Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
GIRLy Quotes
प्यार अक्सर "long distance", "गरीबी",
जैसी कठिन परिस्थितियों मे भी survive कर जाता है,
पर धोखेबाजी, झूठ, मे प्यार survive नही कर पाता है।
धोखे का पता चलते ही उस इंसान से नफरत होने लग जाती है,
साथ मे बिताया गया वक्त कचरा बन जाता है,
खूबसूरत यादें भी सड़ने लग जाती हैं।
जिसमे से अच्छे पल ढूंढ़ने की हिम्मत भी नही होती है।
धोखेबाजी प्यार का अस्तित्व ही खत्म कर देती है।
Ashish jain
शीर्षक: "श्रमण चर्या का बदलता चोला"
ब्रह्म मुहूर्त में जो उठकर, आत्म-ध्यान में लीन थे,
जैन आगम के वे साधक, संयम में प्रवीण थे।
पर आज देख कर ये दृश्य, मन भारी हो जाता है,
जब साधु वेश में कोई, सुबह नाश्ता चबाता है।
कहाँ गई वह 'नवकारसी', कहाँ गया वह त्याग?
चाय की चुस्की में अब, जाग रहा अनुराग।
दोपहर की गोचरी तो बस, एक रस्म बन गई है,
साधु की वो तप-तपस्या, अब तो कहीं खो गई है।
सूरज कहता - "सावधान! अब विदा मुझे तुम होने दो",
चौ विहार का समय हुआ, अब जठराग्नि को सोने दो।
मगर शाम के पाँच बजे भी, जो भोजन की आस रखे,
वो क्या खाक मुमुक्षु होगा, जो जीभ पर ना लगाम रखे।
चामुंडराय ने क्या सोचा था, क्या ऐसे होंगे निर्ग्रंथ?
क्या भोग-विलास की राह चलेगा, ये पावन जैन पंथ?
श्वेत वस्त्र तो धारण किए, पर मन में भारी लालसा है,
ये श्रमण धर्म है या बस, सुविधानुसार एक तमाशा है?
तप की अग्नि ठंडी पड़ी, इंद्रियों का जोर बढ़ा,
साधुता की बलि चढ़ाकर, स्वाद का चस्का खूब बढ़ा।
आशीष! देख ये विडंबना, रक्षक ही भक्षक बनता है,
शास्त्रों का शासन रोता है, जब संयम रोज मरता है।
Adv.आशीष जैन
7055301422
वात्सल्य
શું કામ દુઃખી થવું ! શું કામ આપઘાત કરવો!! શું કામ ઝેર પીવું,શું કામ ડૂબી મરવું, શું કામ વીજળી હાર્યે બાથ અને શું કામ ખાવો પડે ગળે ફાંસો??
❤️
ધીરજ રાખ દોસ્ત થોડી ધીરજ રાખ,ધંધામાં ધ્યાન દે,રૂપિયા કમાઈ લે,તારા માટે પૂજા કરેં છે,પીપળાની!!!!કોઇ સુંદર છોકરી !!!
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
Dhanish Dhondiyal
#sad #shayari
Dhanish Dhondiyal
#bewafai #sadstatus
Sudhir Srivastava
दोहा - श्री जी कनक प्रभा
कला जन्म से थी हुईं, जीवन की मुस्कान।
कनक प्रभा हो पथ चली, शासन माता जान।।
सूरजमल जिनके पिता, छोटी बाई मातु।
कनक बन गई एक दिन,सोना जैसी धातु।।
श्री तुलसी ने कला को, दिया नया था नाम।
कनक प्रभा की कीर्ति से, फैला नव पैगाम।।
तेरा पंथी साधिका, तुलसी दीक्षा पाय।
साध्वी प्रमुखा रूप में, पद को किया सुभाय।।
कनक प्रभा जी साधिका, बहुगुण की थीं खान।
जैन, भिक्षुणी, लेखिका, सन्यासी सम्मान।।
कनक प्रभा जी का हुआ, अमर जगत में नाम।
बिना मोह माया किया, रखे भाव निष्काम ।।
तुलसी कृतियों का किया, सदा आपने गान।
तनिक नहीं था आप में, लोभ, मोह अभिमान।।
सकल जगत में आपका, बड़ा मान सम्मान।
चरण वंदना सब करें, कृपा आपकी जान।।
शासन माता को करूँ, नमन जोड़ कर हाथ।
सूक्ष्म रूप में ही सही, रहो हमारे साथ।।
महिलाओं को कनक ने, नई दिखाई राह।
उन्नति पथ पर ले बढ़ें, ये थी उनकी चाह।।
साध्वी जी ने गढ़ दिया, एक नया प्रतिमान।
विविध पदों पर काम कर, रहीं सदा गतिमान।।
शासन माता कनक ने, पाया कउत्तम स्थान।
इक्यासी की उम्र में, जीशवन का अवसान।।
धन्य-धन्य जीवन हुआ, यश गाथा उत्कर्ष।
जिनसे प्राणी सीखते, क्या होता है हर्ष।।
तेरापंथी साध्वी, ऊँचा तव स्थान।
तीस वर्ष में मिल गया, साध्वी प्रमुखा मान।।
कनक प्रभा जी आपको, शत-शत बार प्रणाम।
जैन धर्म को आपने, दिया नया आयाम।।
महरौली में आपका, हुआ देह का त्याग।
जैन धर्म के लोग सब, मानें इसे प्रयाग।।
दिव्या पर करिए कृपा, कनक प्रभा जी आप।
और निधी का संग में, हरो शोक संताप।।
सुधीर श्रीवास्तव
Maulik Patel
તારો એક અભાવ છે,
એવો મને ભાવ છે,
પ્રેમ કરવો મારો સ્વભાવ છે,
બાકી મને તાવ છે.
Nilesh Rajput
एक बिका हुआ पत्रकार
नेताओं की गोदी में, ये बैठे रहते हफ्ते चार,
दो कौड़ी के लालच में, यहाँ बिकते रहे पत्रकार,
गंदा पानी, टूटी सड़कें, सच के सामने ये मुँह छुपाते,
चाटुकारिता की हद तो देखो, अरावली तोड़ने के फायदे गिनाते,
झूठी सारी न्यूज़ फैलाकर, हक़ माँगने पर देशद्रोही कहलाते,
देशभक्तों को जेल में डालकर, खुद को विश्वगुरु कहलाते।
शिक्षा, रोज़गार की बातें छोड़कर, वंदे मातरम् पर बहस कराते,
हिंदू–मुस्लिम से मन भर गया, अब हिंदू–हिंदू को लड़वाते।
जनता सारी जाग्रत हुई, बिना डरे कहेंगी दिल की बात,
हिंदुस्तान की क़सम खाकर, मिलकर बदलेंगे यह सरकार।
Manju jhanwar
सोचना बंद करो
आगे क्या होगा
अगर यह हुआ तो
अगर वैसे हुआ तो
तुम इतना मत सोचो
आज तक तुमने जो सोचा
क्या सब वही ही हुआ
नहीं ना या कुछ कुछ
पर तुम तो सोचते जा रहे हो
जो होना है वहीं तो हुआ
सोचना ग़लत तो नहीं
पर इतना सोचना अच्छा नहीं
तुम परेशान होते हो
कितना चिंतित होते हो
बेवजह दुखी होते हो
क्या जीवन यही है?
