Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Bhatt Bhavin
એક મુલાકાત.....ગઝલ ભટ્ટસાહેબ
ચલ ને એક મુલાકાત કરીએ
સાથે મળીને ક્યાંક શાંતી થી બેસીએ
તારી ને મારી કંઇક વાત કરીએ,કે પછી
આંખો થી આંખો ને મળવા દઈએ
જે વાત કરી શકતા નથી એને હૃદય સુધી
ઉતરવા દઈએ,અને લાગણીઓ ને
હોઠ સુધી આવા દઈએ
આ સબંધ નું કંઈ નામ નથી, તો ચલ ને
આ સબંધ ને કંઇક નામ આપીએ,
ભૂતકાળ ની વાત ને ભૂલી જઈએ અને
ભવિષ્ય ની કંઇક વાત કરીએ,
આપણે બંને એક બીજાને ઓળખતા નથી
તો ચલ ને એક બીજાને ઓળખવાનો પ્રયત્ન
કરીએ,
આપણે ગમતી ના ગમતી પસંદ ના પસંદ ને
એક બીજાની વચ્ચે વ્યક્ત કરીએ,
આ હૃદય મા શું છે અને શું અનુભવી
રહ્યા છીએ એની કંઇક વાત કરીએ,
ચલ ને એક મુલાકાત કરીએ
સાથે મળીને ક્યાંક શાંતી થી બેસીએ
SAYRI K I N G
बुर्जखलीफा को सरे आम देखते हैं
तो मियां खलीफा को छुपाकर क्यों
अगर नारायण है तो
सुनील नारायण वेस्टइंडीज में क्यों
गौतम अगर गम्भीर है तो
शहर में हस्पताल क्यों
अगर शिल्पा शैट्टी महिला है तो
सुनील शेट्टी पुरुष क्यों
महाराज परमानंद जी भारत में है तो
केशव महाराज अफ्रीका में क्यों
दिमाग का दही हो गया है आज
Niya
તારી ખામોશી પણ સમજું છું,
તારી વાણી પણ સંભાળી લઉં છું…
તું પ્રેમ કર કે અવગણના,
હું તો ફક્ત તારી જ છું…
Monty Khandelwal
कौन अपना है यहां सब
दीवाने हे दौलत के
- Monty Khandelwal
Monty Khandelwal
कौन अपना है यहां सब दीवाने हे दौलत के 🫤🙁
Jyoti Gupta
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SAYRI K I N G
कुछ कुत्ते अपने होते है
और
कुछ कुत्ते ही अपने होते है
PRASANG
આમ અચાનક ગાયબ થવું તારું મને ના ગમે,
વિના કારણની આ નારાજી, એ જ મને ના ગમે.
એક શબ્દ કહેશે તો દુઃખ પણ સહેલું લાગી જાય,
મૌન રાખી દિલને મારવું, એ ખેલ મને ના ગમે.
રાતે તારી યાદ, દિવસે ખોટું હસવું,
અંદર સળગતી આ આગ, એ ઢોંગ મને ના ગમે.
વચન આપી હાથ છોડે જે, એ પ્રેમ શું કામનો,
આધા રસ્તે છોડી દેવું, એ દાગ મને ના ગમે.
સાચું હોય તો કડવું પણ સ્વીકારી લઈશ હું,
પણ જુઠ્ઠી શાંતિનો આ શાંત ઢબ મને ના ગમે.
“પ્રસંગ” માંગે નહીં ચાંદ-તારા કે કસમો,
ફક્ત તું સાચા રહેજે, અડધો પ્રેમ મને ના ગમે.
"પ્રસંગ"
પ્રણયરાજ રણવીર
Abhishek deuraj
बोलना ज़रूरी है
बोलना ज़रूरी है,
क्योंकि जब आप बोलते हैं,
तो सिर्फ आप नहीं बोलते—
आपके साथ आपके संस्कार बोलते हैं।
आपकी परवरिश बोलती है,
घर का वातावरण बोलता है,
माँ-बाप की सीख
आपके हर शब्द में ढलकर बोलती है।
आवाज़ तो बस माध्यम है,
असल में चरित्र बोलता है,
लहजा बता देता है
कि भीतर कितना आदर पलता है।
इसलिए बोलो—
पर ऐसे कि शब्दों में शिष्टता हो,
बातों में सादगी हो,
और हर वाक्य में इंसानियत की गरिमा हो।
vishal Nagar
जो बारिशों के मौसम में भी सूखा रह जाए,
वो रेगिस्तान हूँ मैं।
जिसे किसी ने नहीं चाहा देखना,
वो ख्वाब हूँ मैं।
ये दुनिया क्यों मतलब रखेगी मुझसे,
जो सूख जाता है वो गुलाब हूँ मैं।
— बटोही
Soni shakya
उसे गुरूर है कि उसके चाहने वालों की कमी नहीं,
पर मुझे यकीन है.. मुझसा कोई नहीं..
जिस दिन समझ आएगी उसको ये बात,
शायद उस दिन मैं नहीं रहूंगी.. उसके पास..💞
- Soni shakya
Ajit
ખીલતો જોઈ ને તમે કેસુડાને બહુ હરખાયા છોને.......
ક્યારેક મને કમને એકાંતમાં એને પણ ખરી જવાનું હોય છે......
જિંદગી ની "યાદ"
वात्सल्य
*પહેલાના જમાનામાં સ્ત્રીઓ પુરુષની વાટ બહુ જોતી,હવે પુરુષોનો વારો આવ્યો.સમય બદલાતાં વાર નથી લાગતી.તારા પછી મારો વારો,અને મારા પછી તારો.*
😄😄😄😄😄😄😄😄
ziya
प्यार मे अक्सर वो लोग टूट जाते है जो
खुद से ज्यादा भरोसा दुसरो पर करते है
A singh
काग़ज़ों पर लिखा रिश्ता मुकम्मल हो गया,
पर दिल का फ़ैसला अधूरा ही रह गया।
विवाह ने हाथ तो थाम लिया,
पर प्रेम… किसी और के नाम रह गया।
Narayan
मोहब्बत कभी अतीत का हिस्सा नहीं बनती,
वह बस एक एहसास नहीं एक मौजूदगी होती है।
वह रहती है… चुपचाप, गहरी, अडिग।
आप शहर बदल लें, देश छोड़ दें,
ज़िंदगी में कितने ही बड़े बदलाव क्यों न ले आएँ,
खुद को काम में डुबो दें,
लोगों की भीड़ में खो जाएँ
मोहब्बत अपनी जगह से ज़रा भी नहीं हिलती।
वह दिल के किसी कोने में
ठहरी हुई साँस की तरह बस जाती है।
मोहब्बत और “मूव ऑन” का कोई रिश्ता नहीं होता।
मूव ऑन ज़िंदगी करती है,मोहब्बत नहीं।
आप यूँ ही चाय या कॉफी पीते हुए
किसी कहानी या फ़िल्म का एक दृश्य देख लें,
कोई अधूरा-सा गाना सुन लें,
राह चलते किसी पुराने कागज़ के टुकड़े पर
सिर्फ “मोहब्बत” शब्द लिखा हुआ पढ़ लें
और अचानक…आपके ज़हन में वही चेहरा उभर आएगा क्योंकि मोहब्बत भूलने से नहीं मिटती,
वह बस यादों के साथ जीना सीख लेती है।
❤️
vishal Nagar
तो फिर अज्ञानी कौन?
दुनिया में हर व्यक्ति के पास ज्ञान है। व्यक्ति चाहे कोई भी हो, उसे किसी-न-किसी तरह का ज्ञान तो ज़रूर होता है।
अगर दुनिया में सभी के पास ज्ञान है, तो फिर अज्ञानी कौन?
अगर आप कहते हैं कि अज्ञानी वो होता है जिसके पास ज्ञान नहीं होता, लेकिन ज्ञान तो सबके पास होता है, तो फिर अज्ञानी कौन?
अगर आप अनपढ़ को अज्ञानी कहते हैं तो ये भी गलत है, क्योंकि ज्ञानी होने के लिए पढ़ा-लिखा होना ज़रूरी नहीं है। ज्ञान तो अनपढ़ के पास भी है, तो फिर अज्ञानी कौन?
आप कभी-कभी 'गंवार' को अज्ञानी की संज्ञा दे देते हैं, लेकिन गंवार होने का मतलब सभ्य और ढंग का न होना है। ज्ञान तो गंवार के पास भी है, तो फिर अज्ञानी कौन?
जवाब: अगर आप मुझसे इस प्रश्न का जवाब चाहेंगे तो कुछ इस प्रकार होगा कि अज्ञानी वह होगा जो ज्ञान की कदर नहीं करता हो, जो ज्ञानी/ज्ञान की इज़्ज़त नहीं करता हो। एक ज्ञानी हमेशा ज्ञान की इज़्ज़त करता है।
सबसे बड़ा अज्ञानी तो मैं हूँ, जो अज्ञान को परिभाषित कर रहा हूँ।
-बटोही
Narayan
तक़दीर में उससे #मिलना लिखा था ...
उसका #मिलना नहीं !!!💔
- नारायण
A singh
मेरी हार का जश्न मत मनाओ तुम,
ये हार भी मेरी ही चाहत की निशानी है।
गैरों से नहीं हारी कभी मैं,
अपनों से हारी हूँ… क्योंकि वो मेरी कहानी है।
A singh
"मेरी हर दुआ में तेरा नाम शामिल है,
मेरी हर याद में तेरा चेहरा काबिल है।
जिस दिन मेरी धड़कन तुझे याद करना भूल जाए,
समझ लेना कि ये रूह अब खुदा के पास हाज़िर है।"
_ A singh
Saroj Prajapati
सामान हो या रिश्तें
जब दोनों का बोझ असहनीय हो जाए तो
उन्हें सिर व जिंदगी से उतार देना ही समझदारी है।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Rittisha Nath
আমরা কি স্বাধীন
স্বাধীন আজ দেশ হয়েছে।
আমরা কি স্বাধীন হয়েছি?
মানুষ আমরা আজ স্বাধীন হয়েছি।
মানসিকতা কি স্বাধীন হয়েছে?
তোমার প্রশ্নের উত্তর আমি দেব।
কিন্তু কেন আমি তোমার টার অপেক্ষায় থাকবো?
সত্যি বলতে আজ আমরাও পারবো।
কিন্তু কেন তোমার ভয়ে চুপ থাকবো?
তোমরা আজ রাস্তা দিয়ে চলবে।
কিন্তু কেনো আজ আমাদের বন্দি থাকতে হবে?
আজ তোমরা নিজেদের মতনু বলবে।
কেন আমাদের বেলাই অনমতি লাগবে?
