Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Imaran
मुझे कबूल है हर दर्द, हर तकलीफ तेरी चाहत में..
सिर्फ इतना बता दो, क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत कबूल है
🫶imran 🫶
Ajit
બેરહેમ થયા છો કે કસોટી લઈ રહ્યા છો પ્રભુ.....?
એક જ વ્યક્તિ હતું મનગમતું એ પણ લઈ લીધું.....!
જિંદગી ની "યાદ"
ASHISH KUMAR
पौरों के लिए एक रूहानी और खूबसूरत शायरी:
"नज़रों से दूर सही, पर दिल के करीब तो हो,
मेरे खुदा से मांगी हुई सबसे प्यारी नसीब तो हो।
धड़कनों को भी अब तुम्हारी ही आदत सी है,
मेरे हर लफ्ज़ में छुपा हुआ छोटा सा राज़ तो हो।"
ASHISH KUMAR
"अधूरा सा एहसास"
तुम मिले तो जैसे हर दुआ मुकम्मल हो गई,
वीरान सी इस ज़िंदगी में खुशियों की हलचल हो गई।
न जाने क्या जादू है तुम्हारी इन खामोश नज़रों में,
कि तुम्हें देखते ही मेरी हर मुश्किल सरल हो गई।
कभी सुबह की पहली किरण सा ताज़ा है तुम्हारा एहसास,
कभी रात की चांदनी सा सुकून भरा तुम्हारा साथ।
ज़िक्र तुम्हारा ही होता है मेरी हर एक बात में,
जैसे तुम ही बसे हो मेरी धड़कन और मेरी हर सांस में।
मोहब्बत में बस इतनी सी ख्वाहिश है मेरी,
कि हर जन्म में मुझे ये पनाह मिले तुम्हारी।
दुनिया की इस भीड़ में मुझे और कुछ न चाहिए,
बस उम्र भर के लिए मुझे ये बाहें मिले तुम्हारी।
Siboniso BoyBoy Dlamini
WHY AREN'T YOU FOLLOWING ME GUYZ❗❗❗❗
Siboniso BoyBoy Dlamini
what do you guys think? is it necessary for part 2 or its good as it is?
I need your opinions ❗❗❗❗
Avinash
हेलो दोस्तो,
मेरी फर्स्ट किताब " अधूरी धुन - भाग २" पब्लिश हो गया है।
आप आपका मूल्यवान समय निकालके जरूर पढ़ें और कमेंट करे आपके रिव्यू।
धन्यवाद 💫
Bhatt Bhavin
કંઇક ચાહત આવી પણ..... ગઝલ / ભટ્ટસાહેબ
રાતની રાતો કરી છે, એમને જોવા અમે,
એમને ક્યાં ભાન છે ક્યાં, બેઠા છી રોવા અમે.
ગમતું એ એકાદ ઘર પણ, સાચવી ના શક્યા એ,
પાપની આંધી લઈને, પાપ ગ્યાં ધોવા અમે.
જે દિવાલો પર ચિત્રોને, કોતર્યા 'તા એ હવે,
ભૂસવા માટે કલરના, ડબ્બા ગ્યાં લેવા અમે.
એ બધી કોલેજની વાતો, અમે ભૂલ્યા હતા,
ને લગનના દાડે બેઠા, ઝેરને પીવા અમે.
જે ચહેરાને અમે, જોયો નથી કોઈ દિવસ,
એ હવે સાહેબ માટે, શોધવા આયા અમે.
Prita
When You Call
You build your words like castles in the sky,
Promises shining, but fading, they lie.
You leave me stranded, half-way through,
Like my heart’s a thing you can undo.
I stay, because love still pulls me near,
Even as cracks form, even as I fear.
But one day, the breaking will reach its end,
And I won’t be there for you to mend.
When you call my name, you’ll hear only air,
No soft reply, no “I’ll be there.”
And maybe then you’ll start to see,
What your promises have cost of me.
बिट्टू श्री दार्शनिक
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#book
Ajit
એક તરફ વિશ્વાસ આપો છો ને પારેવાની પાંખો કાપો છો તમે....
સ્નેહ રૂપી ભ્રમમાં નાખીને અડધી રાતે કેમ રડાવો છો તમે......
જિંદગી ની "યાદ"
ASHISH KUMAR
श्रीकृष्ण के अनुसार 'श्रेष्ठ व्यक्ति' कौन है?
श्रीकृष्ण कहते हैं कि वही व्यक्ति श्रेष्ठ है जो:
• सुख और दुःख में एक समान रहता है।
• जिसमें धैर्य (Patience) और क्षमा करने की शक्ति
है।
• जो दूसरों की सफलता से जलता नहीं, बल्कि सबके
कल्याण की कामना करता है।
ASHISH KUMAR
5. वर्तमान में जीना (Living in the Present)
श्रीकृष्ण का एक बहुत ही सुंदर विचार है:
"जो हुआ, वह अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।"
• हमें अतीत (Past) का पछतावा और भविष्य
(Future) की चिंता छोड़कर आज के समय का सही
उपयोग करना चाहिए।
ASHISH KUMAR
4. क्रोध और मोह का त्याग (Relinquishing Anger and Attachment)
• क्रोध: गुस्से में मनुष्य की बुद्धि काम करना बंद कर
देती है, जिससे वह गलत निर्णय लेता है।
• मोह: किसी भी वस्तु या व्यक्ति से बहुत ज्यादा जुड़ाव
दुःख का कारण बनता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि संसार
में 'खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है',
इसलिए मोह का त्याग कर वर्तमान में जिएं।
ASHISH KUMAR
3. आत्मा की अमरता (Immortality of Soul)
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मोह से निकालने के लिए कहा कि मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा की नहीं।
• "नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।" (आत्मा
को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है।)
• यह सीख हमें सिखाती है कि जीवन में होने वाले
नुकसान या अपनों के खोने पर अत्यधिक शोक नहीं
करना चाहिए, क्योंकि जीवन का सार शाश्वत
(eternal) है।
ASHISH KUMAR
2. मन का नियंत्रण (Control over Mind)
मनुष्य का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र है और सबसे बड़ा शत्रु भी।
• जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, उसके
लिए मन एक मार्गदर्शक बन जाता है।
• जो मन के गुलाम बन जाते हैं, वे अपनी ही इच्छाओं
और क्रोध के जाल में फंसकर अपना नुकसान कर लेते
हैं।
ASHISH KUMAR
1. कर्म की प्रधानता (Importance of Karma)
श्रीकृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करना चाहिए।
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"
• अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। जब हम फल की चिंता छोड़ देते हैं, तब हमारा पूरा ध्यान काम की गुणवत्ता पर होता है और हम तनावमुक्त रहते हैं।
Chaitanya Joshi
જરૂરત છે બુદ્ધની હવે ,ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
જરૂરત છે શુદ્ધ ની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
માનવ માનવથી સેતુ બાંધવો ઘટે એકમેકથકી,
જરૂરત છે પ્રબુદ્ધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
માનવ છીએ યાદ કરો "જીવો અને જીવવા દો"
જરૂરત છે અવધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે
વિદારી વેર વૈમનસ્યને સાથ સહકારની સૌના,
જરૂરત છે સંબંધની હવે,ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે.
લંબાય હાથ પરસ્પર એકમેકના મૈત્રી ભાવથી ,
જરૂરત છે પ્રબંધની હવે, ના કરવું ઘટે યુદ્ધ હવે
- ચૈતન્ય જોષી. "દિપક"પોરબંદર.
Falguni Dost
Mahadev har 🙏🏻😊🙏🏻
Narendra Parmar
पागलों से बहस करना यानी कि
पत्थर पर खुदका सर फोड़ने के बराबर है !
