Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Dada Bhagwan
ક્રિયા લાખ અવતાર કરીશ તોય કશું વળશે નહીં. 'પરમ વિનય'થી મોક્ષ છે. 'પરમ વિનય'થી 'સમજ'નાં દ્વાર ખૂલી જાય છે. અહંકાર ઓગળે તો જ 'પરમ વિનય' ઉત્પન્ન થાય. - દાદા ભગવાન
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Raju kumar Chaudhary
🎬 My Contract Wife – Episode 7 (Final Ending)
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें ज़मीन को छू रही थीं। आसमान जैसे आज किसी कहानी का आखिरी पन्ना लिख रहा था।
रागिनी अपने छोटे से क्लिनिक के बाहर खड़ी थी। चेहरे पर सुकून था, लेकिन दिल में कहीं एक अधूरी कहानी अब भी सांस ले रही थी।
तभी पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई—
“रागिनी…”
वह धीरे-धीरे मुड़ी। सामने आरव खड़ा था। वही आरव… लेकिन आज उसकी आँखों में अहंकार नहीं, सच्चाई थी।
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई। सिर्फ बारिश की आवाज़ थी… और दो धड़कनों का शोर।
आरव धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।
“मैं जानता हूँ… मैंने तुम्हें बहुत दर्द दिया है। तुम्हें एक सौदा समझा… तुम्हारी भावनाओं की कदर नहीं की।”
रागिनी ने कुछ नहीं कहा। उसकी आँखें सब सुन रही थीं।
“लेकिन अब… अब मुझे समझ में आया है कि तुम मेरे लिए क्या हो। यह रिश्ता कभी contract नहीं था… यह हमेशा से मेरा सच था।”
रागिनी की आँखों में नमी आ गई, लेकिन इस बार वह चुप नहीं रही।
“सच? सच तो यह है कि जब मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी… तब तुमने मुझे अकेला छोड़ दिया।”
आरव की नजरें झुक गईं।
“मैं मानता हूँ… मैं गलत था। लेकिन क्या मुझे एक मौका मिल सकता है?”
“मौका?” रागिनी हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन उस मुस्कान में दर्द था।
“दिल कोई contract नहीं होता, आरव… जो साइन करके फिर से शुरू कर दिया जाए।”
कुछ पल के लिए दोनों खामोश हो गए।
आरव ने जेब से एक छोटा सा डिब्बा निकाला।
“इस बार कोई contract नहीं है… सिर्फ एक सवाल है।”
वह घुटनों पर बैठ गया।
“क्या तुम मुझसे शादी करोगी… दिल से?”
बारिश अब तेज हो चुकी थी। जैसे आसमान भी इस पल का गवाह बनना चाहता हो।
रागिनी ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में अब कोई झूठ नहीं था… सिर्फ सच्चा प्यार था।
लेकिन फिर भी उसने धीरे से कहा—
“मैं अभी जवाब नहीं दे सकती…”
आरव ने सिर हिलाया।
“मैं इंतजार करूंगा… जितना भी समय लगे।”
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कुछ महीने बाद…
समय ने बहुत कुछ बदल दिया था।
आरव अब पहले जैसा नहीं रहा।
- उसने अपने बिज़नेस में ईमानदारी को प्राथमिकता दी
- लोगों के साथ व्यवहार बदल दिया
- और सबसे बड़ी बात… उसने खुद को बदल दिया
वह अक्सर रागिनी के क्लिनिक के बाहर चुपचाप बैठता, बिना कुछ कहे उसकी मदद करता।
रागिनी यह सब देख रही थी… लेकिन इस बार वह जल्दबाज़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहती थी।
एक दिन, क्लिनिक में एक छोटी लड़की आई।
वह बीमार थी, और उसके पास इलाज के पैसे नहीं थे।
आरव ने बिना कुछ कहे उसकी पूरी मदद की।
रागिनी यह सब देख रही थी।
उस दिन पहली बार उसके दिल ने कहा—
👉 “शायद वह सच में बदल गया है…”
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कुछ दिनों बाद…
वही जगह… वही बारिश…
इस बार रागिनी खुद आरव के सामने खड़ी थी।
“तुम अब भी इंतजार कर रहे हो?” उसने पूछा।
आरव मुस्कुराया—
“तुम्हारे लिए… हमेशा।”
रागिनी ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“इस बार मैं भी एक शर्त रखती हूँ…”
आरव चौंक गया—
“क्या?”
“यह रिश्ता हमेशा सच पर चलेगा… बिना किसी contract के… बिना किसी झूठ के।”
आरव की आँखों में खुशी आ गई।
“मैं वादा करता हूँ।”
रागिनी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा—
“तो फिर… हाँ।” ❤️
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शादी का दिन…
इस बार कोई दिखावा नहीं था…
ना कोई मजबूरी… ना कोई सौदा…
सिर्फ दो दिल थे… जो सच में एक होना चाहते थे।
जब आरव ने रागिनी की मांग में सिंदूर भरा, तो उसकी आँखों में आँसू थे—
लेकिन इस बार ये आँसू दर्द के नहीं… खुशी के थे।
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Ending Scene…
रात का समय था।
दोनों छत पर बैठे थे।
आसमान में चाँद चमक रहा था।
रागिनी ने धीरे से कहा—
“याद है… हमारी शादी कैसे हुई थी?”
आरव हंस पड़ा—
“हाँ… एक contract से…”
“और अब?”
आरव ने उसका हाथ थाम लिया—
“अब यह मेरी जिंदगी की सबसे सच्ची कहानी है।”
रागिनी ने सिर उसके कंधे पर रख दिया।
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Final Line:
👉 “कुछ रिश्ते कागज़ पर शुरू होते हैं…
लेकिन मुकाम दिल तक पहुँच जाते हैं।”
❤️ THE END
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtl
Piyu soul
मैं हालात से नहीं, हालात मुझसे डरते हैं।
I don’t chase success… I create it.
👑 Born to win, not to quit.
🔥 I rise every time I fall.
मैं वो नहीं जो हालात के सामने झुक जाए…
मैं वो हूँ जो हालात को ही बदल दे।
लोग मुझे समझने की कोशिश करते हैं…
लेकिन मैं समझाया नहीं, साबित किया जाता हूँ।
मैं गिरा हूँ… कई बार।
लेकिन हर बार मैंने खुद को पहले से ज्यादा मजबूत पाया है।
अब मैं भीड़ में नहीं चलता…
मैं अपनी राह खुद बनाता हूँ।
क्योंकि मैं सिर्फ जीने के लिए नहीं बना…
मैं जीतने के लिए बना हूँ।
👑 I am not ordinary… I am inevitable.
bhagwat singh naruka
हवस के इस दौर में करो ऐसी
मोहब्बत,
*पहली बार हाथ लगाओ भी तो सिर्फ मांग भरने के लिए...!!*🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏❤️🩹❌❌❤️🩹❌❌❌♥️♥️♥️👨✅✅✅✅👨❤️💋👨👨❤️💋👨👨❤️💋👨👨❤️💋👨👨❤️💋👨👨❤️💋👨👨❤️💋👨
Piyu soul
Silent moves. Loud results.
Ruchi Dixit
कुछ लोगों का जीवन दिल से चलता है
भावना में पलता है ऐसे लोग लाभ -हानि से
परे बेमेल निर्थक जीवन जीते हैं बीच में कोशिश
जरूर करते हैं स्वयं के स्वभाव को
परिवर्तित करने की मगर सदैव
असफल रहते हैं ,,,,,,,,
- Ruchi Dixit
Ruchi Dixit
कभी किसी को आजमाया नहीं है
समझती हूँ सब मैं यह बताया नहीं है,,
खामियों से वाकिफ हूँ खुद की भी
इसीलिए खुद का मोल कभी जताया नहीं है,,,,
- Ruchi Dixit
Mrs Farida Desar foram
जब तक होता है सब्र कर लेती हूँ,
फिर मेरा दिमाग फ़ट जाता है,
और मेरा point to point बोलना,
सामने वाले को harat to brain तक,
फैल कर देता है...😃
- Mrs Farida Desar foram
PR Studio
पूरी कहानी जल्द ही आएगी
Imaran
दर्द की शाम हो या सुख का सवेरा हो
सब कुछ कबूल है अगर साथ तेरा हो
💖Imran 💖
Imaran
Mohabbat Shayari
दर्द की शाम हो या सुख का सवेरा हो
सब कुछ कबूल है अगर साथ तेरा हो
💖imran 💖
Ruchi Dixit
झूठ में जीना भी अच्छा ही है
निभ जाते हैं रिश्ते वो जो
आपके अधिकार
की बात करते हैं जिस दिन
आपने सही मान लिया
और तलाश की उन रिश्तों
मे अपनेअधिकार की जो
यह कहते पाये गये
“मेरी हर एक चीज पर
मुझसे अधिक तुम्हारा अधिकार है ।”
कुछ हाथ नहीं लगेगा केवल
एक सच के अतिरिक्त कहीं कुछ
नहीं था कहीं कुछ नहीं है,,,,,,,,,
- Ruchi Dixit
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
हादसों
पढ़ सको तो पढ़ो एहसास लिखा हैं l
सुख और दु:ख पास पास लिखा हैं ll
मुकम्मल जिंदगी को उतारा उस में l
दुनिया को लगे उपन्यास लिखा हैं ll
सामने था दूर तक फेला समन्दर l
जलजलों के साथ प्यास लिखा हैं ll
घोसलें वीरान कर गया परिंदा सा l
प्यार के दुश्मन को खास लिखा हैं ll
घर छोड़ा अब कोई खौफ़ नहीं है l
हादसों की ज़र्द पे हास लिखा हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Nayana Viradiya
"એક આફ્રિકન કહેવત છે: બિલાડીએ સિંહ બનવું હોય તો ઉંદરો ખાવાનું બંધ કરવું પડે.આ કહેવત શીખવે છે કે સામાન્ય વ્યક્તિ જીવનમાં કંઈ મોટું,નિર્ણાયક,મહત્વપૂર્ણ હાંસલ કરવા માગતી હોય, તો તેણે પોતાની તુચ્છ આદતો અને સીમિત ઇચ્છાઓનો ત્યાગ કરવો પડે."
