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Raju kumar Chaudhary

My Lovely Wife भाग 2 : पहली बातचीत अगले दिन कॉलेज का माहौल हमेशा की तरह ही था, लेकिन राहुल के लिए सब कुछ बदला हुआ लग रहा था। उसकी आँखें बार-बार उसी दिशा में जा रही थीं जहाँ कल उसने राधा को देखा था। दिल में एक अजीब-सी बेचैनी थी — आज फिर दिखेगी या नहीं? और तभी… कॉलेज के गेट से राधा अंदर आई। हल्के गुलाबी रंग का सूट, बालों में सादगी, और चेहरे पर वही शांत मुस्कान। राहुल का दिल तेज़ धड़कने लगा। क्लास के बाद राहुल अपने दोस्त अमन के साथ कैंटीन में बैठा था। अमन ने राहुल की हालत देख ली। “ओए राहुल, आज बड़ा खोया-खोया लग रहा है। किसी पर दिल आ गया क्या?” अमन ने हँसते हुए कहा। राहुल हल्का सा मुस्कराया, लेकिन कुछ बोला नहीं। थोड़ी देर बाद राधा अपनी सहेली के साथ कैंटीन में आई। राहुल की नज़रें खुद-ब-खुद उसी पर टिक गईं। अमन ने मौका देखकर कहा, “अब नहीं गया तो कभी नहीं जाएगा। जा, बात कर।” राहुल हिम्मत जुटाकर उठा। हर कदम भारी लग रहा था, जैसे दिल पैरों में आ गया हो। राधा पानी लेने उठी। और उसी पल राहुल उसके पास पहुँच गया। “Excuse me…” राहुल की आवाज़ हल्की काँप रही थी। राधा ने उसकी ओर देखा, “हाँ?” “वो… कल लाइब्रेरी में… आपकी किताब गिर गई थी,” राहुल ने झूठा बहाना बना लिया। राधा मुस्कराई, “ओह… मुझे याद नहीं, पर शुक्रिया।” राहुल थोड़ा सहज हुआ। “आप… आप राधा हैं न?” “हाँ, और आप?” उसने सहजता से पूछा। “राहुल।” बस इतना ही था। छोटा-सा परिचय, लेकिन दिल के लिए बहुत बड़ा। राधा ने जाते-जाते कहा, “अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।” और राहुल वहीं खड़ा रह गया। दिल ने ज़ोर से कहा — ये तो बस शुरुआत है।

Raju kumar Chaudhary

My Lovely Wife (एक खूबसूरत प्रेम कहानी) भाग 1 : पहली नज़र कहानी शुरू होती है एक कॉलेज से। वो कॉलेज जहाँ हर छात्र अपने-अपने सपनों को पंख देना चाहता था। उसी कॉलेज में पढ़ता था राहुल — स्मार्ट, समझदार और थोड़ा सा शांत रहने वाला लड़का। वो पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन दिल से बहुत सादा। उसी कॉलेज में थी राधा — खूबसूरत, संस्कारी और हर किसी से अलग। उसकी मुस्कान किसी भी उदास दिन को खास बना सकती थी। एक दिन राहुल लाइब्रेरी में बैठा पढ़ रहा था, तभी अचानक उसकी नज़र सामने बैठी लड़की पर पड़ी। वो राधा थी… सफेद सूट, खुले बाल और हाथ में किताब। राहुल की किताब खुली थी, लेकिन उसकी नज़रें किताब के अक्षरों पर नहीं, राधा की मुस्कान पर टिक गई थीं। राधा ने अचानक नज़र उठाई, और राहुल से आँखें मिल गईं। कुछ सेकंड की ख़ामोशी… दिल की धड़कन तेज़… और फिर राधा की हल्की सी मुस्कान। वो पल छोटा था, लेकिन राहुल की ज़िंदगी बदलने के लिए काफी था। राहुल नहीं जानता था कि आज जो मुस्कान उसने देखी है, एक दिन वही उसकी हर सुबह की वजह बनेगी…

Manoj Kumar

तुम मेरे तुम मेरे <br /> बाकी ये दुनिया क्या मेरे

Raju kumar Chaudhary

My Lovely Wife (एक खूबसूरत प्रेम कहानी)My Lovely Wife (एक खूबसूरत प्रेम कहानी) भाग 1 : पहली नज़र कहानी शुरू होती है एक कॉलेज से। वो कॉलेज जहाँ हर छात्र अपने-अपने सपनों को पंख देना चाहता था। उसी कॉलेज में पढ़ता था राहुल — स्मार्ट, समझदार और थोड़ा सा शांत रहने वाला लड़का। वो पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन दिल से बहुत सादा। उसी कॉलेज में थी राधा — खूबसूरत, संस्कारी और हर किसी से अलग। उसकी मुस्कान किसी भी उदास दिन को खास बना सकती थी। एक दिन राहुल लाइब्रेरी में बैठा पढ़ रहा था, तभी अचानक उसकी नज़र सामने बैठी लड़की पर पड़ी। वो राधा थी… सफेद सूट, खुले बाल और हाथ में किताब। राहुल की किताब खुली थी, लेकिन उसकी नज़रें किताब के अक्षरों पर नहीं, राधा की मुस्कान पर टिक गई थीं। राधा ने अचानक नज़र उठाई, और राहुल से आँखें मिल गईं। कुछ सेकंड की ख़ामोशी… दिल की धड़कन तेज़… और फिर राधा की हल्की सी मुस्कान। वो पल छोटा था, लेकिन राहुल की ज़िंदगी बदलने के लिए काफी था। राहुल नहीं जानता था कि आज जो मुस्कान उसने देखी है, एक दिन वही उसकी हर सुबह की वजह बनेगी…My Lovely Wife भाग 2 : पहली बातचीत अगले दिन कॉलेज का माहौल हमेशा की तरह ही था, लेकिन राहुल के लिए सब कुछ बदला हुआ लग रहा था। उसकी आँखें बार-बार उसी दिशा में जा रही थीं जहाँ कल उसने राधा को देखा था। दिल में एक अजीब-सी बेचैनी थी — आज फिर दिखेगी या नहीं? और तभी… कॉलेज के गेट से राधा अंदर आई। हल्के गुलाबी रंग का सूट, बालों में सादगी, और चेहरे पर वही शांत मुस्कान। राहुल का दिल तेज़ धड़कने लगा। क्लास के बाद राहुल अपने दोस्त अमन के साथ कैंटीन में बैठा था। अमन ने राहुल की हालत देख ली। “ओए राहुल, आज बड़ा खोया-खोया लग रहा है। किसी पर दिल आ गया क्या?” अमन ने हँसते हुए कहा। राहुल हल्का सा मुस्कराया, लेकिन कुछ बोला नहीं। थोड़ी देर बाद राधा अपनी सहेली के साथ कैंटीन में आई। राहुल की नज़रें खुद-ब-खुद उसी पर टिक गईं। अमन ने मौका देखकर कहा, “अब नहीं गया तो कभी नहीं जाएगा। जा, बात कर।” राहुल हिम्मत जुटाकर उठा। हर कदम भारी लग रहा था, जैसे दिल पैरों में आ गया हो। राधा पानी लेने उठी। और उसी पल राहुल उसके पास पहुँच गया। “Excuse me…” राहुल की आवाज़ हल्की काँप रही थी। राधा ने उसकी ओर देखा, “हाँ?” “वो… कल लाइब्रेरी में… आपकी किताब गिर गई थी,” राहुल ने झूठा बहाना बना लिया। राधा मुस्कराई, “ओह… मुझे याद नहीं, पर शुक्रिया।” राहुल थोड़ा सहज हुआ। “आप… आप राधा हैं न?” “हाँ, और आप?” उसने सहजता से पूछा। “राहुल।” बस इतना ही था। छोटा-सा परिचय, लेकिन दिल के लिए बहुत बड़ा। राधा ने जाते-जाते कहा, “अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।” और राहुल वहीं खड़ा रह गया। दिल ने ज़ोर से कहा — ये तो बस शुरुआत है।My Lovely Wife भाग 3 : दोस्ती की शुरुआत राधा के जाने के बाद भी राहुल काफी देर तक वहीं खड़ा रहा। उसके कानों में बस एक ही आवाज़ गूंज रही थी — “अच्छा लगा आपसे मिलकर, राहुल।” उस दिन के बाद राहुल को कॉलेज हर दिन नया लगने लगा। अब वो क्लास से ज़्यादा लाइब्रेरी और कैंटीन में समय बिताने लगा, शायद फिर से राधा दिख जाए। कुछ दिनों बाद लाइब्रेरी में फिर मुलाक़ात हुई। राधा एक किताब ढूँढ रही थी, लेकिन ऊँची शेल्फ़ तक उसका हाथ नहीं पहुँच रहा था। राहुल ने हिम्मत करके कहा, “मैं मदद कर दूँ?” राधा ने मुस्कराकर सिर हिला दिया। “हाँ, प्लीज़।” राहुल ने किताब निकालकर उसे दे दी। उस पल दोनों के हाथ हल्के से टकरा गए। वो छोटा-सा स्पर्श, लेकिन दिल में बड़ी हलचल। “थैंक यू, राहुल,” राधा ने कहा। “आप कौन-सी किताबें पढ़ती हैं?” राहुल ने पहली बार खुलकर सवाल किया। “कहानियाँ… जिनमें सच्चे रिश्ते होते हैं,” राधा ने जवाब दिया। राहुल मुस्कराया, “मुझे भी कहानियाँ पसंद हैं।” उस दिन दोनों देर तक बात करते रहे — क्लास, किताबें, ज़िंदगी और सपने। अब जब भी कॉलेज में मुलाक़ात होती, एक मुस्कान ज़रूर होती। धीरे-धीरे लाइब्रेरी उनकी पसंदीदा जगह बन गई। और दोस्ती, जो अनजाने में शुरू हुई थी, अब गहरी होने लगी थी। राहुल समझ रहा था — ये दोस्ती अब साधारण नहीं रही। लेकिन राधा के दिल में क्या चल रहा था? ये वो नहीं जानता था

