Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
SAYRI K I N G
उसे गुरूर है उसे बहुत मिलेंगे
मुझे सब्र है मेरे जैसा एक ना होगा
MASHAALLHA KHAN
कल भी कितना खुबसुरत होता है ना
जिसके लिए हम आज का गला घोट देते,
फिर जब वह कल आता है ना तो फिर हम आज
को कौसते है .
-MASHAALLHA
Raju kumar Chaudhary
20 साल की एक युवती को 40 से अधिक उम्र के एक पुरुष से प्रेम हो गया — लेकिन जब वह उसे अपनी माँ से मिलवाने ले गई, तो माँ उसे गले लगाकर रोने लगी… क्योंकि वह उसके लिए कोई बहुत ही ख़ास व्यक्ति था…
मेरा नाम सिया है। मैं 20 साल की हूँ और दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में डिज़ाइन की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हूँ।
लोग अक्सर कहते हैं कि मैं अपनी उम्र से बड़ी लगती हूँ — शायद इसलिए क्योंकि मेरा पालन-पोषण सिर्फ मेरी माँ श्रीमती राधा मेहता ने किया।
मेरे पिता का देहांत तब हो गया था जब मैं बहुत छोटी थी।
उसके बाद माँ ने कभी दोबारा शादी नहीं की।
उन्होंने अकेले ही मुझे बड़ा किया — बिना थके, बिना शिकायत किए।
वह एक मज़बूत, मेहनती महिला हैं और हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं।
मेरी ज़िंदगी उस दिन बदल गई, जब मैं एक स्वयंसेवी प्रोजेक्ट में शामिल हुई।
वहीं मेरी मुलाक़ात अमित मल्होत्रा से हुई — जो तकनीकी टीम के समन्वयक थे।
उनकी उम्र 40 से कुछ ज़्यादा थी।
वह शांत स्वभाव के थे, सभ्य थे, और उनकी बात करने के अंदाज़ में एक हल्की-सी उदासी थी —
जो मेरे भीतर जिज्ञासा और सहानुभूति जगा गई।
शुरुआत में मैं बस उनका सम्मान करती थी।
लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि जब भी वह पास होते हैं, मेरा दिल तेज़ धड़कने लगता है।
अमित की नौकरी अच्छी थी।
वह अकेले रहते थे और कई साल पहले उनका तलाक़ हो चुका था — कोई संतान नहीं थी।
वह अपने अतीत के बारे में ज़्यादा बात नहीं करते थे।
बस एक बार उन्होंने कहा था:
“मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ बहुत कीमती खो चुका हूँ…
अब बस शांति से जीना चाहता हूँ।”
हमारे बीच सब कुछ स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ा —
ना कोई जल्दबाज़ी, ना बड़े वादे —
बस सम्मान और सच्चा अपनापन।
लोग बातें करते थे:
“वह इतनी छोटी है…
उसे इस उम्र के आदमी में क्या दिखता है?”
लेकिन मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था।
उनके साथ मुझे सुकून मिलता था —
ऐसा सुकून जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
एक दिन अमित ने मुझसे कहा:
“सिया, मैं तुम्हारी माँ से मिलना चाहता हूँ।
अब मैं हमारे रिश्ते को छुपाना नहीं चाहता।”
मैं घबरा गई।
मेरी माँ हमेशा से सतर्क और बहुत ज़्यादा संरक्षण करने वाली रही हैं।
लेकिन अगर हमारा रिश्ता सच्चा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी।
अगले रविवार, अमित हमारे घर आए —
हाथ में गुलदाउदी के फूलों का गुलदस्ता था,
जो मेरी माँ के पसंदीदा फूल थे —
मैंने कभी यूँ ही ज़िक्र किया था, और उन्हें याद रह गया।
हम हाथों में हाथ डाले घर के अंदर गए।
अमित शांत दिख रहे थे…
लेकिन जैसे ही घर का दरवाज़ा खुला, सब कुछ बदल गया।
माँ आँगन में पौधों को पानी दे रही थीं।
जैसे ही उन्होंने मुड़कर हमें देखा —
वह एकदम से ठिठक गईं।
उनके हाथ से पानी का कैन गिर गया।
उन्होंने मुँह पर हाथ रखा…
और फिर अचानक अमित की ओर दौड़ीं।
उन्होंने उन्हें ज़ोर से गले लगा लिया —
और ऐसे रोने लगीं जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।
“हे भगवान… अमित?!
क्या तुम सच में हो?!”
मैं सन्न रह गई।
अमित भी हिल नहीं पाए।
उनकी आवाज़ काँप रही थी:
“राधा?…
यह कैसे हो सकता है…”
मैं दोनों को देखती रह गई —
कुछ भी समझ नहीं पा रही थी।
मेरी माँ सिसकते हुए बोलीं,
उनके हाथ काँप रहे थे:
“बीस साल, अमित…
पूरे बीस साल मैंने यही समझा कि तुम मर चुके हो…”
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
उनके आँसू…
उनके चेहरे का दर्द…
और वह भारी, बोझिल ख़ामोशी…
और उसी पल मुझे समझ आ गया—
जिस आदमी से मैं प्रेम करती थी,
वह मेरी माँ के अतीत का ऐसा हिस्सा था
जिसकी गहराई की मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी।
👉 पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट में दिए गए लिंक पर क्लिक करें! 👇�
Nandani
तुम मेरा सबसे महंगा शौक हो
तुम पर वक्त नहीं
एहसास खर्च होते हैं।।
❤️
kattupaya s
Good afternoon friends.. going for short 😴
Lalit Kishor Aka Shitiz
dream come true......
mohansharma
मैं जिसकी तरफ़ रास्ता बनाता गया..
वही मेरे रास्ते में कांटे बिछाता रहा..
kattupaya s
Time for lunch. i planned it simple and tasty. then my choice is veg briyani
kattupaya s
feeling sleepy.. day sleeping is best @holidays
A singh
🦠 मानव शरीर में सबसे लंबी हड्डी कौन सी है?
A) ह्यूमरस (Humerus)
B) फेमर (Femur)
C) टिबिया (Tibia)
D) रडियस (Radius)
👇 अपने जवाब कमेंट में लिखें!
A singh
Q1. 📚 Objective Question
🦴 मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी हड्डी कौन सी है?
A) फेमर (Femur)
B) स्टेप्स (Stapes)
C) टिबिया (Tibia)
D) ह्यूमरस (Humerus)
👇 अपने जवाब कमेंट में लिखें!
SAYRI K I N G
"दूसरा मौका सबको मिलता है"
सिर्फ मिडिल क्लास परिवार के लड़कों को छोड़कर
Shefali
#shabdone_sarname__
Kaushik Dave
તારા દ્વારે આવ્યો છું, ક્યાં બીજે જઈને નમું?
તારા શરણે રહીને, જિંદગીને સાર્થક હું કરું
Shailesh Joshi
❤️પ્રેમ સમજવાની બાબત છે💞સમજાવવાની નહીં❤️
પહેલાંના સમયમાં પ્રેમની શરૂઆત એટલી ધીમી થતી, કે
સામેના પાત્રને એની જાણ કરવા માટે
મહિનાઓ, કે વર્ષો પણ લાગી જતા.
એ સમયે કોઈ મધ્યસ્થી, કે પછી ચિઠ્ઠીના સહારાની અચૂક જરૂર પડતી.
જો કોઈ મધ્યસ્થી દ્વારા જાણ કરવાનો મનમાં વિચાર આવે તો.....
મધ્યસ્થીને શું કહું ? કેવી રીતે કહું ? ફલાણા વ્યક્તિ દ્વારા કહું, કે ઢીંકણા વ્યક્તિને વચ્ચે રાખું ? કે પછી
ડાયરેક્ટ ચિઠ્ઠી લખી નાખું ?
ચિઠ્ઠી લખું તો એમાં શું લખું ?
કેટલું અને કેવું લખું ?
અને આમ આટલું વિચારવામાં, ને વિચારવામાં લગભગ મહિનાઓ, અને અમુક કિસ્સાઓમાં તો વર્ષો પણ નીકળી જતાં, અને અમુક પ્રેમ તો એવા થતાં, કે જાણ કરવામાં મહિનાઓ કે વર્ષો નહીં, પરંતુ સામેનું પાત્ર જ જીવનમાંથી ( અહીં હાથમાંથી ન લખાય ) નીકળી જતું,
મતલબ કે, કોઈ એક પાત્ર અન્ય વ્યક્તિ સાથે લગ્ન કરી પોતાના અલગ સંસારના શ્રી ગણેશ કરી લેતું.
કહેવાનું તાત્પર્ય એટલું જ કે,
એ સમયે સૌથી વધારે વિચાર સામેના પાત્રનો કરવામાં આવતો, જેમકે...
એને ખોટું તો નહીં લાગે ને ?
હું આમ કહું, કે આમ લખું તો એને નહીં ગમે.
આવું આવું વિચારીને આઠ દસ ચિઠ્ઠી તો ફાડી નાખી હોય, અને અગિયારમી ચિઠ્ઠી લખવાની તૈયારી કરતી વખતે પણ પહેલો વિચાર તો સામેની વ્યક્તિની પસંદ ના પસંદનો કરવામાં આવતો, કેમકે
"હું એને પ્રેમ કરું છું, એની સાથે જીંદગી જીવવા માંગુ છું"
અને અત્યારે ભલે જમાનો મોડર્ન, ઝડપી, અને ટેકનોલોજીનો છે, કપડાં, રહેણી કરણી, બધું બદલીએ, પરંતુ પ્રેમ તો પ્રેમ છે યાર,
એને કેવી રીતે બદલાય ?
અને જો બદલાય તો પછી એને પ્રેમ કેવી રીતે કહેવાય ? કારણ કે પ્રેમ એ પ્રેમ છે, અને એ બંને બાજુથી, કાયમ માટે, બંને વચ્ચે જ રહેવાનો, અને રોજબરોજ, દિન-પ્રતિદિન વધતો ને વધતો જ રહેવાનો, કેમકે એતો પ્રેમનો મૂળ સ્વભાવ છે.
ટૂંકમાં એટલું માનવાનું કે, જ્યાં સુધી
અમે બંને પુરી જિંદગી એકબીજા સાથે રહી શકીશું, એટલો વિશ્વાસ બંનેને એકબીજા પર નહીં, પોતપોતાના પર ન આવે, ત્યાં સુધી જે તે બે વ્યક્તિ વચ્ચેના સંબંધને પ્રેમનું નામ ન આપવું જોઈએ.
અને આ ત્યારે જ શક્ય બને કે જ્યારે બંને વ્યક્તિ એકબીજાને સારામાં સારી રીતે સમજે, ઓળખે, અને સાંભળે, તેમજ, સમજ્યા, ઓળખ્યા અને સાંભળ્યાં પછી પણ જો કોઈ કોઈવાર મતભેદ જેવું લાગે, ત્યારે એકબીજાને જવાબ આપતા પહેલા, સામેનો વ્યક્તિ મે પોતે પસંદ કરેલ મારો પ્રેમ છે, મારી જિંદગી છે, બસ આટલું વિચારી, થોડો સમય લઈને નિર્ણય લેવો, તો જીવનમાં ગમે તેવા, ને ગમે તેટલા મતભેદો ઉભા થાય, પરંતુ એ બે પ્રેમીઓ વચ્ચે પોતાની જગ્યા ક્યારેય નહીં બનાવી શકે, એ હકીકત છે.