जरा कुछ पल रुको तो सही
क्या सोच रहे हो देखो तो सही
फिर कहना मैं ग़लत नहीं
तुम्हारा सोचना है, कितना सही
तुम कई बार तड़पते हो
कितना छटपटाते हो
आखिर क्या हासिल हुआ
तुम्हारा सोचा कितना हुआ
जरुरत से ज्यादा मत सोचो
सोचने की भी सीमा होती है
किसी ने कुछ कह दिया
तुम सोचने लग गए
वो उसकी समस्या है
वो जो चाहे,कहता रहे
न जाने कितनी दफा
तुम अपनी सोच पर हंसे हो
सच में पछताये हो
सच बताओ,
बेमतलब का सोचना
कितना घातक हुआ
जो तुम्हारे साथ नहीं हुआ
वो भी तुमने सोचा लिया
चलो कोई बात नहीं
अब तो रुकना है
खुद से हर समय कहना है
सोचना है उतना
जरुरी हो जितना
नहीं मेरे पास वक्त इतना
archana
“वह सोचता है कि अंधेरे में मुझे रोक कर खुश है…
पर मैं उसे दिखा रही हूँ — हाँ, मैं अंधेरे में हूँ,
पर सब पता है मुझे। सब समझ चुकी हूँ।”
- archana
bhavesh
"સંપત્તિ કે શક્તિ ગમે તેટલી હોય, પણ જો પરિવારનો સાથ ન હોય તો માણસ હારી જાય છે. એકતામાં જ સાચું સુખ અને વિજય છે. 🙏✨
Rima
आज घर बहुत याद आ रहा है
आज घर बहुत याद आ रहा है,
बहुत ज़्यादा थक चुकी हूँ मैं।
दिल करता है सब छोड़कर
माँ-पापा के पास चली जाऊँ,
पर ज़िंदगी ने नहीं—
मैंने खुद
अपने रास्तों पर ताले लगा दिए।
खुशियों को टालते-टालते
खुद को ही रोक लिया।
सबका हाथ थामते-थामते
अपना हाथ
कब छूट गया,
पता ही नहीं चला।
सबके बारे में सोचते-सोचते
खुद को कहीं बहुत पीछे छोड़ आई हूँ।
हर रिश्ता बचाते-बचाते
अपने ही टूटने की आवाज़
अनसुनी कर दी।
माँ,
आज मैं मज़बूत नहीं हूँ,
बस खड़ी हूँ…
गिरने की इजाज़त भी
खुद को नहीं दी।
खुश रहने के लिए नहीं,
सिर्फ़ रिश्ते बचाने के लिए
हर दिन खुद से समझौता करती रही।
माँ,
आ जा मेरे पास…
मेरे बाल सँवार दे,
आज मुझसे ये भी नहीं हो पा रहा।
तेरी बेटी बहुत थक गई है माँ,
अब खुद को संभालने की ताक़त भी
टूटती जा रही है।
मज़बूत बनने की आदत में
रोने का हक़ खो दिया है मैंने।
आज सच में मुझसे नहीं हो पा रहा माँ…
बस एक बार गले लगा ले,
शायद इस बिखरे हुए दिल को
थोड़ा सा
घर जैसा सुकून
मिल जाए। 🌧️
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
Nilesh Rajput
मैं छोड़ दूँ शिकायतेँ सभी तेरे लिए,
क्या तुम फिर भी झूठी क़सम खा पाओगी क्या?
मैं तेरे वास्ते ले लूँ एक मकान नया,
क्या तुम उन्हें अपना घर बना पाओगी क्या?
मैं वक़्त को रोक भी दूँ दो पल के लिए भी,
क्या तुम वक्त पे आ पाओगी क्या?
मैं कर भी लूँ इश्क़ तुझसे अभी,
क्या तुम फिर से बेवफ़ा बन पाओगी क्या?
GIRLy Quotes
punar janam..
Kuch bhi nahi hota dogle..
anantkal ke liye tumne ..
muje kho Diya hai..
ab 36 so jagaho par muh Marta re..
- GIRLy Quotes
Bhavna Bhatt
જય રાંદલ માતાજી
Bhavna Bhatt
મારાં ઓચ્છવલાલ દાદા... એમનાં સારાં કાર્યો ની મહેક હજુ પણ ફેલાયલી છે.... 🙏
shabdh skhi
दूसरों का हक़ और ख़ुशी छीनकर
उसने अपना घर बसाना चाहा..!
एक लड़की होकर दूसरी लड़की का
घर तोड़ डाला.
फिर भी मुझे शिकायत उससे नहीं है 🙂
क्योंकि मेरे साथ ऊपर वाले ने
न्याय कर दिया...
रिजल्ट सबके सामने आ ही गया👌😂
- shabdh skhi
Sudhir Srivastava
दोहा-कहें सुधीर कविराय ३५
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बुजुर्ग
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छाँव शीष जिनके रहे, इनकी शीतल छाँव।
उन पर चलता है नहीं, कभी किसी का दाँव।।
जो करता इनका सदा, मान और सम्मान।
ईश्वर की उस पर कृपा, दूर रहें अपमान।।
आया है कैसा समय, शर्म हया सब दूर।
मात-पिता बूढ़े हुए, हम मस्ती में चूर।।
वृद्ध जनों को मिल रहा, वृद्धा आश्रम ठौर।
अपनों में आने लगा, जब से स्वारथ बौर।।
अपने ही अब कोसते, अपनों को ही रोज।
जाने क्या हैं पा रहे, खाकर इनका भोज।।
कौन आज है आपका, शुभचिंतक सिरमौर।
मुश्किल में यदि हैं पड़े, कौन दे रहा ठौर।।
*******
वाणी
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वाणी बतलाती हमें, मानव का व्यवहार।
चाहे जितना हो बड़ा, उसका घर परिवार।।
कटु वाणी है छीनती, इक दूजे का चैन।
कहीं दुश्मनी हो रही, कहीं भीगते नैन।।
वाणी में क्या है रखा, नहीं समझते आप।
इसीलिए तो कर रहे, अंजाने में पाप।।
वाणी पर जिसने रखा, निज अंकुश भरपूर।
पास उसी के आ रहे, कल तक थे जो दूर।।
वाणी जिसकी मौन है, उससे डरिए आप।
नहीं छेड़ना भूल से, मिले बहुत संताप।।
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नववर्ष
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नया वर्ष छब्बीस का, लेकर आया हर्ष।
हर प्राणी खुशहाल हो, फैले नव उत्कर्ष।।
नये वर्ष में हम सभी, मिलकर करें विचार।
पावन रखना है हमें, उचित प्रेम व्यवहार।।
नये वर्ष में क्या नया, बड़ा प्रश्न है आज।
प्रेम प्यार व्यवहार सम, होगा सबका काज।।
नये वर्ष में दीजिए, मिलकर दुआ हजार।
खुशहाली से हो भरा, मम जीवन संसार।।
छोटों को आशीष है, चरण बड़ों के शीश।
नया वर्ष सबको सदा, देता शुभ आशीष॥
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गणतंत्र दिवस
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उत्सव है गणतंत्र का, हर्षित भारत देश।
संविधान गुण गा रहे, अद्भुत है परिवेश।।
लोकतंत्र सबसे बड़ा, सजा तिरंगा ताज।
सर्वधर्म समभाव का, भारत में है राज।।
संविधान का हम सभी, करते हैं गुणगान।
और तिरंगा दे रहा, हमको निज पहचान।।
आज देख कर्तव्य पथ, भारत का उत्कर्ष।
दुश्मन सब बेचैन हैं, शुभचिंतक में हर्ष।।
दुनिया ने जब से सुनी, महामहिम की बात।
दुश्मन सब बेचैन हैं, डर-डर काटें रात।।
संविधान की आड़ में, होते कितने खेल।