Imaran

मैं वक़्त बन जाऊँ और तू बन जाना मेरी जिंदगी का कोई लम्हा, मैं तुझमें गुज़र जाऊँ तू मुझमें गुज़र जाना 🫶imran 🫶

mohanmurarisharma

क्या बात है मोहन आजकल वो बहुत घबराए हुए हैँ.. कहीं शिकार हो गए हैँ या शिकार करके आए हुए हैँ..💐

Bhumika Vyas

जिहाल-ए-मस्ती मकुन-ब-रन्जिश, बहाल -ए-हिज्र बेचारा दिल है 😊 *गुलामी* फिल्म के इस गाने का आज तक मतलब समझ ना आने के बावजूद भी सुन रहे हो ना......... तो *Budget* से क्या तकलीफ है?? -निर्मला सीतारमण 😂😂🤣🤣🤣🤣🤣🤣 # Budget 2026

Shefali

#shabdone_sarname__ #shabdone_sarname_

Raju kumar Chaudhary

#FutureOfNepal #YoungTalents #StudentMotivation #Inspiration #EducationMotivationFollow the PRB STORY CLUB channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb80wc69MF92VvNWbp11

Gajendra Kudmate

रुके हुए पानी की धारा एक दिन जम जाती हैं फ़िर वह आसूँ हो या हो कोई दरीया बड़ा सा गजेंद्र

Raj Phulware

IshqKeAlfaaz पावसाच्या सरी कधी..

Paagla

https://youtube.com/shorts/8SWx6fXJ8Co?si&#61;SZNJbYMmVPGAjWI5

Mrugzal

જિંદગીમાં થઈ શકે એટલો જ પ્રેમ કર, પણ એમતો ન જ કહે ચાય ઓછી કર.. #TeaLover #Mrugzal

Bhavesh Tejani

શબ્દો પણ થંભી જાય જ્યારે વર્ણન તમારું થાય છે, તમારી એક નજરથી તો આખું ચોમાસું છલકાય છે.

Komal Mehta

જીવનની સિસ્ટમ શરીર આપણું Hardware છે, એને કસરતથી સાચવીએ, પણ Software જેવા Heart માં, સારા વિચારો ભરીએ. જોજો આ સોફ્ટવેરમાં ક્યાંક, Virus ના આવી જાય, ઈર્ષ્યા, ક્રોધ અને નફરતથી, આખી સિસ્ટમ Hang થઈ જાય! જેમ ફોનમાં એન્ટી-વાયરસ નાખી, કચરો સાફ કરીએ, એમ ક્ષમા અને પ્રેમથી, હૈયું ચોખ્ખું રાખીએ. કોઈની ખોટી વાતોનું Loading ન રાખશો, નકામી યાદોને મનમાંથી, Uninstall જ કરશો. Hardware જો દુખે તો દુનિયાને દેખાય છે, પણ Software બગડે ને સાહેબ, ત્યારે જિંદગી વિખરાય છે.જીવનની સિસ્ટમ શરીર આપણું Hardware છે, એને કસરતથી સાચવીએ, પણ Software જેવા Heart માં, સારા વિચારો ભરીએ. જોજો આ સોફ્ટવેરમાં ક્યાંક, Virus ના આવી જાય, ઈર્ષ્યા, ક્રોધ અને નફરતથી, આખી સિસ્ટમ Hang થઈ જાય! જેમ ફોનમાં એન્ટી-વાયરસ નાખી, કચરો સાફ કરીએ, એમ ક્ષમા અને પ્રેમથી, હૈયું ચોખ્ખું રાખીએ. કોઈની ખોટી વાતોનું Loading ન રાખશો, નકામી યાદોને મનમાંથી, Uninstall જ કરશો. Hardware જો દુખે તો દુનિયાને દેખાય છે, પણ Software બગડે ને સાહેબ, ત્યારે જિંદગી વિખરાય છે.