কাল আমরা তোমাদের হারাব।
কেনো আর মনে ভয়ে রাখবো?
কথা আজ মেয়েদের নয়ে,
কথা আজ ছেলেদের নয়ে,
কথা আজ তাদের যারা দেখাচ্ছে আমাদের ভয়ে। এবার ওঠাও তলওয়ার ঢোকাও তাদের বুকে।
যদি না পারো ঢোকাতে তাহলে উওর দাও মুখে।।
চলো আজ নতুন করে লিখী নিজেদের কথা।
না নিয়ে মনে কোনো ব্যথা।।
আজ আমরা চুপ রয়েছি, কাল আর নয়ে।
আমারও রাস্তা দিয়ে হাটব, না নিয়ে কোনো ভয়ে।।
prit tembhe
साथ मराठी, वाट मराठी.....
अभिमानाची लाट मराठी......
तुकोबाची अद्भुत वाणी,
ज्ञानोबाचे लेख मराठी......!✍️
Narayan
तुम्हे दिल मे रक्खा था,
तुम जरा सा दिल ही रख लेते!❤🔥
- नारायण
Jyoti Nagdeo
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✨ सफलता की ओर कदम ✨
सफलता रातों-रात नहीं मिलती…
यह हर दिन की मेहनत, धैर्य और खुद पर विश्वास का परिणाम होती है।
गिरोगे, सीखोगे, फिर उठोगे —
यही सफर आपको मजबूत बनाता है। 💪
याद रखो,
“आज की मेहनत ही कल की पहचान बनेगी।”
अपने सपनों को छोटा मत होने दो,
मेहनत को बड़ा बना दो। 🔥
#Motivation #Safalta #SuccessMindset #BelieveInYourself #DailyInspiration
Sonam Brijwasi
इस घर में प्यार मना है
read on mratubharti and matrubharti
- Sonam Brijwasi
Narayan
ख्यालों से भी है, रंज मुझे बेहिसाब..!!
जब मुकम्मल नहीं होने, तो आते क्यूँ हैं....!!!!❤🔥🍁🍂
-नारायण
Pandya Ravi
बहुत दिनों बाद से आज वापसी कर रहा हूं कोई स्वागत नहीं करेगा हमारा??
- Pandya Ravi
Pandya Ravi
बहुत दिनों बाद से आज वापसी कर रहा हूं कोई स्वागत नहीं करेगा हमारा??
ziya
“Jiski subah teri aankhon ki roshni se hoti ho,
wo phir chaand-sitaare kahan dekhega.
Jab saamne mohabbat ho, aur mohabbat bhi tum jaisi ho,
to phir koi dil ke nuksaan (gham) ko kahan dekhega.”
shree
જયારે એને પૂછવામાં આવ્યુ,
છેલ્લી ઈચ્છા શું છે તારી.......
શીદ ને કરો આવા સવાલ સખી..(2)
કાતો જાણ તમને સઘળી,
કાતો અજાણ તમે એનાથી છો..
મારી સર્વે ઈચ્છાઓનો સરવાળો જે,
એનાથી વિશેષ મારે જંખવું શું...
આવે મોત જો (2)
પ્રેમથી એનેઈ ભેટું,
શરત માત્ર એટલી...
દફનાવામાં આવે મને એની ડેલીએ,
પગ પડે એનો,
ને જો આ હૃદય પાછું ના ચડે હેલીએ...🦢💌💔
- shree
Std Maurya
एक दिन मैं लिख रहा था कि मोहब्बत सबको मिलती है, तभी मेरी कलम की नोक टूट गई। वह मुझसे कहने लगी—'तुम अभी नादान हो। मोहब्बत सुनने में जितनी हसीन है, हकीकत में उतनी ही बेरहम। अगर इसकी सच्चाई देखनी है, तो उन आशिकों की भीड़ देखो जहाँ जनाजे उठते हैं और माँ-बाप के कंधों पर उनके सपनों का बोझ होता है।'
आज की दुनिया में लोग अक्सर चेहरे और पैसे से प्रेम करते हैं। यहाँ सादगी और ईमानदारी की कद्र कम ही होती है। सच बोलने से अक्सर रिश्तों में दरार आ जाती है। मेरी अपनी मोहब्बत भी कहती थी कि वह मेरे साथ 'नून-रोटी' खाकर रह लेगी, पर न जाने क्यों मेरी रूह को हमेशा यही डर सताता रहा कि कहीं यह भी एक धोखा न हो। इसीलिए मैंने खुद को दूर कर लिया।
जब मैंने दुनिया को टटोला और एक अजनबी लड़की से पूछा कि धोखेबाज कौन होता है—लड़का या लड़की? तो उसने बिना किसी पक्षपात के कहा—'अगर लड़के धोखेबाज होते, तो वे किसी के लिए रोते नहीं और न ही अपने घर पर उस रिश्ते का जिक्र करते। लड़कियां अक्सर मोहब्बत तो करती हैं, पर अपनी सहेली तक को नहीं बतातीं, घर वालों को बताना तो बहुत दूर की बात है।'"
लेखक -एसटीडी मौर्य
मोबाईल न. 7648959824
A singh
इस ज़ख्म की गहराई नापूं कैसे,
कि दवा भी असर नहीं करती।
वो निशान जो था वफा का,
अब वो भी कहीं खो गया है।
_ A Singh
Kamini Shah
આદિત્યની આડશેથી
ધીરેથી સરકી વાદળી
રેલાતાં સોનેરી કિરણોને
ઝાંય લાગી રૂપેરી…
-કામિની
jighnasa solanki
હારે કા સહારા
બાબા શ્યામ હમારા.
🙏🙏
કાળ ચક્ર બદલાતુ રહે છે.
એટલે સમય બદલાતો રહેશે.
તડકા પછી છાયો, સુખ પછી દુઃખ
આવતુ જતુ રહેશે.પણ
તમારા કર્મો સદા તમારી સાથે જ રહેશે.
🌹જય શ્રીશ્યામ🌹
Shailesh Joshi
દોડીને આવવાવાળા,
જ્યારે છોડીને જાય છે
ત્યારે બહુ દુઃખ થાય છે,
ભલે નજીક એટલું ન ફાવે,
પરંતુ દૂર રહેવામાં તો બંને બાજુ
કાયમી પીડા જ રહી જાય છે.
કાયમી સાથે તો ત્યારે જ રહેવાય છે,
જ્યારે એકબીજાને
બંને બાજુથી સમજાય છે.
- Shailesh Joshi
mohansharma
जिसने नहीं की कभी हमारी परवाह..
हमने तो बस की है उसी की परवाह..
Shailesh Joshi
આવા લોકો એમના જીવનમાં પામે ઓછું, ને ગુમાવે વધારે,
જીવનમાં કંઈ પણ પ્રાપ્ત કરવા માટે મુખ્ય આ બે બાબતો કામ કરતી હોય છે, પહેલું કર્મ, કે જે આપણે કરવાનું હોય છે, ને બીજું પરિણામ જે સમયના હાથમાં હોય છે, એટલે કે આપણે આપણું પૂરું ફોકસ આપણા કામમાં પરોવવું જોઈએ, અને જે તે પરિણામની જવાબદારી સમય પર છોડી દેવી જોઈએ, તો ચોક્કસપણે આપણને એનું પરિણામ ભલે ધાર્યું ન મળે, પરંતુ જે પરિણામ મળશે, એ આપણા માટે સારું તો ચોક્કસ હશે. અને આ વાતતો ભગવદ્ ગીતામાં પણ કહી છે.
જુઓ સમય પરનો મારો આ Motivation Youtubeshorts
👇
https://youtube.com/shorts/kli34VX5P_M?si=4FZSD-dIYrlxUoYd
Dhamak
प्रभु…
मेरा निस्वार्थ प्रेम था,
फिर भी मुझमें खामियाँ ही देखी गईं।
बिना वजह जो ईर्ष्या और नफरत करते रहे,
मेरी सच्चाई उन्हें कभी दिखी नहीं।
हे प्रभु…
ऐसे लोग मुझे
किसी भी जन्म में,
अनंतकाल तक न मिलें।
बस यही मेरी प्रार्थना है…
बस यही… मेरी प्रार्थना है…
(लेखिका का पता नहीं कहीं दो लाइन पड़ी थी उसमें से यह बना दिया यह दो पंक्तियों के वेदना मेरा दिल छू गई)
ढमक
Dada Bhagwan
શું તમે પરીક્ષા માટે 100% તૈયાર હોવા છતાં પરીક્ષા પહેલાં તણાવ અનુભવો છો? તમે એકલા નથી! પરીક્ષા પહેલા નર્વસ થવું સ્વાભાવિક છે. ચાલો જાણીએ કે નકારાત્મક વિચારોના વમળને કેવી રીતે તોડી શકાય જેથી જીતાય પરીક્ષા પહેલાંની નેગેટિવિટીને, મેળવીને સાચી સમજણ પૂજ્યશ્રી દીપકભાઈ પાસેથી.
Watch here: https://youtu.be/GdEtJhc1Ma8
#exam #exampreparation #examfear #examtips #DadaBhagwanFoundation
Imaran
ज़ख्म आज भी ताजा है
पर वो निशान चला गया,
मोहब्बत तो आज भी बेपनाह है
पर वो इंसान चला गया
💔Imran 💔
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
ખુદને સમજાવવું જ આસાન લાગ્યું મને,
બીજાને સમજાવવામાં
આખુ જીવન નિકળી જાય
તો પણ અઘરું છે….
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
ziya
तू होकर किसी और का
हमे ख़ुश रहने का ज्ञान न दे
तू ख्याल रख अपने आशिक़ का
हम पर ध्यान न दे
Anuksha Pande
मैत्री व्यक्त नसेल करता येत रे मला ,
पण तुला जपता मात्र येतं रे मला ..!!
हव्या हव्या श्या गोष्टी ,नसेल जमत मला ,.
पण तुला शब्दात मांडायला मात्र जमत रे मला..!!
पुस्तके पडली माझी आता आस्था व्यस्त ,.
पण तुला मात्र सावरता येत रे मला..!!
तू साधा कागद रे,मला कविते ची जान तरी ,
पण तुझ मन वाजता येत रे मला ...!!
तू प्रश्नाचा साठा माझा ,
पण मात्र तुझ उत्तर बनता येत रे मला ..!!
नसेल ओढखता येत मला हे जग ,
एक तुला ओढखन्न जमलं रे मला...!!
❤️
_Anuuu
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
दूर रहे पर नारि से, करे न मदिरा पान। रखें मेल जो नेक से, वह पाता सम्मान।।
दोहा --४३४
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/18G4upHEqC/
#story
#parents
#children
#emotional
#book
#dream
#emotions
Soni shakya
तुम आए थे जिंदगी में कुछ इस तरह..