🍁*શુભ સવાર*🍁
- Nayana Viradiya
Nayana Viradiya
"સંગત કરવી હોય તો હંમેશા સમુદ્ર જેવા વ્યકિતની કરો, જે તમારી બધી વાતો મનમાં સમાવી લેશે. ખાબોચિયા જેવા વ્યકિતની સંગત કરશો તો સમય આવતાં જ છલકાય જશે અને વાતને કીચડની જેમ ફેલાવી દેશે."
🍁*શુભ સવાર*🍁
- Nayana Viradiya
Anish
मौत का दूसरा नाम क्या है जवाब ऐसा देना तुम्हारो profile देखनी पड़ जाए
Ruchi Dixit
एक संबन्ध में कितना भेद
जो पास है वो याद नही जो दूर है उन पर
लुटता स्नेह .......
- Ruchi Dixit
Awantika Palewale
यूँ ही आप हमसे बात नहीं करते,
कुछ तो हमारा भी शरूर होगा,
वरना इस भीड़ भरे सन्नाटे में
आपकी नज़र का यूँ ठहरना।
हर बार मिलते ही मुस्कुरा देना,
फिर बातों को अधूरा छोड़ जाना,
ये आदतें यूँ ही नहीं बनतीं,
इसके पीछे कोई तो कसूर होगा।
हमने तो बस सादगी ओढ़ रखी है,
ना इरादा, ना कोई चाल चली,
पर दिल के आईने में झाँकें अगर,
तो तस्वीर कहीं आपकी भी मिली।
ख़ामोशी में जो बातें उग आती हैं,
वो शब्दों की मोहताज नहीं होतीं,
कभी आँखों से जो कह दी जाएँ,
वो बातें फिर राज़ नहीं होतीं।
आप कहते हैं “बस यूँ ही”,
पर यूँ ही में भी बहुत कुछ होता है,
दिल अगर बेपरवाह होता,
तो ये एहसास क्यों रोता है?
हमने तो हर हद को संभाल कर रखा,
हर कदम नाप-तौल कर उठाया,
फिर भी अगर बात दिल तक पहुँची,
तो क्या ये सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़ कहलाया?
शरारत अगर है, तो दोनों तरफ़ है,
खामोशी की भी अपनी ज़ुबान होती है,
जो समझ जाए बिना कहे सब कुछ,
असल में वही सबसे बड़ी पहचान होती है।
यूँ ही आप हमसे बात नहीं करते,
ये बात अब हम मान चुके हैं,
कुछ तो है जो लफ़्ज़ों से परे है,
जिसे हम भी अब पहचान चुके हैं।
Anish
क्या ये सही बात है
की कहते है लड़कियां चाय में उंगली घुमा दे तो चाय मीठी हो जाती हैं
तो क्या लड़की को पानी की टंकी में डाल देने से
पानी रु अफजा बन सकता है
ये अफवाह नए नए आशिकों ने फैलाई है
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
जिस पर चलतै सद्पुरुष, वही मार्ग सद्मार्ग। बाकी जितने मार्ग हैं, वे सब मार्गं कुमार्ग।।
दोहा---483
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Anish
पुराने जमाने में
मुमताज लैला हीर
कितनी सुंदर लगती थी बिना मेकअप के
और इस जमाने की
तो ताड़का लगती है बिना मेकअप के
Anish
पुराने जमाने के लोग...
बातों से ताना मारते थे
आजकल तो स्टेटस लगा कर ही काम निपटा देते हैं.
kattupaya s
Good morning friends. have a great weekend
સુરજબા ચૌહાણ આર્ય
સુપ્રભાત મિત્રો 🙏🏼
Sonu Kumar
पटाखे जलाना हमारी संस्कृति से जुड़ा है किन्तु पर्यावरण की खातिर क्या आप इनका बहिष्कार करेंगे?
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कृपया कोई ज्यादा बेहतर कारण ढूंढ कर लाइए। क्योंकि दीवाली की आतिशबाजी का पर्यावरण से कोई लेना देना नहीं है। निचे मैंने इससे सम्बंधित कुछ बिंदु दिए है :
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खंड - अ
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(1) आतिशबाजी से हुआ प्रदुषण सिर्फ 3 घंटे के अंदर वातावरण से पूरी तरह गायब हो जाता है !!! ऐसा दिल्ली के रोहिणी स्टेशन पर लगे प्रदूषण मापक सिस्टम के आंकड़ों से सिद्ध होता है। 2013 में आई आई टी कानपुर ने यह अध्ययन किया था !! उन्होंने कई सेम्पल इकट्ठे करके यह जांचा और पाया कि दिवाली के दिन सुबह 4 बजे तक PM2.5 का स्तर फिर से 300 से 375 micrograms तक आ जाता है, जो कि दिल्ली के नियमित दिनों के लिए प्रदुषण का औसत स्तर है। लिंक देखें -
Firecrackers ban in Delhi-NCR: Not just Diwali, what’s SC plan for other periods?
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(2) 2003 में दिल्ली नगर निगम एवं स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिको को आतिशबाजी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा था !!!
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वजह ?
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उन्होंने पाया कि घनघोर आतिशबाजी डेंगू के मच्छरों का नाश कर देती है। और इस लिहाज से आतिशबाजी जरुरी है। आतिशबाजी का धुंवा वातावरण की नमी सोख लेता है और धुंवे के कारण मच्छरों की एक बड़ी आबादी नष्ट हो जाती है। नतीजा : इससे नए मच्छरों के पनपने के अवसर भी कम हो जाते है !! पेड द हिन्दू का लिंक देखें -
Say yes to fire-crackers to control dengue
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2006 में पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ने विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट किया कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरों से निपटने के लिए प्रभावी उपाय है। पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया का लिंक -
Cracker cure | Delhi News - Times of India
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उल्लेखनीय है कि पटाखों से जो धुंआ और गर्मी पैदा होती है वह मच्छरों के लिए तो हानिकारक है लेकिन इंसान के लिए नहीं। क्योंकि आतिशबाजी का धुंआ वातावरण में सिर्फ 3 घंटे ही टिका रह सकता है। सांय 6 बजे से आतिशबाजी शुरू होती है और 11 बजे तक यह बड़े पैमाने पर चलती रहती है। इन पांच घंटो में मच्छर मर जाते है और 2 बजे तक प्रदूषण का स्तर फिर से वही हो जाता है जैसा कि आतिशबाजी से पहले था !!!
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दुसरे शब्दों में, दिल्ली में पिछले 15 सालो से जो आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार चलाया जा रहा है, उसकी वजह से डेंगू एवं अन्य मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया लगता है। और अगर ऐसा है तो मेरे विचार में इन अतिरिक्त मौतों के लिए जिम्मेदार वे लोग है जो मिशनरीज द्वारा नियंत्रित पेड मीडिया की चपेट में आकर दिवाली की आतिशबाजी के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे है !!!
