Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
kattupaya s
That's all now friends.. see u soon be happy
kattupaya s
There is a huge gap between my goal and activities. that causing the delay in writing projects. iam always waiting for someone in online. it's a bad habit. people move forward they want new things to cheerup
kattupaya s
without writing I feel something lost. laziness creates lot of pressure. soon I hope to write something nicely.
kattupaya s
I know some people are so busy.. yet they never forget to remember you for the happiest moments they shared. keep going life will be happy
kattupaya s
don't worry. just a day
kattupaya s
it's just close
kattupaya s
Iam waiting..
Sonu Kumar
भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ?
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मीडिया घाटे का कारोबार है। मीडिया का घाटा पूरा करने या इन्हें भुगतान करने वाले समूहों के आधार पर भारत में मीडिया के 2 वर्ग है :
चूंकि दूरदर्शन के कर्मचारियों को वेतन नागरिको द्वारा वसूल किये गए टेक्स से चुकाया जाता है, अत: सरकार द्वारा नियंत्रित मीडिया सिटिजन पेड मीडिया है।
प्राइवेट मीडिया का घाटा निजी कम्पनियों के मालिक पूरा करते है, और वे ही सूचनाएं देने के लिए मीडियाकर्मीयों को भुगतान करते है।
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लोकतंत्र आने के बाद से मीडिया समूह दुसरे नंबर की सबसे ताकतवर कम्पनियां बन गयी है। पहला नंबर हथियार बनाने वाली कम्पनियों का है। पिछले 200 वर्षो से वैश्विक राजनीती पर हथियार निर्माताओ का कब्जा है, और दुनिया में सबसे बेहतर हथियार बनाने वाली कम्पनियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिको के पास है।
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जो भी देश अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों को टक्कर देने वाले हथियार नहीं बना पा रहा है, उन देशो के मीडिया को अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है। भारत भी हथियार निर्माण में काफी पिछड़ा हुआ है, अत: भारत के मीडिया को भी अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है।
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इन कम्पनियों का मुख्य एजेंडा वैश्विक भारत पर आर्थिक-सामरिक-धार्मिक नियंत्रण बनाना है। पेड मीडिया के माध्यम से वे भारत की मुख्यधारा की सभी राजनैतिक पार्टियों एवं नेताओं को नियंत्रित करते है, ताकि इनका इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में किया जा सके।
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[ इस जवाब में 3 खंड है। पहले खंड में उन कम्पनियों के बारे में कुछ विवरण है जिनका वैश्विक एवं भारतीय मीडिया में सबसे प्रभावी दखल है। खंड (2) में पेड मीडिया के प्रायोजको के वैश्विक एजेंडे को भारत के सन्दर्भ में बताया है। खंड (3) में उन कदमों का विवरण है, जिन्हें उठाकर आप उनके एजेंडे को ज्यादा अच्छे से समझ सकते है। मूल जवाब दुसरे खंड में है, अत: आप सीधे खंड (2) को पढ़ सकते है। ]
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खंड 1 ; पेड मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियां कौन है ?
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राजतन्त्र में गेजेट छापने की शक्ति राजा के पास थी। राजा के पास सेना होती थी, और इसीलिए राजा ताकतवर था। 12 वीं सदी में युरोप में जूरी सिस्टम आया और ब्रिटेन-फ़्रांस ने तेजी से तकनिकी विकास करना शुरू किया। चूंकि निर्णायक हथियारो पर नियंत्रण से वास्तविक ताकत आती है, अत: जब भी किसी राज्य में तकनिकी विकास होता है तो अंततोगत्वा यह विकास हथियार निर्माण की दिशा में मुड़ जाता है।
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17 वीं सदी में ब्रिटेन में निजी कम्पनियां बड़े पैमाने पर हथियार बनाने लगी थी, और 18 वीं सदी तक आते आते उन्होंने ऐसे निर्णायक हथियार बना लिए थे कि जिस सेना के पास ये हथियार होते थे वह सेना जीतना शुरू कर देती थी।
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उदाहरण के लिए 1805 से 1815 के बीच सिर्फ बर्मिघम के कारखानों ने ही लगभग 40,00,000 बन्दूको का उत्पादन किया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी इन्ही बन्दूको की सहायता से विभिन्न राजाओ की सेनाओं को हराकर अपने उपनिवेश स्थापित कर रही थी। बन्दूको निर्माण की दूसरी कॉटेज इंडस्ट्री लन्दन में थी। लन्दन एवं बर्मिंघम में बंदूक बनाने के इन कारखानों के मालिको ने ही पूरी दुनिया में ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार को सुनिश्चित किया।
Brief History
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उस समय बंदूक निर्णायक हथियार थी, और इसके उत्पादन पर नियंत्रण रखने वालो की ताकत को आप इस तरह समझ सकते है कि, यदि 1 लाख बन्दूको एवं कारतूस की पेटियों से भरा जहाज सिराजुद्दौला को सप्लाई कर दिया जाता तो क्लाइव लॉयड न तो प्लासी का युद्ध जीतता था और न ब्रिटिश भारत में घुस पाते थे।
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सिराजुद्दौला के पास यह अस्लहा आ जाता तो वह पूरे भारत को भी टेक ओवर कर लेता। लेकिन पूरे भारत का बादशाह बनने के बाद भी क्या सिराजुद्दौला बर्मिंघम के फैक्ट्री मालिक से टकराव ले सकता था ? नहीं !! क्योंकि वे सिराजुद्दौला के प्रतिद्वंदियों को 4 जहाज भरकर बंदूक भेज देते है, और सिराजुद्दौला के कारतूसो की सप्लाई रोक देते !! और इस तरह नवाब फिर से पिट जाता !! क्योंकि असली ताकत तब आती है जब आप अपने हथियार खुद बनाते हो।
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मतलब, 200 साल पहले ही राजा वगेरह नाम के राजा रह गए थे, और असली ताकत हथियार निर्माताओं के पास आ चुकी थी। पेड इतिहासकार इन तथ्यों को दर्ज नहीं करते, क्योंकि उन्हें यह जानकारी छिपाने के लिए पेमेंट की जाती है।
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बहरहाल, सिराजुद्दौला और भारत के अन्य राजाओं को हथियार बनाने वाली कंपनियों ने हथियार नहीं दिए, और वे हारते चले गए !! शिवाजी के पास पुर्तगाली तोपे थी, और यह एक बड़ी वजह थी कि वे मुकाबला कर पा रहे थे। बाजीराव को फ्रेंच तोपे सप्लाई कर रहे थे, और अहमद शाह अब्दाली के पास रशियन तोपखाना था।
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1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया तो जवाहर लाल ने अमेरिका-रूस को हथियार भेजने के लिए चिट्ठियां लिखी थी। और जब चीन को लगा कि भारत को हथियारों की सप्लाई आ सकती है, तो चीन ने बढ़ना रोक दिया।
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1965 में भारत पाकिस्तान में अन्दर तक चला गया था, लेकिन अमेरिका यानी हथियार बनाने वाली कपनियों के हस्तक्षेप के कारण हमें रुकना पड़ा। 1971 में फिर से यही हुआ। अमेरिका ने अपना नौ सेना बेड़ा पाकिस्तान की मदद के लिए रवाना कर दिया, और हमें फिर पीछे हटना पड़ा !! रूस के बीच में आने की वजह से हम बच गए वर्ना अमेरिकी धनिक भारत को 1971 में ही टेक ओवर कर लेते थे। और रूस अमेरिका को इसीलिए रोक पाया क्योंकि उस समय अमेरिका के साथ साथ रूस के पास भी निर्णायक हथियार थे।
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आप पिछले 200 सालो में हुए दुनिया के सभी युद्धों का अध्ययन करके देख सकते हो। जिस देश को निर्णायक हथियार बनाने वाली कम्पनियों का सहयोग मिला हुआ है, वे देश युद्ध जीत जाते है, वर्ना हार जाते है !! 16 वीं सदी से पहले तक बड़ी सेना का महत्त्व होता था, लेकिन बाद में जैसे जैसे हथियारों की तकनीक उन्नत होती गयी वैसे वैसे युद्ध में निर्णायक भूमिका हथियारों की हो गयी। द्वितीय विश्व युद्ध 6 साल तक चलता रहा लेकिन अमेरिका के फाइटर प्लेन ने 2 बम गिराकर युद्ध का फैसला कर दिया था।
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तब से आज हथियारों की तकनीक इतनी आगे जा चुकी है कि निर्णायक हथियारों से लैस 5 हजार का दस्ता 50 लाख की सेना को ख़त्म कर सकता है। वो भी परमाणु बमों का इस्तेमाल किये बिना।
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मेरा बिंदु यह है कि पिछले 200 वर्षो से इस धरती पर सबसे ताकतवर समूह हथियार कम्पनियां है, और अमेरिकी कम्पनियों के मालिक सबसे बेहतर एवं सबसे मारक हथियार बना रहे है। और इस वजह से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक वास्तविक अर्थो में वैश्विक राजनीती को प्रभावित एवं नियंत्रित करते है।
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हथियार कम्पनियों के मालिको को सस्ते में माल बनाने के लिए मुफ्त का कच्चा माल यानी खनिज चाहिए। तो वे हथियारों का इस्तेमाल करके राजा को नियंत्रित (उपनिवेश की स्थापना) करते थे, और फिर खनिज लूटते थे। डेमोक्रेसी आने के बाद राजा की जगह पीएम ने ले ली, अत: उन्होंने लूट चलाने के लिए पीएम को कंट्रोल करना शुरू किया।
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पीएम को कंट्रोल करने के 2 तरीके है
या तो आपको पीएम को युद्ध में हराने की क्षमता जुटानी होगी,
या फिर चुनाव में।
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युद्ध में खून खराबा होता है, और लागत भी काफी ज्यादा आती है। अत: हथियार कम्पनियों के मालिको ने मतदाताओं को चाबी देने के लिए पेड मीडिया पर कंट्रोल लेना शुरू किया। पेड मीडिया द्वारा वे मतदाता को नियंत्रित करते है, और मतदाता के माध्यम से पीएम एवं राज नेताओं को। यदि किसी देश का पीएम मीडिया पर अपना कंट्रोल लेने की कोशिश करेगा तो उसे युद्ध में जाना पड़ेगा।
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निर्णायक हथियारों के अलावा ये कम्पनियां और भी ऐसी ढेर सारी तकनिकी वस्तुएं बनाती है जो दुनिया के ज्यादातर देशो को बनानी नहीं आती। और इन वस्तुओ के बिना न तो देश चलाया जा सकता है, और न ही बचाया जा सकता है।
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इसमें मुख्य रूप से हथियार, इंधन, दवाइयाँ, चिकित्सीय उपकरण एवं माइनिंग मशीनरी शामिल है। किन्तु निर्णायक बढ़त फिर भी इन्हें हथियारों से ही मिलती है। क्योंकि किसी भी प्रकार के टकराव का अंतिम पड़ाव हमेशा युद्ध ही होता है।
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निचे मैंने कुछ ताकतवर कम्पनियों के बारे में सांकेतिक जानकारी दी है। अन्य विवरण के लिए कृपया गूगल करें।
Infographic: The World's Biggest Arms-Producing Companies
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Lockheed Martin, USA ($40.83 billion)
Boeing , USA ($29.51 billion)
Raytheon , USA ($22.95 billion)
BAE Systems , USA ($22.79 billion)
General Dynamics , USA ( $19.23 billion)
Airbus group, Trans-European : ($11.2 billion)
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और ऐसी 15 से 20 कम्पनियां है जो अपना समूह (लॉबी) बनाकर काम करती है। इन कंपनियों के कुल एसेट्स को आप जोड़ ले तो योगफल भारत के कुल विदेशी मुद्रा कोष से कहीं ज्यादा निकल जाएगा, और जहाँ तक ताकत की बात है इनमे से प्रत्येक कम्पनी की ताकत पूरे भारत देश से ज्यादा है। मतलब यदि ऊपर दी गयी किसी भी कम्पनी या इस कम्पनी समूह से भारत का युद्ध हो जाता है तो ये कम्पनियां भारत को उधेड़ कर रख देगी !! क्योंकि ये कम्पनियां ऐसी चीजे बनाती है, जो दुनिया के ज्यादातर देश नहीं बना पाते !!