Durgeshwari Sharma

आपका समय सीमित है, इसीलिए इसे किसी और की ज़िन्दगी जी कर व्यर्थ मत करो। - Durgeshwari Sharma

Shailesh Joshi

આજકાલ નાના-મોટા, અમીર-ગરીબ, શેઠ-કર્મચારી, સ્ત્રી કે પુરુષ, સૌને, પોતાની સાથે વિશ્વાસઘાત થવાનો ડર એક સરખો લાગે છે. પાછું બીજું સત્ય એ પણ છે કે, &#34;આ વિશ્વાસ&#34; કોઈને આપવો જેટલો સહેલો લાગે છે, એટલો જ કોઈની ઉપર રાખવો કઠિન લાગે છે. - Shailesh Joshi

Shraddha Panchal

એક બોલકણો સંબંધ જ્યારે શાંતિ પસંદ કરે, ત્યારે સમજવું કે ક્યાંક અપેક્ષા એ ભાર પાડી દીધો, અથવા લાગણીએ બોલવાનું છોડી દીધું છે .❤️😇

Meeta

પ્રેમ એક એવો વિષય છે જેને અનુભવ સિવાય લખાય નહિ.... - Meeta

Meeta

પ્રેમ એક એવો વિષય છે જેને અનુભવ સિવાય લખાય નહિ.... - Megha

Soni shakya

कुछ बंधन --- कुछ बंधन बहुत खुबसूरत होते हैं.. और ये कब ‌हमारे जीने की वजह बन जाते है पता ही नहीं चलता.. फिर एक दिन यही बंधन बहुत तकलीफ़ देते हैं.. जब‌ ये हमसे दूर हो जाते हैं.. लगता है हमने जीने की वजह ही खो दी है.. वो बंधन.. जो बिन बांधे बधं जाते हैं.. उनसे कभी आजादी नहीं मिलनी चाहिए.. 🍁🍁🍁🍁🍁 - Soni shakya

Bhupendra Kuldeep

परीक्षा विशेष पेरेंटिंग

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

“न स सखा न ददाति सख्ये” ऋगुवेद --10/117/4 भावार्थ--“वह मित्र नहीं है, जो सहायता नहीं देता। सम्बन्धित उद्धरण-- * द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते। तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्ति अनश्नन्नन्यो अभिचाकशीति॥ मुण्डकोपनिषद--3/1/1 अर्थ: एक ही वृक्ष पर बैठे दो मित्र पक्षी हैं। एक फल खाता है, दूसरा केवल साक्षी भाव से देखता है। * ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ --ईशोपनिषद(मंगलाचरण) भावार्थ- त्याग और सहभागिता ही जीवन का आधार है। जो केवल अपना ही सोचे, वह मित्रता निभाने योग्य नहीं। महाभारत, उद्योग पर्व-- * सुखेषु सर्वे सखिनो भवन्ति दुःखेषु मित्रं विरलः भवति। --महाभारत(उद्योग पर्व) अर्थ: सुख में तो सभी मित्र होते हैं, दुःख में साथ देने वाला मित्र दुर्लभ होता है। * न मित्रं कपटं कृत्वा मित्रभावेन वर्तते। ---महाभारत, वनपर्व अर्थ: जो छलपूर्वक मित्रता करता है, वह वास्तव में मित्र नहीं होता। * आपत्सु मित्रं यः करोति धीरः स एव मित्रं न तु दीर्घसूत्री। सुखेषु सर्वे सखिनो भवन्ति दुःखेषु मित्रं विरलः भवति॥ --भृतहरि, नीतिशतक अर्थ: जो व्यक्ति विपत्ति के समय साथ देता है, वही वास्तव में मित्र है। सुख के दिनों में तो सभी मित्र बन जाते हैं,‌ पर दुःख में साथ देने वाला मित्र बहुत ही दुर्लभ होता है। 👉 यह श्लोक सीधे उसी भाव को पुष्ट करता है— जो मित्रता में कुछ देता नहीं, संकट में साथ नहीं देता, वह सखा कहलाने योग्य नहीं। * पापान्निवारयति योजयते हिताय. गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति । आपद्गतं च न जहाति ददाति काले. सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः।। ---हितोपदेश- भावार्थ -- .सज्जन लोग एक अच्छे मित्र का लक्षणों को कुछ इस तरह व्यक्त करते हैं... जो मित्र पापों का नाश करता है, मित्र की कल्याण के लिए योजना बनाता है, मित्र की बुरी आदतों को लोगों से छुपाकर उसकी अच्छी आदतों का प्रचार करता है।

yeash shah

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mohanmurarisharma

फूल समझ के मिलोगे मोहन तो तुम्हारे दिल में खिलूंगा.. अगर जो खार समझोगे तो तुम्हें कदम कदम पर मिलूँगा..

Awantika Palewale

ભીની આંખે સ્મરણોની આ વણઝાર લઈએ, તમારા દિલમાં થોડો અમારો અધિકાર લઈએ. સાથે વિતાવેલી એ ક્ષણોની મહેક સાથે રાખી, જીવનના નવા પથ પર થોડો વિસ્તાર લઈએ. હતું જે કંઈ પણ સારું-નરસું અહીં છોડીને, માત્ર સ્નેહનો મીઠો અહીંથી સાર લઈએ. મળ્યા&#39;તા મુસાફર બનીને આ સુંદર પડાવે, હવે છૂટા પડીને યાદોનો ઉપહાર લઈએ. ફરી મળીશું ક્યારેક કોઈ વળાંક પર ‘દોસ્ત’, ત્યાં સુધી આ મૌનનો હળવો સત્કાર લઈએ.

Kamini Shah

અભરખા જાગ્યાં નાવને પણ દરિયો ખેડવાનાં એંધાણ વરતાય કાશ! કોઈકનાં આગમનનાં… -કામિની

Dada Bhagwan

The upcoming Satsang and Gnanvidhi is happening in Rajkot, India. For detailed information, visit here: https://dbf.adalaj.org/QcKgGKce #spiritualawakening #spirituality #SpiritualKnowledge #DadaBhagwanFoundation #rajkot

Falguni Dost

શબ્દો જો ગોઠવીને બોલવા પડે તો સમજી જવું સબંધમાં ઉણપ છે, દોસ્ત! રૂડાં દેખાતા સબંધમાં પ્રેમની અતિ ઓછપ છે. - ફાલ્ગુની દોસ્ત

Saliil Upadhyay

जब मैं स्कूल में था... एक बहुत ही सुंदर लड़की मुझसे अपना HOME WORK करवाती थी...! मैं खुशी खुशी कर देता था...! सब लड़के मुझसे जलते ..! किस्मत से उसी लड़की से मेरी शादी हो गई...। पर उसकी पुरानी आदत नही छूटी ...! वो अब भी मुझसे ही अपना HOME WORK करवाती है..! अब उसकी सब सहेलियां उससे जलती हैं !! ठोको ताली...!

Chaitanya Joshi

કર્મપ્રધાન છે જગત આખું. એથી વિશેષ કોને હું સ્થાપું? છે કર્મની તો સત્તા વિશાળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. ચારે જુગમાં છે એનો પ્રભાવ. કરોને પામો એ એનો સ્વભાવ. ક્યારેક કર્મ નાનું , કદી વિકરાળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. એની આગળ ઈશ પણ હારે. નાવ ડૂબાડે કે લાવે એ કિનારે. કુકર્મો કરવાનું મનવા તું ટાળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. તારું કિસ્મત છે તારે જ હાથ, એમાં કૈં ના કરે જગતનો નાથ. તજવી ઘટે માયાની મધલાળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. સર્વોપરી સત્તા એની જ ગણાય, ના હસ્તક્ષેપ ઈશનો ત્યાં જણાય. મનવા પાણી પહેલાં બાંધવી પાળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. ભોગવ્યાવિણ ના થાય છૂટકારો, સિદ્ધાંત કર્મનો હોય સૌથી ન્યારો. ખડકાતા જાય માળ ઉપર માળ, કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ. - ચૈતન્ય જોષી. &#34; દીપક &#34; પોરબંદર.

Kaushik Dave

जय राधे श्याम 🙏

Shailesh Joshi

વર્તમાન એક એવો મોકો છે, જે આપણને આપણી ભૂતકાળની ભૂલો સુધારવાનો, અને આપણા સારા ભવિષ્યનું માળખું તૈયાર કરવાનો સમય આપે છે. - Shailesh Joshi

Neha kariyaal

आने वाला कल कितना भी बुरा हो सकता लेकिन वो मेरे बीते कल से तो अच्छा ही होगा। 🌼💜

Bhavesh Tejani

ઝાંખી ઝાંખીને જોયુ છે મેં એમની આંખોમાં મુઠ્ઠીભર જગ્યા પણ મારી ના શોધી શક્યો.

