Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
aakanksha

प्रथम प्रेम ही सच्चा और गहरा होता है, क्योंकि उसमें कोई छल-कपट नहीं होता है। अनजाने में ही दिल किसी का हो जाता है, और वही एहसास उम्र भर साथ रह जाता है। पहली बार जो धड़कनों में नाम उतरता है, वो याद बनकर हमेशा दिल में ठहरता है। समय भले ही आगे बढ़ जाए बहुत दूर, पर पहला प्रेम दिल से कभी नहीं उतरता है। ✨

mr swahit words official

रावणाची 'श्रीमंती' हवीये, पण रावण नको... रामाचा 'स्वभाव' हवाय, पण रामानं भोगलेला वनवास नको! 🚩🤔

Narendra Parmar

तुम्हारी छोटी सी बहसबाजी ने मेरा घर वीरान कर दिया ! अच्छा खासा मकान था मेरा तुमने उसे खंडहर में तब्दील कर दिया ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "

वात्सल्य

દિલાસો દેનારને આજે દિલાસાની નોબત આવી.! પ્યાર ક્યાં સુધી પામરનું પતન ચાહે છે !! - વાત્સલ્ય - वात्सल्य

वात्सल्य

સવારથી શોધું છું,તને !! હજુ પણ તું ઘેર નથી આવ્યો. હૂઁ ક્યાં ક્યાં શોધું તને!! મારું વિશ્વ તું છે અને તારું વિશ્વ અનંત છે. - वात्सल्य

Jitendra Singh

बेरहम है दुनिया और चाहती है शांति मतलबी इतनी है कि बेमतलब किसी को न जानती। जो हो रहा साथ अपने क्या यह पहले से ही है लिखा ऐसा ही अगर है तो उसने सब फ़िज़ूल क्यों लिखा। सूज गई हैं आँखें ज़रा देखो तो आईना सवेरा होकर गुजर गया पर नींद आई ना। सूरज निकलते देखा है देखा है डूबते जो संग इसी के चल दिए वो भी क्या खूब थे।

वात्सल्य

મારે કશું જ નહીં જોઈએ. ફક્ત તું, તું અને તું જ જોઈએ. - વાત્સલ્ય - वात्सल्य

SUNIL ANJARIA

પેટ્રોલ બરાબર મળે છે હોં! હવે જાળવીને વાપરવાનું તો નીમ લઈએ. નજીક ચાલીને જઈ શકાય, એક કે બે વ્યક્તિ જતી હોય તો કાર ને બદલે સ્કૂટર લઈ શકાય અને સિગ્નલ પર વધુ વાર હોય તો એન્જિન બંધ કરવું. એવરેજ પણ ચેક કરાવતા રહેવી. બિનજરૂરી વાહન લઈ ખાલી ફરવાનું ટાળવું.

Piyu soul

💫तुम्हारी तरफ खिंचता दिल 💫 तुम्हारे सामने आते ही, ये दिल थोड़ा बेवकूफ सा हो जाता है… जो बातें कभी सोच भी नहीं सकता, वो सब तुम्हारे सामने कहने को मन करता है। तुम पास आओ तो दूरी का होश नहीं रहता, और दूर जाओ तो दिल मानता ही नहीं। कभी तुम्हें यूँ ही छेड़ने का मन करता है, कभी बस चुप रहकर तुम्हें देखने का… तुम्हारी आँखों में कुछ ऐसा है, जो हर बार मुझे वहीं रोक लेता है। और सच कहूँ… ये जो हल्की-सी शरारत है हमारे बीच, यही तो दिल को सबसे ज्यादा पसंद है। ना ज्यादा करीब, ना ज्यादा दूर, बस उतना ही… जितना दिल संभाल सके। पर फिर भी… हर बार दिल थोड़ा और तुम्हारी तरफ खिंच ही जाता है। 💛 by piyu 7soul

Soni shakya

अभी सांझ ढले तू मेरे दिल में आ जाना.. कभी चांद खिले तु मेरे दिल में आ जाना.. और आना इस तरह कि-- फिर ना जाना.. - Soni shakya

Nilesh Rajput

“How can you still love her after she left you?” cause I love her the way I love her.”

Kiran

नहीं जानूँ मैं, कहाँ है तू, कैसा है तू, कहाँ रहता है, क्या करता है… बिल्कुल अजनबी है तू, फिर भी न जाने क्यों सोचती हूँ तेरे बारे में इतना… क्यों देखती हूँ तेरे ख्वाब, क्यों तेरे ख्यालों में खुद से ही मुकर जाती हूँ… अजीब सा रिश्ता है ये— ना तेरा कोई नाम, ना मेरा कोई हक़… फिर भी दिल तुझे अपना मान बैठा है…🌸

kattupaya s

Goodnight friends.. sleep well

Rinal Patel

ત્યાગ, સમર્પણ ને વચનપાલનનું એકમાત્ર સ્વરૂપે એટલે ભગવાન "શ્રી રામ" અંતરની દ્રષ્ટિએ. - Rinall.

Kiran

जो कल तक रटते रहते थे नाम मेरा , वह आज दिखाई भी नहीं देते।

Jyoti Gupta

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A R

ये जो तुम दिल के साफ हो ना देख लेना दिमाग वालों से हार जाओगे - SAYRI K I N G Good night

A R

Now, only unfulfilled dreams reside in these eyes; these eyes will do nothing but wait for his return—for a lifetime... until the end of time - SAYRI K I N G

A R

तेरे हुस्न के हम क़ायल थे, कहने को कायर थे, इसी लिए, एक ख़त में लिख कर दिया तुझे दिल का हाल, और तुझे लगा हम शायर थे।

Imaran

बिना कहे समझ जाती है हर बात पर साथ दे जाती है, कुछ खास है उसमें मुझे अपनेपन का अहसास कराती है। 💞imran 💞

A R

एक कहानी मेरी भी

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/179aYdDVcc/

Amir Ali Daredia

માતૃભારતીના વાંચકોને રામનવમીની હાર્દિક શુભ કામનાઓ.અહીં એક રામ ભજન ની લિંક આપી છે જરુરથી સાંભળશો.https://youtu.be/NTCdK7Qb_1E?si=z5TCthjO7tThig7L

p

milte hai guys kuch time baad bye 🙋‍♀️

ek archana arpan tane

પાંચ આંગળીઓ આપણી એકસરખી નથી હોતી તો આપણે કેમ અપેક્ષા રાખીએ કે દરેક માણસ આપણી અપેક્ષા પ્રમાણે વર્તન કરે. - ek archana arpan tane

p

jo ajj hai tumhare sath , kall ko bhi hoga , tumhare dukho me sukho me , dhal ban ke khrha hoga, Papa se asha dost is dunia me nhi hoga☺☺ - p

Bindiya

તારી યાદમાં ગઝલ મારી અધુરી રહી ગઈ તારી યાદમાં કલ્પના ની પાંખે ઉડતી રહી તારી યાદમાં. પાંગરિયું પુષ્પ તારી પ્રીત નું તારી યાદમાં, સંવેદનાનો છોડ ઊગી નીકળ્યો તારી યાદમાં. તારા વિનાની ડંખે છે એકલતા મારી આંખોમાં, ભીની પાંપણ સારે છેઆંસુઓ તારી યાદમાં. સચવાયું નામ તારું હૃદયના ધબકારમાં, ધડકે છે હૃદય મારું સતત તારી યાદમાં. દિવસો વિતાવુ છું હું તારા આવવાની રાહમા, વિરહની વેદના ને સાચવી છે તારી યાદમાં. બિંદિયા જાની 'તેજબિંદુ'

Piyu soul

🌈✨ आज एक नई कहानी ने जन्म लिया है… ✨🌈 कभी आसमान को ध्यान से देखा है? कभी सोचा है… अगर बादल रंग चुरा लें तो दुनिया कैसी दिखेगी? मेरी नई कहानी “रंग चुराने वाले बादल” अब Matrubharti पर LIVE हो चुकी है 💖 ये सिर्फ एक कहानी नहीं है… ये एक एहसास है… एक ऐसी दुनिया जहाँ रंगों के पीछे छुपा है एक राज… 🌫️🎨 अगर आपको रहस्य, इमोशन और थोड़ी सी जादुई दुनिया पसंद है… तो ये कहानी आपके लिए ही है ✨ 👉 अभी पढ़ें और बताएं आपको कैसी लगी 👉 आपका एक feedback मेरे लिए बहुत मायने रखता है 💬 क्या आप तैयार हैं उस दुनिया में जाने के लिए जहाँ रंग भी सुरक्षित नहीं हैं…? 😮 इसको पढ़े अच्छे रिव्यू दे ओर कॉमेंट में जरूर बताएं कैसे लगी आप को ये कहानी और हा फोलो करना ना भूलें। – Piyu7soul ✍️ #NewStory #Matrubharti #WriterLife #HindiStory #MagicalStory#kids story

A R

तुम डरते हो सबको खोने से । तुम खो गए हो किसी को ध्यान भी है ।।

A R

मत मिला कर हमसे, अदाकार की तरह. @sayri king चेहरे पढ़ लेते हैं, हम अखबार की तरह...

Arun V Deshpande

#श्रीरामनवमी-काव्यपुष्प💐

Dr. Damyanti H. Bhatt

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर हार्दिक अभिनंदन। 🌹🌹🙏🌹🌹

Dr. Damyanti H. Bhatt

माॅ महागौर्यै नमः।🌹🌹🙏🌹🌹

Bindiya

चलो राम बने चलो हम भी राम बने! क्या हम राम बन सकते हैं? हां क्यों नहीं? राम बनने के लिए हमें राम के आदर्श को जीवन में अपनाने चाहिए। ऐसे तो हम सब भगवान श्री राम के बारे में बहोत कुछ जानते हैं। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। मानव अवतार में उनके आदर्श ही उनके व्यक्तित्व की पहचान है। भगवान श्री राम की मिशाल हमे आज भी दी जाती है। श्री राम का जीवन हमे संकट में धैर्य रखना वाणी में संयम और आचरण में शुद्धता के लिए प्रेरित करता है। श्री राम का आदर्श हमें संतुलन रखना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ परिवार और मूल्यों से जुड़े रहना सीखाता है। श्री राम की सत्य और धर्म निष्ठा आज की युवा पेढी के लिए ईमानदारी और नैतिकता का प्रतीक है। भगवान श्री राम सदाचारी, न्याय प्रिय, साहसी जैसे गुणों का आदर्श उदाहरण है। हम सभी को शांतिपूर्ण जीवन के लिए राम बनने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। इस कलयुग में राम बनना आसान नहीं है। उनके आदर्शों पर चलना आसान नहीं है। फिर भी चलो हम कोशिश करे राम बनने की, हमारे ये द्रढ निश्चय को तोड़ना आसान नहीं है। बिंदिया जानी 24/3 /26

p

College☺

Adv Arun Mishra

कभी कभी इन्सान ऐसी स्थिति में फंस जाता है , जहां उसे निर्णय लेने में बहुत ही दिक्कत होती एक तरफ उसका प्यार ओर दूसरी तरफ परिवार तब इंसान को क्या करना चाहिए प्यार को चुनना चहिए या परिवार कितने लोगों के पास यह स्थिति आई है एक तरफ लड़के के ऊपर परिवार की भी जिम्मेदारी है ,एक तरफ उसका प्यार को छोड़ना पड़ा दूसरी जगह सादी करनी पड़े तो लड़का उस समय किसे चुने क्या करे 🙏🙏🙏🙏