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बहरहाल, हमें किसी विश्वनीय संस्था द्वारा इस बारे में व्यवस्थित तकनिकी अध्ययन करवाए जाने की जरूरत है, ताकि यह बात एकदम साफ़ तौर पर और भी निर्विवाद रूप से निकलकर स्थापित हो सके कि दिवाली की आतिशबाजी मच्छरो की बड़ी आबादी को नष्ट कर देती है। और इसके लिए यह आवश्यक है कि दीवाली के इन 6 घंटो के दौरान एकदम भयंकर वाली आतिशबाजी की जाए।
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यदि मच्छरों पर दिवाली की आतिशबाजी का प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट हो जाता है तो सरकार को देश व्यापी प्रचार अभियान चलाना चाहिए जिससे नागरिक दिवाली पर आतिशबाजी करने को प्रोत्साहित हो !!
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(3) दिवाली पर प्रदूषण बढ़ जाता है क्योंकि ज्यादातर लोग खरीददारी करने के लिए वाहन लेकर निकलते है। माल की खपत ज्यादा होने से ट्रको का परिवहन भी बढ़ता है और और इस वजह से भी प्रदुषण बढ़ जाता है। दूसरे शब्दों में , दिवाली पर प्रदुषण बढ़ने की एक बड़ी वजह ट्रेफिक का बढ़ना भी है, न की आतिशबाजी।
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(4) इसी समय किसान अपनी पराली भी जलाते है और फूस जलाने से भी प्रदुषण बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए पिछले साल दिवाली के अगले दिन सुबह 5 बजे दिल्ली और लाहौर में प्रदुषण का स्तर एक समान था !!! क्यों ? क्योंकि दोनों इलाको में किसान फूस जला रहे थे। और फूस जलाने से भी प्रदुषण होता है !
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खंड - ब
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उत्सवों में भागीदारी कम होने से धार्मिक जमाव टूटेगा और हिन्दू धर्म के विघटन में तेजी आएगी।
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हिन्दू धर्म का प्रशासन बेहद कमजोर है और इसे दुरुस्त नहीं किया गया तो अगले 50 वर्षो में इसके अनुयायियों की संख्या लगभग आधी रह जायेगी। यह शान्ति काल की स्थिति है। यदि इस दौरान भारत को युद्ध का सामना करना पड़ जाता है तो अगले 50 वर्षो में हिन्दू धर्म पूरी तरह से लुप्त होने की कगार पर जा सकता है।
ईसाई धर्म लगातार विस्तार कर रहा है , क्योंकि उनके पास जूरी सिस्टम है।
इस्लाम ने भी लगातार विस्तार किया है क्योंकि उनके पास हर सप्ताह एकत्र होने की प्रक्रिया है।
सिक्ख धर्म अब तक टिका हुआ है क्योंकि उनके पास गुरुद्वारा प्रमुख को चुनने की प्रक्रिया है। ( हालांकि अब यह कमजोर हो रहा है )
हिन्दू धर्म के प्रशासन में इनमे से कुछ भी नहीं है, और न ही ऐसी कोई प्रक्रिया है जो इनकी कमी को पूरा करे। इसीलिए वह लगातार जमीन एवं अनुयायी खो रहा है। लेकिन फिर भी इसके विघटन की दर धीमी है। आखिर , हिन्दू धर्म का क्षरण उतनी तेजी से क्यों नहीं हो रहा है, जितनी तेजी से होना चाहिये ?
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मेरे विचार में इसकी 2 बड़ी वजहें है :
हिन्दू धर्म को अब तक किसी ताकतवर प्रतिस्पर्धी का सामना नहीं करना पड़ा और इस वजह से विघटन की दर धीमी रही। किन्तु अब एफडीआई के माध्यम से मिशनरीज की घुसपेठ भारत में तेजी से बढ़ रही है।
उत्सवो पर धार्मिक जमाव। किन्तु अब इसे तोड़ने के निरंतर प्रयास किये जा रहे।
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हिन्दू धर्म में साल भर बेतहाशा त्यौहार आते है और इनमें से ज्यादातर त्योहारों में अध्यात्म / भक्ति के साथ साथ मनोरंजन का तत्व भी शामिल है। मनोरंजन का तत्व होने से सभी तबके के सभी आयु वर्ग के लोग इन उत्सवो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है। इस कवायद से उत्सवो पर भारी संख्या में धार्मिक जमाव देखने को मिलता है और धर्म के प्रति जुड़ाव बना रहता है।
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उदाहरण के लिए , दिवाली पर आतिशबाजी, मिठाई और नए कपडे का चलन बच्चो एवं युवाओ को आकर्षित करता है, जबकि गृहणियां साफ़ सफाई रंग रोगन में व्यस्त हो जाती है। बुजुर्गो एवं वरिष्ठ जनों के लिए इसमें लक्ष्मी पूजा। फिर धनिकों के लिए जुआ भी है। सामुदायिकता बढ़ाने के लिए अगले दिन "राम राम"। कुल मिलाकर दिवाली सभी आयु वर्ग के लोगो को खींच लेती है, और लोग इसमें उत्साह के साथ भाग लेते है। किन्तु यहाँ मनोरंजन और रोमांच का मुख्य तत्व आतिशबाजी है जो दीवाली को हिट बनाता है। इसमें सामूहिक गतिविधि है।
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इसी तरह होली पर सिर्फ होलिका दहन उत्साह बनाये नहीं रख सकता। रंग, गुलाल खेलना और ढपली पर फाग गाना वह तत्त्व है जो लोगो की भागीदारी बढाता है। फिर जन्माष्टमी पर मनोरंजन के लिए दही हांड़ी प्रतियोगिता एवं झांकियां है। दुर्गा पूजा एवं गणपति स्थापना पर 9 दिनों तक नाच-गान। और पूजा तो खैर है ही। तो हिन्दू धर्म के ज्यादातर उत्सवो में मनोरंजन के तत्व डाले गए है, ताकि इनमे नागरिको का उत्साह बना रहे। विभिन्न उत्सवो जैसे दुर्गा पूजा / महाशिवरात्रि / कुम्भ आदि पर मेले इस धार्मिक जमाव में और भी वृद्धि कर देते है।
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तो यदि प्रतिस्पर्धी धर्म भारत में हिन्दू धर्म को और भी कमजोर करना चाहते है तो उन्हें हिन्दू धर्म के त्योहारों पर होने वाले धार्मिक जमाव को तोड़ना होगा। वे ऐसा कैसे कर रहे है ?
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प्रदुषण का हवाला देकर वे आतिशबाजी का विरोध करते है और अन्य लोगो को भी दिवाली पर आतिशबाजी का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित करते है !! इससे सामूहिकता घटती है, और रोमांच चला जाता है।
अगले दौर में वे यह तर्क लेकर आयेंगे कि, देश में बिजली की कमी है और कई गरीब लोगो तक बिजली नहीं पहुँच रही है , किन्तु दिवाली पर हम महज सजावट के लिए इतनी बिजली बर्बाद कर दे रहे है, अत: हमें सोच समझकर बिजली खर्च करनी चाहिए !!
फिर वे इस तरह का अभियान लायेंगे कि दिवाली पर दीपक जलाने से तेल की घी-तेल की हानि हो रही है। ज्यादा से ज्यादा एक-दो दीपक जलाए और बाकी तेल-घी किसी गरीब को दान कर दें !!!
फिर वे होली पर आयेंगे और होली को पानी की बर्बादी से जोड़ देंगे। लोगो को समझायेंगे कि होली खेलने में करोडो गेलन पानी व्यर्थ हो रहा है और इस बर्बादी के कारण लोग प्यासे मर रहे है !!!
जन्माष्टमी पर वे दही हांडी की उंचाई घटाने की मुहीम छेड़ देंगे। वे लोगो को समझाएंगे कि जन्माष्टमी पर चुपचाप घर पर पंजरी बना कर खा ले। दही हांडी जैसे उत्सवो में हिस्सा न ले। क्योंकि इससे चोट आती है। हांडी की उंचाई घटने से रोमांच चला जाता है, और धार्मिक जमाव टूटता है।
गरबा पर वे आपको बताएँगे कि इससे किस प्रकार का जानलेवा ध्वनी प्रदुषण होता है। यदि फिर भी लोग इकट्ठे होने से न माने तो उन्हें साइलेंट गरबा करने की सलाह देंगे। साइलेंट गरबा में प्रत्येक खिलाडी कान में हेडफोन से गाना सुनता रहता है और नाचता रहता है। इस तरह पंडाल पूरी तरह से साइलेंट रहता है। उत्सवों के लिहाज से यह सन्नाटा है, लेकिन पेड मीडिया की अफीम चाटने वाले इसे शांति बताते है।
शिवरात्रि आने पर वे आपको कहेंगे की शिवलिंग पर दूध चढाने की जगह यह दूध किसी बच्चे को पिला दो। इससे व्यक्ति के पास शिवरात्रि पर मंदिर जाने की वजह खत्म हो जायेगी और धार्मिक जमाव एवं मेला टूटेगा।
अंतिम संस्कार का वे यह कह कर विरोध करेंगे कि इससे लकड़ी की हानि और प्रदुषण हो रहा है !! अत: शव को बिजली से जला दो।
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ये छोटे में लिखा है। उनके दिमाग काफी उर्वर है। वे सभी त्योहारों में ऐसे ढेर सारे बिंदु खोजकर ला सकते है, जिससे उत्सवो को सुट्ट किया जा सके। यहां तक कि वे करणी माता मंदिर ( चूहों वाली माता ) में प्रसाद, नारियल, ध्वजा, धूपबत्ती आदि चढाने पर भी रोक लगा चुके है। वजह - इससे मंदिर में प्रदुषण होता है !!
