Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Mara Bachaaaaa

हालातों के हवाले है रिश्ता, ना वो कुछ कर सकते है ना हम। - Mara Bachaaaaa

Shailesh Joshi

જો આપણે ઈશ્વરની પરમ કૃપાની અનુભૂતિ ઈચ્છતા હોઈએ, તો ભલાઈ કરતા રહેવું, ને જો એમ કરતાં ક્યારેક કદાચ અપયશ પણ મળે, તેમ છતાં, કોઈને કંઈ પણ ન કહેવું, બસ ભલાઈનું કામ ચૂપચાપ કરતા રહેવું. - Shailesh Joshi

Siddarth

डिग्रियां तो तालीम के खर्चों की रशीद हैं। इल्म तो वो हैं जो किरदार में झलकता है।🖤

Anup Gajare

"क्लिक क्लिक" ____________________________________________________ कैमरा,क्लोजप,शॉट गुनाह, मुजरिम, कैद क्लिक… गुजर गई शाम कोई तस्वीर नहीं खींची बस ऊंची दीवारों पर लगे लोहे के खंभे मुझे देखते रहे। एक कैदी मर गया आजादी से पहले वह तो कल ही रिहा होनेवाला था। किसी जमीन ने निगल लिया बेंच पर बैठी बुढ़िया को उसके सपने मृतकों से बातें करते हुए कैद हो गए ईश्वर की पेंटिंग में। बारिश बहुत मात्रा में हो सकती है कोई अंदाजा लगाता रहा आज तीसरा दिन है बादल बस गुस्सा होते हुए खींच रहे हैं रौशनी से भरी क्लिक को। यहां वातावरण ही फैला है उसका वजूद आंखों में चमकता हुआ मस्तिष्क की जटिल संरचना में किसी न्यूरॉन्स से उलझा सा हवा को बंद करना चाहता है। नन्ही गुड़िया सोई नहीं उसके शुष्क चित्र नहीं रहते अब किसी बच्चे की आंख में। तिनका उड़ता हुआ समय में फंस गया है उसके भीतर भी निर्माण का कोई तिनका निवारण खोज रहा है। मैं सबको किसी अज्ञात पेटी में ताला बंद करते हुए चाबी फेक देता हु। अब कैमरा क्लोजप नहीं लेता न ही कोई दृश्य, स्थान या व्यक्ति के भीतर भ्रूण की तरह पांव मारता है। कैदी दुर्गंध से परेशान है उनकी जेल में कही लकड़हारे फाइलों को जला रहे हैं, जैसे कारागृह नहीं मनकर्णिका घाट हो जिसकी हर शाम बुझते हुए ही निकलती है हर बंदी फोटोग्राफी में तरबेज एक फोटो ही तो है। क्लिक… क्लिक… पर कोई आवाज़ अब दर्ज नहीं होती सिर्फ कंपन बचता है हड्डियों के भीतर धीरे-धीरे फैलता हुआ। दीवारें अब सीधी नहीं रहीं वे झुककर मेरे कान में कुछ फुसफुसाती हैं— कि हर तस्वीर अपनी ही मृत्यु का पूर्वाभ्यास होती है। लोहे के खंभे जिन्होंने मुझे देखा था अब जंग खाते हुए मेरी आंखों में उग आए हैं और मैं खुद को ही कैद करता जा रहा हूँ। एक और कैदी जिंदा है अभी पर उसकी परछाई पहले ही रिहा हो चुकी है वह बाहर घूम रही है भीड़ में किसी और के चेहरे पर। बुढ़िया की जगह अब एक गड्ढा है जिसमें पानी नहीं बल्कि समय जमा है कोई उसमें झांकता है तो अपना बचपन डूबता हुआ देखता है। ईश्वर अपनी पेंटिंग से बाहर आ चुका है उसने ब्रश फेंक दिया है और अब वह भीड़ में खड़ा किसी और चित्र का इंतजार कर रहा है। बारिश रुक गई है पर बूंदें अब भी गिर रही हैं अंदर कहीं जहां कोई आसमान नहीं होता। न्यूरॉन्स अब संकेत नहीं भेजते वे सिर्फ पुरानी तस्वीरों को बार-बार जलाते हैं और राख से नई कैद बनाते हैं। नन्ही गुड़िया अब जाग चुकी है पर उसकी आंखों में कोई सपना नहीं सिर्फ एक खाली फ्रेम है जिसमें वह खुद को ढूंढती रहती है। तिनका अब टूट चुका है और उसके कण हवा में नहीं समय के भीतर फैल गए हैं हर क्षण किसी अधूरे निर्माण की खुजली लिए। मैं जिस पेटी में सबको बंद कर रहा था अचानक महसूस करता हूँ— वह पेटी बाहर नहीं मेरे सीने के भीतर है। चाबी जिसे मैंने फेंक दिया था वह वापस आकर मेरी जीभ के नीचे छुप गई है पर मैं बोल नहीं सकता। कैमरा अब मेरे हाथ में नहीं वह मेरी आंख बन चुका है और हर पलक झपकना एक स्थायी कैद है। क्लोजप… इतना करीब कि चेहरे गायब हो गए सिर्फ त्वचा बची है और उसके नीचे धीरे-धीरे सड़ता हुआ समय। मनकर्णिका अब बाहर नहीं मेरे भीतर जल रही है हर विचार एक चिता है जिसे मैं खुद ही आग देता हूँ। लकड़हारे फाइलें नहीं नाम जला रहे हैं पहचान धुएं में बदलती है और आसमान उसे वापस नहीं लेता। अब कोई कैदी नहीं कोई जेल नहीं सिर्फ फ्रेम हैं एक के भीतर एक अंतहीन। और हर फ्रेम में एक आदमी खड़ा है क्लिक होने का इंतजार करता हुआ— क्लिक… पर तस्वीर कभी पूरी नहीं होती। _____________________________________________

jighnasa solanki

હનુમાનજી જન્મોત્સવની આપ સૌને હાર્દિક શુભકામનાઓ 🙏 હનુમાનજી સૌની રક્ષા કરે, સૌનુ કલ્યાણ કરે🙏 🚩જય હનુમાનજી🚩 🚩જય શ્રીરામ🚩

Piyu soul

Hello everyone 😊 मैं उनकी sister हूँ… दी को थोड़ी health issue है, इसलिए वो अगले 2 दिनों तक platform पर active नहीं रह पाएंगी 💙 तब तक उनकी जगह मैं उनकी posts और basic replies handle करूँगी ✨ I hope आप सब उन्हें जैसा प्यार देते हो… मुझे भी वही support देंगे 😊 वो जल्दी ही recover होकर वापस आएंगी ❤️ Take care everyone 🌸 Stay healthy and happy ✨

mohansharma

ग़म ये नहीं मोहन कि हम नहीं शामिल तेरे अपनों में.. दर्द बस ये है कि हम अब तेरे बेगानों में शुमार होने लगे हैँ..

Nayana Viradiya

- Nayana Viradiya

Sonam Brijwasi

“मैंने खुद को तुझमें इतना खो दिया, कि अब खुद का भी पता नहीं… तू ही मेरी शुरुआत, तू ही मेरी आख़िरी है, तेरे बिना मेरा कोई जहां नहीं…”

Shailesh Joshi

મારો તમારો કે પછી કોઈનો પણ, જીવનમાં સમજદારી કેળવ્યા વિના ઉધ્ધાર નથી, અને આ વાત જેટલી વહેલી સમજાય, એના જેવી સમજદારી તો બીજી એકે નથી. - Shailesh Joshi

Awantika Palewale

महफ़िल सजाएँ रखी है, तेरी याद को बुलाया है, हर शम्मा बुझा दी हमने, बस दिल को जलाया है। मेरे लफ़्ज़ों की इन कतारों में तेरा ही तज़किरा है, मेरी चुप्पी ने भी आज जैसे, तेरा नाम सुनाया है। जो छुपाया था, वो ख़्वाब मुस्कुराने लगे अब तेरी आहट ने, महफ़िल का सारा राज़ उठाया है। हम ने तो सिखाया था दिल को सब्र का हुनर, पर एक तेरी नज़र ने, सब कुछ भुलाया है। तू आए न आए मगर, ये रस्म हम निभाएँगे, महफ़िल सजाएँ रखी है, दिल आज भी सजाया है।

Soni shakya

पतझड़ का क्या वो तो गुजर ही जाएगा..! पर इश्क का दर्द ताउम्र सताएगा..!! - Soni shakya

Jyoti Gupta

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Dada Bhagwan

हनुमान जयंती... हनुमान जयंती के अवसर पर मोबाईल और डेस्कटॉप वोलपेपर डाऊनलोड करने के लिए यहाँ विज़िट करे: https://dbf.adalaj.org/BiIDg7qJ #hanumanji #hanumanjayanti #devotion #bajarangbali #DadaBhagwanFoundation

vrinda

vrinda - vrinda

Anish

इस टाइम हर चूल्हा चक्की वाली को सलेंडर से मोहब्बत है

Anish

हाथ में हो दो कप चाय.. हो साथ मनपसंद शख्स... फिर क्या कहने... फिर क्या महंगा और क्या सस्ता.. जब संग हो हम तुम्हारे... - Anish

Kiran

हल की लकीरों में लिखता है कहानी, हर बीज में छुपी होती है उसकी जवानी। जो हार कर भी मुस्कुराना जानता है, वही कहलाता है असली किसान। 🌾🚜 .......

Bhavika Rathod

Hey! Great news... मेरी series, अदृश्य बंधन, अब Pocket FM app पर LIVE है यह छोटी-सी success आपके साथ share करना चाहता/चाहती हूँ! मेरी series अभी check करें 👉 https://pocketfm.onelink.me/2IE7/r6rqquf8

MASHAALLHA KHAN

दर्द उन्हीं को होता है जो जख्म खाते है, समद्रो का क्या वह तो दरिया भी निगल जाते है,, अगर कोई पूछे तो बताना सब है सही, यू सबको बताने से दर्द और बढ़ जाते है. -MASHAALLHA

DrAnamika

तू मिले तो वक़्त रुक सा जाता है, तेरे बिना हर पल सज़ा सा लगता है। ये इश्क़ भी अजीब खेल है यार, हंसते हुए दिल भी रो जाता है। डॉ असमिया

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

હનુમાન જન્મોત્સવ ની હાર્દિક શુભકામનાઓ 💐

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

અધૂરા તો ખરા જ પણ અમને તમેં મળ્યા તો ખરા લખવાવાળા એ લખ્યા નથી નસીબ માં પણ, જિંદગી એ અમને તમને મળાવ્યા તો ખરા.... 💔💔 - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

अन्यायी का धन कभी, रहे नहीं आबाद। नहीं बचे सम्पत्ति वह, एक दशक के बाद।। दोहा --468 (नैश के दोहे से उद्धृत) -------गणेश तिवारी 'नैश'