Piyu soul

“अगर आपको मजबूरी में शादी करनी पड़े… तो आप क्या करेंगे? 🤔” कॉमेंट करके जरूर बताएं और भार्गवी ने क्या किया वो जानने के लिए जरूर पढ़ें मेरी सीरीज झांसी: सौदा,कर्ज और बदला ।by piyu 7soul

Ajit

મહોબ્બતમાં પછાડેલા માથા એમને નાટક લાગ્યા...... મારા આંસુ એમને ક્યાંથી સાચા લાગે...... જિંદગી ની "યાદ"

kajal jha

मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मुझे Matrubharti से Golden Badge प्राप्त हुआ है ❤️ यह मेरे लिए सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि मेरी लेखन यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मैं अपने सभी पाठकों का दिल से धन्यवाद करती हूँ, जिनके प्यार और समर्थन से यह संभव हो पाया 🙏 #matrubharti #achievement #writing #storytelling https://www.matrubharti.com मुझे मातृभारती पर फोलो करें

Anup Gajare

"छह साल का बच्चा" ____________________________________________________ वास्तविक हकीकत क्या है कि सब बेखबर है वह डरे हुए खुद में ही सहमे पड़े रहते हैं। डर संक्रामक नहीं होता उसके वजूद का भी कोई मतलब नहीं भविष्य में पिरोया गए बीज उगने के चांस कम नहीं होते पर गर गर्मी ज्यादा हो। या उस साल बारिश न हो तो? भय के ये बीज दिमाग के अमिगडाला की रेत में ठीक से पनप नहीं पाते। क्या बात ये जानता है हर कोई गोया। सबकुछ फिर से बंद हो जाने की सिहरन ही रोंगटे खड़ा कर रही है भीड़ अनजान है अनजानता की गुफाओं में ही अजंता के लेनिया उकेरी जाती है। अंधकार अब नहीं खौफ देता उसका इलाज अब एक बटन है पर आग से जंगल आज भी तो जलते ही है न गोया। असुरक्षा सबने देखी है लगभग छह साल पहले को याद करो हां, गोया वही तो भीतर बसे इस अंधकार ने जन्म लिया था, वह कारागृह जिसमें हम दबे पड़े थे जहां घर की भीड़ इकठ्ठा थी झगड़े हो रहे थे। तो कुछ भीड़ का हिस्सा सड़क से होते हुए अपने घर जाने के लिए लालसाइयत था वहां जाकर बस अन्न की तलाश जैसे खत्म होनेवाली थी। वे लोग अपनी गुफाओं में लौट रहे थे रोटियों की चोरी आम बात हो गई थी। गोया डर वही पैदा हुआ तोतली जुबान से सबके सीने में गड्ढा बनाते हुए वही तो इस रोग की पहली सुरंग खोदी गई थी। किसी रेखा के नीचे आने का इंतज़ार यही डर की पहली मिट्टी थी। उसके बाद हर मनुष्य शिकार करने लगा लेकिन अपने अवजारों पर उसका यकीन कम हो गया। अब उसे पता नहीं कि इस रेखा के नीचे जो भूख रहती है उससे कैसे लड़ना चाहिए। भीख से भूख का सफर यही डर का हिस्सा है। वह छह साल का बच्चा अब भी वहीं खड़ा है रेखा के इस पार या शायद उस पार— उसे खुद भी नहीं पता। उसकी आँखों में कोई दर्शन नहीं कोई अमिगडाला नहीं सिर्फ एक खाली कटोरा है जिसमें वह आसमान भरने की कोशिश करता है। वह पूछता नहीं— क्योंकि सवाल पूछने के लिए शब्द चाहिए होते हैं और उसके पास सिर्फ आवाज़ है जो गले में अटक जाती है। भीड़ उसे देखती है पर पहचानती नहीं जैसे वह भीड़ का हिस्सा नहीं बल्कि उसका साया हो। वह खेलना चाहता है— पर खेल अब शिकार में बदल चुका है जहाँ खिलौने नहीं रोटियाँ छुपाई जाती हैं। उसकी हँसी किसी पुरानी गुफा में उकेरी गई अधूरी आकृति जैसी है जिसे कोई इतिहासकार कभी पढ़ नहीं पाएगा। और वह डर— जिसे तुम कहते हो कि संक्रामक नहीं होता— वह बच्चे के भीतर धीरे-धीरे भूख की भाषा सीख रहा है। अब वह डरता नहीं वह बस देखता है— कि कैसे एक आदमी दूसरे आदमी को रोटी से मापता है और इंसान रेखाओं में टूट जाता है। उसके छोटे हाथ अब फैलते नहीं सिमटते हैं— जैसे दुनिया को पकड़ने की जगह वह खुद को बचा रहा हो। और एक दिन— बिना किसी शोर के बिना किसी घोषणा के— वह बच्चा भीड़ में शामिल हो जाएगा। वही भीड़ जो अनजान है और अनजान ही रहना चाहती है। फिर कोई और छह साल का बच्चा उसी जगह खड़ा होगा एक नए कटोरे के साथ और आसमान फिर से थोड़ा छोटा हो जाएगा। अब उसके पास गैस सिलेंडर या शायद खाना बनाने के लिए तेल ही बचा न हो और उसके पापा की गाड़ी में पेट्रोल होने के चांस बहुत कम है। यही डर है है न? जो आहिस्ता-आहिस्ता हकीकत में तब्दील हो रहा है। ______________________________________________

Sonam Brijwasi

“तुझे चाहा है ऐसे जैसे हक़ हो मेरा, कोई और देखे तुझे ये भी मंज़ूर नहीं मेरा… मोहब्बत है तुझसे, पर थोड़ी सी ज़िद भी है, तू सिर्फ मेरी है—ये दिल का फ़ैसला भी है…”

Aruna N Oza

🏃🏃🏃🙏🙏

vrinda

n - vrinda

Aruna N Oza

🙏🙏

Falguni Dost

દોસ્ત! ખુદમાં વસતા રાવણને હરાવી રામ ને જીવંત કરો ત્યારે ખરી રામનવમી. રામનવમી પર્વની માતૃભારતી પરિવારના દરેક સદસ્યને ખૂબ ખૂબ શુભકામના 🙏🏻

jighnasa solanki

મર્યાદા પુરુષોત્તમ પ્રભુ શ્રીરામના જન્મોત્સવની આપ સૌને હાર્દિક શુભકામનાઓ 💐🙏 🙏શ્રીરામ જય રામ જય જય રામ🙏 🙏🚩જય શ્રીરામ 🚩🙏 🚩સનાતન ધર્મકી જય 🚩

Vrishali Gotkhindikar

राम जन्मला ग सखी

Ajit

સપના સજાવ્યા પણ તે ને તોડ્યા પણ તે માત્ર મારી તો હા માં હા જ હતી.... જિંદગી ની યાદ 😭😭😭🙏🙏🙏

Abha Dave

https://youtube.com/shorts/QgBHJO62KGg?si=eK1S4FSZWJZuli1C

Ajit

😭😭😭😭🙏🙏🙏🙏

Shailesh Joshi

1M સુધી પહોંચાડવા બદલ... આભાર સહ Matrubharti ની પૂરી ટીમ, અને સૌ વાચક મિત્રોને મારા પ્રેમ અને લાગણીભર્યા, દિલથી નમસ્કાર🙏

Shailesh Joshi

લગ્ન કરવા માટે ખાલી યોગ્ય ઉંમર હોવી એ પૂરતુ નથી, પરંતુ લગ્ન પછીના જીવનની તમામ પ્રકારની સારી નરસી બાબતોના પૂરતા જ્ઞાનની સાથે-સાથે, ભવિષ્યમાં આવવાવાળી દરેક પરિસ્થિતિ સામે, સાથે મળીને લડવાની ક્ષમતા, અને છતાંય જો ન પહોંડી વળાય, તો એવી પરિસ્થિતિઓને ખમી લેવાની તૈયારી હોવી, અતિ થી પણ અતિ આવશ્યક હોય છે, નહીં તો નહીં કે લગ્નગ્રંથિથી જોડાયેલ બે વ્યક્તિ, પરંતુ એની સાથે-સાથે એ બંનેના પરિવારને પણ દુ:ખી થવાનો વારો આવતો હોય છે. - Shailesh Joshi

Mara Bachaaaaa

उलझन में है वो सच का हाथ थामे या सपनों की दुनिया का, हमारी भूल उन्हें इस सोच तक ले गई। - Mara Bachaaaaa

Dada Bhagwan

Jai Shree Ram #lordrama #ramnavmi #ramnavmi #jaishriram #DadaBhagwanFoundation

Imaran

बढ़ती उम्र में ये दिल न जाने क्यों जवान हो रहा है, पहले था जिद्दी मिज़ाज, अब ये आसान हो रहा है.. जब थी उम्र बहकने की, तो लगा नहीं किसी से ये, अब सम्भलने की उम्र में ये दिल शैतान हो रहा है ❤️imran ❤️

Vishakha Mothiya

રામ નવમીની સૌને શુભકામનાઓ 🚩🏹 રામ - આ બે અક્ષરના નામમાં જાણે સમગ્ર જગત સમાઈ ગયું હોય એવું લાગે. રામ એટલે મર્યાદા અને સંયમનો પર્યાય. અખૂટ શક્તિ પણ સંયમ ભારોભાર. મુખ પર છલકાતું મૌન સ્મિત. આદર્શ રાજાનું ઉત્તમ ઉદાહરણ. જ્યાં છળ કપટનું નામોનિશાન નહીં. જેનું યુદ્ધ પણ નિયમોનુસાર આદર્શ હતું. *"ચૌદ વર્ષ, વન પણ જાણે વૈકુંઠ બની ગયું હતું."* પ્રકૃતિના દરેક જીવો તેનો પરિવાર બની ગયા હતા. - વિશાખા મોઠિયા

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

શબ્દો પાસે અર્થ જરૂર હોય છે પણ , અર્થઘટન તો મન પાસે રહેલા વિચારો થી જ થાય છે! - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

p

kuch log mujhe msg kr rhe hai mat kro mere bare me jan ne hai Mai yaha bhi bta skti hu name preeti student hu middle class family Papa mere ka business hai ab msg na ho😀

Kiran

तुम तो शांत रहो मित्र, क्योंकि अशांत तो पूरी दुनिया है। - Kiran

mahadev ki diwani

चैत्र महाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿हर हर महादेव 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿जय माता दी 🙏🏿🙏🏿🌹🙏🏿🙏🏿 - mahadev ki diwani

softrebel

शीर्षक: दिल दरिया में..। किसी के आलिंगन की छाँव में सोना कितना सुखदायी होता है, न न खौफ बाहरी आक्रांताओं का, न ही नींद टूट जाने की कोई बेचैन-सी परेशानी। कटती हैं रातें बिना मच्छर, बिना शोर के, और हो जाती है सारी रात रूमानी। चिंताओं की जब सज जाती हैं चिताएँ, संकोच नहीं रहता कि कोई हमसे कर रहा है कोई बेईमानी। बस वो उसकी धड़कनें, वो गर्म स्पर्श, और ढेर सारा सुकून। जैसे दिल दरिया में और दरिया में पानी। softrebel #matrubharti #hindi #love

Rashmi Dwivedi

एक बात के लिए मैं तुम्हारी बहुत एहसानमंद हूं महादेव आपने मुझे यह सबक सिखाया है, महादेव कि जिंदा रहने के लिए अपने सिवाय किसी और का होना जरूरी नहीं होता हम जिनके साथ जीना चाहते हैं उनके बगैर भी जी सकते हैं और जी लेते हैं।इंसान अपने स्वार्थ के हिसाब से रहता है और छोड़ कर चला जाता है उसके मन का हो तो वह साथ रहेगा उसके मन का ना हो तो वह तुरंत दूसरे का हाथ थाम लेता है कभी मजबूरी बता के कभी मन के मैल के कारण । हर हर महादेव ❤️

A R

मलाल हमको है कि हम मना नहीं पाए, मलाल उसको भी होगा कि मान जाना था..."