એના માટે બંને લોકોએ ભેગા થતાં સમયે, પ્રેમમાં બંધાતા સમયે પોતપોતાને, અને એકબીજાને પણ, એક વચનમાં બાંધી લેવા કે, અમારા જીવનમાં નાની મોટી ભલે હજ્જારો, લાખ્ખો મુસીબતો, અડચણો, તકલીફો કે ગમે તેવા, અને ગમે તેટલા કપરા, વિકટ કે અતિ વિકટ સંજોગો આવે, અમે બંને એની સામે અડીખમ રહી એનો સામનો કરીશું, કે પછી સહન કરી લઈશું, પરંતુ એમાંથી એકે ને, અમારા બંનેની વચ્ચે નહીં આવવા દઈએ.
પ્રેમ ભલે આપણે કરીએ, પરંતુ આપણે એક વાત હંમેશા યાદ રાખવી જોઈએ કે, આપણા પ્રેમમાં ઈશ્વરના આશીર્વાદ ભળેલા હોય છે, માટે એનું જતન, અને આદર કરવો, કેમકે એ પણ પૂજાથી ઓછું નથી.
Mona Ghelani
રહેમત છે ખુદાની.....🦋🌻🌸🏵️🍁🌹🌼
Paagla
https://youtube.com/shorts/6oOjoQDLAps?si=YH5kq_PWRAJobxHi
Narendra Parmar
दुरियों से मोहब्बत मापी नहीं जाती
जहां तक रुह की बात हों
वहां पर हुस्न की बात की नहीं जाती ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
Sonam Brijwasi
or badhiya sab
Narendra Parmar
यही तो एक नारी की पहचान है
मां दुर्गा उनका दुसरा नाम है ।।
✔️💯🙏
Raju kumar Chaudhary
https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kzस्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
Raju kumar Chaudhary
बेटा-बहु अपने बैडरूम में बातें कर रहे थे, द्वार खुला होने के कारण उनकी आवाजें बाहर कमरे में बैठी माँ को भी सुनाई दे रहीं थीं।
बेटा---" अपने job के कारण हम माँ का ध्यान नहीं रख पाएँगे, उनकी देखभाल कौन करेगा ?
क्यूँ ना, उन्हें वृद्धाश्रम में दाखिल करा दें, वहाँ उनकी देखभाल भी होगी और हम भी कभी कभी उनसे मिलते रहेंगे। "
बेटे की बात पर बहु ने जो कहा, उसे सुनकर माँ की आँखों में आँसू आ गए।
.
.
बहु---" पैसे कमाने के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है जी, लेकिन माँ का आशीष जितना भी मिले, वो कम है। उनके लिए पैसों से ज्यादा हमारा संग-साथ जरूरी है।
मैं अगर job ना करूँ तो कोई बहुत अधिक नुकसान नहीं होगा। मैं माँ के साथ रहूँगी।
घर पर tution पढ़ाऊँगी, इससे माँ की देखभाल भी कर
पाऊँगी। याद करो, तुम्हारे बचपन में ही तुम्हारे पिता
नहीं रहे और घरेलू काम धाम करके तुम्हारी माँ ने तुम्हारा पालन पोषण किया, तुम्हें पढ़ाया लिखाया, काबिल बनाया।
तब उन्होंने कभी भी पड़ोसन के पास तक नहीं छोड़ा, कारण तुम्हारी देखभाल कोई दूसरा अच्छी तरह नहीं करेगा,
और तुम आज ऐंसा बोल रहे हो।
तुम कुछ भी कहो, लेकिन माँ हमारे ही पास रहेंगी,
हमेशा, अंत तक। "
बहु की उपरोक्त बातें सुन, माँ रोने लगती है और रोती हुई ही, पूजा घर में पहुँचती है।
ईश्वर के सामने खड़े होकर माँ उनका आभार मानती है
और उनसे कहती है---" भगवान, तुमने मुझे
बेटी नहीं दी, इस वजह से कितनी ही बार मैं तुम्हे भला बुरा कहती रहती थी, लेकिन ऐंसी भाग्यलक्ष्मी देने के लिए तुम्हारा आभार मैं किस तरह मानूँ...?
Raju kumar Chaudhary
एलिसा बिलियनेयरउसने अपनी "बेचारी" पूर्व पत्नी को शानदार शादी में बुलाया ताकि अपनी दौलत दिखा सके — लेकिन जब वो लग्जरी कार में कंबल बच्चों के साथ आई और एक ही वाक्य बोला, तो सबका दिल बैठ गया!
ग्रैंड गार्डन ऑफ एक 5-स्टार होटल में हजारों सफेद गुलाब बिछे थे, जो खास तौर पर इक्वाडोर से मंगवाए गए थे। लाइव ऑर्केस्ट्रा बज रहा था। समाज के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोग मौजूद थे। ये था मार्को और कैसैंड्रा की शादी का दिन।
मार्को एक ऐसा आदमी था जो गरीबी में पला-बढ़ा लेकिन महत्वाकांक्षा से भरा हुआ। पांच साल पहले उसने अपनी पहली पत्नी एलिसा को तलाक दे दिया। एलिसा एक छोटी सी ऑफिस में साधारण क्लर्क थी। मार्को को लगा कि उसके साथ रहकर वो कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा।
“तुम बस बोझ हो, एलिसा,” ये उसके आखिरी शब्द थे जब उसने तलाक के कागज थमाए। “तुम हमेशा गरीब रहोगी। मेरे सपनों की जिंदगी तुम कभी नहीं दे सकतीं।”
मार्को ने एलिसा को रोते हुए छोटे से किराए के कमरे में छोड़ दिया। उसे नहीं पता था कि उसी दिन एलिसा उसे बताने वाली थी कि वो प्रेग्नेंट है।
अब मार्को ने अपना सपना पा लिया था। वो कैसैंड्रा से शादी करने जा रहा था — इम्पीरियल रियल एस्टेट की इकलौती बेटी और वारिस, एक बिलियन डॉलर की कंपनी।
अपनी कामयाबी को और ज्यादा चमकाने के लिए मार्को ने जानबूझकर एलिसा को पुराने पते पर VIP इनविटेशन भेजा।
“बेब, अपनी उस भूखी-मरी पूर्व पत्नी को क्यों बुलाया?” कैसैंड्रा हंसते हुए शैंपेन पीते हुए बोली, सेरेमनी शुरू होने से पहले।
मार्को ने मुस्कुराकर कहा, “बस उसे दिखाना चाहता हूं कि मैं कहां पहुंच गया हूं और वो कहां है। वो शायद यहां पुरानी जीप में और फटे कपड़ों में आएगी। मैं उसे पांच हजार रुपये दे दूंगा टैक्सी के लिए वापस जाने के।”
दोनों हंस पड़े। कुछ मेहमानों ने भी सुना और हंसे। सब इंतजार कर रहे थे कि “बेचारी” एलिसा आए और वो उसे मजाक बनाएं।
सेरेमनी शुरू हुई। कैसैंड्रा आइल में चल रही थी तभी अचानक एक तेज, गड़गड़ाती आवाज आई।
ऑर्केस्ट्रा रुक गया। सबने एंट्रेंस की तरफ देखा।
एक चमचमाती लिमिटेड एडिशन Rolls-Royce Phantom — जिसकी कीमत लगभग सौ करोड़ से ज्यादा थी — धीरे-धीरे रेड कार्पेट पर रुकी। ऐसी कार सिर्फ दुनिया के सबसे बड़े बिलियनेयर्स के पास होती है।
यूनिफॉर्म में चालक उतरा और पीछे का दरवाजा खोला।
सबकी सांसें थम गईं। सब सोच रहे थे कोई बड़ा सेलिब्रिटी या विदेशी VIP उतरेगा।
लेकिन बाहर निकली एक महिला — कस्टम-मेड हॉट क्यूचर रेड गाउन में, गर्दन पर प्योर डायमंड की नेकलेस, बाल परफेक्ट बन में, और रवैया ऐसा जैसे पूरी दुनिया उसकी हो।
मार्को का मुंह खुला रह गया। हाथ से अंगूठी छूट गई।
“ए-एलिसा?!” उसने फुसफुसाया।
वो एलिसा थी — जिसे उसने रोते हुए छोटे कमरे में छोड़ा था, आज वो यहीं खड़ी थी, दौलत और पावर से लबरेज।
लेकिन असली झटका अभी बाकी था।
कार के पीछे से दो छोटी-छोटी लड़कियां उतरीं — चार साल की जुड़वां बहनें, मोगर्ब सफेद ड्रेस में। दोनों ने एलिसा के दोनों हाथ पकड़ रखे थे।
जैसे ही बच्चों ने मुंह उठाया, मेहमानों में हलचल मच गई। सब फुसफुसाने लगे।
उनकी आंखें, नाक, चेहरे का शेप… बिल्कुल मार्को जैसा। कोई शक नहीं — ये उसकी ही संतान थीं।
मार्को का चेहरा सफेद पड़ गया। घुटने कांप रहे थे। वो रेड कार्पेट पर एलिसा की तरफ बढ़ा। कैसैंड्रा पीछे-पीछे आई, गुस्से से लाल।
“एलिसा… ये कैसे?” मार्को हकलाया, बच्चों और एलिसा की तरफ देखते हुए। “ये… मेरे बच्चे हैं?”
एलिसा ने ठंडी, आत्मविश्वास भरी मुस्कान दी।
तभी एक बच्ची ने मासूमियत से पूछा,
“मम्मी, क्या ये वही अंकल हैं जिनकी पुरानी फोटो हमने गैरेज में झाड़ू बनाने के लिए इस्तेमाल की थी?”
मार्को का सिर झुक गया। शर्म से। सबने सुन लिया।
“तुम कौन हो?!” कैसैंड्रा चिल्लाई, एलिसा की तरफ उंगली करके। “सिक्योरिटी! इस औरत को क्यों आने दिया? मार्को, तूने तो इसे निकाल दिया था ना? अब बच्चों को लेकर आई है, शायद मेंटेनेंस मांगने!”
एलिसा ने कैसैंड्रा को सिर से पांव तक देखा, जैसे कोई कचरा हो।
फिर उसने अपने महंगे Hermès बैग से एक काला लिफाफा निकाला और मार्को को थमाया।
“इनविटेशन के लिए शुक्रिया, मार्को,” एलिसा ने शांत लेकिन गूंजती आवाज में कहा। “तूने पुराने घर पर भेजा था। पता नहीं था कि मैंने वो पूरी कॉलोनी खरीद ली है और नया मॉल बनाने वाली हूं?”
मार्को की आंखें फैल गईं। एलिसा बिलियनेयर? कैसे?
उसके बाद एलिसा ने जो एक वाक्य कहा, वो मार्को और कैसैंड्रा की दुनिया हिला देने वाला था…
(क्या था वो लिफाफे में? एलिसा ने इतनी दौलत कैसे कमाई? और उस एक वाक्य ने शादी को कैसे उलट-पुलट कर दिया?)
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Hetu P
માન્યું કે હીરો હાથમાંથી સરકી ગયો છે,
પણ તારા ગયા પછી અમે ક્યાં નવી ખાણ ખોદી છે,
કહ્યું હતું કે તારા જવાથી શું થશે મને,
બસ એજ હાલત છે આજકાલ
પણ તને કિયા કશું ફરક પડે છે
ખેર....હવે હાલ કેવાથી શું ફાયદો ?
Ankita
It was too late to realize-In trying to impress you, I forgot myself.
And in trying to forget you, I lost myself.
Ankita
It was too late to realize-In trying to impress you, I forgot myself.
And in trying to forget you, I lost myself.