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

**|| મહાવીર હનુમાન ||** માત અંજનીના તમે વાહલા છો **બાળ**, દૂર કરો ભક્તોની સર્વે **જંજાળ**. પવનદેવના તમે પરમ છો **પૂત**, શ્રી રામચંદ્રના તમે સાચા છો **દૂત**. બાળપણમાં ઉડાન ભરી સૂર્યને ગળવા **ધાયા**, ઇન્દ્રના વજ્રથી પણ નવ જરાય **ગભરાયા**. દેવોએ આપી તમને અદભુત **શક્તિ**, તમારા રોમ-રોમમાં છે રામની **ભક્તિ**. ઋષ્યમૂક પર્વતે પ્રભુ રામજીને **મળિયા**, દુઃખડા તે સુગ્રીવના પળમાં સૌ **ટળિયા**. એક જ છલાંગે તમે સાગર કૂદી **ગયા**, માતા સીતાને જોઈને ગદગદ **થયા**. સીતાજીને શોધીને રામ-મુદ્રિકા **આપી**, અશોક વાટિકામાં જઈ રાક્ષસોને **સંતાપી**. પૂંછડીએ આગ લાગી, બાળી આખી **લંકા**, ત્રણેય લોકમાં વાગ્યા બજરંગના **ડંકા**. લક્ષ્મણજી યુદ્ધમાં જ્યારે મૂર્છિત **પડ્યા**, સંજીવની લાવવા તમે ડુંગરે **ચડ્યા**. આખો પહાડ ઉપાડીને આકાશમાં **ઊડ્યા**, રામના કામમાં તમે ભક્તિથી **ડૂબ્યા**. છાતી ચીરીને બતાવી રામ-સીતાની **મૂરત**, ધન્ય છે હનુમાનજી તમારી આ "સ્વયમ્'ભૂ"**સૂરત**. જન્મોત્સવના દિને નમાવીએ અમે **શીશ**, ભક્તોની ઉપર સદા વરસાવો તમ**આશિષ**. **જય સિયારામ! જય હનુમાન!** 🙏 અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

"વર્કશોપ" અછાંદસ કાવ્ય ​અહીં વિચારોનો મેળાવડો છે, સપનાઓની નવી ઉડાન, એક એવો ઓરડો જ્યાં ખરા અર્થમાં થાય છે સાચું work. કોરા કાગળ પર જ્યારે ઉતરે છે મનની કલ્પનાઓ, ત્યારે શબ્દોની માયાજાળથી ખીલે છે writing નો નવો અંદાજ. વાર્તાઓ અહીં માત્ર કહેવાતી નથી, પણ ઘડાય છે. ​કેમેરાના લેન્સમાં કેદ થાય છે સમયની ફ્રેમ્સ, લાઇટ્સ અને એક્શનના રોમાંચ વચ્ચે, શૂટિંગ ની સફર એક નવું જ વિશ્વ રચે છે. હાથમાં માઇક અને અવાજમાં એક નવો રણકાર, આત્મવિશ્વાસથી છલકાતી, સ્ટેજ પર ગુંજે છે એન્કરિંગ ની કળા. ​વિખરાયેલા દ્રશ્યોને એક સૂત્રમાં બાંધવાની જાદુગરી, કાપકૂપ અને રંગોના મિશ્રણથી સજ્જ, એડિટિંગ ના સ્ક્રીન પર સર્જાય છે એક સંપૂર્ણ કલાકૃતિ. અને પછી... આ સર્જનને દુનિયા સુધી પહોંચાડવાની મથામણ, માહિતીના આ આધુનિક મહાસાગરમાં, digital marketing ની ચોક્કસ વ્યૂહરચનાઓથી, દરેક ક્લિક અને સ્ક્રોલ પર વિસ્તરે છે આપણી પહોંચ. ​આ માત્ર કોઈ શીખવાની જગ્યા નથી, એક જીવંત અનુભવ છે, કાચી માટીને નવો આકાર આપતી આ એક સર્જનની ભઠ્ઠી છે. શબ્દ, દ્રશ્ય, અવાજ અને કૌશલ્યનો આ અદભુત સંગમ છે હા, આ જ છે આપણા સફરની શરૂઆત... આ જ છે આપણી "સ્વયમ્'ભૂ" વર્કશોપ. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

Parag gandhi

શરીર સુંદર હોય કે ના હોય પણ શબ્દો હંમેશા સુંદર રાખવા કારણ કે, લોકો ચહેરો ભૂલી જશે પણ, તમારા શબ્દો નહીં ભુલે…!! GM…

સુરજબા ચૌહાણ આર્ય

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સુરજબા ચૌહાણ આર્ય

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Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास अंजाम मोहब्बत में अंजाम बिछड़ने का नसीब था l उतनी दूर चला गया जीतना ही करीब था ll दुनिया में मुकम्मल नाम दाम कमाया हुआ l अमीरजादा दिलों दिमाग से भी गरीब था ll मिलना बिछड़ना इत्तिफ़ाक़ होता है कि l जैसा भी था फिर भी वो ही हबीब था ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

known stranger

પ્રેમમાં ક્યારેય પ્રાણનું પ્રમાણ ના માંગીશ પસ્તાઈશ જો હું સાચું ઉદાહરણ આપીશ - known

Paagla

Jo khud apne matlab se yaad karte hai unhe ham matlabi lag rahe hai

Anil singh

5000 साल का सन्नाटा और एक अधूरा पश्चाताप... 🔱 हिमालय की बर्फ में जमा वह महान अघोरी 'रुद्रभैरव', जिसे समय भी नहीं मार सका, आज कलयुग के उज्जैन में एक कमज़ोर और मरे हुए लड़के (सिद्धार्थ) के शरीर में जाग उठा है। क्या एक अघोरी का यह प्रचंड क्रोध उन हत्यारों को खोज पाएगा? और क्या उसे 'अक्षरा' इस भीड़ में मिल सकेगी? 'अधूरी साधना: भाग-1' अब अमेज़न पर लाइव है! मेरी इस नई और सबसे बड़ी कहानी का हिस्सा बनें। अभी पढ़ें और इस रहस्यमयी दुनिया में कदम रखें: 👇 https://amzn.in/d/0aFRPbXW

Raa

bhagvan sree krisha ko Hamare bhart ke dhanudhar kavi . jo love Guru mante ye. unko ye padna chahiye Tera bap ka tiyag kiya kiya he namune

Avinash

सबको हनुमान जयंती की शुभकामनाएं ❤️✨ बोलो जय सिया राम 🔥 📍Location - Shree Vajreshvari Temple, Vasai - Virar (Mumbai)

Piyu soul

ना जाने क्यों हर बार यही होता है, दिल साफ रखो तो गलत समझा जाता है। हम तो बस थोड़ा सा अपने थे किसी के, और वही रिश्ता सबसे पहले टूट जाता है…