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लॉकहिड मार्टिन पर गूगल करें कि ये कम्पनी किस तरह के सामान बनाती है ; Lockheed Martin - Wikipedia
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यदि ये कम्पनियां भारत पर हमला करने के लिए अपने उन्नत हथियार बांग्लादेश या पाकिस्तान को डिस्काउंट / मुफ्त में देना शुरू करें (जैसा कि उन्होंने कारगिल में किया था) और हमारी सप्लाई लाइन काट दे तो हमारे पास क्या विकल्प है !! सिर्फ रूस ही ऐसे हथियार बनाता है जो इनके हथियारों का मुकाबला कर सके। लेकिन 1971 की बात और थी। आज रूस इन कम्पनियों के खिलाफ जाकर भारत को मदद देने का जोखिम नहीं उठा सकता। कारगिल युद्ध में भी रूस पीछे हट गया था और उसने हमें लेसर गाइडेड बम नहीं भेजे थे।
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और फिर ये कोई देश नहीं है कि हम इनसे कोई वार्ता कर सके। ये निजी कम्पनियां है, और सिस्टम से बाहर काम करती है। ये बोल देंगे ये सामान बनाकर बेचना हमारा धंधा है। आपसे पूछकर बनायेंगे और बेचेंगे क्या !! तुम्हारी हैसियत है तो तुम भी बना लो, कौन रोक रहा है !!
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मिसाल के लिए, जब भारत का कारगिल युद्ध हुआ तो हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और ये बम सिर्फ इन्ही कंपनियों को बनाने आते है। यदि हमें ये बम नहीं मिलते तो हम कारगिल नहीं जीत सकते थे !! यह एक तथ्य है !! और अभी जब हमें एयर स्ट्राइक करनी थी तो फिर से हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और फिर से हमें इनसे विनती करनी पड़ी कि वे हमें लेसर गाईडेड बम उपलब्ध कराए !! यदि ये कम्पनियां हमें बम न भेजती तो स्ट्राइक न होती थी !! यह एक तथ्य है !!
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कारगिल में जब हमारी यह कमजोरी खुलकर नागरिको के सामने आ गयी थी तो वाजपेयी ने लेसर गाईडेड बम (सुदर्शन) बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। लेकिन तमाम कोशिशो के बावजूद हम काम आने लायक लेसर गाइडेड बम नहीं बना सके !! यह भी एक तथ्य है !!
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अभी ये सिर्फ हथियार कम्पनियां है। इसके बाद तेल निकालने वाली कम्पनियां आती है। भारत के पास तेल के कुँए तो है लेकिन तेल निकालने की तकनीक नहीं है। दुनिया में तेल निकालने की तकनीक भी लगभग दर्जन भर कंपनियों के पास ही है। अब भारत अपना 80% तेल भी आयात करता है, और हम अपने 80% हथियार भी विदेशियों से लेते है !!
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हथियार कम्पनियों के मालिको ने पहले सत्ताओ को कंट्रोल किया, और फिर इकॉनोमी को कंट्रोल करने के लिए उन्होंने बैंक खोले। अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ( जो डॉलर छापता है ) पर गूगल करिए। इसकी होल्डिंग प्राइवेट बैंको के पास है। इसके बाद इन्होने तेल निकालने की तकनीक जुटाई और इस पर एकाधिकार बनाया।
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इसके बाद चिकित्सीय उपकरण जैसे MRI, अल्ट्रा साउंड, हार्ट सिटी स्कैनर एवं आवश्यक दवाइयाँ बनाने वाली कम्पनियां। और ये जो मशीने बनाते है उनकी तकनीक भी कुछ गिनी चुनी कंपनियों के पास है। और फिर इन ताकतवर कंपनियों के पीछे अमेरिका की अन्य मल्टीनेशनल कम्पनियां जैसे बैंक, खनन, बीमा, संचार, कम्प्यूटर आदि।
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कुल मिलाकर कुछ 100 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एक समूह है, जिनके पास ऐसी तकनीक है जो दुनिया के 190 देशो के पास नहीं है। और कुछ 30-40 अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच घराने है, जो पिछले 150 वर्षो से इन कम्पनियों को चला रहे है। यही अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक पेड मीडिया के प्रायोजक है !!
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इन कम्पनियों की बढ़त तकनीक की वजह से है। पिछली 2 सदियों से इन्होने इस तकनीक पर एकाधिकार बनाकर रखा है। अन्य देश यदि यह तकनीक जुटा लेते है तो इनकी ताकत खत्म हो जायेगी। अत: इन कम्पनियों के मालिक पिछले 200 वर्षो से बराबर इस मद में निवेश कर रहे है कि अन्य देश यह तकनीक न जुटाएं।
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यदि पीएम ऐसे क़ानून छापने लगता है जिससे अमुक देश में तकनिकी उत्पादन होने लगे तो ये कम्पनियां अपना बाजार खोने लगेगी। अत: अपने कारोबारी हितो को बचाने और अतिरिक्त मुनाफा बनाने के लिए उन्हें पीएम को कंट्रोल की जरूरत होती है। और पीएम को कंट्रोल करने के लिए इन्हें मीडिया पर कंट्रोल चाहिए !!
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पेड मीडिया के अंग : पेड मीडिया सिर्फ न्यूज चेनल एवं अखबार नहीं है। इसका फैलाव इससे कहीं विस्तृत एवं गहरा है।
मुख्य धारा के सभी न्यूज चैनल एवं सभी मनोरंजन चैनल
मुख्य धारा के सभी अख़बार
सोशल मीडिया कम्पनियां
गणित-विज्ञान-एकाउंट्स को छोड़कर सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकें एवं साहित्य
मुख्यधारा की सभी खबरिया एवं मनोरंजन मैगजीने
मुख्यधारा की सभी फ़िल्में
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जब पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण नेताओं पर कमजोर हो जाता है, तो उनके एजेंडा भी धीमा हो जाता है, और जब उनका नियंत्रण बढ़ता है तो उनके एजेंडे की रफ़्तार भी बढ़ जाती है। इस तरह पिछले 74 सालों में नियंत्रण घटने-बढ़ने के कारण उनके एजेंडे की रफ़्तार भी घटती-बढती रहती है। किन्तु 2001 के बाद से उनका नियंत्रण लगातार बढ़ता जा रहा है, और आज यह इतना बढ़ चुका है कि पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में भारत से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके है।
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1947 से 1990 तक भारत में पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण कब बढ़ा / घटा, जानने के लिए यह जवाब पढ़ें : क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं -- https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/
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खंड 2 ; पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है ?