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साइलेंट गरबा, आतिशबाजी मुक्त दिवाली, जल विहीन होली, दही हांडी मुक्त जन्माष्टमी के बाद अब उन्होंने एक नयी चीज पेश की है - रावण बर्निंग विद कोल्ड फायर !!
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रावण दहन के कारण होने वाले धूम्र प्रदुषण से बचने के लिए पिछले वर्ष उदयपुर नगर निगम ने दशहरे पर धुआं मुक्त आतिशबाजी करने का फैसला किया !! उम्मीद है कि जल्दी ही हमें साइलेंट आतिशबाजी ( विशेष तौर पर दशहरे और दिवाली पर ) भी देखने को मिलेगी !!!
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किन्तु , यदि आप हिन्दू धर्म की परम्पराओं में मानते है और इन्हें जारी रखना चाहते है तो दिवाली पर आतिशबाजी करें , होली पर रंग खेले, शिवरात्रि पर मेले में भाग ले , साइलेंट गरबा का विरोध करे और उन लोगो का भी विरोध करे जो "पर्यावरण के नाम पर" हिन्दू त्योहारों की परम्पराओं पर रोक लगाना चाहते है। यह हर तरीके से साबित है कि दिवाली पर आतिशबाजी का प्रदुषण से कोई लेना देना नहीं है। आतशबाजी से सिर्फ एक दिन प्रदुषण होता है और उस एक दिन भी आतिशबाजी का प्रदुषण में हिस्सा सिर्फ 6% है !!! और यह प्रदुषण में अगले 8 घंटे में वातावरण से पूरी तरह से तिरोहित हो जाता है।
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कुल मिलाकर सयानो की बातों में न आये और दिवाली पर खुद भी आतिशबाजी करें, और दुसरो को भी प्रेरित करे। लेकिन आतिशबाजी करते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे। सूती कपडे पहने और यदि उपलब्ध हो तो प्लेन ग्लास का चश्मा लगा ले। अनार, फुलझड़ी , चकरी आदि सुरक्षित पटाके चलाये और मिर्ची बम, रोकेट आदि पटाको की अवहेलना करे। तथा बच्चो को अपने पर्यवेक्षण में आतिशबाजी करवाएं।
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बहरहाल , जब से पेड मीडिया ने दिवाली की आतिशबाजी को प्रदुषण से कनेक्ट करने में पैसा फूंकना शुरू किया है, तब से मैंने भी आतिशबाजी का अपना बजट बढ़ा दिया है। मैं आतिशबाजी भी करता हूँ, और इसका चित्र सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करता हूँ। कृपया आप भी दीवाली की आतिशबाजी के चित्र सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इसे प्रदर्शित करें ताकि ताकि अन्य नागरिक भी आतिशबाजी करने के लिए प्रेरित हो।
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आतिशबाजी युक्त दिवाली की शुभकामनाएं।
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खंड - स
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संघ=बीजेपी के मंत्रियों का आतिशबाजी पर स्टेंड :
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संघ के नेता और मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पिछले साल 3 हिन्दू उत्सव-विरोधी ट्वीट किये थे, जिन्हें अब उन्होंने डिलीट कर दिया है !!! एक कार्यकर्ता ने इन ट्वीट्स को सेव कर लिया था। डिलीट किये गए ट्वीट के लिंक और विवरण :
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(1)
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https://twitter.com/drharshvardh...
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Welcome decision by the SC on ban of fire crackers sales in NCR. Comes as a huge support for my #GreenDiwali initiative for our environment
बहुत ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में दीवाली पर आतिशबाजी बेचने पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इस फैसले से मेरे #GreenDiwali मिशन को भारी समर्थन मिलेगा !!
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(2)
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https://twitter.com/drharshvardh...
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And of course, we must spare a thought for poor birds and animals who spend a terrible evening scared by all the fire & noise #GreenDiwali "
और हाँ, हमें उन निरीह पक्षियों एवं जानवरो की फ़िक्र भी करनी चाहिए जो आग और धुएं के कारण दिवाली की शाम काफी सदमे में बिताते है, #GreenDiwali !
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(3)
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https://twitter.com/drharshvardh...
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Instead of spending thousands on crackers, lets buy food & sweets and share it with poor/underprivileged, make it an awesome #GreenDiwali "
आतिशबाजी पर हजारो रूपये फूंकने की जगह हमें उन पैसो से मिठाइयाँ व भोजन खरीद कर गरीबों में बाँट देनी चाहिए। तभी सच्चे अर्थो में दिवाली होगी, #GreenDiwali !
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ये तीनो ट्वीट अब गायब है !!
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शर्म की बात है कि एक मंत्री ट्वीट करता है और फिर उन्हें डिलीट कर देता है !! यहाँ तक कि मेरे जैसे छोटे और पार्ट टाइम एक्टिविस्ट को भी इतना शउर है कि - यदि मैंने सार्वजनिक रूप से कुछ गलत लिखा है तो, या तो मुझे इसके लिए खेद प्रकट करना चाहिए या फिर इसे सम्पादित करके ठीक करना चाहिए। किन्तु रिकॉर्ड को मिटा देना किसी भी तरीके से ईमानदार व्यवहार नहीं है।
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दरअसल डॉक्टर हर्षवर्धन को आतिशबाजी से कोई समस्या नहीं है। लेकिन उन्हें दिवाली पर की जाने वाली आतिशबाजी से ख़ास एलर्जी है। डॉक्टर साहेब दिवाली पर आतिशबाजी न करने की मुहीम चलाते है, लेकिन बीजेपी के चुनाव जीतने पर यही हर्षवर्धन कार्यकर्ताओ से कहते है कि — आतिशबाजी करो !!
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(i) यहाँ आप देख सकते है कि हर्षवर्धन ने दीपावली पर आतिशबाजी न करने की अपील की - Health minister Harsh Vardhan advocates for a silent Diwali in Capital
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(ii) हर्षवर्धन यह समझाते हुए कि किस तरह सिर्फ दीपावली पर आतिशबाजी करने से स्वास्थ्य को नुक्सान होता है : Union Health Minister on dangers of Diwali Cracker
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(iii) और चुनाव जीतने पर यही हर्षवर्धन खुद खड़े होकर आतिशबाजी करवा रहे है - Celebrations on Narendra Modi arrival, Harshvardhan dances - Live Video
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Khushbu kumari
नमस्ते दोस्तों! 🙏
मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मेरी नई किताब **"मिठु लाल पंडित और काली"** अब आधिकारिक तौर पर लॉन्च हो गई है और दुनिया भर के बड़े प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है! 📚✨
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#NewBookLaunch #MithuLalPanditAurKali #HindiThriller #Supernatural #KhushbuKumari #MustRead #AuthorLife #Draft2Digital
Shefali
#shabdone_sarname__
Bhavna Bhatt
ઘરનું ખાવાનું
Mrs Farida Desar foram
रिश्ते अचानक नहीं टूटते दिलों के,
कई बार अनदेखा किया होता है...
- Mrs Farida Desar foram
shree
तुम्हारी मेरी अब वो दोस्ती वो यारी नहीं है अच्छा है किसी को इसकी जानकारी नहीं है
यूं तो तेरे बाद दिल कइयों से लगा है लेकिन वो तेरे इश्क़ जैसी किसी में बेक़रारी नहीं है
शायद उन्हीं आंसुओं का कर्ज चुका रहा हूँ वैसे तो मुझ पर किसी की भी उधारी नहीं है
कहो बादलों से जाकर उन्हें और बरसना होगा इन चार बूंदों से मेरी हिम्मत अभी हारी नहीं है
सूरत को देख उसकी सब हमदर्दी जताते है मैं वाकिफ़ हूँ उससे वो उतना भी बेचारा नहीं है
जीत कर भी उसके दर जाऊँगी उसे मालूम था क्या करूँ तन्हा रहने की मेरी तय्यारी नहीं है
मेरी बुरी आदतें उसे बर्दाश्त नहीं थी बिल्कुल उसके इंतेज़ार में वो आदतें अभी सुधारी नहीं है
shree
मैंने देखा है जो लोग इश्क के सबसे मुश्किल दौर में एक दूसरे से अलग होते हैं!