kattupaya s

Good morning friends have a great day

Gautam Patel

जय हनुमान

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(53) की व्याख्या ऋग्वेद- 10/90/1 "सभूमिं विश्वतो वृत्वा" अर्थ-- वह पृथ्वी पर चारों ओर व्याप्त है। यह मंत्रांश दिया है — “स भूमिं विश्वतो वृत्वा” — यह वास्तव में ऋग्वेद के मण्डल 10, सूक्त 90 (पुरुष सूक्त), मंत्र 1 का सही अंश है। पूरा मंत्र (ऋग्वेद 10.90.1) सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥ आपके दिए अंश का अर्थ “स भूमिं विश्वतो वृत्वा” अर्थ: वह (पुरुष) सम्पूर्ण पृथ्वी को चारों ओर से व्याप्त करके स्थित है। विस्तृत भावार्थ-- इस मंत्र में पुरुष (परमात्मा/ब्रह्म) का वर्णन है: वह सर्वव्यापी (हर दिशा में फैला हुआ) है। सम्पूर्ण पृथ्वी और सृष्टि में व्याप्त है, और फिर भी उससे अधिक (अत्यतिष्ठत्) है — यानी सृष्टि से परे भी है, इसलिए यह दिया हुआ अर्थ — “वह पृथ्वी पर चारों ओर व्याप्त है” । लेकिन यह पूरा अर्थ नहीं, बल्कि मंत्र का एक आंशिक भावार्थ है। 1. ऋग्वेद 10.90.1 (पुरुष सूक्त) सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥ अर्थ: वह पुरुष (परमात्मा) सहस्रों सिर, नेत्र और चरणों वाला है; वह सम्पूर्ण पृथ्वी को चारों ओर से व्याप्त करके उससे भी परे स्थित है। 2. ऋग्वेद-- 10.81.3 विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो विश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात्। सं बाहुभ्यां धमति सम्पतत्रैः द्यावाभूमी जनयन् देव एकः॥ अर्थ: वह एक परम देव सब ओर नेत्र, मुख, हाथ और पैर वाला है; वही आकाश और पृथ्वी का सृजन करता है। 3. ऋग्वेद- 1.115.1 चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः। आप्रा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च॥ अर्थ: सूर्य समस्त जगत का आत्मा है; वह आकाश, पृथ्वी और अंतरिक्ष में व्याप्त है। 4. ऋग्वेद-- 10.121.1 (हिरण्यगर्भ सूक्त) हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ अर्थ: सृष्टि के आदि में हिरण्यगर्भ (परमात्मा) ही था; वही सम्पूर्ण जगत का स्वामी और धारण करने वाला है। 5. ऋग्वेद-- 8.58.2 एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति अग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः॥ अर्थ: सत्य (परमात्मा) एक ही है, ज्ञानी लोग उसे विभिन्न नामों से पुकारते हैं। निष्कर्ष-- इन सभी मंत्रों से स्पष्ट होता है कि: परमात्मा एक है। वह सर्वव्यापक (हर जगह विद्यमान) है। और सम्पूर्ण सृष्टि का आधार है। अन्य वेदों में प्रमाण-- 1. ऋग्वेद-- 10.191.2 मन्त्र: “सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते॥” अर्थ: तुम सब मिलकर चलो, मिलकर बोलो और अपने मनों को एक करो। जैसे प्राचीन देवता एक भाव से यज्ञ करते थे, वैसे ही तुम भी एकता से रहो। 2. ऋग्वेद-- 10.191.3 मन्त्र: “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” अर्थ: तुम्हारी इच्छाएँ, हृदय और मन समान हों, जिससे तुम सब मिलकर सुखपूर्वक रह सको। 3. अथर्ववेद- 3.30.1 मन्त्र: “समानी प्रपा सह वोऽन्नभागाः समाने योक्त्रे सह वो युनज्मि।” अर्थ: तुम सबका जल और अन्न समान हो, और तुम सब एक ही बंधन (सम्बन्ध) में जुड़े रहो। 4. अथर्ववेद-- 3.30.4 मन्त्र: “समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥” अर्थ: तुम्हारे विचार, हृदय और मन एक हों, जिससे आपसी सुख बना रहे। 5. यजुर्वेद --36.18 मन्त्र: “मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे।” अर्थ: मैं सभी प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखूँ। (अर्थात् सबके प्रति समानता और सद्भाव रखें) 6. यजुर्वेद- 40.1 (ईशावास्योपनिषद् मन्त्र) मन्त्र: “ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।” अर्थ: इस जगत में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से आवृत है। (अर्थात् सबमें एक ही तत्व है—इसलिए भेदभाव नहीं करना चाहिए) निष्कर्ष-- वेदों का स्पष्ट संदेश है— एकता, समानता, सामंजस्य और परस्पर सहयोग। साथ चलो (सं गच्छध्वं)। साथ सोचो (समानं मनः)। सबको समान दृष्टि से देखो ।(मित्रभाव) उपनिषदों में प्रमाण-- 1. ईशावास्योपनिषद् मन्त्र 6 मन्त्र: “यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति। सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते॥” अर्थ: जो व्यक्ति सभी प्राणियों को अपने आत्मा में और अपने आत्मा को सभी प्राणियों में देखता है, वह किसी से घृणा नहीं करता। 2. ईशावास्योपनिषद् मन्त्र-- 7 मन्त्र: “यस्मिन्सर्वाणि भूतानि आत्मैवाभूद्विजानतः। तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः॥” अर्थ: जो ज्ञानी सबमें एक ही आत्मा को देखता है, उसे न मोह होता है, न शोक—क्योंकि वह एकत्व को समझ चुका है। 3. छान्दोग्य उपनिषद्-- 6.8.7 मन्त्र (महावाक्य): “तत्त्वमसि” अर्थ: “वह (ब्रह्म) तू ही है।” (अर्थात् जीव और ब्रह्म में मूलतः एकता है) 4. बृहदारण्यक उपनिषद् --1.4.10 मन्त्र: “अहं ब्रह्मास्मि” अर्थ: “मैं ब्रह्म हूँ।” (अर्थात् आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है) 5. माण्डूक्य उपनिषद् मन्त्र --2 मन्त्र: “अयमात्मा ब्रह्म” अर्थ: यह आत्मा ही ब्रह्म है। (सबमें एक ही चेतना का निवास है) 6. कठोपनिषद्-- 2.1.10 मन्त्र: “यदेवेह तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह। मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति॥” अर्थ: जो यहाँ (इस संसार में) अनेकता देखता है, वह जन्म-मरण के चक्र में फँसा रहता है। (अर्थात् सत्य में एकता है, भेदभाव अज्ञान है) 7. श्वेताश्वतर उपनिषद्-- 6.11 मन्त्र: “एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सब प्राणियों में छिपा हुआ है, वह सबमें व्याप्त और सबका अंतरात्मा है। निष्कर्ष-- उपनिषदों का मूल सिद्धान्त है— “सबमें एक ही आत्मा (ब्रह्म) है” इसलिए— किसी से द्वेष नहीं। सबके प्रति समान दृष्टि। एकत्व का अनुभव ही ज्ञान है। पुराणों में प्रमाण-- 1. भागवत पुराण--11.29.15 श्लोक: “सर्वभूतेषु यः पश्येद्भगवद्भावमात्मनः। भूतानि भगवत्यात्मन्येष भागवतोत्तमः॥” अर्थ: जो मनुष्य सभी प्राणियों में भगवान् को और भगवान् में सभी प्राणियों को देखता है, वही श्रेष्ठ भक्त (भागवतोत्तम) है। 2. विष्णु पुराण --1.19.85 श्लोक: “समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्। विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥” अर्थ: जो परमेश्वर को सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित देखता है, और नश्वर शरीरों में भी उस अविनाशी तत्व को पहचानता है—वही वास्तव में देखता है। 3. शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता) --1.6.38 श्लोक: “एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में छिपा हुआ है, वह सबमें व्याप्त और सबका अंतरात्मा है। 4. गरुड़ पुराण --1.229.32 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान (आत्मभाव) देखता है।, वही सच्चा ज्ञानी है। 5. नारद पुराण-- 1.41.62 श्लोक: “नास्ति तेषां पृथग्भावो येषां ब्रह्मणि चेतसि।” अर्थ: जिनका मन ब्रह्म में स्थित है, उनके लिए कोई भेदभाव नहीं रहता। 6. पद्म पुराण-+ 2.71.38 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। निष्कर्ष-- पुराणों का भी स्पष्ट संदेश है— एक ही परमात्मा सबमें विद्यमान है, इसलिए सबके प्रति समान भाव रखें। सबमें भगवान् देखें। भेदभाव त्यागें। आत्मभाव से व्यवहार करें। गीता से प्रमाण -- श्लोक 1. अध्याय 5, श्लोक 18 श्लोक: “विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि। शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥” अर्थ: ज्ञानी पुरुष विद्या-विनययुक्त ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ता और चाण्डाल में भी समान दृष्टि रखते हैं। 2. अध्याय 6, श्लोक 29 श्लोक: “सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि। ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥” अर्थ: योगयुक्त व्यक्ति सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखता है। 3. अध्याय 6, श्लोक 30 श्लोक: “यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति। तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥” अर्थ: जो मुझे (भगवान को) हर जगह देखता है और सबको मुझमें देखता है, वह मुझसे कभी अलग नहीं होता। 4. अध्याय 6, श्लोक 32 श्लोक: “आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन। सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः॥” अर्थ: जो अपने समान सभी में समान भाव रखता है, चाहे सुख हो या दुःख—वही श्रेष्ठ योगी है। 5. अध्याय 13, श्लोक 27 श्लोक: “समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्। विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥” अर्थ: जो परमेश्वर को सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित देखता है, वही वास्तव में सत्य को देखता है। 6. अध्याय 13, श्लोक 28 श्लोक: “समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्। न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्॥” अर्थ: जो हर जगह समान रूप से ईश्वर को देखता है, वह किसी को हानि नहीं पहुँचाता और परम गति को प्राप्त करता है। 7. अध्याय 12, श्लोक 13–14 श्लोक: “अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च…” अर्थ: जो सभी प्राणियों से द्वेष नहीं करता, सबका मित्र और दयालु ह, वह भगवान को प्रिय है। निष्कर्ष-- गीता का स्पष्ट संदेश है— समदृष्टि (Equality), सर्वात्मभाव (Oneness) और करुणा। सबमें ईश्वर देखें। सबको अपने समान समझें। महाभारत में प्रमाण-- 1. शान्ति पर्व-- 262.5 श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल (अप्रिय) हो, वैसा दूसरों के साथ कभी न करो। (अर्थात् सबको अपने समान समझो) 2. शान्ति पर्व --167.9 श्लोक: “अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च।” अर्थ: अहिंसा ही परम धर्म है (और आवश्यकता पड़ने पर धर्मरक्षा भी)। (अर्थात् सबके प्रति करुणा और समभाव रखें) 3. अनुशासन पर्व-- 113.8 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। 4. शान्ति पर्व --188.8 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। 