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास अपनी सुनाई दिवानगी जब अपनी सुनाई दिवानगी तो जान से भी गया l आगे बढ़ने की ख्वाइशों में उड़ान से भी गया ll बोझ समझकर एक के बाद एक छोड़ता ही गया l कारवाँ के साथ साथ चलते सामान से भी गया ll &#34;सखी&#34; डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

DrAnamika

वक्त को हाराकर जो जग जीता उसे ही मिला तख्तोताज़-- विकट परिस्थितियों में छीपा था उनके जीवन का राज--- --#डॉ_अनामिका--- #हिंदी_काव्य #हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_पंक्तियाँ

Imaran

मैंने खुदा से पूछा वो क्यों छोड़ गया मुझे, उसकी क्या मजबूरी थी, खुदा ने कहा न कसूर तेरा था न गलती उसकी थी, मैंने ये कहानी लिखी ही अधूरी थी ✍️imran ✍️

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

न स सखा यो न ददाति सख्ये। ऋगुवेद --10/117/4 भाव--जो मित्र सहायता नहीं करता, वह मित्र नहीं है।

Roshan baiplawat

new emotional shayari 💔🥀

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

तिरस्कार कर पिता को, जब सुत करता तंग। शाप निकलता हृदय से, देख पुत्र का रंग।। दोहा--407 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----गणेश तिवारी &#39;नैश&#39;

संजय कुमार दवे

હર હર મહાદેવ 🙏🚩

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

Radha Rani

हम सोचते हैं कि क्या है मुझमें जिससे मेरी पहचान बने, नहीं है कोई ऐसा हुनर दिखावे का जो मेरी पहचान बने, कभी कभी कुछ हुनर दिखावे के मोहताज नहीं होते जिनकी की पहचान बने,वक़्त आने पर हम भी चमकने की ताकत रखते हैं पर चुप है सही वक़्त पर मेरी पहचान बने

Bhavesh Tejani

શબ્દ નહિ, સંકેત નહિ, તે પૂછવું કઈ રીત થી ? આંસુ જે કદી આવ્યું જ નહિ તે લુછવું કઈ રીત થી ?

Abhishek Chaturvedi

परिवर्तन ख़ुद से शुरू होता है....

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

भाइयों और बहनों, कल से गणेश तिवारी &#39;नैश&#39; द्वारा लिखी हुयी पुस्तक &#39;वेदों की सूक्तियों&#39; से नित्य एक सूक्ति का प्रसारण नैशपीठ आध्यात्मिक ऊर्जा केन्द्र नरायनपुर जयसिंह के ॐ चो कु रे ध्वज से होने जा रहा है। आप नैश के दोहे के साथ इसे भी हृदय से स्वीकार कीजिए।- ---नैशपीठ

Saroj Prajapati

मोहब्बत पर हमारी यूं उंगली ना उठाओ बेवफाई का हम पर यूं झूठा इल्जाम लगाओ इश्क करते हैं तुमसे बेइंतहा ये मालूम है तुम्हें फिर भी ना हो यकीं तो अपने दिल से पूछ लो जाओ। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Rima

बिना दाँतों वाला प्यार मेरे दादाजी… आज आप इस दुनिया में नहीं हो, पर मेरी हर थकी हुई साँस आज भी आपको ढूँढती है। आपके मुँह में एक भी दाँत नहीं था, फिर भी चाय आपको बहुत पसंद थी— गरम प्याली हाथों में लेकर आप ज़िंदगी को धीरे-धीरे जीते थे। मैं जब भी आपके पास जाती, आप बिना कुछ कहे मेरे गाल को प्यार से काट लेते थे। वो दर्द नहीं होता था, वो प्यार होता था— बिल्कुल वैसा जैसे पाँच-छह महीने का बच्चा अपनी माँ से लिपटकर अपना सारा प्यार जता देता है। मैं आपकी सबसे प्यारी थी, और आप मेरे सबसे अपने। आपका प्यार शब्दों में नहीं था, वो चुपचाप मेरी पूरी ज़िंदगी सँभाल लेता था। जब आप प्यार से मेरा नाम लेकर पुकारते थे, वो आवाज़ आज भी कानों में गूँज जाती है। लगता है जैसे अभी कहेंगे— “आ जा बेटा…” जब आप अपने हाथों से मुझे खिलाते थे, तो लगता था जैसे ज़िंदगी मुझे दोनों हाथों से थाम रही हो। आपकी कहानियाँ, आपका चुपचाप बैठने का तरीक़ा, वो नज़र जो बिना बोले सब कह जाती थी— सब कुछ याद आता है दादाजी, एक-एक पल। फिर वो वक़्त आया जब आप धीरे-धीरे सबको भूलने लगे। दुनिया आपसे फिसलती चली गई, पर आपने मुझे नहीं भूला। और मैं खुद को बेहद ख़ुशनसीब मानती हूँ कि मैं आपकी सेवा कर पाई, आपको अपने बच्चे की तरह सँभाल पाई। वो दिन… जब मैं आपकी बेटी भी थी, माँ भी, और आपकी पूरी दुनिया भी। आज आप नहीं हो, और आपके साथ मेरा मायका भी नहीं रहा। घर वही है, पर वो सुकून, वो प्यार, वो छाया— सब आपके साथ चला गया। लोग कहते हैं वक़्त सब भुला देता है, पर कोई ये नहीं कहता कि कुछ प्यार याद बनकर नहीं, दुआ बनकर ज़िंदगी भर साथ रहते हैं। आज भी जब चाय की ख़ुशबू आती है, तो आँखें भर आती हैं— शायद आप कहीं दूर नहीं, आज भी बिना दाँतों के अपनी प्यारी-सी बच्ची को प्यार जता रहे हों। दादाजी… आपका वो बिना दाँतों वाला प्यार आज भी मेरी सबसे बड़ी ताक़त है।

Mrugzal

કેટલું બેઈમાન છે આ દિલ પણ, ધબકે છે મારા માટે અને તડપે છે ચાય માટે.... #TeaLover #ચાયના_સથવારે #Mrugzal #મરુભુમીના_માનવી

Sudhir Srivastava

संत रविदास जयंती (०१ फरवरी) पर विशेष चौपाई माघ मास पूनम को जन्में। भक्ति भाव था खासा जिनमें।। पितु संतोष मातु हैं कर्मा। रविदास ईश प्रभु धर्मा।। कर्मशील प्राणी रविदासा। रखता सदा ईश विश्वासा।। समाजिक सुधार थे लाए। संत शिरोमणि आप कहाए।। सामाजिक सद्भाव दिखाया । जाति पाति का भेद मिटाया॥ निश्चल धारा भक्ति बहाया। जीवन का फिर सार बताया॥ कर्म निरंतर करते रहते। ध्यान मगन रह सदा विचरते।। गंगा मैय्या आप थीं आईं। लाज भक्त की मातु बचाईं।। कभी नहीं मन मैला राखा। ईश कृपा का फल था चाखा।। धर्म कर्म की ज्योति जगाए। योगी संत सुजान कहाए।। छोटा-बड़ा कर्म नहीं माना। ईश कृपा को सबमें माना।। भटक रहा क्यों प्राणी जग में। ईश्वर तो है तेरे मन में।। मीराबाई गुरु रैदासा। सतपथ पर उनका विश्वासा।। गुरु ग्रंथ में जगह हैं पाए। भक्ति भजन रसधार बहाए। सत्य मार्ग दर्शाए ज्ञानी। दुनिया कहती आप कहानी।। मीरा के गुरु पद अनुरागी। अद्भुत संत दास बैरागी।। जन्म जयंती आज मनाऊँ। श्रद्धा से नित पुष्प चढ़ाऊँ। नमन आपको शत-शत बारा। शीश झुकाए सब संसारा।। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

