Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Soni shakya
राते चुप है और..!
यादें शोर मचा रही है..!!
- Soni shakya
S A Y R I K I N G
देख कर उसको अक्सर ये ख्याल आता हैं
काश शादी न हुई होती तो क्या होता
MOU DUTTA
তোমার চোখের কাজল
নাকি আমার চোখের জল,
কে ছিল প্রিয় আজও জানি না যে তা।
সত্য যদি প্রকাশ হয়
তবে ছলনা ভালোবাসা,
যে বাসা তে হারিয়ে গেছে
আমার সুখে থাকা।
হয়তো তুমি পূর্ণ চোখে চেয়ে আছো আজ
আমি আজ শূন্য মনে ফিরে গেছি থাক।
তবু চোখে আছে শুধু তোমার জন্য আশা
যে আশা তে শেষ হয় গো আমার ভালোবাসা।
শুধু আজ তুমি ছাড়া এসবই নিরাশা।
মৌ 🖋️
Raju kumar Chaudhary
न्याय की प्रतीक्षा में निर्मला
“माँ, होमवर्क करके जल्दी लौट आऊँगी।”
निर्मला ने अपने दोस्तों के लिए छोटे से प्लास्टिक में कुछ अमरूद बाँधे, अपनी पुरानी साइकिल निकाली और मुस्कुराते हुए घर के आँगन से निकल गई।
दिन ढल गया।
शाम हो गई।
लेकिन निर्मला नहीं लौटी।
बम दीदी-बहन के घर से दोपहर 2 बजे ही निकल चुकी निर्मला, शाम 8 बजे तक भी घर नहीं पहुँची। घबराए हुए माता-पिता पुलिस चौकी पहुँचे। वहीं उन्हें राज्य से पहला धोखा मिला।
“किसी लड़के के साथ चली गई होगी, घूम रही होगी।”
अपनी बेटी के लापता होने की पीड़ा से तड़पते माता-पिता पर वर्दीधारी रक्षकों की यह असंवेदनशील टिप्पणी थी। अगर उसी रात तुरंत खोज अभियान शुरू हो जाता, तो शायद इस कहानी का अंत कुछ और होता।
अगली सुबह— 11 साउन।
घर से कुछ ही दूरी पर गन्ने के खेत में निर्मला का निर्जीव शरीर मिला। उस दृश्य ने सिर्फ इंसानों को नहीं, बल्कि मानवता को भी झकझोर दिया। लेकिन उस भयावह घटना से भी ज़्यादा डरावना दृश्य इसके बाद देखने को मिला।
अपराध जांच में घटनास्थल को ‘मंदिर’ माना जाता है, लेकिन यहाँ रक्षक ही भक्षक के साथी बन गए। एक मासूम बच्ची के शव के पास मिली सलवार— जो बलात्कार का सबसे अहम सबूत हो सकती थी— पुलिस ने खुद पानी में धो दी।
क्या यह सिर्फ अज्ञानता थी?
या किसी के गुनाह धोने की सुनियोजित साज़िश?
भीड़ इकट्ठा हुई। निर्मला की साइकिल, कॉपी-किताबें शव से कुछ दूरी पर बिखरी पड़ी थीं। लेकिन संघर्ष का कोई निशान नहीं था। मानो हत्या कहीं और करके शव यहाँ सजा दिया गया हो।
सबूत मिटाने की जल्दबाज़ी में फॉरेंसिक टीम के पहुँचने से पहले ही शव हटा दिया गया। सच्चाई हमेशा के लिए उसी गन्ने के खेत की मिट्टी में दबा दी गई।
जन आक्रोश बढ़ता गया।
राज्य ने एक ‘पात्र’ खड़ा किया— दिलीप सिंह बिष्ट। 41 वर्षीय मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति।
पुलिस ने तैयार की हुई पटकथा सुनाई—
“इसी ने निर्मला की हत्या की है।”
सबूत के नाम पर उसकी फटी हुई कमीज़ दिखाई गई।
बाद में बंद कमरे के भीतर की सच्चाई सामने आई—
“इस अपराध को स्वीकार कर ले, हम तुझे मांस और शराब देंगे, नहीं तो मार देंगे।”
एक मानसिक रोगी पर किया गया यह अत्याचार न्याय प्रणाली के चेहरे पर लगा काला धब्बा था।
लेकिन झूठ की उम्र लंबी नहीं होती।
निर्मला के शरीर से लिए गए (चाहे जितने भी विवादित क्यों न हों) डीएनए नमूने दिलीप के डीएनए से नहीं मिले।
विज्ञान ने राज्य के झूठ को मानने से इनकार कर दिया।
एक निर्दोष बच गया, लेकिन असली अपराधी आज भी पर्दे के पीछे मुस्कुराता रहा।
निर्मला के लिए न्याय माँगते ही सड़कें आग बन गईं।
पूरा देश रो पड़ा। कंचनपुर की सड़कों पर नारे गूँजे—
“सरकार, निर्मला को न्याय दो!”
लेकिन सरकार ने न्याय की जगह गोलियाँ चलाईं।
8 भदौ।
17 वर्षीय सन्नी— निर्मला के लिए न्याय माँगने सड़क पर उतरा एक किशोर— पुलिस की गोली से गिर पड़ा।
एक हत्या की जाँच करनी थी, राज्य ने जवाब में एक और हत्या कर दी।
आज वर्षों बीत चुके हैं।
घटनास्थल के पास की सेना की बैरक, बम दीदी-बहन का घर, बार-बार बदले गए बयान, घटना के तुरंत बाद रंगे गए कमरे, सलवार धोने वाले पुलिसकर्मी और शक के घेरे में खड़े ‘वीआईपी’ चेहरे— सब आज भी रहस्य के गर्भ में हैं।
निर्मला के पिता यज्ञराज पंत— न्याय माँगते-माँगते मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
माँ दुर्गा देवी— राज्य से लड़ते-लड़ते अंततः हार मानने को मजबूर हो गईं।
इस कहानी का अंत अभी लिखा जाना बाकी है।
निर्मला का हत्यारा आज भी आज़ाद घूम रहा है।
उसके नाम पर कार्यक्रम चलाने वाले मंत्री बने, प्रधानमंत्री बदले, कानून मंत्री, आईजीपी, डीआईजी— सब बदल गए।
लेकिन एक सच्चाई आज भी नहीं बदली—
“निर्मला की आत्मा को अब तक शांति नहीं मिली है।”
निर्मला पंत को हार्दिक श्रद्धांजलिउखुबारीले देखेको सत्य
“आमा, म छिट्टै फर्किन्छु”
भन्दै निस्किएकी
एउटी छोरी
घर फर्किन पाइन।
साँझ ढल्दै गयो,
आकाश रातो भयो,
आमाको मन
रातभन्दा गहिरो अन्धकार बन्यो।
चौकीको ढोकामा
आँसु लिएर उभिँदा
राज्यले भन्यो—
“केटासँग होली।”
त्यही रात
न्याय निदायो,
र अर्को बिहान
उखुबारी रोयो।
सानो साइकल,
कापी–कलम,
र च्यातिएको सपना
माटोमा छरपस्ट।
प्रमाण पखालियो पानीले,
पाप पखालियो कि
सत्य डुबाइयो?
उखुबारी जान्दछ।
एउटा निर्दोष बालिका,
अर्को मानसिक रोगी,
र बीचमा
राज्यको झूट।
विज्ञान चिच्यायो—
“ऊ अपराधी होइन!”
तर हत्यारा
भीआईपी मुस्कानमा हरायो।
न्याय माग्दा
सडक आगो बन्यो,
र न्यायकै नाममा
गोली चल्यो।
सन्नी ढल्यो,
१७ वर्षको सपना
रगतमा मिसियो,
राज्य फेरि मौन भयो।
बुबाको आवाज
सडकमा गल्दै गयो,
आमाको आँसु
थाकेर रोकियो।
मन्त्री फेरिए,
कुर्सी सरे,
तर एउटी छोरीको
न्याय अड्कियो।
आज पनि उखुबारी
माटोमुनि सत्य बोकेर
चुपचाप उभिएको छ।
र देशले सुन्न नसकेको
एउटा आवाज अझै गुञ्जिन्छ—
“म निर्मला हुँ,
मलाई न्याय चाहिन्छ।https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
न्याय की प्रतीक्षा में निर्मला
“माँ, होमवर्क करके जल्दी लौट आऊँगी।”
निर्मला ने अपने दोस्तों के लिए छोटे से प्लास्टिक में कुछ अमरूद बाँधे, अपनी पुरानी साइकिल निकाली और मुस्कुराते हुए घर के आँगन से निकल गई।
दिन ढल गया।
शाम हो गई।
लेकिन निर्मला नहीं लौटी।
बम दीदी-बहन के घर से दोपहर 2 बजे ही निकल चुकी निर्मला, शाम 8 बजे तक भी घर नहीं पहुँची। घबराए हुए माता-पिता पुलिस चौकी पहुँचे। वहीं उन्हें राज्य से पहला धोखा मिला।
“किसी लड़के के साथ चली गई होगी, घूम रही होगी।”
अपनी बेटी के लापता होने की पीड़ा से तड़पते माता-पिता पर वर्दीधारी रक्षकों की यह असंवेदनशील टिप्पणी थी। अगर उसी रात तुरंत खोज अभियान शुरू हो जाता, तो शायद इस कहानी का अंत कुछ और होता।
अगली सुबह— 11 साउन।
घर से कुछ ही दूरी पर गन्ने के खेत में निर्मला का निर्जीव शरीर मिला। उस दृश्य ने सिर्फ इंसानों को नहीं, बल्कि मानवता को भी झकझोर दिया। लेकिन उस भयावह घटना से भी ज़्यादा डरावना दृश्य इसके बाद देखने को मिला।
अपराध जांच में घटनास्थल को ‘मंदिर’ माना जाता है, लेकिन यहाँ रक्षक ही भक्षक के साथी बन गए। एक मासूम बच्ची के शव के पास मिली सलवार— जो बलात्कार का सबसे अहम सबूत हो सकती थी— पुलिस ने खुद पानी में धो दी।
क्या यह सिर्फ अज्ञानता थी?
या किसी के गुनाह धोने की सुनियोजित साज़िश?
भीड़ इकट्ठा हुई। निर्मला की साइकिल, कॉपी-किताबें शव से कुछ दूरी पर बिखरी पड़ी थीं। लेकिन संघर्ष का कोई निशान नहीं था। मानो हत्या कहीं और करके शव यहाँ सजा दिया गया हो।
सबूत मिटाने की जल्दबाज़ी में फॉरेंसिक टीम के पहुँचने से पहले ही शव हटा दिया गया। सच्चाई हमेशा के लिए उसी गन्ने के खेत की मिट्टी में दबा दी गई।
जन आक्रोश बढ़ता गया।
राज्य ने एक ‘पात्र’ खड़ा किया— दिलीप सिंह बिष्ट। 41 वर्षीय मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति।
पुलिस ने तैयार की हुई पटकथा सुनाई—
“इसी ने निर्मला की हत्या की है।”
सबूत के नाम पर उसकी फटी हुई कमीज़ दिखाई गई।
बाद में बंद कमरे के भीतर की सच्चाई सामने आई—
“इस अपराध को स्वीकार कर ले, हम तुझे मांस और शराब देंगे, नहीं तो मार देंगे।”
एक मानसिक रोगी पर किया गया यह अत्याचार न्याय प्रणाली के चेहरे पर लगा काला धब्बा था।
लेकिन झूठ की उम्र लंबी नहीं होती।
निर्मला के शरीर से लिए गए (चाहे जितने भी विवादित क्यों न हों) डीएनए नमूने दिलीप के डीएनए से नहीं मिले।
विज्ञान ने राज्य के झूठ को मानने से इनकार कर दिया।
एक निर्दोष बच गया, लेकिन असली अपराधी आज भी पर्दे के पीछे मुस्कुराता रहा।
निर्मला के लिए न्याय माँगते ही सड़कें आग बन गईं।
पूरा देश रो पड़ा। कंचनपुर की सड़कों पर नारे गूँजे—
“सरकार, निर्मला को न्याय दो!”