अचानक से....
उनकी हँसी में उनकी आँखें कभी शामिल नहीं होतीं, उनकी हर हा में कभी उनका दिल हामी नहीं भरता, उनके बीते हुए कल के धुंधले ही सही मगर वो रास्ते उनका राब्ता फिर किसी और से होने ही नहीं देते....
मैंने देखा है जो लोग इश्क के सबसे मुश्किल दौर में एक दूसरे से अलग होते हैं!🥀❤️🩹
shree
बाल बिखरे छोड़ने लगी हूँ
जबसे उसने सवारना छोड़ा है
नाम मेरा मुझे परेशान करने लगा है
जबसे उसने पुकारना छोड़ा है।
shree
वो सवारता है बाल अपने, मुझे आयने से जलन होती है, मेरा महबूब बड़ा मासूम है (2)
उसे किसी और के देखने से तकलीफ होती है, यू ही बिखरे रह ने दो बाल अपने (2)
मुझे सवार ने की चाहत होती है, यूना आया करो सवर के मुझे नज़र उतार ने की चाहत होती है, यूना देखा करो मुझे तुम्हारी आँखों में डूब ने का मन होता है, यूना आया करो पास मेरे (2)
तुम्हें गले लगाने की तलब होती है,
ओर फिर न जाने क्यों.......
तुम्हें खुद में छुपाने की आरज़ू होती है, इसी बात पर तुम मिलो तो सही .... (2)
तुमसे मुलाकात की तमन्ना होती है!!!!
shree
किसी को छोड़ जाने की ज़िद में हम अक्सर भूल जाते है वो तमाम वादे, होंठों का स्पर्श, अंगीनत आलिंगन
और एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें भी,
किसी को छोड़ जाने की ज़िद में हम उन कोमल स्मृतियों की निर्मम हत्या कर देते हैं!!
- shree
mahadev ki diwani
घंटों बातेँ करने से घंटा कुछ पता चलता है....
उस इंसान की फितरत तो साथ रहते हुए ही समझ आती है....
agree guy's? 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿शुभ रात्रि 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿
हर हर महादेव 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿
- mahadev ki diwani
Narayan
तुम्हारी आवाज की खनक बिल्कुल पायल की झंकार जैसी है ...
बातें कितनी भी हो कमबख्त दिल ही नही भरता ..
Aarushi Singh Rajput
खानदानी रक्त है लाला, उबाल तो मारेगा ही ॥
कायर भोग दुःख सदा, वीर भोग्य वसुंधरा ।।
रण में जो अडिग रहे, वही कुल का मान बढ़ाए,
धार तलवार की बोले, जब वीर इतिहास रचाए।।
🚩🙏🏻🖤😈
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
આ બાગમાં હવે એકોય પાન કે ફૂલ નઈ હલે,
કારણ
તે લટ મોકળી રાખી છે ને હવે હવા પણ રીસાણી છે.
- સ્પંદન
Soni shakya
हक की बात ना करो वो तो कभी जताया ही नहीं..
बात सिर्फ समय की थी तुमने तो वो भी निभाया नहीं..
- Soni shakya
Narayan
वो जो पास न होकर भी रूह के करीब रहता है,
उसी के नाम को हमने अपनी दुनिया बना रखा है।
Mara Bachaaaaa
उनपर हमारा
कोई आधिपत्य
था ही नहीं,
तभी तो वो
हमारे हो न सके।
- Mara Bachaaaaa
उषा जरवाल
मेरा घर कहाँ है?
मायके की देहरी ने धीमे से कहा—
“बिटिया, अब तू पराई हो गई।”
ससुराल की चौखट ने भौंहें चढ़ाकर पूछा—
“तू इतना इठलाती ये तेरा घर है क्या?”
दो आँगनों के बीच झूलती रही मैं,
जैसे प्रश्न कोई, जिसका उत्तर किसी के पास नहीं।
एक ने जन्म दिया, पर अधिकार सीमित कर दिया,
दूसरे ने अधिकार माँगा, पर अपनापन तौलता रहा।
पर अब मैं पूछती नहीं—घोषणा करती हूँ,
मैं स्वयं अपनी देहरी, स्वयं अपना आकाश हूँ।
नारी हूँ—कमज़ोर नहीं, संकल्प की ज्योति हूँ,
अब मैं खामोश नहीं—तीव्र स्वर बन चुकी हूँ,
अब किसी देहरी की मोहताज नहीं रही।
मैं नारी हूँ—अपना घर खुद रच लेने वाली,
जहाँ कदम टिक जाएँ मेरे—वही संसार बना देती हूँ।
अब मुझसे मत पूछो—“तेरा घर कहाँ है?”
मैं जहाँ खड़ी हो जाऊँ—वहीं घर खड़ा कर देती हूँ।
किंतु अब मौन मेरा विवशता नहीं—संकल्प बन चुका है,
अश्रु नहीं, अब नेत्रों में तेज का प्रकाश है।
मैं आज की नारी हूँ—अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति,
प्रचंड तूफानों में भी अपनी नौका पार लगा सकती हूँ।
जिसे तुम पराया कहते रहे युगों से—
वही आज स्वयं अपना संसार रच सकती हूँ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
aakanksha
नारी को पहले इतना समझा नहीं गया,
उसे बस घर तक ही रखा गया।
पर अब धीरे-धीरे समय बदल रहा है,
और नारी भी आगे बढ़ रहा है।
वो पढ़ना चाहती है, कुछ बनना चाहती है,
अपने दम पर खुद को पहचानना चाहती है।
अब वो सिर्फ घर तक सीमित नहीं है,
उसके सपनों का भी कोई अंत नहीं है।
हर काम में वो अपना हाथ बढ़ाती है,
मुश्किलों से भी नहीं घबराती है।
अगर उसे मौका और साथ मिले,
तो वो हर मंजिल पा सकती है।
कभी वो माँ बनकर सब संभालती है,
कभी बेटी बनकर घर सजाती है,
कभी बहन बनकर साथ निभाती है,
हर रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाती है।
आज वो स्कूल भी जाती है,
अपने सपनों को सजाती है,
कल वही आगे बढ़कर
देश का नाम भी रोशन करती है।
उसे बस थोड़ा सा भरोसा चाहिए,
और आगे बढ़ने का मौका चाहिए,
फिर देखना वो कैसे
हर मुश्किल को आसान बना देती है।
अब नारी चुप नहीं रहती,
वो अपने हक के लिए बोलती है,
गलत को गलत कहने की
हिम्मत भी अब रखती है।
नारी जब आगे बढ़ेगी,
तभी तो देश भी आगे बढ़ेगा।
उसकी मेहनत और हिम्मत से ही
भारत सच में समृद्ध बनेगा।
नारी है तो हर सपना साकार है,
उसी से हर घर-आंगन में प्यार है,
उसका सम्मान ही सबसे बड़ा धन है,
इसी से मजबूत अपना हिंदुस्तान है।
Piyu soul
Calm. Classy. Dangerous.
AbhiNisha
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
कविता
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
आने वाले कल की
अच्छे दिनों की
पूरे होने वाले सपनों की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजा रहे
तुम्हारे तुम्हारे साथ रहने की
तुमसे प्यार करने की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
वह इंतजार झूठी ही सही
पर उस झूठे इंतजार पर एतबार रहे
बस यही एक जीने का तरीका है
सच से अगर कभी हुई मैं रूबरू
शायद खत्म कर लु मैं खुद को
इस सबसे अच्छा है कि
झूठ पर ही गुजार लु मैं अपनी जिंदगी
हां तकलीफ होगी
पर शायद मैं झूठी सहारे के साभ जिंदा रह लूंगी
सच हमेशा आईने की तरह साफ रहा मेरे सामने
फिर भी मैंने झूठ को चुना
सांस लेने के लिए
वह झूठ जो मुझे बचाए रखा
मुझ में हिम्मत नहीं थी
सच को स्वीकार करने की
ऐसा कुछ भी नहीं था
बस मुझ में ताकत नहीं थी
इस झूठ से लड़ने की
इसीलिए सच के आगे मोटी परते बिछा दी झूठ की
कि सच मुझे कभी ना दिखे
ना मैं खुद से सवाल करूं
कि तू झूठ को अपनी सांस बना ली है
सब कुछ खत्म होने से अच्छा हो
की उम्मीद रहे
शगुन से सांसे लेने की
बिना दर्द के जीने की
जो चाहे जी करने की
सब कुछ खत्म होने से अच्छा है
कि इंतजार रहे
अच्छे दिनों की
अगर एक कविता अच्छी लगे तो आगेपढ़ते रहिए
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
ઉપરવાળો પણ લાંચ લેતો હશે,
એણે તને આટલી સુંદર બનાવી.