चौपाई - हनुमंत लाल धर्म आड़ जो पाप हैं करते। जहर बीज का बोते रहते।। कब उनका उपचार करोगे। पापमुक्त कब धरा करोगे।। सुनहु बात अंजनि के लाला। मुख उनका अब करिए काला।। आप नहीं अब देर लगाओ। पापी सारे मार भगाओ।। हनुमत की मिलकर जय बोलो। केवल मीठा-मीठा बोलो।। राम भक्त बजरंगी प्यारे। हर मुश्किल से सदा उबारे।। सीता जी की खोज किया था। तांडव लंका दहन किया था।। संजीवनी शैल थे लाये। लक्ष्मण मुर्छा मुक्त कराए।। प्रभु राम के सबसे प्यारे। सीता माँ के बड़े दुलारे।। बोले भाले हनुमत लाला। धाम अवध में डेरा डाला।। उनको जो भी शीश झुकाता। रोग शोक उसका भी जाता।। सेवक बन जो जोड़े नाता। कृपा राम जी की वो पाता।। प्रभु भक्त की लज्जा रखिए। रोग शोक संकट सब हरिए।। आप चरण हम शीश झुकाएं। कृपा करो नहिं कष्ट उठाएं।। ******* चौपाई- शनिदेव ****** शनीदेव जी किरपा कीजै। भक्तों के सब दुख हर लीजै।। भक्त आपके डरे हुए हैं। रोग शोक से घिरे हुए हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

शहीद दिवस (३० जनवरी) पर विशेष अहिंसा परमो धर्म *********** राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज देश शहीद दिवस मना रहा है, शहीदों को याद कर नमन कर रहा है, सच मानिए! सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है। विचार कीजिए! कि जिस बापू की पुण्यतिथि पर देश आज शहीद दिवस मना रहा है, उस बापू के सर्व-धर्म समभाव और सत्य-अहिंसा के संदेश का भला कितना अनुसरण कर रहा है? अहिंसा परमो धर्म: की राह पर चल रहा है? अन्याय का कितना नैतिक प्रतिकार कर रहा है? स्वच्छता, नैतिकता, सादगी, स्वालंबन का कितना अनुसरण कर रहा है? दीन-दुखियों की सेवा को कितना मानव धर्म समझ रहा है? श्रम को पूजा मान कितना परिश्रम कर रहा है? निज राष्ट्र को जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र, ऊँच- नीच, भेदभाव से ऊपर कहां मान रहा है? गाँधी जी के आदर्शो पर भला कितने कदम चल रहा है? आजादी और शहीदों को सचमुच सम्मान दे रहा है? आज जनमानस के लिए प्रश्न बड़ा गंभीर है, जिसका उत्तर हम सबको तलाशने की जरूरत है, मगर उससे पहले खुद में झाँकने की जरूरत है। अपवादों का उदाहरण देकर पीठ मत थपथपाइए, भ्रष्टाचार, अत्याचार, विविध संघर्ष राजनीति विद्वेष, निजी स्वार्थ और नैतिक मूल्यों के अवमूल्यन पर भी जरा नजर दौड़ाइए। शहीद दिवस की आड़ में बापू की गरिमा को अब और नीचे तो न गिराइए, शहीदों की आत्माओं को तो न रुलाइए, यही समय है, सही समय है, अब तो संभल जाइए दिखावे की परिपाटी पर विराम लगाइए, राष्ट्र पिता और शहीदों को भले ही भूल जाइए राष्ट्र भक्त बनिए न बनिए कम से कम आज शहीद दिवस पर राष्ट्र भक्त इंसान बनकर तो दिखाइए तब जाकर शहीदों को श्रद्धा से शीश झुकाइए बापू की आत्मा को भी गर्व का अहसास कराइए। वंदेमातरम् और रामधुन साथ -साथ गाइए, और तब ही आप शहीद दिवस पर मनाइए, औपचारिकता निभाने से अब बाज आ जाइए अहिंसा परमो धर्म: का संदेश फैलाइए। सुधीर श्रीवास्तव

Jyoti Gupta

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Zarnaba

Sometimes - When you&#39;re tired, aggressive and alone but you have your MOTHER and she is calling you at same time and say you are angry so take care of yourself ....so you forget everything and feeling some different 🤌🏻 - Zarnaba

Paagla

https://youtube.com/shorts/BJwA0OvfNYY?si&#61;R6WIAMyLved98DX0

vrinda

m - vrinda

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1RfLK745n6/

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/nR5RQDlSoOs?si&#61;hzc2j3ZhzZjYXYV6 “छाया युद्ध | 7वीं सदी का रहस्यमयी खेल | Hindi Mystery Story”

Falguni Dost

ચાના દરેક ઘૂંટડે તારી યાદ રગે રગમાં હજુ પણ પ્રસરે છે, ક્ષણભરનો એ પ્રેમાળ સાથ યાદરૂપે જીવનને રોજ સ્પર્શે છે, તારીખ, મહિના, વર્ષો બધું જ બદલ્યું દોસ્ત! એજ રહી ચા અને ચાહ જે હજુ હૃદયની ભીતરે છે. - ફાલ્ગુની દોસ્ત

ek archana arpan tane

રેતી પર હોડી ચલાવો કે પાણી પર મારે શું?હું જ મારી રાખ ઓઢીને સુઇ જઈશ તમે ગમે તેટલો શોર મચાવો મારે શું? - ek archana arpan tane

Gori

वो बहुत बोलने वाली लड़की अब शांत सी हो गई है... सबको खुश रखने वाली लड़की खुद उदास सी हो गई है..... वो जो रिश्ते निभाती थी पूरे दिल से कभी, अब वो रिश्तो से हट गई हैं... शायद दिल दुखा होगा बहुत उसका यूं ही तो पत्थर दिल नहीं हो गई है... वो बहुत हसने वाली लड़की जो सिर्फ मुस्कुराने पर आ गई है... उसने खाए होंगे धोखे जमीन वालो से तभी तो चांद की बातों में आ गई है... वो अल्लड़ बेबाक सी लड़की अब खुद को बहलाने में आ गई है... वो खुशमिजाज वाली लड़की खुद को समझने पर आ गई... वो बहुत बोलने वाली लड़की अब शांत सी हो गई है... सबको खुश रखने वाली लड़की खुद उदास सी हो गई है.. वो जो रिश्ते निभाती थी पूरे दिल से कभी, अब वो रिश्तो से हट गई हैं... शायद दिल दुखा होगा बहुत उसका यूं ही तो पत्थर दिल नहीं हो गई है... वो बहुत हसने वाली लड़की जो सिर्फ मुस्कुराने पर आ गई है... उसने खाए होंगे धोखे जमीं वालो से तभी तो चांद की बातों में आ गई है... वो अल्लड़ बेबाक सी लड़की अब खुद को बहलाने में आ गई है... वो खुशमिजाज वाली लड़की खुद को समझने पर आ गई...!! - Gori💙🤍

Bhavna Bhatt

પૌરાણિક પાણી સંગ્રહ

Gautam Patel

जय हनुमान

MASHAALLHA KHAN

मै उस कहानी का मैन किरदार हूं जिस कहानी को कोई समझ पाया नही लोग आते है पन्ने पटल जाते है कहानी कोई पूरी पढ़ पाया नही. M......