लोकतंत्र के नाम पर, भाग रही है रेल।।
अजर-अमर गणतंत्र को, दुनिया देती मान।
भारत का गौरव बढ़े, यही हमारी शान।।
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हिंदी
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हिंदी का गौरव बढ़े, ऐसा करिए काम।
नाहक में ही आप सब, होते क्यों बदनाम।।
हिंदी हमसे पूछती, बतलाओ तो आज।
कह सुधीर कैसे बनूँ, भाषा का सरताज।।
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यमराज
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भटक गये यमराज जी, जाने कैसे राह।
या जागी कुछ है नई, उनके मन में चाह।।
मुझ पर कोई अब नहीं, देता थोड़ा ध्यान।
इसीलिए यमराज जी, बाँट रहे गुरु ज्ञान।।
लगता जैसे सो गया, आज मित्र यमराज।
इसीलिए क्या थम गया, मेरा सारा काज।।
काम बहुत ही शेष है, समय छूटता हाथ। अब केवल यमराज ही, दे सकता है साथ।।
मंजिल अपनी आ गई, अब तो यारों पास।
आप सभी को है पता, यम अपने हैं खास।।
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विविध
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नाहक मन में है भरा, इतना अधिक गुबार।
या फिर केवल चाहते, ठनी रहे ये रार।।
मन का मैल निकालिए, यही समय की माँग।
या फिर तोड़ें आपकी, हम सब मिलकर टाँग।।
भलमानुष इतना नहीं, बनकर रहिए आप।
कल पछताने से भला, नहीं करो ये पाप।।
कौन दे रहा आपको, भला आजकल भाव।
नाम एक बतलाइए, नहीं कुरेदे घाव।।
जन्मदिवस है अटल का, आज बहुत ही खास।
स्वामी अद्भुत गुणों के, संग हास परिहास।।
तुलसी पूजन खास है, सभी पूजिए आज।
श्रद्धा अरु विश्वास से, करते रहिए काज।।
ठंडी दुश्मन बन रही, राजा हो या रंक।
नाहक लेती स्वयं ही, अपने शीश कलंक।।
तीन दिवस प्रतिभाग कर, लौट गया से मित्र।
समझक्ष नहीं आता मुझे, खींचूँ कैसे चित्र।।
संचालक सब आलसी, या फिर कोई रोग।
या नाहक हैरान हूँ, सब हैं स्वस्थ निरोग।।
मायूसी को छोड़ दो, मत हो आप अधीर।
इससे तो अच्छा भला, बनकर रहो कबीर।।
समय बड़ा बलवान है, इसका रखिए ध्यान।
मूरख हो तुम क्या बड़े, गाते नीरस गान।।
कुछ बड़बोले लोग हैं, सदा बघारें ज्ञान।
नहीं समझते वे कभी, उनका अलग विधान।।
चाह रहे जो हम सभी, रहा न उसका अंत।
यही हमें समझा रहे, ज्ञानी मुनिजन संत।।
कहना मानोगे नहीं, बुद्धिमान हो आप।
बेवकूफ हम भी नहीं, नाहक करते जाप।।
मौन छोड़ कर आइए, सभी पटल के द्वार।
कम ज्यादा कुछ कीजिए, आप व्यक्त उद्गार।।
हार-हार कर जीतना, है अपना सिद्धांत।
इसी राह चलते हुए, जीवन लक्ष्य सुखांत।।
जो जलते हैं आपसे, उनको मत दो भाव।
आप मौन हो दीजिए, जलनखोर को घाव।।
जितना भी मैं आपको, देता आया भाव।
उतना ज्यादा आपने, सदा कुरेदा घाव।।
जो भी जितना योग्य है, उतना पाता मान।
इसके बिन मिलता कहाँ, और किसे सम्मान।।
बेटी, पत्नी, माँ, बहन, मातृशक्ति का रुप।
यही सदा से सह रहीं , सबसे ज्यादा धूप।।
नाहक ही तो आप हैं, जाने क्यों हैरान।
मुखमंडल ऐसा लगे, वीराना मैदान।।
वाणी बुद्धि विवेक का, जो रखता है ध्यान।
कलयुग के इस दौर का, वह मूरख नादान।।
छोटों को आशीष है, चरण बड़ों के शीश।
नया वर्ष सबको सदा, देता शुभ आशीष॥
दोहा लिखने के लिए, समय मिला अब आज।
इधर-उधर के फेर का, समझ लीजिए राज।।
ठंडी से हलकान हैं, सभी अमीर-गरीब।
इससे बचने के लिए, सबकी निज तरकीब।।
आज विमुख क्यों हो रहे, अपने सारे लोग।
इसका कोई राज है, या केवल संयोग।।
नाहक शिकवा क्यों करें, हम अपनों से आज।
वही हमें दिखला रहे, अपना ऊँचा ताज।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
फायकू - मकर संक्रांति
4-3-2 वर्ण (अंतिम पंक्ति - तुम्हारे लिए अनिवार्य)
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मकर संक्रांति का पर्व
है अति विशेष
तुम्हारे लिए।
सनातन संस्कृति का स्वर
सूर्य हुए उत्तरायण
तुम्हारे लिए।
स्नान, ध्यान, दान, मान,
खिचड़ी पर्व महान,
तुम्हारे लिए।
बदलती प्रकृति की आभा,
बसंत की दस्तक
तुम्हारे लिए।
रंग बिरंगे पतंगों से
सज गया आकाश
तुम्हारे लिए।
तिल गुड़ की महक
प्रकृति की मुस्कान
तुम्हारे लिए
माघ पूर्णिमा की तिथि
मकर संक्रांति विशेष
तुम्हारे लिए।
सात्विक संदेश लेकर आया
मकर संक्रांति पर्व
तुम्हारे लिए।
प्रकृति की सुंदरतम छटा
मुस्कान बिखेरती है
तुम्हारे लिए।
जप, तप, दान किया
गंगा स्नान भी
तुम्हारे लिए।
जीवन दर्शन समझ लिया,
अब हमने भी,
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Shailesh Joshi
જીવનમાં મળતી બધીજ નિરાશાઓ કંઈ સમય, સંજોગો
કે પછી કોઈ વ્યક્તિને કારણે નથી મળતી,
અમુક નિરાશાઓ આપણા
વધારે પડતાં સારા સ્વભાવને કારણે પણ મળતી હોય છે.
- Shailesh Joshi
રોનક જોષી. રાહગીર
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ArUu
अकेलापन बहुत घातक है
जब आप इसे नजरअंदाज करते है।
पर जब आप उसपे काम करना शुरू करते है तो
ये एक बेहिसाब उपलब्धि है😻
ArUu ✍️
Deepak Bundela Arymoulik
मांगना ही छोड़ दिया हमनें वक्त किसी से,
क्या पता उनके पास इनकार का भी वक्त न हो!!
Awantika Palewale
કુંપળ થઈ તારી આસપાસ રહું છું
તારા શ્વાસની લયમાં રોજ ખીલું છું
તારું એક સ્મિત શ્વાસનો આધાર બને
હૃદયમાં રંગોનું મેઘધનુષ રચાય છે
પવનની સૌમ્ય લહેર સાથે તું આવે છે
તારા સ્પર્શથી જીવન મારું મહેકે છે.
કુંપળની જેવી નાજૂક મારી લાગણી,
તારી હાજરીમાં જ મળે સાચી શાંતિ.
તારી આંખોમાં ઝળકે સપનાની દુનિયા,
જાણે તારાઓએ રચી હોય કોઈ દુનિયા
કુંપળ થઈ હું તારી નજીક ઝૂલું છું
તારા પ્રેમના બગીચામાં હંમેશાં રહું.
જ્યાં તું હોય ત્યાં મારું ઘર બને છે
તારા વિના આ જીવન અધૂરું લાગે.
