ધ્યાન રાખવું કે આ સ્થાન ચિરંજીવ નથી. સમય બદલાતાં ફરીથી નીચે આવવું જ પડે છે. આથી જ્યાં સુધી ઉચ્ચ પદ પર છીએ ત્યાં સુધી જે તમારી નીચેનાં વ્યક્તિઓ છે એમની કદર કરી લેવી. શું ખબર કાલ ઊઠીને આપણાં બંનેની પરિસ્થિતિ એકદમ વિરૂદ્ધ હોય? ત્યારે આપણાં કર્મો એ વ્યક્તિ આપણને યાદ અપાવે તો તકલીફ થાય એવી સ્થિતિ ઊભી ન થવી જોઈએ. બાકી જીવનનો અંત તો ગમે ત્યારે થવાનો જ છે. આ અંત પછી પણ જીવતાં રહેવું હોય તો લોકોની સારી યાદોમાં સ્થાન પામવા પ્રયત્ન કરવા.
M K
कहते हैं ये दुनियां बुरी है,
सच तो यह है तुम्हारे ख्याल ही बुरे है।
मैं तुम्हारी होना चाहती थी पूरे रस्मों रिवाजों से
पर तुम्हे फरेब करने की जल्दी थी ।
मैं रस्मों रिवाजों का मान रख लेती,
जरा सोचो तुम मुझसे जुड़ने के बाद बदल जाते तो क्या करती ??
तुम्हारी इतनी सी ही सोच है,
तुम तोड़ो भी मुझे और मैं मुस्कुराऊं नहीं ...
तो तुम गलत हो,
ये मेरी जिंदगी है... झूठों के लिए आंसू कब तक बहेंगे...!!
- M K
Gautam Patel
Gujarati song8855
Dada Bhagwan
ऑफिस में जूनियर हमारी बात न सुने तब क्या करें? आइए, इस विडीयो में समझते हैं कुछ प्रेक्टिकल टिप्स पूज्य नीरू माँ से।
#selfhelp #selfimprovement #office #trending #DadaBhagwanFoundation
Saliil Upadhyay
આજની હાસ્ય વાર્તા..
એક છોકરી પોતાના બોયફ્રેંડ સાથે બગીચામાં બેઠી હતી...
એટલામાં છોકરીનો પતિ આવી ગયો અને બંનેને જોઈ લીધા...
છોકરીનો પતિ બોયફ્રેંડને મારવા લાગ્યો...
છોકરી બોલી: માર સાલાને હજુ માર...
પોતાની બૈરીને ફેરવતો નથી અને બીજાની બૈરીને લઈને બગીચામાં ફરે છે...!
થોડીવાર પછી બોયફ્રેંડ છોકરીના પતિને મારવા લાગ્યો...
છોકરી બોલી: માર સાલાને હજુ માર...
પોતે ફરવા લઈ જતો નથી અને બીજાને લઈ જવા દેતો પણ નથી.. !
ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
અટપટા રસ્તામાં, નાનીનાની ગલીઓમાં,
ખોવાય જતો રસ્તો કે પછી પગલાં મારા.
- ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
Parmar Mayur
वो फटी- तूटी पतंगें,
जर्मी पर 'बिखरकर' गिरी पड़ी थी,
या कोई जगह लटकी हुई थी।
जिंदगी में 'किसी की खुशी के लिए',
खुद का बलिदान देना पड़े तो कैसे देना,
वह कितना सरल और सहज,
तरीके से 'समझाकर' चली गई।
Miska
Dreams run in my blood becoming the fifth doctor in my family
Vyas Kinju
💔 રાહ જોઈ જોઈને થાકી ગઈ છું,
દરેક દિવસ હવે ભાર જેવો લાગે છે.
😔 તારી રાહ જોવાને બદલે
જીવવું પણ ક્યારેક મુશ્કેલ લાગે છે.
🌱 પણ એક વાત જાણું છું—
હું જઈ રહી છું,
કારણ કે પોતાને ગુમાવવાથી
દૂર જવું વધારે જરૂરી છે.
kinj....
- Vyas Kinju
Vyas Kinju
💔 जब उसे मेरी ज़रूरत थी,
मैं हमेशा तैयार थी।
😢 पर जब मेरी आँखें भीगीं,
उसके कदम नहीं आए।
💓 दिल तड़पता रहा चुपचाप,
इश्क़ की राहें बहती रहीं हर साज।
🌙 मैं तुझारी राह देखती रही,
पर तू मेरी दुनिया तक क्यों नहीं आया।
📖 यादें रह गईं, दर्द रहा बाक़ी,
तेरे बिना दिल कभी नहीं भर पाया।
⏳ हर पल तेरा इंतजार रहा,
पर तू खुद कभी पास न आया।
🕯️ कितनी बार मैंने खुद को कहा,
“ये दूरी भी गुजर जाएगी।”
💧 पर हर रात तेरी यादों में कटती रही,
और हर आँसू बस तेरे लिए ही बरसता रहा।
kinj
ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़
https://youtube.com/shorts/uQxVaKVkBjE?si=l8pMYIuF3_9oADb7
Jeetendra
शाम के छः बजकर बीस मिनट।
घर में सन्नाटा।
केवल फ्रिज की हल्की-सी गुनगुनाहट और दूर कहीं पड़ोस के बच्चे का साइकिल का घंटा।
मैं किचन से निकली।
ड्रॉइंग रूम की मेज पर नज़र पड़ी।
वही आधा गिलास।
पानी का।
ठंडा।
ऊपर से बर्फ का एक छोटा-सा टुकड़ा अभी भी पिघल रहा था।
किनारे पर हल्का-सा पानी का दाग।
कल रात उसने रखा था।
रात के ग्यारह बजकर कुछ मिनट।
टीवी बंद करके उठा था।
गिलास भरा।
दो घूँट पीए।
बाकी छोड़ दिया।
फिर बोला—"सोने चलते हैं।"
मैंने कहा—"गिलास तो उठा लो।"
उसने कहा—"सुबह कर लेंगे।"
सुबह हुआ।
गिलास वहीँ।
दोपहर हुई।
गिलास वहीँ।
अब शाम हो गई।
गिलास अभी भी वहीँ।
मैंने सोचा—उठा लूँ।
धो दूँ।
पर हाथ नहीं बढ़ा।
क्योंकि ये सिर्फ़ गिलास नहीं था।
ये एक छोटा-सा समझौता था।
एक छोटी-सी जंग।
जो हम दोनों लड़ रहे थे—बिना बोले।
अगर मैं उठाती, तो मानो मैं हार मान रही हूँ।
अगर वो उठाता, तो मानो वो झुक गया।
और हम दोनों को ही ये लग रहा था कि जो पहले झुकेगा, वो हारा हुआ होगा।
तो गिलास वहीं रहा।
पानी अब गुनगुना हो गया।
बर्फ गायब।
और ऊपर हल्की-सी धूल जम गई।
मैं कुर्सी पर बैठ गई।
गिलास को घूरती रही।
फिर धीरे से बोली—
"अब तो बस करो।
एक गिलास पानी ही तो है।"
पर जवाब किसी ने नहीं दिया।
न गिलास ने।
न घर की खामोशी ने।
न उसने—जो अभी तक ऑफिस से लौटा नहीं था।
मैंने हाथ बढ़ाया।
गिलास उठाया।
एक घूँट पीया।
ठंडक अब नहीं थी।
स्वाद भी नहीं।
बस एक पुरानी आदत।
फिर गिलास सिंक में रख दिया।
पानी बहाया।
साफ़ किया।
सुखाकर रख दिया।
पर मन में कुछ टूटा नहीं।
न कुछ जीता।
बस एक आधा गिलास खत्म हुआ।
जैसे हमारा एक छोटा-सा हिस्सा भी खत्म हो गया हो।
अब मेज पर कुछ नहीं।
खाली।
साफ़।
और बहुत शांत।
शायद यही चाहिए था।
न गिलास।
न पानी।
न लड़ाई।
बस खाली मेज।
और थोड़ा सा सुकून।
कल सुबह फिर से कोई गिलास रखेगा।
शायद पूरा।
शायद आधा।
पर आज के लिए—बस इतना ही।
Nithya Reddy
आपको और आपके परिवार को मकर संक्रांति की 2026 की ढेरों शुभकामनाएं
बि. नित्या रेड्डी
Paagla
मुझे नहीं पता क्या हुआ था उस रात,
तू दूर चली गई मुझसे छुड़ा कर अपना हाथ,
आज इतने दिनों बाद दिखे तो सोचा पूछ लूँ,
क्या तुम खुश हो गैरों के साथ।
Parag gandhi
જિંદગી પણ કેવી અજીબ છે,
ખુશ રહીએ તો લોકો બળે છે અને
ઉદાસ રહીએ તો પ્રશ્ન પૂછે છે !!