MASHAALLHA KHAN

हम उनके लिए कभी कुछ ना थे फिर भी हम उनके कदरदान थे कभी अश्क आये ना आंखो मे थे जब भी आये वो वजह हर बार थे . M.....

Anup Gajare

&#34;भीड़ बनाम…&#34; ____________________________________________________ गुजरती हैं भेड़ कि तरह हड्डियां भी। अस्थिया नहीं चाहती उनके बीच किसी नाम अनंत,अनाम सत्ता को। जिसकी भीड़ खाई में कूदी उनकी आबादी ज्यादा थी या कम से कम गठरियों को कोई फर्क नहीं पडा किस भेड़िए की जुबान क्या मांग करती है वे जानते हैं जानते हैं कि खाई से भी बड़ा है लकड़बग्घों का पेट। चीखती भेड़ें, दौड़ती भेड़ें, निर्मम भेड़े, प्यासी भेड़े, कितना छोटा समूह अलाव में जलता है कितनों की खाल बिक्री नहीं हो पाती वासना अनंत है हड्डियां मर्यादित। क्या हो सकता है से ज्यादा क्या होना चाहिए इसपर कोई माइक नहीं बोलता स्टेज के ढांचे पर मुर्दा वही प्रश्न पूछता है जो उसने कभी न देखे हो। कुपोषित भेड़ों के बारे में न तो किसीको खबर है न ही दरिद्रता से भरी भेड़ों को कोई जानता है। सबका अपना अलग विकास है सपने सा विकास। झूठ बोलने वाला डिस्क्रिप्शन में लिखा ही नहीं जाता भेड़ों को सब पता है वे जानती हैं किसकी जेब में कितनी हरी घास हैं। सुझाव कोई नहीं देता ये भ्रम है खाई से उपजा भ्रम जिसे कोई भूख मिटा नहीं सकी। दुनिया चलती है क्या फर्क पड़ता है उनको पलाना है इसी जगह में जिसकी हड्डियां तूती उसको भी दवा नसीब नहीं होती सब भेड़े जागते हुए बेहोशी कि नींद में भेड़ियों का इंतजार करती है। और इसी तरह गुजर जाते है पांच साल जैसे गुजरती है भेड़े। ____________________________________________________

Akanksha srivastava

शब्द ------- शब्द बहुत खास होते है। दिल से निकले तो जज्बात बन जाते है। मन से निकले तो कहानियाँ रच जाते है। दुआओं के रूप में निकले तो आशीर्वाद बन जाते है। भावनाओं का रूप ले तो प्रेम गढ़ जाते है। संवेदना बनकर किसी का हित कर जाते है। प्रेरणा का दीप बने तो जीवन सँवार जाते है। भक्ति बने तो भजन का स्वर बन जाते है। और शक्ति बनकर हथियार का रूप ले लेते है। सच ही है की शब्द दुनिया बदलने की ताकत रखते है।

mohanmurarisharma

कोई आजकल ब्रेकअप के लिए नही रोता है.. क्योंकि आजकल विकल्प सुलभ होता है..

Akanksha srivastava

समझदारी की दस्तक --------------------------- बचपन की वो शाम शायद उस दिन खत्म हो गयी, जब हमारे शौक जिम्मेदारियों में तब्दील हो गए। जिस दिन हमने गिरने से ज्यादा खुद को संभालना सीख लिया। बोलने से पहले सोचना सीख लिया। जिद करने से पहले मान जाना सीख लिया। पैर फैलाने से पहले चादर मापना सीख लिया। रिश्तें निभाने से पहले उन्हें परखना सीख लिया। और शायद तभी से हम बड़े कहलाने लगे।

Kamini Shah

સહનશક્તિની પણ એક હદ હોય ને પછી વાંસળી ની જગ્યાએ સુદર્શનચક્ર હોય… -કામિની

Meera Singh

यादों का बोझ बहुत लेकर चले क्यों न अब थोड़ी देर ठहर लिया जाए। बहुत जी लिए अब तुम बिन हम क्यों न अब मर लिया जाए। । मीरा सिंह

Bhavesh Tejani

સન્નાટો તારા વિખૂટા પડ્યા પછીનો, અતીશય વ્હાલ કરે છે મને, અહીં બસ હું છું, તારા સ્મરણો છે, ત્રીજા કોઈને મનાઈ છે આવવાની અહીં...

Soni shakya

कभी-कभी सोचती हूं, मैं भी उसके जैसी बन जाऊं..! पर दिल कहता है नहीं, तुम &#39;वो&#39; नहीं हो..!! - Soni shakya

Shailesh Joshi

મિત્રો બે પાંચ મિનિટનો સમય કાઢીને પણ એકવાર આપણી પોતાની આસપાસના લોકો, કે પછી કોઈપણ રીતે આપણે જે જે લોકોને ઓળખતા હોઈએ એમની ઉપર, થોડો ઊંડો અભ્યાસ કરી જોજો કે એમાંથી, ગમે તે કરીને પણ મોજશોખ કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? અને પોતાના જોરે મોજશોખ પૂરા કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? પછી આપણને ખ્યાલ આવી જશે કે, આપણા બધાના જીવનમાં જરૂરી સુખ, શાંતિ અને આનંદ ક્યારે, કેટલો અને કેવી રીતે આવે ? જુઓ ટૂંકમાં સફળ જીવનનો સાર બતાવતો Motivation youtubeshorts gujarati #quotes 👇 આભાર https://youtube.com/shorts/hNLevJPxeUA?si&#61;0_mi7MNsJ0Cc_jiX

Pragna Ruparel

આપણી દીકરી ટીનએજ ની દીકરીઓને પ્રેમ થઈ જાય છે.તે નવી વાત નથી પણ એને સામે નું પાત્ર કેવું છે.એ જોવાનું કહેવું.અને આ દોરમાંથી સેફ( યાને કે સલામતી) નીકળે એવી તમારે એને હિંમત આપવી.અને સમજાવવું ને જરૂર પડે તો મેન્ટોર ની મદદ લઈ .અને કાઉન્સેલિંગ કરાવવું પણ એને તમારે કેર પણ ખુબજ કરવી. જય સ્વામીનારાયણ

Mrugzal

હે....મૃગજળ હર એક ઘૂંટ સુકુન સે ભરી હૈ, મેં કૈસે કહ દુ કી ચાય બૂરી હૈ…

Dada Bhagwan

પ્રસ્તુત પદ &#34;વર્તમાને જિનેશ્વર સીમંધર સ્વામી&#34; દ્વારા વર્તમાન જિનેશ્વર શ્રી સીમંધર સ્વામી કે જે કેવળજ્ઞાન સહિત છે અને આપણને મોક્ષ પ્રાપ્ત કરવા માટે માર્ગદર્શન પૂરું પાડે એ માટે પ્રાર્થના કરીએ. Watch here: https://youtu.be/r99jMP9z1U0 #devotionalmusic #devotionalsongs #bhakti #bhaktisongs #DadaBhagwanFoundation