કુંપળ થઈ હું તારા હૃદયને ચૂમું છું
તારી સાથે જીવનની ક્ષણ ગૂંથું છું
Saroj Prajapati
नया सूरज नई सुबह, मन पर छाया अंधकार हटा
सोच को दे एक नई दिशा, जीवन को मिलेगी नई राह।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
kajal jha
प्यार, दर्द और संघर्ष: ज़िंदगी की सबसे सच्ची कहानी
ज़िंदगी कभी एक रंग में नहीं होती। यह कभी मुस्कुराती है, कभी रुलाती है, और कभी इतना थका देती है कि इंसान खुद से सवाल करने लगता है। इस पूरी यात्रा में तीन शब्द ऐसे हैं जो हर इंसान की कहानी में किसी न किसी मोड़ पर ज़रूर आते हैं— प्यार, दर्द और संघर्ष। ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, अलग नहीं। जहाँ प्यार होता है, वहाँ दर्द भी होता है, और जहाँ दर्द होता है, वहाँ संघर्ष अपने आप जन्म ले लेता है।
प्यार: जो अधूरा भी पूरा लगता है
प्यार एक एहसास है, जिसे शब्दों में बाँधना आसान नहीं। यह कभी किसी की मुस्कान में दिखता है, कभी किसी की खामोशी में। प्यार वो नहीं होता जो सिर्फ़ साथ रहने से साबित हो, बल्कि वो होता है जो दूरी में भी महसूस हो।
कभी-कभी प्यार बिना कहे हो जाता है। न कोई वादा, न कोई इज़हार—बस एक अपनापन, एक जुड़ाव। लेकिन यही प्यार जब सच्चा होता है, तो सबसे ज़्यादा तकलीफ़ भी देता है। क्योंकि सच्चे प्यार में उम्मीदें होती हैं, और उम्मीदें जब टूटती हैं, तो दर्द बन जाती हैं।
कुछ प्यार मुकम्मल होते हैं, तो कुछ अधूरे। लेकिन सच यह है कि अधूरे प्यार ज़्यादा याद रह जाते हैं। क्योंकि जो मिल गया, वह आदत बन जाता है, और जो नहीं मिला, वह कहानी।
दर्द: जो इंसान को भीतर से बदल देता है
दर्द हमेशा चीखकर नहीं आता। कई बार यह मुस्कान के पीछे छिपा होता है। लोग सोचते हैं कि जो हँसता है, वह खुश है—लेकिन अक्सर सबसे गहरे ज़ख्म वही लोग छिपाते हैं।
प्यार से मिला दर्द सबसे अलग होता है। यह शरीर को नहीं, आत्मा को चोट पहुँचाता है। यह रातों की नींद छीन लेता है, सवालों से भर देता है—
“क्या मेरी कमी थी?”
“क्या मैं काफ़ी नहीं था/थी?”
दर्द इंसान को तोड़ता भी है और बनाता भी है। शुरू में वह कमज़ोर करता है, लेकिन धीरे-धीरे वही दर्द इंसान को मज़बूत बना देता है। क्योंकि जब इंसान बहुत कुछ खो चुका होता है, तो फिर खोने का डर खत्म हो जाता है।
संघर्ष: खुद को साबित करने की लड़ाई
जहाँ दर्द होता है, वहीं से संघर्ष शुरू होता है। संघर्ष सिर्फ़ हालात से नहीं होता, बल्कि खुद से भी होता है। हर सुबह खुद को समझाना कि “आज भी उठना है”, “आज भी मुस्कुराना है”, “आज भी आगे बढ़ना है”—यही असली संघर्ष है।
संघर्ष में इंसान अकेला हो जाता है। भीड़ में होते हुए भी अकेला। क्योंकि हर कोई आपकी मुस्कान देखता है, आपकी लड़ाई नहीं। लोग आपकी सफलता की तालियाँ बजाते हैं, लेकिन आपके आँसू नहीं देखते।
संघर्ष सिखाता है कि ज़िंदगी किसी के लिए नहीं रुकती। चाहे दिल टूटा हो, चाहे सपने बिखरे हों—दुनिया अपनी रफ्तार से चलती रहती है। और इंसान को या तो उसके साथ चलना होता है, या पीछे छूट जाना होता है।
प्यार, दर्द और संघर्ष का रिश्ता
इन तीनों का रिश्ता बहुत गहरा है।
प्यार हमें किसी से जोड़ता है।
दर्द हमें खुद से मिलाता है।
और संघर्ष हमें मज़बूत बनाता है।
अगर प्यार न हो, तो दर्द का एहसास नहीं होगा।
अगर दर्द न हो, तो संघर्ष की ताक़त नहीं आएगी।
और अगर संघर्ष न हो, तो इंसान कभी खुद को पहचान नहीं पाएगा।
ज़िंदगी उन्हीं को आगे बढ़ाती है, जो टूटकर भी खड़े होना सीख जाते हैं। जो दर्द को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताक़त बना लेते हैं।
अंत में
हर इंसान की कहानी अलग होती है, लेकिन भावनाएँ वही होती हैं। प्यार सबको होता है, दर्द सबको मिलता है, और संघर्ष हर किसी को करना पड़ता है। फर्क सिर्फ़ इतना है कि कोई हार मान लेता है, और कोई आगे बढ़ जाता है।
अगर आज आपकी ज़िंदगी में दर्द है, संघर्ष है, तो घबराइए मत। यह इस बात का सबूत है कि आपने प्यार किया है, आपने महसूस किया है, आपने जिया है।
और यक़ीन मानिए—
संघर्ष के बाद जो इंसान बनता है, वह पहले से कहीं ज़्यादा ख़ूबसूरत होता है
Imaran
एक पल का एहसास बनकर आए तुम, दुसरे ही पल खुशबु की तरह उड़ गए तुम, जानते हो तनहाईयों से डर लगता था हमे, फिर भी तन्हा छोड चले गए तुम
💔imran 💔
Shefali
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Saliil Upadhyay
Gold Effect
ડોક્ટર : તમારી સોનોગ્રાફી કરવી પડશે.
દર્દી: સાહેબ…ગરીબ માણસ છું,તાંબાગ્રાફી કે પિત્તળગ્રાફીછે?
- Saliil Upadhyay
Jyoti Gupta
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Arun V Deshpande
ई दै-ज्योतिर्मय साहित्य- -०१फेब्रुवारी२०२६ रविवार अंकात प्रकाशित कविता-
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वर्तमान
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चालतोय मी निरंतर
सावली कुठे दिसेना
भीषण एकाकी वाटेवर
सोबती कुणी भेटेना ।।
रस्ते सारे गजबजलेले
वाहने बेभान सुटलेले
जो तो आपल्या नादात
लुप्त झाला आपलेपणा ।।
बेगडी वैभवी जगात
बुजलेला साधा माणूस
तुच्छ नजरांचा झेलतो
उद्धटसा मुजोरपणा ।।
असे आहे वर्तमान हे
कालचे ते होते भले
बेभरोसी सारे उद्याला
होईल कसे,कोडे पडले ।।
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कवी अरुण वि.देशपांडे-पुणे
9850177342
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Sandeep Raj Thakur
vakt Ke Taraju Se har koi Tolta hai
ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
ગગન વાટી વિચરતુ વિહંગ
ક્યાં કશે કોઈ હદે જઈ બંધાણુ?
સાંજ થઈને ફરી એ વિહંગ,
એ જ નીડે જઈને પાછું સંતાણુ...
- ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
कही पहुंचने के लिए कही से त्याग होकर चलना जरूरी है। खोज में विचरण करेंगे तभी खुद का मार्ग मिलेगा।।
- ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
खुशबू
प्यार की खुश्बू से जिंदगी के बाग में बसंत छाई हुई हैं l
आत्म सम्मान, जीने की चाहत और ताक़त
पाई हुई हैं ll
जी भरके बरसने की चाहत हुई तो कड़ी
सर्दियों में l
बनके बादल रिमझिम बारिस की बौछार
लाई हुई हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
writerscaste
అమ్మ ప్రేమ ఎనలేనిది
అమ్మ ప్రేమ ఎల్లలు లేనిది
అమ్మ ప్రేమ వర్ణించలేనిది అమ్మ ప్రేమ అనంతమైనది
అమ్మ ప్రేమ అపురూపమైనది అమ్మ ప్రేమ అమరం
అమ్మ ప్రేమ వరం అమ్మ ఋణము తీర్చలేనిది...
- writerscaste
writerscaste
I burn out all my memories
But pain remains as ash
ఎవరిని ప్రేమించవద్దు.. People change!
- writerscaste
writerscaste
ని వలపు కౌగిలిలో బంధించావు
ని వడి లో కరిగిపోయాను
Like the Chocolate melts in our mouth
- writerscaste
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।।
दोहा --404
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।।
दोहा --404
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पुत्र वही जो पिता का, सदा बढ़ाता मान। पुत्र नहीं वह शत्रु है, जो करता अपमान।।
दोहा --404
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
वात्सल्य
कितने दिन तक दूर रहोगे !!
जिंदगी की आयू सो सालकी !
औऱ उस मेँ पचास साल सो कर गँवा दिए ll
दस साल बचपन में ll
औऱ ओर दस-पंद्रह साल पढ़ने में!!
कभी तो गिनती कीजिए।!
ll प्रिया ll
ज्यादा रूठने में औऱ दूर रेहने से क़्या मिलता है ll
- वात्सल्य
- वात्सल्य
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
वात्सल्य
मिलने का मन क़रता है,पर निकल नहीं सकते ll
क्यूंकि अब शरीर को अकेलेपन लगता है ll वो साथ आती नहीं ll औऱ ओर कोई साथ निभाता नहीं ll
- वात्सल्य
ziya
आईने जैसा किरदार रखते है
फ़िक्र तो वो करें मेरी जान
जो चहेरे दो चार रखते हैं
Dhamak
Shivratri special
song with my original lyrics
writerscaste
sending my heart... as a clouds...
sonika bhawsar
(Intro)
Say it now… what your heart hides inside,
It’s my promise… I’ll never let it fade with time…
(Verse 1)
My breath is tied to the beat of your heart,
Without you near, my world falls apart…
You are my soulmate, you are my star,
Only you are the reason I am…
(Chorus)
Say it now… what your heart hides inside,
It’s my promise, I’ll never leave your side…
With you, my vow will stay,
Yes… forever I’ll stay,
Oh with you… only with you…
(Verse 2)
In my dreams, I only see your face,
In my memories, you’re my only place…
To live with you, to fade with you,
That’s all my heart ever knew…
(Bridge)
May this bond remain for endless years,
Through every joy and through all the tears…
You’re my beginning, you’re my end,
On you my love will always depend…
(Outro)
Say it now… oh say it now…
What your heart hides inside, say it now…
With you my vow will stay…
Yes… forever I’ll stay…
Shalini Gautam
पहले मैं आसमाँ में थी,
और लोग जमीन पर ,
आज लोग फलक पर हैं,
और मैं खाक में..
- Shalini Gautam
santosh Mishra
उसके चक्कर में ज़माना भूल गए,
उसके बाद मुस्कुराना भूल गए।
जब सफलता कदमों में थी हमारे,
उसी मोड़ पर वो साथ छोड़ गए।
जब दोनों हाथ फैलाए आसमान था,
तभी वो हमें तन्हा छोड़ गए।
उनके छोड़ने के ग़म में हम
इस आसमान में उड़ना ही भूल गए।
कुछ इस कदर मिला धोखा कि,
ख़ुद ही ख़ुद को अंदर से मारते गए,
और इस सब के बीच,
हम सारा ज़माना भूल गए।”**
Soni shakya
प्रेम करना तो सभी को आता है पर ..
उसे संवारना हर किसी के बस की बात नही..
- Soni shakya
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
વિષય: સાહિત્યમાં માનવાધિકાર
શીર્ષક: માણસાઈનો દસ્તાવેજ
કાગળિયામાં ચીતરેલા કાયદાની વાત નઈ,
મારે તો કરવી સે ધબકતા કાળજાની વાત!
આ ચોપડામાં લખ્યું ઈ બધું હાચું,
પણ ઓલી ડેલીએ ઉભેલો માણહ,
જેના મોઢા પર આખા મલકનો થાક સે,
ઈને વંચાય એવો કોઈ કાયદો ખરો?
તમે કયો સો કે બધા હરખા...
તો પસી આ પરસેવો પાડીને જે રોટલો પકવે,
ઈની થાળીમાં જ કેમ ભુખના ડાઘા?
હક એટલે શું બાપલિયા?
ખાલી પાંચ વરહે આંગળીએ શાહી લગાડવી?
ના રે ના...
હક એટલે...
કોઈની શરમ ભર્યા વગર,
આંખમાં આંખ નાખીને વાત કરવાની ત્રેવડ!
કોઈ શેઠની દયા નઈ, પણ પરસેવાનો પાવરો!
સાહિત્ય તો ત્યારે જ જીવતું કે’વાય,
જ્યારે ઈ કોઈના ફાટેલા લૂગડાંનો થીગડું બને.
શબ્દો જ્યારે કોઈના ડૂમો ભરાયેલા ગળાનો
રાડારોટી અવાજ બને!
આ મોટા મોટા ગ્રંથોમાં,
માણસ ગોતવો અઘરો થઈ ગ્યો સે,
બસ હવે તો...
માણસને માણસ રે’વા દયો,
ઈથી મોટો કોઈ માનવાધિકાર નથી,
ને ઈથી મોટી કોઈ કવિતા નથી સ્વયમ્'ભૂ!
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
raj
छोटे क़दम, बड़े सपने,
आँखों में आसमान है।
हार से जो न घबराए,
वही असली इंसान है।
मेहनत की राहों पर चल,
थकना भी एक कहानी है।
आज जो बीज तू बोएगा,
कल वही तेरी निशानी है। 🌱
shabdh skhi
और फिर मेरा संभल जाना ही
इस कहानी का अंत रहा ....
- shabdh skhi
Bhavesh Tejani
ઘણી યાદ એવી હોય છે જે યાદ કરીને
હોઠ હસી રે પડે, આંખ રડી રે પડે..
Gunjan Banshiwal
m haalat ki girwi rakhi hui ladki hu janab
jamane ki mohabbatein mujhe ras ni aati
- Gunjan Banshiwal
shabdh skhi
छोड़कर जाने वाले,
फिल्मों में वापस आते है.."हकीक़त में नहीं 💔🥀
- shabdh skhi
Vipul Borisa
એવી સ્થિતિ સ્વીકાર કરી ગયો છું.
લાગે જાણે દરિયો પાર કરી ગયો છું.
એવી રીતે જીંદગી જીવી જાણી છે,
હું ખુદ ખુદ પર ઉપકાર કરી ગયો છું.