पत्थर को तो कूंच नहीं होगा किंतु
ख़ून हमारा निकलेगा,दर्द हमें होगा इसलिए ऐसे
लोगों से हमेशा दूर रहिए ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
ધબકાર...
સર્જન હૃદયનું થયું ધબકાર સાથે,
ઈચ્છે ધબકાર તો હ્રદય શૂન્ય આજે.
સમયનું વહેણ વિરુદ્ધ, અનાયાસે,
અનંત એકાંત ના પ્રવાસે હું આજે.
ધબકાર...
Siboniso BoyBoy Dlamini
In the quiet mountain town of Piggs Peak, desperation pushes one young man to the edge.
At just twenty-six years old, Thabo Sacolo carries the heavy responsibility of raising his two younger siblings after the loss of their parents. With no job, a leaking roof over their heads, and school fees piling up, hope begins to fade.
But one night, standing outside the local First National Bank, Thabo makes a dangerous decision.
If life will not give him an opportunity…
He will take one.
Gathering a team of skilled men — a brilliant hacker, a fearless driver, an inside man, and a master locksmith — Thabo carefully plans what will become the most daring bank robbery Piggs Peak has ever seen.
Every detail must be perfect.
But when unexpected guards appear, security systems threaten to trap them, and a high-speed police chase erupts through the dark mountain roads, the team realizes that one mistake could destroy everything.
Will the plan succeed and change their lives forever?
Or will the heist that promised freedom lead them straight to prison?
The Heist of the Decade is a gripping African crime thriller filled with suspense, loyalty, danger, and the harsh choices people make when survival is on the line.
Mrs Farida Desar foram
वो कह्ते हे,
अपना ख्याल रखना,
कहा से रखूँ में खुद का ख्याल,
ख्यालों में तुम ही तुम हो अक्सर....
- Mrs Farida Desar foram
Ruchi Dixit
वो खुद टूटा था! जोड़ने आया था जो ,
हवा समय की चली तो बिखरने लगा पत्तो सा थपेड़े सह न सका वो समय के, तिलमिलाहट में भागता रहा अपनो से ही.....
शिकायत बहुत थी उसे ज़िन्दगी से अपनी
बार-बार मौत की बात करता रहा जीवन देने आया था जो...
समय की शाख पर लड़खड़ा रहा वो , कड़वाहट लेकर..
स्थिरता , प्रेम और जीवन देने आया था जो..
- Ruchi Dixit
Shailesh Joshi
"રૉકેટમાં"
ઉપર સુધી પહોંચવાની સામગ્રી ભરી હોય છે,
પરંતુ એ રૉકેટ
પોતાની ઊંચાઈ પર પહોંચવાની ક્ષમતા
ત્યારે જ બતાવી શકે, કે જ્યારે
એ રૉકેટમાં વાટ લાગેલી હોય,
બાકી તો
એ રૉકેટમાં ભરેલી બધી સામગ્રીની
"વાટ" લાગી જાય. મનુષ્ય જીવનમાં પણ
"આવડત એ રૉકેટ છે, અને તક એ વાટ"
- Shailesh Joshi
Avinash
Have a faith my brother, that car will come, we will buy a house too, mother will smile and father will also be proud.
😇❤️
Mrugzal
જોઈલે સંધ્યા પણ કેવી છે ચમકતી,
ચાલ ને પીયે એક કપ ચાય છલકતી.
- મૃગજળ
#TeaLover
#EmptyHeart
Saliil Upadhyay
पति पत्नि की तू तू मैं मैं
पति रेडियो पर बिजी था।
पत्नी: क्या सुन रहे हो ?
पति: मोदी जी के मन की बात ।
पत्नी: मेरी तो कभी नहीं सुनते।
पति: तुम जो कहती हो उसे मन की बात नहीं, मन की भड़ास कहते हैं।
फिर तो दे धना धन
पर आप हंसते हुए अच्छे लगते हो।🤣
Sonam Brijwasi
https://www.youtube.com/@Sonam_Singh536
please subscribe my YouTube I'd....
Soni shakya
लाख कोशिश कर ले तू मुझे भूल जाने की..
मेरी यादें तेरे दिल का पता जानती है..
🍁🍁
- Soni shakya
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
बहारों से पूछो
हसीं हुस्न को कैसे छुते है बहारों से पूछो जाकर l
नशे सा अह्सास मिलता है छुने का लुत्फ़ पाकर ll
हजारों मोहब्बत के अरमान हासिल हो
गये l
सुषुप्त जिन्दगी में खुशियाँ छा गई रंगत
लाकर ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
Good morning friends.. Have a great day
મનોજ નાવડીયા
સ્મિતનો ઉમળકો ચહેરા પર રાખતો ફરે,
જવબદારીનો ભાર મનમા ફરતો રહે,
કેવો એ પિતાનો અદ્રશ્ય ભાવ ફરે,
ઘરને સુખી રાખવાં પરસેવો પાડતો રહે..
મનોજ નાવડીયા
#father #pitaji #papa #manojnavadiya #manojnavadiyapoetry #manojnavadiyabooks #vishvyatri #vishvkhoj #heetkari #saravichar #maravichar #marivat #goodthinking
Rashmi Dwivedi
मन में उठने वाला हर विचार एक बीज है अगर बीच अच्छा है तो फल भी अच्छे होंगे हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Imaran
इश्क़ वालों को फ़ुर्सत ही कहाँ कि वो ग़म लिखें
अरे क़लम इधर लाओ, बेवफ़ा के लिए हम लिखेंग
✍️imran ✍️
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
प्रगति मित्र की देखकर, बढ़े मित्र में द्वेष। हत्या करके मित्र की, धरें साधु का भेष।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या
"सत्या मनसो मे अस्ति"
ऋगुवेद--१०/१२८/४
भाव--मेरे मन के भाव सच्चे हों।
"सत्या मनसो मे अस्ति"
पदच्छेद--
सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।
शब्दार्थ--
सत्या — सत्य, सच्चे, शुद्ध
मनसः — मन के (मन का)
मे — मेरे
अस्ति — हों / हैं
समष्टि अर्थ (भाव)--
मेरे मन के विचार सत्य और शुद्ध हों। सच्चे हों।
भावार्थ:
मेरे मन में जो संकल्प और भाव उत्पन्न हों, वे सत्य, शुद्ध और धर्मयुक्त हों।
संक्षिप्त व्याख्या:
इस ऋग्वैदिक प्रार्थना में साधक ईश्वर से यह कामना करता है कि उसके मन के विचार असत्य, कपट या दुष्टता से रहित हों। मन ही कर्मों का मूल है, इसलिए जब मन के संकल्प सत्य और पवित्र होते हैं, तब वाणी और कर्म भी सत्य मार्ग पर चलते हैं।
वेदों में यह सिद्धान्त बार-बार आता है कि—
पहले मन शुद्ध और सत्यनिष्ठ हो
फिर उसी से सत्य वाणी और सत्कर्म प्रकट हों।
इस प्रकार यह मंत्र मन की सत्यता, पवित्रता और सद्भावना की प्रार्थना है। वेदों में मन की सत्यता, शुद्ध संकल्प और सत्य विचार के विषय में कई स्थानों पर प्रमाण मिलते हैं।
वैदिक प्रमाण
१-ऋगुवेद--१०/१९१/४
समानो मन्त्रः समिति: समानी
समानं मनः सहचित्तमेषाम्।
भावार्थ:
सबका मंत्र (विचार) समान हो, सबका मन एक और शुभ संकल्प वाला हो।
२- यजुर्वेद --३४/१
तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु।
भावार्थ:
मेरा मन सदैव शुभ और कल्याणकारी संकल्प वाला हो।
३. ऋगुवेद --१/८९/१
आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।