🌹🌷🌻શુભ સવાર🌻🌷🌹
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ज़ुल्म-ओ-सितम
ज़ुल्म-ओ-सितम के शिकार होने से डर
लगता हैं l
जी जान से मार देने वाला खूनी ज़हर
लगता हैं ll
वहसियत और खूना मरकी आम बात
हो गई है l
अपने शहर में अपने ही लोगों से डर
लगता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
छोटे छोटे खर्च पर, रखिए अपना ध्यान। छोटा छिद्र जहाज को, पहुँचाता शमशान।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Gautam Patel
રિજેન્ટ ડાયમન્ડ
એક મહામૂલો હીરો ૧૭૦૧ દરમ્યાન
હૈદરાબાદ રાજ્યની પર્તિયાલા ખાણમાં
મળી આવેલો ૪૧૦ કેરેટનો રિજેન્ટ ડાયમન્ડ હતો.
ખાણ પર નિઝામની માલિકી હતી, પણ જે
મજૂરને રિજેન્ટ મળ્યો તેણે એ નિઝામને સુપરત કર્યો
નહિ. છરી વડે પોતાના શરીરમાં જખમ ખોતરી
હીરો તેમાં સંતાડ્યો અને પાટો બાંધી દીધો.
ભાગીને તે મદ્રાસ જતો રહ્યો. પકડાઇ જવાની
બીકે તે દેશ છોડવા માગતો હતો. મદ્રાસ બંદરે તેણે વિદેશગમન માટે બ્રિટિશ વહાણના કેપ્ટનની સહાય માગી અને
બદલામાં હીરાની કિંમતનો અડધો હિસ્સો આપવાનું કબૂલ્યું. કેપ્ટન દગાબાજ નીકળ્યો. મધદરિયે પહોંચ્યા બાદ તેણે
હીરો પડાવી લીધો અને મજૂરને દરિયામાં ફેંકી દીધો. વહાણને તેણે મદ્રાસ બંદર તરફ પાછું વાળ્યું. મદ્રાસ બંદરે પાછા ફરેલા અંગ્રેજ કેપ્ટને.રિજેન્ટ હીરો ત્યાંના સ્થાનિક વેપારી જયચંદને ૧,૦૦૦ પાઉન્ડમાં વેચી દીધો. જયચંદે તે વર્ષો સુધી રાખી મૂક્યો, કેમ કે માલ ચોરીનો હતો. છેવટે અંગ્રેજ ગવર્નર
થોમસ પિટ સાથે ૨૦,૦૦૦ પાઉન્ડમાં સોદો કરી નાખ્યો. આઠેક વર્ષ બાદ પિટ બ્રિટન પાછો ફર્યો. મૂળ ૪૧૦ કેરેટના
ડાયમન્ડને તેણે કપાવી પાસાદર બનાવ્યો, એટલે વજન ૧૪૦.૫ કેરેટ જેટલું રહી જવા પામ્યું. કિંમતી હીરાની સલામતી અંગે પિટને સતત ફિકર રહેતી હતી, એટલે ચિંતામુક્ત થવા ફ્રાન્સના ઉપશાસક ચૂક ઓફ ઓર્લિયન્સને તે ડાયમન્ડ ૧,૩૫,૦૦૦ પાઉન્ડના ભાવે આપી દીધો. હીરો રિજેન્ટ તરીકે જાણીતો બન્યો. આજે રિજેન્ટ પેરિસના લુવ્ર મ્યૂઝિયમમાં પ્રદર્શિત છે.
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kattupaya s
Good morning friends.. have a great day
Nisha ankahi
लगाव (औरत की ज़बान में)
लगाव
औरत के हिस्से
अक्सर विरासत की तरह आता है
ना माँगने की आज़ादी,
ना छोड़ने की छूट।
हमने जिसे प्रेम कहा,
वह अक्सर
समझौते की एक लम्बी परछाईं था
जहाँ चाहत
धीरे-धीरे
कर्तव्य में बदल दी गई।
लगाव ने
मुझसे मेरा समय लिया,
मेरी देह की थकान,
मेरे मौन की मेहनत
और बदले में
मुझे समझदार कहलाने का तमगा दिया।
जब मैंने सवाल किया,
कहा गया
“ज़्यादा मत सोचो,
तुम जुड़ी हुई हो।”
जुड़ाव यहाँ
एक खूबसूरत शब्द था
मेरे हक़ काटने का।
मुझे सिखाया गया
कि लगाव त्याग है,
पर किसी ने नहीं बताया
कि त्याग की क़ीमत
हमेशा औरत ही क्यों चुकाती है।
आज समझ आता है
लगाव अगर
मेरी आवाज़ दबा दे,
मेरी आकांक्षा छोटा कर दे,
मेरी पहचान को
किसी और के नाम पर टिका दे
तो वह प्रेम नहीं,
एक सलीकेदार क़ैद है।
मैं अब भी जुड़ सकती हूँ,
पर झुककर नहीं।
मैं लगाव चुनूँगी
वहाँ,
जहाँ मुझे
पूरा इंसान रहने दिया जाए।
@निशा अनकही
Imaran
जाने मेरी आँखों से कितने आँसू बह गए,
इंसानो की इस भीड़ में देखो हम तनहा रह गए,
करते थे जो कभी अपनी वफ़ा की बातें,
आज वही सनम हमें बेवफ़ा कह गए
💔imran 💔
Soni shakya
🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Raa
Happy Army all family
વિનોદ. મો. સોલંકી .વ્યોમ.