5. वन पर्व --313.117 श्लोक: “न हि मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किञ्चित्।” अर्थ: मनुष्य से बढ़कर कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है। (अर्थात् सभी मनुष्यों का सम्मान समान रूप से होना चाहिए) 6. शान्ति पर्व-- 109.11 श्लोक: “समं सर्वेषु भूतेषु वर्तयन्ति महात्मानः।” अर्थ: महात्मा लोग सभी प्राणियों के प्रति समान व्यवहार करते हैं। निष्कर्ष- महाभारत का भी यही संदेश है दूसरों को अपने समान समझो, अहिंसा रखो और सबके प्रति समभाव अपनाओ। जो अपने लिए अच्छा है, वही दूसरों के लिए भी करो किसी के साथ अन्याय न करो। सबमें आत्मभाव रखें। स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण-- 1. मनुस्मृति-- 6.92 श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल (अप्रिय) हो, वह दूसरों के साथ कभी न करो। 2. मनुस्मृति- 5.18 श्लोक: “अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।” अर्थ: अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, शुद्धता और इन्द्रिय-निग्रह— ये सबके लिए समान धर्म हैं। 3. याज्ञवल्क्य स्मृति- 1.122 श्लोक: “अहिंसा सत्यमस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।” अर्थ: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शौच और इन्द्रिय-निग्रह— ये सभी मनुष्यों के लिए समान आचरण हैं। 4. याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.145 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव रखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। 5. पराशर स्मृति- 1.60 श्लोक: “दया सर्वभूतेषु क्षान्तिः सर्वत्र साधुता।” अर्थ: सभी प्राणियों पर दया और सबके प्रति क्षमा— यही श्रेष्ठ आचरण है। 6. नारद स्मृति- 1.15 श्लोक: “धर्मो हि तेषां बलवान् समत्वेन व्यवस्थितः।” अर्थ: धर्म सबके लिए समान रूप से स्थापित है। निष्कर्ष-- स्मृतियों का भी यही मूल संदेश है आत्मवत् व्यवहार, अहिंसा, समता और दया। दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा अपने लिए चाहते हो। सभी के प्रति समान धर्म लागू है। दया और क्षमा का पालन करो। नीति ग्रन्थो मेँ प्रमाण-- 1. चाणक्य नीति (अध्याय 1, श्लोक-- 15) श्लोक: “मातृवत् परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः॥” अर्थ: परायी स्त्री को माता के समान, पराये धन को मिट्टी के समान, और सभी प्राणियों को अपने समान देखने वाला ही सच्चा ज्ञानी है। 2. विदुर नीति (शान्ति/उद्योग पर्व संदर्भ) श्लोक: “आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।” अर्थ: जो व्यवहार अपने लिए प्रतिकूल हो, वह दूसरों के साथ न करो। 3. हितोपदेश (मित्रलाभ) श्लोक: “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” अर्थ: “यह अपना है, यह पराया है”—ऐसा विचार छोटे मन वालों का है। उदार हृदय वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है। 4. पंचतंत्र श्लोक: “परहित सरिस धर्म नहि भाई, परपीड़ा सम नहि अधमाई।” (लोकप्रचलित भाव) अर्थ: दूसरों का भला करना सबसे बड़ा धर्म है, और दूसरों को कष्ट देना सबसे बड़ा पाप है। 5. भर्तृहरि नीति शतक श्लोक----- 71 श्लोक: “सन्तः स्वयं परहिते विहिताभियोगाः।” अर्थ: सज्जन लोग स्वयं ही दूसरों के हित में लगे रहते हैं। 6. सुभाषित संग्रह श्लोक: “परोपकाराय सतां विभूतयः।” अर्थ: सज्जनों की सम्पत्ति (शक्ति/संसाधन) दूसरों के उपकार के लिए होती है। निष्कर्ष- नीति ग्रन्थों का भी यही मूल संदेश है— आत्मवत् व्यवहार, परोपकार, और समभाव। सबको अपने समान समझो। दूसरों का हित करो। भेदभाव छोड़ो । वाल्मीकि/अध्यात्म रामायण में प्रमाण-- 1. अयोध्या काण्ड --109.11 श्लोक: “न हि परो धर्मोऽस्ति परोपकारात्।” अर्थ: परोपकार (दूसरों का भला करना) से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। 2. अयोध्या काण्ड-- 2.30 श्लोक: “सर्वभूतेषु हिते रतः।” अर्थ: (राम का वर्णन) — वे सभी प्राणियों के हित में लगे रहते थे। 3. अरण्य काण्ड --37.12 श्लोक: “दयालुः सर्वभूतेषु।” अर्थ: श्रीराम सभी प्राणियों पर दया करने वाले हैं। अध्यात्म रामायण 4. अयोध्या काण्ड-- 3.15 श्लोक: “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।” अर्थ: जो सभी प्राणियों में अपने समान भाव रखता है, वही ज्ञानी है। 5. अरण्य काण्ड- 1.20 श्लोक: “एक एव परो आत्मा सर्वभूतेषु गूढः।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों में छिपा हुआ है। 6. उत्तर काण्ड --5.22 श्लोक: “निर्द्वन्द्वो हि महायोगी समदर्शी भवेत् सदा।” अर्थ: महान योगी सदा द्वन्द्व से रहित और समदर्शी होता है। निष्कर्ष-- रामायण परम्परा का भी यही स्पष्ट संदेश है— परोपकार, दया, समभाव और सर्वहित। श्रीराम का आदर्श = सर्वभूतहित सबमें एक ही आत्मा का दर्शन। दया और समान दृष्टि ही श्रेष्ठ धर्म गर्ग संहिता तथा योग वशिष्ठ में प्रमाण-- गर्ग संहिता-- 1. गोलोक खण्ड --12.45 श्लोक: “सर्वभूतेषु यः पश्येद्भगवद्भावमात्मनः। भूतानि भगवत्यात्मन्येष भक्तः स उत्तमः॥” अर्थ: जो सभी प्राणियों में भगवान् का भाव देखता है और सबको भगवान् में स्थित मानता है, वही श्रेष्ठ भक्त है। 2. वृन्दावन खण्ड- 5.18 श्लोक: “एको देवः सर्वभूतेषु तिष्ठति हृदि सर्वदा।” अर्थ: एक ही परमात्मा सभी प्राणियों के हृदय में सदा स्थित है। योग वशिष्ठ- 3. निर्वाण प्रकरण- 2.13.45 श्लोक: “चित्तमेव हि संसारस्तत्प्रयत्नेन शोधनम्।” अर्थ: यह संसार मन (चित्त) ही है, इसलिए उसे शुद्ध करना चाहिए। (जब चित्त शुद्ध होता है, तब समभाव उत्पन्न होता है) 4. उपशम प्रकरण-- 6.12 श्लोक: “सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।” अर्थ: सभी प्राणियों में अपने आत्मा को और अपने आत्मा में सभी प्राणियों को देखो। 5. वैराग्य प्रकरण-- 3.21 श्लोक: “यदा सर्वत्र समदृष्टिः तदा मुक्तिः न संशयः।” अर्थ: जब सभी में समान दृष्टि हो जाती है, तब निःसंदेह मुक्ति प्राप्त होती है। 6. निर्वाण प्रकरण-- 1.28 श्लोक: “एकोऽहमिदं सर्वं विश्वमित्यवधारय।” अर्थ: यह सम्पूर्ण विश्व मैं ही हूँ—ऐसा निश्चय करो। (अर्थात् सबमें एक ही आत्मा है) निष्कर्ष-- इन ग्रन्थों का भी यही एकमत सिद्धान्त है— एक ही परमात्मा/आत्मा सबमें व्याप्त है, इसलिए समभाव और परोपकार आवश्यक है। सबमें भगवान् देखें। मन को शुद्ध करें। समदृष्टि ही मुक्ति का मार्ग है। इस्लाम मे प्रंमाण से-- 1. क़ुरआन --49:13 (सूरह अल-हुजुरात) يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن ذَكَرٍ وَأُنثَىٰ وَجَعَلْنَاكُمْ شُعُوبًا وَقَبَائِلَ لِتَعَارَفُوا إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ हिन्दी अर्थ: हे मनुष्यों! हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें विभिन्न जातियों और क़बीलों में बाँटा ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। निस्संदेह, अल्लाह के निकट तुममें सबसे श्रेष्ठ वह है जो सबसे अधिक धर्मपरायण (तक़वा वाला) है। 2. क़ुरआन- 5:32 مَن قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍ فِي الْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَمِيعًا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَا أَحْيَا النَّاسَ جَمِيعًا हिन्दी अर्थ: जिसने एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की, उसने मानो पूरी मानवता की हत्या की; और जिसने एक व्यक्ति की जान बचाई, उसने पूरी मानवता को बचाया। 3. क़ुरआन ---2:177 لَّيْسَ الْبِرَّ أَن تُوَلُّوا وُجُوهَكُمْ وَلَٰكِنَّ الْبِرَّ مَنْ آمَنَ بِاللَّهِ... وَآتَى الْمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِ ذَوِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينَ हिन्दी अर्थ: सच्चा धर्म केवल बाहरी कर्म नहीं है, बल्कि अल्लाह पर विश्वास करना और अपने प्रिय धन को रिश्तेदारों, अनाथों, गरीबों और जरूरतमंदों पर खर्च करना है। 4. हदीस सहीह बुख़ारी -13: لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّىٰ يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ हिन्दी अर्थ: तुममें से कोई सच्चा ईमान वाला नहीं हो सकता, जब तक वह अपने भाई के लिए वही न चाहे जो अपने लिए चाहता है। 5. हदीस — सहीह मुस्लिम--2564 الْمُسْلِمُ أَخُو الْمُسْلِمِ لَا يَظْلِمُهُ وَلَا يَخْذُلُهُ وَلَا يَحْقِرُهُ हिन्दी अर्थ: मुसलमान, मुसलमान का भाई है वह न उस पर अत्याचार करता है, न उसे छोड़ता है और न उसका अपमान करता है। 6. अंतिम उपदेश-- (ख़ुत्बा-ए-विदा) — हज़रत मुहम्मद स0 : لَا فَضْلَ لِعَرَبِيٍّ عَلَىٰ عَجَمِيٍّ وَلَا لِعَجَمِيٍّ عَلَىٰ عَرَبِيٍّ إِلَّا بِالتَّقْوَىٰ हिन्दी अर्थ: किसी अरबी को गैर-अरबी पर और न किसी गैर-अरबी को अरबी पर कोई श्रेष्ठता है— सिवाय धर्मपरायणता (तक़वा) के। निष्कर्ष-- इस्लाम का स्पष्ट संदेश है— सभी मनुष्य एक हैं, समान हैं, और परस्पर भाई-भाई हैं। जाति, रंग, भाषा से श्रेष्ठता नहीं सबके प्रति न्याय और करुणा अपने लिए जो चाहो, वही दूसरों के लिए भी चाहो। सिक्ख ग्रन्थों में प्रमाण-- ☬ 1. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 1349) ਮਾਨਸ ਕੀ ਜਾਤ ਸਭੈ ਏਕੈ ਪਹਿਚਾਨਬੋ॥ हिन्दी अर्थ: समस्त मानव जाति को एक ही मानो (सबको एक ही समझो)। ☬ 2. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 611) ਏਕੁ ਪਿਤਾ ਏਕਸ ਕੇ ਹਮ ਬਾਰਿਕ ਤੂ ਮੇਰਾ ਗੁਰ ਹਾਈ॥ हिन्दी अर्थ: एक ही परमात्मा (पिता) है, और हम सब उसके बच्चे हैं। ☬ 3. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 8) ਸਭ ਮਹਿ ਜੋਤਿ ਜੋਤਿ ਹੈ ਸੋਇ॥ ਤਿਸ ਦੈ ਚਾਨਣਿ ਸਭ ਮਹਿ ਚਾਨਣੁ ਹੋਇ॥ हिन्दी अर्थ: सभी में एक ही परमात्मा की ज्योति है, और उसी के प्रकाश से सब प्रकाशित हैं। ☬ 4. गुरु ग्रन्थ साहिब (-- 349) ਨ ਕੋ ਬੈਰੀ ਨਹੀ ਬਿਗਾਨਾ ਸਗਲ ਸੰਗ ਹਮ ਕਉ ਬਨਿ ਆਈ॥ हिन्दी अर्थ: न कोई शत्रु है, न कोई पराया— सभी के साथ मेरा प्रेमपूर्ण संबंध है। ☬ 5. गुरु ग्रन्थ साहिब (--1299) ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਇਕੁ ਦਾਤਾ ਸੋ ਮੈ ਵਿਸਰਿ ਨ ਜਾਈ॥ हिन्दी अर्थ: सभी जीवों का दाता एक ही है, उसे कभी नहीं भूलना चाहिए। ☬ 6. गुरु नानक देव जी (उक्ति) ਨ ਕੋ ਹਿੰਦੂ ਨ ਮੁਸਲਮਾਨ॥ हिन्दी अर्थ: न कोई हिन्दू है, न मुसलमान— (अर्थात् सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की सन्तान हैं) ☬ निष्कर्ष- सिख धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सभी मनुष्य एक हैं, सबमें एक ही परमात्मा की ज्योति है। कोई पराया नहीं। सब भाई-बहन हैं। एक ही ईश्वर का वास सबमें है। ईसाई धर्म में प्रमाण-- ✝️ 1. Bible — Galatians 3:28: “There is neither Jew nor Greek, there is neither slave nor free, there is neither male nor female: for ye are all one in Christ Jesus.” हिन्दी अर्थ: न कोई यहूदी है, न यूनानी; न दास है, न स्वतंत्र; न पुरुष, न स्त्री क्योंकि तुम सब मसीह में एक हो। ✝️ 2. Bible — Matthew:22-39: “Thou shalt love thy neighbour as thyself.” हिन्दी अर्थ: अपने पड़ोसी से उसी प्रकार प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो। ✝️ 3. Bible -John-- 13:34 “A new commandment I give unto you, That ye love one another; as I have loved you, that ye also love one another.” हिन्दी अर्थ: मैं तुम्हें एक नया आदेश देता हूँ—एक-दूसरे से प्रेम करो, जैसा मैंने तुमसे प्रेम किया है। ✝️ 4. Bible 1 John --4:20 “If a man say, I love God, and hateth his brother, he is a liar: for he that loveth not his brother whom he hath seen, how can he love God whom he hath not seen?” हिन्दी अर्थ: जो कहता है “मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ” लेकिन अपने भाई से द्वेष रखता है, वह झूठा है। ✝️ 5. Bible - Acts-- 17:26 “And hath made of one blood all nations of men for to dwell on all the face of the earth.” हिन्दी अर्थ: परमेश्वर ने एक ही रक्त से सभी मनुष्यों की जातियाँ बनाई हैं, जो पूरी पृथ्वी पर रहती हैं। ✝️ 6. Bible — Romans 12:10: “Be kindly affectioned one to another with brotherly love.” हिन्दी अर्थ: एक-दूसरे के प्रति भाईचारे के प्रेम से स्नेह रखो। ✝️ निष्कर्ष- ईसाई धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सब मनुष्य एक हैं, और प्रेम ही सर्वोच्च धर्म है। सब मसीह में एक हैं।अपने समान दूसरों से प्रेम करो द्वेष नहीं, प्रेम और करुणा अपनाओ। जैन धर्म में प्रमाण-- 🕉️ 1. आचारांग सूत्र-- 1.2.3 “सव्वे पाणा न हंतव्वा, सव्वे जीवा दयालुया।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणियों की हिंसा नहीं करनी चाहिए, सभी जीव दया के योग्य हैं। 2. उत्तराध्ययन सूत्र-- 6.10 “सव्वेसिं जीवानं पियं जीवियं।” हिन्दी अर्थ: सभी जीवों को अपना जीवन प्रिय होता है। (अतः किसी को कष्ट न दो) 🕉️ 3. तत्त्वार्थ सूत्र-- 5.21 सूत्र (संस्कृत-प्राकृत परम्परा): “परस्परोपग्रहो जीवानाम्।” हिन्दी अर्थ: सभी जीव एक-दूसरे के उपकार (सहयोग) के लिए हैं। 🕉️ 4. दशवैकालिक सूत्र- 6.9 "जे णं जाणइ अप्पाणं, तं जाणइ परं पि।” हिन्दी अर्थ: जो अपने आत्मा को जानता है, वह दूसरों के आत्मा को भी समझता है। 🕉️ 5. समयसार-- 1.4 “एको अम्मि, नाणो अम्मि, सव्वे जीवा समा मया।” हिन्दी अर्थ: आत्मा एक है, ज्ञान स्वरूप है, और सभी जीव मेरे समान हैं। 🕉️ 6. मूलाचार-- “दया सव्वभूएसु, खंति च सव्वदा।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणियों पर दया करो और सदैव क्षमा रखो। 🕉️ निष्कर्ष-- जैन धर्म का भी यही मूल संदेश है अहिंसा, समता और सर्वजीव-करुणा। किसी भी जीव को कष्ट न दें। सबको अपने समान समझें सभी जीव परस्पर जुड़े हैं। बौद्ध धर्म में प्रमाण-- ☸️ 1. करणीय मेत्ता सुत्त (सुत्तनिपात-- 1.8) “सुखिनो वा खेमिनो होन्तु, सब्बे सत्ताः भवन्तु सुखितत्ता।” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणी सुखी हों, सबका कल्याण हो, सबके भीतर सुख की भावना हो। ☸️ 2. धम्मपद --1.5 पाली (देवनागरी): “न हि वेरेन वेरानि सम्मन्ति इध कुदाचनं। अवेरेन च सम्मन्ति, एष धम्मो सनन्तनो॥” हिन्दी अर्थ: इस संसार में वैर से वैर कभी शांत नहीं होता, केवल अवैर (प्रेम/क्षमा) से ही शांत होता है—यह सनातन सत्य है। ☸️ 3. धम्मपद-- 5.18 “सब्बे तस्सन्ति दण्डस्स, सब्बेसं जीवितं पियं। अत्तानं उपमं कत्वा, न हनेय्य न घातये॥” हिन्दी अर्थ: सभी प्राणी दण्ड (कष्ट) से डरते हैं, सभी को जीवन प्रिय है; अपने समान समझकर न स्वयं हिंसा करो, न दूसरों से कराओ। ☸️ 4. सुत्तनिपात (मेत्ता भाव) “माता यथा निजं पुत्रं आयुसा एकपुत्तमनुरक्खे।” हिन्दी अर्थ: जैसे माँ अपने इकलौते पुत्र की रक्षा करती है, वैसे ही सब प्राणियों के प्रति प्रेम रखना चाहिए। ☸️ 5. अंगुत्तर निकाय-- 4.67 “मेत्ता च सब्बलोकस्मिं, मनसं भावये अप्पमाणं।” हिन्दी अर्थ: पूरे संसार के प्रति असीमित मैत्री (प्रेम) का भाव विकसित करो। ☸️ 6. गौतम बुद्ध (उपदेश सार) “बहुजनहिताय बहुजनसुखाय।” हिन्दी अर्थ: अनेक लोगों के हित और सुख के लिए कार्य करो। ☸️ निष्कर्ष- बौद्ध धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— मैत्री, करुणा, अहिंसा और समता। सब प्राणियों के प्रति प्रेम। किसी के प्रति द्वेष नहीं। अपने समान सबको समझना। सर्वजन-हित का भाव। यहूदी धर्म में प्रमाण-- ✡️ 1. तनाख — Leviticus --19:18 וְאָהַבְתָּ לְרֵעֲךָ כָּמוֹךָ हिन्दी अर्थ: अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो। ✡️ 2. तनाख — Genesis --1:27 וַיִּבְרָא אֱלֹהִים אֶת־הָאָדָם בְּצַלְמוֹ בְּצֶלֶם אֱלֹהִים בָּרָא אֹתוֹ हिन्दी अर्थ: परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया। (अर्थात् सभी मनुष्यों में दिव्यता है) ✡️ 3. तनाख — Deuteronomy --10:19 וַאֲהַבְתֶּם אֶת־הַגֵּ כִּי־גֵרִים הֱיִיתֶם בְּאֶרֶץ מִצְרָיִם हिन्दी अर्थ: परदेशी (अजनबी) से भी प्रेम करो, क्योंकि तुम भी मिस्र में परदेशी थे। ✡️ 4. तनाख — Micah 6:8 הִגִּיד לְךָ אָדָם מַה־טּוֹב וּמָה־יְהוָה דּוֹרֵשׁ מִמְּךָ כִּי אִם־עֲשׂוֹת מִשְׁפָּט וְאַהֲבַת חֶסֶד וְהַצְנֵעַ לֶכֶת עִם־אֱלֹהֶיךָ हिन्दी अर्थ: प्रभु तुमसे क्या चाहता है? न्याय करना, दया से प्रेम करना और नम्रता से ईश्वर के साथ चलना। ✡️ 5. तनाख — Proverbs --22:2 עָשִׁיר וָרָשׁ נִפְגָּשׁוּ עֹשֵׂה כֻלָּם יְהוָה हिन्दी अर्थ: अमीर और गरीब दोनों मिलते हैं, और दोनों को बनाने वाला एक ही परमेश्वर है। ✡️ 6. तलमूद — तलमूद (Shabbat ,---31a) דעלך סני לחברך לא תעביד हिन्दी अर्थ: जो तुम्हें अप्रिय है, वह अपने साथी के साथ मत करो। ✡️ निष्कर्ष- यहूदी धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सब मनुष्य एक ही ईश्वर की सृष्टि हैं, इसलिए प्रेम, न्याय और समभाव रखें। अपने समान दूसरों से प्रेम करो सभी में ईश्वर का स्वरूप है न्याय और दया का पालन करो पारसी (ज़रोअस्ट्रियन) धर्म में प्रमाण-- 1. अवेस्ता — यश्ना --30.2 “šrəṇvantu vispā xšnaoθrā, yā vaēnā vīcithā ahūm.” हिन्दी अर्थ: सब लोग सत्य को सुनें और उसे समझकर अपने जीवन का मार्ग चुनें। 2. अवेस्ता — यश्ना --43.1 “āat̰ yā ahū vairyo …” (अहुनवर प्रार्थना का अंश) हिन्दी अर्थ: सर्वोत्तम मार्ग वही है जो धर्म (सत्य) और न्याय पर आधारित हो। 3. अवेस्ता — यश्ना-- 34.1 “vahmāi ahmāi ushtā ahmāi, hyat̰ ashai vahishtāi.” हिन्दी अर्थ: जो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही वास्तविक सुख प्राप्त करता है। 4. अवेस्ता — वेंदिदाद --19.20 “humata, hukhta, hvarshta” हिन्दी अर्थ: अच्छे विचार, अच्छे वचन, अच्छे कर्म — यही जीवन का मूल सिद्धान्त है। 5. अवेस्ता — यश्ना-- 47.1 asha vahishta ashem.” हिन्दी अर्थ: सत्य (Asha) ही सर्वोत्तम है। 6. जरथुस्त्र (उपदेश भाव) “āramaitiš ahurāi mazda हिन्दी अर्थ: नम्रता, शांति और भक्ति के साथ सत्य मार्ग पर चलो। निष्कर्ष-- पारसी धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सत्य, सद्भाव और परोपकार अच्छे विचार, वचन और कर्म अपनाओ सत्य और धर्म के मार्ग पर चलो सबके प्रति सद्भाव और न्याय रखो। ताओ (Dao/Tao) धर्म में प्रमाण-- 1. ताओ ते चिंग — अध्याय - 1: 道可道,非常道;名可名,非常名。 हिन्दी अर्थ: जिसे शब्दों में व्यक्त किया जा सके, वह शाश्वत ताओ नहीं है। (अर्थात् सत्य एक है, पर शब्दों से परे है) ☯️ 2. ताओ ते चिंग — अध्याय --8 上善若水。水善利万物而不争。 हिन्दी अर्थ: सर्वोत्तम गुण जल के समान है जो सबका हित करता है और किसी से विरोध नहीं करता। ☯️ 3. ताओ ते चिंग — अध्याय --34 大道泛兮,其可左右。万物恃之以生而不辞。 हिन्दी अर्थ: महान ताओ सर्वत्र फैला हुआ है; सभी प्राणी उसी पर निर्भर हैं, और वह किसी का भेद नहीं करता। ☯️ 4. ताओ ते चिंग — अध्याय --49 圣人无常心,以百姓心为心。 हिन्दी अर्थ: संत का अपना अलग मन नहीं होता, वह सभी लोगों के मन को ही अपना मन मानता है। ☯️ 5. च्वांग-त्सु (齐物论) 天地与我并生,而万物与我为一。 हिन्दी अर्थ: आकाश और पृथ्वी मेरे साथ ही उत्पन्न हुए हैं,। और सभी वस्तुएँ मेरे साथ एक हैं। ☯️ 6. लाओत्से (उपदेश भाव) 知人者智,自知者明。 हिन्दी अर्थ: जो दूसरों को जानता है वह बुद्धिमान है,और जो स्वयं को जानता है वह वास्तव में ज्ञानी है। ☯️ निष्कर्ष- ताओ धर्म का भी यही स्पष्ट संदेश है— सभी में एक ही तत्त्व (ताओ) व्याप्त है, इसलिए समभाव और सहजता रखें। प्रकृति के साथ सामंजस्य। सबमें एकता का अनुभव बिना संघर्ष के सबका हित। कन्फ्यूशियस धर्म में प्रमाण-- 📜 1. लुन्यू (Analects) --12.2 己所不欲,勿施于人。 हिन्दी अर्थ: जो तुम अपने लिए नहीं चाहते, उसे दूसरों पर मत थोपो। 📜 2. लुन्यू (Analects) --12.22 樊迟问仁。子曰:爱人。 हिन्दी अर्थ: फान-ची ने “रेन (मानवता)” के बारे में पूछा। कन्फ्यूशियस ने कहा—“लोगों से प्रेम करो।” 📜 3. लुन्यू (Analects) --4.15: 夫子之道,忠恕而已矣。 हिन्दी अर्थ: आचार्य (कन्फ्यूशियस) का मार्ग केवल दो बातों पर आधारित है— निष्ठा (忠) और सहानुभूति/क्षमा (恕)। 4. मेंसियस (Mencius) --2A:6 恻隐之心,人皆有之。 हिन्दी अर्थ: करुणा का भाव हर मनुष्य में स्वाभाविक रूप से होता है। 5. मेंसियस (Mencius) -7A:45: 老吾老,以及人之老;幼吾幼,以及人之幼。 हिन्दी अर्थ: अपने बुज़ुर्गों का आदर करो और दूसरों के बुज़ुर्गों का भी; अपने बच्चों से प्रेम करो और दूसरों के बच्चों से भी। 📜 6. कन्फ्यूशियस (उपदेश भाव) 四海之内,皆兄弟也。 हिन्दी अर्थ: चारों दिशाओं में (पूरी दुनिया में) सभी लोग भाई-भाई हैं। निष्कर्ष- कन्फ्यूशियस परम्परा का भी यही स्पष्ट संदेश है— मानवता (Ren), करुणा, और आत्मवत् व्यवहार। जो अपने लिए न चाहो, दूसरों पर न करो। सबके प्रति प्रेम और सम्मान समभाव और सामाजिक सामंजस्य। ------+-------+------+-------+----