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उनका मुख्य एजेंडा अपने कारोबारी हितो की रक्षा करना है। चूंकि उनकी शक्ति का स्त्रोत हथियारों की तकनीक पर टिका हुआ है, अत: किसी देश के नेताओं को नियंत्रण में लेने के बाद वे उन्हें बाध्य करके ऐसे क़ानून छपवाते है जिससे देश तकनिकी वस्तुओं का उत्पादन न कर सके। इसके लिए वे गेजेट एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
गेजेट में वे ऐसी इबारते छपवाते है जिससे उनकी शक्ति बढे
और नागरिको को भ्रमित करने के लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है
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जवाब के इस भाग में मैंने उन कानूनों एवं लाक्षणिक बिन्दुओ के बारे में जानकारी दी है जिनका अवलोकन करके आप यह जान सकते है कि भारत में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक अपना एजेंडा किस गति से लागू कर रहे है।
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का एजेंडा :
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(1) आर्थिक नियंत्रण बनाने के लिए
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(1.1) भारत के प्राकृतिक संसाधन एवं खनिज लूटने के लिए उनका अधिग्रहण करना।
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(1.2) आवश्यक सेवाओं जैसे मीडिया, पॉवर, बैंकिंग, माइनिंग, रेलवे, एविएशन, ऑटो मोबाइल, निर्माण, कृषि, दवाइयाँ आदि के कारोबार पर एकाधिकार बनाना।
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वे पेड मीडिया पार्टियों एवं उनके नेताओं का इस्तेमाल करके गेजेट में लगातार ऐसी इबारतें छपवायेंगे जिससे देश की राष्ट्रिय संपत्तियां, प्राकृतिक संसाधन, सार्वजनिक उपक्रम आदि बिक जायेंगे और ये संपत्तियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों के स्वामित्व में चली जाएगी।
पेड मीडिया में इस बेचान को एक सधी हुयी आर्थिक नीति एवं साहसिक फैसले के रूप में बताया जाएगा। नागरिको का ध्यान बंटाने के लिए वे अस्पष्ट आर्थिक शब्दावली जैसे विनिवेश, विदेशी निवेश, आर्थिक सुधार, निजीकरण, पीपीपी मोड़, उदारीकरण, भूमंडलीकरण, पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, नव उदारवाद आदि का इस्तेमाल करते है।
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[ उदारहण के लिए, अभी टाटा झारखंड में 1 रू सालाना की दर पर कोयला खोद रहा है, जबकि बाजार भाव 2,000 रू टन का है। और यह जानकारी भी सामने इसीलिए आ पाई क्योंकि जियो के कारण डोकोमो का धंधा सिकुड़ने लगा और टाटा ने जियो के रास्ते में सरकारी अडंगे लगाने शुरू किये। और फिर रिलायंस ने टाटा की घड़ी दबाने के लिए फर्स्ट पोस्ट को यह खबर लगाने के लिए पेमेंट की !! ऐसी सैंकड़ो खदाने है जहाँ से इसी तरह से खनिज लूटे जा रहे है।
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पेड मीडिया इन्हें रिपोर्ट नहीं करता इसीलिए हमें यह मालूम नहीं होता। टाटा 1947 से ही 1 रू में यह कोयला खोद रहा है, लेकिन 74 साल में किसी ने भी इस खबर को रिपोर्ट नहीं किया। टाटा अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों की शेल कम्पनी है। जब ब्रिटिश गए थे इन्हें इस तरह के कई माइनिंग राइट्स मुफ्त में दे गए थे। आज भी इनके सभी धंधे अमेरिकन एवं ब्रिटिश धनिकों की मशीनों पर चल रहे है। 1990 के बाद से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने सीधे भारत में आना शुरू किया और अब वे बेहद तेजी से भारत के संसाधनों का अधिग्रहण कर रहे है। ]
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(1.3) भारत में तकनिकी उत्पादन करने वाली छोटी स्वदेशी इकाइयों को बाजार से बाहर करना।
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तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय छोटे कारखानों को बाजार से बाहर करना उनका मुख्य एजेंडा है। जिस देश में छोटे कारखानों का आधार टूट जाता है, वह देश हमेशा के लिए तकनीकी वस्तुओ के लिए परजीवी हो जाता है। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जहाँ भी जाती है वहां के तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय कारखानों को गायब करने में काफी संजीदगी से काम करती है। तकनिकी आधार टूटने के बाद अमुक देश हर क्षेत्र में तकनीक के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों का ग्राहक बन जाता है।
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बॉटम 80% का गणित-विज्ञान का आधार तोड़ना।
अनुत्पादक नस्ल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को इतिहास, राजनीती विज्ञान, मनोरंजन, खेलकूद आदि जैसे क्षेत्रो में जाने के लिए प्रेरित करना।
रेग्रेसिव टेक्स सिस्टम में छोटे कारोबारीयों का कारोबार बड़ी फैक्ट्रियो के पास चला जाता है। अत: वे रिग्रेसिव टेक्स प्रणाली के समर्थन, एवं प्रोग्रेसिव टेक्स के सख्त खिलाफ है। सेल्स टेक्स, एक्साइज टेक्स, वैट एवं जीएसटी आदि सभी रिग्रेसिव टेक्स प्रणालियाँ है।
वे गेजेट में ऐसी इबारतें छापेंगे जिससे शहरी क्षेत्र की जमीन महंगी बनी रहे। जमीन की कीमतें ऊँची रहने से कारखाने लगाना मुश्किल हो जाता है।
तकनिकी उत्पादन तोड़ने के लिए उन्हें अदालतों एवं पुलिस का ऐसा स्ट्रक्चर चाहिए कि पैसा फेंकने वाले का काम हो सके। यदि किसी देश में अदालतें एवं पुलिस ईमानदार है तो तकनिकी विकास में विस्फोटक विकास होने लगता है। अत: वे अदालतों को किसी भी कीमत पर केंद्रीकृत बनाये रखना चाहते है।
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(2) सैन्य नियंत्रण बनाने के लिए
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आर्थिक नियंत्रण बढ़ने के साथ ही अगले चरण में वे सैन्य नियंत्रण बनाना शुरू करते है। यदि कोई देश अपने आर्थिक क्षेत्र अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को देने से इनकार करता है तो फिर कोई न कोई बहाना से सेना भेजकर पहले सैन्य नियंत्रण बनाया जाता है, और फिर वे अर्थव्यवस्था का अधिग्रहण करना शुरू करते है। ईराक इसी मॉडल का शिकार हुआ था, और अब ईरान का नंबर है। भारत ने आर्थिक नियंत्रण देना स्वीकार कर लिया अत: हम युद्ध से बच गए। और अब वे सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की इबारतें गेजेट में छपवा रहे है।
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(2.1) भारत की सेना पर नियंत्रण बनाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के हथियार इंस्टाल करना।
अगस्तावेस्ट लेंड, रफाल आदि के बाद अभी जब ट्रंप ने भारत की विजिट की तो फिर से भारत को 3 बिलियन डॉलर के ब्लेक हॉक हेलीकोप्टर लेने के लिए बाध्य किया। इन सभी जटिल हथियारों को खरीदते समय निर्माता से End Use Monitoring Agreement करना होता है। EUMA और स्पेयर पार्ट्स की निर्भरता के कारण सेना हथियार का इस्तेमाल करने के लिए अमुक निर्माता पर हमेशा निर्भर बनी रहती है।
भारत ने इंसास राइफलो में सुधार एवं उत्पादन को बेहद धीमा कर दिया है, और अमेरिका भारतीय सेना में अपनी राइफले इंस्टाल कर रहा है। पिछले वर्ष ही सेना ने इंसास का ऑर्डर केंसिल करके 6 लाख रायफल का कोंट्रेक्ट अमेरिकी कम्पनी को दिया है।
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(2.2) भारत के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न होने देना।
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पाकिस्तान के पास सामरिक बम है और वह आज भी अपनी परमाणु क्षमता निरंतर बढ़ा रहा है। भारत के पास सामरिक परमाणु बम नहीं है, और अमेरिका 123 एग्रीमेंट करके 2008 में ही हमारा परमाणु कार्यक्रम बंद करवा चुका है। 2010 में पोकरण-2 के मुख्य वैज्ञानिक ने ( रिटायर होने के बाद ) सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि भारत का हाइड्रोजन बम का टेस्ट असफल रहा था। फिशन ब्लास्ट का परिक्षण सफल था, किन्तु हम फिशन और लोइल्ड डिवाइस का परिक्षण तो 1974 में ही सफलतापूर्वक कर चुके थे। बाद में इसकी पुष्टि परिक्षण में शामिल अन्य वैज्ञानिक ने भी की। इसके अलावा भारत ने आज तक कभी भी वातावरणीय परिक्षण भी नहीं किया है। और फिर भी हम अपना सैन्य परमाणु कार्यक्रम बंद कर चुके है।
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(2.3) भारत एवं विशेष रूप से कश्मीर में अपने सैन्य अड्डे बनाना।
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ईरान+चीन के खिलाफ भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहते है, और इसके लिए उन्हें भारत की जमीन-सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए। अभी आप भारत में जो हिन्दू-मुस्लिम तनाव देख रहे है, यह इसी नीति का हिस्सा है। भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ने के बाद जब अमेरिका भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करेगा तो एंटी-मुस्लिम सेंटिमेंट की लहर की चपेट में आकर भारतीय हिन्दू ईरान में सेना भेजने का विरोध नहीं करेंगे।
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(2.4) नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना।
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यह सब तभी तक चलता है, जब तक नागरिको को इस बारे में पता नहीं रहे कि उनका पीएम अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियंत्रण में जा चुका है। यदि राजनैतिक कार्यकर्ता एवं नागरिक पेड मीडिया की चपेट से बाहर आ जाते है, या कोई नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के खिलाफ हो जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को निष्कासित करने और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक कानूनों की मांग को लेकर जन आन्दोलन खड़ा हो सकता है।
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और तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास भारत को काबू करने का एक मात्र विकल्प यह होगा कि वह सीधे सेना का इस्तेमाल करे। किन्तु जिस देश के नागरिको के पास हथियार होते है उस देश की सेना को तो हराया जा सकता है, किन्तु टेरेटरी को टेकओवर नहीं किया जा सकता। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों नागरिको को हथियार रखने की अनुमति देने के सख्त खिलाफ है।
उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके भारतीयों के दिमाग में हथियारों के प्रति इतनी नफरत भर दी है कि यदि आप घर घर जाकर फ्री में बंदूके बाँटोगे तब भी अधिकांश नागरिक इन्हें लेने से इनकार कर देंगे। उन्होंने प्रत्येक भारतीय के दिमाग में यह वाक्य नट बोल्ट से अच्छी तरह से कस दिया है कि – यदि भारतियों को को बंदूक रखने की अनुमति दे दी गयी तो वे एक दुसरे मार देंगे !!