SAYRI K I N G
हालात गरीब हो तो चलेगा
लेकिन सोच भिखारी नहीं होनी चाहिए
kattupaya s
old painful memories fade away when you get more painful things in present. it's just a logic
kattupaya s
problems found everywhere. but all the problems coming to me for solution.
kattupaya s
morning it's cold..afternoon it's hot. evening again cold.. even climate also confused😵🤔😕
kattupaya s
I tried to quit matrubharti. but for some reasons iam unable to do it. hard to believe it
kattupaya s
it's breakfast time..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
कहाँ जा रहे हैं हम?
कहाँ जा रहे है हम मंज़िल का पता ही नहीं l
निकल तो पड़े है रास्तों का पता भी नहीं ll
सारी उम्र रिश्ता बनाने को भागते रहे हैं कि l
अनजानी डगर पर पहचाना सा कही नहीं ll
थोड़ी सी खुशियों से दामन को भरने को l
बहुत बार ऊल्लू बन चुके है अभी नहीं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kajal jha
खामोशी अक्सर उन सवालों का जवाब होती है, जिनके जवाब शब्दों में नहीं मिलते।
ज़िंदगी वही सिखाती है, जो किताबों में कभी लिखा ही नहीं होता।
कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में सबक बनकर आते हैं, और कुछ पूरी कहानी बन जाते हैं।
जिस दिन इंसान खुद को समझ लेता है, उस दिन दुनिया की आधी उलझनें खत्म हो जाती हैं। 🌙
- kajal jha
kattupaya s
people are waiting for her good morning posts. she never sleeps
kattupaya s
believe in love not the love offered to you. it is limitless. u cannot survive
kattupaya s
she used to use lot of flowers in her post. now a days it's missing. who is the lucky guy
kattupaya s
she said just a hi. within half an hour we have blessed with baby boy. my life just going on like dis
kattupaya s
if you support Newzealand in T20 world cup. I pray for u to the heart broken event.
kattupaya s
Here my morning is varying depends upon your mood.. what a day it is going to be? iam waiting for a surprise
InkImagination
“Zidd, Zakhm aur Mafia Ka Dil”
वो शहर का सबसे खतरनाक माफिया था…
जिसके नाम से दुश्मन काँपते थे।
और वो… एक मासूम सी लड़की,
जिसने कभी किसी का बुरा तक नहीं सोचा।
लेकिन किस्मत ने दोनों को एक ऐसी राह पर ला खड़ा किया,
जहाँ नफरत, खतरा और मौत के बीच
धीरे-धीरे एक ऐसा रिश्ता बनने लगा
जिसे शायद दुनिया प्यार कहती है।
क्या एक माफिया सच में बदल सकता है?
क्या एक मासूम लड़की उसके अंधेरे दिल में रोशनी ला पाएगी?
जानने के लिए सुनिए पूरी कहानी —
“Zidd, Zakhm aur Mafia Ka Dil”
मेरे YouTube चैनल पर।
📌 https://youtu.be/FRXFTyZphmw?si=mdkYbtB9exTyyzsc
Imaran
कभी मिलने आ, कभी यूं ही दिख मुझे हैरान कर दे
मैं बहुत खुश हूं याद आ-आ के परेशान कर दे
💔imran 💔
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
दुश्मन होते बहुत हैं, कुछ कर देते वार। रहते हैं अनभिज्ञ हम, खाते उनकी मार।।
दोहा --४४२
(नैश के दोहे से उद्धृत)
--------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(३१) की व्याख्या
ऋगुवेद -(मण्डल 10, सूक्त 26, मन्त्र 9)
इमं नः श्रुणवद्धवम्।
पद–पद अर्थ
इमम् — इस (प्रार्थना को)
नः — हमारी
श्रुणवद् — सुने / श्रवण करे
हवम् — आह्वान, प्रार्थना, पुकार
भावार्थ--
हे परमेश्वर! हमारी इस प्रार्थना और पुकार को सुनिए।
व्याख्या--
इस मन्त्र में ऋषि परमेश्वर से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि वह भक्तों की पुकार को सुनें। वैदिक परम्परा में “हव” शब्द का अर्थ केवल यज्ञ में की जाने वाली आहुति ही नहीं, बल्कि हृदय से की गई सच्ची प्रार्थना और आह्वान भी है।
अर्थ यह है कि जब मनुष्य श्रद्धा, सत्य और पवित्र भावना से ईश्वर को पुकारता है, तब परमेश्वर उसकी प्रार्थना को अवश्य सुनते हैं और उसे मार्गदर्शन, शक्ति और संरक्षण प्रदान करते हैं।
यह मन्त्र मनुष्य को यह शिक्षा देता है कि—
ईश्वर सर्वज्ञ और सर्वश्रुता है।
सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती।
मनुष्य को संकट या आवश्यकता के समय ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
वेदों में प्रमाण--
1. ऋग्वेद-- 1.89.1
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः।
भावार्थ :
हे देवो! हम अपने कानों से कल्याणकारी वचन सुनें।
अर्थ :
मनुष्य ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसकी प्रार्थना को सुने और उसे कल्याणकारी मार्ग प्रदान करे।
2. ऋगुवेद--7.32.26
श्रुधि हवम्।
भावार्थ :
हे प्रभु! हमारी प्रार्थना (हव) को सुनिए।
अर्थ :
यहाँ ऋषि स्पष्ट रूप से ईश्वर से कहते हैं कि वह भक्त की पुकार को सुनें।
3. ऋग्वेद-- 1.25.19
श्रुधि हवम् अद्य च मृळय त्वम्।
भावार्थ :
हे प्रभु! आज हमारी प्रार्थना सुनिए और हम पर कृपा कीजिए।
4. यजुर्वेद-- 36.18
मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्।
भावार्थ :
हम सब प्राणी एक-दूसरे को मित्रभाव से देखें।
अर्थ :
यह प्रार्थना है कि ईश्वर मानव के भीतर सद्भावना उत्पन्न करें।
5. अथर्ववेद-- 19.9.10
श्रुण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्राः।
भावार्थ :
हे अमृत के पुत्रों! सब सुनो।
अर्थ :
यहाँ भी प्रार्थना और आह्वान की भावना प्रकट होती है कि दिव्य सत्ता मनुष्य की वाणी और प्रार्थना को ग्रहण करे।
उपनिषदों में प्रमाण--
१--श्वेताश्वतर उपनिषद् --6.23
यस्य देवे परा भक्तिर्यथा देवे तथा गुरौ।
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः॥
भावार्थ :
जिस मनुष्य की परमेश्वर में और गुरु में गहरी भक्ति होती है, उसके लिए उपनिषदों के सत्य अपने आप प्रकट हो जाते हैं।
अर्थ :
यह बताता है कि परमात्मा भक्त की भावना को स्वीकार करते हैं और उसे ज्ञान प्रदान करते हैं।
२- कंठ उपनिषद् --1.2.23
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यः तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम्॥
भावार्थ :
यह आत्मा केवल वाणी, बुद्धि या अधिक शास्त्र सुनने से नहीं मिलता; जिसे परमात्मा स्वीकार करते हैं, उसी पर वह स्वयं प्रकट होते हैं।
सच्चे भाव से किया गया आह्वान ही ईश्वर की कृपा का कारण बनता है।
३-मुण्डकोपनिषद --3.2.3
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यः।
भावार्थ :
आत्मा केवल उपदेश या बुद्धि से नहीं मिलता; जिस साधक को परमात्मा स्वीकार करते हैं, वही उसे प्राप्त करता है।
भक्ति और प्रार्थना से ही ईश्वर की कृपा मिलती है।
४-तैत्तिरीय उपनिषद् --3.1.1
यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते।
येन जातानि जीवन्ति।
यत् प्रयन्त्यभिसंविशन्ति।
भावार्थ :
जिससे सब प्राणी उत्पन्न होते हैं, जिससे जीवित रहते हैं और जिसमें अन्त में प्रवेश करते हैं वही ब्रह्म है।
वही सर्वज्ञ ब्रह्म सभी प्राणियों की प्रार्थना और भावनाओं को जानता है।
५-ईश उपनिषद्- 15
हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।
तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥
भावार्थ :
हे परम प्रकाशस्वरूप प्रभु! सत्य के मुख को ढकने वाले आवरण को हटाइए ताकि सत्य का दर्शन हो सके।
यह परमात्मा से की गई प्रार्थना है कि वे साधक की विनती को सुनकर उसे सत्य का ज्ञान दें।
६.बृहदारण्यक उपनिषद् --1.3.28
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
भावार्थ :
हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अन्धकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमृत की ओर ले चलिए।
यह स्पष्ट प्रार्थना है कि परमात्मा मनुष्य की पुकार सुनकर उसे सही मार्ग पर ले जाएँ।
७-प्रश्न उपनिषद् --6.3
स प्राणमसृजत।
भावार्थ :
परमात्मा ने ही प्राण की रचना की।
जो परमात्मा सब प्राणियों का कर्ता और ज्ञाता है, वही उनके मन और प्रार्थना को भी जानता है।
८-मैत्री उपनिषद् --6.17
(भावार्थ) :
जो मनुष्य श्रद्धा और ध्यान से ब्रह्म का स्मरण करता है, वह उसी ब्रह्म को प्राप्त होता है।
यह बताता है कि ईश्वर भक्त की साधना और प्रार्थना को स्वीकार करते हैं।
निष्कर्ष--
वेद और उपनिषद दोनों का सिद्धान्त है कि—
परमात्मा सर्वज्ञ है।
वह भक्त की प्रार्थना और आह्वान को सुनता है।
सच्ची श्रद्धा से किया गया आह्वान मनुष्य को ज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाता है।
पुराणों में प्रमाण --
1. विष्णु पुराण _
स्मृतो हि भगवान् विष्णुः संकटनाशनः।
भावार्थ :
भगवान विष्णु का स्मरण करने से संकट दूर हो जाते हैं।
जो भक्त श्रद्धा से भगवान को पुकारता है, उसकी प्रार्थना भगवान सुनते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।
2. भागवत पुराण --10.14.8
तत्तेऽनुकम्पां सुसमीक्षमाणो
भुञ्जान एवात्मकृतं विपाकम्।
भावार्थ :
जो मनुष्य भगवान की कृपा को समझते हुए उन्हें स्मरण करता है, वह अंततः भगवान की कृपा प्राप्त करता है।
भक्ति और प्रार्थना से भगवान की अनुकम्पा प्राप्त होती है।
3. पद्म पुराण --
नामस्मरणमात्रेण नरो याति परां गतिम्।
भावार्थ :
केवल भगवान के नाम का स्मरण करने से ही मनुष्य उच्च अवस्था को प्राप्त करता है।
यह दर्शाता है कि भगवान भक्त की पुकार और स्मरण को स्वीकार करते हैं।
4.शिव पुराण--
भक्तानां आर्तिनाशाय शिवो नित्यं प्रसीदति।
भावार्थ :
भगवान शिव अपने भक्तों के दुःखों को दूर करने के लिए सदैव प्रसन्न रहते हैं।
भक्त की प्रार्थना भगवान तक पहुँचती है और वे उसकी सहायता करते हैं।
पुराणों में बार-बार यह सिद्धान्त मिलता है कि—
परमात्मा भक्त की प्रार्थना सुनते हैं।
स्मरण, जप और भक्ति से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
संकट के समय भगवान भक्त की रक्षा करते हैं।
५--स्कंद पुराण --
भक्तवत्सल भगवान् भक्तानां दुःखनाशनः।
भावार्थ :
भगवान भक्तों से प्रेम करने वाले और उनके दुःखों को दूर करने वाले हैं।
जब भक्त भगवान को पुकारता है, तो वे उसकी प्रार्थना सुनकर उसकी सहायता करते हैं।
६. गरुड़ पुराण --
हरिस्मरणमात्रेण सर्वदुःखक्षयो भवेत्।
भावार्थ :
भगवान हरि का स्मरण मात्र करने से ही मनुष्य के दुःख नष्ट हो जाते हैं।
यह दर्शाता है कि भगवान भक्त की पुकार और स्मरण को स्वीकार करते हैं।
७.ब्रह्म पुराण --