भावार्थ:
हमारे पास सब ओर से कल्याणकारी और शुभ विचार आएँ।
४-अथर्ववेद--१९/९/१४
मंत्र:
शिवो मे मनः।
भावार्थ:
मेरा मन मंगलमय और कल्याणकारी हो।
इन वैदिक मंत्रों से स्पष्ट है कि वेदों में बार-बार मन की शुद्धता, सत्य विचार, और शुभ संकल्प की प्रार्थना की गई है।
यह भाव "सत्या मनसो मे अस्ति" मंत्र के समान है कि मन के विचार सत्य और पवित्र हों।
उपनिषदों में प्रमाण--
१-मुण्डक उपनिषद् -३/१)६
सत्यमेव जयते नानृतम्।
भावार्थ:
सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नही।
२-छान्दोग्य उपनिषद -३/१४/१
यथा क्रतुरस्मिन् लोके पुरुषो भवति तथेतः प्रेत्य भवति।
भावार्थ:
मनुष्य जैसा संकल्प और विचार करता है, वैसा ही वह बन जाता है।
३. अमृतबिन्दु उपनिषद --२
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
४.बृहदारण्यक उपनिषद --४/४/५
स यथा कामो भवति तत्क्रतुर्भवति।
भावार्थ:
मनुष्य जैसा मन में संकल्प करता है, वैसा ही उसका कर्म और जीवन बन जाता है।
५. तैत्तिरीय उपनिषद--१/११/१
सत्यं वद, धर्मं चर।
भावार्थ:
सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो।
६. प्रश्न उपनिषद--१/१५
तेषामेवैष ब्रह्मलोको येषां तपो ब्रह्मचर्यं येषु सत्यं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
जिन लोगों के जीवन में तप, ब्रह्मचर्य और सत्य प्रतिष्ठित होता है, वही ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं।
७. श्वेताश्वतर उपनिषद --२/१४
यदा चित्तं निरुद्धं योगसेवया।
भावार्थ:
जब योग के द्वारा मन (चित्त) को शुद्ध और स्थिर किया जाता है, तब आत्मतत्त्व का ज्ञान होता है।
८. कठ उपनिषद-- १/३/३-४
आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु।
बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च॥
भावार्थ:
शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और मन लगाम है। मन को संयमित रखने से जीवन सही मार्ग पर चलता है।
९. केन उपनिषद --१/५
यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम्।
भावार्थ:
जिससे मन विचार करता है, उस परम तत्व को मन पूरी तरह जान नहीं सकता।
१०. कौषीतकि उपनिषद --३/२
प्राणो वा एष यः मनः।
भावार्थ:
प्राण और मन का गहरा संबंध है; मन ही चेतना का प्रमुख साधन है।
इन उपनिषदों के प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि मन की शुद्धता, सत्य संकल्प और संयम आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव को भी पुष्ट करता है कि मन के भाव सत्य और पवित्र होने चाहिए।
पुराणों में प्रमाण--
१.पद्म पुराण --
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है। यदि मन शुद्ध और सत्य भाव वाला हो तो मुक्ति का मार्ग खुलता है।
२. विष्णु पुराण--६/७/२८
सत्यं शौचं दया क्षान्तिः सर्वेषां धर्मसाधनम्।
भावार्थ:
सत्य, शुद्धता, दया और क्षमा—ये सभी धर्म की साधना के मुख्य साधन हैं।
४. भागवत पुराण-- ११/१९/३६
सत्यं शौचं दया मौनं बुद्धिर्ह्रीः श्रीर्यशः क्षमा।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया, संयम आदि गुणों से मनुष्य का जीवन श्रेष्ठ बनता है।
४--स्कंद पुराण --
न हि सत्यात्परो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
५ गरुड़ पुराण--
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
भावार्थ:
सत्य के आधार पर ही पृथ्वी स्थित है और सत्य के प्रभाव से ही सूर्य तपता है।
६. अग्नि पुराण-
सत्यं धर्मस्य मूलं हि।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
७--ब्रह्म पुराण --
सत्येन धार्यते धर्मः।
भावार्थ:
धर्म की स्थापना सत्य के आधार पर ही होती है।
८- वायु पुराण --
सत्यं परं नास्ति तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं है।
९. नारद पुराण--
सत्यं शौचं दया दानं धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और दान—ये धर्म के मुख्य मार्ग हैं।
१०-मार्कण्डेय पुराण --
न सत्यात्परमो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
इन पुराणों के प्रमाणों से स्पष्ट होता है कि सत्य और शुद्ध मन को धर्म का मुख्य आधार माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव को पुष्ट करता है।
भगवद्गीता में प्रमाण --
1. गीता --१७/१६
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः।
भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते॥
भावार्थ:
मन की प्रसन्नता, सरलता, मौन, आत्मसंयम और भावों की शुद्धि—ये सब मन का तप कहलाते हैं।
२-गीता--६/५
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
भावार्थ:
मनुष्य को अपने मन द्वारा ही अपना उत्थान करना चाहिए; मन ही मनुष्य का मित्र और शत्रु बनता है।
३. गीता-१६/१-२
अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः।
दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम्॥
भावार्थ:
मन की शुद्धता, सत्य, शान्ति और सरलता दिव्य गुण हैं।
४. गीता- १०/४-५
बुद्धिर्ज्ञानमसंमोहः क्षमा सत्यं दमः शमः।
भावार्थ:
सत्य, ज्ञान, संयम आदि श्रेष्ठ गुण भगवान से ही उत्पन्न होते हैं।
इन गीता के श्लोकों से स्पष्ट है कि मन की शुद्धता, सत्य भाव और संयम आध्यात्मिक जीवन के लिए आवश्यक हैं। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
महाभारत मे प्रमाण--
१. शान्ति पर्व १६२/२१
न सत्यात्परमो धर्मो न सत्यात्परं तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर न कोई धर्म है और न ही कोई तप।
२. अनुशासन पर्व -११३/२४
सत्यं हि परमं धर्मं सत्यं हि परमं तपः।
भावार्थ:
सत्य ही सर्वोच्च धर्म है और सत्य ही सर्वोच्च तप है।
३-शान्ति पर्व --१०९/११
मनसा चिन्तितं कर्म वचसा न प्रकाशयेत्।
भावार्थ:
मन के विचारों को शुद्ध और संयमित रखना चाहिए।
४. उद्योग पर्व--३३/६३
(विदुरनीति)
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए, पर अप्रिय सत्य भी नहीं बोलना चाहिए।
५. शान्ति पर्व --३२९/४०
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
भावार्थ:
सत्य के आधार पर पृथ्वी स्थित है और सत्य के प्रभाव से सूर्य तपता है।
इन श्लोकों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सत्य भाव को महाभारत में भी धर्म का मुख्य आधार बताया गया है, जो वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव का समर्थन करता है।
स्मृति-ग्रन्थों में प्रमाण--
१. मनु स्मृति --४/१३८
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