जैसे सूखी जमीन पर पहली बारिश..
फिर चल दिए बारिश की तरह..
देकर कुछ यादों की नमी..
- Soni shakya
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
महका महका जीवन
महका महका जीवन अपनों के साथ मुस्कुराने से होता हैं l
जिंदगी में आनंद अपनों के साथ ही जीने ने से होता हैं ll
जिंदगी के हर उतार चढ़ाव में कदम क़दम पर साथ देकर l
अपनों की खुशियों में ख़ुद दिल से मुस्कुराने से होता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या
“अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४
पदच्छेद--
अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (अग्नि/ईश्वर के लिए संबोधन)
न — नहीं
ते — तेरी
सख्याय — मित्रता के लिए
पह्युवे (अपह्नुये) — इन्कार करता हूँ / अस्वीकार करता हूँ
भावार्थ--
हे प्रकाशमय प्रभु! मैं तेरी मित्रता से इन्कार नहीं करता।
अर्थात् — मैं तेरे स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन को स्वीकार करता हूँ। मैं तुझसे दूर नहीं होना चाहता, बल्कि तेरे साथ मैत्रीभाव बनाए रखना चाहता हूँ।
आध्यात्मिक संकेत--
वेदों में “सख्य” (मित्रता) का अर्थ केवल सांसारिक मित्रता नहीं, बल्कि—
ईश्वर के साथ आत्मीय सम्बन्ध
उसके नियमों को स्वीकार करना
उसके प्रकाश में चलना अपने अहंकार का त्याग करना
यह मन्त्र साधक की विनम्र प्रार्थना है कि वह ईश्वर से विमुख न हो, बल्कि उसके प्रकाश में स्थिर रहे।
अन्य वेदों में प्रमाण--
१. यजुर्वेद--
(अ) “मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्” (यजुर्वेद 36/18)
भावार्थ:
सब प्राणी मुझे मित्र की दृष्टि से देखें और मैं सबको मित्रभाव से देखूँ।
यहाँ “मित्र-दृष्टि” का अर्थ है — सार्वभौमिक मैत्री, जो ईश्वर-संबंध का विस्तार है।
२. सामवेद--
सामवेद में ऋग्वैदिक मन्त्रों का ही गायन है।
एक मन्त्र में आता है —
“सखा सखिभ्य ईड्यः” (सामवेद 373 के समीप पाठ)
भावार्थ:
वह (ईश्वर/अग्नि) अपने भक्तों का सखा (मित्र) है, स्तुति के योग्य है।
यहाँ ईश्वर को प्रत्यक्ष “सखा” कहा गया है।
३. अथर्ववेद --
“सखा सख्ये नय”
अथर्ववेद-- 3/30
भावार्थ:
हे प्रभु! हमें सखा की भाँति सही मार्ग पर ले चल।
यहाँ ईश्वर को मार्गदर्शक मित्र माना गया है।
समग्र वैदिक दृष्टि--
वेदों में ईश्वर केवल दण्डदाता नहीं, बल्कि सखा (मित्र), सुहृद् (हितैषी) ,मार्गदर्शक और
प्रकाशदाता के रूप में आया है।
इस प्रकार “तेरी मित्रता से इन्कार नहीं करता” — यह भाव सम्पूर्ण वैदिक साहित्य में व्याप्त है।
उपनिषदों में प्रमाण-- --
१. श्वेताश्वतर उपनिषद--४.६-७
द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया
समानं वृक्षं परिषस्वजाते।
भावार्थ:
दो सुंदर पक्षी, जो घनिष्ठ सखा हैं, एक ही वृक्ष (शरीर) पर साथ-साथ रहते हैं।
यहाँ “सखाया” शब्द स्पष्ट करता है कि जीव और परमात्मा का सम्बन्ध सखा जैसा आत्मीय है। परमात्मा कभी त्यागता नहीं; जीव जब उसकी ओर देखता है, तब शोक से मुक्त हो जाता है।
२-बृहदारण्यक उपनिषद -१.३.२८
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
भावार्थ:
हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले चल।
यह प्रार्थना उसी सखा-भाव की अभिव्यक्ति है— जैसे मित्र मार्ग दिखाता है, वैसे ही परमात्मा को सम्बोधित किया गया है।
३. कठ उपनिषद-१.२.२३
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यः
तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम्।
भावार्थ:
जिसे यह (परमात्मा) स्वयं स्वीकार करता है, उसी को वह प्राप्त होता है; और उसी पर अपना स्वरूप प्रकट करता है।
यहाँ परमात्मा को कृपालु, आत्मीय एवं अनुग्रही मित्र के रूप में दिखाया गया है।
४- मुण्डक उपनिषद -३.१.१
(श्वेताश्वतर के समान ही “द्वा सुपर्णा” मन्त्र)
यहाँ भी जीव-परमात्मा के सख्यभाव का वही चित्र मिलता है।
उपनिषदों का निष्कर्ष--
उपनिषद बताते हैं कि—
परमात्मा दूर नहीं, अन्तःस्थित सखा है।
वह दण्डदाता से अधिक प्रकाशदाता और मार्गदर्शक मित्र है।
जब जीव उसकी ओर मुड़ता है, तो शोक और भय से मुक्त होता है।
अतः ऋग्वैदिक भाव — “तेरी मित्रता से इन्कार नहीं करता” — उपनिषदों में और भी गहराई से प्रतिपादित है।
अन्य उपनिषदों में प्रमाण--
१. ईश उपनिषद-६-७
“यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते॥”
भावार्थ:
जो पुरुष सब भूतों को अपने आत्मा में और अपने आत्मा को सब भूतों में देखता है, वह किसी से द्वेष नहीं करता।
जब सबमें एक ही आत्मा का दर्शन होता है, तब सार्वभौमिक मैत्री उत्पन्न होती है — यही सख्यभाव का उच्चतम रूप है।
२. छान्दोग्य उपनिषद -६.८.७
“तत्त्वमसि श्वेतकेतो।”
भावार्थ:
हे श्वेतकेतु! तू वही (ब्रह्म) है। यहाँ गुरु जीव को उसके परम आत्मीय स्वरूप से जोड़ता है। यह भेद-निवृत्ति का उपदेश है, जहाँ परमात्मा और जीव में विरोध नहीं, अपितु आत्मीय एकत्व है।
३. तैत्तिरीय उपनिषद् -२.७
“रसो वै सः।
रसं ह्येवायं लब्ध्वानन्दी भवति।”
भावार्थ:
वह (ब्रह्म) रसस्वरूप है; उसे प्राप्त कर मनुष्य आनन्दित होता है।
मित्रता का सार आनन्द और आत्मीयता है। ब्रह्म को “रस” और “आनन्द” कहा गया— यह दण्ड नहीं, बल्कि स्नेहपूर्ण निकटता का
स्वरूप है।
४-मैत्री उपनिषद-६.३०
एको देवः सर्वभूतेषु गूढः
सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।
कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिवासः
साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्च॥”
भावार्थ--
एक ही परम देव सब प्राणियों में गुप्त रूप से स्थित है। वह सर्वव्यापी, सबका अन्तरात्मा, कर्मों का अध्यक्ष, सबका आधार, साक्षी, चेतनस्वरूप और निर्गुण है।
यहाँ परमात्मा को सबके हृदय में स्थित अन्तर्यामी कहा गया है — जो निकटतम आत्म-सखा के समान है।
५-प्रश्न उपनिषद ,-६.३
षष्ठ प्रश्न में पिप्पलाद ऋषि ब्रह्मविद्या का उपदेश देते हैं।
“स प्राणमसृजत।
प्राणाच्छ्रद्धां खं वायुर् ज्योतिरापः पृथिवीन्द्रियं मनः।
अन्नाद् वीर्यं तपो मन्त्राः कर्म लोकाः नाम च॥
भावार्थ--
यहाँ आत्मा को हृदय में स्थित, सर्वप्रिय और साक्षी कहा गया है।
भावार्थ: परमात्मा मनुष्य के अत्यन्त समीप, अन्तरंग सखा की भाँति हृदय में स्थित है।
सम्पूर्ण उपनिषद्-दृष्टि-+
उपनिषदों में परमात्मा—
अन्तर्यामी सखा, प्रियतम आत्मस्वरूप, आनन्दघन,सर्वभूत मित्र के रूप में प्रतिपादित है।
पुराणों से प्रमाण—
१. भागवत महापुराण-
(क) १०.१४.५५
“भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन।”
(संदर्भ: भगवान का भक्त–सख्यभाव)
भावार्थ:
भगवान अनन्य भक्ति से ही प्राप्त होते हैं— जहाँ वह भक्त का अपना, आत्मीय सखा बन जाते हैं।वेदोक्त ईश्वर–सख्य/सुहृद्-भाव का प्रतिपादन अनेक पुराणों में स्पष्ट श्लोकों सहित मिलता है। नीचे प्रमुख प्रमाण अर्थ सहित प्रस्तुत हैं—
१-भागवत महापुराण--
(ख)१०.१४.८
तत्तेऽनुकम्पां सु-समीक्षमाणो
भुञ्जान एवात्मकृतं विपाकम्।
हृद्वाग्वपुर्भिर्विदधन्नमस्ते
जीवेत् यो मुक्तिपदे स दायभाक्॥
भावार्थ:
जो व्यक्ति अपने कर्मों के फल को आपकी कृपा समझकर सहता है और हृदय, वाणी तथा शरीर से आपको नमस्कार करता रहता है, वह आपके मुक्तिपद का अधिकारी बनता है।
यहाँ भगवान को करुणामय, हितकारी सखा के रूप में स्वीकार किया गया है।
२. विष्णु पुराण -३.७.१४
“यः सर्वभूतानां सुहृदेक एव।”
भावार्थ:
वह (भगवान विष्णु) समस्त प्राणियों का एकमात्र सच्चा सुहृद् (हितैषी मित्र) है।
३.शिव पुराण--
“भक्तवत्सलः शम्भुः शरणागतवत्सलः।”
भावार्थ:
भगवान शम्भु भक्तों से स्नेह करने वाले और शरणागतों पर कृपा करने वाले हैं।
४- पद्म पुराण - (उत्तरखण्ड)
“स्मर्तव्यः सततं विष्णुः विस्मर्तव्यो न जातुचित्।”
भावार्थ:
विष्णु का सदा स्मरण करना चाहिए, उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए।
निरन्तर स्मरण का आधार भय नहीं, बल्कि आत्मीय मैत्री है।