नमस्कारप्रियो विष्णुः भक्तानुग्रहकारकः।
भावार्थ :
भगवान विष्णु नमस्कार और भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों पर कृपा करते हैं।
भक्त की प्रार्थना भगवान को प्रसन्न करती है और वे उसे आशीर्वाद देते हैं।
८. अग्नि पुराण --
स्मृतो हरति पापानि विष्णुः सर्वदुःखनाशनः।
भावार्थ :
भगवान विष्णु का स्मरण करने से पाप और दुःख दूर हो जाते हैं।
अर्थ :
यह बताता है कि भगवान भक्त के स्मरण और प्रार्थना को सुनते हैं।
निष्कर्ष
पुराणों का भी यही सिद्धान्त है—
भगवान भक्तवत्सल हैं।
वे भक्त की प्रार्थना और स्मरण को स्वीकार करते हैं।
श्रद्धा से किया गया आह्वान भगवान की कृपा प्राप्त कराता है।
1. भगवत् गीता --9.22
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥
भावार्थ :
जो लोग अनन्य भाव से मेरा चिन्तन और भक्ति करते हैं, उनके योग और क्षेम का भार मैं स्वयं उठाता हूँ।
भगवान भक्त की प्रार्थना और भक्ति को स्वीकार करके उसकी रक्षा और पालन करते हैं।
2. भगवत् गीता --4.11
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
भावार्थ :
जो भक्त मुझे जिस प्रकार भजते हैं, मैं भी उन्हें उसी प्रकार फल देता हूँ।
ईश्वर भक्त की भावना और प्रार्थना का प्रत्युत्तर देते हैं।
3. भगवत् गीता --7.21
यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति।
तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥
भावार्थ :
जो भक्त जिस देवता की श्रद्धा से पूजा करना चाहता है, मैं उसी में उसकी श्रद्धा को स्थिर कर देता हूँ।
परमात्मा भक्त की भावना और प्रार्थना को जानते हैं।
4. भगवत् गीता --10.10
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्।
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते॥
भावार्थ :
जो भक्त प्रेमपूर्वक मेरी भक्ति करते हैं, उन्हें मैं वह बुद्धियोग देता हूँ जिससे वे मुझे प्राप्त कर सकें।
ईश्वर भक्त की पुकार सुनकर उसे ज्ञान और मार्गदर्शन देते हैं।
निष्कर्ष--
गीता का सिद्धान्त है—
भगवान भक्त की भक्ति और प्रार्थना को सुनते हैं।
वे भक्त की रक्षा, पालन और मार्गदर्शन करते हैं।
सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना का फल अवश्य मिलता है।
१-महाभारत --(वनपर्व)
न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति।
भावार्थ :
हे प्रिय! जो मनुष्य शुभ कर्म करता है और ईश्वर का स्मरण करता है, वह कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।
ईश्वर भक्त के सत्कर्म और प्रार्थना को स्वीकार करके उसकी रक्षा करते हैं।
२--महाभारत--(शान्तिपर्व)
भक्तानां प्रार्थनां देवः शृणोति करुणानिधिः।
भावार्थ :
करुणा के सागर भगवान भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं।
परमात्मा भक्त की पुकार को सुनकर उस पर कृपा करते हैं ।३--महाभारत--(अनुशासनपर्व)
स्मृतो हि भगवान् विष्णुः सर्वदुःखप्रणाशनः।
भावार्थ :
भगवान विष्णु का स्मरण करने से सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं।
भक्ति और प्रार्थना भगवान की कृपा प्राप्त करने का साधन है।
4. महाभारत -(भीष्मपर्व)
प्रार्थनाभिर्हि देवेशः प्रसन्नो भवति प्रभु:।
भावार्थ --भगवान प्रार्थनाओं से प्रसन्न होते हैं।
सच्चे मन से की गयी प्रार्थना ईश्वर तक पहुँचती है और “ईश्वर भक्त की प्रार्थना सुनते हैं तथा उसकी पुकार का उत्तर देते हैं”—
स्मृति ग्रन्थों मे प्रमाण --
१- मनु स्मृति --2.87
वेदः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियमात्मनः।
एतच्चतुर्विधं प्राहुः साक्षाद्धर्मस्य लक्षणम्॥
भावार्थ :
वेद, स्मृति, सदाचार और आत्मा को प्रिय आचरण— ये धर्म के चार लक्षण बताए गए हैं।
धर्म के अनुसार जीवन और ईश्वर की उपासना मनुष्य को ईश्वर की कृपा का पात्र बनाती है।
२-यागवल्क्य स्मृति --
श्रुतिस्मृतिपुराणानां विरोधो यत्र दृश्यते।
तत्र श्रुतिः प्रमाणं स्यात्।
भावार्थ :
जहाँ श्रुति, स्मृति और पुराणों में मतभेद दिखाई दे, वहाँ श्रुति (वेद) को प्रमाण माना जाता है।
स्मृतियाँ भी वेदों के सिद्धान्त का अनुसरण करती हैं, जिनमें प्रार्थना और ईश्वर की उपासना का महत्व बताया गया है।
३-पराशर स्मृति --
स्मरणाद् देवदेवस्य विष्णोः पापं प्रणश्यति।
भावार्थ :
देवों के देव भगवान विष्णु का स्मरण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं।
भक्ति और स्मरण से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
“ईश्वर भक्त की प्रार्थना सुनते हैं और उसकी पुकार स्वीकार भी करते हैं।
१-चाणक्य नीति --
नित्यं स्मरेद् हरिं भक्त्या नित्यं धर्मं समाचरेत्।
धर्मेण लभते सर्वं धर्मसारमिदं जगत्॥
भावार्थ :
मनुष्य को नित्य भक्ति से भगवान का स्मरण करना चाहिए और धर्म का आचरण करना चाहिए; धर्म से ही सब कुछ प्राप्त होता है।
ईश्वर का स्मरण और प्रार्थना मनुष्य को भगवान की कृपा दिलाते हैं।
२- हितोपदेश--
यस्य स्मरणमात्रेण दुःखं नश्यति तत्क्षणात्।
भावार्थ :
जिस परमात्मा के स्मरण मात्र से दुःख तुरंत नष्ट हो जाते हैं।
यह दर्शाता है कि ईश्वर भक्त के स्मरण और प्रार्थना को स्वीकार करते हैं।
३--. सुभाषित --
(नीति-साहित्य)
स्मृतो हि भगवान् विष्णुः सर्वदुःखप्रणाशनः।
भावार्थ :
भगवान विष्णु का स्मरण करने से सभी दुःख दूर हो जाते हैं।
ईश्वर का स्मरण और प्रार्थना मनुष्य के दुःखों को दूर करने का साधन बताया गया है।
निष्कर्ष--
नीति-ग्रन्थों का भी यही सिद्धान्त है—
मनुष्य को संकट और सुख दोनों में ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
भक्ति और प्रार्थना से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
परमात्मा ही मनुष्य का सच्चा सहायक और रक्षक है।
“ईश्वर भक्त की प्रार्थना सुनते हैं और उसकी पुकार स्वीकार करते हैं”।
१. गर्ग संहिता में प्रमाण--
स्मरणादेव कृष्णस्य नश्यन्ति विघ्नसङ्कटाः।
भक्तानां करुणासिन्धुः सदा तेषां हिते रतः॥
भावार्थ :
भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करने मात्र से विघ्न और संकट नष्ट हो जाते हैं। वे भक्तों पर करुणा करने वाले हैं और सदैव उनके हित में लगे रहते हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि भगवान भक्त की प्रार्थना और स्मरण को स्वीकार करते हैं और उसकी सहायता करते हैं।
२-- योग वशिष्ठ में प्रमाण--
यथा भावना यस्य सिद्धिर्भवति तादृशी।
भावार्थ :
मनुष्य की जैसी भावना होती है, उसे उसी प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।
यदि मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से परमात्मा का स्मरण करता है, तो उसकी प्रार्थना फल देती है और उसे आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
निष्कर्ष--
इन ग्रन्थों का भी यही सिद्धान्त है
ईश्वर भक्तवत्सल हैं।
वे भक्त की प्रार्थना और स्मरण को सुनते हैं।
“ईश्वर भक्त की प्रार्थना सुनते हैं और उसकी पुकार स्वीकार करते हैं।
१-वाल्मीकि रामायण-- (युद्धकाण्ड)
सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥
भावार्थ :
जो मनुष्य एक बार भी मेरी शरण में आकर कहता है कि “मैं आपका हूँ”, उसे मैं सभी प्राणियों से अभय देता हूँ — यह मेरा व्रत है।
भगवान श्रीराम भक्त की शरणागति और प्रार्थना को स्वीकार करते हैं और उसकी रक्षा करते हैं।
२-वाल्मीकि रामायण (अरण्यकाण्ड)
श्लोक :
धर्मात्मा सत्यसन्धश्च रामो दाशरथिर्यदि।
भावार्थ :
यदि दशरथ पुत्र राम धर्मात्मा और सत्यप्रतिज्ञ हैं, तो वे भक्तों की रक्षा अवश्य करेंगे।
यहाँ भी विश्वास प्रकट किया गया है कि भगवान अपने भक्तों की पुकार को सुनते हैं।
श्रीराम का स्मरण और प्रार्थना संकट से रक्षा का साधन बताया गया है।
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kattupaya s
ok friends share your thoughts see u later
kattupaya s
friend zoned people are hard to understand. they are innocent. I respect them
kattupaya s
hug me more tightly. it costs nothing. kiss me like you never had before. hug and kiss are essential for existence
kattupaya s
when love becomes failure you are welcome to the friends zone
kattupaya s
Theory of love is simple. a yes is a no and no is a yes. yes may be no. a no may be yes. yes it's true.
kattupaya s
don't wait for someone you love say pls hug me or kiss me.. you better leave them alone
kattupaya s
love is getting deeper after every kiss. but the kiss to be given for no reason on right time.
kattupaya s
my heart says first love is best love. but my mind says stop the nonsense of falling in the name of love to someone
kattupaya s
it's hard to walk alone in unknown way. come with me to find new ways in love path.
kattupaya s
keep on trying to break my heart. iam already on my unknown way
kattupaya s
you are the pain in my heart. but I fall in love with the heart which pains more for me
kattupaya s
I hate you for no reason. I love you for the same reason. is am in real world?
kattupaya s
iam going to sleep in the morning with your memories. I suddenly remember it's only memories beteween us. stop everything don't bother me again
kattupaya s
it's hard time but u waited all the time for me. the time knows the pain. I pray for you..you never be alone hereafter. that's my promise
kattupaya s
I cry alone.. it's deep but my love is deeper than my tears. I want cry more alone
kattupaya s
key to success of love is begin with the day as first day you fall in love unknowingly
kattupaya s
Iam thinking only about u.. whatever may be the situation even in worst condition
kattupaya s
it doesn't meant to hurt you.. still love you
I just need a break to understand my love
kattupaya s
Never leave someone who remembers you even after a fight..
kattupaya s
Good morning friends.. have a great day
Shada
I am tired of waiting, it's been the same since many years.
Maybe you don't deserve it, you're not worthy enough of it.
You are hurt each time you try to. But why does it happen to be so?