Arth Shah

Once, before memory began, the world was not yet a name. It was a breathing field of possibilities, a restless sea of forms waiting to awaken. Out of that darkness, came a whisper — and the whisper became wind, and the wind began shaping faces. From single cells to scales and feathers, from coral to the first cry of a newborn — the Earth became a vast asylum of creation, a fever dream of variation. It bore everything: beasts with teeth like mountains, trees that spoke in seasons, civilizations that reached for the sun and burned their own wings. Billions of voices bloomed — and just as swiftly, fell silent. Species came and vanished like sparks struck from eternity’s stone. The oceans rose and swallowed empires. The stars watched — patient, cold, indifferent. And yet in that constant vanishing, something miraculous occurred: the awareness of loss. Somewhere among the ruins and pollen, a creature began to remember. It built altars, wrote songs, buried its dead. It called itself human. It looked at the passing clouds and felt sorrow — and named that sorrow beauty. It saw youth fade, flowers wilt, and dreams dissolve — and called that meaning. It wept at what it could not keep — and thought, perhaps, that love was real. But everything it clung to — its gods, empires, and names — slipped quietly into dust. For nothing the world makes lasts longer than the breath that makes it. Each child is a comet — burning only long enough to illuminate the night of its own creation. And still, they come — these fragile sparks — laughing, building, touching, hoping. They paint the world with their fleeting colors, forgetting that even the hand that paints will fade. Yet maybe that’s the secret: that only what dies can be beautiful. The eternal cannot shimmer — it merely is. But the transient — the breaking wave, the falling leaf, the human life trembling between birth and disappearance — carries a light no infinity can hold. Because to know that you are temporary, and still to smile — that is the rarest grace. And so, this vast garden blooms and withers endlessly. Everything that ever lived, lives still — as memory, as dust, as warmth in the unseen air. Each form returns to silence, not in tragedy, but in rhythm. The story was never about survival. It was always about the momentary glimmer — that fragile awareness in the dark. The world is not beautiful despite its impermanence. It is beautiful because of it.

वात्सल्य

*જે ક્ષુપ,છોડ,વૃક્ષ પર પર્ણ,ફૂલ,ફળ લાગે છે,તે હંમેશાઁ ઝૂકેલા જોવા મળશે.* 🌺 *તે છોડ,ક્ષુપ,છોડ પર કાંટા હોય તો તે સખત,વાંકા અને સીધા આકારે જોવા મળે છે.* *છતાં પર્ણ,ફૂલ,ફળ સાવચેત રહી જીવે છે.* - વાત્સલ્ય

Jyoti Gupta

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kajal jha

तेरी यादों का साया हर पल साथ रहता है, दिल की धड़कनों में बस तेरा ही नाम रहता है। चाँदनी रातों में तेरा चेहरा नज़र आता है, ख़्वाबों की दुनिया में तू ही तू समा जाता है। तेरी हँसी से रोशन है मेरी ज़िंदगी का जहाँ, तेरे बिना लगता है सब कुछ वीरान। मोहब्बत की राहों में तेरा ही सहारा है, दिल कहता है तू ही मेरी दुनिया सारा है। - kajal jha

Imaran

मौत का Kuch पता Nahi✖ है इसलिए बात कर लिया करो, Kiya पता फिर Yaad😓 करो Aur तब Ham न रहे 😂imran 😂

Pandya Rimple

अपनी दुनिया को चुनिंदा लोगों तक सीमित रखिए, क्यूंकि अत्यधिक कुछ भी हो वो हानिकारक ही होता है। -Pandya Rimple @shabdo_ni_suvas_

mohanmurarisharma

कितने ही अच्छे बन लो लेकिन कभी तुम्हारी कोई एक बात तुम्हारी निन्यानवे अच्छाइयों पर भारी पड़ जायेगी.. और तुम बुरे लगने लगोगे..

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास सुहाना मौसम सुहाने मौसम की रवानी चित को बहका गई l पहचानी सी आहट धड़कनों को धड़का गई ll दिखने में तो बड़ा दिवाना लगता है नखराला l जब चाहे बदल जाने की अदाएं भड़का गई ll इश्क़ की फितरत तो देखो भरी महफिल में l हुस्न मालिका के रूख से नकाब सरका गई ll &#34;सखी&#34; डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

वात्सल्य

*જલસા કરો તેનો કોઇ વિરોધ નથી,પરંતુ આવકની મર્યાદામાં કરો,કોઈને બોજ ના બનો.કોઈના ઓશિયાળા બની ના જીવો.પૂર્વજની કે પપ્પાની પુંજી પર પાગલપણ એ સમય જતાં પોતાના પગ પર કુહાડી મારવા સમાન છે.પોતાની વીસ-બાવીસ વર્ષની ઉમર પછી સંતાને કોઈના પર બોજ ના બનતાં મનમાં માનેલાં સોણલાં સાકાર કરવાની ઉંમરે ઊંઘી રહેશો તો વૃદ્ધત્વ વહેલું નક્કી સમજો.શુભ સવાર.* . - વાત્સલ્ય

Parag gandhi

*માણસ ને ભરપૂર માત્રા માં જો કંઇ મળ્યું હોય તો એ છે બુદ્ધિ.....* *કારણકે આજ દિવસ સુધી કોઈએ ફરિયાદ નથી કરી કે મારામાં ઓછી છે...*🆖💘🌹💫 *💥શુભ સવાર💥*

sachit karmi

जिवन मे प्रेम कि सच्चाई

Std Maurya

शीर्षक -&#34;विदाई&#34; फूलों की महक मिल रही, उम्र धीरे-धीरे गुजर रही, वह पुराना समय अब कहाँ से आएगा? ​हम थे बागों की चहल-पहल, मगर वो पुराने बाग कहाँ से आएंगे? चिड़ियों की आवाज़ में हम मगन थे, मगर वो चिड़िया अब कहाँ से आएगी? ​कुछ फूलों से मिले, कुछ फूलों से दूर हो गए, मगर वह पुराना समय अब कहाँ पर आएगा? ​अब सुनो मेरी इन नन्हीं कलियों, हम तो बागों में रहने वाले फूल थे, अब हम खिल गए हैं, इसलिए बागों में जगह कहाँ? ​दस्तूर है हर बाग का, खिल कर महकना पड़ता बागों के आँगन में, न महको तो फिर तुम फूल कहाँ? ​सुनिए मेरे बागों के माली, हम आपको कोटि-कोटि करते हैं प्रणाम, आपने ही सींचा है हमें अपनी ममता से, अब महक कर दुनिया में रोशन करेंगे आपका नाम। कुछ हसीन शब्दों से कुछ सुनहरे रंगों से आपका किताबों के हऱ पन्नों में लिख दूँगा नाम कलम नहीं मेरी जादू है मगर दिया हुआ तों आप लोगो वरदान हैं -सत्येंद्र कुमार &#34;एसटीडी &#34;✍️ #stdmaurya #stdpoem

Std Maurya

&#34;इश्क की किताब हम भी लिखेंगे, अभी अपने रक्त से इंकलाब लिख रहा हूँ। रक्त बच जाने दो, फिर हम भी अपनी अधूरी मोहब्बत का हिसाब लिखेंगे।&#34; - Std Maurya

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

पिता कार्य में पुत्र भल, सदा बँटाए हाथ। काम बढ़ाए पिता का, और निभाए साथ।। दोहा --407 (नैश के दोहे से उद्धृत) ----गणेश तिवारी &#39;नैश&#39;

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

મનોજ નાવડીયા

મને કઈ નહિં આપતા, આ શ્વાસ પર ઉધારના ચાલે છે, તું આવ્યો ખાલી હાથે, આ તન પર ભાર લાગે છે, તારી સઘળી અનંત ઈચ્છાઓ, આ મન પણ ભાગ માગે છે, તું શુન્યવત બની જાય તો, આ બધું નહીવત લાગે છે. મનોજ નાવડીયા