- સ્પંદન
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kzस्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
unknown Writer
तू था तो सब कुछ था,
अब सब कुछ है… पर तू नहीं।
ये जो खालीपन है न मेरे अंदर,
ये किसी एक दिन में नहीं आया,
ये धीरे-धीरे तेरे जाने के बाद
हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा बढ़ता गया।
तेरी हँसी, तेरी बातें, तेरी वो छोटी-छोटी आदतें,
सब कुछ आज भी मेरे आसपास घूमता है,
जैसे तू कहीं गया ही नहीं,
बस थोड़ी देर के लिए छुप गया हो।
मैं आज भी तेरे पुराने मैसेज पढ़ता हूँ,
हर शब्द में वही एहसास ढूंढता हूँ,
जो तूने कभी मुझे दिया था।
रातें सबसे ज़्यादा मुश्किल होती हैं,
जब चारों तरफ सन्नाटा होता है,
और दिल में सिर्फ तेरी आवाज़ गूंजती है।
नींद तो आती है, पर ठहरती नहीं,
हर ख्वाब में तू होता है,
और हर बार मैं तुझे खो देता हूँ।
तूने कहा था—“हमेशा साथ रहेंगे,”
मैंने उन लफ़्ज़ों को अपनी ज़िंदगी बना लिया।
शायद मेरी गलती यही थी,
कि मैंने तुझसे ज़्यादा तेरे वादों पर भरोसा किया।
तू वक़्त के साथ बदल गया,
और मैं तेरे साथ बिताए पलों में ही अटक गया।
अब भी जब कोई तेरा नाम लेता है,
तो दिल एक पल के लिए ठहर जाता है।
आँखों में वही पुरानी चमक आ जाती है,
पर अगले ही पल वो आँसू बनकर गिर जाती है।
तू शायद अब खुश है कहीं और,
किसी और के साथ अपनी दुनिया बसा रहा है,
और मैं यहाँ तेरी यादों के शहर में
अकेला ही भटक रहा हूँ।
मैंने बहुत कोशिश की तुझे भुलाने की,
नए लोगों से मिलने की,
नई शुरुआत करने की,
पर हर बार तेरी याद
सब कुछ पीछे छोड़ देती है।
जैसे तू मेरे दिल में नहीं,
मेरी रूह में बस गया हो।
कभी-कभी सोचता हूँ,
क्या कमी रह गई थी मुझमें?
क्या मेरा प्यार कम था,
या मेरी कोशिशें अधूरी थीं?
फिर खुद को समझा लेता हूँ,
कि कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं,
क्योंकि अगर वो पूरे हो जाते,
तो शायद उनकी खूबसूरती खो जाती।
तू अगर कभी ये पढ़े,
तो बस इतना जान लेना,
कि मैंने तुझे सच्चे दिल से चाहा था।
मेरे लिए तू सिर्फ एक इंसान नहीं था,
तू मेरी आदत था, मेरी ज़रूरत था,
मेरी हर खुशी की वजह था।
अब मैं तुझे रोकूँगा नहीं,
न ही तुझसे कोई शिकायत करूँगा।
तू जहाँ भी रहे, खुश रहे,
बस यही दुआ करता हूँ।
क्योंकि सच्चा प्यार कभी बांधता नहीं,
वो तो आज़ाद करता है।
पर अगर कभी तेरे कदम थम जाएँ,
और तुझे मेरी याद आए,
तो लौट आना… बिना किसी वजह के।
मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ,
उसी मोड़ पर,
जहाँ तूने मुझे आखिरी बार देखा था।
शायद वक्त के साथ सब ठीक हो जाए,
शायद ये दर्द भी एक दिन कम हो जाए,
पर तेरी यादें…
वो कभी नहीं जाएँगी।
क्योंकि कुछ लोग ज़िंदगी में आते हैं,
और फिर हमेशा के लिए
दिल का हिस्सा बन जाते हैं। 💔
santhoshi Vadlamani
సంతోషం నేర్పలేని ఎన్నో విషయాలు కన్నీళ్లు నేర్పుతాయు
గెలుపు నేర్పలేని ఎన్నో పాఠాలు ఓటమి నేర్పుతుంది.
స్నేహం నేర్పలేని ఎన్నో జాగ్రత్తలు మోసం నేర్పుతోంది.
అందుకే అంటారేమో ఏది జరిగినా అంతా మన మంచికే అని.
Mukesh Gavit
तुला सोडण्याचा हक्क नाही
मला धरून ठेवण्याची इच्छा नाही....
मी निभावत गेलो एकतर्फी
पण तुझ्या भावनांचा पत्ता नाही..
कविता पूर्ण केली असती पण
तुझ्या ओळीवर माझी आता सत्ता नाही....
રોનક જોષી. રાહગીર
હ્રદયસ્પર્શી વાર્તા
https://www.facebook.com/share/p/1AmSsqtUyz/
kattupaya s
My Tamil novel "நிழல் தரும் வசந்தம் "part 9 is going to be published@7pm.17/4/26 tommorow.
RTJD
गुनाहों का पुतला
गुनाह मेरा बस इतना था
कि मैंने ख़्वाब देखे।
ख़्वाब,
जो वास्तविकता के उलट थे।
ख़्वाब,
जो परंपरा के उलट थे।
ख़्वाब,
जिन्होंने मुझे मेरे दोस्तों से अलग कर दिया।
नतीजा यह हुआ—
दोस्त सारे आगे निकल गए,
अब उनके नए दोस्त बन चुके हैं,
उनके जैसे।
वो अब कमाने लगे हैं
पैसे और खुशियां,
कमाने लगे हैं
सम्मान और शोहरत।
अब वे खरीद सकते हैं
सुख और सुविधाएं,
खरीद सकते हैं
प्यार और दवाइयां।
इन सबके बीच
मैं…
कहीं बहुत पीछे छूट गया,
पहचान से भी,
और अभिमान से भी।
मैं अब ख़्वाबों के भी
ख़्वाब देखने लगा हूं।
पहले जो
थोड़ा-सा नाखुश हुआ करता था,
अब वही मिल जाने पर भी
नाज़ करने लगा हूं।
मैं उलझ गया हूं
अपने ही भीतर।
तरसता हूं
दो खुशी के पलों के लिए,
मैं तो अब
जागता हूं सपनों में।
आर्थिक स्थिति मेरी खराब है,
मानसिक स्थिति भी कमजोर है,
और खराब होने लगे हैं
रिश्ते।
घुट-घुट कर ज़िंदा हूं,
अब मौत भी
मेरे नसीब में नहीं है।
मैं अपने गुनाह का प्रायश्चित
किस्तों में चुका रहा हूं।
सब कुछ हार चुका हूं,
लेकिन अभी भी
उम्मीद नहीं हारी है।
उम्मीद इस बात की—
एक दिन
ये सारे ज़ख्म,
ये सारे दुःख
ख़्वाबों से भर दूंगा।
RTJD
कोई सुनने वाला तो हों
अब बहुत हो गया…
सब्र जवाब दे रहा है,
अब तो दिल भी बेचैन हो उठा है।
कोशिश हमने बहुत की है,
ख़ामोश रहने की।
एक ही तो दोस्त था,
दिनों से उससे भी बात नहीं की।
अपनों से कोई गिला-शिकवा तो नहीं हमारा,
फिर भी राब्ता नहीं हुआ उनसे,
न कोई याद रही।
जीना चाहता था अपनी ज़िंदगी,
ख़ुद पर काम करते-करते।
रातें भी बस बेबस,
काम करते-करते काटी हैं।
दिन तो शुरू ही काम से होता था।
सोचा था, इस तरह दुनिया से छुपकर,
देखे थे जो सपने अपने लिए,
उन्हें एक बेहतर मुकाम दे सकूंगा।
क्या पता था,
इस तरह बंधन टूट जाएंगे।
इस जुदाई में,
हम कब ग़म से जुदा हुए?
पहले तो अपनों से,
फिर जानने वालों से भी जुदा हुए।
दूरियां यहां ख़त्म नहीं हुईं,
अब तो मुश्किल से
कभी किसी से,
किसी मौज़ू पर
दो बातें ही होती हैं।
वो भी काम और कारण की मर्यादा से बंधी होती हैं।
और वो सोचते हैं,
कि हम मतलबी हो गए?