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास गाँव और शहर गाँव और शहर के बीच में पीस कर रह गया आदमी l आज़के जग के पीछे मत भागों ये कह गया आदमी ll दुनिया की चकाचौंध देखकर सब पाने की ख्वाईश ओ l सुख की चाहत में बहुत से ग़म भी सह गया आदमी ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Nilesh Rajput

શું માતાપિતાનો પ્રેમ યુવાનીના પ્રેમ જેટલો સમાન હોય છે? જો નહિ તો આ બન્ને પ્રેમની તુલના કઈ રીતે થઈ શકે? દરેક લવ મેરેજના કિસ્સાઓમાં સમાજ તરફથી એક વાત વારંવાર સાંભળવા મળે છે કે, " બાળકો બે-ચાર વર્ષના પ્રેમ સામે વીસ વર્ષના પ્રેમને છોડીને ભાગી ગયા....! માતાપિતાનો પ્રેમ વિજાતીય વ્યક્તિ સાથે જોડાયેલા પ્રેમ કરતા અલગ હોય છે.. યુવાનીમાં જે પ્રેમની ભૂખ બાળકમાં જાગે છે એ પ્રેમ માતપિતા ન આપી શકે...પ્રેમ શબ્દ એક છે પરંતુ એના રૂપ અલગ અલગ હોય છે... જીવનમાં દરેક વ્યક્તિ ને દરેક પ્રકારના પ્રેમની જરૂર હોય છે...નાનપણમાં માતાપિતાના પ્રેમની, યુવાનીમાં લાઇફ પાર્ટનરના પ્રેમની અને ઘડપણમાં બાળકોના પ્રેમની.... “પ્રેમની સરખામણી ત્યારે જ થાય, જ્યારે તેનો સ્વભાવ એકસરખો હોય, અહીં તો પ્રેમના અર્થ જ અલગ છે." ઘણા અંશે માતાપિતા પણ સાચા છે.. કારણ કે તેમના માટે આ માત્ર સંબંધ નહીં, પણ સંતાનનું ભવિષ્ય અને સુરક્ષા જોડાયેલી હોય છે. લગ્ન જેવો એટલો મહત્વનો નિર્ણય માતપિતાની પરવાનગી વિના ન લેવો જોઈએ..પણ શું માતાપિતા ઘરમાં લેવાતા નિર્ણયોમાં બાળકોને સામેલ કરે છે? શું એના મંતવ્યો વિશે જાણવાની કોશિશ કરે છે? શું લગ્ન જેવા અંગત નિર્ણયોમાં બન્ને બાળકોના સ્વભાવને મેચ કરવામાં આવે છે? નહિ.... “અહીં લગ્ન પહેલા બે પરિવારો વચ્ચે થાય છે, અને અંતે બન્ને બાળકોના લગ્ન થાય છે…” ફળને ખરાબ કહીને ફરિયાદ કરતા પહેલા, એ પણ સમજવું જરૂરી છે કે એ ફળ એ જ વૃક્ષમાંથી આવ્યું છે. અહીંયા સમાજને સમજવાની જરૂર નથી પરંતુ સમાજ ને સમજવાની જરૂર છે.... - Nilesh Rajput

p

no matter how cool ,talented,educated or rich you think you are how you treat people, tells everything about you ☺ good morning guys🌄

kattupaya s

Good morning friends..

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

सेवक हूँ मैं ईश का, नहीं तनिक परवाह। उम्र ढली अब जगत से, नहीं मुझे कुछ चाह।। दोहा-- 4६१ (नैश के दोहे से उद्धृत) -------गणेश तिवारी 'नैश'

Sonu Kumar

यदि पीएम जूरी कोर्ट का प्रस्तावित कानून गेजेट में छाप देता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसे असंवैधानिक बता कर रद्द कर देता है, तो क्या किया जा सकता है ? https://hi.quora.com/q/gtevjihzvzgehiip/जूरी-कोर्ट-शेषन-हायर-सुप्रीम-कोर्ट-में-जूरी-अदालतो-की-स्थापना . जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून की कोई भी धारा भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद एवं भारत में लागू किसी भी क़ानून की किसी भी धारा का उलंघन नहीं करती है। यहाँ तक कि पीएम को जूरी कोर्ट गेजेट में निकालने के लिए लोकसभा की अनुमति लेने की भी जरूरत नहीं है। पीएम इस पर हस्तक्षर करके सीधे गेजेट में छाप सकता है। किन्तु यह तकनिकी बिंदु है, व्यवहारिक नहीं। . व्यवहारिक बिंदु यह है कि यदि पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छापता है तो सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों के पास इस क़ानून को खारिज करने की विवेकाधीन शक्ति है। और इसीलिए यह तय है कि कोई न कोई बहाना बनाकर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज इसमें अडंगा जरुर लगायेंगे। . और तब पीएम निम्नलिखित में से कोई या क्रमिक रूप से सभी कदम उठा सकता है : . (i) पीएम गेजेट में सुप्रीम कोर्ट जज पर वोट वापसी की प्रक्रिया छापेगा। वोट वापसी आने के बाद भारत के नागरिक अमुक सुप्रीम कोर्ट जज को नौकरी से निकाल कर किसी ऐसे व्यक्ति को यह नौकरी दे देंगे जो जूरी कोर्ट क़ानून में अडंगा नहीं लगाए। (ii) यदि सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्ट जज वोट वापसी का क़ानून भी ख़ारिज कर देता है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज के खिलाफ संसद में महाभियोग लाएगा। पीएम महाभियोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को नौकरी से निकालकर अपने किसी भी वफादार को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है। (iii) यदि महाभियोग गिर जाता है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के माता-पिता, पुत्र-पुत्री, भाई-भतीजो आदि के खिलाफ सीबीआई लगाकर उलटे सीधे मुकदमे कायम करेगा और उन्हें जेल में डाल देगा। पीएम इसके लिए लोकसभा के प्रस्ताव का इस्तेमाल करेगा। ज्ञातव्य है कि लोकसभा को यह शक्ति है कि वह देश के किसी भी व्यक्ति को बिना कोई मुकदमा चलाये जेल में डाल सकती है। और इसकी अपील अदालत में नहीं की जा सकती। (iv) पीएम गेजेट में जनमत संग्रह की प्रक्रिया छापेगा, और देश के सामने यह प्रश्न रखेगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए। यदि 51% मतदाता जनमत संग्रह में “हाँ” दर्ज कर देते है तो पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को निकाल देगा। जनमत संग्रह में यदि कोई प्रस्ताव पास हो जाता है तो फिर उसे लोकसभा या राज्यसभा द्वारा रोका नहीं जा सकता। (v) यदि जनमत संग्रह के पास होने के बावजूद सांसद इसमें अडंगा करते है तो पीएम सांसदों पर वोट वापसी का क़ानून छापेगा ताकि नागरिक जूरी कोर्ट का विरोध कर रहे सांसदों को निकाल कर नए सांसद भेज सके। (vi) यदि सांसद वोट वापसी के दायरे में आने से इनकार करते है तो पीएम लोकसभा भंग करके नए चुनावो की घोषणा करेगा। नए चुनावों में वे सभी सांसद हार जायेंगे जो जूरी कोर्ट के विरोध में थे, और वे प्रत्याशी जीत कर संसद में जायेंगे जो जूरी कोर्ट के समर्थन में है। . ये सब सीधे तरीके है। इसके अलावा पीएम टेढ़े तरीको का इस्तेमाल करके भी सुप्रीम कोर्ट जज को काबू कर सकता है : . पीएम इमरजेंसी का प्रस्ताव पास करेगा, और सुप्रीम कोर्ट बंद करवा देगा। आपातकाल लगाने के बाद पीएम जीतने मर्जी उतने क़ानून छाप सकता है और सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों का रिव्यू नहीं कर सकता। आपातकाल लगाने के बाद पीएम सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को उसके रिश्तेदारों के एनकाउन्टर वगेरह करने की धमकी भी दे सकता है। पीएम के पास पुलिस और मिलिट्री होती है। . अत: यदि पीएम बल प्रयोग करने पर आये तो सुप्रीम कोर्ट जज को 2 मिनिट में ठिकाने कर सकता है। हालांकि मेरे विचार में पीएम को आपातकाल लगाकर इस तरह की हिंसात्मक कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है, और न ही उसे इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। ऐसे कई सीधे और कानूनी तरीके मौजूद है जिनका इस्तेमाल करके पीएम लोकतान्त्रिक तरीके से सुप्रीम कोर्ट जज को चित कर सकता है। . यदि पीएम लोकतान्त्रिक तरीके से यह स्थापित कर देता है कि, सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्ट जज नागरिको के बहुमत की मंशा के खिलाफ जा रहा है तो अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी(*) सक्रीय होकर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज से मुलाक़ात करने को तत्पर हो जायेंगे। और इससे पहले कि अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सुप्रीम कोर्ट जज से मुलाक़ात करें सुप्रीम कोर्ट जज या तो इस्तीफा दे देगा या फिर जूरी कोर्ट में अडंगा लगाना बंद कर देगा। . तो मेरे विचार में सही तरीका यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज जूरी कोर्ट क़ानून में अडंगा लगाते है तो पीएम इस स्थिति को लोकतान्त्रिक तरीके से निपटाए, बल प्रयोग से नहीं। . (*) अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी लोकतंत्र के रक्षक है। जब सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति स्पष्ट बहुमत के खिलाफ जाता है तो जिन भी लोगो में अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी का अंश है वे लोकतन्त्र की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाते है। यहाँ इस बात पर ध्यान देना जरुरी है कि अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी अपने विवेक से सही गलत का फैसला नहीं करते। वे बस लोकतान्त्रिक मूल्यों का पालन करते है। अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी, अहिंसामूर्ती महात्मा मदन लाल जी धींगरा, अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद आदि उधम सिंह जी के ही प्रकार थे, और गोरो द्वारा लोकतंत्र की अवहेलना किये जाने के कारण वे अपने अपने तरीके से विभिन्न परिस्थितियों में गोरो से मुलाक़ात करते रहते थे। . --------- . काम की बात : लोकतान्त्रिक तरीके से पीएम सिर्फ तभी आगे बढ़ पायेगा जब कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग जूरी कोर्ट क़ानून का समर्थन करें। यदि देश के नागरिको को जूरी कोर्ट के क़ानून के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और न ही कार्यकर्ताओ में इस क़ानून का समर्थन मौजूद है, तो पीएम को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा, और पीएम सुप्रीम कोर्ट जज के आगे टिक नहीं पायेगा। . वजह यह है कि सुप्रीम कोर्ट जज को पेड मीडिया के प्रायोजको का समर्थन प्राप्त है। अत: जब सुप्रीम कोर्ट जज जूरी कोर्ट को ख़ारिज करेगा तो देश के सभी मीडिया हाउस, सभी पेड मीडिया पार्टियाँ एवं उनके नेता, सभी सांसद, सभी पेड बुद्धिजीवी, सभी पेड संविधान विशेषग्य, सभी पेड कलाकार आदि सुप्रीम कोर्ट जज के पक्ष में एवं जूरी कोर्ट केविरोध में खड़े हो जायेंगे। . आम असूचित नागरिक पेड मीडिया द्वारा संचालित इस गिरोह की चपेट में आकर पीएम के कदम का विरोध करना शुरू कर देंगे, या कम से कम पीएम का समर्थन नहीं करेंगे। ऐसी स्थिति में पीएम इस गिरोह से निपट नहीं सकता। पीएम इस गैंग से सिर्फ तब निपट सकता है जब पीएम को कम से कम 8 से 10 लाख ऐसे कार्यकर्ताओ का समर्थन हासिल हो, जो जूरी कोर्ट के ड्राफ्ट के समर्थन में है, और पेड मीडिया की गिरफ्त से बाहर है। . सार यह है कि, जूरी कोर्ट जैसा क़ानून पीएम के चाहने भर से रातों रात देश में लागू नहीं किया जा सकता। इसका सिर्फ एक रूट यह है कि बिना पेड मीडिया की सहायता के भारत में कम से कम 10 लाख कार्यकर्ताओ को जूरी कोर्ट क़ानून का समर्थन करने के लिए तैयार किया जाए। और 10 लाख कार्यकर्ताओं तक पहुँचने के लिए कम से कम 10 करोड़ नागरिको तक जूरी कोर्ट ड्राफ्ट की जानकारी पहुंचानी होगी। वो भी पेड मीडिया के बिना। जाहिर है, यह काफी दुरूह एवं लम्बी प्रक्रिया है। यह काम तब और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है, जब पेड मीडिया के प्रायोजक जूरी ट्रायल के बारे में गलत एवं अधूरी सूचनाएं देकर लोगो को लगातार भ्रमित करते रहने वाले है। . जूरी कोर्ट जैसे क़ानून को गेजेट में छपवाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है। इसे पढ़े -- Pawan Kumar Sharma का जवाब - क्या भारत सुपर पावर बन सकता है? कैसे और कब? नागरिकों की क्या भूमिका होनी चाहिए? . मेरा मानना है कि, जूरी ट्रायल मानव जाति द्वारा खोजा गया एक मात्र लंगर है जो सरकार को संविधान एवं इसके सिद्धांतो का पालन करने के लिए सफलतापूर्वक बाध्य कर सकता है - थॉमस जेफरसन ( अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणा पत्र के लेखक ) . -----------