Am I wrong? Am I repenting for those whom I hurt unintentionally?
I don't know what to do? I am not just spiralling, I am falling each time much more harder and deeper. When will I even surface back?
I took a second chance believing it would help me come back tougher, but here I am still stuck
Why do you do this again?
You've been hurt more than enough, you know it could break you again, but why again?
All the pain keeps coming back, it's been so long, aren't you tired? I wish for someone to understand what I am going through, just be my side. But you don't deserve it I guess, you were never meant to be loved or cared for.
No one is responsible for what you've been through, you can't burden them. But I wish someone would say- "I am there for you". Is it too much to ask?
Mrudhula
Sometimes I feel like my life is a book made of many pages.
Every page carries an experience, every line carries a lesson.
Not everyone will like what I write in my life.
Some people will judge it, some will criticize it, and some may even hate it.
But I understand that their opinions come from their own mindset.
Just like words written on a page cannot be erased easily,
the experiences that shape me cannot be changed by others.
People may dislike me or misunderstand me,
but they do not have the power to rewrite my story.
Avinash
भीड़ से अलग मेरी एक राह होगी,
मेरी हर जीत की अपनी गवाह होगी।
किसी और की स्याही से नहीं लिखता मैं,
मेरी दास्ताँ अब मेरी ही पनाह होगी।
Sudhir Srivastava
चौपाई - होली
सबके साथ मनाएं होली।
बोलो सबसे मीठी बोली।।
निंदा नफरत दूर भगाओ।
मन संशय होलिका जलाओ।।
रंगों का त्योहार सुहाना।
सभी गा रहे इसका गाना।।
होली का संदेश पुराना।।
मिलकर गले फाग है गाना।।
मर्यादा में खेलों होली।
बन जाओ सबके हमजोली।।
रंग बिरंगी सूखी गीली।
लाल रही या नीली पीली।।
बच्चे बूढ़े नहीं छेड़ना।
बीमारों को आप देखना।।
नहीं किसी का हृदय दुखाना।
रंग अबीर गुलाल लगाना।।
मिलकर हम हुड़दंग मचाएँ।
रंग अबीर गुलाल लगाएँ।।
प्रेम प्यार से खेलें होली।
मिश्री जैसी मीठी बोली।।
रंगों से हर गाल सजाएँ।
हिल मिलकर त्योहार मनाएँ।।
छोटों को अपने दुलराएँ।
शीश बड़ों के चरण झुकाएं।।
सुधीर श्रीवास्तव
Raju kumar Chaudhary
बेटे ने फुसफुसाकर कहा कि पापा किसी और औरत के साथ हैं और माँ का सारा पैसा लेने वाले हैं, इसलिए मैंने तुरंत अपनी व्यावसायिक यात्रा रद्द कर दी और चुपचाप एक काम किया… और तीन दिन बाद, सच्चाई ने मुझे स्तब्ध कर दिया।...
मेरा नाम आरोही है, मैं 36 साल की हूँ, मुंबई में रहती हूँ, और एक स्वच्छ खाद्य कंपनी में संचालन प्रबंधक (Operations Manager) के पद पर कार्यरत हूँ। रोहन, जो एक आईटी तकनीशियन हैं, के साथ मेरी शादी को दस साल से ज़्यादा हो चुके थे – इतना लंबा समय कि मुझे लगा कि मैं उस आदमी को जानती हूँ।
उस रात तक।
फुसफुसाहट जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया
उस रात, मैं बैंगलोर की चार दिन की व्यावसायिक यात्रा के लिए अपना सामान पैक कर रही थी। मेरा आठ साल का बेटा, वीर, अचानक कमरे के दरवाज़े पर खड़ा था। उसने अपने टेडी बियर को कसकर पकड़ रखा था, उसकी आँखें लाल थीं, जैसे वह अभी-अभी रोया हो।
मैं चौंक गई: "वीर, तुम अभी तक सोए क्यों नहीं?"
वह धीरे से बोला, और मेरे करीब आकर मेरी आस्तीन खींच ली: "माँ... पापा किसी और के साथ हैं... और वे जल्द ही आपका सारा पैसा ले लेंगे..."
मैं स्तब्ध खड़ी रही। मानो पूरे कमरे में समय ठहर गया हो।
मैं उसकी आँखों के स्तर पर बैठी: "वीर... तुमने यह कहाँ सुना?"
वह कांपते हुए बोला: "मैंने... मैंने पापा को फ़ोन पर बात करते सुना। पापा ने कहा 'उसके (आरोही के) हस्ताक्षर कर दो, उसे पता नहीं चलेगा'। और फिर कोई महिला हँसी... मुझे डर लगा और मैं भागकर अपने कमरे में आ गया।"
मेरे हाथ ठंडे पड़ गए। हाल ही में रोहन बहुत बदल गए थे: वह अक्सर फ़ोन पर रहते थे, देर रात घर आते थे, और पारिवारिक डिनर से बचने के बहाने ढूंढते थे। लेकिन मैंने सोचा कि यह काम की वजह से है। अब सब कुछ एक ही पल में मेरे सामने आ गया।
मैंने खुले हुए सूटकेस को देखा, फिर अपने बेटे को। और मुझे पता था कि मुझे क्या करना है।
मैंने तुरंत अपनी व्यावसायिक यात्रा रद्द कर दी। एक पल की भी देरी किए बिना।
जांच शुरू
अगली सुबह, रोहन असामान्य रूप से जल्दी काम पर चले गए। मैंने ऐसे जताया जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।
जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मैंने तुरंत लैपटॉप खोला, बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, संयुक्त बचत खातों में लॉग इन किया – हमारी साझा संपत्ति से जुड़ी हर चीज़ में।
बस कुछ ही मिनटों में, मुझे पता चला:
तीन दिन पहले ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का एक लेन-देन प्रिया नाम की महिला के खाते में स्थानांतरित किया गया था।
मैं सुन्न हो गई। मैं उसे जानती थी।
प्रिया – वही कैशियर जहाँ रोहन काम करते थे। सुंदर, जवान, और जब भी मैं उन्हें लेने जाती थी, वह रोहन को देखकर मुस्कुराती थी।
मैंने जाँच जारी रखी और पाया कि अन्य छोटे, लेकिन लगातार लेन-देन भी किए गए थे। अब कोई संदेह नहीं बचा था।
मैंने तुरंत वकील मिस्टर शर्मा को फ़ोन किया, जिन्होंने मेरी कंपनी को कुछ कानूनी मामलों में मदद की थी। मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया।
मिस्टर शर्मा ने गंभीर आवाज़ में कहा: "आरोही जी, यह सिर्फ़ विवाहेतर संबंध का मामला नहीं है। मुझे लगता है कि वे संयुक्त संपत्ति को स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं। खासकर जब आप यात्रा पर जाने वाली थीं, तो उनके लिए यह करना बहुत आसान हो जाता।"
यह सुनकर मेरा दिल बैठ गया।
मिस्टर शर्मा ने हिदायत दी: "आप शांत रहें। मैं बैंक और संबंधित लेन-देनों की जाँच के लिए किसी को भेजूंगा। तीन दिन में नतीजे आ जाएंगे।"
तीन दिन। यह जानने के लिए तीन दिन कि क्या मेरा पति मेरा सब कुछ छीनने की कोशिश कर रहा है।
छिपे हुए दस्तावेज़
अगली शाम, मैं वीर को लेने गई। कार में चढ़ने के बाद उसने फुसफुसाया: "माँ... आज सुबह मैंने फिर पापा को फ़ोन पर सुना। पापा ने कहा कि आज रात दस्तावेज़ों का काम खत्म हो जाएगा।"
मैं सिहर उठी।
रात को, जब रोहन नहा रहे थे, मैं उनके ऑफिस रूम में गई। कंप्यूटर में "Work" नाम का एक फ़ोल्डर था। मैंने कुछ फ़ाइलें खोलने की कोशिश की, उनमें कुछ नहीं था। लेकिन एक फ़ोल्डर पर पासवर्ड लगा था।
रोहन तकनीक के जानकार नहीं थे, इसलिए कुछ कोशिशों के बाद, मैं उसे खोल पाई।
उस फ़ोल्डर में तीन फ़ाइलें थीं:
हमारे मौजूदा घर को बेचने का अनुरोध पत्र – जिस पर सिर्फ़ रोहन के हस्ताक्षर थे।
संयुक्त बचत खाते से पैसे निकालने के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney)।
हमारे दोनों के नाम पर गिरवी रखी संपत्ति पर ऋण के लिए आवेदन (Loan Application)।
मैं लगभग गिर पड़ी।
रोहन घर बेचना चाहते थे? सारे पैसे निकालना? संयुक्त संपत्ति गिरवी रखना? किसलिए?
मैंने अपनी मुट्ठी कस ली। ग्यारह साल का विश्वास... और बदले में यह।
सच्चाई का पर्दाफाश ....
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Raju kumar Chaudhary
मेरे पति कैंसर से गंभीर रूप से बीमार थे, इसलिए मैंने उनके इलाज के लिए पैसों के बदले एक बड़े उद्योगपति के लिए सरोगेट मदर बनने के लिए बड़ी मुश्किल से हामी भरी। नौ महीने बाद, अप्रत्याशित रूप से, हालात ने एक ऐसा मोड़ ले लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी...
मेरा नाम अंजलि है, 29 साल की, मैं मुंबई में रहने वाली एक साधारण महिला हूँ। मेरा परिवार छोटा है, मेरे पति रोहन हैं - एक सौम्य, दयालु सिविल इंजीनियर, जो हमेशा अपनी पत्नी और बच्चों को प्राथमिकता देते हैं। हमारी एक 4 साल की बेटी मीरा है, जो इस समय मेरे जीवन और सुकून का एकमात्र सहारा है।
पिछले साल दिवाली के दिन ही सब कुछ बिगड़ने लगा था। पेट में तेज़ दर्द के बाद, रोहन और मैं उन्हें डॉक्टर के पास ले गए और बुरी खबर मिली: उन्हें अग्नाशय का कैंसर हो गया है। डॉक्टर ने सिर हिलाया: "ज़िंदगी है, उम्मीद है।"
कभी मज़बूत रहे वो इंसान अब अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हैं, उनकी त्वचा पीली पड़ गई है, उनकी आँखों में बस उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही है। लेकिन मैं खुद को निराश नहीं होने देती। मुझे उसे बचाना था, मुझे अपनी बेटी को बचाना था।
मैंने हर संभव इलाज आजमाया, आयुर्वेद डॉक्टरों से लेकर हर्बल दवाओं तक, हर जगह पूछा।
फिर मुझे अमेरिका से आयातित एक दवा मिली, जिसके बारे में कहा गया था कि यह जीवन को लम्बा करती है। लेकिन इसकी कीमत तीन महीने के कोर्स के लिए डेढ़ करोड़ रुपये (36 करोड़ वियतनामी डोंग के बराबर) तक थी। मेरा परिवार, जो आर्थिक रूप से संपन्न नहीं था, अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर चुका था। मैंने हर जगह से पैसे उधार लिए, लेकिन फिर भी पैसे की कमी थी।
हर सुबह, रोहन को कमज़ोर हालत में लेटे हुए, मेरा हाथ पकड़े हुए और यह कहते हुए देखकर कि: "मुझे माफ़ करना... मेरी वजह से तुम्हें तकलीफ़ हुई," मेरा दिल मानो दबा जा रहा था।
एक रात, निराशा में, मैंने ऑनलाइन "सरोगेसी" के बारे में एक लेख पढ़ा - एक नागरिक समझौते के तहत सरोगेसी। भारत में, इस तरह की दवा कानूनन मान्य है, लेकिन यह कानूनी दायरे में, रिश्तेदारों के बीच होनी चाहिए। "काला बाज़ार" में, कुछ लोगों को बांझ परिवारों के लिए स्वस्थ बच्चे पैदा करने के लिए 30-40 लाख रुपये दिए जाते हैं।
मैं चुप रही। कुछ हद तक घृणा से भरी हुई, लेकिन एक पत्नी और माँ होने के नाते मेरी अंतरात्मा चीख उठी: रोहन को बचाने का यही एक मौका हो सकता है।
कई रातों तक सोचने के बाद, मैंने प्राइवेट ग्रुप में दिए गए फ़ोन नंबर पर कॉल करने का फ़ैसला किया। फ़ोन करने वाली प्रिया थी, उसकी आवाज़ कोमल और सीधी थी:
“मुझे पैसों की ज़रूरत है, हमें एक स्वस्थ गर्भवती महिला चाहिए। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो बच्चे के जन्म के बाद, आपको 40 लाख रुपये मिलेंगे। हम प्रसवपूर्व जाँच, खाने-पीने और आराम का सारा खर्च उठाएँगे।”
मैं दंग रह गई। इतने पैसे रोहन के इलाज, मीरा की देखभाल और यहाँ तक कि सबसे बुरी स्थिति के लिए भी पैसे बचाने के लिए काफ़ी थे।
मैंने काँपते हुए पूछा:
— “क्या यह... किसी ऐसे व्यक्ति के साथ सीधा यौन संबंध है जो बच्चा पैदा करना चाहता है?”