વિપુલ પ્રીત
- Vipul Borisa
Sudhir Srivastava
फायकू - मकर संक्रांति
4-3-2 वर्ण (अंतिम पंक्ति - तुम्हारे लिए अनिवार्य)
*******
मकर संक्रांति का पर्व
है अति विशेष
तुम्हारे लिए।
सनातन संस्कृति का स्वर
सूर्य हुए उत्तरायण
तुम्हारे लिए।
स्नान, ध्यान, दान, मान,
खिचड़ी पर्व महान,
तुम्हारे लिए।
बदलती प्रकृति की आभा,
बसंत की दस्तक
तुम्हारे लिए।
रंग बिरंगे पतंगों से
सज गया आकाश
तुम्हारे लिए।
तिल गुड़ की महक
प्रकृति की मुस्कान
तुम्हारे लिए
माघ पूर्णिमा की तिथि
मकर संक्रांति विशेष
तुम्हारे लिए।
सात्विक संदेश लेकर आया
मकर संक्रांति पर्व
तुम्हारे लिए।
प्रकृति की सुंदरतम छटा
मुस्कान बिखेरती है
तुम्हारे लिए।
जप, तप, दान किया
गंगा स्नान भी
तुम्हारे लिए।
जीवन दर्शन समझ लिया,
अब हमने भी,
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
રોનક જોષી. રાહગીર
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Dhamak
आइने में जो अक्स है, वो सबसे जुदा है
मेरे जैसा बनाना, बस उस रब्ब की अदा है
जब कुदरत ने मुझे 'Unique' ही बनाया है
तो क्यों मैं किसी और का साया बनूँ?
अपनी हकीकत छोड़, क्यों पराया बनूँ?
I'm the only one, मेरे जैसा कोई नहीं
तो मैं किसी और जैसी क्यों बनूँ? (No way...)
मेरी रूह की नक़ल, कोई कर नहीं सकता
फिर मैं किसी और के रंग में क्यों ढलूँ?
नैन-नक्श उनके हसीन होंगे, माना मैंने
पर मेरा वजूद भी तो एक मुकम्मल ख्वाब है
दुनिया कहती है 'किसी और जैसा बनो'
पर मैं अपनी चमक से, खुद का आफताब बनूँ
Just me, myself, and I...
I’m an original...
Not a copy.
DHAMAK
Jyoti Gupta
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Aruna N Oza
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Desai Pragati
जो बिना श्रेय की अपेक्षा और बिना अहंकार होता है
परदे के पीछे का वही असली कलाकार होता है..!
S K I N G
शराब ले आओ यार
"मोहतरमा की अहमियत मेरी नज़रों में कचरे की ढेर की हो गई है
Abhishek Chaturvedi
मनुष्यता ही परम धर्म है ( कविता )
रचनाकार/ कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
॥ मनुष्यता का अभ्युदय ॥
न पंथ श्रेष्ठ है, न मत विशिष्ट है,
मानवता ही इस जग में परम इष्ट है।
अहंकार का त्याग कर, जो पर-हित में संलग्र है,
वही मनुज चैतन्य है, वही ज्ञान में मग्र है।
हृदय-सिंधु में जिसके, करुणा का नव ज्वार हो,
पर-दु:ख देख जो द्रवित हो, ऐसा ही आचार हो।
जाति-पांति के दुर्ग तोड़, जो समरसता को धारे,
वही सत्य का पुत्र है, जो गिरते को सदा उबारे।
रक्त वर्ण सबका एक , एक ही प्राण-स्पंदन,
भेदभाव की राख तज, करें मानवता का वंदन।
परोपकार की वेदी पर, जो निज स्वार्थ देता आहुति,
वही देवत्व को प्राप्त है, वही विश्व की पावन विभूति।
शस्त्रों में न शक्ति है, न है शास्त्रों के पांडित्य में,
ईश्वर का वास निहित है, बस मनुष्य के सामिप्य में।
अतः जाग रे आत्मन्! तू निज धर्म को पहचान कभी
मानव होकर मानव की, सेवा को ही निज मान अभि।
जहाँ संवेदना शून्य हो, वह देह मात्र पाषाण है,
मुरझाए अधरों पर मुस्कान दे, वही पुण्य प्रमाण है।
पर-पीड़ा की अग्नि में, जिसका अंतर्मन तपता है,
मन्दिर के घंटों से अधिक, उसका मौन प्रार्थना तपता है।
न स्वर्ण की आभा महान है, न किरीटों का सम्मान है,
जो दीन के अश्रु पोंछ सके, वही पुरुष शक्तिमान है।
विघटित होते इस विश्व में, प्रेम ही एकमात्र सेतु है,
जीना वही सार्थक है, जो जिया जाए पर-हेतु है।
न संकुचित सीमाओं में, सत्य का विस्तार होता है,
वही मस्तक वंदनीय है, जिसमें परोपकार होता है।
क्या हुआ यदि हस्त रेखाएँ, वैभव को न छू सकीं?
अभि हृदय में दया शेष है, तो कोई कमी न रह सकीं।
जो स्वयंभू के द्वार पर, केवल स्वयं को माँगता,
वह मनुष्यता के मर्म को, तिल मात्र भी न जानता।
अश्रु किसी के नयन से, यदि धरा पर गिरते हों कहीं
और शब्द सांत्वना के, मरहम बनकर खिलते हों कहीं
तो समझ लेना कि तूने, पा लिया निर्वाण यहॉं
यही मानव-धर्म का, सबसे प्रखर प्रमाण यहॉं
अंधकार को कोसने से, ज्योति न प्रज्वलित होगी कभी
एक दीप जो तू जला दे, सृष्टि फिर संकलित होगी अभि
रचनाकार/ कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
S K I N G
दुनिया के सभी भिखारियों में सबसे दयनीय वह भिखारी है जिसने प्यार की भीख मांगी और उसे ठुकरा दिया गया।
Prabhjot Singh Nagra
हाइड्रो सिद्धांत= बिग बैंग के समय पदार्थों ओर गुरुत्वाकर्षण नाम के कोई चीज अस्तित्व में नहीं थी इनका जन्म के कहानी बहुत रोचक है | उस समय अत्यधिक गर्मी में सिमटी हुई ऊर्जा का एहसास कराना मेरा मूल धर्म है |
यह ऊर्जा साधारण नहीं बल्कि अत्यधिक थी पहले हम समझते है गुरुत्वाकर्षण कसा बना |
अत्यधिक गर्मी और उर्जा आपस मे मिले हुआ थे| जब ऊर्जा और अत्यधिक गर्मी आपस में करोड़ों वर्षो तक मिले रहे | और करोड़ों वर्षो बाद HE = G गुरुत्वाकर्षण का निर्माण हुआ |
गुरुत्वाकर्षण G और है अत्यधिक गर्मी आपस में करोड़ों वर्षो तक मिलते रहे | जिससे हाइड्रोजन परमाणुओ का निर्माण हुआ |
H G= H2
हाइड्रोजन परमाणु आपस म गुरुत्वाकर्षण का कारण करोड़ों वर्षों तक आपस मे अत्यधिक गर्मी गुरुत्वाकर्षण के कारण जुड़ते रहे | करोड़ों वर्षों बाद यह अत्यधिक गर्मी ठंडी होने लगी जिससे हाइड्रोजन परमाणु धीरे धीरे अलग अलग बंधो म बंट गए अलग अलग तारे बने शुरू हुआ इससे बची हुई कुछ हाइड्रोजन ठंडी होकर 02 बनी और अलग अलग गैस बनी |
S K I N G
मैं कोठे की मशहूर तवायफ़ से ले लूंगा सात फेरे
लेकिन इज्जत का चोला ओढ़े बैठी धोखेबाज लड़की से नहीं !!