Rashmi Dwivedi

अच्छे समय से ज्यादा अच्छे इंसान के साथ रिश्ता रखो अच्छा इंसान अच्छा समय ला सकता है लेकिन अच्छा समय अच्छा इंसान नहीं ला सकता। हर हर महादेव ❤️ - Rashmi Dwivedi

महेश रौतेला

बहुत समय से मैं भगवान की तरफ हूँ, आँधी हो,तूफान हो युद्ध हो,महायुद्ध हो, अमीरी हो,गरीबी हो मैं भगवान की तरफ रहता हूँ। बाढ़ हो,सूखा होः गर्मी हो, ठंड हो या वसंत हो मेरी आशा-आकांक्षा उनमें रहती है। गीता पढ़ता हूँ लोक,परलोक की बातें समझ लेता हूँ, "जो पहले ही मारे जा चुके हैं उन्हें मारने का निमित्त मात्र बन भगवान की ओर रहता हूँ।" संशय से बाहर आने के लिए कर्म बन जाता हूँ, शायद भगवान ऐसा ही चाहते हैं। **** *** महेश रौतेला

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (47) की व्याख्या "उद्वत्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतव:" --ऋगुवेद--1/50/10 अर्थ --सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। “उद्वत्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः” (ऋग्वेद 1/50/10)—यह अत्यंत सुंदर और गहन अर्थ वाला है। शब्दार्थ (सरल रूप में)- उद्वत्यम् = ऊपर उठता हुआ जातवेदसम् = सबको जानने वाला (यहाँ सूर्य) देवम् = प्रकाशमान/दैवी सत्ता वहन्ति = लेकर आते हैं केतवः = किरणें (प्रकाश की धाराएँ) भावार्थ- सूर्य की किरणें उस सर्वज्ञ, प्रकाशमय देव (सूर्य) को ऊपर उठाकर प्रकट करती हैं और संसार में प्रकाश फैलाती हैं। गूढ़ अर्थ (आध्यात्मिक दृष्टि से) दिया हुआ अर्थ — “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — बिल्कुल सही और व्याख्यात्मक है। इस मंत्र का संकेत यह है कि: सूर्य = परम चेतना / ज्ञान का स्रोत किरणें = ज्ञान, विवेक, प्रेरणा जैसे सूर्य की किरणें अंधकार हटाती हैं, वैसे ही ज्ञान अज्ञान (अंधकार) को दूर करता है। वेदों में प्रमाण-- 1. ऋग्वेद-- 1/50/10 “उद्वत्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः” भावार्थ: सूर्य की किरणें उस प्रकाशस्वरूप देव को ऊपर उठाकर प्रकट करती हैं और संसार को प्रकाशित करती हैं। यह स्पष्ट करता है कि किरणें ज्ञान का प्रसार करती हैं। 2. ऋग्वेद-- 1/50/1 दृष्टे विश्वाय सूर्यम्॥” भावार्थ: सूर्य उदित होकर सबको देखने योग्य बनाता है। यहाँ सूर्य को दृष्टि (ज्ञान) देने वाला कहा गया है। 3. ऋग्वेद-- 10/37/1 “सूर्यो आत्मा जगतस्तस्थुषश्च” भावार्थ: सूर्य चल-अचल जगत का आत्मा है। इसका संकेत है कि सूर्य चेतना और ज्ञान का मूल स्रोत है। 4. यजुर्वेद-- 20/21 “चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः…” भावार्थ: सूर्य देवताओं का नेत्र है। यहाँ सूर्य को दिव्य दृष्टि (ज्ञान) का प्रतीक बताया गया है। 5. अथर्ववेद- 13/2/35 “सूर्य आत्मा जगत:” भावार्थ: सूर्य समस्त जगत का आत्मा है। यह भी दर्शाता है कि सूर्य जीवन और ज्ञान का केंद्र है। निष्कर्ष-- वेदों में बार-बार यह बात आती है कि: सूर्य = प्रकाश + चेतना + ज्ञान किरणें = ज्ञान का प्रसार अंधकार = अज्ञान इस प्रकार दिया हुआ अर्थ— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — पूरी तरह वैदिक प्रमाणों से समर्थित है। उपनिषदों से प्रमाण-- 1. ईशोपनिषद-- (मंत्र 15) “हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्। तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥” भावार्थ: हे सूर्य! आप सत्य के मुख को स्वर्णिम आवरण से ढँके हुए हैं, कृपया उसे हटाइए ताकि मैं सत्य का दर्शन कर सकूँ। यहाँ सूर्य से सत्य (ज्ञान) को प्रकट करने की प्रार्थना की गई है। 2. कठोपनिषद-- (2/2/15) “न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥” भावार्थ: वहाँ सूर्य, चंद्र, तारे या बिजली भी प्रकाश नहीं देते; बल्कि उसी परमात्मा के प्रकाश से सब कुछ प्रकाशित होता है। यहाँ स्पष्ट है कि सूर्य का प्रकाश भी अंतिम ज्ञान (ब्रह्म) का प्रतीक है। 3. छान्दोग्य उपनिषद-- (3/13/7) “य एष आदित्ये पुरुषो दृश्यते…” भावार्थ: जो पुरुष (आत्मा) सूर्य में दिखाई देता है, वही सबके भीतर भी है। सूर्य को आत्मा और चेतना (ज्ञान) का प्रतीक बताया गया है। 4. बृहदारण्यक उपनिषद- (5/15/1) “असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥” भावार्थ: असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश (ज्ञान) की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर ले चल। यहाँ “ज्योति” स्पष्ट रूप से ज्ञान और जागरण का प्रतीक है। 5. मुण्डक उपनिषद (2/2/10) “ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद्…” भावार्थ: यह संपूर्ण जगत ब्रह्मरूप प्रकाश से ही प्रकाशित है। यह बताता है कि सच्चा प्रकाश = ब्रह्मज्ञान है। निष्कर्ष-- उपनिषदों में बार-बार यह सिद्ध किया गया है कि: सूर्य और उसका प्रकाश = ज्ञान का प्रतीक ज्योति = आत्मिक जागृति और सत्य अंधकार = अज्ञान इस प्रकार आपका भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — उपनिषदों के गूढ़ दर्शन से पूर्णतः प्रमाणित होता है। पुराणों से प्रमाण -- 1. विष्णु पुराण-- “सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च” भावार्थ: सूर्य सम्पूर्ण जगत (चल-अचल) का आत्मा है। यहाँ सूर्य को जीवन और चेतना (ज्ञान) का मूल स्रोत माना गया है। 2. भागवत पुराण-- (श्रीमद्भागवत) “नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे…” भावार्थ: उस सविता (सूर्य) को नमस्कार, जो सम्पूर्ण जगत का एकमात्र नेत्र है। सूर्य को “जगत का नेत्र” कहा गया है, अर्थात् वह ज्ञान और दृष्टि देने वाला है। 3. मार्कण्डेय पुराण-- इसमें सूर्य को अज्ञान का नाश करने वाला बताया गया है। भावार्थ -- सूर्य अपनी किरणों से अंधकार को नष्ट करता है, उसी प्रकार वह जीवों के अज्ञान को भी दूर करता है। यह सीधा संकेत है कि सूर्य = ज्ञान का प्रकाश। 4- ब्रह्माण्ड पुराण_ एक प्रचलित श्लोक (सार रूप में उद्धृत): “सूर्यः सर्वजगतां चक्षुः प्रकाशकः परः स्मृतः।” भावार्थ: सूर्य समस्त जगत का नेत्र और सर्वोच्च प्रकाशक है। 5-. गरुड़ पुराण-- गरुड़ पुराण (विशेषतः आचार/धर्म काण्ड) में सूर्य को पाप और अज्ञान का नाश करने वाला बताया गया है। एक प्रचलित श्लोक (सार रूप में उद्धृत): “सूर्यप्रकाशेन नश्यति तमो यथा भुवि। तथा ज्ञानप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानमात्मनः॥” भावार्थ: जैसे सूर्य के प्रकाश से अंधकार नष्ट होता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान नष्ट‌‌ हो जाता है। गीता में प्रमाण-- 1. भगवद्गीता --5/16 “ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः। तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥” भावार्थ: जिनका अज्ञान ज्ञान द्वारा नष्ट हो गया है, उनका ज्ञान सूर्य के समान परम तत्व को प्रकाशित करता है। यहाँ स्पष्ट कहा गया है: ज्ञान = सूर्य जैसा प्रकाश। 2. भगवद्गीता-- 13/33 “यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः। क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥” भावार्थ: जैसे एक सूर्य पूरे जगत को प्रकाशित करता है, वैसे ही आत्मा पूरे शरीर को प्रकाशित करती है। सूर्य का प्रकाश = चेतना और ज्ञान का प्रतीक। 3. भगवद्गीता-- 15/12 “यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्…” भावार्थ: सूर्य में स्थित जो तेज सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, वह मेरा ही (परमात्मा का) तेज है। सूर्य का प्रकाश = ईश्वरीय ज्ञान और शक्ति। 4. भगवद्गीता-- 10/11 “तेषामेवानुकम्पार्थमहं अज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥” भावार्थ: मैं करुणा से उनके अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान के दीपक से नष्ट करता हूँ। यहाँ “दीप/प्रकाश” = ज्ञान और “अंधकार” = अज्ञान। महाभारत में प्रमाण -- 1. उद्योग पर्व (विदुर नीति) 34.17 “ज्ञानं हि मनुष्याणां प्रकाशः परिकीर्तितः।” भावार्थ: ज्ञान मनुष्यों का प्रकाश कहा गया है। यह सीधा और स्पष्ट प्रमाण है: ज्ञान = प्रकाश (सूर्य के समान) 2. शान्ति पर्व 238.11 “अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै…” भावार्थ: जो अज्ञान रूपी अंधकार से अंधे हुए व्यक्ति की आँखें ज्ञानरूपी अंजन से खोलता है… यहाँ: अज्ञान = अंधकार (तिमिर) ज्ञान = आँख खोलने वाला प्रकाश 3. शान्ति पर्व-- 239.31 “ज्ञानदीपेन भास्वता…” भावार्थ: ज्ञान का दीपक प्रकाश देता है। यहाँ: ज्ञान = दीपक (प्रकाश स्रोत) 4. वन पर्व-- 313.117 “यथा सूर्यः प्रकाशेन नाशयत्यन्धकारकम्। तथा ज्ञानं विनाशयत्यज्ञानं हि देहिनाम्॥” भावार्थ: जैसे सूर्य अपने प्रकाश से अंधकार को नष्ट करता है, वैसे ही ज्ञान अज्ञान को नष्ट कर देता है। यह आपके भाव का सबसे सटीक प्रमाण है: सूर्य का प्रकाश = ज्ञान का प्रतीक 5. शान्ति पर्व ---12.217.14 (सारांश रूप) “ज्ञानं परमं बलम्।” भावार्थ: ज्ञान ही सर्वोच्च शक्ति है। ज्ञान को जीवन का मार्गदर्शक (प्रकाश) माना गया है। निष्कर्ष-- महाभारत में स्पष्ट रूप से सिद्ध है कि: ज्ञान = प्रकाश (दीप, सूर्य, ज्योति) अज्ञान = अंधकार (तिमिर) ज्ञान का उदय = अंधकार का नाश इस प्रकार आपका मूल भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — महाभारत के श्लोकों से प्रत्यक्ष रूप में प्रमाणित होता है। स्मृतियों में प्रमाण -- 1. मनुस्मृति (अध्याय- 2, श्लोक- 15) “वेदोऽखिलो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।” भावार्थ: समस्त वेद धर्म का मूल हैं और उन्हें जानने वालों की स्मृति और आचरण भी। यहाँ वेद/ज्ञान को ही धर्म का आधार (प्रकाश) माना गया है— जो जीवन को प्रकाशित करता है। 