Sonu Kumar

सिकंदर महान के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य क्या हैं? . सिकंदर के जीतने का असली कारण यह था कि उसके पास दुनिया के सबसे बेहतर हथियार थे !! . (1) भाले : जूरी सिस्टम होने के कारण ग्रीस ने हल्की एवं मजबूत धातु का अविष्कार कर लिया था , जिसकी वजह से वे 18 फुट तक लम्बे भाले बना पाए !! इतने लम्बे होने के बावजूद इनमे नम्यता नहीं थी और ये हल्के भी थे। छह फुटी भालो का 18 फुट के भालो से कोई मुकाबला नहीं था। . (2) जीन : ग्रीस ने जीन यानी काठी भी बनायी !! तब तक भारत समेत शेष विश्व में घोड़ो पर बिना जीन के ही बैठा जाता था। जीन होने से घुड़सवार का संतुलन, घोड़े पर पकड़ एवं युद्ध करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। ( श्री चन्द्र प्रकाश द्विवेदी के चाणक्य धारावारिक में आप भारतीय घुड़सवारो को बिना जीन के देख सकते है।) . (3) किला तोडू मचान : जूरी सिस्टम के कारण ग्रीक बेहतर मचान बनाने में सफल हो गए थे। सिकन्दर की सेना किले की दीवार के साथ मचान जब मचान लगाती थी तो इन मचानो की ऊंचाई किलो की दीवारों से भी ऊँची हो जाती थी। इससे किले की दीवारे सिकन्दर का हमला रोकने में नाकाम साबित हुयी। . (4) चमड़े के बख्तर : जूरी सिस्टम के कारण ग्रीस ने सस्ते एवं मुलायम चमड़े का उत्पादन बड़े पैमाने पर करना शुरू किया। बड़े पैमाने पर चमड़े का उत्पादन होने के कारण ज्यादातर ग्रीक सैनिक का अधिकाँश चमड़े द्वारा आवृत होता था। यह चमड़ा मुलायम एवं हल्का था अत: सैनिको को लड़ने में परेशानी नहीं होती थी एवं तीर आदि इन्हें भेद नहीं पाते थे। जबकि शेष विश्व ने सैनिक भारी भरकम जिरह बख्तर लाद कर लड़ रहे थे। . (5) गुलेले : जूरी सिस्टम की वजह से ग्रीस वासी बेहतर गुलेले बना पाए। ये गुलेले 300 किलो तक के पत्थरो को 500 से 600 मीटर दूरी तक फेंक सकती थी। इनका इस्तेमाल किले की दीवारों को तोड़ने एवं दूर से ही सेना पर हमला करने के लिए किया जाता था। . (6) बड़ी एवं हलकी ढाल : ग्रीक्स की ढाल भी काफी बड़ी एवं हल्की थी। सख्त चमड़े की बने होने के बावजूद यह इतनी हल्की थी कि इसे उठाया जा सकता था। ग्रीक्स के केटापल्ट भी बहुत मारक थे ! . तो सिकन्दर को जब मालूम हुआ कि उसके पास दुनिया के सबसे आधुनिक एवं मारक हथियार है , एवं अन्य किसी सेना के पास ऐसे हथियार नहीं है तो उसमे इस महत्त्वाकांक्षा ने जन्म लिया कि दुनिया जीतने का प्रयास करना चाहिए। और जब आपके पास इतने ताकतवर हथियार हो तो साहस वगेरह खुद ब खुद आ जाता है। . इतिहास की पाठ्य पुस्तक में सिकन्दर का अध्याय इस पंक्ति से शुरु होना चाहिए कि आखिर ग्रीक शेष विश्व की तुलना में इतने बेहतर हथियार बनाने में कामयाब किस वजह से हो गए थे ? . जूरी सिस्टम के अलावा इसका कोई अतिरिक्त कारण नहीं था। यदि इतिहास की कोई पुस्तक यह नहीं बताती कि जूरी सिस्टम किस तरह तकनीकी आविष्कार को प्रोत्साहित करके समुदाय को बेहतर हथियारों का निर्माण करने में सक्षम करता है तो मेरे विचार में ऐसी पुस्तक इतिहास नहीं बताती , बल्कि इतिहास पर मिट्टी डालने का काम करती है। . चूंकि सभी इतिहासकार पेड होते है , और उनके प्रायोजक नहीं चाहते कि नागरिको को हथियारों के महत्त्व की सूचना दी जाए, अत: वे इस बात को भुला देते है कि सारा इतिहास युद्धों का इतिहास है, और युद्ध में निर्णायक तत्व हथियार ही है। जिस सेना के पास ज्यादा बेहतर हथियार होंगे वो सेना जीत जायेगी। . अब इसमें साहस , महत्वकांक्षा , नैतिक बल क्या कर लेगा !! बन्दुक के सामने कोई लाठी लेकर जायेगा तो उसका साहस क्या काम आएगा !! तो इतिहास कार जब सिकन्दर पर 100 पेज लिखेंगे तो उसके हथियारों की चर्चा सिर्फ 2 पेज में समेट देंगे, और शेष 98 पेज में अजीब किस्म के दार्शनिक एवं अप्रासंगिक कारण लिखेंगे -- महत्त्वाकांक्षा, नैतिक बल, अनुशासन, साहस, कुशल रणनीति, संगठन, एकता !!! . दरअसल ये छात्रों को भ्रमित करने के लिए इतिहास नहीं कवितायेँ लिखते है। . हेनरी फोर्ड सही था — History is more or less Bunk !! . मतलब इतिहास जिस तरह से लिखा जाता है , यह एक बकवास है !! कभी कम तो कभी ज्यादा !! . इतिहास को किस तरह लिखा जाना चाहिए इसकी प्रक्रिया इस जवाब में देखें -- https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1035102530196157/ . =======

वात्सल्य

છુપાઈ છુપાઈ પ્યાર કરવામાં યુવાની ખોઈ ! હવે તો હા પાડ વૃદ્ધત્વના સીમાડે ઉમર આવી ગઈ. - वात्सल्य

swathi

ఓ నా ప్రాణేశ్వరా! నీ కోసం విలపించే నీ ప్రియురాలిని నేను కానా? నా కళ్ళలో మెదిలే రూపానివి, నా గుండెల్లో కొలిచే దైవానివి నీవే. నా ప్రతి శ్వాసలోనూ నీవే లీనమై ఉన్నావు. నా స్వామీ! నీ విరహ వేదనతో నేను అలమటిస్తుంటే, నా పట్ల నీ ఈ మౌనం ధర్మమేనా? నా సామ్రాజ్యం కంటే మిన్నయైన వాడా.. ఒక్క క్షణం నిన్ను తలచుకోకపోయినా, నా శ్వాస ఆగిపోతుందేమో! నీ చుట్టూ ఎంతమంది భామలున్నా, నేను నీ అంతరాత్మను కానా? క్షీణిస్తున్న నా జీవానికి నీ శ్వాసను తోడుగా ఇవ్వవా? ఓ నా ఆత్మబంధువా! నా హృదయంలోనే శాశ్వతంగా ఉండిపోలేవా? O Lord of my life! Am I not your beloved who weeps for you? You have become the vision in my eyes and the divine form I worship in my heart. You are entwined in my every breath. My Lord! When I am agonizing in the pangs of separation from you, is this silence toward me fair? More precious than my own kingdom, if there is a moment I do not think of you, my breath might cease! No matter how many maidens are around you, am I not your soulmate? Won't you lend your breath to my fading life? O Master of my soul! Can you not dwell forever in my heart? Filling my eyes with your image, I wait for you with eternal hope..."

Imaran

मेरे इश्क़ का हर सवाल उस रब से है, जब मिलना ही नहीं था मेरे महबूब से तो फिर क्यों ये प्यार हर दफा बस उनसे है

ziya

मसला ये नहीं की उसकी याद आती है मसला ये है की हर वक़्त आती है 🥺🥺🥺

Priyanshu Sharma

*_"Apno Se Mila Tajurba Bs Etna Sikhata hai,_* *_Utna He Milo Kisi Se jo Jitna Milna Chahta Hai"_* @priyanshusharma8476

kattupaya s

My novel "நிழல் தரும் வசந்தம்" part 1 published. goodnight.

Piyu soul

हमने भी हँसकर छुपाए हैं कुछ जख्म अपने, हर किसी को क्या बताएं कि हम भी टूटे हैं सपनों में। वो समझे हमें रंग बदलने वाला शायद, पर हमने तो खुद को ही खोया है अपनों में…

Manali

आज रिहा किया है तेरे इश्क को दील से, हो सके तो तू रुह से तेरी, मेरी रुह को रिहा कर दे ,...

Anish

कितने रंग देखें हैं, इस बेरंग जमाने के.!

Ajit

🙏😭🙏😭🙏😭

M K

कुबूलना चाहती हूं मैं अपनी सादगी भरी खूबसूरती को क्योंकि मैं, मेरे बिना अधूरी हूं.... - M K

Siddarth

शायद वो अपना वजूद छोड़ गया है मेरी हस्ती मै, यूं सोते सोते जाग जाना मेरी आदत पहले कभी न थी।।।🕊️

Piyu soul

कहानी हमारी भी कुछ फिल्मी सी है, दोस्ती से शुरू होकर इश्क़ तक आ गई है… अब अंजाम क्या होगा ये तो वक्त बताएगा, पर जो भी होगा… तेरे साथ ही अच्छा लगेगा। 💛✨

Bhavna Bhatt

માનસિકતા

Anish

रूमाल ले लिया है किसी माह-जबीन से कब तक पसीना पोंछते हम आस्तीन से ये आँसुओं के दाग़ हैं, आँसू ही धोएँगे ये दाग़ धुल न पाएँगे वाशिंग मशीन से

Munmun Das

💔💔💔

Bhumika Vyas

ફૂલ રાખો કે તમે એપ્રિલફૂલ રાખો, પણ જાત ને હંમેશા બ્યૂટીફૂલ રાખો. વાત વાત માં ગુસ્સો કરવો હાનિકારક છે, માટે મગજ અને મન ને હંમેશા કૂલ રાખો. પ્રેમ કર્યો છે તો બિલકુલ ગભરાતા નઈ, ચૂકવવા બીલ સાથે પોકેટમની ફૂલ રાખો...😂 માંદગી તમારા આંગણે ટકોરા નઈ મારે, કરો કસરત અને મન ને હળવું ફૂલ રાખો...😊 ભલે હોય ના સંપતિ તમારા કાચા ખોરડે; પણ મન અને તન ને હંમેશા વંડરફૂલ રાખો....😊

Bhavna Bhatt

હર હર મહાદેવ 🙏

Kiran

“मैं जिम जॉइन करने गया मोटिवेशन लेने… ट्रेनर बोला: ‘कल से आना।’ मैं बोला: ‘परफेक्ट! मैं भी यही सोच के आया था!’ 😂

Piyu soul

रात की ये खामोशी तुम्हें सुकून दे, चाँद की रोशनी तुम्हारे ख्वाबों को खूबसूरत बना दे… आज की सारी थकान हवा में घुल जाए, और तुम्हारी मुस्कान कल फिर से खिल जाए। सोते वक्त बस इतना याद रखना — कोई है… जो तुम्हें हर रात दुआओं में रखता है। 💛✨ शेर 💫 तेरे ख्यालों की चादर ओढ़कर सोते हैं हम, वरना ये रातें भी हमें चैन से सोने नहीं देती थीं। 💛 #Good night buddies sweet dreams

Riddhi Gori

જીંદગી ની આંટા ઘૂંટી માં હું અટવાઈ રહી છું પોતાના માં જ થોડી હું આમ અકળાઈ રહી છું… રસ્તો શોધવા ને એકલી જ નીકળી હતી જ્યારે ભૂલી ને રાહ હું મારા માં જ ક્યાંક ભટકી રહી છું… કહેવા માટે મારું છે પણ કેટલું મારુ છે આ જીવન બસ બીજા નાં માટે હસી નાં મુખોટા પહેરી રહી છું… કોણ મળે છે સમજનાર કે સાંભળનાર અહિયાં એટલે આંસુઓ નાં મોતી ને શબ્દો માં પરોવી રહી છું… - Riddhi Gori💙🤍

Kiran

“तेरी तारीफ़ में क्या लिखूं, तू तो खुद एक किताब है। जिसे पढ़ते ही सुकून मिले, तू वही हसीन ख़्वाब है।” ...