" પીંજરું નીકળતું નથી "
શીખ આપવાની રીત ન્યારી જિંદગીની,
એ શીખવે જે, એ કોઈ શીખવતું નથી.
એ દોસ્ત, મને ન યાદ કરાવીશ તું એને,
બાદમાં, દિલ એને કેમેય વીસરતું નથી.
પ્રણયમાં મતલબની દોસ્તી ન મિલાવ,
પાષાણ દિલ કદી પણ પીગળતું નથી.
પંખી તો પાજરેથી નીકળી ગયું, પણ!
એ પંખીમાંથી પાંજરું નીકળતું નથી.
નિર્મળ તો લાગણીથી ભીંજાઈ જાય,
નિષ્ઠુરને "વ્યોમ" પણ ભીંજવતું નથી.
✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી ), મુ. રાપર
Hemant pandya
વાત ખુદની હોય કે અન્ય ની કયા સુધી આ શુખ દુઃખ ની અનુભૂતિ માં પડ્યો રહું ભગવંત? દયા કરૂણા ની તો ભરતી આવે હદયનો સાગર છલકાઈ આશું ઉભરી આવે, પણ હે ભગવંત ક્યાં સુધી આ રમત તું મને રમાડીશ?
આ પીંજરામાં પુરાયેલો જીવ ખુબ મુઝાય છે, મને મુક્ત ગગન જોઈએ,
મુક્ત કર મને ભગવંત, મને પીજરૂં નહીં મુક્ત ગગન જોઈએ
- Hemant pandya
Hemant pandya
જ્યારે શીવ પદજ સત્ય છે સાસવત છે, તો બીજું બધું ક્ષણ ભંગુર નાશવંત
જેટલી ચાવી ભરી રમકડાંમાં એટલું જ ચાલશે, ન એથી ઓછું ન અધીક,
ચલાવનારો શીવ છે, તું માત્ર નીમીત બની સહારો બન જીવ માત્ર નો, જીવન સફર કોઈનો સુમસાન ન ભાષે, કોઈ જીવનમાં ખુદને એકલું અટુલું ન મહેસૂસ કરે, બની શકે તો વીસામો બન
- Hemant pandya
Hemant pandya
માણસને માત્ર આશ જીવાડે છે, આશ મરી માણસનું જીવન ખતમ,
કોઈ મુજ પર આશ રાખી બેસેલ હોય તો હું કેવીરીતે કોઈની આશ મારી તેને મરવા દઉં?
જો એની દીશા સહી હોય તો તેને શક્ય તેટલી યથા શક્તિ નીમીત માત્ર બની મદદ, અને દીશા ભુલ્યા ને સહી દીશા બતાવવી એ મારી ફરજ છે
- Hemant pandya
Hemant pandya
કયા સુધી આ દેખાવ ચાલશે?
હતું એવું કશુંજ રહેતું નથી, સારૂં ખરાબ તો માત્ર મનની અનુભુતી છે,
અને બીજા બધા હું પદ ના ભાવ
જે હું પદ ત્યજી શો..હમ ધારણ કરે છે, આદેશ લે છે
એજ પુર્ણતા ને પામે છે,
ગુરૂ વીના જ્ઞાન ન હોવે..
ગુરૂ વીના ન સુજ પાવે,
ગુરૂ ની ગતી વીના માત્ર જીવને અધોગતિ જ મળે છે, જીવ આમ તેમ અવળોજ ભટકે છે
- Hemant pandya
Hemant pandya
તમે કોને છેતરો છો? ખુદને કે અન્ય ને?
બસ જીવને મનાવવાના પ્રયાસ માત્ર કરો છો, માત્ર જીવને મનાવવાના, જો સંતૃષ્ટ હોય જીવ તો તેને કોઈજ દેખાવ ની જરૂર જ ન હોય. પણ તમો ગુણી જીવ ને કંઈ કહેવા કરતાં મૌન શ્રેષ્ઠ ઉપાય છે.
બાકી પુર્ણ હોય તે શાંત હોય અપુર્ણ હોય તે ...? સમજી ગયા? જેમાં અપુર્ણતા એના દેખાવ વધુ હોય
- Hemant pandya
Abantika
शीर्षक: मेरी खिड़की का जंगली गुलदस्ता🎀
🌸मेरा जंगली गुलदस्ता🌸
किताबों के बोझ और इम्तिहानों के शोर में,
सुकून की एक छोटी सी तलाश थी,
वो कोई महँगा तोहफा नहीं था हाथ में,
बस रस्ते के किनारे खिले फूलों की आस थी।
न किसी ने सींचा, न किसी ने संवारा,
धूप और धूल को ही अपना बनाया था,
वो जंगली फूल थे साहब,
जिन्होंने बंजर में भी मुस्कुराना सिखाया था।
कांच के उस गिलास में सजाकर उन्हें,
मैंने अपनी खिड़की पर क्या रखा,
मानो शहर की सारी ताज़गी को,
अपनी एक मुट्ठी में भर लिया।
वो चार दिन का साथ, वो कोयल की आवाज़,
मेरी बकेट लिस्ट का एक हसीन पन्ना बन गया,
बड़े-बड़े बागीचों से जो न मिल सका,
वो सुकून मुझे इन जंगली फूलों में मिल गया।
×××××××××××××××××××××××××××××××
✨️"खुशी महंगी चीजों में नहीं, उन लम्हों में है जिन्हें हम खुद अपने लिए चुनते हैं।"✨️
न माली की ज़रूरत, न बागीचों की होड़,
राहों के इन फूलों ने, दी हर मुश्किल को मरोड़।
किताबों के शोर में, ये शांत सा एक कोना था,
जंगली फूलों की सादगी में, मुझे बस थोड़ा सा खोना था।
🦋खिड़की पर सुकून🦋
किताबों के शोर में,
वो शांत सा एक कोना था,
जंगली फूलों की सादगी में,
मुझे बस थोड़ा सा खोना था।
न कोई माली, न कोई जतन,
बस कांच का गिलास और मेरा मन।
×××××××××××××××××××××××××××
💝बेनाम सी खुशियाँ💝
"न बागीचों का शौक, न गुलदस्तों की चाह,
मुझे मिल गया मेरा सुकून, बस चलते-चलते राह।"
Abantika
✨ 𝓐𝓫𝓪𝓷𝓽𝓲𝓴𝓪 ✨
"मैं शब्दों में रहती हूँ, कहानियों में बहती हूँ..." 🖋️🌊
🎞️ मेरी कहानियाँ सिर्फ शब्द नहीं, एक सिनेमा हैं—जिन्हें आप महसूस कर सकते हैं।
🎭 कभी हकीकत, कभी ख्वाब, पर हर बार कुछ 'खास'।
🍃 Stories | Emotions | Life
⚠️ Warning: मेरी कहानियों में खो जाने का खतरा है! 😉📖
👇 मेरे सफर का हिस्सा बनें
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Jeetendra
सुबह सात बजकर बीस मिनट हुए थे।
आज भी वही रूटीन।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
दर्पण के सामने खड़ी हुई।
लाइट जलाई।
ट्यूबलाइट की ठंडी सफ़ेद रोशनी चेहरे पर पड़ी।
मैंने दाँत ब्रश किया।
मुँह धोया।
फिर हाथों से चेहरा पोंछा।
और फिर... वही काम।
जो पिछले तीन साल से हर सुबह करती हूँ।
मुस्कुराई।
दर्पण में देखकर।
बस एक बार।
हल्की-सी।
जैसे कोई पुराना दोस्त मिल गया हो।
आज भी मुस्कुराई।
पर कुछ अजीब लगा।
मुस्कान टिकी नहीं।
होंठ उठे तो थे, पर आँखों तक नहीं पहुँची।
जैसे होंठों ने धोखा दे दिया हो।
या शायद आँखों ने मना कर दिया हो।
मैंने फिर कोशिश की।
इस बार ज़ोर से।
दाँत दिखाकर।
वो मुस्कान जो ऑफिस में सबको दिखाती हूँ।
"गुड मॉर्निंग सर", "हाँ जी बिल्कुल", "नो प्रॉब्लम" वाली।
पर दर्पण ने कह दिया—नहीं।
ये भी झूठी लग रही है।
अब थोड़ा गुस्सा आया।
मैंने आईने से नज़रें मिलाईं।
और बोली—
"क्या प्रॉब्लम है तुझे?