2. मनुस्मृति (अध्याय 4, श्लोक 138) “नास्ति विद्यासमं चक्षुः नास्ति सत्यसमं तपः।” भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है और सत्य के समान कोई तप नहीं। यहाँ स्पष्ट: विद्या (ज्ञान) = चक्षु (प्रकाश) 3. याज्ञवल्क्य स्मृति (अध्याय- 1, श्लोक- 3) “वेदो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।” भावार्थ: वेद धर्म का मूल है, और स्मृति तथा सदाचार भी। यहाँ भी ज्ञान को जीवन का मार्गदर्शक (प्रकाश) माना गया है। 4. याज्ञवल्क्य स्मृति (अध्याय -3, श्लोक- 56) “ज्ञानं तु परमं प्रकाशं।” (सारतः) भावार्थ: ज्ञान ही सर्वोच्च प्रकाश है। यह सीधा सिद्धांत है: ज्ञान = प्रकाश 5. नारद स्मृति (अध्याय 1, श्लोक 6) “धर्मशास्त्रं तु विज्ञेयम्।” भावार्थ: धर्मशास्त्र को जानना चाहिए। यहाँ “जानना (ज्ञान)” ही मार्गदर्शक है— जो अज्ञान (अंधकार) को दूर करता है। 6. पराशर स्मृति- (अध्याय- 1, श्लोक- 24) “ज्ञानदीपः प्रकाशो हि पापान्धकारनाशनः।” भावार्थ: ज्ञान का दीपक पाप और अंधकार का नाश करने वाला प्रकाश है। निष्कर्ष-- स्मृतियाँ में यह स्पष्ट सिद्धांत मिलता है: विद्या/ज्ञान = चक्षु / प्रकाश अज्ञान = अंधकार ज्ञान जीवन को प्रकाशित करता है (सूर्य की किरणों की तरह) इस प्रकार आपका मूल भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — स्मृतियों के शास्त्रीय सिद्धांतों से भी प्रमाणित होता है। नीति ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. विदुर नीति_ (महाभारत, उद्योग पर्व 33/6) “न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा न ते वृद्धा ये न वदन्ति धर्मम्। न स धर्मो यत्र न सत्यमस्ति न तत्सत्यं यच्छलेनाभ्युपेतम्॥” भावार्थ: जहाँ ज्ञानी (वृद्ध) नहीं, वह सभा नहीं; और जो धर्म नहीं बताते, वे वृद्ध नहीं। जहाँ सत्य नहीं, वहाँ धर्म नहीं। यहाँ सत्य (ज्ञान) को ही जीवन का प्रकाश माना गया है। 2. विदुर नीति-- (महाभारत, उद्योग पर्व 34/17) “ज्ञानं हि मनुष्याणां प्रकाशः परिकीर्तितः।” भावार्थ: ज्ञान मनुष्यों का प्रकाश कहा गया है। यह सीधा प्रमाण है: ज्ञान = प्रकाश 3. चाणक्य नीति (अध्याय 5, श्लोक 16) “नास्ति विद्यासमं चक्षुः नास्ति सत्यसमं तपः। नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥” भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है। यहाँ स्पष्ट: विद्या (ज्ञान) = चक्षु (प्रकाश) 4. चाणक्य नीति (अध्याय-- 1, श्लोक-- 3) “अविद्या जीवितं शून्यं...” भावार्थ: अज्ञान से जीवन शून्य (अंधकारमय) हो जाता है। यहाँ: अविद्या = अंधकार विद्या = प्रकाश 5. हितोपदेश-- (मित्रलाभ, श्लोक 1) “विद्या मित्रं प्रवासे…” भावार्थ: विद्या (ज्ञान) मनुष्य का सच्चा मित्र है। ज्ञान ही मार्गदर्शन करता है— जैसे प्रकाश मार्ग दिखाता है। 6. पंचतंत्र-- (सामान्यतः उद्धृत श्लोक) “विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।” भावार्थ: विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप और छिपा हुआ धन है। ज्ञान ही जीवन को प्रकाशित करता है। निष्कर्ष-- नीति ग्रंथ में यह सिद्ध होता है: विद्या/ज्ञान = चक्षु / प्रकाश अविद्या = अंधकार ज्ञान जीवन को उसी प्रकार प्रकाशित करता है जैसे सूर्य की किरणें जगत को प्रकाशित करती हैं। वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण और गर्ग संहिता में प्रमाण-- 1. रामायण (वाल्मीकि रामायण) (क) युद्धकाण्ड – आदित्य हृदय स्तोत्र (अध्याय 105, श्लोक 1) “ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥” (प्रसंग प्रारम्भ) (ख) वही – श्लोक 9–10 “सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः। एष देवासुरगणान् लोकान् पाति गभस्तिभिः॥” भावार्थ: यह सूर्य समस्त देवताओं का आत्मा है, अपनी किरणों (रश्मियों) से सभी लोकों का पालन करता है। यहाँ स्पष्ट है-- रश्मि (किरणें) = प्रकाश फैलाने वाली शक्ति (ज्ञान का प्रतीक) 2. अध्यात्म रामायण- अयोध्याकाण्ड 1.20 (प्रचलित पाठ) “यथा प्रकाशयत्येको भानुः कृत्स्नं जगत्त्रयम्। तथा प्रकाशको ब्रह्म…” भावार्थ: जैसे एक सूर्य सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, वैसे ही ब्रह्म (ज्ञान) सबको प्रकाशित करता है। स्पष्ट उपमा है। सूर्य का प्रकाश = ब्रह्मज्ञान 3. गर्ग संहिता महत्वपूर्ण: गर्ग संहिता के विभिन्न संस्करणों में श्लोक संख्या बहुत भिन्न मिलती है। फिर भी एक प्रचलित प्रमाण: गोलोक खण्ड (अध्याय 3, श्लोक 15 – प्रचलित पाठ) “यथा सूर्यप्रकाशेन तमो नश्यति तत्क्षणात्। तथा ज्ञानप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानमात्मनः॥” भावार्थ: जैसे सूर्य के प्रकाश से अंधकार तुरंत नष्ट हो जाता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान नष्ट हो जाता है। यहाँ प्रत्यक्ष सिद्धांत: सूर्य का प्रकाश = ज्ञान का प्रतीक निष्कर्ष-- तीनों ग्रंथों में स्पष्ट सिद्धांत मिलता है: सूर्य = प्रकाश का स्रोत प्रकाश = ज्ञान / ब्रह्म / चेतना अंधकार = अज्ञान इसलिए आपका मूल भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” इन ग्रंथों से प्रत्यक्ष एवं उपमान रूप में प्रमाणित होता है। योग वशिष्ठ में प्रमाण- 1. वैराग्य प्रकरण (सर्ग 3 – प्रचलित पाठ) “अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मील्यते यस्य तस्मै…” भावार्थ: जो अज्ञान रूपी अंधकार से अंधे मनुष्य की आँखें ज्ञानरूपी अंजन से खोलता है… यहाँ: अज्ञान = तिमिर (अंधकार) ज्ञान = प्रकाश (दृष्टि देने वाला) 2. उत्पत्ति प्रकरण (सर्ग 55 – प्रचलित) “यथा दीपप्रकाशेन नश्यत्यन्धं तमोऽखिलम्। तथा ज्ञानप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानमात्मनः॥” भावार्थ: जैसे दीपक के प्रकाश से अंधकार नष्ट हो जाता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान नष्ट होता है। स्पष्ट सिद्धांत: ज्ञान = प्रकाश 3. उत्पत्ति प्रकरण (सर्ग 58 – प्रचलित) “यथा भानुप्रकाशेन जगदेतत् प्रकाशते। तथा ज्ञानप्रकाशेन बुद्धिः सर्वं प्रपश्यति॥” भावार्थ: जैसे सूर्य के प्रकाश से जगत प्रकाशित होता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से बुद्धि सब कुछ देखती है। यह आपके भाव का सीधा प्रमाण है: सूर्य का प्रकाश = ज्ञान का प्रतीक 4. निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध – प्रचलित) “ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानसंचयः।” भावार्थ: ज्ञान रूपी दीपक के प्रकाश से अज्ञान का संचय नष्ट हो जाता है। यहाँ: ज्ञान = दीप / प्रकाश योग वशिष्ठ में बार-बार यह सिद्ध किया गया है: ज्ञान (ब्रह्मज्ञान) = प्रकाश (दीप, सूर्य, ज्योति) अज्ञान = तिमिर (अंधकार) ज्ञान का उदय = अज्ञान का पूर्ण नाश निष्कर्ष-- मन्त्र के अनुसार “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” का योग वशिष्ठ में प्रत्यक्ष समर्थन मिलता है। इस्लामिक धर्मग्रन्थो में प्रमाण -- मन्त्र का भाव—“सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं”—का समर्थन क़ुरआन तथा इस्लामी शिक्षाओं में भी मिलता है। यहाँ “नूर (प्रकाश)” को हिदायत (मार्गदर्शन), ज्ञान और सत्य का प्रतीक माना गया है। 1. क़ुरआन (सूरह अन-नूर 24:35) “اللَّهُ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ…” भावार्थ: अल्लाह आकाशों और धरती का नूर (प्रकाश) है। यहाँ “नूर” का अर्थ केवल रोशनी नहीं, बल्कि ज्ञान, मार्गदर्शन और सत्य है। 2. क़ुरआन (सूरह यूनुस 10:5) “هُوَ الَّذِي جَعَلَ الشَّمْسَ ضِيَاءً وَالْقَمَرَ نُورًا…” भावार्थ: वही है जिसने सूर्य को तेज (प्रकाश) और चाँद को नूर बनाया। सूर्य का “ضياء” (तेज) = स्पष्ट प्रकाश, जो देखने और समझने में मदद करता है (ज्ञान के प्रतीक के रूप में समझा जाता है) 3. क़ुरआन (सूरह इब्राहीम 14:1) “لِتُخْرِجَ النَّاسَ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ…” भावार्थ: यह किताब इसलिए है ताकि लोगों को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाया जाए। यहाँ: अंधकार = अज्ञान, गुमराही प्रकाश = ज्ञान, सत्य, मार्गदर्शन 4. क़ुरआन (सूरह अल-बक़रह 2:257) “اللَّهُ وَلِيُّ الَّذِينَ آمَنُوا يُخْرِجُهُمْ مِنَ الظُّلُمَاتِ إِلَى النُّورِ…” भावार्थ: अल्लाह ईमान वालों को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाता है। यहाँ भी “नूर” = ज्ञान और सही मार्ग। 5. इस्लामी विचार (सार) इस्लामी शिक्षाओं में बार-बार यह बताया गया है: नूर (प्रकाश) = हिदायत, ज्ञान, सत्य ज़ुल्मात (अंधकार) = अज्ञान, भ्रम सूर्य का प्रकाश = स्पष्टता और समझ का प्रतीक निष्कर्ष क़ुरआन में यह सिद्ध होता है कि: प्रकाश (नूर) केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और मार्गदर्शन है। अंधकार = अज्ञान और भटकाव प्रकाश = सत्य और सही रास्ता इस प्रकार यह भाव कि “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — इस्लामी दृष्टिकोण से भी प्रतीकात्मक रूप में पूर्णतः समर्थित है। सिक्ख धर्म में प्रमाण-- मंत्र का भाव—“सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं”—का समर्थन गुरु ग्रंथ साहिब में भी अत्यंत सुंदर रूप में मिलता है। सिक्ख धर्म में प्रमाण-- सिख धर्म में “ਜੋਤਿ (ज्योति)” और “ਨੂਰ (नूर)” को ज्ञान, सत्य और परमात्मा की चेतना का प्रतीक माना गया है। 