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(3) धार्मिक नियंत्रण बनाने के लिए :
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अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का गठजोड़ मिशनरीज के साथ है। अत: जब किसी देश पर उनका आर्थिक-सैन्य नियंत्रण बढ़ता है, तो अगले चरण में वे स्थानीय धर्मो को आपस में लड़वाकर कन्वर्जन के प्रयास शुरू करते है। पिछले 400 सालो से अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का यही ट्रेक रहा है।
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(3.1) भारत में सांप्रदायिक आधार पर अलगाववादी हिंसक गृह युद्ध की जमीन तैयार करना।
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(3.2) भारतीय मुस्लिमों को अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना
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(3.3) भारत को 3 हिस्सों में विभाजित करना ( कश्मीर एवं पूर्वोत्तर )।
वे शुरू से ही भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून डालने के खिलाफ रहे है। इससे धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ता है, और अलगाव की जमीन तैयार होती है।
इसके अलावा वे भारत में रह रहे 2 करोड़ अवैध विदेशी निवासियों को खदेडने के भी खिलाफ है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें किसी भी समय हथियार भेजकर गृह युद्ध ट्रिगर किया जा सके।
हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने के लिए वे गाय का भी कई तरीको से इस्तेमाल करते है। आजादी से पहले भी उन्होंने गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने में किया था।
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(3.4) सरकारी नियंत्रण में लेकर मंदिरों की संपत्तियां लूटना एवं उत्सवों में होने वाले धार्मिक जमाव को तोडना।
वे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के भी खिलाफ है, ताकि मंत्रियो एवं जजों का इस्तेमाल करके मंदिर की जमीनो को बेचा जा सके।
उत्सवो में धार्मिक जमाव तोड़ने के लिए वे भ्रष्ट जजों एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
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(3.5) देशी गाय की प्रजाति को लुप्त प्राय करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
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(3.6) भारत में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन करना।
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(4) सामाजिक एवं सांस्कृतिक एजेंडा
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सामाजिक-पारिवारिक कलेश, जातीय-क्षेत्रीय अलगाव से उत्पादक व्यक्तियों को मानसिक एवं आर्थिक हानि होती है, और समग्र देश की उत्पादकता गिर जाती है। साथ ही इसमें कारोबार एवं धर्मांतरण भी है। संस्कृति का रूपांतरण करने के बाद कन्वर्जन करना आसान हो जाता है।
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(4.1) जाति एवं नस्ल के आधार पर हिंसक अलगाव खड़ा करना।
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(4.2) लैंगिक आधार पर आपसी घर्षण बढ़ाकर परिवार एवं विवाह नामक संस्थाए ध्वस्त करना।
पहले 498A का इस्तेमाल करके उन्होंने परिवारों को तोड़ा, और फिर लिव इन को कानूनी करके लिव इन संतानों को कानूनी मान्यता दी।
उन्होंने 2012 में यह क़ानून छापा कि, पुरुष पर यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए लड़की का सिर्फ बयान ही पर्याप्त होगा। इन सभी क़ानूनो के समग्र प्रभाव से स्त्री-पुरुष के बीच सामाजिक संघर्ष बढ़ गया, और यह आगे भी बढ़ता जाएगा।
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(4.3) फूहड़ता, अश्लीलता एवं नग्नता को सार्वजनिक स्वीकार्यता दिलाना।
उन्होंने सेल्फ सेंसरशिप का क़ानून छापा ताकि वेब सीरिज, इंटरनेट आदि में गाली गलौज और यौन विकृतियों की सामग्री को बढ़ावा दिया जा सके।
पारिवारिक स्तर पर अश्लीलता एवं फूहड़ता को स्वीकार्यता दिलाने के लिए वे मनोरंजन चेनल्स का इस्तेमाल करते है।
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(4.4) दवाईयों पर निर्भरता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट को बढ़ावा देना।
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(4.5) अफीम एवं भांग पर प्रतिबंधो को कठोर करना।
इन प्रतिबंधो से एक तरफ दवाईयों की बिक्री बढ़ती है, और दूसरी तरफ युवाओं को शराब, ड्रग आदि नशो की और धकेलना आसान हो जाता है। मिशनरीज कन्वर्जन में नशे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करती है। अभी पंजाब में इस मॉडल पर काम चल रहा है। आगे अन्य राज्यों का भी नम्बर आएगा।
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(5) राजनैतिक एजेंडा
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वे राजनीति में केंद्रीकृत व्यवस्था चाहते है ताकि बड़ी पार्टियों में पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नेताओं को प्लांट किया जा सके। यदि पार्टियाँ एवं नेता उनके कंट्रोल से निकल गए तो वे गेजेट में इबारतें छपवाने की क्षमता खो देंगे।
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(5.1) EVM जारी रखना।
evm उन व्यक्तियों के निर्देश पर परिणाम दिखाती है जो व्यक्ति इसका प्रोग्राम लिखते है। नेताओ को कंट्रोल करने के लिए evm उनका सबसे प्रभावी टूल है। पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे इस तरह की गलतफहमी फैलाते है तो अमुक राजनीतिक दल या पीएम evm द्वारा वोटो की हेरा फेरी कर रहा है। जबकि केंचुआ और evm पर पीएम का कोई कंट्रोल नहीं होता है।
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(5.2) छोटी पार्टियों को कमजोर करना।
वे निरंतर ऐसे क़ानून छापते है जिससे छोटी पार्टियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जाए और सिर्फ बड़ी पार्टियाँ मैदान में रहे।
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(5.3) बड़ी पार्टियों का केन्द्रीयकरण करना।
वे राजनैतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र यानी कि पार्टी मेम्बर्स को वोटिंग राइट्स देने के खिलाफ है। इससे वे भारत की बड़ी पार्टियों में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा पाते है जो उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
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(5.4) युवाओं को राजनीती से दूर रहने के लिए प्रेरित करना
ऐसा करने के लिए पेड मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है।
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(5.5) नागरिको के मतदान एवं चुनावी अधिकारों में कटौती करना
उन्हें इस तरह का सिस्टम चाहिए कि एक बार वोट देने के बाद अगले 5 वर्ष तक मतदाताओ की प्रशासनिक-राजनैतिक प्रक्रियाओ में कोई भूमिका न रहे, ताकि वे पीएम एवं मंत्रियो को घूस देकर या उनका हाथ मरोड़ कर मनमर्जी की इबारतें गेजेट में निकलवा सके। वोट वापसी, जनमत संग्रह प्रक्रियाएं इस मेकेनिज्म को पूरी तरह से तोड़ देती है। अत: वे इन दोनों प्रक्रियाओ को गेजेट में छापने के सख्त खिलाफ है।
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(6) प्रशासनिक एजेंडा :
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पुलिस एवं अदालतों की सरंचना इस तरह रखना कि पैसा फेंककर अपना काम करवाया जा सके
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पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। जो आदमी पुलिस एवं जजों को नियंत्रित करता है, उस पर कोई भी क़ानून लागू नहीं होता। क्योंकि जब भी कोई क़ानून तोड़ा जाता है अपराधी को पकड़ने का काम पुलिस, और दंड देने का काम जज करता है।
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वे इतने बड़े भारत में अपने एजेंडे को इसीलिए आगे बढ़ा पा रहे है, क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम का डिजाइन इस तरह का होता है कि इसमें चयनात्मक न्याय दिया जा सकता है। मतलब, जब पैसे वाला आदमी फंसता है तो वह जज को पैसा देकर अपने पक्ष में फैसला निकलवा लेगा। इसी तरह जिसके पास पैसा है वह अपने प्रतिद्वंदियों को भी उल्टे सीधे मुकदमों में फंसा कर अंदर करवा सकता है।
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अदालतों एवं पुलिस को अपनी पकड़ में रखने के लिए वे भारत में जज सिस्टम जारी रखना चाहते है, एवं जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करते है। वे जूरी सिस्टम से इतनी घृणा करते है कि उन्होंने भारत की सभी पाठ्यपुस्तको में से इस लफ़्ज को निकाल दिया है। आपको भारत की किसी भी अखबार, साहित्य, पाठ्यपुस्तक और यहाँ तक की क़ानून की किताबों तक में जूरी सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी !!