बस एक मुस्कान ही तो चाहिए।
कितना मुश्किल है?"
आईना चुप रहा।
बस मेरी आँखें मुझे घूरती रहीं।
थकी हुई।
थोड़ी सूजी हुई।
और बहुत पुरानी।
मुझे याद आया—
पिछली बार कब सचमुच मुस्कुराई थी मैं?
नहीं, वो हँसी नहीं जो फ़ोन पर आती है।
नहीं, वो मुस्कान नहीं जो पड़ोसन को देखकर देनी पड़ती है।
वो मुस्कान जो अंदर से आती है।
जो छाती में गुदगुदी करती है।
वो कब आई थी आखिरी बार?
शायद उसी शाम जब राहुल ने कहा था—
"तू ऐसे ही मुस्कुराती रहे, बस।
बाकी सब मैं संभाल लूँगा।"
उसके बाद कभी नहीं आई।
न उसकी बात आई।
न वो शाम।
न वो मुस्कान।
मैंने हाथ बढ़ाया।
आईने पर उँगली रखी।
अपने होंठ छुए।
ठंडे थे।
जैसे किसी और के होंठ हों।
फिर धीरे से बोली—
"ठीक है।
न सही।
आज नहीं तो कल।
पर एक दिन फिर आएगी।
मुझे पता है।"
आईने ने जवाब नहीं दिया।
पर इस बार उसकी चुप्पी में कुछ अलग था।
जैसे वो कह रहा हो—
"मैं इंतज़ार कर रहा हूँ।
तू बस मत छोड़ना कोशिश।"
मैंने लाइट बंद की।
बाथरूम से निकली।
आज भी ऑफिस जाना था।
आज भी वही "गुड मॉर्निंग" वाली मुस्कान लगानी थी।
पर जाते हुए एक बार फिर मुड़ी।
अँधेरे में भी दर्पण पर हल्की-सी चमक थी।
शायद मेरी आँखों की।
या शायद उस मुस्कान की जो अभी आने वाली है।
बस इतना ही।
एक दिन।
एक कोशिश।
और थोड़ा सा भरोसा।
Dr. Damyanti H. Bhatt
मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌹🌹🙏🌹🌹
MOU DUTTA
শব্দ গুলো ভাঙছে ভীষন
পড়ছে মনে রোজ।
কি করে বলি তোমায়
তুমি আমার খোঁজ।
হয়তো সেদিন গোধূলিতে হয়েছিল দেখা,
হয়তো সেদিন হৃদয় মাঝে
হয়েছিল গাঁথা।
হয়তো সেই তুমি ছিলে অনেক খানি কাছে,
হয়তো রোজ পড়ে মনে
ভাবই তোমায় রোজ।
কি ভাবে বলি ভালোবাসা এবার থাক।
হয়তো দূরে তুমি আমি
তবু তুমি অনেক কাছে হৃদয় শুধু জানে,হয়তো তুমি আমার না তবু তুমি আমার।
হয়তো তুমি দূরে তবু
অনেক কাছে জানি।
হয়তো শূন্য হয়তো ভরাট হয়তো জ্যোস্না হয়তো রাত
হয়তো বুকে তুমি।
হয়তো শান্ত তুমি আর দুরন্ত এ হৃদয়।
হয়তো তুমি হয়তো আমি হয়তো হাসি হয়তো কথা হয়তো হৃদয় তুমি আছে কাছে।শুধু দূরে তুমি,হয়তো হৃদয়ের ওলি গোলি জানে কত না কথা জমে আছে মনে হয়তো জানো তুমি তাও অদেখা সকল বাক্য।
হয়তো তুমি অন্য কারো
হয়তো আমি দূরে।
হয়তো তোমার মুষলধারে
লেখা কবিতা।
হয়তো শূন্য বিকেল আমার হয়তো ক্লান্ত একা।
হয়তো তোমায় ভালোবেসে
বাক্য রা পেয়েছে ভাষা।
তুমি ওগো তুমি হয়তো তুমি আমার শেষ আশা।
Ghanshyam Awasthi
15 जनवरी— सेना-दिवस पर विशेष
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सैनिक! तुझको शत-शत प्रणाम।
संघर्ष कठिन सामने देख,
पग पीछे नहीं किये तुमने;
जनहित में, होकर महादेव-
विष के भी घूँट पिये तुमने।
बस, डटे रहे निज घाव लिये,
अनथक बिन विचलन, बिन विराम।
तेरी दृढ़ता के आगे नत,
जीवन के झंझावात रहे;
पथ से तू डिगा नहीं किंचित् ,
निष्प्रभ सारे आघात रहे।
हारे हैं तुझसे दण्ड-भेद,
हारे हैं तुझसे साम-दाम।
वीरता तुम्हारी रही बोल,
हैं वार तुम्हारे सीने पर;
माँ देख-देख व्रणहीन पृष्ठ,
गर्वित है तेरे जीने पर।
जन-जन आशीष रहा सन्मन,
ज्योतिर्मय युग-युग रहे नाम।
-- घनश्याम अवस्थी
गोंडा, उत्तरप्रदेश
सम्पर्क-- 9451607772
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M K
मैं मोहब्बत सी नहीं एक ख्वाहिश सी हूं,
जो तुम पा न सकोगे, वैसी आजमाइए सी हूं
बहुत हुआ, खुद के महफ़िल में रंग ज़माना
जो कुबूल न होगी तुम्हारी दुआ,
एक फरियाद सी हूं ....