प्रिया हँसी:
“नहीं। पूरी तरह से कृत्रिम गर्भाधान। उनके शुक्राणु और अंडे। मैं सिर्फ़ एक सरोगेट माँ हूँ, खून का रिश्ता नहीं। मुझे बस स्वस्थ रहना है और इसे गुप्त रखना है।”
तीन हफ़्ते बाद, मेरा आधिकारिक रूप से प्रत्यारोपण हो गया। मैंने सबसे छुपाया, झूठ बोला कि मैं पुणे में अपने रिश्तेदारों की देखभाल करने जा रही हूँ। रोहन से मैंने कहा कि मैं इलाज के लिए पैसे कमाने के लिए ज़्यादा काम कर रही हूँ। वह मेरा हाथ पकड़कर रो पड़ा:
— “तुम मेरे दुख के लायक नहीं हो…”
मैं मुँह फेर लिया, देखने की हिम्मत नहीं हुई।
पहले तीन महीने मुश्किल से, लेकिन आराम से बीते। मुझे ट्रांसफर के पैसे मिले, अस्पताल की फीस भरी, रोहन के लिए दवाइयाँ खरीदीं। वह ठीक हो गया, उसका दर्द कम हो गया, यह सोचकर कि मैंने पैसे उधार लिए हैं या रात में ज़्यादा काम किया है। मैं हँसी, लेकिन मेरा दिल टूट गया।
चौथे महीने में ही, हालात ने एक अकल्पनीय मोड़ ले लिया।
एक सुबह, प्रिया मुझसे एक सुनसान कैफ़े में मिली, मेरे सामने डीएनए टेस्ट के नतीजे रखे और बेरुखी से कहा:
“तुम्हें पता होना चाहिए: जिस बच्चे को तुम जन्म देने वाली हो… वह उस बांझ दंपत्ति का बच्चा नहीं है जिसे तुम समझ रही हो।”
मैं दंग रह गई:
— “क्या… तुम्हारा क्या मतलब है?!”
प्रिया ने सीधे मेरी तरफ देखा:
"यह उस आदमी का बच्चा है...
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Sudhir Srivastava
दोहा - कहें सुधीर कविराय
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नूतन सूर्य उजास में, मत छोड़ो तुम आस।
सतगुरु चरनन सौंप सब, करो नवीन प्रयास।।
इसका उसका कुछ नहीं, सब कुछ प्रभु के नाम।
जैसा भी वो चाहते, करते रहिए काम।।
सभी अजनबी इन दिनों, बने हुए हैं लोग।
जबसे पीड़ित मैं हुआ, सब कहते हैं भोग।।
कल तक थी जो अजनबी, आज वही संसार।
आज लुटाती खूब है, बेटी बहन दुलार।।
हो जाते सब अजनबी, जब दुख में हों आप।
कल तक नहीं अघा रहे, कहते माई-बाप।।
फेंक रहे हैं अजनबी, प्रेम प्यार का जाल।
बहन बेटियाँ जो फँसी, गईं काल के गाल।।
अच्छा है बनकर रहें, आज आप से दूर।
कल बनकर क्यों अजनबी, रोने को मजबूर।।
ताकत जिसके पास है, उनसे डरते लोग।
यह कैसी है बेबसी, या केवल सुख भोग।।
जो हैं ताकतवर यहाँ, करें खूब अन्याय।
बड़े मजे से बैठकर, पीते दिनभर चाय।।
चाहे जैसा युद्ध हो, मरती जनता आम।
फिर भी कहते आप हैं, न्यायोचित है काम।।
युद्ध न होना चाहिए, सब मिल खोजो राह।
तभी भला है विश्व का, मौन रहे तब आह।।
मरते अक्सर नागरिक, जब भी होता युद्ध।
भूल रहे अब तो सभी, जो संदेशा बुद्ध।।
हम कितने पाषाण है, आद्र न होती आँख।
पर सबसे आगे रहें, सदा मानने माख।।
ज्ञान और विज्ञान का, अद्भुत होता मेल।
दोनों मिलकर खेलते, लाभ- हानि के खेल।।
भारत के विज्ञान का, बढ़ता नित्य प्रभाव।
शुभचिंतक खुश हो रहे, दुश्मन माने घाव।।
ज्यों ज्यों आगे बढ़ रहा, आज तंत्र विज्ञान।
उतना निर्भर हो रहा, जन जीवन अभियान।।
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यमराज मित्र के होली दोहे
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कहते हैं यमराज जी, छोड़ो रंग गुलाल।
भंग आप जमकर पियो, सारे दूर मलाल।।
भंग पिए यमराज जी, पहुँच गये दरबार।
मस्ती में कहने लगे, क्यों करना तकरार।।
पत्नी जी को देखकर, उतर गया सब रंग।
दारू बोतल हाथ में, और पिए थी भंग।।
होली में कहने लगे, मम प्रियवर यमराज।
अब तू मेरा काम कर, मुझे आ रही लाज।।
होली में करते सभी, जमकर खूब धमाल।
बूढ़े बच्चे युवा हों, सबके मुखड़े लाल।।
माथ अबीर सजाइए, प्रेम प्यार के साथ।
सभी बड़ों का पाइए, शीश अशीषे हाथ।।
रंग अबीर गुलाल से, होली खेलो आप।
मर्यादा को लाँघकर, मत करिएगा पाप।।
प्रेम प्यार से हम सभी, खेलें रंग गुलाल।
बहुरंगी इस पर्व का, ऊँचा रखिए भाल।।
होली का संदेश है, छोड़ो बीती बात।
अब से पहले जो हुआ, दादा भैया तात।।
होली की शुभकामना, आप करो स्वीकार।
रंग अबीर गुलाल का, है पावन त्योहार।।
प्रेम प्यार सद्भावना, रंगों की बौछार।
भेदभाव को भूलकर, बाँटो प्यार दुलार।।
मनभेदों को भूल कर, गले मिलें हम आप।
होली की सौगात दें, मिटा सभी संताप।।
छोटों को हम प्यार दें, संग अबीर गुलाल।
और बड़ों से लीजिए, ऊंचा करिए भाल।।
नाली में पीकर पड़े, भूल गए हुड़दंग।
हाथ जोड़कर गा रहे, डालो मुझ पर रंग।।
भंग रंग में पड़ गया, नशा हो गया दूर।
बीबी ने दौड़ा लिया, टपकाती मुख नूर।।
आपस की तकरार से, होता है नुकसान।
बंद करो तकरार अब, रहे देश की आन।।
होली का त्योहार है, खूब लगाओ रंग।
भाईचारे से रहे , भारत की पहचान।।
रंग बिरंगा आ गया, होली का त्योहार।
प्रेम प्यार सद्भाव का, अनुपम बहे बयार।।
बूढ़े बच्चे वृद्ध के, लाल गुलाबी गाल।
रंगों के त्योहार की , माया करे कमाल।।
रंग बिरंगे लोग सब, हैं मस्ती में चूर।
होली के संदेश का, मान रखें भरपूर।।
नाहक में अब मत करो, आपस में तकरार।
होली के संदेश का, आप समझिए सार।।
अर्पण अपने पाप को, दहन होलिका संग।
भक्ति रुप प्रहलाद का, पीत पावनी रंग।।
ईश कृपा से बचे थे, भक्ति प्रिए प्रहलाद।
जली होलिका स्वयं ही, था उसको उन्माद।।
जली होलिका स्वयं ही, पाक-साफ प्रहलाद।
दोनों को अपना मिला, कर्मों का प्रसाद।।
सब मिल जुलकर गाइए, रंग-रंगीला फाग।
चाहे जैसा आपका, सुरो ताल लय राग।।
मस्ती में सब गा रहे, अपने धुन में फाग।
रंग अबीर गुलाल से, सुना भैरवी राग।।
रंगोत्सव का लीजिए, आप सभी आनंद।
मर्यादा के साथ हम, करें नहीं छलछंद।।
रंगोत्सव का कीजिए, आप सभी सम्मान।
रंग अबीर गुलाल को, दें मधुरिम पहचान।।
रंगोली पर भी चढ़ा, आज संजीला रंग।
ईश कृपा इतनी रहे, रंगीला नहिं भंग।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई छंद - होलिका दहन
आओ हम होलिका जलाएँ।
भक्ति भाव की ज्योति जगाएँ।।
निंदा नफरत दंभ मिटाएँ।
अपने सारे पाप जलाएँ।।
दहन होलिका भाव समझिए।
अपने मन को पावन रखिए।।
धर्म सत्य की जीत सदा हो।
चाहे जैसी भी विपदा हो।।
विष्णु भक्त प्रहलाद को जानो।
राक्षस कुल का था पहचानो।।
पितु-सुत में कब कोई मेला।।
ईश्वर का ये सब था खेला।।
पिता दंभ में निशिदिन रहता।
ईश जाप अवरोधक बनता।।
पर प्रहलाद कहाँ कम जिद्दी।
पुत्र भला होता क्यों पिद्दी।।
हिरण्यकश्यप मारन चाहे।
पर हर कोशिश व्यर्थ बिगाहे।।
बुआ होलिका दंभी रानी।
करना चाही थी मनमानी।।
चिता एक खासा बनवाया।
भक्त दुलार गोद बैठाया।।
सेवक उसमें आग लगाए।
तव ज्वाला आकाश छुआए।।
बहुत हुआ तब हाहाकारा।
पावक जब प्रहलाद से हारा।
राखी हुई होलिका माया।
काम नहीं उसके कुछ आया।।
ईश कृपा की अद्भुत लीला।
हिरण्यकश्यप का मुँह पीला।।
ईश भक्ति की महिमा जानी।
दंभ हो गया पानी -पानी।।
दहन होलिका यही कहानी।
वही कहा जो मैंने जानी।।
सतपथ पर हम सबको चलना।
दंभी पाप घड़ा मत भरना।।
सुधीर श्रीवास्तव
M K
कुछ यादों को दफना देना चाहिए,
कुछ लोग याद करने के लायक नहीं होते है,,,,
- M K
ArUu
अपनी ख्वाहिशों के बोझ तले मेरी खुशियां छिन ली तुमने...