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उल्लेखनीय है कि अमेरिका एवं ब्रिटेन की अदालतों में जूरी सिस्टम है, जज सिस्टम नहीं। और जूरी सिस्टम होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस जैसे देश भारत जैसे देशो से तकनीक के क्षेत्र में आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए !!
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खंड 3 ; पेड मीडिया का एजेंडा आगे बढ़ाने वाले लोगो को चिन्हित करना :
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अपने ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल करके वे पेड मीडिया पर कंट्रोल लेते है और फिर पेड मीडिया की सहायता से नेता खड़े करते है। नागरिक एवं कार्यकर्ता इसे देख न सके इसके लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है। जो नेता उनके एजेंडे के खिलाफ जाता है उसका प्लग निकाल दिया जाता है, और नया नेता प्लांट कर दिया जाता है।
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आप पिछले 20 वर्षो का अवलोकन करें तो देखेंगे कि तमाम सत्ता परिवर्तनों के बावजूद गाड़ी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, और आगे भी गाड़ी इसी दिशा में जायेगी। पेड मीडिया में जितने भी चेहरे आप देखते है, वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते है। जो व्यक्ति या नेता या संस्था या पार्टी या बुद्धिजीवी ऊपर दिए गए एजेंडे के किसी भी बिंदु के खिलाफ जायेगा उसे मुख्य धारा के पेड मीडिया में आप फिर नहीं देखेंगे।
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बहरहाल, पेड मीडिया की भारत पर पकड़
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
प्रगति तुम्हारी देखकर, बढ़ी मित्र में डाह। ज्ञानी इसको जानते, नहीं करें परवाह ।।
दोहा --४४७
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
kattupaya s
Stories are evolving day by day and days moving faster.. let's welcome the new fresh day with creativity and soulful stories
kattupaya s
Good morning friends.. have a wonderful day
Imaran
किसी और का नही हमे बस एक एक तेरा ही सहारा है ,,
तू ही है मेरे दिल में और तू ही हमारा है
💞imran 💞
Mare Do Alfaz
खुशबू जैसे लोग मिले
मेरे अफ़साने में...
एक पुराना खत खोला मैंने
अनजाने में...
Mere do Alfaz
Arun Mishra
झूठ की बुनियाद से बना संबंध चाहे कितना भी सुंदर हो , सच्चाई की हवा से खत्म हो जाता है,इसलिए किसी रिश्ते में सुंदरता से अच्छा है दोनों में सच्चाई होनी चाहिए 🙏🙏
krupa
~જ્યારે હું પોતાને દર્પણ માં જોઉં છું....
મારું મન મોહી જાય છે 😅
એ artificial smile પર
એ ગાલ ને સતત પંપાળ્યા કરતી લટ ઉપર
એ કાળા કુંડાળા વાળી,પાણી થી છલોછલ આંખો પર
એ અઢળક ચિંતાઓ ની રેખાથી ભરેલા કપાળ પર
~જ્યારે હું પોતાને સહેજ પાછળ ખસેડી ને જોઉં છું, તો એકદમ simple & soubar લાગુ છું 😃
અને,પેલી artificial લાગતી smile હવે real લાગવા લાગી છે
આંખો, જાણે કોઈ પ્રકાશ નું પરાવર્તન થઈ ને ચમકી રહી હોય એવી લાગે છે
કપાળ પર કોઈ રેખાઓ નથી , બધું જ નોર્મલ લાગી રહ્યું છે🥰
~જ્યારે હું પોતાને પહેલી વાર કરતા પણ હજુ થોડીક વધારે નજીક થી જોઉં છું....
પોતાના માં જ જાણે એક રહસ્ય છુપાયેલું હોય એમ ઊંડી ઊતરતી જાઉં છું
Smile જાણે opposite direction માં ફરી ગઈ હોય એવું લાગે છે
અને ,પેલી છલોછલ ભરાયેલી આંખો માંથી ઝરણાં નો પ્રવાહ ચાલુ થઈ ગયો હોય એવું લાગે છે
એટલે, કપાળ ની રેખાઓ જોવા માટે હવે હું સક્ષમ નથી
~જ્યારે હું પોતાને દર્પણ માં જોઉં છું...મને હું જ ધૂંધળી દેખાઉં છું🥀
Sonu Kumar
EVM केसे वोट चोरी करती है..... ये वीडियो देखे
👇
https://www.facebook.com/share/v/1CFba2uY2z/
ASHISH KUMAR
• उम्मीद का दीया
धूप तेज़ है मगर,
छाँव भी कहीं पास होगी।
माना कि मुश्किल है डगर,
पर मंज़िल की भी तलाश होगी।
खोया है जो कल हाथ से,
उसे याद करके क्यों रोना?
नया सूरज साथ लाएगा,
खुशियों का एक नया कोना।
तू बस अपना कर्म कर,
बाकी सब उस पर छोड़ दे।
हौसलों की पतवार थाम,
तू लहरों का रुख मोड़ दे।
कुछ और छोटी पंक्तियाँ:⏬
"ज़िंदगी की उलझनों ने, शरारतें कम कर दीं,
और लोग समझते हैं कि हम समझदार हो गए।"
"मुस्कुराओ, क्योंकि आपकी मुस्कुराहट,
किसी की खुशी का कारण हो सकती है।"
ASHISH KUMAR
"हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब,
इसी का नाम है जिंदगी, चलते रहिए जनाब।"
ASHISH KUMAR
"रिश्ते खून के नहीं, एहसास के होते हैं,
अगर एहसास हो तो अजनबी भी अपने होते हैं,
और अगर एहसास न हो तो अपने भी अजनबी होते हैं।"
ASHISH KUMAR
"चेहरे की हंसी से गम को भुला दो,
कम बोलो पर सब कुछ बता दो,
खुद न रूठो पर सबको हँसा दो,
यही राज है जिंदगी का, जियो और जीना सिखा दो।"
ASHISH KUMAR
"यादें अक्सर होती हैं सताने के लिए,
कोई रूह में समा जाता है बस जाने के लिए।"
ASHISH KUMAR
"सफ़र छोटा ही सही, यादगार होना चाहिए,
रंग रूप कैसा भी हो, इंसान वफादार होना चाहिए।"
ASHISH KUMAR
"तमन्ना है मेरे मन की, कि हर पल साथ तुम्हारा हो,
जितनी भी सांसें चलें मेरी, उन पर बस नाम तुम्हारा हो।"
ASHISH KUMAR
"हज़ार बरक़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठाें,
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं।"
A singh
दिखावे की इस दुनिया में, वो सबसे जुदा लगता है,
उसकी खामोशी में भी, मुझे एक सुकून मिलता है।
लाख हसीन चेहरे हों इस महफ़िल में मगर,
मुझे तो बस उसका वो सांवला रंग ही जचता है।
_ A singh
A singh
"हसरत तो बहुत थी कि तेरे साथ जिंदगी बिताते,
मगर तू खुश है किसी और के साथ, तो हम अपनी जिद छोड़ देते हैं।"
_ A singh
A singh
"अजीब खेल है इस मोहब्बत का भी,
किसी को हम नहीं मिले और कोई हमें नहीं मिला।"
_ A singh
A singh
वो रात भर जागकर मुझे अपनी वफा की 'गारंटी' देता रहा,
और मैं नादान, उसके हर झूठ को 'सच' का नाम देती रही।
शायद उसकी 'मशूका' सुकून की नींद सो रही थी,
तभी तो वो अपनी रातों का 'टाइम पास' मुझसे कर रहा था।
बड़ा अजीब 'बिजनेस' है उसका,
जज्बात मेरे इस्तेमाल किए और सुकून किसी और को दिया।
वाह रे मतलबी इंसान, तूने तो 'भरोसे' का ही कत्ल कर दिया।
_ A singh
jihan
પરિસ્થિતિ ભલે સારી હોય કે વિકટ હોય પરંતુ દરેક વ્યક્તિ એ નિર્ણય અને પ્રયત્નો કરવા જ પડે છે,
એક નાનકડા એવા છોડ ને માત્ર લાવી એક ખૂણે મૂકી દેવામાં આવે તો તે મૂરઝાઇ જ છે પણ જો તેની થોડી માવજત કરવામાં આવે અને સમય સમય પૂરતું પાણી આપવા આવે તો એ ફૂલો તો આપે જ છે સાથે તેની તાજગી વાતાવરન આહ્લાદક થઈ જાય છે
✍️ jihan ✍️
- jihan
A singh
कोई और था उसकी ज़िंदगी में,
और वो मुझे अपना बता गया…
मेरी मासूमियत देख कर शायद
झूठे ख्वाब भी सजा गया।
मैं उसे सच मानती रही,
वो हर बात पर कसमे खा गया…
और जिस तरह मुझे अपना कहा था,
उसी तरह एक दिन बिना कुछ कहे छोड़ भी गया।
— A Singh ✨
A singh
तुम्हारे साथ बिताए वो सभी पल
मेरे लिए बहुत ख़ास हैं…
दिल आज भी उन्हीं लम्हों में
खामोशी से मुस्कुरा लेता है।
बस दुआ इतनी-सी है रब से,
कि वो हमेशा खुश रखे तुम्हें,
चाहे मेरी किस्मत में तुम्हारा साथ हो या न हो…
— A Singh ✨
Riddhi Gori
હું તને કંઈ કહીશ નહીં, અને તું પણ કંઈ જણાવીશ નહીં...
શબ્દો વચ્ચે રહેલું મૌન
આપણે જ સમજતા રહીશું.