- M K
Archana Singh
ना हीं मैंने कोई जप-तप किया ...
ना ही तीर्थ , ना ही माला फेरी ...
बस , अपने फर्जोंं को कभी ,
हंस कर तो कभी रोकर
निभाती चली गई ..!
बस ऐसे ही ज़िंदगी बिताती चली गई !!
- Archana Singh
Archana Singh
जनाब ...!
जरा संभल कर किया करो ,
हमारी बुराई , क्योंकि ...
आप जहां जताते हो...!
वो सब हमें बताते हैं ...!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
तन बिगड़ने वाले भोजन से ...
मन बिगड़ने वाले विचारों से ...
और जीवन बिगाड़ने वाले लोगों से ...
हमेशा दूर रहना चाहिए ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
अंधेरे को हटाने में
वक्त बर्बाद ना करें ,
बल्कि ! दिये को जलाने में
वक्त लगाएं !
दूसरों को नीचा दिखाने में नहीं ,
बल्कि ! खुद को
ऊंचा उठाने में वक्त लगाएं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
S A Y R I K I N G
तितली की तो आदत होती है फूल बदलना गुनहगार तो गुलाब है जो उसकी
याद में मुरझो गया ...
Archana Singh
वक्त की रफ़्तार
कहां धीमी हो पाती हैं ...!
जाने कौन सी मंजिल पाने को
वो ख़ुद को भी ना रोक पाती हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
दिन महीने में और ...
महीने सालों में बदल जाते हैं ,
पर यादों की सिलवटें तो ,
हमेशा अपनी कहानी
कहती रहती हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
लोग कहते हैं ...
वक्त हर ज़ख्म भर देता हैं ...
पर सच कहूं दोस्तों...!
तो उन ज़ख्मों के निशान
और टीस ___
कभी नहीं भरते ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
जनाब ! वो वक्त ज्यादा अच्छा था ,
जब कुछ समझ नहीं आता था ,
क्योंकि ...
जब से हम समझदार हुएं हैं ,
रिश्ते निभाना
ज्यादा मुश्किल हो गया हैं..!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Jatin Tyagi
बिना सिंध के हिन्द कहाँ है, रावी बिन पंजाब नहीं,
गंगा कैसे सुखी रहेगी, जब तक संग चिनाब नहीं।
लाहौर बिना तो संविधान की, हर बात अधूरी है,
बिना करांची कैसे कह दें—यह आज़ादी पूरी है।। 1
यह नक़्शों की ज़िद नहीं है, यह मिट्टी की पहचान है,
हर रेखा के नीचे दबा, एक अनकहा अरमान है।
जो बाँटा गया था सियासत में, वह आत्मा में आज भी एक है,
इतिहास बँट सकता है शायद, पर संस्कार नहीं बिखरते कभी नेक है।। 2
सरहदें सत्ता की चाल हैं, दिलों की नहीं दीवार,
जो तोड़ न सकीं संस्कृति को, वो क्या रोकें अधिकार।
काबुल से काशी तक कभी, एक ही चेतना बहती थी,
वेदों की ऋचा, सूफ़ी का कलाम—एक सत्य ही कहती थी।। 3
मैं युद्ध का नारा नहीं हूँ, न खून की भाषा जानता हूँ,
मैं घावों पर मरहम रखकर, इतिहास को समझाता हूँ।
जहाँ सच बोलना देशद्रोह नहीं, साहस की पहचान बने,
जहाँ भारत होना विचार हो, जो मानवता का मान बने।। 4
पेशावर की हवाओं में भी, वही मिट्टी की खुशबू है,
जो वृंदावन की गलियों में, आज भी जीवित जादू है।
नाम बदले, झंडे बदले, बदलीं सिर्फ़ मजबूरियाँ,
वरना आत्मा आज भी कहती है—हम एक ही पुरखों की धड़कनियाँ।। 5
अखंड भारत कोई सपना नहीं, यह सोई हुई चेतना है,
यह तलवार नहीं, यह सत्य है, जो हर युग में प्रेरणा है।
जिस दिन भय से मुक्त खड़ा होगा, जाग्रत हर नागरिक,
उस दिन गिर जाएँगी सीमाएँ, संस्कृति होगी अंतिम लिखित।। 6
मेरा भारत वह नहीं जो जीते, मेरा भारत वह है जो जोड़े,
जो बदले की आग नहीं, बल्कि विवेक के दीप को रोशन छोड़े।
जिस दिन हम डर से नहीं, धर्म से नहीं—सच से जुड़ेंगे,
उसी दिन मेरा अखंड भारत होगा—पूर्ण, निर्भय, चिरंजीवी, अटल रहेंगे।। 7
— जतिन त्यागी 'राष्ट्रदीप'
ArUu
अब मैं अलार्म नहीं लगाती
क्योंकि अब मेरा जगने का मन नहीं करता। जब तक सोती हूं पूरी दुनियां भूल जाती हूं जगते ही जगत के झमेले याद आने लगते है ।मुझे किसी का इंतजार नहीं।
अब मुझे कही नहीं जाना होता।
ऐसा नहीं है कि जाने के लिए जगह नहीं है।
पर अब बस मन नहीं करता।
ArUu ✍️
ArUu
सोना सबको पसंद है
गहरी नींद सबको भाती हैं
पर कोई शारीरिक रूप से सो रहा है तो कोई मानसिक रूप से।
शारीरिक रूप से सोने वाले लोगों को उठाना फिर भी आसान है।
थोड़ी मेहनत करो तो वो उठ जाते है।
पर मानसिक रूप से सोए लोगों को उठाना बहुत कठिन है।
पर जो उठना ही नहीं चाहता उनको गहरी सुषुप्त अवस्था से उन्हें उठाना असंभव है
ArUu
हम भारतीय लोग भी कितने दोगले है न
हर किसी के फट्टे में टांग अड़ाना अच्छे से जानते है।
दोगले है
इसलिए कहते है कि ये नववर्ष हमारा नहीं
पर जब अंग्रेजों के दिए खेल की बात हो तो करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति जाग जाती है
बड़ा सा हुजूम उमड़ पड़ता है।
ईसाइयों के त्यौहारों पर सबको तुलसी पूजा याद आ गई
और घर में लगाने को एक पौधा नहीं मिल रहा इनको।
प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की कोई कसर नहीं छोड़ते और बात करेंगे देशभक्ति की।
हां भाई हम भारतीय तो दोगले है।
ArUu ✍️
M K
एक याद जो मिट जाए दिल से,
एक बात जो फिसल जाए जुबा से,
अब दिल में न वो एहसास बचा है
जो तुम्हे याद करके रो सके ,,,,,
_M K
Rajeev Namdeo Rana lidhori
कविता पढ़ते हुए आया #हार्ट_अटेक
*टीकमगढ़* के कवि *श्री #सत्यप्रकाश_खरे जी* #का #पृथ्वीपुर में एक #कविगोष्ठी में आज दिनांक -14-1-2026 को शाम 6 बजे #कविता_पढ़ते हुए मंच पर ही #अटेक आने से दुखद #निधन हो गया है उनकी #अंतिम_कविता सुने जिसके एक मिनट बाद ही उन्हें #हार्ट_अटेक आ गयाऔर वे नहीं रहे..