AbhiNisha

फिर भी मैं बुरी हूं हमसे पूछा सभी ने हमने उन्हें दिया क्या किसी ने पूछा ही नहीं की हमें उनसे मिला क्या हमेशा एक तरफा ही उम्मीद लगाई गई और मैं उम्मीद लगाई तो वेमत हुई वो उम्मीद जो सख्त पहेरो से लगे थे उसमें बस एक तिनका ही हिला और उन तीनके ने साबित कर दिया कि मैं क्या हूं उनके लिए जो मेरे अपने थे सब मांगते गए और मैं देता गया मेरे हंसी मेरी खुशी मेरा रोना मेरा कहना मेरा बहन मेरी वक्त मेरी जज्बात सबको दे दिया उनकी जरूरत के हिसाब से जब मुझे जरूर परी मेरी ही वक्त के तो ताना मिला मैंने वह क्यों नहीं की जो उसने कहा शिकायत पर बहाना मिला मैं खुद के लिए वक्त कैसे बचा ली इस बात पर सख्त और जलील भरी लेहजे मिला जब मैं पल भर सांस लेने की सूची तो मैं बुरी हुई अपने प्रिय जनों से मुझे यह नाम मिला मैं ने किसी से उनके हिस्से की वक्त नहीं मांगा मैं ने किसी से उनके हिस्से की हंसी नहीं मांगा मैंने किसी से उनके हिस्से की कुछ भी वेसकीमती की नहीं मांगा मैं ने बस अपने हिस्से के जज्बात अपने पास रखना चाहा फिर भी मैं बड़ी बुरी हूं सबके हिस्से की मैंने दर्द लिया गम लिया और मेरे हिस्से का दर्द और गम अपने दिल में दवा लिया फिर भी मैं बुरी हूं मैंने कहां कैसे की मुझे से नहीं होगा जो मैं आज तक करता रहा मैं एक बुरी बेटी हूं सबने मुझे से सब ले लिया और किसी ने कुछ दिया नहीं फिर भी पूछा मैंने उनके लिए क्या किया जहां मे एक लाइन सच है जो बड़ी फेमस है चिड़कर सीना दिल निकाल कर भी रख दो तुम अपनी प्रिय जनों के सामने फिर भी कहेंगे यह कम ही है सब कुछ लेने के बाद भी मुझे अंदर से खोखला कर देने के बाद भी कहते हैं तुमने मुझे दिया क्या अगर आप सबको यह कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपका प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

Jyoti Gupta

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mohansharma

जानते तो तुम खूब हो मोहन रिश्ते बनाना.. बस नहीं जानते हो तुम उनको निभाना..

mohansharma

मोहन इससे बड़ी और क्या नादानी होगी मोहब्बत में.. जो हम फर्क ही ना कर पाए उसकी अदा और अदावत में..

वात्सल्य

હું તો મોબાઈલમાં મેસેજ લખી લખી થાક્યો,છતાં મારી તને પરવા નથી. તુ વીજળી શા કરે કડાકા,છતાં તારે મન પરવા નથી. - વાત્સલ્ય

Paagla

Logo ne mujhe chhoda aur mene logo ko

Sneha Gupta

[श्री राम Version - 1] श्री राम है वंदन तुमको, दशरथ जी के नंदन तुमको। हृदय में राम के आने के भाव ऐसे जगे, खुशी के आँसू झर-झर बहे। जैसे सुदामा को कृष्ण मिल गए, ऐसा ही संबंध भक्त और भगवान का हर युग में है। श्री राम है वंदन तुमको, दशरथ जी के नंदन तुमको॥ वर्षों बाद आशाओं के दीपक फिर जल उठे हैं, इस बार आशाएं ऐसी जागी कि पूरा भारत ही अयोध्या बन गया है। जैसे शरीर को प्राण मिल गया है॥ संगठन की शक्ति अब दिखाएंगे, घर-घर भगवा लहराएंगे॥ भारत ऐसा पावन धाम हो, जिसके नायक श्री राम हों। श्री राम है वंदन तुमको, दशरथ जी के नंदन तुमको॥ अनुपम छवि देखी राम की, मन मुग्ध है सब नर-नारी। सतयुग के नारायण हो या, त्रेतायुग के राम हो, द्वापरयुग के कृष्ण हो, या कलयुग के कल्कि भगवान हो। दयाकर अपने चरणों की ऐसी कृपा हमारे नाम हों, श्री राम है वंदन तुमको, दशरथ जी के नंदन तुमको॥ Written by: Sneha Gupta

Komal Mehta

આં જીવન રહે ના રહે શું ફરક પડે છે જીવન અને હકીકત થી રૂબરૂ થઈ ગયાં આ દુનિયાના ની ભીડ નો હિસ્સો ના બની શક્ય કેમ કે અમે લોકો જેવા ના બની શક્યા શક્ય છે આ જીવન આપ્યું છે ઈશ્વર તો એને કાઢવું પડશે ખાલીપો નથી અંદર, પણ આ કઈ અલગ છે ના સપના છે ના કોઈ થી કોઈ આશા છે જેટલું જીવ્યા આજ સુધી એમાં એક સંતોષ છે ખુશી તો છે હાથપગ ચાલે છે અવસ્થા એવી સમજાઈ રહી છે કે મોહ નો ત્યાગ થઈ ગયો છે અને અમે સમર્પિત કરી દીધી પોતાની જાતને ઈશ્વર માં ચરણોમાં

Kaushik Dave

જય હાટકેશ 🙏 હાટકેશ્વર જયંતિની શુભકામનાઓ 💐

Siddarth

हाथ की लकीरें सिर्फ सजावट बया करती हैं। किस्मत अगर मालूम होती तो मेहनत कौन करता 💛

Sudhir Srivastava

दोहा - राम नवमी आज अवध में बह रही, खुशियों भरी बयार। रामराज्य की नींव का, रामलला आधार।। चैत्र मास नवमी तिथी, जन्म लिए श्री राम। हर्षित सारा अवध है, आए ललित ललाम।। रामजन्म से छा गईं, खुशियाँ अपरम्पार। नर -नारी हर्षित बड़े, झूम उठा संसार।। अद्भुत रुप निहारिए, बालक खासमखास। नजर नहीं है हट रही, प्रमुदित मन उल्लास।। राम रूप में आ गए, श्री हरि ले अवतार। उम्मीदें सबकी बढ़ीं, निश्चित जग उद्धार।। रूप राम का देखकर, हटती नहीं निगाह। वाह-वाह वाणी कहे, मन में बड़ा उछाह।। ऋषि-मुनि-ज्ञानी आ गए, आज अवध के धाम। दरश हृदय की लालसा, सरयू संगम राम।। धरा अवध पावन हुई, बनी अयोध्या धाम। जन्म जहाँ पर हैं लिए, रघुकुल नंदन राम।। मानव रूपी राम जी, जग के तारणहार। उम्मीदों का आइना, देख रहा संसार।। सूर्य तिलक श्री राम का, अद्भुत अनुपम खास। देख मित्र यमराज के, मन में बड़ा उजास।। धर्म ध्वजा लहरा रही, देखे जग संसार। शबरी के श्री राम का, नवरूपी अवतार।। मर्यादा की मूर्ति ये, मानवता की शान। त्रेता युग के राम का, अजर-अमर सम्मान।। सुधीर श्रीवास्तव

Manoj kumar shukla

जग डूबा *अवसाद* में, छेड़ा जबसे युद्ध। दोनों को समझा सकें, कहाँ से लाऊँ बुद्ध।। विश्व प्रेम आराधना, सुख शांति *प्रासाद*। हिल -मिलकर सब रह सकें, हटे दूर उन्माद।। गीता के *प्रतिसाद* में, कर्म भाव ही तत्व। जिसने जीवन को जिया, उसका बढ़ा महत्व।। जीव जगत को है मिला, आशीर्वाद *प्रसाद*। नेक राह पर चल पड़ो, कभी न हो उन्माद।। मनोज कुमार शुक्ल मनोज 1/4/26

Shefali

#shabdone_sarname__

Sudhir Srivastava

फायकू- महाविनाश -------- कहाँ तक जायेगा ये जारी जो महायुद्ध तुम्हारे लिए। तेल के खेल में मानवता की हार तुम्हारे लिए। क्या यही नीति है विनाशक कूटनीति है तुम्हारे लिए। लाचार आज का मानव विनाश का तांडव तुम्हारे लिए। दुनिया अब जा रही महाविनाश की ओर तुम्हारे लिए। ले डूबेगा ये अहम सारी दुनिया को तुम्हारे लिए। अब भगवान ही मालिक इस संसार का तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

फायकू- महाविनाश -------- कहाँ तक जायेगा ये जारी जो महायुद्ध तुम्हारे लिए। तेल के खेल में मानवता की हार तुम्हारे लिए। क्या यही नीति है विनाशक कूटनीति है तुम्हारे लिए। लाचार आज का मानव विनाश का तांडव तुम्हारे लिए। दुनिया अब जा रही महाविनाश की ओर तुम्हारे लिए। ले डूबेगा ये अहम सारी दुनिया को तुम्हारे लिए। अब भगवान ही मालिक इस संसार का तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव

Ruchi Dixit

अरसे बाद आया तो सही मगर!! शिकायत की पोटली खोली न जाने कितनी रार लिए पीड़ा की दरकार लिए खुद को कहता सुना न कभी कहता सुनता है हरपल ही अपराधी तेरी एक नहीं औरों की भी हिस्सेदारी उसपर खुद की भी सगी नहीं अपराधबोध की आदी हूँ पूरी न आधी-आधी हूँ आधे में भी टुकड़े -टुकड़े बिखरे हैं सब एक सार नही...... ख्वाहिश का तो कुछ पता नहीं है न है यह इन्कार नहीं, अच्छेपन का कुछ भार नहीं... सुख के साथी तेरे कितने दु:ख का कारण मैं एक रही धीरे - धीरे समझा जो अब समझा तो था स्वीकार नही जाने मुझमें था क्या देखा जो था लेकिन अब रहा नहीं मैंने तुझको ही सच माना तुझमें ही खुद को पहचाना अन्तर ने कहा बस वहीं किया.....;;;; #गफलत#पहचान#अन्तर

Arun Gupta

"क्रोध और डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए समय का सही प्रबंधन और सकारात्मक सोच का होना आवश्यक है।" - Arun Gupta

Sudhir Srivastava

चौपाई - माता ********** हम सबकी है जीवन दाता। कहें आप हम जिसको माता।। पालन पोषण भी वो करती। ममता आँचल अपना धरती।। रातों दिन वो खटती रहती। फिर भी कभी कहाँ वो थकती।। ईश्वर की अनमोल धरोहर। होती कब वो भला सहोदर।। आज समय का खेल निराला। हम सबका होता मुँह काला।। नित माँ का अपमान करें हम। जिसका हमको ना कोई ग़म।। माँ का फटता आज कलेजा। तड़प रहा है उसका भेजा।। हम सब माँ को रुला रहे हैं। पाप शीश निज चढ़ा रहे हैं।। माँ की आहें भले मौन हैं। हम भूलें वो भला कौन हैं।। आखिर इसका दंड भी पाते। अपने बच्चे मारें लातें ।। ****** चौपाई -मन ******** मन की बात ध्यान से सुनिए। कभी आप मत मन से लड़िए।। मन का है संदेश भलाई। खट्ट-मीठा स्वाद मलाई।। मन का राजा आप न बनना। चिंतन मनन ध्यान भी करना।। द्वंद्व कभी मन में मत लाना। भेदभाव में मत उलझाना।। सुधीर श्रीवास्तव

Anjana Vyas

: बैंक से पैसा निकाल कर, घर/ सुरक्षित जगह पर रख लें ! सारे बैंक, इंटरनेट से चल रहे हैं. और, इंटरनेट, समुद्र के अंदर लगी 18 केबल से चल रहा है ! USA ईरान युद्ध में, ये केबल कट सकती हैं !तब बैंक काम नहीं कर सकेंगे ! आप का पैसा डूब सकता है ! अतः,better होगा, कि कैश अपने पास रखें !! 🙏🌷🙏 - Anjana Vyas

Narendra Parmar

મારી જીંદગી નો અંત આવી ગયો હું તો જીવતા જીવ મરી ગયો ! ફક્ત એક ભ્રમ હતો મને કે ?? તૂં મળીશ મને એ ભ્રમ પણ મારો ટૂટી ગયો ! લાગે છે કે એટલે જ હું મરતાં મરતાં બચી ગયો હવે હું બહુ જ ખુશ છું,કેમ કે હવે હું તને ભૂલી ગયો ..... નરેન્દ્ર પરમાર " તન્હા "

Narendra Parmar

अब तूझे में मुड़कर क्या देखूं ?? इनसे अच्छा है कि में आगे की अपनी लाइफ के बारे में न सोचूं ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Piyu soul

तेरे साथ हँसना भी आदत बन गई है मेरी, वरना यूँ हर खुशी में तुझे ढूँढता कौन… 💛

Shivraj Bhokare

"चेहरे पर हंसी और आँखों में शरारत है, तेरी सादगी में भी गजब की कयामत है। यूँ तो आईना रोज़ देखता होगा तुझे, पर मेरी नजरों से देख, तू खुदा की इबादत है।" .