S K I N G
ये महीना ही शामिल नहीं है जिंदगी में हमारी
उसने एक दिन कहा था
जनवरी में शादी है हमारी
Hemant pandya
આ સમય પણ કેવો જીદ લઈ બેઠો
આગ દેખી પાણી દેખ્યા વીજળી ના કડાકા ભડાકા અને લોકોને ભડથું થઈ બળતા દીઠ્યા ,દુષ્કાળ દેખ્યા યુધ્ધ દેખ્યા, પુર દેખ્યા કયાક સુનામી વાવળ વંટોળ અને ઘરતી કંપ દેખ્યા, પશુ ધન ને થર થર ધૃજતુ દીઠું, નાના મોટા પક્ષી ને થર થર કાપતાં મરતા દીઠા, જગતના તાત ઘરતીને ખેડનાર અને ગાયોના ગોવાળ ને બેબસ લાચાર દેખ્યો, ઉભા પાક ને પાણીથી બળતો સુકાતો દીઠ્યો,
બેચારો એકલો નીરાધાર માણસ દેખ્યો,
કોઈ સાચું આંતરડું બાળી અધીરો થઈ મદદે દોડતો ઉભે પગે દીઠો, તો કોઈને ખોટી મહાનતા બતાવતો નઠારો ધુતારો દેખાવ કરતો દીઠો, કોઈ ને માનવીની લાચારીનો ફાયદો ઉપાડી લુટતો દેખ્યો , તો માણસ પાસે માણસને લુટાતા દીઠ્યો,
શાની છે આ હાય ખાય , શાના છે આ પ્રકોપ, ચારો કોર અંધા ધુધી આખરે સાનો છે આ પ્રકોપ હે કુદરત તું કેમ રૂઠ્યો?
Rahul Raaj
सुनो लकीरों से उतर चुकी हो, अब ज़हन से भी उतर जाओ।
पहले से ही ताल्लुकात अच्छे नहीं है, निंद और आंखों के।
तुम भी आग में घी मत मिलाओ।
जाओ, जिसके हो उसे परेशान करना।
मेरे ख्वाबों में मत आओ।
सोने नहीं देता, ये तेरा सामने बैठ कर मुस्कुराना।
ढूंढने लगता हूं उठ कर इधर उधर। कम से कम इतने करीब मत आओ।
लकीरों से उतर चुकी हो, अब ज़हन से भी उतर जाओ।।
Soni shakya
गले मिलना तो एक बहाना है ..
असल में तो 'मुझे'तुझमें ही ठहर जाना हैं..
- Soni shakya
Soni shakya
गले मिलना तो एक बहाना है..
असल में तो 'मुझे' तुझमें ही ठहर जाना है..
- Soni shakya
Komal Arora
silence......
sometimes it is very difficult to hold.....
but sometimes it hurts a lot......
when you don't want to tell anything......
when you don't want to express anything.......
but you want to hear untold things.....
you want to hear that words which are more precious for you.......
you want to hear that stories which would happen in other persons life when you are not with them........
all these small things hurt ....
and this heavy hurt only need that one persons advice which is not with you........
sometimes person is your father who is not there for you physically ........
or maybe your imaginary person which we want in our life for no reason no appreciation no fear no responsibility no advice only for better version of ourself.......
joydeep roy
বসন্ত
মালতী ফুটিল সেউতি উঠিল
কেতকী গা ঝাড়া দিল,
সুরেলা কোকিলে গলা কাঁপাইয়া
বনের বারতা দিল।
বকুল ছড়াল তারা একঝাঁক
মাদার ফাগুয়া খেলে,
ফুলঝাড় রেখে রাত চলে যায়
পদ্ম চক্ষু মেলে।
করবীর কলি মৌ-কণা গড়ে
ভূমি ফুটাইল চাঁপা।
হলদে চড়াই মধুতে মাতাল
নর্তনে করে কৃপা
Hemant pandya
એક કવી લેખક સાયર તરીકે
બહું મોટું નામ છે એક ડીજીટલ પ્લેટ ફોર્મ પર..
આ આપનેજ આભારી છે
મારા માટે તો ઝેર પણ અમૃત સાબીત થયું છે..
ઝેમ ઝેરનો કટોરો રાણે મોકલ્યો
મીરા અમૃત માની ને પી ગયા..
વાલે મારે રાખી લાજ્યો ઝેરના અમૃત બની ગયા..
- Hemant pandya
Hemant pandya
ખબર છે પતંગીયાને કે સમા પાસે જઈ ફનાજ થવાનું છે,
આતો છે પ્રીતની લગ્ની કે તો પણ એને ત્યા સમાપાસેજ જવું છે,
લેશે એ પ્રાણ મારો ભલે એ ખુશ થશે,
હું પણ ખુશ છું એ વાતે કે મારો પ્રાણ મારી પસંદે લીધો છે..
મશહૂર એ પણ થશે મસહુર હું પણ થઈશ
કે પ્રાણ લેનાર કોઈને પ્રાણોથી પ્રીય હતું
- Hemant pandya
Hemant pandya
ના ઉમ્મીદ લોગો સે ઉમ્મીદ નહિ રખ્ખી જાતી,
જીનશે ઉમ્મીદ હોતી હે વો લોગ ના ઉમ્મીદ નહીં હોતે
- Hemant pandya
Hemant pandya
પાકા રંગ ઉતરે નહીં , અને ઘોળ ઝાઝા ટકે નહીં ,
રહેવું અસલ વાણી વચન વીવેક થી
બોલી ન ફરવું , અને પાળવું વચન હંમેશ,
સામા વાળા સામે ન જોવું જો બદલે નજરો કે વેવાર ,
આતો મતલબી સંસાર , મતલબે સહુ વાલા લાગે મતલબે હું કોણ તું કોણ..
કદરૂ એમનીય થાય વાલા આપણીય થાય..
માટે ખુદનું ખમીર જાળવવું.. કોઈ આપણને શું કહી જાય રહેવું અસલ ... પાળવું આપેલ વચન , ખુદની કીમત પેલા ખુદે જાળવી રાખવી.
raaj hemant
Hemant pandya
કાન્હા ને રૂકમણી સત્યભામા જેવી કામણગારી બે સતી નાર પણ પ્રીત કરી જાણી રાધાગોરીએ કાન્હાથી ના વીસરાય ,
આછે પ્રીત ની રીત્યું વાલા રાધા વીના કાનો રહે ઉદાસ.
- Hemant pandya
Hemant pandya
આતો મર્દોની જાત દીવસ આખું બારે ફરે વીદેશ ભણી પાર જાય,
સાજે ફરે ઘર સંભાળે પછી ભલે ગામ ફરી આખોદન મોજું કરે ,
ઘર પરીવાર ની એને ન માત્ર ચીંતા ઘણી એને હૈયે વશે ઘરબાર, એ નર નેય તું સુરા જાણ.
- Hemant pandya
Hemant pandya
પરીવર્તન આ સંસારમાં
શું ન બદલે...?
જો માણસ જાત ચાહે?
બસ મન ના ડગે એજ સુરા નર તું જાણ,
ઓળખ તું નાગ સાચો કે નુગરો..
એક હોય વણવાકે ડંખનાર,
એક હોય જાળવનાર રખોપા કરનાર.. પુજનીય કોણ એને તું પહેચાણ
- Hemant pandya
Hemant pandya
વચન વચન મે ફેર હે વચન પાળે એ વચન, બાકી હે ફોક
આ કામ સુરા નર ના કાયરના નહીં કામ,
લગ્નની આમ કોઈથી લાગે નહીં, લાગે તો આખો ભવ ઉતરે નહીં,
પછી હોય મારગ ખુલો કે હોય સાંકડી કાંટાળી કેડ..
લે એ મુકે નહીં, જુબાન આપી ફરે નહીં,
વફાદાર રહે કોઈ એક થી એ સતીનાર તું જાણ..
સીતા અહલ્યા કુતા મંદોદરી સાવીત્રી કે પછી મજબુર વચને દ્રોપદી કહેવાઈ સતી નાર
- Hemant pandya
Hemant pandya
પવન ફરે તેમ મન ફરે એથી સંગાથ કા થાય?