બધું આમ જ ચાલતું રહેશે,
કંઈ કહ્યા વગર, કંઈ માંગ્યા વગર...
ન ફરિયાદ, ન ફરિયાદનો જવાબ,
ફક્ત અધૂરા લાગણીઓનો ભાર.
સમય આગળ વધતો રહેશે,
આપણે આપણાં રસ્તે ચાલતા રહીશું,
પણ ક્યારેક કોઈ એકાંત પળમાં આ દિલ
અચાનક તને શોધી લેશે…
વર્ષો બાદ પણ એટલું તો ચોક્કસ યાદ રહેશે કે "આપણે"
એક બીજા ની ઘણા નજીક હતા
એક - બીજા ના થયા વગર ...!!
- Riddhi Gori💙🤍
Jasmina Shah
Upar walene…
A singh
“मैंने उसे अपना समझा,
और उसने किसी और को अपना बना लिया…
हम तो दिल से उसके हो गए थे,
पर उसने हमें बस एक किस्सा बना दिया।”
— A Singh
Riddhi Gori
कोशिश बस इतनी सी है कि,
जो भी मेरे साथ जुड़े...૰
उसे कभी यह पछतावा ना हो कि वह
गलत इंसान से जुड़ा..!!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
એકાંત ને ઓળંગી ને વ્યસ્ત રહું છું..
માણસ છું મુંજાવ તોય મસ્ત રહું છુ..!!
- Riddhi Gori💙🤍
TOXIC
Ready for the Second season of the "without you" Novel.
working on it soon just Waiting for my exams to end so I can continue the novel as the second season :)
Riddhi Gori
" मेरी कहानी"
खुद को इतना व्यस्त रखने के बाद भी जब शाम को अपने लिए थोड़ा सा वक्त बचाते हैं तो उसमें भी अक्सर,
यही सोचते थे कि ऐसी क्या ख्वाहिशें थीं मेरी जिनको पाने के लिए, मैंने खुद को ही खो दिया।
एक वक्त था जब जिंदगी जीने का शौक था अब लगता है कट जाए वही बहुत है.!
- Riddhi
-Gori💙🤍
Riddhi Gori
હમ ને છોડા નહીં ઉસે…
બસ સમજ લિયા કી અબ હમરા
હક નહીં રહા..!!
- Riddhi
-Gori💙🤍
SAYRI K I N G
दिखावे से नफ़रत है मुझे
खिलाफ रहो मुझे कोई एतराज नही !
वात्सल्य
यह ज़ालिम मेंहगाई मे प्यार भी मेहगा हो गया!!
सोना भी मेहंगा, मोबाइल भी महंगा, रिचार्ज भी मेहंगा ll
😄😄वात्सल्य 😄😄
- वात्सल्य
ArUu
मुझे आबादी से डर नहीं लगता,
मुझे सुनसान जगह से डर लगता है…
पर मुझे भीड़ से भी डर लगता है।
उस भीड़ से,
जिसकी अपनी कोई सोच नहीं होती,
जिसका कोई स्पष्ट मत नहीं होता,
जिसके दिल में कभी-कभी करुणा भी नहीं होती।
भीड़ में चेहरे बहुत होते हैं, पर इंसान कम दिखते हैं,
आवाज़ें बहुत होती हैं, पर सवाल पूछने वाले कम होते हैं,
और पत्थर उठाने वाले ज़्यादा।
भीड़ अक्सर न्याय नहीं करती,
बस शोर करती है…और उस शोर में
किसी की चीख, किसी की सच्चाई,
किसी की मासूमियत चुपचाप दब जाती है।
और सबसे ज़्यादा दर्द तब होता है,
जब उस भीड़ में किसी की आँखों में
एक पल को भी संकोच नहीं होता…
जैसे संवेदनाएँ
कहीं पीछे छूट गई हों, जैसे दिलों पर
एक अदृश्य परत जम गई हो,
जहाँ किसी के टूटने की आवाज़
किसी को सुनाई ही नहीं देती।
भीड़ में खड़े लोग अक्सर यह भूल जाते हैं
कि सामने खड़ा व्यक्ति सिर्फ़ एक चेहरा नहीं —
एक पूरी कहानी होता है, जिसमें उसके सपने,
उसकी थकान, उसकी उम्मीदें
और उसकी चुप पीड़ाएँ भी होती हैं।
लेकिन भीड़ कहानियाँ नहीं देखती,
वह सिर्फ़ दृश्य देखती है,और उसी क्षण
निर्णय सुना देती है।
शायद इसलिए कभी-कभी मुझे लगता है
कि असली साहस भीड़ का हिस्सा बनने में नहीं,
भीड़ से अलग खड़े होने में है ।
ArUu ✍️
kattupaya s
I reopened my Instagram and facebook account again today. if you are willing to follow please follow me.
Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
अपना विचार
एक ईट की, जगह कम लेलो।
एक रोटी ' कम खालो ॥
अपने जब . बिछड़ जायेंगे ।
बहुत याद आयेंगे ॥
गिले शिकवे, दूर कर लो।
जिन्दगी एक बार मिली है। ।
दुबारा नही मिलेंगी ॥
जीवन से चले जाओगे । l
फिर कभी लौट कर नही आओगे ' ।
लाख ढूंढना कही नज़र नही आओगे ॥
जीवन मे कुछ कर दिखाना।
संघर्ष से कभी नही घबराना ॥
चार दिन की याद नहीं।
हस्ति बन कर लहराना ॥
रिश्तो की कदर जान लो ।
जान लो पहचान लो ॥
दुनिया में यही खास होते हैं।
पूरी दुनिया में अपने परिवार वाले ही होते हैं।।
Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
बचाओ बचाओ ' जिंदा आग मे झुलसी ' भाग भाग कर अपने आप को बचाने को भागती है।
एक बहू एक बेटी, एक मां, क्या से क्या हो गया। मामला सुधरने की जगह ' बिगड़ गया। सारा परिवार तस्त व्यस्त हो गया। क्या समस्या का समाधान हो गया।
जो बात दो परिवारो के बीच थी। दुनिया भर की दिलचस्व न्यूज बन गयी है। लेकिन उस में से सब से ज्यादा पति पत्नि बच्चो का बिगड़ा ' बय खाता बिखर गया। जिन्दगी के पन्ने इधर उधर अफवाहो में उड़ गये।
जातिवाद में बदलाव आया। सुविधाओं मे बदलाव आया " विज्ञान कहाँ से कहाँ पहुँच गया। समाज मे सिर्फ समझौता आया। उसका भुगतान बनती है। बेटी ' बजह कौन हैं सामाजिक प्रथा आग में जल गयी वो दिख गया जो वो चारदीवारी में सहती है। वो संस्कार ' आवाज उठाती है बदसलुकी ।
कामयाब महिला कलम उठाती है ।मैडम ' जो महिला बेलन घूमाती है। पैर की जूती ' इस में भूमिका किसकी परिवार के माहौल की ' मजदूर आदमी रोज खायेगा , रोज कमायेगा शाम होते ही एक पऊआ चढ़ाऐग।
औरत के खर्चे, बच्चो की पढ़ाई फालतू का खर्च समझेगा।
जिंदा जल गयी, आत्महत्या के बाद अंतिम संस्कर में भी जला दी . ' कभी जहर खा कर ' फंदा लगा कर ' कभी मुकदमा चला कर ' कभी बर्षो महीने तक पीहर छोड़ देना ' क्या मानिसक प्रताड़ित किया जाता है ।
पल-पल जलती है। पल- पल जी कर मरती है। पत्नि से मार पीट बाहर का गुस्सा निकालना
परिवारिक मामला है। कह कर छोड़ दिया जाता है।
जब परिवार को परेशान करना है । कोई भी बहाना बना सकता है। बस झुलती इस में सिर्फ बेटी रिश्तो के चाहे कोई सा नाम दे हो।
kattupaya s
Goodnight friends.. sweet dreams
Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
चचेरी बहन ,तहेरी बहन, फुफेरी बहन ' ममेरी बहन ' मौसेरी बहन, बचपन की यादे होती है।
शादी के बाद सब बिछड़ जाती है।
मन उसी बचपन मे जाने को कहता है।
ऐसी खुशनुमा समय फिर वापस नहीं आता है।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein
SAYRI K I N G
शेर गए तो शायरी भी गई पन्नों पे लिखे मक़्तूब गए
इश्क़ ही तो डुबोने वाला है दिले से सारे महबूब गए
Chaitanya Joshi
મારી વેદનાને સંવેદના ગણી લેજો તમે.
ને જીવનની વિટંબણા ગણી લેજો તમે.
શબ્દ બનીને સત્ય પ્રકાશે અંતર થકી એ,
એને ઉરતણી ભાવના ગણી લેજો તમે.
ઉરનેય હોય છે સુર સમયને સંજોગોમાં,
મળ્યું તેને હશે ઝંખના ગણી લેજો તમે.
વણીને લાગણીમાં શબ્દો પ્રકાશતા કેવા,
એને આપ્તજન કરુણા ગણી લેજો તમે.
વાત હૈયાની હૈયે આવીને જ અટકતીને,
એને એ ઇપ્સિત સપના ગણી લેજો તમે.
-ચૈતન્ય જોશી "દિપક," ઓમ નગર પોરબંદર
HITESH KATARIYA
દિલના અરમાન કરમાઈ ખીલે ખરી?
વિરહની યાદો ડગમગાઇ આવે ખરી?
સંગાથ સફર જેવો તો પ્રેમ પમાય ખરી?