भावार्थ:
सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए; अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए और प्रिय असत्य भी नहीं बोलना चाहिए—यही सनातन धर्म है।
२-याज्ञवल्क्य स्मृति--१/१२२
अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
भावार्थ:
अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रियों का संयम—ये धर्म के मुख्य लक्षण हैं।
३. नारद स्मृति-- १/१५
सत्यं धर्मस्य मूलम्।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
४. पराशर स्मृति-- १/२४
सत्यं शौचं दया दानं धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और दान—ये धर्म के श्रेष्ठ मार्ग हैं।
५- दक्ष स्मृति-२/३
सत्यं हि परमं ब्रह्म।
भावार्थ:
सत्य को ही परम ब्रह्म कहा गया है।
इन स्मृति-ग्रन्थों के प्रमाणों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सच्चे भाव को धर्म का मूल आधार माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
नीति-ग्रन्थों में प्रमाण--
१-चाणक्य नीति-- ३/१३
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वायवो वान्ति सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्॥
भावार्थ:
सत्य से ही पृथ्वी धारण होती है, सत्य से सूर्य तपता है और वायु चलती है; सब कुछ सत्य पर ही स्थित है।
३- विदुर नीति-- ३३/६३ महाभारत, उद्योग पर्व )
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य और प्रिय वचन बोलना चाहिए।
३-शुक्र नीति-२/२०
सत्यं धर्मस्य मूलं हि।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल आधार है।
४-भृतहरि नीति शतक-८४
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् धर्मं ब्रूयात् न चानृतम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य, प्रिय और धर्मयुक्त वचन बोलने चाहिए, असत्य नहीं।
५-सुभाषित रत्न-
न सत्यात्परमो धर्मः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
इन नीति-ग्रन्थों से स्पष्ट होता है कि सत्य और शुद्ध मन को जीवन का मुख्य धर्म और श्रेष्ठ आचरण माना गया है, जो वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के भाव का समर्थन करता है।
हितोपदेश, पंचतंत्र और रामायण में प्रमाण--
१-हितोपदेश-१/२४
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
भावार्थ:
मनुष्य को सत्य और प्रिय वचन ही बोलने चाहिए।
२. पंचतंत्र-१/७८
न सत्यात्परमो धर्मो न सत्यात्परमं तपः।
भावार्थ:
सत्य से बढ़कर न कोई धर्म है और न कोई तप।
३-वाल्मीकि रामायण (अयोध्या काण्ड १०९/३४)
सत्यं हि परमं धर्मं धर्मे सत्यं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
सत्य ही सर्वोच्च धर्म है और धर्म की प्रतिष्ठा सत्य में ही है।
४. वाल्मीकि रामायण (अयोध्या काण्ड २/३१)
रामो द्विर्नाभिभाषते।
भावार्थ:
श्रीराम एक बार जो वचन कहते हैं, उसे कभी बदलते नहीं—अर्थात् वे सत्यव्रती हैं।
५. अध्यात्म रामायण-२/७/१६
सत्यं शौचं दया शान्तिर्धर्मस्य परमा गतिः।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और शान्ति—ये धर्म के श्रेष्ठ लक्षण हैं।
इन ग्रन्थों से स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और सत्य भाव को धर्म और आदर्श जीवन का मूल माना गया है। यह भाव वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” (मेरे मन के भाव सत्य हों) के सिद्धान्त को पुष्ट करता है।
गर्ग संहिता और योग वशिष्ठ में
प्रमाण--
१. गर्ग संहिता --१/३/२०
सत्यं धर्मस्य मूलं हि सत्ये सर्वं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ:
सत्य ही धर्म का मूल है और सब कुछ सत्य पर ही आधारित है।
२. गर्ग संहिता-२/१५/३४
सत्यं शौचं दया शान्तिः साधूनां भूषणं परम्।
भावार्थ:
सत्य, पवित्रता, दया और शान्ति—ये सज्जनों के श्रेष्ठ आभूषण हैं।
३. योग वशिष्ठ-
(निर्वाण प्रकरण २/१८/२३)
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ:
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
४-योग वशिष्ठ --
(उत्पत्ति प्रकरण १/७/८)
चित्तमेव हि संसारः तेन मुक्तं भवेच्चित्तम्।
भावार्थ:
चित्त ही संसार का कारण है; जब चित्त शुद्ध हो जाता है तो मुक्ति प्राप्त होती है।
५. योग वशिष्ठ
(निर्वाण प्रकरण २/१३/१२)
श्लोक:
शुद्धं मनः शान्तिमुपैति नित्यम्।
भावार्थ:
शुद्ध मन सदा शान्ति को प्राप्त करता है।
इन ग्रन्थों से भी स्पष्ट है कि सत्य, शुद्ध मन और पवित्र संकल्प को आध्यात्मिक जीवन का मूल माना गया है। यही सिद्धान्त वैदिक वाक्य “सत्या मनसो मे अस्ति” के भाव का समर्थन करता है।
-------+------+------+------+--
MASHAALLHA KHAN
बस इस तरह से मुस्कुरा दे जरा
फिर एक दफा इतरा दे जरा
होगी कई जाने कितनी हसीं
पर तुझसी कहा कोई अप्सरा .
-MASHAALLHA
ધબકાર...
શું ધબકાર પણ શૂન્ય હશે? હ્રદય વિના!
થયું હું પૂછી લઉં એનેય વિચાર્યા વિના!
ધબકાર...
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
આ હૃદયના ૭/૧૨માં કબજેદાર સદરે તારૂં નામ ચાલી આવેલ છે,
ને એમાં કોઈ જ અન્ય ફેરફાર નોંધ નહીં પડે.
- સ્પંદન
Asmita Madhesiya
याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज,
जो अब बन गया है कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
हां कुछ खास नहीं,
याद आया ,
रक्खा क्या है उस पल में,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
क्या कभी कोई सुखी रह पाया है,
बीते हुए कल में,
अरे जीना है,
अरे जीना है,
तो जीओ हर पल में,
क्या रखा है कल में,
जो बीत गया उसकी यादें,
कहीं कभी किसी से की हुई ,
कही कभी किसी से की हुई,
कसमें और वादें,
कुछ पूरी हुई होगी,
कुछ अधूरी रह गई होगी,
किसी से कही हुई बातें,
किसी के द्वारा कही हुई बातें,
जो बीत गया उसकी यादें,
मन को झकझोर देने वाली बातें,
घर के कोने कोने में बसी कुछ यादें,
दिल दिमाग में छाई ,
कुछ परछाई ,
रातों की नींद ,
सुबह की रौनक ,
उसकी ऐनक,
चादर की सिलवट,
तुहारी करवट,
तकिए का खोल,
कुछ प्यार भरे मीठे बोल,
मन को गुदगुदाने वाली बातें ,
खूबसूरत रातें ,
आंखों की नमी ,
जीवन का सार,
बढ़ता गया ,
गाड़ी चलती गई ,
बात बदलती गई,
भावनाए बढ़ते गए,
आपस में लड़े भी ,
झगड़े भी ,
परिवार भी बढ़ा ,
रिश्ता रिश्तों की सीढ़ी चढ़ा,
अंश आया ,
पदवी बढ़ी,
सदस्य बढ़ा ,
आपस में प्रेम की लहर दौड़ी ,
आंखें नम हो गई,
याद आ गया वो पल ,
याद आ गया वो पल,
था वो भी कभी आज ,
जो बन गया कल,
फिर क्या ?