लेकिन सरकार ने न्याय की जगह गोलियाँ चलाईं।
8 भदौ।
17 वर्षीय सन्नी— निर्मला के लिए न्याय माँगने सड़क पर उतरा एक किशोर— पुलिस की गोली से गिर पड़ा।
एक हत्या की जाँच करनी थी, राज्य ने जवाब में एक और हत्या कर दी।
आज वर्षों बीत चुके हैं।
घटनास्थल के पास की सेना की बैरक, बम दीदी-बहन का घर, बार-बार बदले गए बयान, घटना के तुरंत बाद रंगे गए कमरे, सलवार धोने वाले पुलिसकर्मी और शक के घेरे में खड़े ‘वीआईपी’ चेहरे— सब आज भी रहस्य के गर्भ में हैं।
निर्मला के पिता यज्ञराज पंत— न्याय माँगते-माँगते मानसिक रूप से टूट चुके हैं।
माँ दुर्गा देवी— राज्य से लड़ते-लड़ते अंततः हार मानने को मजबूर हो गईं।
इस कहानी का अंत अभी लिखा जाना बाकी है।
निर्मला का हत्यारा आज भी आज़ाद घूम रहा है।
उसके नाम पर कार्यक्रम चलाने वाले मंत्री बने, प्रधानमंत्री बदले, कानून मंत्री, आईजीपी, डीआईजी— सब बदल गए।
लेकिन एक सच्चाई आज भी नहीं बदली—
“निर्मला की आत्मा को अब तक शांति नहीं मिली है।”
निर्मला पंत को हार्दिक श्रद्धांजलि
Himanshu Shukla
पहला प्यार कभी भुलाया नहीं जाता… 💔
कुछ एहसास अधूरे रह जाते हैं,
और वही ज़िंदगी भर याद बन जाते हैं।
📖 “पहला प्यार : अनकहा एहसास (Part-1)”
आ चुका है। ❤️
अगर आपने भी कभी चुपचाप किसी से प्यार किया है,
तो ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी…
Raju kumar Chaudhary
न्यायको पर्खाइमा निर्मला
“आमा, होमवर्क सकेर छिट्टै फर्किन्छु है।”
निर्मलाले सानो प्लास्टिकमा आफ्ना साथीहरूका लागि केही अम्बा पोको पारिन्, पुरानो साइकल निकालिन् र मुस्कुराउँदै घरको आँगनबाट निस्किइन्।
दिन ढल्यो। साँझ पर्यो।
तर निर्मला फर्किनन्।
बम दिदीबहिनीको घरबाट दिउँसो २ बजे नै निस्किसकेको भनिएकी निर्मला साँझ ८ बजेसम्म पनि घर पुगिनन्। आत्तिएका आमा–बुबा प्रहरी चौकी पुगे। त्यहीँ उनीहरूले राज्यबाट पहिलो धोका पाए।
“पोइला गइहोली, केटासँग घुम्दै होली।”
छोरी हराएको पीडामा छटपटाइरहेका आमाबुवामाथि बर्दीधारी रक्षकहरूको यो असंवेदनशील टिप्पणी थियो। यदि त्यो रात तत्काल खोजी अभियान सुरु भएको भए, सायद यो कथाको अन्त्य अर्कै हुन सक्थ्यो।
भोलिपल्ट बिहान— साउन ११ गते।
घरभन्दा केही परको उखुबारीमा निर्मलाको निर्जीव शरीर भेटियो। त्यो दृश्यले मान्छेको मात्र होइन, मानवताकै सातो उडायो। तर त्यो विभत्स घटनाभन्दा पनि डर लाग्दो दृश्य त त्यसपछि देखियो।
अपराध अनुसन्धानमा घटनास्थललाई ‘मन्दिर’ मानिन्छ। तर यहाँ रक्षकहरू नै भक्षकको मतियार बने। एउटा अबोध बालिकाको शव नजिक भेटिएको सुरुवाल— जुन बलात्कारको सबैभन्दा महत्वपूर्ण प्रमाण हुन सक्थ्यो— प्रहरीकै हातले पानीमा चोबलेर पखालियो।
के त्यो अज्ञानता मात्र थियो? कि कसैको पाप पखाल्ने नियोजित षड्यन्त्र?
भीड जम्मा भयो। निर्मलाको साइकल, कापी–किताबहरू शवभन्दा केही पर असरल्ल थिए। तर संघर्षको कुनै चिन्ह थिएन। मानौँ, हत्या अन्तै कतै गरेर शव यहाँ सजाइएको थियो।
तर प्रमाण नष्ट गर्ने हतारोमा फरेन्सिक टोली नपुग्दै शव उठाइयो। सत्य त्यही उखुबारीको माटोमुनि सधैँका लागि दबाइयो।
जनआक्रोश बढ्दै गयो।
राज्यले एउटा ‘पात्र’ खडा गर्यो— दिलिप सिंह विष्ट। ४१ वर्षीय मानसिक सन्तुलन गुमाएका व्यक्ति।
प्रहरीले तयारी पटकथा सुनायो— “यसैले निर्मलालाई मारेको हो।”
प्रमाणको नाममा च्यातिएको कमिज देखाइयो।
पछि मात्र बन्द कोठाभित्रको सत्य बाहिर आयो।
“यो अपराध स्वीकार गर, हामी तँलाई मासु र रक्सी दिन्छौं, नत्र मारिदिन्छौं।”
एक मानसिक रोगीमाथि गरिएको यो यातना न्याय प्रणालीको अनुहारमा लागेको कालो धब्बा थियो।
तर झूटको आयु छोटो हुन्छ।
निर्मलाको शरीरबाट संकलित (जतिसुकै विवादित भए पनि) DNA र दिलिपको DNA मिलेन।
विज्ञानले राज्यको झूट स्वीकार गरेन। एउटा निर्दोष बच्यो, तर असली अपराधी अझै पर्दा पछाडि मुस्कुराइरह्यो।
निर्मलाको न्याय माग्दा सडक आगो बन्यो।
सिङ्गो देश रोयो। कञ्चनपुरमा नारा लाग्यो—
“सरकार, निर्मलालाई न्याय दे!”
तर सरकारले न्यायको साटो गोली चलायो।
भदौ ८ गते।
१७ वर्षीय सन्नी— निर्मलाका लागि न्याय माग्दै सडकमा उत्रिएका एक किशोर— प्रहरीको गोली लागेर ढले। एउटा हत्याको छानबिन गर्नुपर्ने राज्यले अर्को हत्या गरेर जवाफ दियो।
आज वर्षौं बितिसके।
घटनास्थल नजिकको सेनाको ब्यारेक, बम दिदीबहिनीको घर, पटक–पटक फेरिएका बयानहरू, घटना लगत्तै रंगरोगन गरिएका कोठाहरू, सुरुवाल पखाल्ने प्रहरीहरू र शंकाको घेरामा रहेका ‘भीआईपी’ अनुहारहरू— सबै रहस्यकै गर्भमा छन्।
निर्मलाका बुबा यज्ञराज पन्त— न्याय माग्दामाग्दै मानसिक रूपमा थाकिसके।
आमा दुर्गा देवी— राज्यसँग लड्दालड्दै अन्ततः हार मान्न बाध्य भइन्।
यो कथाको अन्त्य अझै लेखिएको छैन।
निर्मलाको हत्यारा आज पनि स्वतन्त्र हिँडिरहेको छ।
उनको नाममा कार्यक्रम चलाउनेहरू मन्त्री बने, प्रधानमन्त्री फेरिए, कानुनमन्त्री, आईजीपी, डीआईजी सबै बदलिए।
तर नफेरिएको एउटा मात्रै सत्य छ—
“निर्मलाको आत्माले अझै शान्ति पाएको छैन।”
निर्मला पन्तप्रति हार्दिक श्रद्धाञ्जली।उखुबारीले देखेको सत्य
“आमा, म छिट्टै फर्किन्छु”
भन्दै निस्किएकी
एउटी छोरी
घर फर्किन पाइन।
साँझ ढल्दै गयो,
आकाश रातो भयो,
आमाको मन
रातभन्दा गहिरो अन्धकार बन्यो।
चौकीको ढोकामा
आँसु लिएर उभिँदा
राज्यले भन्यो—
“केटासँग होली।”
त्यही रात
न्याय निदायो,
र अर्को बिहान
उखुबारी रोयो।
सानो साइकल,
कापी–कलम,
र च्यातिएको सपना
माटोमा छरपस्ट।
प्रमाण पखालियो पानीले,
पाप पखालियो कि
सत्य डुबाइयो?
उखुबारी जान्दछ।
एउटा निर्दोष बालिका,
अर्को मानसिक रोगी,
र बीचमा
राज्यको झूट।
विज्ञान चिच्यायो—
“ऊ अपराधी होइन!”
तर हत्यारा
भीआईपी मुस्कानमा हरायो।
न्याय माग्दा
सडक आगो बन्यो,
र न्यायकै नाममा
गोली चल्यो।
सन्नी ढल्यो,
१७ वर्षको सपना
रगतमा मिसियो,
राज्य फेरि मौन भयो।
बुबाको आवाज
सडकमा गल्दै गयो,
आमाको आँसु
थाकेर रोकियो।
मन्त्री फेरिए,
कुर्सी सरे,
तर एउटी छोरीको
न्याय अड्कियो।
आज पनि उखुबारी
माटोमुनि सत्य बोकेर
चुपचाप उभिएको छ।
र देशले सुन्न नसकेको
एउटा आवाज अझै गुञ्जिन्छ—
“म निर्मला हुँ,
मलाई न्याय चाहिन्छ।
Ashish jain
दिखावे की प्यास (आशीष की दृष्टि से)
मूर्ख बहुत है दुनिया यहाँ, बस ज्ञान बाँटना पेशा है,
स्वयं सीखने की बारी आए, तो लगता घोर अंदेशा है।
झुककर ग्रहण करे जो विद्या, वह छोटा मान लिया जाता, आशीष, अहंकार की चोटी पर, बोध कहाँ टिक पाता है?
थाली सजी-सजाई मिल जाए, सब उस पर टूट पड़ते हैं, मेहनत की आँच पर पकने से, अक्सर लोग मुकरते हैं। पका-पकाया सत्य चाहिए, खोज की राह से डरते हैं, बिना चले ही मंज़िल पाने की, झूठी कोशिश करते हैं।
खोज रहे सब शांति यहाँ, पर शोर भीतर का भारी है, मौन को सुनने की हिम्मत, क्या हमने कभी विचारी है? शांति का मार्ग कठिन है, पर सब सुख की चाहत रखते हैं, अशांति के कड़वे घूँटों को, अमृत कहकर चखते हैं।
मोक्ष-मोक्ष की रट लगी है, पर मोह का बंधन प्यारा है, निकलना कोई चाहता नहीं, जिसे जंजाल ने घेरा है। आशीष, मुक्त वही है जिसने खुद को, सत्य के साँचे में ढाला है, वरना इस दुनिया ने तो, बस भ्रम का जाल पाला है।
ज्ञान वही जो आचरण में हो, बाकी सब वाचालता है, बिना साधना के सिद्ध हो जाना, बस एक कोरी कल्पना है।
आशीष जैन (श्रीचंद)
7055301422
Jeetendra
पति: आज खाने में क्या है?