अपनी इज्जत के खेल में इतना मशगूल हुए कि
मेरे सपनों की आह भी न सुनाई दी तुम्हें।
हां जानती हूं ...🙂
बेशकीमती है तुम्हारे अरमान
सिर्फ इसलिए मेरे पंखों को नोच लिया तुमने
होली पसंद नहीं है न तुम्हें
तो कहो.😇
कैसे रंग लिए अपने हाथ
मेरे मासूम सपनों के खून से🙂
चलो मैं तो कर लूंगी माफ
पर
क्या जवाब दोगे उस परमात्मा को
जब वो पूछेंगे
"क्यों एक मासूम सी जिंदगी छीन ली तुमने
क्यों अपनी चाहत के चक्रव्यूह में उसे इतना उलझाया
की जो सांसे उधार दी थी
को भी समय से पहले लौटा दी मुझे"🙂
ArUu ✍️
Narayan
तुम यूँ नहीं बंधे मुझसे
मानो किसी क्षणिक मोह में थाम लिया हो तुम्हें —
तुम तो मेरी श्वासों की लय में घुल गए हो,
मेरी धड़कनों की अंतरध्वनि बन गए हो।
अब यह संबंध देह का नहीं रहा,
यह आत्मा की शिराओं में बहता हुआ अनादि बंधन है।
प्राण भी यदि साथ छोड़ दें एक दिन,
तो भी मेरी रूह की देहरी पर
तुम्हारा नाम दीपक बन जलता रहेगा।
मैं तुम्हें मुक्त कैसे कर दूँ…
जब तुम मेरे अस्तित्व का ही दूसरा स्वर बन चुके हो।❣️
Jyoti Gupta
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kattupaya s
Goodnight friends.. sweet dreams
kattupaya s
silence quotes..
kattupaya s
Good evening friends.. quite a long break
Sohagi Baski
suicide ***
আমি আর পারছি না....!!
আজ আমি-আমি অনেক ক্লান্ত..!
উঠে দাঁড়ালেয় পিছলে পড়ি।
স্যার, ম্যাম দের কাছে প্রিয় হতে হলে ভালো পড়াশোনা করে ভালো রেজাল্ট করে হয় তবে স্যার, ম্যাম দের প্রিয় হওয়া যাই।
আর রইলো বন্ধ-বান্ধব সেটা নামমাত্রই তারা আমার সাথে কি ভাবে ব্যবহার করে সেটা আব্বু, আম্মু তোমাদের জানায় কারণ তোমাদের কষ্ট হবে।
আজ বুঝলাম পরতো পরিই হয় আর আপন বলতে কিছু হয়না।
মানুষের মন বুঝতে আর মন রাখতে আমি নিজেকেই হারিয়ে ফেলেছি।
আজ নিজের দিকে তাকালে অনেক অসহয় লাগে।
আমার তেমন মনেও নেই কে একবার বলেছিলো আমায় নিজের "যত্ন নিও "।
এখন এই পর্যায় এসে মনে হচ্ছে সেই মানুষ টাই নেই। যে বলে ছিল আমি সবার মতো না...!!
"শুরু টা তুমিই করেছিলে আর শেষ টা তুমিই করলে আমি এমন ভালোবাসা তো কখনো চাইনি "এখন আমি নিঃসঙ্গ আমার কোনো ঠিকানা নেই।
জীবনের শেষ পর্যায় দাঁড়িয়ে ভাবি " আমি জীবনে কি ছিলাম আর কি হয়ে গেলাম এমন তো আমি কখনো চাইনি" তাহলে কেন..?
আমার সব স্বপ্ন গুলো বিসর্জন দিয়ে তোমাদের এখনো মন ভোরে নি, এত্ত মান-অপমান সহ্য করার পরো না,
মানুষ এত্ত কি করে নিষ্ঠুর হতে পারে সেটা তোমাদের থেকেই শিখলাম।
আব্বু, আম্মু জানো আমি কত্ত আসা করে ছিলাম তোমার বড়ো মেয়ে ডক্টর হয়ে আব্বু আম্মুর মুখ উল্জ করবে। এত্ত সব আমি কার জন্যে করছি বলো তোমাদের জন্যেই করছি। আজ আমার ভবিষ্যত শুধু মাত্র তোমাদের কারণে অধকারে এর জন্য শুধু মাত্র তোমরা দায়ী।
তোমাদের অনেক 'শুকরিয়া "
তোমরা না থাকলে আমি হয়তো বুঝতেই পারতাম না কষ্ট কাকে বলে।
বান্ধবী তোদের অনেক "'শুকরিয়া "
তোরা না থাকলে আমি বুঝতেই পারতাম না কষ্ট কাকে বলে।
আব্বু, আম্মু অনেক ''শুকরিয়া "
তোমরা না থাকলে আমি বুঝতেই পারতাম না অধকার ভবিষ্যত কাকে বলে।
আজ এই পর্যায়ে দাঁড়িয়ে নিজেকে জিজ্ঞেস করি আমার পাশেই বা কজন ছিল...?
আমার মনই বা কে বুঝেছিলো...?
কেই বা আমার কষ্টের সময় পাশে ছিল....?
*********
ইতি :মেহেক
Ruchi Dixit
नहीं रंगी गई कभी
नहीं आई वो होली कभी ...
- Ruchi Dixit
Shefali
#shabdone_sarname__
A singh
“मुझे दर्द इतना मिला कि
मैंने लिखना शुरू कर दिया…
अब हर बात दिल में क्यों रखूँ,
कुछ पन्नों पर छोड़ दिया।”
— A Singh ✍️💔
A singh
“गुलाब तो हर कोई दे देता है,
पर मुझे तुम्हारे नाम का सिंदूर चाहिए।
दुनिया के सामने बस एक ही रिश्ता,
तुम्हारी पत्नी कहलाने का हक़ चाहिए।”
— A Singh
PRASANG
“बदलाव का नारा” 🔥
जुल्मों का काला चेहरा अब सबके सामने होगा,
मेहनत का सच्चा हक़ भी जनता को मिलना होगा।
महलों की ऊँची दीवारें कब तक बच पाएँगी,
उठती जनलहर आगे सब कुछ बह जाना होगा।
भूखे नयन जलते हैं अंगारों जैसी ज्वाला,
सड़कों का उठता शोला बदलाव का नारा होगा।
मेहनत की कमाई जो छीनी गई हम सबसे,
अन्याय का हर क़िला अब टूट बिखर जाना होगा।
सदियों से दबा आक्रोश लावा बनकर फूटेगा,
धरती का कण-कण फिर रणघोष सुनाना होगा।
मेहनत का पसीना अब चुपचाप नहीं बहेगा,
कहता “प्रसंग” अत्याचारी अंततः हारा होगा।
-प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
A singh
“महादेव… ये मौत भी कितनी खूबसूरत होगी,
जहाँ दिल को आखिर सुकून मिल जाता होगा,
और इंसान इस मतलबी दुनिया से
हमेशा के लिए दूर हो जाता होगा।”
— A Singh
- A singh
Akkii
शीर्षक: अधूरा सा प्यार
तुमसे मिला तो लगा
जैसे ज़िंदगी को कोई वजह मिल गई,
सूनी सी राहों में
एक नई सुबह खिल गई।
तुम्हारी हँसी में
मुझे अपना घर मिल जाता है,
और तुम्हारी बातों में
दिल को सुकून मिल जाता है।
कभी सोचा नहीं था
कि कोई इतना खास होगा,
पर तुम मिले तो लगा
शायद यही सच्चा प्यार होगा।
अगर कभी दूर भी हो जाओ,
तो यादों में बसे रहना,
क्योंकि मेरे दिल में
तुम हमेशा यूँ ही हँसते रहना।
Akkii
अधूरा सा प्यार
तुमसे मिला तो लगा
जैसे ज़िंदगी को कोई वजह मिल गई,
सूनी सी राहों में
एक नई सुबह खिल गई।
तुम्हारी हँसी में
मुझे अपना घर मिल जाता है,
और तुम्हारी बातों में
दिल को सुकून मिल जाता है।
कभी सोचा नहीं था
कि कोई इतना खास होगा,
पर तुम मिले तो लगा
शायद यही सच्चा प्यार होगा।
अगर कभी दूर भी हो जाओ,
तो यादों में बसे रहना,
क्योंकि मेरे दिल में
तुम हमेशा यूँ ही हँसते रहना।
M K
एक धोखा जो तेरा याद रहेगा,
तू मेरा पसंदीदा शख़्स था
ये बात मेरे जुबां पर राज रहेगा
हंसती रही मैं यूं ही महफिल में
तू क्या तेरी यादें भी शमशान में दफ़नाया जाएगा ...
- M K
Raa
ક અનુસૂચિત જાતિની દીકરીએ રાજપૂતો વિશે લખ્યું છે:—
હું હરિજન સમુદાયની છું. મારું નામ માનસી કુમારી છે, અને હું બિહારના કટિહારની છું. હું ગોવામાં રહું છું અને સોફ્ટવેર એન્જિનિયરિંગનો અભ્યાસ કરું છું.
પણ આજે, હું ઠાકુરવાડી (રાજપૂત) પોસ્ટ લખી રહી છું.
રાજપૂતો વિશે એવું કહેવામાં આવે છે:……
હા સાહેબ, દલિતો પર ખૂબ જ ભેદભાવ કરવામાં આવ્યો. તેમની પાસેથી ખેતરોમાં કામ કરાવવામાં આવતું હતું, ગૌણ મજૂરી કરાવવામાં આવતી હતી, છાણ એકઠું કરવામાં આવતું હતું અને શિક્ષણથી દૂર રાખવામાં આવતા હતા.
હા, દલિતો પર ઘણો જુલમ થતો હતો……
આ હકીકત સોશિયલ મીડિયા અને માસ મીડિયા દ્વારા મજબૂત રીતે પ્રકાશિત થાય છે.
પરંતુ 1,400 વર્ષ પહેલાં, જ્યારે માનવ રક્ત માટે તરસ્યા ઇસ્લામની તલવાર મક્કામાંથી બહાર આવી હતી…
એક જ લહેરમાં, ઈરાન, ઇરાક, સીરિયા, ઇજિપ્ત, દમાસ્કસ, અફઘાનિસ્તાન, કતાર, બલુચિસ્તાનથી લઈને મંગોલિયા અને રશિયા સુધી એક પછી એક નાશ પામ્યા.
સ્થાનિક ધર્મો અને પરંપરાઓ તલવારની ધાર પર નાશ પામી, અને ઇસ્લામ બધે ફેલાઈ ગયો.
ગર્વથી ઇસ્લામનો ધ્વજ અફઘાનિસ્તાન અને સિંધ થઈને હિન્દુસ્તાન પહોંચ્યો.
પરંતુ જે ક્ષણે તે અહીં પ્રવેશ્યો, રાજપૂતો (ક્ષત્રિયો) એ મજબૂતીથી લગામ પકડી રાખી, જેના કારણે ભયંકર રક્તપાત થયો.
૮૦૦ વર્ષ સુધી, ક્ષત્રિય રાજવંશો તેમજ સામાન્ય ક્ષત્રિયોએ ક્યારેય ઇસ્લામની પકડ ઢીલી થવા દીધી નહીં. તેમને જાટ, ગુર્જર, યાદવ, બ્રાહ્મણો, વૈશ્યોનો ટેકો હતો...
પરંતુ આ અન્ય જૂથો હંમેશા મોરચા પર યોદ્ધાઓ નહોતા. તેઓ મુખ્યત્વે સ્વરક્ષણ માટે લડ્યા!