कुछ खास नहीं,
वाकई रक्खा नहीं कुछ उस पल में,
एक बार शुरू हो जाए ,
एक बार शुरू हो जाए ,
तो दिल उसी वक्त में खो जाए,
मन कही चला जाए ,
तन यही रह जाए ,
आज को भूल जाए ,
कल में डूब जाए ,
आज की खुशी से वंचित कर ले ,
अपने आप को चिंतित कर ले ,
जो कभी खराब न होना था ,
वो भी खराब कर जाए ,
ऐसा नशा है कल में,
जो डूबा दे उसी पल में,
हां कुछ खास नहीं याद आया ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
शायद जीवन का कुछ हिस्सा ,
रक्खा है उस पल में,
हो भी क्यों न,
सदियां गुजरी,
जाने कितनी सर्दियां गुजरी,
बांहों में बांहे डाले यूहीं घूमा करते थे ,
पुराने गीतों पर,
खून झूमा करते थे ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनकी देख भाल में लग गए ,
कुछ सुलझे रिश्ते उलझ गए ,
कुछ उलझे रिश्ते सुलझ गए ,
रिश्तों के बढ़ते ही उनके देख भाल में लग गए,
समय भी अपने रफ्तार से चलने लगा,
काले बाल भी साथ छोड़,
अपने रंग बदलने में लग गए,
शरीर भी अब पहले सा न रहा ,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
याद आया जीना है तो जीओ हर पल में,
क्या रक्खा है कल में,
कुछ खालीपन सा लगने लगा ,
मन का विश्वास ,
आत्म विश्वाश बन कर झलकने लगा ,
क्या रक्खा है कल में,
जीओ हर पल में।।
Riddhi Gori
"પીંછી તો મેં પણ પકડીતી એ જીંદગી
તને રંગીન બનાવવા..
પણ ક્યાંક રંગ ઓછા પડ્યા,
તો ક્યાંક સંગ ઓછા પડ્યા...!!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
"ખોલી જો જીંદગી ની કિતાબ,
તો થોડી ધુળ નિકળી..
એમાં કંઈ પણ નથી લખાણ,
છતાં ઘણી ભૂલ નિકળી…!!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
કોઈને ગમી ગયાનું કારણ કાયમ સુંદરતા નથી હોતી વાલા,
કદાચ કોઈક બહુ ઊંડું ઊતર્યું હશે, તમને ઓળખવા…!!
- Riddhi Gori💙🤍
Sudhir Srivastava
सरसी छंद (१६,११) - मुस्कान
नित नूतन मुस्कानों का हम, रोज लगाएं बाग।
और बुझाएं सुलग रही जो, मन की अपने आग।।
शांत चित्त हो चिंतन करिए, निज जीवन का सार।
कितना उचित है या फिर अनुचित, नाहक लेना भार।।
अपनी भी है जिम्मेदारी, यही सीख लो बाँट।
प्रेम प्यार से चाहें कुछ को, या फिर कुछ को डाँट।।
खुद के ही दुश्मन बन जाते, जाने कैसे लोग।
रोग बढ़ाते पालपोस कर, झेंप-झेंप कर भोग।।
नादानी अब हम सब छोड़े, दें सबको संदेश।
मानों सब कुछ पास तिहारे, मानो स्वयं नरेश।।
मुस्कानों की छोटी-छोटी, बगिया रोपें रोज।
निंदा नफ़रत क्रोध ईर्ष्या, क्यों करना है खोज।।
यही सूत्र है मुस्कानों का, आप करो स्वीकार।
मिल-जुलकर सबको रहना, चाह छोड़ दरकार।।
बात सरल सीधी साधी है, बाँध रखो सब गाँठ।
नहीं किसी को हममें बनना, जानबूझकर काठ।।
समझ गए सब तो है अच्छा, छोटी सी ये बात।
नहीं समझ आया तो जाओ, खाओ जूता लात।।
नाहक नहीं नसीहत मेरी, मत कहना तुम व्यर्थ।
सोच-समझकर बात हमारी, जानो पहले अर्थ।।
बस इतनी सी दुआ हमारी, ऐसा दिन हो खास।
मानव मन मे मुस्कानों की, अपनी बगिया खास।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
फायकू- करुणा
********
करुणा का भाव लिए
निहारती राह वो
तुम्हारे लिए।
आँसुओं को पीकर भी
करुणा लुटाती रही
तुम्हारे लिए।
मार दिया ममता को
पी लिया करुणा
तुम्हारे लिए।
अब सब व्यर्थ है
करुणा संवेदना भी
तुम्हारे लिए।
कौन समझता है आज
करुणा की भाषा
तुम्हारे लिए।
दबानी पड़ती है उसे
करुणा का वेग
तुम्हारे लिए।
ऐसा कैसे हो सकता
करुणा समझ नहीं
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Riddhi Gori
લોકો પૂછે છે તું કેમ એટલું લખે છે?
હવે એમને કેમ સમજાવું કે...
દિવસમાં હસતા લોકો પણ
રાતે અંદરથી તૂટી જાય છે.
કેટલીક વાતો કોઈને કહી શકાતી નથી,
કેટલીક લાગણીઓ કોઈ સાંભળતું નથી...
એ બધું દિલમાં ભરાઈ જાય છે,
અને પછી શબ્દ બની જાય છે...
અને એ શબ્દો…
મારી કવિતામાં વહીને કોઈ અજાણ્યા
દિલને થોડું હળવું કરી જાય છે...!!
-Riddhi
-Gori 💙🤍
Bhavna Bhatt
મોબાઈલ રમવા આવી ખિસકોલી
kk
मुझे बसंत से डर लगता है…🍃
पेड़ों से टूटे सूखे पत्ते
टूटे दिल से लगते हैं,
पतझड़ अपना-सा लगता है,
मुझे बसंत से डर लगता है…
सूखे चरमराते हुए पत्ते
विरह-वेदना से तड़पते ..
शजर को पुकारते हैं,
वो ठूँठ नई बहार के इंतज़ार में है…
मुझे बसंत से डर लगता है…
डालियों की नंगी उँगलियाँ
आसमान को टटोलती हैं,
जैसे मेरी तरह कोई बिछड़ा नाम
हवा में ढूँढ़ती है
मुझे बसंत.....
टूटे दिल के टुकड़ों जैसे
पत्तों को कहाँ जगह मिलती है,
न आसमाँ उन्हें रखता है,
न ज़मीं गले लगाती है —
बिल्कुल मेरी-सी हालत लगती है…
मुझे बसंत…
फिर पतझड़ आएगा,
फिर मेरा आईना बन जाएगा,
एक मंजर फिर से आँखों से गुज़र जाएगा।
पेड़ से कभी शिकवा न किया मैंने,
वो फिर नई मोहब्बत पा जाएगा…
और मैं?
मैं फिर वही सूखा पत्ता बन
किसी कोने में चरमराऊँगी,
हवा के साथ उड़ जाऊँगी…
मुझे बसंत से डर लगता है —
डर लगता है मुझे बसंत से..
क्योंकि वो हर बार सिखा जाता है
कि जो नया है वही अपना है,
और जो टूट गया…
वो बस कहानी है।
नई पत्तियों से भर जाता है,
पुरानी कहाँ याद आती हैं,
फूल, फल, पंछी — सब उसके हो जाते हैं,
जिसे त्यागा उसने,
उसे कोई नहीं पुकारता है…
बसंत…
फिर से बसंत आएगा
असमान सज जायेगा रंग बिरंगे फूलों से
फिजाएं सजेगी होली के रंगों से
हवाएं सताएगी बेरंग पत्तो को
कोई उनका करुण रुदन सुन ना पाएगा
दर्द में तड़पते फना हो जायेंगे या
जला दिए जायेगे...
मुझे बसंत से डर लगता है ।
कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️
Riddhi Gori
"હું કોઈને ગમુ કે ન ગમુ શુ ફરક પડે?"
હવે હું કોઈને ન ગમું તો યે શું ફરક પડે છે…
કારણ કે ગમવું કે ન ગમવું એ તો અન્ય ના મનની પસંદગીની વાત છે,
અને હવે મારે એ પસંદગીની પરીક્ષામાં
ખરા નથી ઉતરવું,
મારા અસ્તિત્વની કિંમત બીજાના સ્વીકારમાં નથી,
પણ મારી પોતાની અંદરની શાંતિમાં છે…
જો કોઈને હું ન ગમું, તો એ તેમનો દ્રષ્ટિકોણ છે,
મારી હકીકત નહીં…
મારે હવે કોઈના approval નથી જોઈતા,
કોઈ મારી પ્રશંસા કરે એવી ઈચ્છા નથી મને…
મારા માટે હું "હું" છું ને એ જ પૂરતું છે,
હું મારી આત્માના અવાજને સાંભળી શકું છું,
એને અનુસરી શકું છું એ જ મારી સાચી જીત છે…!!