पत्नी: जो कल था, वही गरम कर दिया है।
पति: पर कल तो कुछ भी नहीं था?
पत्नी: हाँ, तो आज भी वही है!😂😂😂
kattupaya s
Goodnight friends. have nice sleep and sweet dreams
Mariya
ভুতুড়ে ছলনাময়ী
রাত নেমেছে, চুপচাপ ঘরে,
ছায়া নাচে দেয়ালে, বুকে ঢেকে।
দুরন্ত হেসে বলে, “আমি আছি এখানে”,
কিন্তু দেখা নেই, শুধু বাতাসে খেলা।
চিৎকার করো, আমি সাড়াবো,
ছলনাময়ী ছায়া, খেলায় ডুবাবো।
ফিরে দেখা, ঘরের কোণে হেসে,
“ভয় পেও না, আমি বন্ধু, না কি শত্রু, মেসে?”
হঠাৎ উড়ে গেল, লাফ দিয়ে পাশ,
হাসতে হাসতে বলল, “আমি তো শুধু আশ!”
রাত শেষে শুধু চুপচাপ বাতাস,
ভূতুড়ে মজা, আর নেই কোনো ভয়-বাতাস।
kattupaya s
iam really upset with matrubharti in review system. the reviews are not getting updatedor not showing. anyone know the reason behind that? help me.
Jyoti Gupta
#AnandDham #HanumanJi #Bajrangbali #HanumanPooja #BhaktiReels #ViralReels #DivineDarshan #ReelsIndia #JaiBajrangbali#HanumanShorts #BhaktiShorts #TempleShorts #TrendingShorts #ViralShorts #GodBlessings #DivineShorts#ExplorePage #TrendingReels #SpiritualVibes #SanatanDharma #IndianGods #TrendingNow
kattupaya s
For whom iam writing? yesterday night suddenly I thought about this question. I don't know how many people enjoy the core of story. people lose interest in reading. but still I believe in story lovers. they may be small size group . they are the only reason that iam writing . seriously I didn't get right feedback from anyone. waiting for the good reviews. I requested tamil people many times to write a review. but they are busy. hope everything will be alright.
Shailesh Joshi
જેટલું પણ ખોટું થાય છે,
એ, જાણી જોઈને વધારે ને
અજાણતા ઓછું થાય છે,
ને આ બંનેમાં પાછું સૌથી પહેલી જાણ તો
ખોટું કરવાવાળાને જ થાય છે,
ફર્ક માત્ર એટલો જ કે,
ખોટું કરવામાં ખોટું કરતાં પહેલાં,
ને અજાણતામાં
ખોટું થઈ ગયા પછી જાણ થાય છે.
- Shailesh Joshi
Prince Choudhary
मेरी जान, कच्ची उमर है, खुद को संभाला कर
गले में दुपट्टा डाल के बाहर आया कर
तुझे इश्क़ है हमसे, तो बताया कर
जैसे मैं समझाता हूँ तुझे,
तू भी कभी मुझे समझाया कर
मेरी जान, कच्ची उमर है,
खुद को दुनिया से बचाया कर
धूप भी मायूस लौट जाती है थक कर,
छत पर कपड़े सुखाने आया कर
✍️aprince
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/17zNifkbLj/
#matrubharati
#gazal
#gujarati
#poetry
#ronakjoshi
#rahgir
archana
दुनिया को बताऊँ तो तमाशा बन जाएगा,
अपनों को कहूँ तो घर उजड़ जाएगा…
इसलिए दर्द को स्याही बना लिया मैंने,
और काग़ज़ को अपना सबसे करीबी बना लिया।
रो कर लिख देती हूँ अपने मन की हर बात,
क्योंकि सुनने वाला कोई होता तो कलम चुप रहती…
मन हल्का हो जाता है काग़ज़ से बात करके,
इतनी-सी तसल्ली भी आजकल बहुत होती है जीने के लिए।
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__
मैं पागल हूँ, तो फिर ये कैसी शराफ़त
पाल बैठा हूँ,
कि ज़िल्लत सह रहा हूँ, और तुझको
टाल बैठा हूँ,
मेरा दिल साफ़ है, शायद इसीलिए
कमज़ोर हूँ मैं,
कि आस्तीन में अपनी, मैं अपना ही
काल बैठा हूँ,
मेरा बस चलता तो, अब तक उसे
मिट्टी में मिला देता,
मगर वो शख्स अच्छा है, ये कैसे
ढाल बैठा हूँ.?
हवस होती तो शायद कब का
तुझको छीन लेता मैं,
मगर इस पाकीज़ा उल्फ़त का
लेकर जाल बैठा हूँ,
वो मेरे सामने तेरा हाथ थामे
घूमता है अब,
और मैं कम्बख़्त उसकी नेकी का
मलाल बैठा हूँ,
बड़ी रुसवाई है इसमें बड़ी ज़िल्लत
की ये हद है,
कि एक शरीफ़ की खातिर अपना
कफ़न डाल बैठा हूँ…🔥
╭─❀💔༻
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
#LoVeAaShiQ_SinGh☜
╨──────────━❥
jighnasa solanki
ठोकરો से गिरना आम बात है।
किसी की नजरो से मत गिरना।
उम्र निकल जाती है,
खुद को सही साबित करने मे।
💔 💔 💔 💔 💔 💔 💔 💔
- jighnasa solank
kattupaya s
hopeless man gives you fake smiles. people still believe that smiles. be aware of fake smiles
kattupaya s
everyone is working hard. smart people utilize that.i mean it
kattupaya s
progress is invisible. but the result is the truth of your hardwork.live like a Jen monk
kattupaya s
people want to look down others. but I am not going to afford them to do it.
kattupaya s
it's hard to live with respect and dignity. but when you make it as a habit you are so happy with yourself.
Prithvi Nokwal
नाना-नानी का घर बहुत बड़ा नहीं था, पर उसमें दिल भर देने वाली जगह थी। कच्चा आँगन, मिट्टी की खुशबू और सुबह-सुबह चूल्हे का धुआँ। मामा-मामी का अपनापन, नानी की मीठी डाँट, नाना की शांत मुस्कान— सब कुछ सादा, पर सच्चा। वो गाँव, वो गलियाँ, जहाँ शोर नहीं, सुकून रहता था। आज भी यादों में वही छोटा सा घर सबसे बड़ा लगता है।
- Prithvi Nokwal
Akanksha srivastava
दिखती है गिनती जब बहुमत खामोश है
------------------------------------------------
आखिर क्यों अच्छाई पर बुराई भारी दिखाई जाती है,
आखिर क्यों इंसानियत पर गैरियत भारी दिखाई जाती है।
आज भी दुनिया जज्बातों से भरी पड़ी है,
फिर क्यों हर मोड़ पर बेमानी खड़ी है।
आज भी कितने बच्चे चैन त्याग जाते है,
पिता के सपनों को अपनी नींद बना जाते है।
माँ की उम्मीदों से भरे आँचल को अपने सर का ताज बनाते है।
खुद टूटकर भी घर का सपना साध जाते है,
फिर क्यों उन तमाम होनहारों के ऊपर छा जाते है कुछ गिनती के कुपुत्।
जहाँ आज भी सिरों पर, हज़ारों हाथों की छाया है,
और उन हाथों ने अपनत्व भी तो पाया है।
फिर क्यों प्रचारित होता है की वो महज एक लाचार छाया है।
जहाँ आज भी कई घरों में बड़ों से पुछकर पकवान पकते है।
फिर सिर्फ इसे क्यों प्रमुखता दी जाती की वे एक निवाले के लिए तरसते है।
जहाँ बड़ों ने खींची है, मर्यादा की रेखा,
जिसने पीढ़ियों को दिया ,सही राह को लेखा,
फिर क्यों नजर आते है कुछ अमर्यादित आचरण,
जो मिटा देते है संस्कारों का पावन आवरण,
जहाँ आज भी बड़ों के हक का आदर होता है।
संस्कारों से हर रिश्ता और गहरा होता है।
फिर क्यों दिखाये जाते है,
वो गिनती के बच्चे,
जो अवहेलना कर बड़ों के मान को कुचलते।
आखिर किसने हक दिया ,
हमारे अंकुरित होते बीज़ों के मानस पटल पर,
ये गंदगी बिखरने की, नहीं इज़ाज़त होनी चाहिए,
किसी को उस कच्चे मिट्टी के आकारों को बिगाड़ने की।
kattupaya s
Self respect quotes
Sonu Kumar
#10 राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड
यह कानून शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की तर्ज पर सनातनी हिन्दुओं के लिए एक धार्मिक ट्रस्ट का गठन करता है। इस ट्रस्ट का नाम राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (RH.B.) होगा तथा इस ट्रस्ट का अध्यक्ष हिन्दू बोर्ड प्रधान कहलायेगा। राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड की मुख्य कार्यकारिणी में 1 प्रमुख एवं 4 न्यासियो सहित कुल 5 व्यक्ति होंगे। यह क़ानून सरकार द्वारा हथियावे जा चुके सभी देवालयों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है। इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। इस क़ानून का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें- Tinyurl.com/HinduBoard
प्रस्तावित राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है
1. प्रधानमंत्री एक अधिसूचना जारी करके राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड को सौंपेंगे। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयों का भी प्रबंधन करेगा जिन्हें किसी मंदिर के मालिको ने इसे स्वेच्छा से सौंप दिया है।
2. बोर्ड उन देवालयों का अधिग्रहण / प्रबंधन नहीं करेगा जिनकी देख-रेख देवालय के मालिक RHB से नहीं कराना चाहते। हिन्दू बोर्ड प्रधान और न्यासी अपने नियंत्रण में मौजूद देवालयो को प्राप्त हुए दान को इस तरह खर्च करेंगे कि सनातन संस्कृति का सरंक्षण हो।
3. भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा। यहाँ हिन्दू से आशय है - उन सभी समुदायों, पन्थो, सम्प्रदायों के अनुयायी जो स्वयं को हिन्दू या सनातनी या सनातनी हिन्दू कहते है।
4. इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, के अनुयायी स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे, एवं वे इस बोर्ड के वोटींग मेंबर नहीं बन सकेंगे। सभी प्रकार की मस्जिदे, चर्च, गुरूद्वारे, बौद्ध, जैन तीर्थ स्थल आदि हिन्दू बोर्ड के दायरे से बाहर रहेंगे।
5. यदि आप हिन्दू बोर्ड के सदस्य बनते है तो आपको एक बोट वापसी पासबुक मिलेगी ताकि आप हिन्दू बोर्ड प्रधान को बदलने के लिए स्वीकृति दे सके।
6. यदि हिन्दू बोर्ड प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो मामले को सुनने और दंड देने की शक्ति जजों के पास न होकर हिन्दू नागरिको की जूरी के पास रहेगी। प्रत्येक मामले के लिए अलग से जूरी होगी और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी।
वर्तमान हिन्दू मंदिरों में धन के समाज में बांटने सम्बन्धी निर्णय मंदिर प्रमुख या संप्रदाय प्रमुख द्वारा लिए जाते है, तथा इनका ही मंदिरों की संपत्ति के उपयोग पर पूर्ण नियंत्रण होता है। ट्रस्टी का पद उत्तराधिकार तथा गुरु प्रथा द्वारा हस्तांतरित होता है। मतलब आज का गुरु ही अगला गुरु नियुक्त करता है। आजीवन कार्यकाल होने के कारण यहाँ संपत्ति इकठ्ठा करने की ओर झुकाव होता है, तथा इसका उपयोग तड़क-भड़क, दिखावे एवं ऐशो आराम में भी किया जाता है। सिक्खों में अकाल तख्त के ग्रंथी चुन कर आते है, और सीमित कार्यकाल (4 वर्ष) होने के कारण वे फिर से चुन कर आने के लिए गुरुद्वारो में आए दान को परोपकारी कार्यों में खर्च करने पर अधिक भार देते है। हिन्दू बोर्ड क़ानून के आने से हिन्दू मंदिरों में भी इसी तरह का अपेक्षित सुधार आएगा।
राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा - अथर्ववेद
पृष्ठ 6/2
Ved Vyas
Hello Dear Readers!