1. एक ही ज्योति का सिद्धांत “ਸਭ ਮਹਿ ਜੋਤਿ ਜੋਤਿ ਹੈ ਸੋਇ ॥ ਤਿਸ ਦਾ ਚਾਨਣੁ ਸਭ ਮਹਿ ਚਾਨਣੁ ਹੋਇ ॥” भावार्थ: सबमें एक ही ज्योति (प्रकाश) है, और उसी का प्रकाश सबमें फैल रहा है। यहाँ “ਚਾਨਣੁ (प्रकाश)” = ज्ञान और चेतना का प्रसार। 2. अज्ञान से ज्ञान की ओर “ਗੁਰ ਗਿਆਨੁ ਦੀਪਕੁ ਤਿਨਿ ਜਲਾਇਆ ॥ ਅੰਧਕਾਰੁ ਗਇਆ ਪਰਗਟੁ ਹੋਇਆ" भावार्थ: गुरु ने ज्ञान का दीपक जलाया, जिससे अंधकार दूर हो गया और प्रकाश प्रकट हो गया। यहाँ: ਅੰਧਕਾਰ (अंधकार) = अज्ञान ਦੀਪਕ (दीपक/प्रकाश) = ज्ञान 3. नूर (प्रकाश) का सिद्धांत-- “ਨੂਰੁ ਤੇ ਸਭੁ ਜਗੁ ਉਪਜਿਆ ਕਉਨ ਭਲੇ ਕੋ ਮੰਦੇ ॥” भावार्थ: एक ही नूर (प्रकाश) से सारा संसार उत्पन्न हुआ है। “ਨੂਰ” = दिव्य प्रकाश / ज्ञान / चेतना 4. परम प्रकाश (सत्य) “ਸਤਿਗੁਰੁ ਮਿਲਿਐ ਚਾਨਣੁ ਹੋਆ ਹਉਮੈ ਅੰਧੇਰਾ ਜਾਇ ॥” भावार्थ: सतगुरु से मिलने पर प्रकाश (ज्ञान) उत्पन्न होता है और अहंकार का अंधकार दूर हो जाता है। यह स्पष्ट करता है: ज्ञान का प्रकाश = अज्ञान का नाश निष्कर्ष-- गुरु ग्रंथ साहिब में यह सिद्ध किया गया है कि: ਜੋਤਿ / ਨੂਰ / ਚਾਨਣ = ज्ञान, सत्य और परम चेतना ਅੰਧਕਾਰ = अज्ञान और अहंकार प्रकाश का फैलना = ज्ञान का प्रसार इस प्रकार मन्त्र का भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — सिख धर्म के सिद्धांतों से भी पूर्णतः प्रमाणित होता है। बाइबिल में प्रमाण-- ईसाई धर्म में “Light (प्रकाश)” को Truth (सत्य), Wisdom (ज्ञान), और Divine Guidance (ईश्वरीय मार्गदर्शन) का प्रतीक माना गया है। 1. God is Light “God is light; in Him there is no darkness at all.” (1 John 1:5) भावार्थ: ईश्वर स्वयं प्रकाश है, उसमें कोई अंधकार नहीं। यहाँ “Light” = पूर्ण ज्ञान और सत्य। 2. Light of the World “I am the light of the world. Whoever follows me will not walk in darkness, but will have the light of life.” (John 8:12) भावार्थ: जो मेरे मार्ग पर चलता है, वह अंधकार में नहीं रहेगा, बल्कि जीवन का प्रकाश पाएगा। यहाँ: Darkness = अज्ञान Light = ज्ञान और सही मार्ग 3. From Darkness to Light “To open their eyes and turn them from darkness to light.” (Acts 26:18) भावार्थ: लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर लाना। स्पष्ट संकेत: अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा। 4. The True Light “The true light that gives light to everyone was coming into the world.” (John 1:9) भावार्थ: सच्चा प्रकाश, जो हर व्यक्ति को प्रकाश देता है, संसार में आया। “True Light” = सर्वव्यापक ज्ञान और सत्य। 5. Let Your Light Shine “Let your light shine before others…” (Matthew 5:16) भावार्थ: अपना प्रकाश दूसरों के सामने चमकने दो। यहाँ “Light” = ज्ञान, सद्गुण और सही आचरण। निष्कर्ष- बाइबल में यह सिद्ध किया गया है कि:Light (प्रकाश) = ज्ञान, सत्य और ईश्वरीय मार्गदर्शन Darkness (अंधकार) = अज्ञान और भ्रम प्रकाश का फैलना = ज्ञान और सत्य का प्रसार इस प्रकार मन्त्र- का भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — ईसाई धर्म की शिक्षाओं से भी प्रतीकात्मक रूप से प्रमाणित है। जैन धर्म में प्रमाण -- मन्त्र का भाव—“सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं”—का समर्थन जैन धर्म के ग्रंथों में भी मिलता है। जैन दर्शन में “ज्ञान (ञाण)” को ही अज्ञान (अविज्जा/अंधकार) को दूर करने वाला “प्रकाश” कहा गया है। नीचे प्राकृत (देवनागरी लिपि) के साथ प्रमाण (भावार्थ सहित) प्रस्तुत हैं: 1. ज्ञान का प्रकाश “णाणं तु णयरं लोए, णाणेण विणा अंधं।” भावार्थ: ज्ञान संसार में नेत्र के समान है; ज्ञान के बिना सब अंधकार है। यहाँ: णाण (ज्ञान) = प्रकाश अंधं = अज्ञान (अंधकार) 2. सम्यक ज्ञान की महिमा “सम्यग्‌णाणेण विणा णत्थि मुक्खो।” भावार्थ: सम्यक ज्ञान के बिना मोक्ष नहीं है। यह दर्शाता है कि: ज्ञान ही जीवन का मार्ग प्रकाशित करता है। 3. अज्ञान का अंधकार-- “अविज्जा अंधकारो, णाणं तु पभा।” भावार्थ: अज्ञान अंधकार है और ज्ञान प्रकाश है। यह सीधे सिद्ध करता है: प्रकाश = ज्ञान। 4. आत्मज्ञान का प्रकाश-- “णाणस्स प्रकाशेण पव्वयं लोयं पयासइ।” भावार्थ: ज्ञान के प्रकाश से समस्त लोक प्रकाशित होता है। जैसे सूर्य की किरणें जगत को प्रकाशित करती हैं, वैसे ही ज्ञान सबको प्रकाशित करता है। 5. जैन सिद्धांत (सार) जैन दर्शन में बार-बार यह बताया गया है: णाण (ज्ञान) = प्रकाश (पभा/ज्योति) अविज्जा (अज्ञान) = अंधकार ज्ञान का उदय = आत्मा का जागरण। निष्कर्ष-- जैन धर्म में यह सिद्ध किया गया है कि: ज्ञान ही वास्तविक प्रकाश है।अज्ञान अंधकार के समान है ज्ञान का फैलना = प्रकाश का फैलना (सूर्य की किरणों की तरह) इस प्रकार मन्त्र का भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — जैन धर्म के सिद्धांतों से पूर्णतय: प्रमाणित है। बौद्ध धर्म में प्रमाण -- मन्त्र का भाव—“सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” इसका समर्थन बौद्ध धर्म के ग्रंथों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। बौद्ध धर्म में “पञ्ञा (प्रज्ञा/ज्ञान)” को ही अविज्जा (अज्ञान) रूपी अंधकार को दूर करने वाला “प्रकाश” कहा गया है। नीचे पाली (देवनागरी लिपि) के साथ प्रमाण प्रस्तुत हैं: 1. धम्मपद (Dhammapada) “पञ्ञा लोके पभासति।” भावार्थ: प्रज्ञा (ज्ञान) संसार में प्रकाश फैलाती है। यहाँ: पञ्ञा (ज्ञान) = प्रकाश (पभा) जैसे सूर्य की किरणें जगत को प्रकाशित करती हैं, वैसे ही ज्ञान जीवन को प्रकाशित करता है। 2. अज्ञान और ज्ञान “अविज्जा परमं मलं, पञ्ञा परमं आलोकं।” भावार्थ: अज्ञान सबसे बड़ा अंधकार (मल) है, और प्रज्ञा सर्वोत्तम प्रकाश है। स्पष्ट सिद्धांत: अंधकार = अज्ञान प्रकाश = ज्ञान 3. आत्मदीप (बुद्ध का उपदेश) “अत्तदीपा विहरथ, अत्तसरणा अनञ्ञसरणा।” भावार्थ: अपने भीतर दीपक (प्रकाश) बनो, अपने ही आश्रय बनो। “दीप” = ज्ञान और जागरूकता का प्रकाश 4. ज्ञान से मार्ग प्रकाश “पञ्ञाय पथो विहितो।” भावार्थ: ज्ञान (प्रज्ञा) से ही मार्ग प्रकाशित होता है। जैसे सूर्य मार्ग दिखाता है, वैसे ही ज्ञान जीवन का मार्ग दिखाता है। 5. बौद्ध सिद्धांत (सार) बौद्ध धर्म में बार-बार यह बताया गया है: पञ्ञा (प्रज्ञा) = प्रकाश (आलोक) अविज्जा (अज्ञान) = अंधकार ज्ञान का उदय = दुःख से मुक्ति का मार्ग निष्कर्ष-- बौद्ध धर्म में यह सिद्ध किया गया है कि: ज्ञान ही वास्तविक प्रकाश है अज्ञान अंधकार के समान है प्रकाश का फैलना = ज्ञान का फैलना (सूर्य की किरणों के समान) इस प्रकार मन्त्र का भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — बौद्ध धर्म के सिद्धांतों से भी पूर्णतः प्रमाणित होता है। यहूदी धर्म में प्रमाण -- मन्त्र का भाव—“सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” इसका समर्थन तनख (Tanakh / Hebrew Bible) में भी स्पष्ट रूप से मिलता है। यहूदी परंपरा में “Light (Or)” को Wisdom (ज्ञान), Truth (सत्य) और Divine Guidance (ईश्वरीय मार्गदर्शन) का प्रतीक माना गया है। 1. Creation of Light “Let there be light: and there was light.” (Genesis 1:3) भावार्थ: ईश्वर ने कहा—प्रकाश हो जाए, और प्रकाश हो गया। यहाँ “Light” = सृष्टि का प्रथम ज्ञान/व्यवस्था (Order & Awareness)। 2. God as Light “The Lord is my light and my salvation.” (Psalm 27:1) भावार्थ: प्रभु मेरा प्रकाश और उद्धार है। “Light” = मार्गदर्शन और ज्ञान। 3. Light as Guidance “For the commandment is a lamp; and the law is light.” (Proverbs 6:23) भावार्थ: आज्ञा दीपक है और धर्म (कानून) प्रकाश है। यहाँ स्पष्ट है: धर्म और ज्ञान = प्रकाश। 4. Path of the Righteous “The path of the righteous is like the morning sun, shining ever brighter till the full light of day.” (Proverbs 4:18) भावार्थ: धर्मात्माओं का मार्ग उगते सूर्य के समान है, जो धीरे-धीरे पूर्ण प्रकाश में बदलता है। सूर्य का प्रकाश = ज्ञान और सही मार्ग का विकास। 5. Light over Darkness “The light shines in the darkness, and the darkness has not overcome it.” ((cf. theme across Hebrew thought; also echoed in later texts)) भावार्थ: प्रकाश अंधकार में चमकता है और अंधकार उसे जीत नहीं सकता। यहाँ: Darkness = अज्ञान / भ्रम Light = ज्ञान / सत्य निष्कर्ष-- तनख में यह सिद्ध किया गया है कि:Light (प्रकाश) = ज्ञान, सत्य और ईश्वरीय मार्गदर्शन Darkness (अंधकार) = अज्ञान और भ्रम सूर्य/प्रकाश का बढ़ना = ज्ञान और धर्म का विकास इस प्रकार मन्त्र का भाव— “सूर्य की किरणें ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं” — यहूदी धर्म की शिक्षाओं से भी प्रतीकात्मक रूप में पूर्णतः प्रमाणित होता है। -------+-------+--------+--------