५- स्कंद पुराण --
“सकृदपि स्मृतो देवः सर्वदुःखं व्यपोहति।”
भावार्थ:
भगवान का एक बार भी स्मरण करने से वह सब दुःख दूर कर देते हैं।
यह मित्रवत् करुणा और संरक्षण का द्योतक है।
निष्कर्ष--
पुराणों में भगवान—
सुहृद् (सच्चा हितैषी)
भक्तवत्सल, शरणागत-रक्षक
करुणामय सखा के रूप में वर्णित हैं।
भगवत् गीता में प्रमाण--
भगवत् गीता में भगवान स्वयं को भक्त का सखा, सुहृद् और प्रिय बताते हैं।
१. अध्याय 4, श्लोक 3
“स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः।
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्॥”
भावार्थ:
तू मेरा भक्त और सखा है; इसलिए मैं यह उत्तम रहस्य तुझे कह रहा हूँ।
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को स्पष्ट रूप से “सखा” कहते हैं। यह ईश्वर–मित्रता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
२. अध्याय 5, श्लोक 29
“भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम्।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति॥”
भावार्थ:
मुझे यज्ञ-तप का भोक्ता, समस्त लोकों का ईश्वर और सभी प्राणियों का सुहृद् (हितैषी मित्र) जानकर मनुष्य शान्ति प्राप्त करता है।
यहाँ भगवान स्वयं को “सुहृदं सर्वभूतानाम्” कहते हैं — अर्थात् सबका सच्चा मित्र।
३. अध्याय 9, श्लोक 18
“गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्।”
भावार्थ:
मैं ही गति, पालनकर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, शरण और सुहृद् (मित्र) हूँ।
ईश्वर केवल शासक नहीं, बल्कि शरणदाता और मित्र भी है।
४. अध्याय 18, श्लोक 64
“सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः।
इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्॥”
भावार्थ:
तू मुझे अत्यन्त प्रिय है; इसलिए मैं तेरे हित की बात कहूँगा।
यहाँ भगवान अर्जुन को “प्रिय” कहकर आत्मीय स्नेह व्यक्त करते हैं यही सख्यभाव की पराकाष्ठा है।
महाभारत में प्रमाण--
१. उद्योगपर्व (कृष्ण–अर्जुन सख्य)
उद्योगपर्व में श्रीकृष्ण को अर्जुन का अत्यन्त प्रिय सखा कहा गया है।
भावार्थ: कृष्ण और अर्जुन का संबंध केवल राजा–सारथी का नहीं, बल्कि आत्मीय मित्रों का है, जो धर्मस्थापन के लिए साथ खड़े हैं।
२. भीष्मपर्व (गीता-प्रसंग)
भीष्मपर्व में ही भगवत गीता का उपदेश है, जहाँ कृष्ण अर्जुन को “सखा” कहते हैं (4.3)।
यह दर्शाता है कि महाभारत के मूल कथानक में भी ईश्वर–सख्यभाव केंद्रीय है।
३. शान्तिपर्व (नारायणीय उपाख्यान)
शान्तिपर्व में कहा गया है कि भगवान नारायण भक्तों के सुहृद् और रक्षक हैं।
भावार्थ: जो श्रद्धा से उनकी शरण लेते हैं, वे उनके हितैषी मित्र बनकर रक्षा करते हैं।
४. वनपर्व (द्रौपदी-रक्षा प्रसंग)
वनपर्व में संकट की घड़ी में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती है।
भावार्थ: भगवान सच्चे मित्र की भाँति संकट में सहायता करते हैं; वे शरणागत का त्याग नहीं करते।
५. कर्णपर्व (अर्जुन का संबोधन)
युद्ध के समय अर्जुन बार-बार कृष्ण को अपने सखा और मार्गदर्शक रूप में स्वीकार करता है।
यह दर्शाता है कि वीरता का आधार भी ईश्वर-मित्रता में है।
महाभारत का निष्कर्ष--
महाभारत में भगवान—
सखा (मित्र), सुहृद् (हितैषी)
शरणदाता धर्ममार्ग के मार्गदर्शक
रूप में चित्रित हैं।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण--
१-(क) मनुस्मृति -४.१३८
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
अर्थ: सत्य बोलो, प्रिय बोलो; अप्रिय सत्य न बोलो; और प्रिय बोलने के लिए असत्य भी न बोलो—यह सनातन धर्म है।
धर्म का यह रूप लोक-हितकारी है; वही हितकारी मार्ग सच्चे मित्र की भाँति कल्याण करता है।
(ख) मनुस्मृति -- ८.१५
धर्मो रक्षति रक्षितो धर्मो हन्ति हतः।
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
अर्थ: जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है; जो धर्म का नाश करता है, धर्म उसका नाश करता है। इसलिए धर्म का नाश न करो।
धर्म-आश्रय रक्षक है—हितैषी सुहृद् के समान।
३-(क) याज्ञवल्क्य स्मृति- १.१२२
वेदः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियमात्मनः।
एतच्चतुर्विधं प्राहुः साक्षाद्धर्मस्य लक्षणम्॥
अर्थ: वेद, स्मृति, सज्जनों का आचरण और अपने आत्मा को प्रिय (अहिंसक/शुभ) आचरण—ये चार धर्म के लक्षण हैं।
धर्म का मापदण्ड लोक-कल्याण और अन्तःकरण-शुद्धि है।
(ख) याज्ञवल्क्य स्मृति -
३.३१३
अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
एतं सामासिकं धर्मं चातुर्वर्ण्येऽब्रवीन्मनुः॥
अर्थ: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शौच और इन्द्रियनिग्रह—यह संक्षेप में धर्म है।
ये गुण सार्वभौमिक हित के आधार हैं।
(४) पराशर स्मृति -१.२४
कृते यद्ध्यायतो विष्णुं त्रेतायां यजतो मखैः।
द्वापरे परिचर्यायां कलौ तद्धरिकीर्तनात्॥
अर्थ: सत्ययुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ, द्वापर में पूजा से जो फल मिलता है, कलियुग में वही हरि-कीर्तन से मिलता है।
कलियुग में स्मरण-भक्ति को सुलभ, हितकारी आश्रय बताया गया है।
(५) नारद स्मृति --१.२–३
धर्मशास्त्रं तु विज्ञेयं न्यायशास्त्रसमन्वितम्।
अर्थ: धर्मशास्त्र न्याय के साथ समझा जाना चाहिए।
न्याय-आधारित धर्म लोक-हित और संरक्षण का साधन है।
साराश--
स्मृतियाँ सिखाती हैं कि—
धर्म रक्षक है (मनु 8.15)।
सत्य, अहिंसा, शौच, इन्द्रियनिग्रह धर्म के आधार हैं (याज्ञवल्क्य 3.313)।
नीति-ग्रन्थों में प्रमाण—
१. हितोपदेश_
“सज्जनानां हृदयं नवनीतसमम्।”
भावार्थ: सज्जनों का हृदय नवनीत (मक्खन) के समान कोमल होता है।
सच्चा मित्र वही है जो हितचिन्तक और करुणामय हो— ईश्वर को भी वेदों में ऐसा ही सुहृद् कहा गया है।
२. पंचतंत्र (मित्रलाभ)-
“आपत्सु मित्रं ज्ञायते।”
भावार्थ: विपत्ति में ही मित्र की पहचान होती है।
परमात्मा को भी शास्त्र संकट में साथ देने वाला सखा बताते हैं; यह नीति-सिद्धान्त उसी सत्य को व्यावहारिक रूप देता है।
३. चाणक्य नीति--
“परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत् तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥”
भावार्थ: जो सामने मधुर बोले और पीछे हानि करे, ऐसे मित्र को त्याग देना चाहिए।
सच्चा मित्र कपटहीन होता है— ईश्वर का सख्यभाव भी निष्कपट और कल्याणकारी है।
४-भृतुहरि नीति शतक
“संतः स्वयं परहिते विहिताभियोगाः।”
भावार्थ: सज्जन स्वयं ही दूसरों के हित में लगे रहते हैं।
‘परहित’ का यह आदर्श वेद के सुहृद् (हितैषी) ईश्वर की झलक देता है।
निष्कर्ष-
नीति-ग्रन्थ बताते हैं कि—
सच्चा मित्र हितैषी होता है
विपत्ति में साथ देता है
कपट से रहित होता है।
योग वाशिष्ठ में प्रमाण --नीचे योग वशिष्ठ से ईश्वर/आत्मा के हितैषी-मित्र (सुहृद्) स्वरूप का प्रतिपादन करने वाले प्रमुख श्लोक अर्थ सहित दिए जा रहे हैं
(१) आत्मा ही सच्चा मित्र
“आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।”
(निर्वाणप्रकरण, पूर्वार्ध —
अर्थ: मनुष्य का आत्मा ही उसका मित्र है और वही (अविवेक से) शत्रु भी बन जाता है।
जब चित्त शुद्ध और विवेकी होता है, वही अन्तःस्थित आत्मा परम हितकारी सखा का अनुभव कराता है।
(२) ब्रह्म सर्वान्तर्यामी सुहृद्
“एको ब्रह्म परं शान्तं सर्वभूतान्तरात्मकम्।
नित्यं सुहृद् सर्वभूतानां तस्मै नमो नमः॥”
(उपशमप्रकरण)
अर्थ: एक ही परम, शान्त ब्रह्म सब प्राणियों का अन्तरात्मा है; वह सबका नित्य सुहृद् है—उसे बार-बार नमस्कार।
यहाँ ब्रह्म को स्पष्ट रूप से सर्वभूत-सुहृद् कहा गया है।
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pink lotus
kashar dhoke vaha milte he..
jaha pura bharosa hota he ❣️..
Saliil Upadhyay
आज कल के छोरे गाना गा रहे है..
बनजा तू मेरी रानी तुझे महल दिला दूगां..!
और खुद के घर प्रधानमंत्री आवास योजना में बन रहे हैं..!