I am back with a new, exciting sci-fi NOVEL only for you all.
Into The Whispering Dark
In a world driven by data, what happens when the math stops making sense?
Set in 2098, Into The Whispering Dark follows Owen Anderson, an MIT prodigy who discovers a code that shouldn't exist. It’s a signal hidden beyond every digital system on Earth, leading him to the frozen silence of Antarctica.
This isn't just a sci-fi mystery; it’s a story about:
- The Human Spirit: Can imagination survive in an age of algorithms?
- Forbidden Science: What lies beneath the ice that humanity isn't ready for?
- The Cost of Truth: A journey of unfinished love and impossible choices.
Start Reading Today
If you enjoy hard science fiction, haunting mysteries, or stories that challenge our digital future, I’d love for you to check it out.
The Chapters are rolling out soon...
You can get the whole Novel on Amazon Kindle or Amazon Store.
I hope my Novels give you a good Time and you all like it.
Ved Vyas
Hello Dear Readers!
I am back with a new, exciting sci-fi NOVEL only for you all.
Into The Whispering Dark
In a world driven by data, what happens when the math stops making sense?
Set in 2098, Into The Whispering Dark follows Owen Anderson, an MIT prodigy who discovers a code that shouldn't exist. It’s a signal hidden beyond every digital system on Earth, leading him to the frozen silence of Antarctica.
This isn't just a sci-fi mystery; it’s a story about:
- The Human Spirit: Can imagination survive in an age of algorithms?
- Forbidden Science: What lies beneath the ice that humanity isn't ready for?
- The Cost of Truth: A journey of unfinished love and impossible choices.
Start Reading Today
If you enjoy hard science fiction, haunting mysteries, or stories that challenge our digital future, I’d love for you to check it out.
The Chapters are rolling out soon...
You can get the whole Novel on Amazon Kindle or Amazon Store.
I hope my Novels give you a good Time and you all like it.
smita
I don’t need perfect love or big promises ♥️🌼
I just want honesty, effort,
and someone who chooses me
even on the quiet days 💖🙂
kattupaya s
one side sleepless nights. other side cold wind in day time. it's hell or heaven?
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
archana
कह दिया उसने – कब तक इलाज कराऊँगा,
काश कोई पूछे… ये बीमारी क्या मैंने खुद लिखी है अपनी किस्मत में कहीं?
इलाज मजबूरी है, कोई शौक नहीं मेरा,
तानों में दबकर भी जीना पड़ता है हर रोज़ सवेरा।
लाचार हूँ इसलिए हाथ फैलाना पड़ता है,
वरना किसी को भीख बनकर जीना अच्छा नहीं लगता है।
Raju kumar Chaudhary
🎵 नया गीत: “संसार एक डेरा” 🎵
मुखड़ा (Chorus):
संसार त एउटा डेरा हो, बस केही पलको बास,
आज हाँसो, भोलि आँसु, यही जीवनको आस।
खाली हात आए थियौँ, खाली हात नै जानु छ,
दुःख–सुख सबै यहाँ, एकदिन छुट्नै जानु छ।
अन्तरा 1:
सुनौलो सपना बुन्छौँ, बालुवामा घरजस्तै,
समयको एक झोक्का, सब बगाइ लैजस्तै।
आज साथ छन् आफ्ना, भोलि याद मात्र बाँकी,
जन्म र मृत्युबीचको, यो सानो कथा साँकी।
मुखड़ा (Repeat):
संसार त एउटा डेरा हो, बस केही पलको बास,
आज हाँसो, भोलि आँसु, यही जीवनको आस।
अन्तरा 2:
धन, पद, अभिमान, सब यहीँ छुट्ने हो,
साँचो कर्म र माया, मात्र साथ जाने हो।
जो रोयो, जो हाँस्यो, सबै बराबर यहाँ,
माटोले बोलाउँदा, चुपचाप जानु पर्छ जहाँ।
ब्रिज:
किन त घमण्ड गर्छौ, दुई दिनको जिन्दगी,
माया बाँड, कर्म गर, यही हो साँचो बन्दगी।
मुखड़ा (Final):
संसार त एउटा डेरा हो, बस केही पलको बास,
नाम होइन कर्म बाँचोस्, बाँकी सब विनास।
अन्त (Outro):
आज छ सास, आज छ मौका, राम्रै गरौं काम,
भोलि के हुन्छ कसलाई थाहा, यही हो जीवनको नाम।https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
महेश रौतेला
जिन्दगी इतनी ही नहीं
और अधिक थी,
प्यास इतनी ही नहीं
और अधिक थी।
आसमान इतना ही नहीं
और अधिक था,
दुख इतना ही नहीं
और बिखरा था,
सुख इतना ही नहीं
और जुड़ा था।
ममता इतनी ही नहीं
और फैली थी,
प्यार इतना ही नहीं
और बाकी था।
धरती इतनी ही नहीं
और जीवट थी,
जीवन इतना ही नहीं
और शेष था।
****
*** महेश रौतेला
fiza saifi
कभी तो सुनो बिना कहे...
कभी तो समझो...
दिल की ज़ुबान...
कभी तो आंखों के दर्द को पढ़ो...
हर बात कहने की तो नहीं होती...
हर बार चीजों को समझाने का समय तो नहीं होता...
दिल का मौसम हमेशा अच्छा नहीं होता...
कभी तो इस आंगन में गम भी उतरते हैं...
कभी तो अंदर कहीं बारिश होती है...
जो आंखों से चाहे बह न पाए...
वो ज़ुबान पर कभी आ न पाए...
वो जज़्बात, वो तकलीफ...
वो अनकही, वादों के टूट जाने का दुख...
वो अकेले रह जाने का डर...
वो ज़िंदा होकर भी...
ज़िंदगी के एहसास न होने का डर...
क्या कभी महसूस कर सकते हो?
जो था मेरे पास... वो भी खो दिया...
वो नुकसान पूरा कर सकते हो?
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શીર્ષક: પડઘાનો ન્યાય
જેવું વાવશો આ જગતમાં, તેવું જ પાછા લણશો,
પ્રેમ આપશો તો પ્રેમ મળશે, ઘા કરશો તો હણાશો.
અરીસામાં જેવું હસશો, તેવું સામે પામશો,
આગ લગાડશો બીજાના ઘરે, તો તમારું ઘર બાળશો.
માન દઈને બોલાવશો, તો માન મોટું પામશો,
તુકારો દઈ તોછડાઈ કરશો, તો નફરત સામે હાથે પામશો.
ખાડા ખોદશે જે કોઈ અન્ય કાજે, તે જ તેમાં પડશે,
છળ-કપટના ખેલ રમનારા, છેલ્લે પોતે જ રડશે.
કાંટા વાવીને રસ્તા પર, ફૂલની આશા ના રાખવી,
કડવી વાણી બોલ્યા પછી, મીઠાશ ક્યાંથી ચાખવી?
સીધો-સાદો હિસાબ છે, નથી કોઈ તેમાં ભેદ,
‘જેવા સાથે તેવા’ થાતાં, "સ્વયમ્'ભૂ" મટી જાય સૌ ખેદ.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
kattupaya s
Aisi ulji nazar unse hatt-ti nahi
Daant se reshmi dor katt-ti nahi
Umra kab ki baras ke safeed ho gayi
Kaari badari jawani ki chatt ti nahi
Walla ye dhadkan bhadne lagi hai
Chehre ki rangat udhne lagi hai
Darr lagta hai tanha sone mein ji
Dil to bachcha hai ji
Dil to bachcha hai ji
Thoda kaccha hai ji
Paagla
https://youtube.com/@paagla012?si=1oQpuitpJh_gMymS
Paagla
https://youtube.com/@paagla012?si=1oQpuitpJh_gMymS
sunshine
मेरा दोस्त :लड़की नहीं है वो जादू है
ओर क्या कहा जाए
रात को मेरी नींद में आए
वो जुल्फें बिखराए
मेने कहा भाई चुड़ैल होगी चुडैल 😅😅😅🤣🤣🤣😅😅😅
Nensi Vithalani
Shree Radhe Radhe 🌸
બરસાને માં શ્રી રાધે
વૃંદાવન માં શ્રી રાધે
મથુરા માં શ્રી રાધે
નંદગાંવ માં શ્રી રાધે
યમુના તટે શ્રી રાધે
કુંજ ગલી માં શ્રી રાધે
કાદંબ વનમાં શ્રી રાધે
રાસ લીલા માં શ્રી રાધે
ગોપી સંગે શ્રી રાધે
શ્યામ સંગે શ્રી રાધે
ભક્ત મન માં શ્રી રાધે
શ્વાસ શ્વાસ માં શ્રી રાધે
હૃદય ધબકાર માં શ્રી રાધે
પ્રેમ સ્વરૂપે શ્રી રાધે
ભક્તિ માર્ગે શ્રી રાધે
કરુણા રૂપે શ્રી રાધે
દયા ધારા શ્રી રાધે
શાંતિ સ્વરૂપે શ્રી રાધે
આનંદ સ્વરૂપે શ્રી રાધે
ભરોસે શ્રી રાધે
શ્રદ્ધા માં શ્રી રાધે
વિશ્વાસ માં શ્રી રાધે
સમર્પણ માં શ્રી રાધે
સાધના માં શ્રી રાધે
જપ તપ માં શ્રી રાધે
કીર્તન માં શ્રી રાધે
ભજન માં શ્રી રાધે
આરતી માં શ્રી રાધે
મૌન માં શ્રી રાધે
વાણી માં શ્રી રાધે
આંખોના સ્વપ્ને શ્રી રાધે
આંસુઓમાં શ્રી રાધે
સ્મિત માં શ્રી રાધે
સહનશીલતામાં શ્રી રાધે
માફીમાં શ્રી રાધે
વિનમ્રતામાં શ્રી રાધે
ધીરજ માં શ્રી રાધે
આશા માં શ્રી રાધે
પ્રકાશ માં શ્રી રાધે
અંધકાર હરનારી શ્રી રાધે
નારી શક્તિ રૂપે શ્રી રાધે
પ્રેમની રાણી શ્રી રાધે
વૃંદાવનની શાન શ્રી રાધે
શ્યામની શક્તિ શ્રી રાધે
શ્યામની ભક્તિ શ્રી રાધે
શ્યામની પ્રેરણા શ્રી રાધે
શ્યામનું હૃદય શ્રી રાધે
શ્યામની ઓળખ શ્રી રાધે
શ્યામની મુસ્કાન શ્રી રાધે
શ્યામનું જીવન શ્રી રાધે
ગોપીજીવન શ્રી રાધે
વિરહમાં સાથ શ્રી રાધે
મિલનમાં મધુર શ્રી રાધે
નિશ્ચલ પ્રેમ શ્રી રાધે
અનંત ભાવ શ્રી રાધે
દિવ્ય લીલા શ્રી રાધે
આત્માની સાથી શ્રી રાધે
અંતરના દીપ શ્રી રાધે
ચિત્તની શાંતિ શ્રી રાધે
જીવનનો આધાર શ્રી રાધે
જન્મ મંત્ર શ્રી રાધે
કર્મ માર્ગે શ્રી રાધે
ફળ ત્યાગે શ્રી રાધે
ભય હરનારી શ્રી રાધે
મોહ નાશક શ્રી રાધે
બંધન મુક્તિ શ્રી રાધે
ચેતનામાં શ્રી રાધે
આત્મ સ્વરૂપે શ્રી રાધે
પરમ પ્રેમ શ્રી રાધે
પરમ શાંતિ શ્રી રાધે
મંદિર માં શ્રી રાધે
મન મંદિર માં શ્રી રાધે
અંતર યાત્રા માં શ્રી રાધે
સાધક હૃદય માં શ્રી રાધે
ગુરુ કૃપા રૂપે શ્રી રાધે