રસ્તા ભુલાઈ શું મંઝિલ મળે ખરી?
રાતોના શમણાં બધા સાચા બને ખરી?
હું તમને પૂછું શું ડૂબેલી લાશ ડૂબે ખરી?
PRASANG
મૌનનું રહસ્ય.!!!
શું નિશબ્દતા શબ્દથી ઊંડું રહસ્ય કહી જાય છે?
આ સંસાર ઘણી વાર એ પર હસી જાય છે.
અંતરના ઘાવ નિશ્વાસ બની અંદર જ વહી રહે,
સ્મિત પાછળ છુપાયેલું ભેદ ખુદ ખુલ્લી જાય છે.
એકાંતની રાતે સ્મરણ છાયા સમી શાંત સરકે,
ટૂટી ગયેલું સ્વપ્ન નજરમાં રહી જાય છે.
વિશ્વાસનો દીપ પવન સામે કંપે ક્ષણભર માત્ર,
છતાં આશા દીપ સમી રસ્તો બતાવી જાય છે.
માયાના રંગે ચહેરા બદલાય પળમાં અચાનક,
સાચો અહેસાસ અંતર સુધી પહોંચી જાય છે.
હૃદયની વ્યથા અક્ષરમાં કેદ થતી નથી સહેજ,
“પ્રસંગ” ન કહી પીડા અંતરમાં ઉતરી જાય છે.
- પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
SAYRI K I N G
love tips
किसी भी लड़की को
सिर्फ दो बार मैसेज करे
अगर दोनों का रिप्लाई न आए तो
समझ जाना
लड़की
खूबसूरत नहीं है काली है
prit tembhe
almost my favourite poetry after that....✍️
भेटायची आस ही.......!!
Imaran
आज तुझे एक बात बताऊं
दिल की बात तुम्हे सुनाऊं
पास रहूँगा तेरे
तू कहे तो तेरी धड़कन बन कर
तेरे सीने में ही रह जाऊ
💞imran 💞
Imaran
आज तुझे एक बात बताऊं
दिल की बात तुम्हे सुनाऊं
पास रहूँगा तेरे
तू कहे तो तेरी धड़कन बन कर
तेरे सीने में ही रह जाऊ
💞imran 💞
રોનક જોષી. રાહગીર
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સાવધાન દીકરી વાંચવા અને સમજવા જેવી એક વાસ્તવિકતાને રજુ કરતી સુંદર વાર્તા.
Kavi Kumar
शीर्षक: पुरानी नींव, नई उड़ान
मिट्टी की वो सोंधी खुशबू, अब यादों का हिस्सा है,
मगर कलम की रफ़्तार में, छिपा वही एक किस्सा है।
कभी दीयों की रोशनी में, बुनते थे हम दास्ताँ,
अब स्क्रीन की इस चमक में, नया हमारा आसमाँ।
वेद वही हैं, बोध वही है, बस अंदाज़ पुराना बदला है,
हाथों में अब फोन है लेकिन, दिल का साज़ न बदला है।
पत्थर की उन नक्काशी का, आज डिजिटल अक्स (Reflection) है,
ज्ञान की इस बहती गंगा में, हर इंसान अब शख़्स है।
तरक्की के इस दौर में हम, अपनी जड़ें न भूलेंगे,
आसमान को छूकर भी हम, ज़मीन को ही पूजेंगे।
तकनीक की इस दुनिया में, 'वेद' का साथ ज़रूरी है,
संस्कार और विज्ञान मिले तो, हर कोशिश फिर पूरी है।
Shefali
#shabdone_sarname__
Komal Mehta
કોઈ કોઈનું નથી, એ તો સૌ જાણે છે
તેમ છતાં સૌ સંબંધોમાં દોડે છે.
ના ના કરતાં હજાર વાર પહેલ કરે છે
એ સંબંધને સાચવવા, જે માત્ર એક તરફી છે...
દુનિયા સામે નામનો સંબંધ અને
અંતરમનમાં એક ઊંડી ખાઈ...
જાણી લીધું છે કે કોઈ કોઈનું નથી...
તેમ છતાં અગમ્ય ખેંચ આ સંબંધોની...
દોડી હારીને થાકી જવાય
હાંફી જવાય... અને ખબર નહિ
કેટ કેટલી વાર તૂટી પણ જવાય...
પણ આ એકતરફી સંબંધને સાચવવાની
જિદ્દ કેમ છે...?
Paagla
https://youtube.com/shorts/AkQ0e-ukvdg?si=ut8D464f9lw5rR93
SUNIL ANJARIA
ઈરાન વિરુદ્ધ ઘણા દેશો નું યુદ્ધ ચાલી રહ્યું છે. ઇતિહાસ કહે છે કે પારસીઓ ઈરાન થી આવ્યા અને ભારતને તેમનું વતન બનાવી ઘણે ક્ષેત્રે સિંહફાળો આપ્યો. સહુને પારસીઓ માટે ગર્વ છે જ.
શું આજથી 60 વર્ષ અગાઉ ઈરાન સંપૂર્ણ મુસ્લિમ દેશ, radical વિચારસરણી વાળો નહીં હોય?
ભારતના વતન પ્રેમ ઉપરાંત ત્યારે 60 કે 70 ઉપરની વયના પારસીઓ ઈરાન ને પણ મૂળ વતન ગણતા હશે?
એટલે યાદ આવ્યું કે 1966 - 67 માં ઈરાનના રાજા ભારતની અને તેમાં એક દિવસ મુંબઈની મુલાકાતે આવ્યા.
એ વખતે મારા મામા ભાવનગર ઇન્ડિયન એરલાઇન્સ માં હતા અને પ્લેનમાં મુસાફરોને વાંચવા અખબાર અપાતું. એવું એક મુંબઈ સમાચાર તેઓ એ દિવસોમાં ઘેર લઈ આવ્યા. જેમાં અહેવાલ હતો કે ઇરાનના રાજા સફેદ , લશ્કરી ડ્રેસમાં ખુલ્લી જીપમાં મુંબઈ ચોપાટી, મરીન ડ્રાઇવ અને એ પટ્ટી પર ફર્યા અને પારસી કોમ્યુનિટીએ લાઇનોમાં ઊભી તેમનું ઉમળકાભેર સ્વાગત કર્યું.
એ ફોટો મનમાં કોઈક રીતે યાદ રહી ગયો છે. એ સાથે, એક પારસી જમશેદજી ભરૂચાએ લખેલ પંક્તિ
"અય આર્યમિહિર શહેનશાહ એ ઈરાન
તું રોશનવાન બાસી તું ઓ કામરાન."
આગળ પણ લખેલું. મને એ પંક્તિ યાદ રહી ગઈ છે.
રોશન વાન બાસી એટલે કદાચ તેજ પુંજમાં રહેનાર. કામરાન એટલે સમૃદ્ધ, ઇચ્છાઓ પૂરી કરનાર.
60 વર્ષ અગાઉ જે 70 ના હોય એમના બે કે ત્રણ પેઢી અગાઉ ના વડવા ઈરાનથી આવ્યા હોય એટલે ભરૂચા જેવી અટક હોવા છતાં ઈરાનના શાહ વિશે આવી પ્રસ્તુતિ લખી હોય.
મુંબઈ સમાચાર પારસી ગ્રુપે ચાલુ કરેલું. તેમાં એક કોલમ નું નામ પારસી તારી આરસી યાદ છે.
આવું બીજા 60 વર્ષે મને યાદ કેમ છે? ઈશ્વર જાણે.
એ ફોટામાં રાજા પ્રમાણમાં યુવાન દેખાતા હતા. આ ફોટો નેટ પરથી શોધ્યો, કંઈક આવું હતું. ખુલ્લી જીપમાં સહુને હાથ ઊંચો કરી ગ્રીટ કરતા ઇરાનના શહેનશાહ, સાથે કોઈ ડીગ્નિટી, પારસીઓ તેમને હાથ ઊંચા કરે છે.
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
Mrugzal
મસ્ત મજાની તું અને તારા તેવર
નથી પહેર્યા એકેય તોય તેં ઝેવર
નસો છે મને તારો મારી નસેનસમાં
વસે છે એટલે જ મારા રોમેરોમમાં
મસ્ત મજાની તું.....
રંગ જોઈ રિસાતો પણ નથી મનમાં
આખરે તું જ રહે છે ને મારા તનમાં
નજીક આવીને કહેને આ કાનમાં
એક તું જ છે મારા આ જીવનમાં
પછી હોય લાગણીની કાયમ લહેર
મસ્ત મજાની તું અને તારા તેવર...
Soni shakya
प्यार सिर्फ मेरा है तो..
विरह भी मेरी और पीड़ा भी सिर्फ मेरी..
- Soni shakya
SAYRI K I N G
इश्क़ की हर मर्यादा मालूम है मुझे,
तेरी तस्वीर को भी अब तक गले नहीं लगाया मैंने !
SAYRI K I N G
नहीं-नहीं, मैं ब्राह्मण नहीं हूँ, मैं हूँ न क्षत्रिय और न दलित ही, मैं हिंदू भी नहीं और मुस्लिम भी मैं नहीं हूँ, सिखों में भी शामिल नहीं मैं, तुम समझ मुझे फिर मत लेना ईसाई, जाति मेरी मानव ही है, धर्म मेरा मानवता का है।
SAYRI K I N G
बिछड़ने के बाद सारी बुराइयां गिनवाई उसने,
मिलते वक्त न जाने कौन सा हुनर देखा था ।
બદનામ રાજા
સોશિયલ મીડિયામાં શોર
મચાવતા લોકો,
અસલ જીંદગીમાં ખામોશ હોય છે...