મોરચા પર મોટે ભાગે રાજપૂતો (ઠાકુરો) હતા!
એક સમય એવો આવ્યો જ્યારે ક્ષત્રિયોમાં ૧૮ વર્ષથી વધુ ઉંમરનો એક પણ છોકરો જીવતો ન રહ્યો, વિધવાઓ અસંખ્ય સંખ્યામાં હતી. આ કારણે, સતી અને જૌહર જેવા રિવાજો અસ્તિત્વમાં આવ્યા.
રાજપૂત સ્ત્રીઓ પોતે આગળ આવી, યુદ્ધમાં મોકલતા પહેલા તેમના પતિ અને પુત્રોને તિલક લગાવતી, અને પછી પોતે જૌહર કરતી જેથી કોઈ બહારનો વ્યક્તિ તેમના શરીરને સ્પર્શ ન કરી શકે.
પરિણામે, યુપી જેવા મોટા રાજ્યોમાં, રાજપૂતો 1% કરતા ઓછા થઈ ગયા. વસ્તી વૃદ્ધિ પછી જ તેઓ ફરીથી વધીને લગભગ 9% થયા. કેટલાક રાજ્યોમાં, તેમના મૂળ સંપૂર્ણપણે અદૃશ્ય થઈ ગયા.
દરમિયાન, આજે કહેવાતા દલિત વર્ગો પોતાને 54% હોવાનો દાવો કરે છે.
આ બધાનું પરિણામ એ આવ્યું કે ઇસ્લામ અહીં અટવાઈ ગયો અને વધુ આગળ વધી શક્યો નહીં.
તેથી - ચીન, કોરિયા, જાપાન, નેપાળ અને અન્ય પૂર્વીય ભૂમિઓ ઇસ્લામિક આક્રમણથી બચી ગઈ.
આટલું સહન કર્યા પછી પણ, તમને ઇતિહાસમાં એક પણ સંદર્ભ મળશે નહીં જ્યાં રાજપૂતોએ ઇસ્લામ સામે અન્ય જાતિઓને તેમના સ્થાને મરવા માટે દબાણ કર્યું હોય.
અન્ય સમુદાયો પણ લડ્યા, પરંતુ મુખ્યત્વે સ્વ-બચાવ માટે.
રાજપૂતોએ તેમના સગીર પુત્રોનું પણ બલિદાન આપ્યું પરંતુ ક્યારેય તેમની ફરજથી ભટક્યા નહીં. તેઓ હંમેશા સામાજિક અને જાતિ વ્યવસ્થાને ધ્યાનમાં રાખતા હતા. આ કારણે, આજની હિન્દુ પેઢીઓ ઇસ્લામમાં રૂપાંતરિત થયા વિના બચી ગઈ.
રાજપૂતોમાં આંતરિક વિભાજનને કારણે, મુસ્લિમો ભારત પર રાજકીય નિયંત્રણ મેળવી શક્યા, પરંતુ 800 વર્ષ પછી પણ, તેઓ ભારતને ઇસ્લામિક રાષ્ટ્રમાં ફેરવી શક્યા નહીં.
થોડાક સિવાય, આખો સમાજ તેમનો હંમેશા ઋણી રહે છે.
છતાં, દરેક જગ્યાએ રાજપૂતોને જુલમી તરીકે દર્શાવવામાં આવે છે. બોલીવુડે ફિલ્મોમાં ક્રૂર ઠાકુરનું સતત ચિત્રણ કરીને આ એજન્ડા પૂર્ણ કર્યો, લોકોના મનમાં ખોટી છબી બનાવી.
પરંતુ તેઓએ ક્યારેય એવું દર્શાવ્યું નહીં કે જ્યારે મુસ્લિમ તલવારો લોહી માંગતી હતી, ત્યારે પહેલા માથા રાજપૂત માતાઓ - તેમના પતિઓ અને પુત્રો દ્વારા અર્પણ કરવામાં આવતા હતા. દરેક વ્યક્તિએ તેમનો આદર કરવો જોઈએ અને તેમનો આભાર માનવો જોઈએ, કારણ કે જો તેઓ ન હોત, તો આજે આપણે બધા મસ્જિદમાં નમાઝ પઢતા હોત.
જેમના પૂર્વજો રાજપૂત તલવારોના રક્ષણ હેઠળ બચી ગયા હતા અને પોતાનો વિશ્વાસ જાળવી રાખવામાં સફળ રહ્યા હતા - આજે તે જ લોકો રાજપૂતો પર જાતિવાદનો આરોપ લગાવે છે. રાજપૂતોને દુર્વ્યવહાર કરતા પહેલા ઇતિહાસ જાણો. હિન્દુ ધર્મના બચાવમાં, આ સમુદાયે પોતાના બાળકોનું બલિદાન આપ્યું. ધન્ય છે તે રાજપૂત સ્ત્રીઓ.
ધન્ય છે, ધન્ય છે તે ભૂમિ જ્યાં શક્તિ, ભક્તિ અને સ્વાભિમાન ક્યારેય વેચાયા ન હતા.
ધન્ય છે તે બહાદુર રાણા જેની શક્તિ અકબર પણ તોડી શક્યો નહીં.
રાણાની છાતી કેટલી સ્ટીલની હતી - કે તેના પર તીર તૂટી પડતા.
જ્યારે ચેતકે પડોશમાં પડ્યું ત્યારે મુઘલો ભયથી ધ્રૂજી ગયા.
હલ્દીઘાટીમાં રાણાએ એવો ભગવો ધ્વજ લહેરાવ્યો કે સૂર્ય પણ આકાશમાં છુપાઈ ગયો.
અને ફક્ત માણસો જ નહીં - એક ઘોડાએ પણ માતૃભૂમિ માટે પોતાનો જીવ આપ્યો.
ધન્ય છે આવા રાજપૂત યોદ્ધાઓ, જેમના શબ્દકોશમાં 'ભય' શબ્દ ક્યારેય અસ્તિત્વમાં નહોતો.
રાજપૂતો અને તેમના વંશ માટે મારા શાશ્વત વંદન હંમેશા રહેશે.
રાજપૂતો, બ્રાહ્મણો, વૈશ્યો, જાટ, ગુર્જરો, દલિતો અને બધા હિન્દુ ભાઈ-બહેનોને - આ વિનંતી છે: આ સંદેશને વ્યાપકપણે શેર કરો જેથી લોકો રાજપૂતોના બલિદાન અને બહાદુરી વિશે જાણી શકે, અને જે લોકો રાજપૂતો બીજા પર અત્યાચાર કરતા હતા એમ કહીને હિન્દુઓને વિભાજીત કરવાનો પ્રયાસ કરે છે તેઓ ચૂપ થઈ જાય.
🙏 આદરપૂર્વક 🙏
અનુસૂચિત જાતિની સનાતની પુત્રી
🙏🌹જય ગુરૂદેવ 🌹
mohansharma
उसने बड़ी अदा से अपनी जुल्फों को काँधे पर झटका..
मैं तो संभल गया जैसे तैसे पर दिल खा गया झटका..
Shivraj Bhokare
सुकलेले फुल सुगंध देऊन गेले, जगलेले क्षण, आठवणी देऊन गेले. प्रत्येकाची ओळख मात्र निराळी होती. कोणी मैत्रीत प्रेम, तर कुणी, प्रेमात मैत्री देऊन गेले.....
Renu Chaurasiya
तेरी यादों का बोझ लिए,
मैं खामोशी में जीती हूँ।
हँसने की कोशिश करती हूँ,
पर अंदर ही अंदर रोती हूँ।
बरसती बूंदों में ढूँढती हूँ तुझको,
पर तेरा कोई निशान नहीं मिलता।
दिल पुकारे हर पल तेरा नाम,
पर तू कहीं भी पास नहीं मिलता।
वो कसमे, वो वादे तेरे,
सब धुएँ बनकर उड़ गए।
जिस दिल को तूने अपना कहा,
आज उसी दिल के टुकड़े हो गए।
कभी तो लौटकर देखेगा तू,
इन भीगी आँखों की कहानी।
तेरे बिना जो टूट गया,
वो मेरा दिल था… मेरी ज़िंदगी नहीं।
बरसती बूंदों में ढूँढती हूँ तुझको,
पर तन्हाई ही अब साथी है।
जिसे चाहा था दिल से मैंने,
वो अब सिर्फ एक याद बाकी है…
Narendra Parmar
कामयाबी हासिल करने के बाद, इंसान कुछ भी बक देता है और मिडिया की यही तो एक आदत होती है कि, वो बड़े लोगों की बात अपने अखबार में छाप भी देता है ताकी उसके अखबार की वेल्यु ज्यादा बेहतर हों, फिर भी मुझे इनकी बात सही नहीं लगती बाकी आप सब की मर्जी ।।
Niti
Pyaar ek haseen ehsas hai
Jo insaan ko jine ki ek umid deta hai
Pyaar kisi se bhi kiya jaa sakta hai
Chahe vo parivar ho ya dost ho
Jitne pyaar hum unhe deta hai usse jyada vo Hume dukh dete hai
Dusro me pyaar dhundne se acha khud se hi pyaar karo
Khud ko hi importance do
Khud ko hi khush karo
Fir naa koi hurt kar sake ga na koi rula ke chala jayega 🙂
Shailesh Joshi
"જીવનનું જાણવા જેવું"
જ્યાં સુધી આપણને કષ્ટ નહીં પડે,
ત્યાં સુધી આપણા જીવનમાંથી કષ્ટ દૂર નહીં થાય,
મતલબ કે,
આપણે જ્યાં સુધી સહન કરતા,
જતું કરતા, કે પછી
ચલાવી લેતા નહીં શીખીએ,
ત્યાં સુધી,
આપણા જીવનમાં સહન કરવાનું,
ના છુટકે જતું કરવાનું, અને
અને ના-મનનું ચલાવી લેવાનું
ચાલું જ રહેશે.
માટે જો આ વાત
આપણે જેટલા વહેલા સમજી લઈશું, એટલું આપણા ફાયદામાં રહેશે.
Soni shakya
कभी कविता कभी गजल का एहसास हो तुम..
मेरे हर ख्वाब की मीठी सी आस हो तुम..
कभी ख्याल कभी दिल की आवाज हो तुम..
मेरे हर जज़्बात का अंदाज़ हो तुम..
मेरी हर मुस्कान की मुस्कान हो तुम..
मेरी हर वजह की वजह हो तुम..
- Soni shakya
Kaushik Dave
ખીલેલું પુષ્પ આ જોને, લાગે ના કોઈની નજર,
સૌને એ વહાલું લાગે છે, પ્રેમે ઝૂકે છે આ શિખર.
ધીરેથી કળી ખીલે છે, રૂપ અદ્ભુત ધારતી,
પૂર્ણ ખીલી જતાં પુષ્પ, શોભા સૃષ્ટિની વધારતી.
સુગંધ એની રેલાય, વાયુ લહેરાય હર્ષમાં,
રૂડું આ હાસ્ય વહેંચે, ટૂંકા આયુ-સંઘર્ષમાં.
કાંટાની વચ્ચે રહીને, શીખવે જીવતા મસ્ત,
સુગંધ દઈને સદા, થાય અંતે ભલે અસ્ત.
- Kaushik Dave
MASHAALLHA KHAN
मिला नही मुझको जिसकी रही तलाश
मर मर के जी रहे है बस चलने लगी है लाश,
रोका है किसने मुझको यू चढ़ते उरोज से
चन्द कदम बाकि थे फिर मंजिले थी पास,
अब सोचते है कुछ मकसद है खो दिया
काज का किला था सब गिर गये है ताश .
-MASHAALLHA...
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