વેદના હરનારી શ્રી રાધે
સુખ દાતા શ્રી રાધે
દુઃખ હરનારી શ્રી રાધે
આશીર્વાદ રૂપે શ્રી રાધે
કૃપા દ્રષ્ટિ શ્રી રાધે
સવારની પ્રાર્થના શ્રી રાધે
સાંજની આરતી શ્રી રાધે
રાત્રીના સ્મરણ શ્રી રાધે
સ્વપ્નમાં શ્રી રાધે
જાગૃતિમાં શ્રી રાધે
કલમમાં શ્રી રાધે
શબ્દોમાં શ્રી રાધે
મૌન ધ્યાનમાં શ્રી રાધે
જીવન લયમાં શ્રી રાધે
ભક્તિ રસમાં શ્રી રાધે
અંતરાત્મા માં શ્રી રાધે
પ્રાણ શક્તિ શ્રી રાધે
ચેતન પ્રકાશ શ્રી રાધે
શાશ્વત સત્ય શ્રી રાધે
દિવ્ય સૌંદર્ય શ્રી રાધે
પ્રેમ પરાકાષ્ઠા શ્રી રાધે
સર્વત્ર વ્યાપી શ્રી રાધે
અનંત કૃપા શ્રી રાધે
નિત્ય સ્મરણ શ્રી રાધે
અખંડ ભાવ શ્રી રાધે
ભક્તનો સહારો શ્રી રાધે
જીવનનો સાર શ્રી રાધે
મુક્તિ દ્વાર શ્રી રાધે
પરમ લક્ષ્ય શ્રી રાધે
અંતિમ આશ્રય શ્રી રાધે
શરણાગતિ શ્રી રાધે
આત્મ સમર્પણ શ્રી રાધે
શ્રી કૃષ્ણ માં શ્રી રાધે🌸
Bhavna Bhatt
કડવું છે પણ સત્ય છે
Annu jangra
Is link per visit kr k kuch nyya sikhe
http://indiansauthor.blogspot.com/2026/01/best-credit-cards-for-students-in-usa.html
Soni shakya
"महसूस करना ही प्रेम है,
भगवान को किसने देखा है"
- Soni shakya
Urvashi Oza
આપણા આઝાદ દેશના નાગરિકોને 5 મિનિટનો સમય નથી ધ્વજવંદન કરવા , બસ રજા જોઈએ છે રખડવા .
ધન્ય છે ભારતનું ભવિષ્ય 🙏🏻🥲
Dhamak
बोलती नहीं, फिर भी लफ़्ज़ कहते हैं — वो ढमक है,
मेरा मौन भी बहुत सी बातें कहता है — वो ढमक है।
मैं टूटकर भी कभी बिखरी नहीं,
वक़्त के सामने खड़ी रहने वाली रहती है — वो ढमक है।
नज़रें झुकी हैं, मगर हिम्मत अब भी ज़िंदा है,
कम शब्दों में गहरा अर्थ बहता है — वो ढमक है।
कोई पूछे अगर इस शायरी के पीछे का नाम,
हल्की-सी मुस्कान से कह देना — वो ढमक है।
DHAMAK😂
(શાયરી)
Shefali
#shabdone_sarname__
#shandone_sarname_
Dada Bhagwan
મંદિરમાં જઈએ ત્યારે દર્શન કેવી રીતે કરવા જોઈએ? શિવ, કૃષ્ણ, સાઈ બાબા ના દર્શન કરીએ ત્યારે મૂર્તિ દેખાય છે. શું આને સાચા દર્શન કર્યા કહેવાશે? આત્મજ્ઞાન પામવા અને ખરા દર્શન કરવા વચ્ચે શું સંબંધ રહેલો છે?
https://youtu.be/GZdmp2g6jRw
#spirituality #spiritualvideo #trending #trendingvideo #DadaBhagwanFoundation
Jeetendra
शीर्षक: मखमली शिकन
शाम की रोशनी कमरे में इस तरह दाखिल हो रही थी जैसे कोई बिन बुलाया मेहमान दबे पाँव अंदर आ गया हो। हवा में मोगरे की महक और पुरानी किताबों की एक मिली-जुली गंध थी। देव ने खिड़की के पर्दे को थोड़ा और सरकाया, जिससे रोशनी की एक पतली लकीर प्रीति के चेहरे पर पड़ने लगी।
प्रीति ने अपनी पलकें झुका रखी थीं, जैसे वह रोशनी से नहीं, बल्कि देव की नज़रों से बच रही हो।
"तुम यहाँ क्यों हो, प्रीति?" देव की आवाज़ में एक अजीब सी खुरदराहट थी।
"शायद इसलिए क्योंकि मुझे कहीं और होने का बहाना नहीं मिला," प्रीति ने अपनी रेशमी साड़ी के पल्लू को उँगलियों में लपेटते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक कंपकंपी थी, जो शब्दों से कहीं ज़्यादा गहरा राज़ खोल रही थी।
"बहाने अक्सर सच को छुपाने के लिए बनाए जाते हैं, उसे ओढ़ने के लिए नहीं।" देव उसके करीब आया। उसके जूतों की आवाज़ लकड़ी के फर्श पर एक ताल पैदा कर रही थी।
प्रीति ने सिर उठाया। उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो राख होने से इनकार कर रही थी। "सच तो यह है कि तुम मुझसे डरते हो, देव। तुम्हें डर है कि अगर तुमने मुझे छुआ, तो तुम्हारी यह बनाई हुई संजीदगी बिखर जाएगी।"
देव मुस्कुराया, एक ठंडी और जानलेवा मुस्कान। "संजीदगी एक लिबास है, प्रीति। और लिबास उतारे जाने के लिए ही होते हैं।"
उसने अपना हाथ प्रीति के कंधे पर रखा। उसकी उँगलियों का स्पर्श प्रीति की त्वचा पर बिजली की तरह दौड़ा। प्रीति की सांसें तेज़ हो गईं, और उसने अपनी आँखें मूँद लीं।
"क्या तुम जानती हो कि तुम्हारी खामोशी कितनी शोर मचाती है?" देव ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया।
"तो फिर इसे चुप क्यों नहीं कर देते?" प्रीति ने पलटकर उसे चुनौती दी। उसकी साँसें देव के चेहरे से टकरा रही थीं।
देव ने अपनी पकड़ मज़बूत की और उसे दीवार से सटा दिया। "तुम शब्दों के जाल बुनना जानती हो, लेकिन शरीर झूठ नहीं बोलता।"
"तो फिर शरीर को ही बात करने दो," प्रीति ने धीरे से कहा, उसका हाथ देव की कमीज़ के बटनों पर ठहर गया था।
उस कमरे की शांति अब एक भारी तनाव में बदल चुकी थी। देव ने धीरे-धीरे प्रीति की साड़ी के पिन को ढीला किया। रेशमी कपड़ा सरक कर फर्श पर गिर गया, जैसे कोई रहस्य खुद-ब-खुद उजागर हो गया हो। प्रीति की त्वचा ढलती हुई धूप में सोने की तरह चमक रही थी।
"देव..." प्रीति के गले से एक दबी हुई आह निकली।
"शशश..." उसने उसकी बात को अपने होंठों से दबा दिया। यह चुंबन लंबा और प्यासा था, जिसमें बरसों की अधूरी इच्छाएं और सामाजिक बेड़ियाँ टूट रही थीं।
देव के हाथों ने प्रीति की कमर के घुमावों को इस तरह महसूस किया जैसे वह किसी कीमती नक्शे को पढ़ रहा हो। प्रीति ने अपनी उँगलियाँ देव के बालों में फँसा दीं, उसे और करीब खींचते हुए। कमरे की हवा गर्म हो गई थी, और हर स्पर्श एक नई कहानी लिख रहा था।
"तुम्हें लगता है कि यह सिर्फ एक रात की बात है?" प्रीति ने हाँफते हुए पूछा, जबकि देव के होंठ उसकी गर्दन के संवेदनशील हिस्से पर थे।
"यह रात की बात नहीं है, प्रीति। यह उस प्यास की बात है जो समंदर पीकर भी नहीं बुझती," देव ने उसे बाहों में भरकर बिस्तर की ओर ले जाते हुए कहा।
चादरों की सरसराहट और दोनों की मिली-जुली साँसों के बीच, वक्त जैसे ठहर गया था। देव का हर स्पर्श प्रीति के भीतर एक नया तूफान उठा रहा था। वह कोई साधारण मिलन नहीं था, बल्कि दो रूहों का एक-दूसरे में इस तरह घुल जाना था कि यह पहचानना मुश्किल हो जाए कि कौन कहाँ खत्म हो रहा है और कौन कहाँ से शुरू।
देव ने प्रीति के जिस्म पर उन जगहों को ढूँढा जिन्हें उसने खुद भी कभी नहीं छुआ था। प्रीति की सिसकारियां उस कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं, जो अब किसी संगीत की तरह लग रहा था।
"तुम... तुम बहुत बेरहम हो," प्रीति ने मदहोशी में कहा।
"और तुम बहुत खूबसूरत," देव ने उसके चेहरे को चूमते हुए जवाब दिया।
जैसे-जैसे रात गहराती गई, उनकी दूरियाँ मिटती गईं। पसीने की बूंदें उनकी त्वचा पर सितारों की तरह चमक रही थीं। हर हलचल में एक गहराई थी, हर हरकत में एक अर्थ। वे दोनों उस चरम सीमा की ओर बढ़ रहे थे जहाँ शब्द अर्थहीन हो जाते हैं और सिर्फ अहसास रह जाता है।
जब वह क्षण आया, तो कमरा एक गूँजती हुई खामोशी से भर गया। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए, तेज़ साँसें लेते रहे, जैसे किसी लंबी दौड़ के बाद सुस्ता रहे हों।
अंधेरा अब पूरी तरह छा चुका था। प्रीति ने अपना सिर देव के सीने पर रख दिया। उसके दिल की धड़कन अभी भी तेज़ थी।
"अब क्या?" प्रीति ने धीरे से पूछा।
देव ने उसके माथे को चूमा और कहा, "अब बस यह शिकन है, प्रीति। जो चादर पर भी रहेगी, और शायद हमारी यादों पर भी।"
उसने प्रीति को अपने पास और सिकोड़ लिया। बाहर दुनिया वैसी ही थी, लेकिन उस कमरे के भीतर, एक पूरी कायनात बदल चुकी थी।
Akanksha srivastava
हमारे देश के लाल
_______________
कितनी महान होगी वो ममता,
जिसने अपने जिगर के टुकड़े को ,
दुसरो के लिए जीना सिखाया।
कितनी दृढ़ होगी पिता की वो सीख,
जिसने अपने लाल को तलवार नहीं ,
दूसरों की ढाल बनना सिखाया।
कितना विशाल होगा वह हृदय,
जिसने ऐसे दिल को स्वीकार किया,
जिसके सीने में हर धड़कन सिर्फ देश के लिए धड़कता है
कितना मजबूत होगा उस बहन का मन,
जिसे यह भी ज्ञात नहीं की अगली बार उसकी राखी,
उसी कलाई पर सजेगी या नहीं।
कितनी सौभाग्य शाली होगी वो गलियाँ वो घर,
जिसके कण- कण में उस देशभक्त की स्मृतियाँ रची- बसी है।
और कितने बिरले है इस माटी के लाल,
जिन्होंने अपने सुख चैन का त्याग,
हमारी चैन की नींद के लिए कर दिया।
____________आकांक्षा श्रीवास्तव
Jeetendra
प्यार की तड़प
शहर की भीड़भाड़ वाली उस शाम में, 'द ओल्ड कैफ़े' की खिड़की वाली मेज पर कबीर बैठा था। सामने वाली कुर्सी खाली थी, लेकिन वहां रखी ठंडी हो चुकी कॉफी बता रही थी कि कोई उम्मीद अभी बाकी है। तभी दरवाज़े की घंटी बजी और मीरा अंदर आई। उसके चेहरे पर एक अजीब सा ठहराव था, जैसे तूफ़ान के थमने के बाद की शांति।
"देर हो गई," मीरा ने बैठते हुए कहा। उसकी आवाज़ में कोई माफ़ी नहीं थी, बस एक तथ्य था।
कबीर ने उसे गौर से देखा। "देर अक्सर रास्तों की वजह से नहीं, इरादों की वजह से होती है, मीरा।"
मीरा ने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी आँखें कहीं और थीं। "इरादे तो मौसम की तरह होते हैं, कबीर। बदलते रहते हैं। तुम यहाँ कब से हो?"