Vrishali Gotkhindikar

*राम म्हणजे काय ?* उगीचच झोपतो त्याला *आ राम* म्हणतात. झोपलेला परत कधी उठतच नाही त्याला *हे राम* म्हणतात. मित्रा सारखा वागतो म्हणून *सखा राम* म्हणतात. जो राजालाही आदर्श होऊन राहतो त्याला *राजा राम* म्हणतात. हृदयीचे जाणतो म्हणून त्याला *आत्मा राम* म्हणतात. एक पत्नी व्रताप्रमाणे वागतो त्याला *सीता राम* म्हणतात. भगवंत ज्यांचे पाय पूजितो त्यांना *तुका राम* म्हणतात. प्रसंगी हाती शस्त्र वा शास्त्र धरुन अन्यायाशी लढतो त्याला *परशु राम* म्हणतात. जो अखंडपणे भगवंताचा दास होऊन रहातो त्याला *राम दास* म्हणतात. हल्लिच्या युगात जो पहाटे उठवतो त्याला *आला राम* म्हणतात. जो सेवाव्रताने वागतो त्याला *सेवा राम* म्हणतात. जो प्रसादाचा गोड मेवा बनवतो त्याला *मेवा राम* म्हणतात. आणी हे ज्यांना कळलं.. त्यांच्यासाठी *"राम राम"* म्हणतात. *हे वाचणारा सोळा वेळा राम म्हणाला* *मोजलेत ना? आता एकूण वीस वेळा राम राम झाले.* *चला,एकवीस वेळ रामनाम तर घडले.*. *🙏जय श्री राम ।।श्री राम जय राम जय जय राम।।

બદનામ રાજા

હંમેશા પાછળ રહ્યો હું, તારા સુધી પહોંચવાની દોડમાં... 🌸

RM

તમારા જીવનમાંથી "અફસોસ" શબ્દ કાઢી નાખો, કારણ કે .. તે તમને ઘણું બધું કરવાથી રોકે છે...

sanvi

A sketch drawn by me. 💗🌷💫

Vishakha Mothiya

Reflections live વેબસાઈટ પર પ્રકાશિત થયેલ મારો માહિતીસભર લેખ... *પરોપકારી પારસી* જાણીશું એક એવા સમુદાયના લોકો વિશે જેનો સ્વભાવ,ભાષા,સેન્સ ઑફ હ્યુમર લોકોને ટદ્દન સકારાત્મક રીતે પ્રભાવિટ કરે છે. રિયલ લાઈફ હોય કે ટીવીમાં આ લોકોને આપણે ક્યારેય ઉદાસ નથી જોયા. Smile અને positivity જાણે આ લોકોની રગેરગમાં વસે છે. દૂધમાં સાકર ભળી જાય એમ આપણા દેશમાં ભળી ગયા અને ભારતના વિકાસમાં નોંધપાત્ર યોગદાન આપ્યું. તો ચાલો જાણીએ,પરોપકારી પારસી વિશે; સાથે જાણીશું તેનો ઇતિહાસ, રિવાજો તેમજ વિશેષ બાબતો વિશે. લેખ વાંચવા અહીં લિંક પર ક્લિક કરો - https://reflections.live/articles/788/parokari-parsi-by-vishakha-mothiya-29370-mn62xfam.html Read & Share

softrebel

बेटियां होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। माथे पे आँचल, हाथों में मेहंदी रची, हल्दी के रंग में आज रंगी है वो गुड़िया। लोरियों में पली, सपनों में ढली, आज किसी और के घर की है वो धूपिया। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। माँ की दुआ बन हर साँस में बहती है, पापा की उम्मीद पलकों में चमकती है। भाई-बहन, सखियों की हँसी साथ लिए, हर रिश्ते में वो अपनी खुशबू बिखेरती है। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। वो जा तो रही है, पर दूर नहीं हो रही , दो घरों की रौशनी बन दो आँगनों में चमक रही है। एक घर की धड़कन, दूजे की सुबह, हर दिल के आसमान में अपनी जगह लालिमा सी बिखेर रही है। होगा ये घर कल उदास, पर आज इस घर के हर कोने में अंजोरिया सी पसर रही है। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। @softrebel #matrubharti #hindi #betiyan

softrebel

बेटियां होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। माथे पे आँचल, हाथों में मेहंदी रची, हल्दी के रंग में आज रंगी है वो गुड़िया। लोरियों में पली, सपनों में ढली, आज किसी और के घर की है वो धूपिया। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। माँ की दुआ बन हर साँस में बहती है, पापा की उम्मीद पलकों में चमकती है। भाई-बहन, सखियों की हँसी साथ लिए, हर रिश्ते में वो अपनी खुशबू बिखेरती है। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। वो जा तो रही है, पर दूर नहीं हो रही , दो घरों की रौशनी बन दो आँगनों में चमक रही है। एक घर की धड़कन, दूजे की सुबह, हर दिल के आसमान में अपनी जगह लालिमा सी बिखेर रही है। होगा ये घर कल उदास, पर आज इस घर के हर कोने में अंजोरिया सी पसर रही है। होठों की हँसी, चेहरे की किलकारियाँ, आँगन में बन के चहचहाए वो चिड़िया। नटखट नदियों-सी,सुगंधित फूलों की क्यारियां, अपने संस्कारों से पैरों को पखारती है, बस ऐसी होती है बिटिया कलेजे का टुकड़ा आँखों की पुतलियाँ। @softrebel #matrubharti #hindi #betiyan

mohansharma

तू निशाना तो लगा हम कहाँ जा पाएंगे .. हम तो आशिक हैँ ख़ुद निशाने पे आ जाएंगे..