મોધા મોલના માનવી તારી એમુજ થોડે કદરો થાય?
વન ફરે વાગડ ફરે ,ફરે નદીના નીર, શુરા બોલી બીજું ના બોલે પછી ભલે શરીરથી ઘડ અલગ થાય
ઈતિહાસ આમના લખાય વાલા.. માયકાગલાના નહીં.
- Hemant pandya
Gautam Patel
ગુજરાતી લોકગીત
Thakor Pushpaben Sorabji
"વિતાવેલો સાથે વખત
વિતી જાય છે કાન
દોસ્તીની નિખાલસ વાતો
વિસરાઈ જાય છે,જ્યારે
સબંધોમાં હિસાબ થાય છે"
જય શ્રી કૃષ્ણ
- Thakor Pushpaben Sorabji
Dhamak
व्योमकेश… व्योमकेश…
डमरू बोले नाम तेरा व्योमकेश…
व्योमकेश… व्योमकेश…
चंद्र-गंगा संग बसता व्योमकेश…
जटाओं में समाया आकाश, तारों का संग,
चंद्रमा झलके, नक्षत्रों का रंग।
गंगा बहती केशों से, शांति की धारा,
महाकाल का रूप, अनंत का किनारा।
व्योमकेश… व्योमकेश…
डमरू बोले नाम तेरा व्योमकेश…
व्योमकेश… व्योमकेश…
चंद्र-गंगा संग बसता व्योमकेश…
त्रिशूल थामे, तीसरी आंख चमके,
भूत-प्रेत भी झुकें, जब शक्ति दमके।
मौन में बसते, अनादि का स्वामी,
भक्तों के संग, माया का ज्ञानी।
जय बम बम बोले… जय व्योमकेश!
हर-हर महादेव…
व्योमकेश… व्योमकेश! 🔱
DHAMAK
Paagla
https://youtube.com/shorts/Aemgg8jWbJk?si=-ybZ7a2j8hzNyzfL
Thakor Pushpaben Sorabji
કોઈને આપેલા દર્દ પર
મલમરૂપી ના મીઠા બોલ!
ને મીઠા બોલે કરેલા ઘાથી,
માનવી તૂટી જાય છે કાં
પત્થર દિલ બની જાય છે.
જય શ્રી કૃષ્ણ
- Thakor Pushpaben Sorabji
Manju jhanwar
वक्त कब आता है नहीं पता
कब जाता है नहीं पता
हमने महसूस करना
कब शुरू किया नहीं पता
कब यह खत्म हुआ नहीं पता
हर अहसास में दर्द है
बहुत सारी शिकायत है
प्रेम का लम्हा नहीं पता
हंसी का पल नहीं पता
शायद याद ही नहीं रहता
कब खुलकर जिएं
कब खुलकर हंसे
अच्छे से नहीं पता
क्या फर्क पड़ता है
हमने क्या किया
हमारा आज ही है
हमारा असली पता
अभी मैं जीवन का हर रंग है
कल क्या होगा किसे पता?
Pragna Ruparel
સંબંધો
સંબંધો શબ્દો થી નહી,સમજણ અને વિશ્વાસ થી જીવંત રહે છે.
જય સ્વામીનારાયણ
Vrishali Gotkhindikar
पत्र सुमने 1
प्रिय सोना...
घरकाम हा तुझा अगदी आवडीचा विषय होता
घरकामात तू खूप रमायचा.
अगदी आपण दोघे कार्यरत असताना सुद्धा
स्वयंपाक तयारी तू कायम करून द्यायचा.
मी नोकरीत असताना सकाळी इतर पण गडबडीच्या कामात तुझी मदत कायम असायची
अगदी दुपारी तू दवाखान्यातून घरी आल्यावर सुद्धा
तू माझी संध्याकाळच्या स्वयंपाकाची तयारी करून ठेवायचा
त्यावेळी आपल्या घरी आपला कुत्रा जिमी पण होता
त्याला फिरवणे खायला प्यायला देणे आणि मग आपल्या मुलाला शाळेतून आणायला तू जायचा
दर आठवड्याला फर्निचर पुसणे टॉयलेट बाथरूम साफ करणे ही कामे तुला दुसऱ्या कोणी म्हणजे मी केलेली आवडत नसत
सगळ तुझ्या सिस्टिम प्रमाणे व्हायला लागत असे
शनिवार सकाळी तुझा तो कार्यक्रम असायचा
आज माझा पुसा पूसी चां वार असे तू म्हणायचा
प्रत्येक गोष्टी साठी वेगळे टॉवेल वापरणे
परत ते स्वच्छ धुवून ठेवणे
यातल्या कोणत्याच कामाला तू मला हात लावू देत नव्हतास
फक्त वरचे टॉयलेट बाथरूम मी स्वतः साफ करायचे माझ्याकडे घेतले होते
स्वयंपाक कट्ट्यावर तर दोन चार वेळा तुझा हात फिरत असे
मी जरी जेवणं झाल्यावर कट्टा स्वच्छ धुवून पुसला तरी तूपरत एकदा तरी फडके मारत असायचस
तुला (ocd) अती स्वच्छतेच वेड आहे असे मी तुला चिडवायचे सुद्धा..
बाजारहाट तर कायम तुझ्याकडेच होता
धान्य,फळे, भाजी याची तुला उत्तम पारख होती
कोणती गोष्ट कुठे चांगली मिळेल आणि योग्य किमतीला मिळेल याच्याकडे तुझे बारीक लक्ष असायचे
तुझा आवडता बाजार म्हणजे ऋणमुक्तेश्वर मार्केट
कित्येक वर्षे तिकडून भाजी आणल्याने
तिथला प्रत्येक विक्रेता तुला वैयक्तिक रित्या माहिती होता
तुझ्या गोड बोलण्याने स्वच्छ टापटीप इस्त्रीच्या कपड्या मुळे तुझा रुबाब वेगळाच असे
त्यात तुझ्या पायात कायम बूट असल्याने तुझे एक वेगळेच इम्प्रेशन पडत असे
प्रत्येक विक्रेता तुला तोंड भरून हसून या डॉक्टर साहेब असे बोलावत असे
तुझ्या सोबत कायम दोन चार प्लास्टिक जाळीच्या चेन असलेल्या पिशव्या असत
भाजी वजन केली की तू पिशवी पुढे करून त्यात ती घालायला सांगत असे
व चेन बंद करून स्वतःच्या पिशवीत टाकत असे
अशा प्रत्येक भाजी साठी वेगळ्या पिशव्या तुझ्याकडे असत
खेडेगावच्या विक्रेत्या बायकाना याचे फार अप्रूप असे
या पिशव्या घरी आल्यावर फ्रीज मध्ये ठेवून लागेल ती भाजी काढता येत असे
धान्याच्या बाबतीत सुद्धा नवे जुने तांदुळ जुनी तूर डाळ याची तुला खूप पारख असे
आपल्या लग्नाच्या सुरवातीच्या काळात तर आपण पंचवीस किलो तूर डाळ आणून तिला तेल हळद लावून वाळवून ठेवत असू
नंतर आपण तो प्रकार कमी करून जेवढे लागेल तितकेच आणायला लागलो
तरीदेखील करोना काळात कदाचित धान्याचा तुटवडा भासेल म्हणून तू भरपूर डाळी तांदुळ वगैरे घेऊन ठेवले होतेस
ते आपल्याला जवळ जवळ चार वर्षे पुरले
बाजारहाट करण्यात तू तुझे वडील ज्यांना तात्या म्हणत त्यांच्या प्रमाणेच कुशल होतास
पण दुर्दैवाने तुझे हे कसब पुढील पिढीत गेले नाही
Nirali patel
something somewhere incredible is
waiting to be known...
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