"शायद पिछले तीन सालों से। बस आज कुर्सी पर बैठकर इंतज़ार कर रहा हूँ।"
"इतनी लंबी तड़प सेहत के लिए अच्छी नहीं होती," मीरा ने वेटर को इशारा करते हुए कहा।
"तड़प सेहत के लिए नहीं, रूह के लिए होती है। जो सुकून में है, वह ज़िंदा तो है, पर शायद जागृत नहीं।" कबीर के शब्दों में एक धार थी।
"तो तुम जाग रहे हो?"
"मैं उस आग को महसूस कर रहा हूँ जो बुझने से इनकार कर रही है। तुम्हें क्या लगा? तुम शहर छोड़ दोगी, खत लिखना बंद कर दोगी, और सब खत्म हो जाएगा?"
मीरा ने अपनी उंगलियों से मेज पर एक काल्पनिक लकीर खींची। "खत्म तो कुछ भी नहीं होता। बस प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। मेरी ज़िम्मेदारी अब किसी और के प्रति है।"
"ज़िम्मेदारी या समझौता?"
मीरा की आँखों में चमक आई। "क्या दोनों में कोई फर्क है? समाज जिसे समझौता कहता है, उसे निभाने वाला इंसान उसे अपनी जीत समझता है।"
"यह तुम्हारी दार्शनिक बातें मुझे बहला नहीं पाएंगी। तुम्हारी आँखों के नीचे जो काले घेरे हैं, वे रातों की नींद की नहीं, उस तड़प की गवाही दे रहे हैं जिसे तुम दबाने की कोशिश कर रही हो।"
"तुम बहुत ज़्यादा पढ़ लेते हो, कबीर। कभी-कभी पन्ने सादे रहने देने चाहिए।"
"सादे पन्ने ही सबसे ज्यादा शोर करते हैं, मीरा। बताओ, क्या वह तुम्हें वैसे देखता है जैसे मैं देखता था?"
मीरा चुप रही। कैफ़े में बज रहा हल्का संगीत अचानक भारी लगने लगा।
"वह मुझे 'देखता' है, कबीर। उसे मेरी रूह की परवाह नहीं, उसे बस मेरे साथ की ज़रूरत है। और दुनिया में 'साथ' होना ही काफी माना जाता है।"
"तुम्हारे लिए काफी है?"
"मेरे पास विकल्प क्या है?" मीरा की आवाज़ थोड़ी लड़खड़ाई।
कबीर अपनी जगह से थोड़ा आगे झुका। "विकल्प हमेशा होता है। बस हिम्मत की कमी होती है। तड़प का मतलब यह नहीं कि हम दूर हैं, तड़प का मतलब यह है कि हम पास होकर भी वो नहीं कह पा रहे जो दिल में है।"
"कहने से क्या बदल जाएगा? दीवारें नहीं गिरेंगी।"
"कम से कम हवा तो अंदर आएगी।"
तभी मीरा के फोन की घंटी बजी। उसने स्क्रीन देखी—'घर'। उसने फोन काट दिया।
"तुम्हारी चुप्पी का अर्थ गहरा है," कबीर ने तंज किया। "तुम भाग रही हो, लेकिन पैर वहीं जमे हुए हैं।"
"कबीर, प्रेम कोई कविता नहीं है जिसे जब चाहे सुधार लिया जाए। यह एक कड़वा सच है जिसे निगलना पड़ता है।"
"मैंने तो इसे अमृत समझा था।"
"तभी तो आज तुम्हारी प्यास इतनी गहरी है," मीरा ने खड़े होते हुए कहा। "तुम्हें प्यास से प्यार हो गया है, मुझसे नहीं।"
कबीर भी खड़ा हो गया। "प्यास ही तो अस्तित्व का प्रमाण है। जिस दिन तड़प खत्म हो जाएगी, उस दिन कबीर भी मर जाएगा।"
"तो फिर जलते रहो। शायद इसी में तुम्हारी मुक्ति है।"
मीरा मुड़ी और दरवाज़े की तरफ बढ़ गई। कबीर वहीं खड़ा रहा। उसने मीरा को हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उसे पता था कि शरीर को रोकने से रूह की तड़प और बढ़ जाती है।
दरवाज़ा बंद हुआ। बाहर बारिश शुरू हो गई थी। कबीर ने खिड़की के बाहर देखा। मीरा छाता खोल चुकी थी, लेकिन उसका एक कंधा बारिश में भीग रहा था—बिल्कुल वैसे ही जैसे उसकी ज़िंदगी का एक हिस्सा हमेशा अधूरा रहने वाला था।
कबीर ने वेटर को बुलाया। "एक और कॉफी। इस बार थोड़ी और कड़वी।"
वेटर ने हैरान होकर पूछा, "अकेले के लिए सर?"
कबीर मुस्कुराया, "नहीं, इस तड़प के साथ पीने के लिए। यह आज रात मेरे साथ ही ठहरेगी।"
बाहर की सड़कें अब पानी से लबालब थीं, लेकिन कबीर के अंदर की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही थी। तड़प का अंत मिलन नहीं, बल्कि उस दर्द को गले लगा लेना था जो अब उसकी पहचान बन चुका था।
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
🦋... SuNo ┤_★__
{{ प्रेम एक इबादत }}
मोह के कच्चे धागों से, जब रूह
ये आजाद होती है,
तभी तो सच्चे प्रेम की, असल में
बुनियाद होती है,
ये महज़ जज़्बात नहीं, ये तो एक
पावन पूजा है,
इस इबादत के सिवा, न कोई
मज़हब दूजा है,
इस प्रेम में तड़प तो हो, पर पाने
की कोई ज़िद न हो,
जहाँ बंदिशें न हों कोई, और न
ही कोई हद हो,
ये वो दरिया है जिसका, कोई
किनारा नहीं होता,
प्रेम में डूबा हुआ शख्स, कभी
बेचारा नहीं होता,
न ये ‘Gender, को देखे, न ये
अपना-पराया जाने,
ये तो बस रूह की भाषा, और
निस्वार्थ होना पहचाने,
कभी ये दोस्त की हँसी में, सुकून
बनकर झलकता है,
तो कभी ये माँ की ममता में अटूट
बनकर बहता है,
पिता के उस भरोसे में भी, ये प्रेम
ही तो शामिल है,
भाई-बहन के रिश्तों की ये प्रेम ही
तो मंज़िल है,
बड़ा ही खूबसूरत सा, ये रूहानी
एहसास है,
बिना स्वार्थ के जो किया जाए
वही सबसे खास है…❤️
🌹 राधे राधे 🌹
#Ꮆᴏᴏᴅ_𝕄𝗼𝗥𝗻𝕚𝗡𝕘♦
╭─❀💔༻
╨──────────━❥
♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦
➛#motivatforself😊°☜
╨──────────━❥
archana
मुझे समझ नहीं आता…
हर बार बदनाम सिर्फ बहू ही क्यों होती है?
अगर बहू जवाब दे दे,
तो कहा जाता है – बदतमीज़ है, ज़ुबान चलाती है,
सेवा नहीं करती।
लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि
एक अकेली लड़की
पूरे ससुराल को कैसे परेशान कर सकती है?
वो तो पढ़-लिख कर,
अपना घर छोड़कर,
सिर्फ एक नया घर बसाने आती है…
किसी को तोड़ने नहीं।
क्या वो अकेली इतनी ताक़तवर होती है
कि सबको बिगाड़ दे?
या फिर सच ये है कि
जब हद से ज़्यादा दबाया जाता है,
तो खामोशी टूट जाती है…
और उसी टूटन को
“बदतमीज़ी” का नाम दे दिया जाता है।
- archana
Jeetendra
साहूकार का कर्ज
धूल और धूप से सनी दोपहर में विमल का कच्चा आंगन किसी पुरानी अदालत जैसा लग रहा था। लाला जगत नारायण, जिनके कुर्ते की सफेदी उनकी नीयत के बिल्कुल उलट थी, नीम की छांव में बिछी चारपाई पर ऐसे बैठे थे जैसे पूरा गांव उनकी जागीर हो।
"विमल, समय रेत की तरह हाथ से फिसलता है। और ब्याज? वह तो हवा की तरह है, जो दिखती नहीं पर दम घोंट देती है," लाला ने अपनी उंगलियों में फंसी सोने की अंगूठी घुमाते हुए कहा।
विमल ने अपनी फटी हुई कमीज का कोना मरोड़ा। "लाला, फसल इस बार सिर्फ मिट्टी बनकर रह गई। उम्मीद थी कि..."
"उम्मीदें पेट नहीं भरतीं, जवान," लाला ने बीच में ही टोक दिया। "बैंक कागज मांगता है, और मैं? मैं बस भरोसा मांगता हूं। लेकिन भरोसा भी अब कर्ज के नीचे दब गया है।"
विमल की पत्नी, सुजाता, दरवाजे की ओट से सुन रही थी। वह बाहर आई, आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी। "लाला जी, भरोसा तो हमने किया था। उस दिन जब आपने कहा था कि ये पैसे हमारी बेटी की शादी के लिए नहीं, हमारे भविष्य के लिए हैं। क्या कर्ज सिर्फ पैसों का होता है?"