*#ऊं_शांति_शांति_शांति*
*#राजीव_नामदेव #राना_लिधौरी*
#rajeev_namdeo_rana_lidhori
kajal jha
ज़िन्दगी एक साये सी राह है,
हर कदम पर सवालों का मेला।
दिल पूछे, ये सफ़र कहाँ ले जाएगा?
कहीं खो न जाएँ हम, अपनी ही पहचान में।कभी हँसी के फूल बिखरते हैं रास्ते पर,
कभी आँसुओं का सैलाब उमड़ आता है।
फिर भी चलते रहो, बिना रुके, बिना थके,
क्योंकि यही तो है, इंसान का असली इम्तिहान।
- kajal jha
Gunjan Banshiwal
स्वाभिमानी स्त्री अक्सर अकेली होती है,क्योंकि शेरनी को संभालने का हुनर केवल शेर रखता है
भेड़िए नहीं।
- Gunjan Banshiwal
Priya
जो सबको समझ में आ जाए
वो कहानी कहाँ मेरी
एक झूठ मेरा एक झूठ उसका
एक सच मेरा लेकिन फिर एक झूठ उसका
मेरी गलती अपराध
उसकी गलती की सबने माफ
वो खुश हैं सुकून में हैं
उसके साथ कुछ नये लोग भी हैं
सुना हैं वो मुझसे ज्यादा समझदार हैं
अरे नहीं!!शायद उस शख़्स को भी उससे प्यार हैं
मेरे लिए तो सब झूठा दिखावा था उसका
असली प्यार तो शायद उस शख्सियत की कर्जदार हैं
सुना हैं वो मनाना जानता हैं
हर बारी माफी अब वो ही मांगता हैं
मेरे साथ तो वो कोई राजा के जैसे था
गलती भी उसकी फिर भी
कभी ना साॅरी कहता था
शायद इसीलिए मैं बस एक किनारा बन गई
वो दरिया और मैं बस एक सहारा बन गई
मेरी किस्मत ने मेरे साथ कोई धोखा नहीं किया
बस उस शख़्स मुझें एक और मौका नहीं दिया
मैं बुद्धु जो हूँ,,,,मुझें लगा शायद गुस्से में
कोई बात मेरी कहीं चुभ गई उसे
लेकिन गलत मैं थी वो शख़्स सही था
वो प्यार नहीं था शायद वो वक्त सही था
मुझें छोड़कर जाने का उसे बहाना मिल गया
फिर उस मुसाफ़िर को
कोई नया किनारा मिल गया
इस बार ये बात कितनी दूर तक जायेगी
क्या जीवन भर वो उसका
साथ निभाएगी...
कुछ भी पता नहीं लेकिन ये सच
मेरे लिए अच्छा नहीं.....
मुझें मेरे होने पर संदेह होता हैं
किसी भी इंसान के दिल में दिमाग
कैसे होता है????
ये सवाल कई बार किया मैंने खुद से
फिर मेरे मन ने कहा मुझसे.....
अरे!!OG girl ....tumko budhu banaya gya hai
तुम्हारा किमती समय चुराया गया हैं।
भूल जाओ अब सब कुछ अब बदल नहीं सकता
जो एक धोखा दे सकता हैं क्या वो
दूसरी को धोखा दे नहीं सकता....
ना भी दे तो क्या....???
Who care's
But i feel very upset sometimes
I miss him isliye nahi buss isliye ki how foolish i am .
kattupaya s
Good evening friends.. have a blast evening
Arun V Deshpande
सण मकरसंक्रांत आला
सांगतो छान सर्वांला
नको कधी कुणाशी अबोला
तिळगुळ घ्या गोड बोला ।।
ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़
🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
ज़माने की बैसाखियों की ज़रूरत
नहीं मुझे,
मेरे इरादों में अभी वो उड़ान
बाकी है,
लोग ढूँढते होंगे मंज़िलें, दूसरों के
नक्श-ए-कदम पर,
मुझे तो खुद अपने पैरों से नयी
राह बनानी है…🫰
╭─❀💔༻
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh☜
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ek archana arpan tane
અગણિત જખમો નું ઉદાહરણ છું હું તો પણ કમાલ નું હસી શકું છું હું 😀😃🤩
- ek archana arpan tane
M K
कुछ सवाल जवाब नहीं माँगते,
बस इंसान को बदल देते हैं...
जिसे सबसे ज़्यादा चाहा मैने,
जाने क्यूं वही सबसे आसानी से छोड़ गया...!!
- M K
ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़
🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
उसे हुनर आता है, दरिया के बीच
कश्ती डुबोने का,
तुम किनारे की उम्मीद में अपनी
हस्ती मत खो देना,
वो तो औरत है उसे रुख बदलने
में वक़्त नहीं लगता,
तुम अपनी साख बचाए रखना
उसे तमाशा मत बना देना..🔥
╭─❀💔༻
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♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh☜
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M K
ख़ुद को खोकर जिसे पाया था कभी,
आज उसी को छोड़कर खुद से मिल रही हूं शायद...
- M K
महेश रौतेला
हर दिन यहाँ तीर्थ बना है
हर उजाला ज्योति बनी है,
हर पंछी उड़ान लिए है
हर नदी तीर्थ चली है।
हर पहाड़ पर ऊँचाई है
हर खेत में अन्न उगा है,
हर जंगल में हवा शुद्ध है
हर झरने पर दृश्य अलग है।
हर मानव में देव अनेक हैं
हर विद्यालय में ज्ञान विविध है,
हर पुष्प का सौन्दर्य निराला
हर आग का ताप अलग है।
हर त्योहार के संदर्भ पवित्र हैं
हर पग का नाप अलग है,
हर आन्दोलन की नींव नयी है
हर जीवन का लय गूढ़ है।
*** महेश रौतेला
M K
मेरे सब्र का इम्तिहान न ले ,
तुम मेरे मोहब्ब को फरेब कह सकते हो तो
मैं तुम्हारी खुशियों में नफरत की आग लगा सकती हूं..