-Riddhi
-Gori 💙🤍
Sudhir Srivastava
देव-दानव
*********
यही तो कलयुग की माया है
सभी देव हैं और दानव भी,
पर विडंबना यह कि पहचान का संकट है।
दानवों को तो हम पहचान सकते हैं
पर देवों को पहचान पाना मुश्किल है
पहचान भी लें, तो विश्वास करना कठिन है,
झिझक और डर भी लगता है
क्योंकि इन्हीं देवों और दानवों के बीच
हमें जीना भी होता है।
उम्मीदों के आसमान को ऊँचा रखना पड़ता है
फूँक-फूँककर कदम रखना होता है,
राह के देव-दानवों से बचकर चलना पड़ता है।
क्योंकि देव कब दानव और दानव कब देव बन जाए
कहना बहुत मुश्किल होता है,
बस! इसी ऊहापोह में आगे बढ़ना भी होता है।
देव हों या दानव, सबसे रिश्ता रखना ही पड़ता है,
क्योंकि कौन कब काम आ जाए हमारे
समय से पहले इसका पता भी तो नहीं होता है,
इसीलिए देव हो या दानव
दोनों के महिमा मंडन से बचना पड़ता है,
जीने के लिए बार-बार मरना तक पड़ता है
सुधीर श्रीवास्तव
Aruna N Oza
Jay Shri Krishna 🌹🙏
Mare Do Alfaz
मेरे लम्हों को रफ्तार देता है
ठहरा हुआ एक खयाल तेरा
- Mare Do Alfaz
Sudhir Srivastava
नारी जीवन
*********
नारी ममता की मूर्ति
करुणा का सागर, त्याग तपस्या की देवी है,
जिसके आँचल में मिलती है
शीतलता की छाँव और सूकून का अहसास।
माँ, बहन, बेटी, पत्नी के रूप में
सँवारती है हमारा जीवन,
और अपने आशीष से देती है प्रेरणा, प्रोत्साहन,
निराशा में आशाओं का संचार करती है
मुसीबतों से बचाने के लिए
जाने क्या-क्या, कैसे -कैसे जतन करती है,
बदले में वो हमसे सिर्फ इतना ही तो चाहती है
बस! अपनापन, विश्वास और खुशियों की सौगात
परिवार की एकता, उन्नति की चाह
और हँसता, मुस्कराता घर-परिवार।
बस! यही तो है ममता की देवी नारी,
जिसका अपना कुछ भी नहीं होता
फिर भी सब उसका अपना ही होता है,
जैसे सारी जिम्मेदारियाँ उसके ही शीश पर हों।
ऐसे में हम सबकी भी तो कुछ जिम्मेदारी है
उसकी ममता, करुणा, त्याग, तपस्या के प्रति
ताकि मिलता रहे हमें उसका आशीष,
सँवर जाए हमारा जीवन और खुशहाल रहें
हम, आप, सब और हमारा परिवार।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
टीम इंडिया ने इतिहास रचा
टीम इंडिया के टी-20 विश्वकप जीतने के बाद
मेरे मित्र यमराज ने मुझे फोन किया,
बधाइयाँ शुभकामनाओं से लाद दिया।
मैंने धन्यवाद के साथ उसे समझाया
प्रिय मित्र! बधाइयाँ शुभकामनाएं तो
टीम इंडिया, बीसीसीआई, कोच, कप्तान
साथी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को दो।
जवाब में उसने कहा -
प्रभु! क्या मैं आपको बेवकूफ लगता हूँ
ये बधाइयाँ शुभकामनाएं आपके लिए हैं भी नहीं,
जो इतना तने जा रहे हो।
अब जब टीम इंडिया ने रचा इतिहास
तो मैंने भी किया एक छोटा सा प्रयास
अब तुझे छोड़कर और भला किससे करता आस।
बस! अब आप मुझ पर इतना एहसान कीजिए
मेरी बधाइयाँ शुभकामनाएँ
चुपचाप उचित स्थान और व्यक्ति तक पहुँचाइए,
भले ही मेरा नाम छुपा अपने नाम का लेबल लगाइए।
अब अपने खोल से तनिक बाहर तो आइए
टीम इंडिया ने इतिहास रचा, इस बात का जश्न मनाइए,
इस नेक सुझाव के लिए मुझे दावत पर बुलाइए
हम -आप मित्र हैं, यह दुनिया को बताइए
यमराज मित्र होने का फ़र्ज़ निभाने के साथ
टीम इंडिया की तारीफ में एक कविता भी सुनाइए,
और मेरे नाम के साथ छपवाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
छठ पूजा
शुक्लपक्ष कार्तिक छठ तिथि को
छठी मातु की पूजा होती,
नर नारी के मन में जगती एक अलौकिक ज्योति ।
आस्था, श्रद्धा, विश्वास का त्योहार
छठ मइया की महिमा अपार,
जिसने लिया है इसको जान
सदा निरोग उसकी संतान।
प्रकृति से जुड़ा है इसका रिश्ता
सूर्यदेव से पावन नाता,
त्रिदिवसीय यह पर्व है प्यारा
गातीं गीत व्रती संसारा।
बिन पंडित त्योहार यह होता
हर परिजन सहयोगी बनता,
अद्भुत खुशियों का नव उल्लास
वातावरण में जन-मन को दिखता ।
देवी संज्ञा मातुरुप में
छठी मैया मानी जाती,
ठेकुआ, ईख, फल, फूल अर्पित कर
छठ पर्व की पूजा होती।
संध्या को सूर्य संग देवी संज्ञा का,
व्रती नारियाँ स्वागत करतीं
फिर प्रातः काल में अर्घ्य देकर
फिर शाम विदाई रस्म निभातीं।
सुधीर श्रीवास्तव
Akash Gupta
किसी और की सजा मै किसी और को दूंगी , मै अपना दिल हर किसी को दूंगी।
जब भी आदत लग जायेगी मेरी जिस मजनू को , बीच रास्ते मे छोड़कर उसके प्यार और उसके भोलेपन का क़त्ल कर दूँगी।
मै यह सब हर बार करती हू
मै कहा किसी से प्यार करती हू।
सच्चाई तो यह है ,की लोगो के दिलो का क़त्ल
और लोगो से मै व्यपार करती हू।
आकाश गुप्ता ✍️
Riddhi Gori
બધા માં વહેચાઈ ગઇ છું…
હવે જે વધ્યું છે એ છે
મારું મૌન…!!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
લાગણી ના વિશ્વાસે
ધક્કા બહુ ખાધા છે
જિંદગી માં…!!
- Riddhi Gori🤍💙
yukta
വായിക്കാൻ പേടിയാണത്രേ..
മാറുമറക്കാതെ ചേലമുറുക്കിയ
കരിങ്കോലങ്ങളെ അറച്ചിട്ടാണത്രെ.
അതങ്ങനാണല്ലോ.
മാറു പിളർന്ന് ചോരയൂറ്റിയ
കിടാങ്ങൾ കഥയിലാണല്ലോ
മുല മാഞ്ഞ് പിളർപ്പ് വീങ്ങിയ
കാടത്തികൾക്ക് കിടപ്പറകളില്ലല്ലോ
അര മുറുക്കി കല്ല് വെട്ടിക്കേറ്റിയ
കാടന്റെ നെഞ്ചിലിനിയും ഇടമുണ്ടത്രെ..