- Saliil Upadhyay
Paagla
https://youtube.com/shorts/azvHvP0NT6A?si=UoxGeVCao7xtJOkx
Rupal Jadav
“ बहन ” POETRY & VOICE COVER BY RUPAL JADAV
OFFICIAL INSTAGRAM HANDLE :- @jadav_rupall
Bhavna Bhatt
જય સંતોષી માતા 🙏
kunal kumar
निर्वासित देवता
_________________'
सड़क के उस पार से रोज़
एक माँग उठती थी,
धीमी पर लगातार,
जैसे भूख
भाषा सीख रही हो।
मैं जानता था यह कोई भ्रम नहीं,
यह ज़रूरत है।
फिर भी मैंने आँखें मूँद लीं,
तालू काट लिए और उसे
डर, अँधेरा, षड्यंत्र कहकर
आगे बढ़ गया।
मैं कायर नहीं था
होता
तो शायद रुक भी जाता पर
मैं सुविधाजनक था।
और सुविधाजनक होना
एक भ्रामक मोतियाबिंद है
काला मोतियाबिंद,
जिसमें लोग खो देते हैं
अपनी संपूर्ण दृष्टि।
और इस तरह
किसी और की
नोची गई आँखें
मेरे अँधेपन से
कम महत्त्वपूर्ण लगने लगीं।
वैसे
सड़क के उस पार जाता
तो ज़िम्मेदारी दिखती।
और ज़िम्मेदारी से
मैं हमेशा बहुत सभ्य तरीक़ों से बचता आया हूँ।
अब उस तरफ़ से
कुछ नहीं उठता
न कोई माँग,
न कोई चीख,
सिवाय एक सड़ी-गली टीस के।
टीस,
जिसमें दर्ज है
उस दिन की उम्मीद—
मेरे आने की,
बचा लेने की।
ख़ैर,
वह मर चुकी है,
और उसके बदले
वह एक गंध हो गई ।
एक ऐसी गंध
जो कसाईखानों में,
वैश्याओं के मोहल्लों में
सामान्य हो जाती है।
यह गंध
पाप की नहीं,
उपेक्षा की है
और उपेक्षा
मेरे द्वारा की गई सबसे घिनोना कृत है ।
शायद इसलिए मैं हुआ सबकुछ
भाई , दोस्त , प्रेमी , पुत्र लेकिन
अंदर से रहा केवल
एक निर्वासित देवता ।
Armin Dutia Motashaw
HAPPY BIRTHDAY DARLING ZOI (JOISSH)
On this holy day of Mehrangan, a pink, plump, pretty princess, unto this family was born
Hungry you were, when you were born; soon after a LSCS done was, early in the morn
Flooded with sooooo many memories I am, with overwhelming emotions I am torn
Princess, at 15, a little Mom you have become, only her apron you haven't worn.
Wishing you all the very best alwayzzz in life I do; may life with its many blessings, you adorn.
Loads of love n all good wishes
Mom, Dad, Freyu, Ma, Taku, Roxy et al
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
मार्च : ध्रुवीकरण और निर्णायक परिवर्तन का महीना
शास्त्रीय एवं समकालीन ज्योतिषीय दृष्टि
मार्च एक तनावपूर्ण और अत्यधिक ध्रुवीकृत महीना बनकर उभरता है, क्योंकि सभी दृश्य ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ओर संकेंद्रित हैं।
कुंभ राशि में राहु के साथ मंगल और वक्री बुध का संयोग अशांति, भ्रांति, गलत सूचना तथा मानसिक अस्थिरता को जन्म देता है, वहीं मीन राशि में शनि–नेपच्यून का दीर्घकालीन संयोग उन आदर्शों और विश्वास प्रणालियों को घोल रहा है जिन पर अब निर्भर नहीं किया जा सकता।
शास्त्र कहते हैं:
“राहु–मंगलयुति: क्रोध-विवाद-विनाशकारी।”
(राहु और मंगल का योग क्रोध, संघर्ष और विनाश उत्पन्न करता है।) — सारावली
“बुधयुक्तो राहुर्मोहं वादं च वर्धयेत्।”
(बुध के साथ राहु भ्रम और मिथ्या वाणी को बढ़ाता है।) — फलदीपिका
इस उग्र वातावरण में एक संतुलनकारी शक्ति है—मीन राशि में उच्च का शुक्र, जो करुणा, कला और भावनात्मक सहारा प्रदान करता है।
“उच्चे शुक्रः सुख-भोग-कला-प्रदः।”
(उच्च का शुक्र सौंदर्य, आनंद और कलात्मक संवेदना देता है।) — बृहत् पराशर होरा शास्त्र
इसी समय गुरु का मार्गी होना विवेक और दृष्टि को धीरे-धीरे पुनः जाग्रत करता है।
“गुरुः मार्गे ज्ञान-विवेकं वर्धयेत्।”
(गुरु के मार्गी होने से ज्ञान और विवेक बढ़ता है।) — फलदीपिका
मीन राशि में शुक्र (1–25 मार्च)
शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में स्थित होकर इस महीने का मुख्य स्थिरकारी ग्रह बनता है। शनि–नेपच्यून के प्रभाव क्षेत्र से गुजरते हुए भी यह करुणा, भक्ति, कला और आध्यात्मिक संवेदनशीलता प्रदान करता है।
“शुक्रः मीने उच्चस्थो भवति करुणा-भक्ति-कला-प्रदः।”
(मीन में उच्च का शुक्र करुणा, भक्ति और कला प्रदान करता है।) — सारावली
किन्तु शास्त्र चेतावनी देते हैं—
“शुक्रः पापयुक्तः स्वप्न-व्यमोहं जनयेत्।”
(दुष्ट ग्रहों से युक्त शुक्र भ्रम और पलायन प्रवृत्ति उत्पन्न करता है।) — फलदीपिका
अतः यह काल सहानुभूति का है, पर अति-आदर्शवाद से बचने का भी।
सिंह राशि में पूर्णिमा — पूर्ण चंद्रग्रहण (3 मार्च)
यह पूर्ण चंद्रग्रहण नेतृत्व, सत्ता, प्रसिद्धि और अधिकार से जुड़े विषयों में निर्णायक मोड़ लाता है। केतु की संलग्नता किसी पुराने ढांचे के टूटने, परदाफाश और त्याग का संकेत देती है।
वराहमिहिर कहते हैं—
“ग्रहणं राज्ञां नाशं दर्शयेत्।”
(ग्रहण राजा और शासकों के पतन का संकेत देता है।) — बृहत् संहिता
“केतुसंयोगे छिन्नता त्याग-विनाशः।”
(केतु से जुड़ाव में कटाव और हानि होती है।) — सारावली
व्यक्तिगत स्तर पर यह आत्म-अभिव्यक्ति और अहंकार पर चिंतन का समय है। सामूहिक स्तर पर यह समूह-मानसिकता और दोषारोपण को बढ़ा सकता है। शास्त्र उपदेश देते हैं—
“ग्रहणे मौनं श्रेयस्करम्।”
(ग्रहण काल में मौन और संयम शुभ है।)
मिथुन राशि में गुरु मार्गी (11 मार्च)
गुरु का मार्गी होना दृष्टि की पुनर्स्थापना का संकेत है। मिथुन में गुरु सूचना, विचारधाराओं और कथाओं की पुनर्समीक्षा कराता है।
“गुरुः स्थिरः ज्ञान-विवेक-वर्धकः।”
(मार्गी गुरु विवेक और ज्ञान बढ़ाता है।) — बृहत् पराशर होरा शास्त्र
“बुधराशौ गुरुर्वाद-ज्ञान-विचार-कारकः।”
(मिथुन में गुरु ज्ञान और विमर्श को प्रोत्साहित करता है।) — फलदीपिका
यह स्पष्टता का नहीं, बल्कि समझ की ओर पहला कदम है।
राहु के साथ मंगल–बुध युति (13–15 मार्च)
यह माह का सबसे अस्थिर और उग्र योग है। आवेग, दुर्घटनाएँ, तकनीकी विफलता, अशांति और भ्रम की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
“राहु-मंगलयोर्युतिः अग्नि-भयं कलहं तथा।”
(राहु-मंगल योग अग्नि, भय और कलह उत्पन्न करता है।) — बृहत् संहिता
“बुधयुक्ते राहौ मिथ्या-वार्ता प्रवर्तते।”
(बुध-राहु से झूठी खबरें फैलती हैं।) — सारावली
शास्त्र स्मरण कराते हैं—
“न बलेन, तु युक्त्या कार्यसिद्धिः।”
(कार्य बल से नहीं, बुद्धि से सिद्ध होता है।)
मीन राशि में सूर्य (14 मार्च – 12 अप्रैल)
सूर्य शनि–नेपच्यून से युक्त होकर नेतृत्व संकट और दिशा भ्रम को उजागर करता है।
“सूर्य-शनि युतिः राज्य-पीड़ा-कारी।”
(सूर्य-शनि योग शासकों को कष्ट देता है।) — फलदीपिका
“मीने सूर्यः त्याग-भावं जनयेत्।”
(मीन में सूर्य त्याग और आत्मचिंतन कराता है।) — सारावली
विषुव (20 मार्च)
यह प्रकाश और अंधकार का संतुलन बिंदु है।
“विषुवकाले भूलोक-परिवर्तनम्।”
(विषुव पर सांसारिक घटनाओं में परिवर्तन होता है।) — बृहत् संहिता
यह धीमे और सजग परिवर्तन का समय है।
ज़मीन अमावस्या — नव संवत्सर (19 मार्च)
संवत्सर : पराभव
पराभव संवत्सर सत्ता के पतन और संरचनात्मक गिरावट का सूचक माना गया है।
“पराभवे नृपाणां हानिः।”
(पराभव वर्ष में शासकों की हानि होती है।)
उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र गंभीरता और वैराग्य देता है।
“उत्तरभाद्रपदे वैराग्यं गंभीरता च।”
यह एक मौन, गहन और आधारभूत पुनःआरंभ है।
“शनैः शनैः सर्वं भवति।”
(सभी परिवर्तन धीरे-धीरे होते हैं।) — मनुस्मृति
बुध मार्गी (21 मार्च)
बुध मार्गी होकर गति देता है, पर राहु से युति के कारण भ्रम शेष रहता है।
“बुधः राहुयुक्तः भ्रान्तिं जनयेत्।”
(बुध-राहु भ्रम उत्पन्न करते हैं।) — फलदीपिका
अतः—
“परीक्ष्य एव कर्तव्यम्।”
(जांच कर ही कार्य करें।) — हितोपदेश
निष्कर्ष:
मार्च कर्मफल, सत्ता-पतन और वैचारिक पुनर्संयोजन का महीना है। शास्त्र बताते हैं कि राहु-मंगल, ग्रहण और शनि-संयोग के काल विजय के नहीं, बल्कि विवेक के समय होते हैं। उच्च का शुक्र और मार्गी गुरु हमें करुणा और बुद्धि प्रदान करते हैं।
“कालः पचति भूतानि।”
(समय सब कुछ परिपक्व करता है।)
मार्च हमें प्रतिक्रिया नहीं, निरीक्षण; बल नहीं, समझ; और पुराने ढांचों से चिपके रहने के बजाय शांत, सच्चे नव-निर्माण की ओर ले जाता है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
क्या सिद्धियां प्राप्त की जा सकती है ???
कितनी प्रकार की सिद्धियां आज भी कार्य कर रही है ???
कैसे प्राप्त की है सिद्ध पुरषों ने सिद्धियां???