सवाल पूछती हूं तो जवाब दिया कर ,
वरना मैं तो तुम्हारे हर एक झूठ से वाकिफ हूं...!!
_M K
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
#LoveLensStudio #RomanticShorts #LoveStory #CoupleVibes #DesiRomance
#HeartTouchingVideo #IndianCouple #LovePhotography #CinematicLove
#RajuKumarChaudhary #LensOfLove #RomanticReel
hitisha jain
I Am My Own Story
I am not a shadow, not a borrowed name,
I write my dreams in quiet flame.
With gentle words and fearless mind,
I leave my little stars behind.
They ask my age, I smile and say,
Dreams don’t count the years this way.
Today a page, tomorrow glory,
I am the writer of my story.
Heena Ramkabir Hariyani
આ શોધની સફર મારી હતી,
અને એક દિવસ મળ્યો મને તું,
પછી??
અરે,... હવે તો રોજ થાય છે
હુતુ.... તુ.... તુ... તુ.... તુ.... 😀
હીના રામકબીર હરીયાણી
Lakshmi Narayan Panna
अंधेरे को रौशन करके चला गया।
जलने वाला जलते जलते जला गया।।
पत्थर मुझको ठोकर देके सिखा गया।
चलने से डर लगता था वह चला गया।।
- Lakshmi Narayan Panna
Rinal Patel
આત્મસન્માનની પતંગ હંમેશા ઉંચીજ ઉડવી જોઈએ.
પણ જ્યારે સંબધોની વાત આવે ત્યારે એ પતંગ બધાન સન્માનને માન આપી ઉડાડજો.
Rinall..
softrebel
चिता सजे, मंत्र हों, अग्नि जले—
पर प्रतीक्षारत आँखें बंद मत कीजिए।
अंतिम संस्कार की एक ही परंपरा,
आज आप परिवर्तित कर दीजिए।
🫂🌚✨
- softrebel
Saroj Prajapati
पतंग सी है जिंदगी
कटना जिसका तय
क्यों ना फिर कटने से पहले
हसरतों की एक ऊंची उड़ान भर ली जाए ।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Vedanta Two Agyat Agyani
आध्यात्मिक जीवन: सरल बोध और मुक्ति का मार्ग ✧
आध्यात्मिकता का अर्थ
धन, साधन, धर्म या पद से ऊपर उठकर
जीवन को उसके स्वभाव में जीना है।
कई लोग
धन पाते हैं, साधन पाते हैं, शिक्षा पाते हैं—
पर जीवन नहीं जी पाते।
और जो जीवन नहीं जी पाया,
वह चाहे सब पा ले—भीतर से खाली ही रहता है।
जीवन को यदि सच में जी लिया,
तो मुक्ति अपने आप घटती है।
जैसे—
दीपक जला दिया जाए
तो प्रकाश पैदा करने की कोशिश नहीं करनी पड़ती।
प्रकाश अपने आप फैलता है,
अंधेरा अपने आप हट जाता है।
वैसे ही—
जीवन को उसके स्वभाव में जीने दो।
प्रकाश आएगा, अंधेरा जाएगा—
बिना प्रयास, बिना संघर्ष।
दीपक और जीवन-बोध
दीपक जलाना एक छोटा-सा कर्म है,
पर उसका परिणाम बड़ा होता है।
जीवन-बोध भी ऐसा ही है।
जिस ऊर्जा से धन, सुविधा, पहचान मिली—
यदि उसी ऊर्जा से
शांति और आनंद नहीं मिला,
तो समझो दिशा चूक गई।
तब आध्यात्मिक होना कोई विकल्प नहीं,
अनिवार्यता बन जाता है।
आध्यात्मिक जीवन का अर्थ है—
धन, साधन, प्रसिद्धि से मुक्त होकर
भीतर के एकांत में जीना।
इसके लिए
न शास्त्र चाहिए,
न भारी ज्ञान,
न कोई विशेष योग्यता।
ऊर्जा का प्राकृतिक बहाव: आनंद का मूल
ऊर्जा का स्वभाव है—
बहना, चलना, फैलना।
जैसे नदी
रुकने पर सड़ जाती है,
वैसे ही ऊर्जा
यदि केवल धन, धर्म, विज्ञान, प्रसिद्धि में खर्च हो
तो भीतर का आनंद सूख जाता है।
आनंद और शांति भी ऊर्जा से ही आते हैं—
पर भीतर बहने वाली ऊर्जा से।
आध्यात्मिकता का अर्थ है—
ऊर्जा को उसके प्राकृतिक बहाव में छोड़ देना।
कोई नियम नहीं,
कोई दबाव नहीं,
कोई संघर्ष नहीं।
अस्तित्व के साथ बहो।
प्रकृति के हवाले खुद को छोड़ दो।
भीतर प्रसन्न रहो—
यही बोध है।
इसे स्कूल, संस्था, पाठ्यक्रम बनाना
मूर्खता है।
यहीं से छल, व्यापार और नाटक शुरू होता है।
आध्यात्म की परिभाषा बहुत छोटी है—
मौन, आनंद, प्रेम और शांति में जीना।
जो-जो इसमें जोड़ा जाता है,
वही अशांति का कारण बनता है।
ऋषि जीवन: आदेश-मुक्त स्वभाव
हमारे ऋषि, मुनि, संत
इसी तरह जिए।
कोई आदेश नहीं,
कोई नियम नहीं,
कोई सामाजिक दबाव नहीं।
अपने स्वभाव में जीना—
यही उनका धर्म था।
यह कोई बड़ा ज्ञान नहीं,
बस एक सरल अवस्था है।
यदि धर्म, गुरु, व्यवस्था जरूरी होती,
तो यह जीवन
अनपढ़ और साधारण लोग नहीं जी पाते।
यही योग है,
यही आध्यात्म है,
यही ईश्वर-जीवन है।
ईश्वर कौन है?