ഏച്ചുകെട്ടാനും കെട്ടിയതഴിക്കാനും...
മനുഷ്യനല്ലാലോ
കുങ്കുമവും ചേറും വേർതിരിച്ച് ഉണ്ണിക്കോതിക്കൊടുക്കണമത്രെ..
കുങ്കുമച്ചോപ്പില്ലാതെ ചുണ്ട് ചെമപ്പിച്ച ജീവനയ്ക്ക്, വീറ് കൂടുമല്ലോ..
പേടി വായിക്കാനോ, അതോ വായടക്കാനോ?
.....
പറ്റിയാ വായിക്കണം!
മണിമാളികയുതിർന്നതും
മുത്തുപൊഴിഞ്ഞതും
മാറ്റമറിഞ്ഞതും.. വായിക്കണം.
വീണ്ടും വായിക്കണം!
ഒറ്റയായതും
കൂട്ടായതും
ഒന്നായുയർന്നതും.. വായിക്കണം
വീണ്ടും വീണ്ടും വായിക്കണം..!
എഴുതാത്തത് എഴുതപ്പെടുന്ന വരെ.
वात्सल्य
हम पुरुष लोग अच्छी हो या ना अच्छी हो फिर भी स्त्री को बहोत बखानते है !!
फिर स्त्री क्यूँ इतनी पुरुषो को बखानती नहीं?
😄😄🙏🏾😄😄
- वात्सल्य
Jyoti Gupta
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Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
मला समजायला....
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
Vanita Thakkar
English Translation of Shree Maa Sharada Baavanee - A Gujarati Hymn on Shree Maa Sharada Devi and Her Divine Life …. On vanitathakkar.blogspot.com ….
https://vanitathakkar.blogspot.com/2026/02/english-translation-of-shree-maa.html
kattupaya s
#vijay.. #tamilsong
j
:आखिरी खत:
तुम सामने बैठे थे और मैं लिख रही थी ;
खत आखिरी तुम्हें पूछ पूछकर .
सुनो कौन से कौन से शब्द लिखने हैं?
कौन सा इंतजार ?कौन से वादे ?कौन सी शर्तें ?
कौन सा रूठना ?कौन सा मनाना? कब-कब तुम्हारा आना? और कब का जाना ?
क्या लिखूं वो ;
प्रथम एहसास;
जब तेरे गीले बालों को मेरी तितली ने छुआ था '
करंट सा लगा था क्या पता मेरे दिल को क्या हुआ था ,.
वह जीने से फिसलती ,तुम्हारी नजरों का ;
अमृत मैंने हंसकर पिया था ।
तुम्हारे हाथ में चाय थी; मगर घूंट मैंने पिया था ,
एक रोज कसके ,जब तुमने मेरे हाथों को हथेली में छुपाया था!
मेरी कसमाशाहट को ;अपने होठों पर लिया था!
एक शाम, तुमने न जाने किस जन्म का बदला लिया था,
मैं अकेली चौराहे पर भटकती रही थी, तुमने मुंह साफ फेर लिया था ।
आज उन एहसासों का बयान ,कागज पर लिख रही हूं ।
तुम्हें कर कर ध्यान ,आखरी खत लिख रही हूं ।
अगले जन्म में भी ,मेरे घर के बाहर तुम मिलोगे न!
तो पीपल का पेड़ बनाकर जन्म लेना,
यादआए जब तुम्हारी गलबहियां डाल लूंगी ना !
गुस्सा आएगा तो, तुम्हारी पत्तियां तोड़ डालूंगी ना !
प्यार बरसेगा तो, तुम्हारी टहनियों से लिपट जाऊंगी ना !
अक्सर कुछ ख्वाबों के, अधूरे बिना मात्रा के शब्द ;
खतो में बस जाते है, हंसती हुई कलम से लिखे जाते हैं आखिरी खत!!
० उम्र के अंतिम पड़ाव पर ,मुस्कुराते हैं आखिरी खत!
मृत्यु तलाक ,आंखों में बस जाते हैं आखिरी खत!!!
ज्योति सोनी वैदेही
अलवर से
Imaran
इश्क तुझसे है मेरे यार रहने दे
दिल में तड़प बेसुमार रहने दे
बस आज चाहत की बात करने दे
कल के लिए ये तकरार रहने दे
🩵💛imran 🩵💛
Komal Arora
Sometimes we heard girls are typical one......
but no one knows why.........
sometimes we misunderstood them........
or we don't want to understand them .........
but I thought responsibilities make them rude egoistic and sonetimes different person ......
which they don't want to be........
SO, before judging anyone think twice maybe that is not a big deal for you but really and big deal for other person.........
Komal Arora
यू बिखर कर भी किसी के लिए होना कितना मुश्किल है..........
मन के बवाल को बिना बताये रह पाना कितना मुश्किल है........
दूसरों की परवाह में खुद को भूल जाना कितना मुश्किल है........
ना चाहते हुए भी सब कुछ मान जाना कितना मुश्किल है.........
मन पर पत्थर रख घर को जोड़ कर रखना और फिर परायी हो ना सुनना कितना मुश्किल है..........
खुद के नसीब का फैसला किसी और को करते देखना और बोझ सा लगना कितना मुश्किल है.........
आरंभ से अंत और फिर अंत से आरंभ एक ही जन्म में देखना कितना मुश्किल है..........
Worse but so called happy life of girls ..............
Saroj Prajapati
जिंदगी तू भी है एक किताब सी
हमेशा लगती तू एक अनसुलझा सवाल सी।
एक पन्ने पर सुख तेरे,दूजे पे दुख लिखा है
एक पन्ना हंसाता तेरा,दूजा आंखें नम कर जाता है ।
कहीं लिखी इबारत इश्क की,कहीं गम जुदाई का
कहीं सबक दुनियादारी का,कहीं भेद अपने पराए का।
हर पल रंग बदलती तू, नित नए रूप धरती तू
कभी मां की गोद लगती तू,कभी पिता सी छाया बनती तू।
कोई भेद तेरा समझ ना पाया,अजब है जिंदगी तेरी माया
यहां उसने ही सच्चा सुख पाया,जिसको तूने हंस के गले लगाया।।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
kattupaya s
life is like a seasaw. when you are on top next moment you reach the bottom. so enjoy the seasaw happily in balanced condition.
kattupaya s
Good evening friends.. have a nice time
kk
समय एक सौदागर
बेचने आया है समय एक सौदागर बन कर
अपनी टोकरी में ढेरों से पल रखकर...
चलो समय से एक सौदा कर लें,
ग्राहक बन कुछ लम्हे खरीद लें।
कुछ बचपन की नटखट शरारतें,
कुछ जवानी की मीठी अटखेलियाँ।
पहली मोहब्बत की धुंधली यादें
थोड़ी सी अपनी मासूमियत भी।
वक्त से अपनी गुस्ताखियां भी खरीद लेंगे
उन्हें दुबारा ठीक करके वापिस रख देंगे
कुछ रिश्ते होंगे उलझे-उलझे,
कुछ अधूरे, कुछ टूटे से—
लेकर उनको परिपक्वता की गिरहों से
हम उन्हें फिर सुलझा लेंगे।
पर सौदागर से मोल-भाव कैसे करें?
हम तो नासमझ ठहरे—
घाटे का सौदा ही करेंगे। 😔
और अगर हमारी हैसियत से
महँगा हुआ यह सौदा,
तो उसकी टोकरी से
चुपके से हम....
बचपन ही चुरा लाएँगे। 😍
कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️
Paagla
https://youtube.com/shorts/iJEN5HqBv1s?si=tIBppOyoNKAFhdWI
kk
समय एक सौदागर
बेचने आया है समय एक सौदागर बन कर
अपनी टोकरी में ढेरों से पल रखकर...