Soni shakya
लफ्ज़ बहुत है सबके पास कहने को पर..
एहसास समझने का वक्त किसी के पास नहीं..
- Soni shakya
SAYRI K I N G
दिल की काली थी
तबियत की बड़ी" कुत्ती थी साली
पनौती बन के आया थी
हरामजादी
MASHAALLHA KHAN
दिखा जो चांद तो सब्र आया मुझे
मेरे महबूब का चेहरा नजर आया मुझे
कितनी ही मुद्दत लगी उसे मनाने मे
तब जाकर उसने सिने से लगया मुझे .
-MASHAALLHA
Shivraj Bhokare
लग चुकी है तलब जीत की अब खुद को आग में झोंक देंगे, ठोकरें कहती है मारा जाएगा, हौसले कहते हैं देख लेंगे..!! ..
kattupaya s
Ok friends Time for short 😴.. c u later
kattupaya s
listening music before sleep is good. I follow that. sometimes you may not able to concentrate that time also music helps
kattupaya s
don't neglect your voice. try to sing along with music like karaoke. all the best my friends
kattupaya s
I love musicians and music lovers.. it's really great to be a musician. I tried to learn music. but it's a system failure
kattupaya s
Take a break have music feast.. your problems can wait for sometime.
kattupaya s
whenever I need a break my first choice is music. I have no option other than that.
kattupaya s
When you listening to old music.. it helps to recover from worries. this is my experience
kattupaya s
Time for listening old music... 🎤🎧
वात्सल्य
जिंदगीमे ज़ब अपना दूर चला जाता है l
मानो सब होते हुए अकेलापन लगने लगता है ll
- वात्सल्य
Ajit
આટલું કરવા છતાં તને મહોબ્બત મળી નઈ.....
શાંત થા હવે તને આ જિંદગી ફળી નઈ......
જિંદગી ની "યાદ"
jighnasa solanki
kyu sahi kaha naaaa..... ?? 😜😜😜😜😜
DrAnamika
संघर्षों का दायरा बहुत अधिक बृहद नहीं होता जितना की परिस्थितियां उसे बृहद दिखातीं हैं
#डॉ_अनामिका
yeash shah
https://yashs1819.blogspot.com/2026/03/learn-to-build-combinations-by-yourself.html
my Blogpost
go there & Enjoy
Saroj Prajapati
जिंदगी की मसरूफियत में कुछ पल अपने लिए भी निकाल
ये जिंदगी के झमेले तो यूं ही चलते रहेंगे दिन रात।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Narayan
विरह मिलन है,
मिलन विरह है,
मिलन विरह का,
विरह मिलन का ही जीवन है।
Shailesh Joshi
વ્યક્તિ કોઈપણ હોય, પરંતુ
દરેક વ્યક્તિનાં જીવનની જરૂરિયાતો, ઈચ્છાઓ, કે સપનાઓ લગભગ એકસરખા જ હોય છે,
જેમકે,
સુખ, શાંતિ, અને સુવિધા, અને આ ત્રણ મેળવવા માટે,
દરેક વ્યક્તિ પોતાનું અડધું, કે પોણું જીવન ખર્ચી નાંખે છે, અને છતાંય એમાંથી ઘણા બધા લોકો ત્યાં સુધી પહોંચી શકતા નથી, કે પછી
જો ત્યાં સુધી તેઓ પહોંચે છે તો પણ એમને પોતાને જે મળ્યું છે એનો પૂર્ણ સંતોષ થાય,
એવું પરિણામ તો પ્રાપ્ત નથી જ થઈ શકતું, અને એમાં...
અમુક લોકો તો સુખ સુવિધા અને શાંતિ માટે એટલા બધા પ્રયત્નો કરે, છતાં...છેલ્લે થાય છે શું ?
થાય છે એવું કે, એમનું જીવન પૂરું થઈ જાય છે, અને સામે એમની ઈચ્છાઓ અને સપનાઓ તો અધૂરા જ રહી જાય છે.
પરંતુ આનો એક બિલકુલ આસાન રસ્તો પણ છે, જે રસ્તા પર ચાલવાથી સુખ સુવિધા અને શાંતિ આપોઆપ સામેથી મળે છે, આમ તો એ કામ સાવ સહેલું છે, બસ ખાલી એને શરૂ કરવું, અને પકડી રાખવું થોડું અઘરું છે.
એ કામ એટલે, પોતાની ચિંતાઓ ઓછી કરવી, અને પોતાનાઓની ફિકર
વધારે.
Shailesh Joshi
જીવનમાં જે કરવું છે, કરવા જેવું છે,
એના વિશે ઘણા લોકો,
હદ બહારનું વિચારે છે,
અને જે નથી કરવા જેવું,
એ કરતી વખતે તો એ,
જરા સરખું પણ ક્યાં વિચારે છે ?
ને પછી એમાંને એમાં,
જે તે વ્યક્તિ પાસે
સમય તો ખૂબ બચે છે, પરંતુ
એ બચેલો સમય, વિચારવામાં ઓછો,
અને અફસોસ કરવામાં વધારે વપરાય છે.
- Shailesh Joshi
Dada Bhagwan
हाथ की टूटी हुई लक लाइन (भाग्य रेखा) क्या वाकई असफल जीवन का संकेत है? ज्योतिष के अनुसार नीलम पहनने से फर्क पड़ सकता है। लेकिन सचमुच में पत्थर जीवन में आने वाले सुख या कामयाबी को बदलने में काम करते हैं? यदि हाँ, तो फिर क्या हमें ज्योतिषशास्त्र पर विश्वास करना चाहिए? आइए जानते हैं इस वीडियो में।
Watch here: https://youtu.be/3bKe1OhWlFY
#destiny #karma #spirituality #spiritualguidance #DadaBhagwanFoundation
A singh
मेरा जनाज़ा उठेगा… और तेरी डोली सजेगी,
क़िस्मत की ये कैसी अजीब कहानी होगी…
एक तरफ़ मेरे जनाज़े पर खामोशी छाई होगी,
और दूसरी तरफ़ तेरी शादी में शहनाई होगी…
लोग कंधों पर मुझे आख़िरी सफ़र तक ले जाएँगे,
और तुझे कोई सात फेरों में अपना बनाएगा…
मैं मिट्टी में सो जाऊँगा तेरा नाम लेकर,
और तू किसी और के नाम से सजाई जाएगी…
शायद उस दिन तुझे मेरी कमी भी महसूस होगी,
जब भीड़ में होकर भी दिल तेरा उदास होगा…
तब याद आएगा कि कोई था,
जो तुझे अपनी पूरी दुनिया मानता था…
— A Singh ✨
ધબકાર...
બકબક પણ શાંત, ધબકાર ની થઈ,
લાગણી પ્રેમ અનંત, જીવંતતા ગઈ.
જીવન આ જ છે દરેક પળ અણધાર્યું,
આંખ ભીંજાઈ જાણે વર્ષા શરૂ થઈ.
જીવન ભર ઉષ્માભર્યો હાથ રે હાથમાં,
આશા એવીય પણ ઠગારી નીવડી ગઈ.
કદાચ આ જ નિયમ છે જીવનનો એક,
ખૂલી આંખે સપના દેખાડી જિંદગી ગઈ.
ધબકાર...
Narayan
तुम प्रेम हो मेरा तुम्हें त्यागना असंभव है,
कभी देखा है भक्त को भगवान के बिना रहते हुए।
kajal jha
हर मुस्कुराने वाला इंसान खुश नहीं होता,
कुछ लोग दर्द छुपाने की कला जानते हैं।
ज़िंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई यही है,
कि हर किसी की अपनी एक अनकही कहानी होती है।
- kajal jha
mohansharma
कभी इश्क़ ऐसे मोड़ पर ले आता है..
जहाँ समझ नहीं आता..
इधर जाएं
या
उधर जाएं
अब यहाँ
खड़े भी रहें
तो कब तक
और क्यूँ.
फ़िर आदमी
चल देता है
एक रास्ते पर
बेमकसद..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सहारा न मिल सका
जिंदगी भर प्यारों का सहारा न मिल सका l
कायनात में कोई भी हमारा न मिल सका ll
किसी ना किसी रूप में रिश्ते को बचाने में l
ताउम्र जिम्मेदारी से किनारा न मिल सका ll
जीवन में औरों की राग रागिनी बजती रही l
दिल खोल के गाने को तराना न मिल सका ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Kavi Kumar
पहली रचना: एक नई शुरुआत
शब्दों की इस दुनिया में, मैंने आज कदम रखा है,
हृदय के कुछ भावों को, कागज़ पर ला रखा है।
नया हूँ इस महफ़िल में, पर लिखने का जुनून है,
कलम की इस खिदमत में, मिलता बड़ा सुकून है।
सीख रहा हूँ अभी मैं, शब्दों को पिरोना,
भावनाओं के धागों में, यादों को संजोना।
बस आप सबका थोड़ा सा, तआवुन (सहयोग) चाहिए,
बढ़ सकूँ मैं आगे, वो हौसला चाहिए।
मेरी छोटी सी कोशिश को, अपनी दुआएँ देना,
पसंद आए गर मेरी बातें, तो थोड़ा साथ देना।
'वेद' की इस यात्रा का, आप सब ही आधार हैं,
आपके प्यार और समर्थन का, मुझे इंतज़ार है।
- Kavi Lekh
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