नियमित यम-नियम और योग के अनुशासन से न केवल दूसरों के मन की बातें भी जानी जा सकती हैं। परा और अपरा सिद्धियों के बल पर आज भी कई ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्हें देखकर हम अचंभित रह जाते हैं।
सिद्धि का अर्थ
सिद्धि का सामान्य अर्थ सफलता होता है। यह किसी कार्य में पूर्ण पारंगत होने को दर्शाता है। सामान्यतः सिद्धि को चमत्कार या रहस्य से जोड़ा जाता है, लेकिन योग के अनुसार सिद्धि का अर्थ इंद्रियों की पुष्टता और व्यापकता से है, अर्थात देखने, सुनने और समझने की क्षमता का उन्नयन।
परा और अपरा सिद्धियाँ
सिद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं – परा और अपरा।
अपरा सिद्धियाँ विषय संबंधी होती हैं, जो उत्तम, मध्यम और अधम प्रकार की हो सकती हैं। ये मुमुक्षुओं के लिए होती हैं।
परा सिद्धियाँ आत्मस्वरूप के अनुभव से जुड़ी होती हैं और केवल योगिराजों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।
दूसरों के मन को जानने की शक्ति
योग में इस शक्ति को मनःशक्ति योग कहा जाता है। इसके अभ्यास से व्यक्ति दूसरों के मन की बातें जान सकता है। यदि ज्ञान की स्थिति में संयम प्राप्त हो जाए और चित्त पूर्णतः शांत हो, तो यह शक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है।
ज्ञान की स्थिति में संयम का अर्थ है कि जो भी सोचा या समझा जा रहा है उसमें साक्षी रहने की स्थिति। ध्यान से देखने और सुनने की क्षमता बढ़ाएंगे तो सामने वाले के मन की आवाज भी सुनाई देगी। इसके लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता है।
जाति स्मरण का प्रयोग :
इसे पूर्वजन्म ज्ञान सिद्धि योग कहते हैं जैन धर्म में इसे 'जाति स्मरण' कहते हैं। इसका अभ्यास करने या चित्त में स्थित संस्कारों पर संयम करने से 'पूर्वजन्म का ज्ञान' होने लगता है।
आत्मबल की शक्ति :
योग साधना करें या जीवन का और कोई कर्म आत्मल की शक्ति या कहें की मानसिक शक्ति का सुदृढ़ होना जरूरी है तभी हर कार्य में आसानी से सफलता मिल सकती है। यम-नियम के अलावा मैत्री, मुदिता, करुणा और उपेक्षा आदि पर संयम करने से आत्मबल की शक्ति प्राप्त होती है।
बलशाली शरीर :
आसनों के करने से शरीर तो पुष्ट होता ही है साथ ही प्राणायाम के अभ्यास से वह बलशाली बनता है। बल में संयम करने से व्यक्ति बलशाली हो जाता है।
बलशाली अर्थात जैसे भी बल की कामना करें वैसा बल उस वक्त प्राप्त हो जाता है। जैसे कि उसे हाथीबल की आवश्यकता है तो वह प्राप्त हो जाएगा। योग के आसन करते करते यह शक्ति प्राप्त हो जाती है।
उपवास योगा सिद्धि :
कंठ के कूप में संयम करने पर भूख और प्यास की निवृत्ति हो जाती है। कंठ की कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता व अनाहार सिद्धि होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से पेट में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं। कंठ के इस कूप और नाड़ी के कारण ही भूख और प्यास का अहसास होता है।
इस कंठ के कूप में संयम प्राप्त करने के लिए शुरुआत में प्रतिदिन प्राणायाम और भौतिक उपवास का अभ्यास करना जरूरी है।
उदान शक्ति :
उदानवायु के जीतने पर योगी को जल, कीचड़ और कंकड़ तथा कांटे आदि पदार्थों का स्पर्श नहीं होता और मृत्यु भी वश में हो जाती है। कंठ से लेकर सिर तक जो व्यापाक है वही उदान वायु है। प्राणायम द्वारा इस वायु को साधकर यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
कर्म सिद्धि :
सोपकर्म और निरपकर्म, इन दो तरह के कर्मों पर संयम से मृत्यु का ज्ञान हो जाता है।
सोपक्रम अर्थात ऐसे कर्म जिसका फल तुरंत ही मिलता है।
निरपकर्म जिसका फल मिलने में देरी होती है।
क्रिया, बंध, नेती और धौती कर्म से कर्मों की निष्पत्ति हो जाती है।
स्थिरता शक्ति :
शरीर और चित्त की स्थिरता आवश्यक है अन्यथा सिद्धियों में गति नहीं हो सकती। कूर्मनाड़ी में संयम करने पर स्थिरता होती है। कंठ कूप में कच्छप आकृति की एक नाड़ी है। उसको कूर्मनाड़ी कहते हैं। कंठ के छिद्र जिसके माध्यम से उदर में वायु और आहार आदि जाते हैं उसे कंठकूप कहते हैं।
दिव्य श्रवण शक्ति :
समस्त स्रोत और शब्दों को आकाश ग्रहण कर लेता है, वे सारी ध्वनियां आकाश में विद्यमान हैं। आकाश से ही हमारे रेडियो या टेलीविजन यह शब्द पकड़ कर उसे पुन: प्रसारित करते हैं। कर्ण-इंद्रियां और आकाश के संबंध पर संयम करने से योगी दिव्यश्रवण को प्राप्त होता है।
अर्थात यदि हम लगातार ध्यान करते हुए अपने आसपास की ध्वनि को सुनने की क्षमता बढ़ाते जाएं और सूक्ष्म आयाम की ध्वनियों को सुनने का प्रयास करें तो योग और टेलीपैथिक विद्या द्वारा यह सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
कपाल सिद्धि :
सूक्ष्म जगत को देखने की सिद्धि को कपाल सिद्धि योग कहते हैं। कपाल की ज्योति में संयम करने से योगी को सिद्धगणों के दर्शन होते हैं। मस्तक के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं।
ब्रह्मरंध्र के जाग्रत होने से व्यक्ति में सूक्ष्म जगत को देखने की क्षमता आ जाती है। हालांकि आत्म सम्मोहन योग के द्वारा भी ऐसा किया जा सकता है। बस जरूरत है तो नियमित प्राणायाम और ध्यान की। दोनों को नियमित करते रहने से साक्षीभाव गहराता जाएगा तब स्थिर चित्त से ही सूक्ष्म जगत देखने की क्षमता हासिल की जा सकती है।
प्रतिभ शक्ति :
प्रतिभ में संयम करने से योगी को संपूर्ण ज्ञान की प्राप्त होती है। ध्यान या योगाभ्यास करते समय भृकुटि के मध्य तेजोमय तारा नजर आता है। उसे प्रतिभ कहते हैं। इसके सिद्ध होने से व्यक्ति को अतीत, अनागत, विप्रकृष्ट और सूक्ष्मातिसूक्ष्म पदार्थों का ज्ञान हो जाता है।
निरोध परिणाम सिद्धि :
इंद्रिय संस्कारों का निरोध कर उस पर संयम करने से 'निरोध परिणाम सिद्धि' प्राप्त होती है। यह योग साधक या सिद्धि प्राप्त करने के इच्छुक के लिए जरूरी है अन्यथा आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
निरोध परिणाम सिद्धि प्राप्ति का अर्थ है कि अब आपके चित्त में चंचलता नहीं रही। नि:श्चल अकंप चित्त में ही सिद्धियों का अवतरण होता है। इसके लिए अपने विचारों और श्वासों पर लगातार ध्यान रखें। विचारों को देखते रहने से वह कम होने लगते हैं। विचार शून्य मनुष्य ही स्थिर चित्त होता है।
चित्त ज्ञान शक्ति :
हृदय में संयम करने से योगी को चित्त का ज्ञान होता है। चित्त में ही नए-पुराने सभी तरह के संस्कार और स्मृतियां होती हैं। चित्त का ज्ञान होने से चित्त की शक्ति का पता चलता है।
इंद्रिय शक्ति :
ग्रहण, स्वरूप, अस्मिता, अव्वय और अर्थवत्तव नामक इंद्रियों की पांच वृत्तियों पर संयम करने से इंद्रियों का जय हो जाता है।
पुरुष ज्ञान शक्ति :
बुद्धि पुरुष से पृथक है। इन दोनों के अभिन्न ज्ञान से भोग की प्राप्ति होती है। अहंकारशून्य चित्त के प्रतिबिंब में संयम करने से पुरुष का ज्ञान होता है।
तेजपुंज शक्ति :
समान वायु को वश में करने से योगी का शरीर ज्योतिर्मय हो जाता है। नाभि के चारों ओर दूर तक व्याप्त वायु को समान वायु कहते हैं।
ज्योतिष शक्ति :
ज्योति का अर्थ है प्रकाश अर्थात प्रकाश स्वरूप ज्ञान। ज्योतिष का अर्थ होता है सितारों का संदेश। संपूर्ण ब्रह्माण्ड ज्योति स्वरूप है। ज्योतिष्मती प्रकृति के प्रकाश को सूक्ष्मादि वस्तुओं में न्यस्त कर उस पर संयम करने से योगी को सूक्ष्म, गुप्त और दूरस्थ पदार्थों का ज्ञान हो जाता है।
लोक ज्ञान शक्ति :
सूर्य पर संयम से सूक्ष्म और स्थूल सभी तरह के लोकों का ज्ञान हो जाता है।
नक्षत्र ज्ञान सिद्धि :
चंद्रमा पर संयम से सभी नक्षत्रों को पता लगाने की शक्ति प्राप्त होती है।
तारा ज्ञान सिद्धि :
ध्रुव तारा हमारी आकाश गंगा का केंद्र माना जाता है। आकाशगंगा में अरबों तारे हैं। ध्रुव पर संयम से समस्त तारों की गति का ज्ञान हो जाता है।
परकाय प्रवेश :
बंधन के शिथिल हो जाने पर और संयम द्वारा चित्त की प्रवेश निर्गम मार्ग नाड़ी के ज्ञान से चित्त दूसरे के शरीर में प्रवेश करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है। यह बहुत आसान है, चित्त के स्थिरता से सूक्ष्म शरीर में होने का अहसास बढ़ता है। सूक्ष्म शरीर के निरंतर अहसास से स्थूल शरीर से बाहर निकलने की इच्छा।
शरीर से बाहर मन की स्वाभाविक वृत्ति है उसका नाम 'महाविदेह' धारणा है। उसके द्वारा प्रकाश के आवरणा का नाश हो जाता है। स्थूल शरीर से शरीर के आश्रय की अपेक्षा न रखने वाली जो मन की वृत्ति है उसे 'महाविदेह' कहते हैं। उसी से ही अहंकार का वेग दूर होता है। उस वृत्ति में जो योगी संयम करता है, उससे प्रकाश का ढंकना दूर हो जाता है।
भाषा सिद्धि :
हमारे मस्तिष्क की क्षमता अनंत है। शब्द, अर्थ और ज्ञान में जो घनिष्ट संबंध है उसके विभागों पर संयम करने से 'सब प्राणियों की वाणी का ज्ञान' हो जाता है।
समुदाय ज्ञान शक्ति :
शरीर के भीतर और बाहर की स्थिति का ज्ञान होना आवश्यक है। इससे शरीर को दीर्घकाल तक स्वस्थ और जवान बनाए रखने में मदद मिलती है। नाभिचक्र पर संयम करने से योगी को शरीर स्थित समुदायों का ज्ञान हो जाता है अर्थात कौन-सी कुंडली और चक्र कहां है तथा शरीर के अन्य अवयव या अंग की स्थिति कैसी है।
पंचभूत सिद्धि :
पंचतत्वों के स्थूल, स्वरूप, सूक्ष्म, अन्वय और अर्थवत्तव ये पांच अवस्था हैं इसमें संयम करने से भूतों पर विजय लाभ होता है। इसी से अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है।
अंत में अष्टसिद्धि के नाम :
अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, इशीता, वशीकरण।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
Aum Namah Shivay
Pluto Generation in Astrology — What does it mean?