लाला ने एक ठंडी मुस्कान बिखेरी। "बेटी, दुनिया गणित पर चलती है, जज्बात पर नहीं। हिसाब बराबर करना ही धर्म है।"
तभी विमल का छोटा भाई, आर्यन, जो शहर से लौटा था, आंगन में दाखिल हुआ। उसने अपनी जेब से एक मुड़ा हुआ लिफाफा निकाला। "हिसाब ही करना है न लाला? लीजिए, ये आपके मूल और ब्याज की पहली किस्त।"
लाला की भौहें तन गईं। "शहर ने तुम्हें चालाकी सिखा दी है, आर्यन। पर याद रखना, कागजों पर स्याही मेरी है।"
"स्याही आपकी हो सकती है, पर पसीना हमारा है," आर्यन ने तीखे स्वर में कहा। "आप कर्ज देते हैं ताकि इंसान कभी खड़ा न हो सके। आप चाहते हैं कि हम आपकी परछाईं में जिएं।"
विमल घबरा गया। "आर्यन, तमीज से बात कर। लाला ने हमारी मदद की थी।"
"मदद?" आर्यन हंसा, पर उस हंसी में कड़वाहट थी। "भाई, यह मदद नहीं, निवेश था। लाला जानते थे कि बारिश नहीं होगी। वे जानते थे कि आप चुका नहीं पाएंगे, और फिर वे इस जमीन को अपनी हवेली का हिस्सा बना लेंगे। क्या मैं गलत कह रहा हूं, लाला जी?"
आंगन में सन्नाटा पसर गया। लाला जगत नारायण ने अपना चश्मा साफ किया और विमल की ओर देखा। "तुम्हारा भाई बहुत बोलता है, विमल। पर क्या यह जानता है कि जिस लिफाफे को यह 'आजादी' समझ रहा है, वह सिर्फ एक नई जंजीर की शुरुआत है?"
सुजाता ने हस्तक्षेप किया, "कैसे?"
"क्योंकि," लाला उठे और विमल के कंधे पर हाथ रखा, "कर्ज सिर्फ रुपयों का नहीं होता। जो इज्जत मैंने इस गांव में तुम्हें बख्शी, उसका ब्याज कैसे चुकाओगे? लोग कहेंगे कि विमल का भाई चोरी करके लाया या भीख मांगकर। तुम्हारी रीढ़ की हड्डी तो मैंने उसी दिन तोड़ दी थी जब तुमने पहली बार मेरे सामने हाथ फैलाए थे।"
विमल का सिर झुक गया। उसे अहसास हुआ कि लाला सही थे। पैसे चुकाए जा सकते थे, पर वह अहसान? वह नजरें जो अब कभी लाला से नहीं मिल पाएंगी?
"मैं पैसे वापस ले जाऊंगा," लाला ने लिफाफे को छुए बिना कहा। "कल आना। कागजात तैयार मिलेंगे। लेकिन विमल, याद रखना, जब तुम आजाद हो जाओगे, तो तुम सबसे ज्यादा अकेले होगे। क्योंकि गुलाम को कम से कम मालिक का साथ तो मिलता है, आजाद आदमी को खुद का बोझ खुद उठाना पड़ता है।"
लाला अपनी लाठी टेकते हुए बाहर निकल गए। पीछे छोड़ गए एक ऐसा आंगन जहां कर्ज खत्म हो चुका था, पर बोझ पहले से ज्यादा महसूस हो रहा था।
आर्यन ने लिफाफा मेज पर पटक दिया। "भाई, हम अब किसी के कर्जदार नहीं हैं।"
विमल ने अपनी खाली हथेलियों को देखा और धीमी आवाज में बोला, "पैसे दे दिए आर्यन, पर क्या हम वाकई आजाद हुए? या अब हम उस खालीपन के कर्जदार हो गए जो लाला ने हमारे अंदर छोड़ दिया है?"
धूप ढल रही थी, और उस घर की दीवारों पर परछाइयां लंबी होती जा रही थीं—बिल्कुल उस कर्ज की तरह, जो कागज पर तो मिट गया था, पर रूह पर अपनी लिखावट छोड़ गया
Deepak Bundela Arymoulik
*मोहब्बत से बेहतर क्यों हो जाती है शराब*
मोहब्बत ने वादे दिए थे उम्र भर के,
शराब ने बस एक रात का सहारा दिया।
वो हर सवाल पर ख़ामोश रही,
इसने हर दर्द को बोलने का हौसला दिया।
मोहब्बत ने हमें खुद से दूर किया,
कभी शक में, कभी उम्मीद में उलझाया।
शराब ने आईना थमाया हाथों में,
कहा— टूटे हो, तो हो… कम से कम झूठ नहीं बनाया।
मोहब्बत में हर आंसू का हिसाब था,
किस दिन रोए, किस बात पर।
शराब ने बस इतना कहा—
रो लो आज, कल की फ़िक्र छोड़ कर।
मोहब्बत ने सिखाया इंतज़ार करना,
बिन आवाज़ के तड़पना।
शराब ने सिखाया भूल जाना,
कम से कम रात भर चैन से सो जाना।
वो बदलती रही हालात के साथ,
इसका मिज़ाज कभी बदला नहीं।
मोहब्बत ने हर बार छोड़ा बीच रास्ते,
शराब ने कभी साथ छोड़ा नहीं।
इसलिए लोग कहते हैं—
मोहब्बत से बेहतर हो जाती है शराब,
क्योंकि मोहब्बत ज़ख़्म देती है उम्र भर का,
और शराब… बस थोड़ी देर का जवाब।
आर्यमौलिक
Raa
Ajadi kese mili ye mat jano
Gulami kese huvi ye jano
Jati vad ko khatam karo
વિનોદ. મો. સોલંકી .વ્યોમ.
" ઊડી ગયું પંખી ટહુકીને "
જનારાં તો ચાલ્યાં ગયાં અમને એકલાં મૂકીને.
ને અમે ભોગવ્યો એકાંતવાસ એમનું નામ ઘૂંટીને.
સતત મહેસૂસ થયા કરે ટેરવે, સ્પંદન સ્પર્શનાં!
અનિમેષ નજરે દેખું છું, બસ એ જ અંગુઠીને.
એકલતા શું છે? એ, એ ડાળને જઈને પૂછો!
ઊડી ગયું છે પંખી જ્યાંથી, હમણાં ટહુકીને.
પ્રેમ, પ્યાર, વ્હાલનો મતલબ એ શું જાણશે?
જે, કરે છે દોસ્તી તો પણ કરે છે પૂછી પૂછીને.
કાંગરાય ખરવા લાગ્યા આજ એ કિલ્લાના,
ઉભો 'તો તવારીખે ક્યારેક જે ગગનચુંબીને.
જખમો પ્રણયનાં રૂઝાતાં નથી હવે તો કોઈ,
સ્મિત પણ લઈ ગયાં છે જતાં જતાં લૂંટીને.
ડામ પ્રણયનાં કંઈક એવા લાગ્યા છે "વ્યોમ"
કે લાગણી પણ દર્શાવાય છે હવે ફૂંકી ફૂંકીને.
✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર
Sakshi Sunil Rane
अधूरा... एक अधूरा सपना, एक अधूरी कहानी,
जिसे मैं कभी पा नहीं पाई, वो मेरी जिंदगी की बानी।
मैं उसे बहुत चाहती थी, पर वो कभी मेरा नहीं हुआ,
हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने थे, लेकिन किस्मत ने हमें मिलाया नहीं।
मेरे मन भी कुछ नहीं माँगा, और वो मुझे नहीं मिला,
एक अधूरा पल जिसे मैं हमेशा याद रखूँगी,
इसे पूरा करने का ख्याल कभी मेरे मन में नहीं आया,
पता नहीं मेरे दिल ने क्या सुना और वो मुझे नहीं मिला।
एक अधूरा सपना, एक अधूरी कहानी,
जिसे मैं कभी भूल नहीं पाऊँगी, वो मेरी जिंदगी की बानी। ….
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
देश-काल को देखकर, कुशल बढ़ाते पाँव। अवसर अनुचित यदि हुआ, निष्फल होते पाँव।।
दोहा--३९२
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
અનિકેત ટાંક
🔥 નવી ગુજરાતી થ્રિલર હવે બહાર છે! 🔥
📘 ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલ
સત્તા અહીં સ્વપ્ન નથી…
એ છે એક ખતરનાક જાળ,
જ્યાં પ્રવેશ સહેલો છે
પણ બહાર નીકળવું અશક્ય!
બીઝનેસના અંધારા ખૂણાઓ,
છુપાયેલા સોદા, વિશ્વાસ પાછળ છુપાયેલો દગો અને એક પછી એક ચોંકાવનારા વળાંકો… દરેક પાત્ર પોતાની ચાલ ચાલે છે,
દરેક શબ્દ પાછળ છે કોઈ રહસ્ય, અને એક નાની ભૂલ બદલી શકે છે આખું સામ્રાજ્ય!
આ કથા તમને માત્ર વાંચવા નહીં દે…
તમને વિચારવા મજબૂર કરશે—
સત્તા માટે માણસ ક્યાં સુધી જઈ શકે?
👉 આજે જ વાંચો ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલ
તમારો રિવ્યૂ અને પ્રતિભાવ જરૂર આપશો 🙏
કારણ કે…
આ માત્ર કથા નથી,
આ છે સત્તાનો સાચો ખેલ! 🔥
નવલકથા વાંચવા માટે નીચેની લીંક પર ક્લિક કરો :
https://www.matrubharti.com/novels/60696/chakravyuh-by-n-a
S A Y R I K I N G
If someone comes to you seeking love, give them love; don't start trying to teach them about love
Parmar Mayur
यदि किसी की जिंदगी से 'दूर जाना' पड़े तो 'अफसोस' होना चाहिए,
हमसे ज्यादा उन्हें।
- Parmar Mayur
S A Y R I K I N G
नाम नही लेना चाहता मेरे दोस्त लेकिन
गद्दारों की महफिल में हंसी की आवाज तेरी भी थी..!!
@_.Sayriking
Anghad
મારી લાગણી સભર વાર્તા "લાગણીનો સેતુ" ને પસંદ કરવા માટે દિલ થી આભાર
https://www.matrubharti.com/novels/60369/bridge-of-emotions-by-n-a
S A Y R I K I N G
दौड़ती हुई ज़िन्दगी में
ठहराव ढूँढते हैं,
जब हमारा मन न लगे तो हम चाय ढूँढते हैं.
☕☕☕☕☕☕🤗🤗🤗
Ganesh Kumar
जो हमारे साथ अच्छा करते हैं,
उनका शुक्रिया।
जो हमारे साथ अच्छा नहीं कर रहे हैं, उनका?
उनका भी शुक्रिया करना है।
उनका शुक्रिया हम इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके हमारे जीवन में आने की वजह से हमारा अहंकार घटता है, आत्मा की शक्ति बढ़ती है।
हम उनकी वजह से झुकते हैं,
झुकते हैं और झुकते हैं।
वो झुकें या नहीं झुकें,
उनकी वजह से हमारी शक्ति बहुत बढ़ जाती है।
उनकी वजह से हमारे अंदर क्षमा करने की ताकत आती जाती है। उनकी वजह से हमारे अंदर दूसरों के व्यवहार में भी स्टेबल रहने की ताकत आती जाती है।
उनका तो सबसे ज्यादा शुक्रिया करना चाहिए।
सबसे ज्यादा शुक्रिया करना चाहिए। थैंक यू, थैंक यू।
आप करते जाओ,
मैं राइट करते जाओ तो मेरी ताकत क्या होती जाएगी?
बढ़ती जाएगी।
अगर हमारे सब महिमा ही करते रह गए,
तो तो पता ही नहीं चलेगा,
किसी दिन अहंकार ही न बढ़ जाए।
Rinal Patel
કોઈના કાળજાનો કટકો બની શકો તો બનજો.