कोई अलग बैठा ईश्वर नहीं।
एक सत्ता है
जिसमें सब घट रहा है—
पाप भी, पुण्य भी।
ईश्वर को मान लेने से
जीवन बेहतर नहीं हो जाता।
बेहतर होता है
जब जीवन में
आनंद, प्रेम और शांति उतरते हैं।
यही ईश्वर-शक्ति के शिखर हैं।
कोई गुरु
इन्हें दे नहीं सकता।
इन्हें जीना पड़ता है।
जीवन जैसा है,
उसे वैसा ही स्वीकार करना—
यही आध्यात्म है।
कोई दिखावा नहीं,
कोई तुलना नहीं,
कोई प्रतिस्पर्धा नहीं।
जी रहे हो—
तो दुखी मत बनो।
आज तुम सहभागी बनो,
कल कोई और बनेगा—
यही धर्म है।
जहाँ दुख दिखे—
वहाँ प्रेम दो,
हिम्मत दो,
भोजन दो,
सहारा दो।
धन जरूरी नहीं—
अंधे को सड़क पार करा देना भी धर्म है।
सच्ची सेवा: व्यक्तिगत बनाम संस्थागत
संस्था से शुद्ध सेवा मुश्किल है।
अक्सर
100 में से
75 भीतर ही खप जाते हैं,
25 सेवा बनते हैं—
वह भी प्रचार के साथ।
व्यक्ति
100% सेवा दे सकता है।
श्रेष्ठ वही संस्था है
जो दान न ले,
खुद साधन पैदा करे
और बिना शोर सेवा करे।
जो सेवा
ईश्वर, पुण्य, प्रचार से जुड़ जाती है,
वह दूषित हो जाती है।
पेड़ लगाओ—
बिना बैनर।
भूखे को खिलाओ—
इस तरह कि उसे पता भी न चले
किसने खिलाया।
यही असली सेवा है।
यही धर्म है।
यही शिक्षा है।
यही प्रेम है।
यही शांति है।
यही मुक्ति है
Bhavna Bhatt
મારી દોહિત્રી ખ્વાહીશ એ બનાવ્યો છે
Parmar Mayur
आसमान में उड़ रही पतंग को,
आसमां में है, इसका अभिमान आया।
बस फिर क्या?
खूब जोर करने लगी।
छोड़ दी हाथों में पकड़ रखीं दौर को,
सीधी जमीं पर आकर गिर पड़ी।
Kaushik Dave
ઠુમકા મારી હું પણ થાક્યો છતાં ન આવી હવા,
ફિરકી કહેતી શાંત થઈ ને, આવે છે હવે બગાસાં.
@ કૌશિક દવે
આજુબાજુ નજર કરી તો, બધાની છે આ દશા,
એકબીજા સામે જોયા કરતા,ન જોવા મળે તમાસા!
કાયપો છે ના અવાજો વચ્ચે ડીજે માં વાગે ગાના,
आंधी बनकर आया हूं मैं,ને આવી જાય છે હવે હવા.
સીટીઓ ને પીપુડી વચ્ચે, પતંગ ચગાવવાની મજા,
કોઈના પેચ કપાઈ જતાં ને કોઈના પેચ થઈ જતાં.
આ તો ભાઈ ઉત્તરાયણ છે,કરવી છે સૌને મજા,
ઊંધિયું જલેબી કચોરી ખાધી, પછી ડકાર ખાવાની મજા.
આજે ચગાવી લો પતંગ,પણ ખબર પડશે કાલે જ,
થાકી થાકીને ચૂર થાશો,ફરીથી ઉંધિયુ ખાવાની મજા!
- કૌશિક દવે
- Kaushik Dave
Armin Dutia Motashaw
❤️
दिल की पतंग, आकाश में इतनी भी दूर ન उड़ाना, कि हाथो से, डोर ही छूट
जाए ।
Anar
Amir Ali Daredia
સપના તો હોય છે સપનાઓ
અને તે હોય છે ફક્ત તુટવા માટે.
તમારી નશીલી આંખો જ કાફી છે
ફક્ત અમારા હોંશ લુંટવા માટે.
રોનક જોષી. રાહગીર
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GIRLy Quotes
https://www.instagram.com/reel/DRPDoICEkXT/?igsh=ajR4ZW4wdjRmM25o
બદનામ રાજા
હું આજીવન પતંગ બની ઉડતો રહીશ,
જો તું જીવન દોર બને મારી...
🌸❤️
Rinki Singh
कल मैंने
भीड़ से लथपथ एक सड़क पर
एक आदमी को देखा..
सब्ज़ी बेचता हुआ...
आँखें उसकी
मानो रातों से उधार ली हुई हों...
जागती हुई नहीं,
पर बुझी हुई भी नहीं
नाक में नली थी,
जैसे जीवन को किसी अदृश्य मशीन से
घसीट-घसीट कर खींच रहा हो..
बीमार था...
शायद बहुत बीमार...
पर बीमारी से ज़्यादा
वह भूख से लड़ रहा था,
और भूख से ज़्यादा
जीवन से झगड़ रहा था
वह हार मानने आया नहीं था
वह तो
उन्हें हराने की पूरी तैयारी में बैठा था
मृत्यु को, दया को,
और उस व्यवस्था को
जो आदमी को पहले थकाती है
फिर उसे भीख का पात्र बनाती है
उसके आगे
न कोई चादर बिछी थी,
न कोई कटोरा रखा था
उसने न इंसान से याचना की थी,
न भगवान से सौदेबाज़ी..
वह सड़क पर बैठा मेहनत का सामान लेकर
स्वाभिमान लेकर
वह आदमी...
मुझे हौसला दे रहा था
कि ज़िंदगी से
थोड़ा और साहस से
आँखें मिलाई जा सकती हैं
मैंने महसूस किया..
क्रांति कभी
नारे लगाती नहीं,
कभी-कभी
नाक में नली लगाए
सब्ज़ी बेचती हुई
चुपचाप..
सड़क पर बैठी होती है
~रिंकी सिंह
Dr Yogendra Kumar Pandey
मातृभारती के सभी पाठकों को आज भगवान सूर्य के उत्तरायण और मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
🚩🪁🙏
yeash shah
Astrology is Real or Fake?
Astrology is a wisdom that connects Astronomy with Individual’s Life through Birth chart prepared According to Birth place Longitude and Latitude,Birth Time and Birth Date.
Astronomy is Real and Scientific… but That Astronomy is Connected with Individual ‘s life through Imagination of Traits of Zodiac signs, Nakshatras and Planets. Eg: the shape of Leo sign is like lion.. and it governs the Traits of Authority. This is an imagination.
So Astrology is a Combination of Science as well as Imagination. The Astronomical Effects can be proven through Logic, Reason and Evidences but Astrological effects are Subjective, personalised and Based on Individual’s Own beliefs or thinking.
So, Science+ Art = Wisdom
Various Other Subjects are also connected with Astrology like Mathematics, Phycology and Panchangam .. which makes the subject Comprehensive and detail oriented. There are many Parts and Systems of Astrology, like Madical Astrology,Career Astrology, Relationship Astrology,Mundane Astrology.. And Systems like Traditional parashar Astrology,Brighu Nadi System, Lal Kitab,Kp System,Asthakvarga..
The core purpose of Astrology is to Spread Awareness and guidance about Individual’s Life.. and Predict Future Aspects of Individual’s Life.
In total
Astrology can Guide both the Aspects of human Life Reality and Human Luck.
Hardik Boricha
मीठे गुड में मिल गए तिल,🌸
उडी पतंग और खिल गए दिल,❤️
हर पल सुख और हर दिन शांति,🙏
आप सबके लिए लाये मकर संक्रांति👍
💐💐मकर संक्रांति की शुभकामनाये💐💐
🌻🌹🌻Good Morning🌻🌹🌻
Jyoti Gupta
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