घर का ज़िम्मा भी तो
कंधों पर लिए हूं,
जो मुझे भीतर से
कठोर और गंभीर बना देता है।
अंदर के बच्चे को,
इंसान बना देता है,
जो दूसरों की तरह जिंदादिल होना चाहता है।
घूमना चाहता है,
कॉलेज में दोस्तों के साथ जाकर पढ़ना चाहता है।
दो बातें दुनिया की करके,
ज़ोर-ज़ोर से हंसना चाहता हूं।
मौजूदा लम्हों की नज़ाकत का
लुत्फ़ उठाना चाहता हूं।
लेकिन ये ज़िंदगी मुख़्तलिफ़ है मेरी…
जो सकड़ी गाड़ी के घोड़े की तरह है,
मिल में काम करने वाले
उस मामूली मज़दूर की तरह है।
ठीक वैसी ही ज़िंदगी मेरी भी है।
दिल तो करता है,
उनसे वो सब साझा करूं,
विस्तार से कहूं…
लेकिन कोई सुनने वाला तो हो,
जो सच में
मेरी बात सुनने की रुचि रखता हो।
उनका सिर हिलाना ही
मेरे लिए काफ़ी है,
लेकिन दिल से।
ख़ुद से ऊब गया हूं बतियाकर,
थक गया हूं
ख़ुद के सवालों का जवाब
ख़ुद ही देकर।
डर है इस बात का,
कहीं बातें करना न भूल जाऊं।
जहां जवाब मेरा नहीं होगा,
तुक का मेल हो या न हो…
क्या मैं यही ज़िंदगी जीना चाहता था?
अगर हां…
तो ये बेचैनी क्यों उठ रही है?
ये आग क्यों
मुझे जला रही है?
बस अब सवाल ही सवाल हैं,
जिनकी सीमा भी
सवालों से घिरी नज़र आ रही है।
जिनका जवाब शायद
मुझे आने वाले सफ़र में मिलेगा,
और शायद नहीं भी…!
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
aakanksha
“मैं अभी भी खड़ी हूँ”
मैं हारकर भी हर बार,
खुद को समझा लेती हूँ,
दिल टूटता है रोज़ थोड़ा,
फिर भी मुस्कुरा देती हूँ।
कभी ख्वाब थे BHU के,
कभी DU की राहें थीं,
अब नंबरों के जंगल में,
बस उम्मीदें ही बाहें थीं।
वो जो कहते थे “छोड़ दो”,
मैं खुद को ही पकड़ लेती हूँ,
ना जाने क्यों हर बार,
मैं ही पहले call कर देती हूँ।
कमज़ोर नहीं हूँ मैं,
बस दिल थोड़ा सच्चा है,
जो चला गया, वो मेरा नहीं,
ये समझना अभी कच्चा है।
डर भी है, confusion भी,
और आँखों में सवाल बहुत,
पर अंदर कहीं एक आवाज़ है—
“तू कर सकती है, बस रुक मत।”
अगर ना मिला वो जो चाहा,
तो इसका मतलब खत्म नहीं,
रास्ते बदल सकते हैं,
पर मंज़िल का कोई अंत नहीं।
मैं टूटी हूँ, ये सच है,
पर खत्म नहीं कहानी,
मैं फिर से उठूँगी एक दिन—
और यही होगी मेरी असली जीत की निशानी।
kattupaya s
hasthar aayega.. and the cry continues
kattupaya s
Greediness is always dangerous. this movie is most memorable one
kattupaya s
Try to forget every disappointment moments by remembering good old days. but the lessons are most important.
kattupaya s
water 💧 in many forms we tasted and wasted now only available in canes
kattupaya s
chocolate is my dream. my dream is full of chocolates. the soul is made for chocolate. born again to become chocolate lover
kattupaya s
when people believe decency of food delivery in ac rooms , some kind persons still working hard in outdoor. thankful to our farmers
kattupaya s
Now everything is changed. but the love and affection given by small vendors always remember my childhood is awesome. it's only 50p
kattupaya s
The bell sound and the pink cotton candy awesome
kattupaya s
Thankyou icecreamwala uncle for everything
kattupaya s
Onceupon atime I ran behind icecreamwala. he is too kind to exchange ice cream whatever paisa I had. now no icecreamwala. I have full of ice cream in my fridge.
kattupaya s
Together with family in powercut days @terrace.lot of fun.. suddenly we gone through the path a long way.
kattupaya s
when life is too boring.. think about our childhood memories.. how cool those days. Good evening friends
Jyoti Gupta
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mitul kheni
તું વિષય નથી કે, તારા પર લખી શકાય..!!
તું મોસમ નથી કે, તને વર્ણવી શકાય..!!
તું ઘટના નથી કે, લોકવાચ્ય બનાવી શકાય..!!
તું મારા શ્વાસ છે, જેને માત્ર શ્વસી શકાય..!!
તું મારી જિંદગી છે, જેને જીવી શકાય..!!
તું મારો ઉત્સવ છે, જેને આનંદી શકાય..!!
તું મારું ઘડપણ છે, જેને અનુભવી શકાય..!!
તું,
હા, તું મારું વિશ્વ છે..!!
તને ચીતરી ન શકાય, તને તો માત્ર ચાહી શકાય....!!!!
💖🥰🫶🏻
Kiran
गरीबी, गरीबों को मिटाने से नहीं, बल्कि उन्हें समानता की मुख्य धार में लाने से खत्म होती है।”
ये विचार ही स्वतंत्रता आंदोलन का मूल था।
इसके लिए ही कई समाज सुधार आंदोलन हुए,साथ ही कई समाज सुधारकों ने इसे अपना मूल लक्ष्य बनाया।
इसी के फलस्वरूप हमे संविधान में आर्टिकल 14 में विधि के समक्ष क्षमता और विधि का समान संरक्षण जैसे प्रावधान प्राप्त होए।
mohansharma
तू हमें क्या सिखायेगा इश्क़ करने का सलीका मोहन..
हम तो उस पर फ़िदा रहे जो कभी हमारा था ही नहीं..
Kiran
अछूतपन (Untouchability) लोगों में नहीं, बल्कि उनके व्यवहार में निहित है”
- Kiran
उषा जरवाल
ऐ ज़िंदगी ! चाहे कितने भी हों तेरे चोचले,
परवाह नहीं, क्योंकि बुलंद हैं मेरे हौसले । 😎
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
उषा जरवाल
टूट गए तो क्या हुआ ?
एक दिन फिर से जुड़ जाएँगे ।
पंख नहीं हैं तो न सही ,
हम पैरों से उड़ जाएँगे ।
पैरों ने भी न दिया साथ तो बेचारा न समझना ,
हम हौंसले वाले हैं जनाब !
लड़ना पड़ा तो हम फ़ौलाद से भी टकरा जाएँगे ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
Shailesh Joshi
जब सपने अधूरे हो, और इसे
पूरा करने की तमन्ना पूरी हो,
तब जीने का जो मजा आता है,
ऐसा मजा.....और कहां ?
- Shailesh Joshi
Anish
घुटने में दिमाग होना इन लोगों की आम बात है
जैसे
अभी कुछ दिन पहले
एक लड़की नहर में डूब रही थी
अचानक उसके हाथ में मछली आ गई
उसने उसे दूर फेक कर ये कहा
तू अपनी जान बचा
मुझे तो मरना ही है
अक्ल की आंधी
Anish
तेरे मिलने पर अब मिलेगा क्या
अंधा तस्वीर का करेगा क्या
और भर रहा है जो होटलों का बिल
वो तेरी मांग भी भरेगा क्या..!!
Anish
जिन लड़कों का होता है एक पे दिल
वो आती-जाती खूबसूरती पे नहीं मरते
और लड़कियों बात को समझो
निभाने वाले लड़के तारीफें नहीं करते..!!
Anish
ये इश्क
ये मोहब्बत
ये प्यार
को छोड़िए मुर्शीद
आइए
ईरानी चाय का मज़ा लीजिए
Neha kariyaal
एक सवाल ख़ुद से भी...
क्या मैं ठीक हूं?
उषा जरवाल
व्याकरण की रचना करने वालों को हर उस चीज़ में जिसमें नाज़ुकता दिखी उसमें उन्हें स्त्रीत्व दिखा ।
गुलाब के फूल में नाज़ुक पंखुड़ियाँ दिखी तो स्त्रीलिंग और काँटे दिखे तो पुल्लिंग हो गया ।
जब पानी मीठा रहा तो नदी स्त्रीलिंग और खारा हुआ तो सागर पुल्लिंग बन गया ।
जब पानी आसमान में बहुत दूर रहा तो बादल पुल्लिंग और धरती पर बरस पड़ा तो बारिश स्त्रीलिंग हो गई ।
हवा चलती है और तूफ़ान आता है ।
युद्ध होता है और शांति होती है ।
क्रोध उत्पन्न होता है और क्षमा दी जाती है ।
अंत में उन्हीं व्याकरण रचने वालों ने नारी को ‘अबला’ की संज्ञा भी दे दी ।
जो स्वयं शक्ति स्वरूप है, साक्षात महादेव भी जिनके क्रोध से बच नहीं पाए वो नारी भला अबला कैसे हो सकती है ।
मेरे विचार से जो अच्छे से अच्छे सूरमाओं का तबला बजा सकती है वो अबला तो कदापि नहीं हो सकती ।
Shailesh Joshi
गलतियों की वज़ह से जिंदगी में मुजे,
नाकामयाबीया तो कई मिली है,
बावजूद में नयी नयी कोशिशें करता रहता हूं,
क्योंकि आज तक,
मुजे जितनी भी नाकामयाबीया मिली है,
उन सभी नाकामयाबीयोमें मुजे
मेरी एक भी गलती
दुबारा नहीं मिली है.