चलो समय से एक सौदा कर लें,
ग्राहक बन कुछ लम्हे खरीद लें।
कुछ बचपन की नटखट शरारतें,
कुछ जवानी की मीठी अटखेलियाँ।
पहली मोहब्बत की धुंधली यादें
थोड़ी सी अपनी मासूमियत भी।
वक्त से अपनी गुस्ताखियां भी खरीद लेंगे
उन्हें दुबारा ठीक करके वापिस रख देंगे
कुछ रिश्ते होंगे उलझे-उलझे,
कुछ अधूरे, कुछ टूटे से—
लेकर उनको परिपक्वता की गिरहों से
हम उन्हें फिर सुलझा लेंगे।
पर सौदागर से मोल-भाव कैसे करें?
हम तो नासमझ ठहरे—
घाटे का सौदा ही करेंगे। 😔
और अगर हमारी हैसियत से
महँगा हुआ यह सौदा,
तो उसकी टोकरी से
चुपके से हम....
बचपन ही चुरा लाएँगे। 😍
कल्पिता 🌻
दिल से दुनिया तक ❤️
Narayan
वो साथ में रहता है सबकुछ ठीक लगता है मुझे
मुश्किलें बढ़ती हैं मेरी दूर जब जाता है वो...
Narayan
उसने कोशिश ही नहीं की वरना
हम तो उसके ही थे कहाँ जाते।
- नारायण
Narayan
उसकी ख़ुश्बू से बेहतर कोई गुलाब नहीं ,
जब भी छूती है मेरी रूह महक जाती है ।।
Narayan
कुछ प्रेम
पाए जाने के लिए नहीं होते,
वे सिर्फ़ निभाए जाते हैं…
और मैंने,
तुम्हें पाने से ज़्यादा
तुम्हें निभाना चुना।
Narayan
जब कभी मेरी याद आए तो कोई किताब उठाना
और उसे पढ़ना शुरू कर देना
किसी भी भाषा का कोई भी शब्द
तुम्हें अंततः मुझ तक ही पहुँचाएगा
SAYRI K I N G
बड़े दुःख की बात है
गांव की सबसे काली लड़की को प्रोपोज किया था
उसने ये बोल कर
रिजेक्ट कर दिया काली हु अंधी नहीं
Riddhi Gori
જે જતા હોય ને એને જવા
દેજો સાહેબ…
કેમ કે સાંધા કરેલા વાયરમાં
ભડાકા થતા વાર નહીં લાગતી..!
- Riddhi Gori💙🤍
Shailesh Joshi
પ્રેમ પૈસો કે પ્રસિધ્ધિના પંથે
પ્રયાણ કરતા પહેલા
એક તૈયારી કરી લેવી કે,
સંજોગો વસાત
મૂળ જગ્યા પર પાછા ફરવું પડે,
તો કોઈપણ જાતનો
ડર, શરમ કે સંકોચ રાખ્યા વગર
આપણે પાછા ફરી શકીશું.
- Shailesh Joshi
A singh
एक ही दिल है मेरे पास,
और उसी में ना जाने कितने दर्द छुपे बैठे हैं…
कुछ वक्त ने दिए, कुछ अपनों ने,
और कुछ मैंने खुद ही चुपचाप सह लिए।
कभी सोचा था गिनूंगी इन्हें,
पर हर बार आँसू ही गिनती रह गई…
सुना है हर दर्द की कोई न कोई दवा होती है,
बस उसी की तलाश में निकली हूँ…
शायद कहीं सुकून मिल जाए।
— A Singh ✨
वात्सल्य
*કીધેલું કયારેય થયું નથી,ચીંધેલું કયારેય હોતું નથી,માત્ર દિવસના દિલાસા છે જિંદગી!!પોતાનું કહી કોઇ પોતાનું થતું નથી.*
- वात्सल्य
Riddhi Gori
तन्हाई देख कर घबराता क्या है ।
तन्हा रहने में तेरा जाता क्या है !!
क्यों बैठा रहता इस रास्ते पर |
इस रास्ते से तेरा आता क्या है !!
मोहब्बत अपनी जगह ठीक है।
मगर खुद को य सताता क्या है !!
वफ़ा की उम्मीद है गर तुझको |
बे-वफा से दिल लगाता क्या है !!
करना है ख़ामोशी से कर इश्क |
जमाने को राज बताता क्या है !!
- Riddhi Gori💙🤍
Riddhi Gori
કહાં કહાં સે સમેટું તુજે એ જિંદગી..
જહાં સે ભી દેખતી હું વહા સે તુમ બસ બીખરી હુઈ નજર આતી હો..!!
- Riddhi Gori💙🤍
Sonu Kumar
कुकी ईसाई मणिपुर में बंदूक लेस हैं | जबकि मेतेइ हिन्दू निहते हैं इसलिए हिन्दू को कुकी ईसाई मार रहे हैं ओर राज्य छोड़ने को मजबूर हैं |
#ManipurViralVideo
Ajit
અહીંયા કોણ મારું ને કોણ તારું, ફરે છે વંટોળની જેમ કહું છું જાણ સારુ..
જિંદગી ની "યાદ"
Avinash
So read books where you gets time 😃
PRASANG
इंतज़ार।
मोहब्बत सच्ची हो तो इंतज़ार भी अच्छा लगता है,
अगर दिल ही बदल जाए तो हर बात बोझ लगता है।
जिसकी हँसी से घर में उजियारा उतरता था,
आज वही चेहरा भी अजनबी सा लगता है।
नज़र जब प्यार से देखे तो पत्थर भी फूल बन जाए,
मगर बदले हुए मन से गुलाब भी काँटा लगता है।
कभी जो हर रोज़ साथ चलने की दुआ करते थे,
वही अब दूर जाएँ तो सफ़र वीरान लगता है।
वफ़ा की राह पर चलना आसान कभी नहीं होता,
हर कदम पे दुनिया का बड़ा इम्तिहाँ लगता है।
दिल की दुनिया “प्रसंग” भी अजीब दस्तूर रखती है,
जो अपना था वही सबसे ज़्यादा दूर लगता है।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
Shailesh Joshi
એના જીવનમાં
કોઈ તકલીફ
નથી આવતી,
જે અન્યને
કોઈ તકલીફ
નથી આપતા.
Shailesh Joshi
kajal jha
किनारा न मिले तो मायूस न होना,
समंदर की अपनी ही एक कहानी होती है।
जो गहरे डूबे, वही मोती ले आए,
सतह पर तो बस पानी की रवानी होती है
- kajal jha
Dada Bhagwan
Do You Know that all forms of yoga, including yoga of the mind (mano-yoga) are merely 'relief roads'? Nothing can be achieved without attaining the union with the Soul (Atma-yoga - union with the Self).
Read more on: https://dbf.adalaj.org/CvSS6Mt0
#doyouknow #facts #spirituality #spiritualfacts #DadaBhagwanFoundation
Dada Bhagwan
ભગવાન ન્યાયસ્વરૂપ નથી ને ભગવાન અન્યાયસ્વરૂપેય નથી. કોઈને દુઃખ ના હો એ જ ભગવાનની ભાષા છે. ન્યાય-અન્યાય એ તો લોકભાષા છે. - દાદા ભગવાન
વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/j3lFLg7D
#quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation
Avinash
Men Needs Only One Minute To Fall In Love But Need One Century To Forgot....✨❤️
archana
हम बुरे नहीं थे, बुरे बनाए गए थे।
बस पारदर्शी जाल बिछाकर फँसाए गए थे।
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