In astrology, Pluto is a slow-moving planet (takes about 248 years to orbit the Sun). It stays in one zodiac sign for 12–30 years, which means millions of people share the same Pluto sign.
That’s why Pluto is called a generational planet—it reflects collective psychology, deep social change, power struggles, and transformation of an entire generation rather than personal traits alone.
Pluto represents:-
Death & rebirth
Hidden power
Trauma & healing
Revolution
Obsession
Deep psychological change
Your Pluto sign = how your generation transforms the world.
Your Pluto house & aspects = how you personally live that transformation.
🧬 Major Pluto Generations & Their Themes
Pluto in Leo (1937–1957)
Theme: Power through identity & creativity
Ego, leadership, fame, charisma
Rise of celebrities, dictators, heroic figures
Generation concerned with recognition and authority
Pluto in Virgo (1957–1971)
Theme: Power through work & systems
Health, service, analysis, perfection
Medical revolutions, environmental awareness
Critique of institutions and routines
Pluto in Libra (1971–1984)
Theme: Power through relationships & justice
Marriage, divorce, law, equality
Feminism, human rights, partnership redefined
Transformation of social contracts
Pluto in Scorpio (1984–1995)
Theme: Power through taboo & emotional depth
Sex, death, money, trauma, psychology
AIDS crisis, financial scandals, occult interest
Deep emotional intensity and fearlessness
Pluto in Sagittarius (1995–2008)
Theme: Power through belief & truth
Religion, philosophy, globalization, internet
Clash of ideologies, terrorism, migration
Search for meaning and freedom
Pluto in Capricorn (2008–2024)
Theme: Power through structures & authority
Governments, corporations, capitalism
Financial crises, collapse of old systems
Redefining leadership and responsibility
Pluto in Aquarius (2024–2044) (current generation)
Theme: Power through technology & collective mind
AI, digital identity, community, networks
Revolution in science, society, and freedom
Dismantling hierarchies, rise of decentralized power
Why Pluto Generation Matters
Pluto generation shows:-
What a generation fears
What it must heal
What it will destroy and rebuild
Where collective karma is concentrated
It answers:-
“What deep transformation is my generation born to experience and create?”
Personal Level vs Generational Level
Pluto works on two levels:-
Generational:-
Same for everyone born in that period (historical events, social change)
Personal:-
Depends on:
House placement
Aspects to Moon, Sun, Ascendant, etc.
Example:
Pluto in Scorpio in the 10th house → personal transformation through career & power
Pluto in Scorpio in the 4th house → family karma, ancestral healing
In short:-
Pluto Generation = the collective soul lesson of your birth era.
It shows how humanity evolves through crisis, destruction, and rebirth.
Aapka Apna
Aachaarya Deepak Sikka
Founder of Graha Chaal Consultancy
Sudhir Srivastava
चौपाई - गम मत डेरा डालो मन पर
हम जीवन पथ चलना चाहें।
बनो नहीं बाधक मम राहें।।
रहा करो तुम अपने घर पर।
गम मत डेरा डालो मन पर।।
इतना भी मत करो शरारत।
मूरख क्या जो आप उघारत।।
तुमसे यूँ भी हम कब डरते।
चाहत नहीं तुम्हारी मरते।।
मान चुनौती आगे बढ़ते।
कठिन राह पर भी हम चलते।।
मान यार अब मेरा कहना।
अब तू हमसे सीखे डरना।।
दिल मेरा कमजोर नहीं है।
तेरा कोई जोर नहीं है।।
हर बाधा से लड़ना सीखा।
खट्टा-मीठा या हो तीखा।।
चाल चले तेरी न कोई।
जीत कभी तेरी नहिं होई।।
कोशिश चाहे जितना कर लो।
मौका है चुपचाप निकल लो।।
बात समझ मेरी यदि आई।
बन जाओ तुम मेरे भाई।।
फर्क नहीं पड़ना है मुझ पर।
गम मत डेरा डालो मन पर।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - गणपति
*********
प्रथम पूज्य हैं श्री गणेशा।
बुद्धि प्रदाता विध्न विनेशा।।
मूषक वाहन जिनके नामा।
मोदक प्रिय मिष्ठान सुनामा।।
शिव गौरा सुत गणपति नंदन।
भक्त करें नित तव का वंदन।।
रिद्धि-सिद्धि के संग बिराजो।
कृपा सभी के शीश पे साजो।।
हाथ जोड़ आसन बैठाओ।
पीत वस्त्र उनको पहनाओ।।
पान सुपारी भोग लगाओ।
फिर अपनी फरियाद सुनाओ।।
जन-मन के हो तुम उद्धारक।
रोग दोष के तुम्हीं निवारक।।
प्रथम पूज्य तुम देव कहाते।
सफल पाठ पूजन हो जाते।।
शुभ अरु लाभ पुत्र द्वय प्यारे।
हृदय बसत हैं सब संसारे।
भक्त आपको सदा पुकारें।
प्रभो दरस दो आकर द्वारे।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई -बड़ाई
********
नाहक नहीं बढ़ाई करना।
सत्य बोलने से मत डरना।।
सत्यमेव जयते की रचना।
सदा सर्वदा पढ़ते रहना।।
आप हमारी करो बड़ाई।
तभी कहेंगे तुमको भाई।।
आज समय की रीति निराली।
लक-दक दिखती होती काली।।
उचित लगे तब करो बड़ाई।
पर मत करना कभी लड़ाई।।
भले नहीं हो आप बड़ाई।
निज जीवन में करो कड़ाई।।
नहीं बड़ाई कभी अघाती।
सदा चाहती फूल अरू पाती।।
झाँसे में इसके मत आना।
महँगा पड़ता पानी दाना।।
सुधीर श्रीवास्तव
Narayan
साइंस कहता है कि दिल
एक मिनिट में 72 बार धड़कता है..
तुम्हारा मेरे करीब आना
साइंस की धज्जियां उड़ा देता है..
Narayan
धड़कने बेकाबू हो गई उनसे आंख मिलाने में
खुदा का शुक्र है वह गले नहीं मिला.. 💞
Narayan
फिदा हो जाऊँ तेरी किस-किस अदा पर,
अदायें लाख तेरी, बेताब दिल एक मेरा...❤️
Narayan
ये हम जो पत्थर के हो चुके है
अपने हिस्से का रो चुके है!
- नारायण
mohansharma
हालात तो मजबूर करेंगे कि रो ले..
पर तुम सोचो कि कैसे खुश हो ले..
Vipul Borisa
अपनी शिकस्त को उस हद तक ले जाना है।
या तो जीत जाना हे,या तो फिर मर जाना है।
विपूल प्रीत
- Vipul Borisa
Ajit
કુદરતે સાવ નકામો તો મને પણ નઈ બનાવ્યો હોય......
કોઈકના માટે તો મને પણ કોડી ના ભાવે સમજ્યો હોય......
જિંદગી ની "યાદ"
Siya Kashyap
औकात नहीं है एक बात निभाने की
पर बाते बहुत बड़ी-बड़ी है जनाब की
Siya Kashyap
औकात नहीं है एक बात निभाने की
पर बाते बड़ी बड़ी है जनाब की
Std Maurya
शीर्षक "अधूरी बाते"
मैं तुम्हारे ख्यालों में खो गया,
न जाने सुबह से शाम कब हो गई।
जब भी मेरी पलकें झपकती थीं,
बस तुम्हारी होठों की मुस्कान दिखती थी।
मैं तुम्हारे लिए यही सोचता था,
कि तुम करीब आकर मुझे कब सीने से लगाओगी...
इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ था मैं,
पर जब नींद से मेरी आँखें खुलीं,
तो आँखों में सिर्फ आँसू थे,
क्योंकि तुम मुझसे बहुत दूर थी।
पास थे तो बस तुम्हारे शब्द,
जो मेरे दिल के करीब थे।
— एसटीडी मौर्य✍️
#stdmaurya #std
Kaushik Dave
कठिन डगर है जीवन की, पर तू न अब घबराना,
अधर्म के इस शोर में, तू धर्म का शंख बजाना।
छल करेंगे अपने ही, जैसे शकुनि का पासा हो,
पर डगमगाना मत कभी, चाहे चारों ओर निराशा हो।
तू सारथी बना ले कृष्ण को, अपनी बुद्धि के रथ पर,
फिर देख कैसे खिलते हैं, फूल कांटों वाले पथ पर।
अभिमन्यु की वो वीरता, अब तुझमें जागृत होनी है,
लिखनी तुझे खुद हाथों से, अपनी जीत की अनहोनी है।
मौन खड़ा जो देख रहा, वो सब खेल समझता है,
जो लड़ता है अंत तक, वही इतिहास में सजता है।
हृदय में रख तू "नमो नमः", अधरों पर सत्य का गान हो,
श्री कृष्ण सदा सहायते, तेरा यही अटूट सम्मान हो।
- Kaushik Dave
Nothing
"Effective communication is the foundation of a healthy relationship, acting as the "glue" that builds trust, intimacy, and conflict resolution.."
Archana Rahul Mate Patil
माझ्या मराठी बोलू कौतुके
मातृभाषा मराठी माय मराठी!!!
*पोवाड्यातल्या शौर्याची,
आरतीतल्या टाळ्यांची.