संजय कुमार दवे

હર હર મહાદેવ 🙏🚩

smita

तेरी सांवली सूरत पर जब मुस्कान आती है,😊 मेरी धड़कन तेरा नाम गुनगुना जाती है।💖

Sonu Kumar

क्या भारत में सैन्य विद्रोह द्वारा तख्तापलट हो सकता है ? बिलकुल हो सकता है। पुलिस के अलावा भारत के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के पास या नागरिको के पास सेना को रोकने के लिए हथियार नहीं है !! वास्तविक अर्थो में भारत में सबसे ताकतवर संस्था सेना है। सेना के पास हथियार है, हथियार चलाने का प्रशिक्षण है, आदेशो का पालन करवाने और आदेश देने के लिए पद सोपान प्रक्रिया है और वांछित अनुशासन है। दुसरे नंबर पर सबसे शक्तिशाली संस्था पुलिस है। किन्तु भारत की पुलिस के पास सेना की तुलना में नगण्य हथियार है, अतः यदि सेना टेक ओवर करती है, और पुलिस सेना का विरोध करती है तो पुलिस सेना के सामने कुछ घंटें भी नहीं टिकेगी। भारत की सेना जनरल के कंट्रोल में है, और जनरल पीएम से आदेश लेता है। यदि सेना के कनिष्ठ अधिकारी यह मानने लगते है कि भारत का प्रधानमन्त्री भ्रष्ट या निकम्मा है और देश को गड्ढे में धकेल रहा है. या फिर उन्हें यह लगने लगता है कि पीएम को हटा दिया जाना चाहिए, और यदि ऐसे में जनरल अपने कुछ बरिष्ठ अधिकारियो के साथ मिलकर तख्ता पलट की योजना बनाता है तो जनरल भारत में तख्ता पलट करने में सफल हो सकता है। या मान लो कि जनरल का मूड बन जाता है और यदि जनरल अपने अधीनस्थ अधिकारियो के साथ तख्ता पलट की कोशिश करता है तो उसे रोकने वाला कोई नहीं है है !! ऐसी स्थिति में सेना को सिर्फ भारत के नागरिक ही रोक सकते है, किन्तु भारत के नागरिक हथियार विहीन है, अतः यदि भारत की सेना विद्रोह कर देती है, तो भारत के नागरिको को फौजी शासन स्वीकार करना होगा। यदि नागरिक सेना के खिलाफ छुट पुट प्रदर्शन करते है तो सेना फायरिंग खोल कर उन्हें आसानी से दबा सकती है। 100-200 नागरिको के गोलियां लगने के बाद नागरिक समझ लेंगे कि प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं है। और तब सेना खुद को राष्ट्रवादी और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी बता कर मामला रफा दफा कर सकता है। भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। क्योंकि जनरल को यह संदेह रहता है कि तख्ता पलट में कनिष्ठ अधिकारी एवं सैनिक जनरल का साथ देंगे या नहीं। किन्तु यदि कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहते है तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल आसानी से तख्ता पलट कर सकेगा। जिस देश में राजनेता बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण से बाहर होने लगते है और वे नेताओं को काबू नहीं कर पाते तो ऐसे हालात में विदेशी ताकतें (विशेष तौर पर अमेरिका) देश को कंट्रोल में लेने के लिए सेना का इस्तेमाल करती है। भारत में फिलहाल ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं है क्योंकि भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों के सभी नेता पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथो बिके हुए है अतः उन्हें अपना एजेंडा भारत में लागू करने के लिए सेना की जरूरत नहीं है। हालांकि भारत में दो बार ऐसे हालात बने थे जब सेना द्वारा तख्ता पलट की कमजोर सम्भावना होने के संकेत मिलते है। 1) जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन शुरू किया, बैंको का राष्ट्रीयकरण कर दिया, पाकिस्तान के दो टुकड़े किये और अमेरिका के आगे झुकने से इनकार कर दिया तो अमेरिका ने पहले उन्हें भ्रष्ट जजों (इलाहाबाद का हाई कोर्ट जज जगमोहन लाल सिन्हा) के माध्यम से गिराने की कोशिश की। जब इंदिरा जी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर ताले लगवा दिए तो उन्होंने इंदिरा जी का तख्ता पलटने के लिए सेना को एप्रोच करना शुरू किया था। तब जेपी ने दो बार सार्वजनिक रूप से ऐसी अपील की थी कि यदि इंदिरा गांधी सेना को कोई गलत आदेश देती है तो सेना को उसका पालन करने से मना कर देना चाहिए। और जब पानी सर से ऊपर निकल गया तो इंदिरा जी ने आपातकाल लगाकर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया था। 2) जब देश मनमोहन सिंह से उकताया हुआ था तब. 2012 में जनरल वी के सिंह के कार्यकाल के दौरान हिसार में तैनात &#34;33 आई रेजिमेंट&#34; एवं आगरा की &#34;50 पैरा ब्रिगेड&#34; ने दिल्ली की और कूच किया था। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे रिपोर्ट किया था. घटना उस दिन से एक दिन पहले की है जब वी के सिंह को अपने जन्म प्रमाण पत्र से सम्बन्धित मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था। सरकार को, रक्षा मंत्रालय को और गृह मंत्री को इस मोबिलाईजेशन की कोई जानकारी नहीं थी। लगभग 18 घंटे तक सरकार असमंजस में बनी रही। प्रोटोकोल के अनुसार बिना रक्षा मंत्री की अनुमति के सेना की कोई भी टुकड़ी दिल्ली की और नहीं बढ़ सकती। बाद में सेना ने स्पष्टीकरण दिया कि यह एक रूटीन एवं औचक प्रोसीजर था। सरकार ने यह बात मानी कि उन्हें नोटिफाईड नहीं किया गया था. किन्तु सरकार ने किसी भी प्रकार के कू (coup) की सम्भावना को सिरे से नकारा। https://zeenews.india.com/news/nation/army-moved-two-units-towards-delhi-report 768126.html लोकतंत्र की जननी हथियारबंद नागरिक समाज है। जिस देश के नागरिको की शक्ति उस देश की सेना से अधिक बढ़ जाती है. वहां किसी भी स्थिति में लोकतंत्र का निलम्बन नहीं किया जा सकता। भारत के नागरिक हथियार विहीन है, और यदि सेना विद्रोह कर देती है तो नागरिको के पास उन्हें रोकने के लिए चाकू और नेल क़टर ही है। ब्रिटिश ने सिर्फ । लाख बन्दुक धारियों के माध्यम से भारत के 40 करोड़ नागरिको को 200 सालो तक अपने कंट्रोल में रखा। भारत में 17 लाख की सेना है और सभी हथियारों से लेस है। तो मुकाबले की बात तो भूल ही जाइए। अतः भारत में यदि सेना तख्ता पलट नहीं कर रही है, तो यह केवल चांस की बात है। यदि सेना तख्ता पलट कर देती है तो हम नागरिक &#34;लोकतंत्र वापिस लाओ&#34; के नारे लगाने के सिवा कुछ नहीं कर सकते। https://www.facebook.com/share/p/1C1XiG4uRM/ #वोट_वापसी_पासबुक

Abhishek Chaturvedi

शिवशक्ति:— तपस्या से प्रेम तक.....

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​&#34;कल का गौरव आज रद्दी की ढेरी है... हम उस पीढ़ी के अवशेष हैं जिसकी किस्मत अंधेरी है।&#34;

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