Anup Gajare

"ओ गुलाबी लड़की" ____________________________________________________ गुलाबी हथनी पर बैठी गुलाबी लड़की जंजीरों में बंधा होना ही शाश्वत दुनिया है। लकड़ी की मेज पर इंसानों सा खाना तुम्हें कभी परोसा न जाएगा। ख़ाब देखना देख कर चलना पूर्वनिर्धारित है, प्यारी हथनी तुम स्वतंत्र नहीं हो न ही फैसला ले सकती हो, क्या कहां तुम्हारी दृष्टि दूर तलक देख सकती है? मैं कहता हु बग्गी में बैठी हीराबाई की नजरों को हर हीरामन नहीं पहचानता है। तुम्हारा कोई प्रेमी बस तुम्हारे लिए अपने मुक्त जंगलों में बसे आजाद झुंड को आखिर किस शर्त पर छोड़ेगा, उसे भी रंग दिया जाएगा गुलाबी रंग में ऐसा रंगरेज कहां है जो कैस की तरह तुममें पूरी तरह गुलमिलता हुआ भटके समाज के जालिम नियम आखिर कोई प्रेमी क्यों तोड़े। जंजीरें ही तुम्हारा अर्धवंचित प्राक्तन है, था और रहेगा। भूल जाना कि कोई तुम्हे चाहता हुआ आयेगा बेड़ियों से निकालने। ओ लड़की नादान हो कमाल की बहकी हुई बेहकूफ हो, फैसलों से भरी इस सभा में कोई कृष्ण नहीं देगा हाथ। यहां बस अंधे धृतराष्ट्र मिलेंगे हर चौराहों पर, या भीष्म जो कट्टपा की तरह बहुत कुछ तो कर सकता है वह पानी डालकर गुलाबी रंग धो सकता है पर वह ऐसा नहीं करेगा। दुर्योधन के लिए कितने कर्ण झुकेंगे तुम्हारी लड़ाई कोई सूतपुत्र नहीं लड़ेगा नादान लड़की। बहस करना बेकार हैं हर तरफ घूमते हुए मदद की पुकार तो उस अवस्था से भी गई गुजरी है जिस हालत में शहरी नाली पर पड़े होते है मूर्छित लोग। यहां बस लाचारी से होते हुए वस्त्रहरण देखनेवाले लोग मिलेंगे। जिस भीड़ को 'धूम' पसंद है 'धूम' उसका नाम है जो गला फाड़ते हुए गाता है दिल न दिया दिल न लिया तो बोलो क्या किया… न तो उसका संगीत अच्छा है न ही वह लड़का कोई शास्त्रीय लय जानता है जनता बस उसकी बदहाली देखना चाहती है बिल्कुल गुलाबी हथनी पर बैठी किसी गुलाबी लड़की की तरह वे देखते हैं शरीर वे देखते है चमड़ा वे देखते हैं भूगोल भीतर का रक्त, मांस, हड्डियां कोई क्यों देखे, कोई क्यों हीरामन की तरह मन के जाल में फंसे क्यों कोई तुम्हारे लिए तीसरी कसम में डूब जाए। बस इतना ही सच है गुलाबी कन्या की इस दुनिया में न्याय या सत्य जैसा सुंदर कुछ नहीं पर सबको क्रूरता और अत्यंत अन्याय ही लुभाता है। गुलाबी हथनी पर बैठी गुलाबी लड़की तुम्हें पहाड़ों, जंगलों, झीलों में अपना अस्तित्व खोजना होगा। जहां इंसानी हाथ न पहुंचे हां, उसी स्थान का चुनाव तुम्हें करना होगा किसी खोह में उकेरे गए चित्र की तरह उनमें भरे रगों की भांति तुम्हें सवाल पूछना होगा। सवाल आत्मा की तरह शाश्वत नहीं है उसे जलाया भी जाता है सवाल भीगता भी है उसे काटा भी जाता है पर तुम अड़ींग रहना प्रश्न पूछती रहना, ऐसा है तो क्यों वैसा है तो क्यों। तुम पूछोगी तो वे हँसेंगे हँसी में छुपा देंगे तुम्हारा ही प्रश्न। कहेंगे— यही रीति है यही परंपरा है यही दुनिया का ढंग है। और तुम सोचोगी कब से? किसने लिखा था यह पहला नियम कि गुलाबी रंग ही तुम्हारी त्वचा होगा? किसने पहली बार तुम्हारी हथनी के पैरों में लोहे की आवाज बाँधी थी? क्या वह भी किसी और का आदेश मान रहा था? या वह खुद किसी और रंग में रंगा हुआ था? तुम देखोगी उन हाथों को जो तुम्हें दुलारते हैं और वही हाथ तुम्हारी जंजीरों की गांठ भी कसते हैं। तुम पहचानोगी कि प्रेम और स्वामित्व के बीच एक पतली सी रेखा है जो अक्सर दिखाई नहीं देती। और जब दिखती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। तुम उतरना चाहोगी उस हथनी से धीरे से बिना आवाज किए, पर तुम्हारे उतरते ही जमीन हिल जाएगी जैसे कोई अपराध हुआ हो। लोग इकट्ठा होंगे और पूछेंगे— किसने दी तुम्हें नीचे आने की इजाज़त? तुम चुप रहोगी क्योंकि तुम्हारे पास कोई उत्तर नहीं होगा जो उनकी भाषा में फिट बैठे। तुम्हारी चुप्पी उन्हें और साहसी बनाएगी वे तुम्हारे चारों ओर एक नया घेरा बनाएंगे और कहेंगे— देखो, यही है अराजकता। तुम्हें फिर से चढ़ा दिया जाएगा उस गुलाबी ऊँचाई पर जहाँ से तुम सबको देख सकती हो पर छू नहीं सकती। तुम्हें समझ आएगा ऊँचाई भी एक कैद होती है। और उस दिन पहली बार तुम्हें अपनी ही आवाज अजनबी लगेगी। तुम उसे पुकारोगी जंगलों में पहाड़ों में झीलों के किनारे— पर वह लौटकर नहीं आएगी क्योंकि उसे भी शहर में रहने की आदत हो गई है। फिर भी किसी एक रात जब सब सो जाएंगे और गुलाबी रंग अंधेरे में थोड़ा फीका पड़ जाएगा, तुम अपनी उँगलियों से खुरचोगी उसे धीरे-धीरे जैसे कोई पुरानी दीवार से नमी हटाता है। नीचे से दिखेगा तुम्हारा असली रंग— अधूरा, अनगढ़, पर तुम्हारा। तुम डरोगी कि अगर यह दिख गया तो वे तुम्हें पहचान नहीं पाएंगे। फिर तुम सोचोगी— क्या कभी पहचाना भी था? और उसी क्षण एक बहुत छोटा पर सच्चा प्रश्न तुम्हारे भीतर जन्म लेगा— अगर मैं गुलाबी नहीं हूँ, तो मैं कौन हूँ? और शायद यही वह जगह है जहाँ से जंगल शुरू होता है। _____________________________________________

Siddarth

लफ्जों की दहलीज पर घायल जुबान हैं। कोई तन्हाई से तो कोई महफिल से परेशान हैं।।।🖤

Rinal Patel

પડકાર ભલે મોટા હોય સાહસ કરવાથી ક્યારેય ન ડરવું. અંતરની દ્રષ્ટિએ. -Rinall.

vrinda

vrinda 🌸 - vrinda

Shailesh Joshi

રોજગાર માટે શહેરમાં આવ્યા પછી નોકરી કે ધંધાની શરૂઆત કરીએ, એ દિવસથી જ એક વાત યાદ રાખવી કે, જેમ જેમ નોકરીમાં વેતન, કે ધંધામાં વળતર વધે, તેમ તેમ ખર્ચાઓ પર નિયંત્રણ રાખવું, નહીં તો આપણી આર્થિક સ્થિતિ આપણા નિયંત્રણ બહાર જવાની સંભાવના વધી જતી હોય છે, માટે વેતન અને વળતરનું જતન કરવું, નહીં તો વતનમાં પાછા જવાનો વારો પણ આવી શકે છે. 😁 - Shailesh Joshi

Mona Ghelani

🦋🌻🌸🌹🌼🏵️🍁🌞

Mona Ghelani

🍁🏵️🌼🌹🌸🌻🦋

Mara Bachaaaaa

सांस जैसे थम सी गई है, जब से दूरियां हुई आप से। - Mara Bachaaaaa

Imaran

मेरी दुनिया, मेरी हँसी, मेरा सुकून हो तुममेरी जान, इस दिल की सबसे खूबसूरत धुन हो तुम 🫶imran 🫶

Soni shakya

मेरी कमी भी उसे सताएगी..! भ्रम था--- टूट गया..!! - Soni shakya

Nilesh Rajput

પ્રેમની વ્યાખ્યામાં તારું નામ ના શોભે.., લખું જો પ્રેમ ને શાહી નામ તારું લખે..

Soni shakya

नजरअंदाज करके जो फिर, करीब आते हैं..! अक्सर वो लोग सिर्फ,अपने दिल का बोझ हटाते हैं..!! - Soni shakya

Piyu soul

नज़रें हमारी भी बहुत कुछ कह जाती हैं, पर हम ठहरे राजपूताना — खुलकर इज़हार कहाँ करते हैं… जो समझ ले खामोशी को हमारी, बस उसी से हम थोड़ा प्यार किया करते हैं। 😏💛

Dada Bhagwan

Do you know that for this human life, we should use everything we have for the benefit of others? Read more on: https://dbf.adalaj.org/ANbKTYdU #humanity #helpothers #seva #service #humanlife #DadaBhagwanFoundation

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

આજે તો મારી આંખો એ પણ ધમકી આપી, કે, થોડું ઉંઘવાનું રાખ..... દુઃખ તારું છે એમાં અમારો શું વાંક ? - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

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