अभंगातल्या विठू नामाची
भाषा माझी मराठी..
भजनातल्या भक्तीची.
गाऱ्हाण्यातील साकड्याची
गोंधळ्याच्या उदोउदोची
भाषा माझी मराठी...
जात्यावरच्या ओवी ची.
कीर्तनातल्या कथेची
भारुडआतल्या प्रबोधनाची
भाषा माझी मराठी
कथा कादंबऱ्याची
नाटक आणि कवितांची
बालगीत गोष्टींची
भाषा माझी मराठी
साधुसंतांचा उपदेश,
भगव्याचा स्वाभिमान
शिवरायांच्या उपकारांची
जाणीव आहे मराठी...
देणगी या शब्दांची
आठवण मातीची
अफाट या साहित्याची
भाषा माझी मराठी!!
संत परंपरेची
भक्त भगवंताची
सखू मीराबाई ची
भाषा ही मराठी..
ज्ञानदेव नामदेव
सोपान एकनाथ
जनार्धन चांगदेव
भाषा माझी मराठी
तुकोबा अन चोखोबा
संत सावता माळ्याची
माझ्या विठुरायाची
भाषा आहे मराठी
मराठी भाषा गौरव दिनाच्या मराठमोळ्या शुभेच्छा...!!!
Archu..!!!*
kashish
poodhe hi hai to kya ho jye gaa agar ham une tor de to...
ek maali se pucho kitna time laga ek phoolo ko ugane mai ...
ek us bachche ya buode se pucho jisko oxygen lene mai dikat aati hai...
delhi ke logo se pucho unki jindhgi aadhi kise ho gyi ...
or tum kehte ho ki poodhe hi hai to kya ho jye gaa agar ham une tor de to...
by kashish
ek archana arpan tane
સંબંધો માં જબરદસ્તી ના હોવી જોઇએ જેને જયાં અને જે સંબંધ માં શકુન મળે ત્યાં જ છોડી દેવું જોઇએ.
- ek archana arpan tane
Ajit
સર્વસ્વ મૂકી ને તને અપનાવી છે,
તે પણ મૂકી દીધો હવે સાનો ડર?
જિંદગી ની "યાદ"
Ajit
હું કેટલો નસીબદાર છું એતો જોવો યારો.........
પ્રેમ માટે પણ મરવાનું ને દર મહિને દિવસો સુધી બ્લોક થઈ ને મરવાનું...
જિંદગી ની "યાદ"
Ajit
ન પૂછજો હવે કોઈ હાલ મારા, હું બેહાલ બરાબર છું.......
મારા મનનું ધાર્યું થાય તો હું સ્મશાને પણ એકલો જવા માંગું છું.....
જિંદગી ની "યાદ"
Saliil Upadhyay
गब्बर की ना बीवी थी ना बच्चे थे ना कोई गर्लफ्रेंड !
फिर वो लूटपाट किसके लिए करता था?
उचित उत्तर देना बड़ा कन्फ्यूज़न है...!
- Saliil Upadhyay
Ajit
હું અહિયા સુધી પહોંચી ગયો છું.......
Chaitanya Joshi
કાનુડા ભરી લેને પિચકારી તો આજે હોળી મનાવીએ
જો તું એવું કૈં શકે વિચારી તો આજે હોળી મનાવીએ
તેં પણ મનાવી હશે અતીતે હોળી ગોપબાળોની સંગે,
જો રમવાની હોય તૈયારી તો આજે હોળી મનાવીએ
રંગ કેસૂડાના ઘોળીઘોળી તૈયાર કીધા છે વહાલમ મેં,
ને જોતાં રહે નરને નારી તો આજે હોળી મનાવીએ.
રંગ લગાવીને માખણ પણ ખવડાવીશ હોને કહાના,
ઊભય ઉરઅગન દે ઠારી તો આજે હોળી મનાવીએ
છોને અંશઅંશી થૈને બિનધાસ્ત આજે હોળી ખેલતા,
લાલા તારા પર જાઉં વારી તો આજે હોળી મનાવીએ
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Dr.Namrata Dharaviya
બેસી રહ્યું તું પાળની કોરે પતંગિયું,
સંભવ છે કોઈ ફૂલ ત્યાં ડૂબી ગયું હશે.
Abhishek deuraj
माँ — हमारी पहली मोहब्बत
माँ हमारी पहली मोहब्बत होती है,
दुनिया से पहले जो हमारी आदत होती है।
जिसकी गोद में सुकून का जहाँ मिलता है,
जिसकी आवाज़ में ही सारा आसमाँ मिलता है।
जब चलना भी नहीं आता था हमें,
वो गिरने से पहले थाम लेती थी।
हम रो भी ना पाएं दर्द से पहले,
वो बिना कहे ही जान लेती थी।
उसकी दुआओं का साया सिर पे रहता है,
तभी तो हर मुश्किल भी हल्का लगता है।
उसकी हँसी में रब की रहमत दिखती है,
उसकी ममता में जन्नत बसती है।
माँ हमारी पहली मोहब्बत होती है,
और सच कहूँ —
आख़िरी तक वही सबसे सच्ची इबादत होती है। ❤️
Chaitanya Joshi
શાંતિને ધીરજ રાખીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
મનોબળ મજબૂત ધરીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
વાંચેલુંને લખેલું પૂર્વે એ વાગોળવાનો વખત,
માનવસહજ કર્મ કરીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
પરિણામની ચિંતા કે ચિંતનનો સમય નથી કે,
યાદદાસ્તને ફરી ઢંઢોળીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
અઘરું કે સહેલું એ પળોજણમાં પડ્યા વગર,
સહેલું તે જે વહેલું લખીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
બનીને પાર્થ થૈ નિશ્ચિંત તમારું કર્મ કર્યે જાઓ,
કૃષ્ણને બસ સાક્ષી ગણીને પરીક્ષા આપવી ઘટે.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Narayan
तुझे इतना चाहा कि,
फिर कुछ चाहा ही नहीं,
तुझे चाहकर .......❤🔥🍂🍁
- Narayan
A singh
भरोसा काँच की तरह होता है,
एक दरार पड़े तो चमक खो देता है।
फिर चाहे सच कितना भी साफ़ क्यों न हो,
टूटा यक़ीन हर बात को धुंधला कर देता है।
_ A Singh ✨
prit tembhe
मिल गया होता....✍️
मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता....
अमावस के चांद को उसका सितारा मिल गया होता......
अगर एक लफ्ज़ छुप जाता छूपके से,
मुझे मेरे दिल का तराना मिल गया होता......
उस दिन तो नैय्या कुछ यूंही डूबी....
समुंदर चारों दिशाओं में खोया होता......
अगर तूफान नहीं आता , तो शायद
किनारा मुझे मिल गया होता.......
क्या कहे काटो को, फूल भी अब काटने लगे....
बच्चा था,ठीक था....लेकिन जवानी में भी कोई
धूल चाटने लगे.....
अच्छा हुआ हवा के साथ धूल भी उड़ गई.....
वरना उसकोही, सोने की चमक समझके बैठा होता,
अफसोस फिर भी आँखें करती है....
क्योंकि नजर को कोई नजारा मिल गया होता......!
इसलिए तेरी मोहब्बत का सहारा मिल गया होता....
अगर तूफान नहीं आता, किनारा मिल गया होता.......!!
Chaitanya Joshi
શિયાળાને વિદાય આપી આવી હુતાશણી.
ઉનાળાને રખે આવકારી આવી હુતાશણી.
યાદ પ્રહલાદની આજેય સ્મરણમાં આવતી,
હિરણ્યકશિપુને ધિક્કારી આવી હુતાશણી.
અગનકસોટી છોને થતી હોય હરિ જો હારે,
ભક્તવત્સલતાને સ્વીકારી આવી હુતાશણી.
હોલિકાદહને સહીસલામત રહ્યો પ્રહલાદને,
સત્યનો શકે વિજય મનાવી આવી હુતાશણી.
કેસૂડાંના રંગે માનવમહેરામણ તો ગયું રંગાઈને,
નૂતન જોમને ઉત્સાહ સંચારી આવી હુતાશણી.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Paagla
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Paagla
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Dosto please subscribey you tube channel very soon I am coming live there.
@paagla012 👈 YouTube
Anything can be done by themselves. Just follow your passion
simran kumari
rango ke bahar itish ke sang
barsat si prem ki kahani,
Krishna or Radha ji jubani,
holika ki bhasm se ubhari thi rah.
asatya par satya ki yah pahli chah.💖💖💖💖💖
gulab ki khooshbu me chupa sandesh,
mita de jat-pat, laye naye sabere ka tej♥️
sangeet , nritya or hansi ka mel,
itihas me gunjata yah parv anmol.💓💓💓💓💓
rango se bhara har chehra, har man,
yad dilaye ki achai hai jeevan ka dhan.♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Krupa Thakkar #krupathakkar
ફરજ સાચી રીતે બજાવવી તેજ સાધના...
સાધના માત્ર જપ, તપ, ધ્યાન અને યજ્ઞ થી મર્યાદિત નથી.
પરિવાર માં રહો અને માયા,મમતા,મોહ ,અપેક્ષા,આશા વગેરે નો ત્યાગ જ વૈરાગ્ય છે.
કર્તવ્ય નીભાવવું એ જ સન્યાસ કહેવાય...
Shailesh Joshi
किसी भी मौसम में कैसे भी हालात में
अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, चलो हम तो वृक्ष है,
हमारे पैर नहीं होते, मगर आप तो इन्सान है,
और तुम्हारे पास तो सिर्फ पैर नहीं, पैरों के साथ-साथ दिमाग भी है, और शायद तुम्हें सम्भालने वाले लोग भी है, इसलिए अपनी पहचान मत खोईए, क्योंकि हमें तो मौसम के हिसाब से ही जीना पड़ेगा, मगर आप तो कैसे भी करके अपने हालात संवार सकते हैं.
- Shailesh Joshi
Yash Singh
एक कागज राहों में पड़ा मिला मुझे ,
मैंने उसे नायाब बना दिया
अपने दिल की सारी बातें लिख दी उसे पर
और उसे अपनी डायरी में छुपा दिया
एक दिन पता चला वह किसी और की डायरी का हिस्सा था
किसी की अनकही बातों का अनकहा किस्सा था
कोई लिखना चाहता था उसे पर बहुत कुछ पर जब कांपते हाथों ने साथ ना दिया
तो उसने इसे फाड़ कर फेंक दिया
होकर व्याकुल किसी के प्रेम में इस पर टपकी दो आंसू की बूंदे थी
मैंने इसे नायाब बना दिया यह समझना मेरी भूल थी
नायाब तो था यह पहले से ही भले ही इस पर लोगों की पग धूल थी
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