- Shailesh Joshi
bhagwat singh naruka
आज मैने अपनी "पूर्व प्रेमिका" को देखा....
साथ में उसके पति को देखा....
मैने उसकी लाल साड़ी देखी....उसके पति की लंबी गाड़ी देखी...साथ में उसके एक बच्चे को देखा.... पापा से पिज्जा की करते जिद्द को देखा,,,,,,
फिर उसने मुझको देखा मैने देखी उसकी आँखें..... आंखों में उसकी डर को देखा खुशी में ग्रहण न लगा दे उस भय को देखा....अब मैने मोबाइल में मैसेज नोटिफिकेशन को देखा मम्मी द्वारा भेजी राशन की लिस्ट को देखा....मैने देखा अपना बटुआ उसमें पड़े 1740 रुपयों को देखा....आधा सामान ले जाकर देख खुद को आईने में.........
*सोचा देख लेता हूं उन किताबों को जिन्हें नहीं देखा है 6 महीनों से........*
*सच कहा है जीवन मे सफल होना है तो पढ़ना होगा ही,फिर आपको वो सब कुछ मिल सकता है जो आप हासिल करना चाहते है।*
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writer bhagwat singhnaruka ✍️🙏
bhagwat singh naruka
*सुनों साथी*
मन अब प्रेम से ज्यादा
*नौकरी के लिए चिंतित है..!!*
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writer bhagwat singhnaruka ✍️
Kiran
सुंदरता क्या है…
नैनों की भूख है या,
या समाज की बनाई कोई तस्वीर,
जो हर चेहरे पर एक जैसा नाप ढूंढती है?
कभी वो आँखों में ठहर जाती है,
एक मुस्कान की हल्की सी लकीर बनकर,
तो कभी शब्दों में छलकती है,
किसी के सच्चे व्यवहार की तरह।
समाज ने बाँधना चाहा उसे,
रंगों, आकारों और मापों में,
पर वो तो बहती रही चुपचाप,
हर दिल की अपनी किताबों में।
नैनों को जो भा जाए, वो पलभर की छाया है,
भीतर जो चमक उठे, वही असली माया है।
क्योंकि चेहरों की चमक ढल जाती है एक दिन,
पर आत्मा की रोशनी कभी कम नहीं होती।
तो सुंदरता…
न तो केवल नैनों की भूख है,
न ही सिर्फ समाज की बनावट,
वो तो एक एहसास है—
Jagruti Rohit
જીવનમાં અનેક ભુલો કરીને પણ એ ભુલો માં કશું શીખતા નથી. એજ, આપણી મોટી ભુલ છે.
- Jagruti Rohit
Chirag Vora
ગુજરાતી વાચકો માંથી ભાગ્ય જ કોઈ એવા જે ચંદ્રકાંત બક્ષી સાહેબ ને ન ઓળખતા હોય..
બક્ષી. સાહેબ.ની મેં મોટાભાગની
નિબંધ લેખન બુકો ગણી બધી વાંચી છે...
કટ્ટર લેખક અલગ અલગ વિષયો ઘણું બધું લખ્યું છે..
ઈગો .. આ બુક અલગ અલગ બુકો માંથી
લેવાયેલ બ્લોગ ટાઇપની ફોટો બુક છે..
તમારી પાસે સમય ન હોય તો ટૂંક સમયમાં વેચાય તેવી...
બધું પસાર થઈ જાય છે જીવનમાંથી.
સંબંધો સળગી જાય છે ચિતાઓ પર.
ધુમાડો રહી જાય છે.
પછી વાસ રહી જાય છે.
પછી વાસ પણ ચાલી જાય છે.
પછી સ્મૃતિ રહી જાય છે, પછી
સ્મૃતિઓ પણ ઓગળતી જાય છે.
યાદદાશ્તની એકાદ મૌસમ આવે છે,
એકાદ સ્મૃતિ ભડકીને બુઝાઈ જાય છે –
એમાં તણખલા, આગ, ગરમાહટ કંઈ જ હોતું નથી.
વરસાદ પછી રડતા એકાદ
ખૂબસૂરત શહેરની શૂન્યતા હોય છે એમાં-
-ઈગો
-ચંદ્રકાંત બક્ષી
Anish
रब करे तुझे भी एक बार प्यार हो
और उसकी तरफ से इंकार हो
वैसे तो चाहता हूं तू हमेशा खुश रहे
पर धोखा तेरे साथ भी एक बार हो..!!
Imaran
तेरे माथे पर जो रख दूँ एक किस 😘
तो हर डर दूर हो जाता है 💖
प्यार की यही तो सबसे खूबसूरत बात है,
जो बिना लफ़्ज़ सब कह जाता है
👄imran 👄
Amir Ali Daredia
कहते लोग के मौत के आने से
में मर जाऊँगा
में तो उसिके नूर से आया हू फिर से
उसीमे मिल जाऊँगा
वात्सल्य
प्यार पाने के वास्ते थोड़ी जगह आपके दिल मे हो तो समा जाऊ !
टाइमपास के लिए मेरे पास वक़्त नहीं है!! - वात्सल्य
Anish
है इश्क़ में जो डूबे हम, ग़म भी मिले तो कैसा ग़म। तेरा सही तेरा गलत, तेरा झूठ भी तो कुबूल है
- Anish
वात्सल्य
તુ પાન મસાલા ના છોડે હું ના છોડું મોબાઈલ !
વ્યસન ભલે અલગ છે,બન્ને નું તલપ લાગે એક.
- वात्सल्य
Kapil Tiwari
✨ वो स्थान कितने सुंदर होते है!
वो स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां बनावटी भव्यता नहीं वास्तविक दिव्यता होती हैं,
जहां भीड़ नहीं होती होते हैं तो बस चंद सभ्य लोग,
जहां प्रकृति खुद में पूर्ण हो साथ न हो भोग,
जहां मनुष्य मनुष्यता का अवलोकन कर सके।
वे स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां सुकून खुद शांति से बैठ सके,
जहां खुद के अस्तित्व का आभास हो सके,
जहां दृश्य और दृष्टा का ज्ञान हो सके,
जहां तथ्यों के साथ प्रकृति का भान हो सके।
वे स्थान कितने सुंदर होते है!
जहां पैर खुद ठहर जाए, ठहरे हुए पैरों के साथ विचलित विचार भी,
जहां उत्कृष्टा, बोध, सफलता की नई परिभाषा जन्म लेती हो
जहां यात्रा आरंभ हो खुद की खुद तक के लिए
जहां मौन जन्म ले और उसमें विलीनता भी
वे स्थान कितने सुंदर होते है।
- यथार्थ
Falguni Dost
જય શ્રી રાધેકૃષ્ણ 🙏🏻
Sonam Brijwasi
radhe radhe friends
me ye bol ri thi ki jisko bhi mujhe message karna hai comment section me karen। kyunki yaar mere pass subscription nahi hai to main message nahi dekh pati..to jo bhi message karne Hain comment section me karen
Manjibhai Bavaliya મનરવ
લોક રચના
વિખરાતા વાણાંમાં નીજ ફેકાણા,
અંતરની એરણે હથોડે ટીપાણા.
જોબન જુવે નહીં કોઈ,જરાના વાયે વેરાણા.
પહોંચવા મુકામ લગી,ચોમેર તેજ રસે રેલાણા.
એજ બની ફેરિયા ના સાદે, સુવાસ બની વહેચાણા.
સફાઈ વાળાના વેશમાં ઘંટ નાદે સંભળાણા.
માગણ ના વેશ માં ઘર ઘર એ જ મંગાણા,
ભંગાર બની ને અસ્તિત્વના ભંગારે ભંગાણા.
પશુ પક્ષી ને જીવ જત સ્વ બની ને પોષાણા.
મનરવ ની મહેકતી દુનિયા માં શબ્દ બની શોષાણા.
મનજીભાઈ કાળુભાઇ મનરવ
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