પણ કોઈના કાળજાના કટકા કરવાના કારણ ન બનતા.
Rinall..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
मंजुनाथ
परेशानियों में सारा काफ़िला लगता हैं l
मंजुनाथ ने निकाला मुब्तिला लगता हैं ll
हर कहीं अफरा-तफरी फेली हुई है कि l
सारे शहर में उठा ज़लज़ला लगता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
મનોજ નાવડીયા
બેઠો છું, કારણ ના પૂછો,
મૌન છું, ભારણ ના પૂછો,
મૌહ નથી, ત્યાગ ના પૂછો,
કાચો છું, તારણ ના પૂછો,
વાક નથી, સત્ય ના પૂછો,
સાદો છું, પ્રમાણ ના પૂછો,
સ્મિત નથી, વાત ના પૂછો,
ઉભો છું, ખબર ના પૂછો,
બોલું છું, અર્થ ના પૂછો,
શબ્દો છું, ઉંડાણ ના પૂછો.
મનોજ નાવડીયા
Parag gandhi
• *શબ્દો જ સંબંધો શણગારે*
• *શબ્દો જ સંબંધો સળગાવે*
kajal jha
यादों की बारिश में भीगता हूँ अकेला,
तेरी कमी ने दिल को चुपके से तोड़ा।
रातें कटती हैं आंसुओं की नदी में,
काश तू लौट आए, ये ज़ख्म भर जाए।
- kajal jha
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
kattupaya s
Good morning friends.. it's another cloudy day. stay chill
Dinesh
🙏*જય બાબા સ્વામી*🙏
*આજનો સુવિચાર*
જીવનમાં આવતી સમસ્યા એક સંકેત છે કે તમે મજબૂત છો.
*શુભ સવાર*
ek archana arpan tane
સપના નો એક છોડ રોપ્યો હતો પણ ના જાણે એ કેમ સુકાઈ ગયો એની ગેરહાજરી બહુ જ સાલે છે.
- ek archana arpan tane
Raven hart
#kannada #poem #kavite #mywords
Abantika
"प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम"🩷 पढ़िए "सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए क्या प्यार की बलि देना ज़रूरी है?" पर समय का पहिया घूमता है और हिसाब बराबर करने के लिए वापस आता है।
Abantika
पढ़िए मेरी नयी रचना
मायाजाल 🖤
(The Professional Brides)
"मीठी बातों का ज़हर और लालच का फंदा—यही है इन शातिर दुल्हनों का गंदा धंधा।" 🐍
Ravi Bhanushali
subscribe kare matru bharti youtube channal ko lakho me views subscriber de aur orignal content ko protsahan de vulgarity bhare content me views aa sakte he to fir fresh aur achhe content par views kyu nai . is liye please subscriber kare youtube par matru bharti youtube channal ko aur bel icon ko jarur dabaiye
MOU DUTTA
জীবন কোনো রূপকথা নয়
তবু মনে হয় তুমি থাকলে রূপকথার চেয়েও বেশি সুন্দর হতো।
জীবন কোনো পরিপূর্ণ নয়
কিন্তু তুমি থাকলে শূন্যস্থান টা পরিপূর্ণ হয়ে যেত।
জীবন কোনো অনাকাঙ্খিত ঘটনা নয়,তবু যদি তোমায় পেতাম ঘটনা গুলো সুন্দর স্মৃতি ভেবে বুকে জড়িয়ে ধরে রাখতাম।
যদি তুমি আমার হতে দুটো চাঁদ পেয়ে আমার জীবন আলোয় আলোকিত হয়ে যেতো।
যদি তুমি আমার হতে একটা হাত হৃদয়ের মাঝে স্থায়ী ভাবে আগলে রাখতাম।
যদি তুমি আমার হতে আমার কষ্টের দিনে তোমার কাঁধে মাথা রেখে মুছে ফেলতাম সকল রাগ অভিমান।
সত্যি তুমি যদি আমার হয়ে গোধূলি লগ্ন গুলো আরো বেশি সুন্দর হতো।
আর যদি তুমি আমার হতে বুকের মাঝে একটা মাথা হয়তো শান্ত ভাবে তার ক্লান্ত চোখে ঘুম আর মাথায় ভালোবাসার পরশ নিয়ে জীবন টা অবলীলায় কেটে যেতো।যদি সত্যি তুমি আমারই হতে তো।❤️🩹
মৌ 🖋️
bhagwat singh naruka
लाख कोशिश करके देख लिया तुमने,
लेकिन हम गिरे नहीं।
आँधियाँ बहुत आईं हमारी राह में,
मगर हमारे इरादे
कभी झुके नहीं।
ताने, साज़िशें, और चालें भी कम न थीं,
फिर भी अपने वजूद से
हम डिगे नहीं।
आज खामोश हैं तो इसे कमज़ोरी मत समझना,
वक़्त आने पर साबित करेंगे —
हम टूट सकते हैं,
पर कभी गिरे नहीं।
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
कसूर तुम्हारा नहीं, ये तो वक़्त का ही खेल था,
शिकायत तुमसे नहीं,
अपने आप से है जो सच समझने में देर हो गई।
तुम वही थे जो पहले दिन थे,
बस मेरी नज़र को पहचानने में
थोड़ी देर हो गई।
मैं हालात को दोष देता रहा उम्र भर,
और भूल गया कि
कई बार गलतियाँ
ख़ामोशी से खुद से भी हो जाती हैं।
आज समझ आया है सब कुछ,
पर अफ़सोस यही है कि
समझ आने तक
कई अपने दूर हो गए।
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
बदन मेरा मिट्टी का, साँस मेरी उधर है,
जहाँ जीवन थमता है
और मृत्यु का अर्थ उभरता है।
मृत्यु अंत नहीं, एक ठहराव है बस,
जहाँ थकी हुई आत्मा
अपने बोझ उतारती है।
जीवन ने जो सवाल दिए,
मृत्यु उन पर विराम लगाती है,
ना जीत, ना हार —
बस एक पूर्णता सिखाती है।
आज जी रहा हूँ तो सीखने के लिए,
कल जाऊँगा तो
मिट्टी में मिलकर
फिर से सृजन बन जाने के लिए।
क्योंकि
जीवन यात्रा है,
और मृत्यु घर वापसी।
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
मृत्यु घर वापसी है,
जहाँ कोई सवाल नहीं, कोई बोझ नहीं।
जहाँ नाम, पहचान, हार–जीत
सब यहीं छूट जाते हैं।
वहाँ न कोई शिकायत रहती है,
न किसी से कोई गिला,
बस एक गहरी ख़ामोशी होती है
जो हर थकान को सुला देती है।
जीवन में जो अधूरा रह गया,
मृत्यु उसे पूरा नहीं करती,
बस स्वीकार करना सिखा देती है
कि सब कुछ यहीं समाप्त नहीं होता।
मिट्टी से आए थे,
मिट्टी में मिल जाएँगे,
पर इस बीच जो प्रेम,
जो करुणा, जो स्मृति छोड़ जाएँ—
वही हमारी सच्ची साँस बनकर
ज़िंदा रह जाती है।
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
अपने दिमाग़ से ये फ़ितूर निकाल देना,
तुम साथ ना दो तो
हम कदम उठा ना सकेंगे —
ये वहम निकाल देना।
हमने रास्ते खुद बनाए हैं
तन्हाइयों के जंगल में,
किसी के सहारे चलना
हमारी आदत नहीं।
तुम साथ थे तो अच्छा था,
नहीं हो तो भी चल लेंगे,
हौसला उधार नहीं लिया जाता
ये बात समझ लेना।
हम रुकते नहीं किसी के इंतज़ार में,
बस रिश्तों को ज़बरदस्ती
घसीटना छोड़ देना।
writer bhagwat singhnaruka
bhagwat singh naruka
बहुत सजाया-सँवारा करता था इस बदन को,
कपड़े, ख़ुशबू, आईना — सब अपना लगता था।
जब ये राख हुआ तो समझ आया,
कि जो अपना समझते थे,
वो सब यहीं रह गया।
ना साथ गया हुस्न, ना नाम की पहचान,
मिट्टी ने बस मिट्टी को अपनाया
और हर गुमान यहीं रह गया।
ज़िंदगी भर जिस देह को
सब कुछ समझते रहे,
अंत में वही देह
एक मुट्ठी राख बनकर
इस संसार में ही रह गया।
यही सच है —
हम नहीं रहते,
बस हमारे निशान
कुछ देर तक
यहीं रह जाते हैं।
writer bhagwatSinghnaruka
Prajapati Pintu
Badu hu tamne bav j love karu chhu તમે મારા જીવ છો દુનિયામાં તમારા સિવાય બીજું કોઈ નથી ભગવાન થી પણ વધારે તમે ચાહુંછું અને પ્રેમ પણ એટલો જ કરું છું આવર્ષે મેં જેટલી પણ ભૂલ કરી હોય અને આજ ની ભૂલ પણ આવી ગઈ હું તમને બેસ્ટ ગિફ્ટ એ આપીશ કે તમને દુઃખ લાગે એવું કોઈજ કામ હું નહી કરું હું Badu really sorry and love 💕 you so much... Misss you tamne bavj yaad karu chhu
Badu hu tamne bav j love karu chhu તમે મારા જીવ છો દુનિયામાં તમારા સિવાય બીજું કોઈ નથી ભગવાન થી પણ વધારે તમે ચાહુંછું અને પ્રેમ પણ એટલો જ કરું છું આવર્ષે મેં જેટલી પણ ભૂલ કરી હોય અને આજ ની ભૂલ પણ આવી ગઈ હું તમને બેસ્ટ ગિફ્ટ એ આપીશ કે તમને દુઃખ લાગે એવું કોઈજ કામ હું નહી કરું હું Badu really sorry and love 💕 you so much... Misss you tamne bavj yaad karu chhu
- Prajapati Pintu
bhagwat singh naruka
आज तेरा मेरे ख़्वाबों में फिर से आना हुआ,
ना सोचा था, ना चाहा था,
फिर भी तेरा सामना हुआ।
क्यों आती हो तब,
जब याद भी नहीं करता,
जब दिल ने ज़िद छोड़ दी हो
और ज़ख़्मों ने सोना सीखा हो।
दिन में तो संभाल लेता हूँ खुद को किसी तरह,
पर रात की ख़ामोशी में
तुम्हारा यूँ लौट आना
हर सब्र को तोड़ जाता है।
अगर जाना ही था तो
ख़्वाबों तक क्यों चली आती हो,
या फिर बता दो —
क्या सच में कोई रिश्ता
कभी पूरी तरह ख़त्म हो पाता है?
writer bhagwatSingh naruka
kattupaya s
https://youtube.com/shorts/OoBx62s8h6E?si=foAmLaZx7vZ_dhdj
kattupaya s
https://youtube.com/shorts/UjGPHS4XgFA?si=J9z8kDNPzBNlZ3_q
kattupaya s
https://youtube.com/shorts/ItfO1G-2b68?si=krzj7PVGp8k-A9BN
Prateek
https://www.matrubharti.com/book/19987331/mafia-king-ani-niragas-ti-2
kattupaya s
ok guys today iam little bit emotional. see u later.. goodnight once again
kattupaya s
whatever iam writing is based on my personal experience . it doesn't indicate any individual or group of people. don't get offended..
S A Y R I K I N G
मेरे इश्क़ के आगे मेरे घर के मसले पड़े हैं
कोई साथ नहीं देता मेरे मसले बहुत बड़े हैं..!!
Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status