Piyu soul

💫हमारी दोस्ती का रिश्ता 💫 रास्ते अलग थे, मंज़िलें भी जुदा थीं, पर चार दिलों ने एक साथ धड़कना सीख लिया। दोस्ती में हँसी थी, प्यार में सुकून था, हम चारों ने हर लम्हे को अपना जुनून बना लिया। कभी बातों में खोए, कभी खामोशी में समझ गए, बिना कहे ही एक-दूसरे के जज़्बात पढ़ गए। दो हाथ थामे थे, दो दिल जुड़े हुए थे, पर दोस्ती ने हमें एक ही धागे में पिरो दिए थे। जब एक गिरा, तो चारों ने संभाला, जब कोई हंसा, तो सबका दिल खिल उठा। ये रिश्ता सिर्फ़ दोस्ती नहीं, एक दुनिया है, जहाँ प्यार भी है, और अपनापन भी बेमिसाल है। 💛 piyu 7soul

kattupaya s

Goodnight friends.. sleep well

Kiran

तारीफों में अब वो बात नहीं लगती, हर “प्यारे” शब्द में कोई राज़ लगता है।

satish vishe

“मन जेव्हा खूप अस्वस्थ होतं…” मन जेव्हा खूप अस्वस्थ होतं, तुझ्या सहवासाची आस लागते, गर्दीत असूनही कुठेतरी तुझीच कमी सतत जाणवते… शब्द हजार असतात ओठांवर, पण तुला सांगायला धडधडते, कारण तुझ्या एका उत्तरावरच माझं सगळं जग ठरतं… कधी तुझं एक “काय झालं?” मनाला औषधासारखं वाटतं, आणि कधी तुझंच मौन हळूहळू मन तोडतं… रात्रभर जागत राहतं मन, तुझ्या आठवणींशी बोलतं, तू जवळ नसतानाही तुझ्याच छायेत हरवतं… कधी वाटतं, समजून घेशील तू, या न बोललेल्या भावना साऱ्या, पण तुझ्या त्या शांततेतच हरवतात माझ्या आशेच्या किनाऱ्या… मन अजूनही तुझीच वाट पाहतं, थोडा वेळ, थोडं लक्ष मागतं, कारण प्रेम म्हणजे फक्त शब्द नाही, ते वेळेतूनच खऱ्या अर्थाने दिसतं…

Kiran

प्यार, तू ज़िंदा है अभी भी मैं ये जानकर हैरान हूँ।

Nilesh Rajput

She loved poetry, so I wrote for her. She loved stories, so I made stories for her. She loved someone else, and I........💔

Kiran

रात के तारे यूँ टिमटिमाते हैं, जैसे खामोशी से समझाते हैं— ज़्यादा घमंड मत कर इंसान, आख़िर लौटकर यहीं आना है।

Piyu soul

💫हमसफ़र सा एहसास💫 हर मोड़ पे चाहे भीड़ हो या तन्हाई, दिल की बातें कह दे जो — वही सच्ची साथ निभाई। राहें बदल जाएँ, चेहरे बदल जाएँ, पर जो दिल को छू जाए — वही याद रह जाए। 💫 piyu 7soul ❤️

Imaran

तेरी याद का एहसास मेरे दिल से लगाव बढ़ाता है, तेरा साथ मिले तो जुदाई भी प्यार बन जाता है 💛🩵imran 💛🩵

Thakor Pushpaben Sorabji

હતી એ વાડ શાંત હતા પંખીઓના એ ટહુકા  શોધતા હતા મારગ એ પ્રાણીડા  હતી જે છાયા એ છીનવાઈ ગઈ!....               શાંત હતા.................... હતા એ આવળ બાવળ લીમડાના એ ઝાડવા  હતા એ સૌને કાપી કરાયા દૂર સૌને હતા જેના આશરે પ્રાણીડા જોતા રહ્યા એ સૌ!..                શાંત હતા.................... શાંત લાગ્યા મુજને લહેરાતા ખેતરો લાગ્યા નિશાસા નાંખતાં એ પ્રાણીડા સૌ કેમ કે આશરો હતો જેનો એ છીનવાઇ ગયો!...                 શાંત હતા..................... નીકળી ગઈ ઝાડવાની વાડને થઈ ગઈ ફેન્સી વાડ શોધતા હતા મારગ એ પ્રાણીડા બધા સાંભળી સૂના ખેતરે જાણે તેમની એ વાચા !.....                 શાંત હતા......................... જય શ્રી કૃષ્ણ:પુષ્પા એસ ઠાકોર"પુષ્પ"

उषा जरवाल

आज हमने अपने विद्यालय का प्रथम एवं सफल शैक्षणिक सत्र पूर्ण किया। यह सत्र सफलतापूर्वक पूर्ण करना केवल एक उपलब्धि नहीं है बल्कि माननीय पदासीन अधिकारियों द्वारा दिया गया उचित मार्गदर्शन, परिश्रम, अथक प्रयास एवं सामुदायिक सहयोग का परिणाम है। इस कार्यकाल के दौरान हमने अनेक त्रुटियाँ कीं, अनेक चुनौतियों का सामना किया और प्रत्येक कठिनाई को एक अवसर में रूपांतरित कर दिया। इस सत्र ने हमें अनुभूति कराई कि सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए अपने अथक परिश्रम, आपसी सहयोग एवं अनवरत प्रयास से हम सफलता के नए आयाम स्थापित करने के लिए सक्षम हैं । हमें विश्वास है कि इसी समर्पण एवं एकजुटता के साथ हम आगामी सत्रों में और अधिक उत्कृष्ट उपलब्धियाँ अर्जित करेंगे। विद्यालय परिवार के प्रत्येक सदस्य का योगदान इस सफलता की आधारशिला रहा है, जिसके लिए हम हृदय से कृतज्ञ हैं। आइए, इसी उत्साह, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ हम भविष्य की ओर अग्रसर हों और शिक्षा के पथ पर निरंतर प्रगति के नवीन इतिहास रचने के लिए तत्पर हों ।

Chaitanya Joshi

પ્રતીક્ષાની પરાકાષ્ઠાએ શબરીને રામ મળ્યા હશે. આગમન રામનું નિહાળી ગુરુના આશિષ ફળ્યા હશે. હરખઘેલી થઈને એ નારી રામ દર્શને પુલકિત થઈ, દર્ભાસન બિછાવી રામ લક્ષ્મણ ને બેસાડ્યા એણે, ને નયન અશ્રુ થકી ચરણો રામના એણે ધોયાં હશે . ફળી સાધના એક ભીલ નારીની રામના આગમન થકી, કૌશલ્યા બનીને એંઠા બોર એણે ખવડાવ્યા હશે. શબરી કરતાંય વિશેષ રાજી રામ જોવામાં આવ્યા, વનવગડે શ્રીરામને આજે કૌશલ્યા માં સાંભર્યા હશે. નવધા ભક્તિના ઉપદેશે સ્તુતિ શબરી તણી કરી, શબરીને વિદાય આપી સુગ્રીવ ભણી ગમન કર્યા હશે. -ચૈતન્ય જોષી . દીપક ,પોરબંદર.

p

koi bar hm bhut dukhi hote hai per cha kr bhi kisi ke sath share nhi kr pate because ek dar iska kya result hoga isliye khud jhelna better lgta hai - Preet

Shefali

#shabdone_sarname__

Nayana Viradiya

‌‌"ઉનાળાની બપોર " ઉનાળાની બપોરે તડકો ધોમધખતો ત્રાટકે, ધરતીના હૃદયમાં  બળબળતો અગ્નિ ખટકે. પવન પણ થાકીને શાંત બનીને બેઠો, છાંયો શોધતો માનવ રસ્તા પર પેઠો. વૃક્ષોની છાયા નીચે જીવન થોડુંક હસતું, પંખીઓના કલરવ સાંભળી લાગે કોઈ વસતું. નદીના પાણીમાં પણ ગરમી  ભળે છે. સૂરજની જ્વાળા બધે પોતાનું રાજ કરે છે. શેરી ગલીઓ સુમસામ થઈ  છે. પંખીઓ છાંયડે ઓથે બેસી મૌન ટહુકા કરે છે. ગામને પાદર ઝાડની છાયામાં ગૌધન આરામ કરે છે. ઉનાળાની બપોરે માનવ મહેરામણ ટળે છે. શહેરના ચક્કાજામ રસ્તાઓ પણ નીરવ શાંતિ ભરે છે. લોકો જલ્દીમાં ઘરની ભણી પગલાં ભરે છે. બપોર ઢળીને ઠંડી સાંજ માટે આશાભરી આંખો ધરે છે. ધરતી તપે ને કંચન વરસે એ કાજે આ ગરમી ઉપેક્ષા સહે છે. લોકજીવનમાં સહનશીલતા ના પાઠ શીખવવા તે ઉનાળો પોતે પણ તપે છે.

Nayana Viradiya

" ખોવાયેલો ખજાનો" પ્રેરકવાર્તા - નયના વિરડીયા ✍️ બહુ  સમય પહેલાની વાત છે. અરબ સાગરના કિનારે એક નાનકડું  મછવારાઓનું ગામ હતું આ ગામમાં “વીર” નામનો છોકરો રહેતો હતો. ગામના લોકો દરિયાને માત્ર રોજી-રોટી માટે જોતાં, પણ વીર માટે દરિયો એક રહસ્ય હતો. એને હંમેશા  જ લાગતું કે દરિયાની અંદર કંઈક એવું છુપાયેલું છે જે તેની જિંદગી બદલી દેશે.      એક દિવસ દરિયા કિનારે એને એક જૂનો નકશો મળ્યો. કાગળ પીળો પડી ગયો હતો અને તેના પર એક “X” નું નિશાન હતું. વીરને તરત જ વિચાર આવ્યો કે નક્કી આ કોઈ મોટા ખજાના સુધી પહોંચવા માટે નો નકશો જ છે.આવો મોકો મળે અને કોઈ ચુપચાપ બેસી રહે એવું ક્યારેય થયું છે? વીરે તરત જ નક્કી કરી લીધું કે તે ખજાનો શોધીને જ રહેશે. તે નાની હોડી લઈને દરિયામાં નીકળી પડ્યો. દિવસો સુધી તે તરતો રહ્યો. ભૂખ, તરસ અને ભય… બધું સહન કરતો ગયો. આખરે તે નકશામાં દર્શાવેલા ટાપુએ પહોંચી ગયો. ટાપુ શાંત હતો, બહુ જ શાંત. જાણે ત્યાં કોઈ વર્ષોથી આવ્યું જ ન હોય. વીરે “X” ની જગ્યા ખોદવાની શરૂઆત કરી. થોડા સમય પછી, તેને લાકડાનું એક બોક્સ મળ્યું. બોક્સ જોતા જ તેનું હૃદય જોરદાર ધડકવા લાગ્યું  “હવે તો હું દુનિયા નો સૌથી ધનિક માણસ  બની જઈશ,” અનેક સપનાઓએ પાંખો ફફડાવી આલીશાન ઘર બનાવીશ,હાથી, ઘોડા,નોકર,ચાકર ની સેના ઘરના આંગણામાં ઉભી હશે અને શાહી ઠાઠ થી પોતે એ મહેલ જેવા  ઘરમાં રહેશે. વિચારોના વરસાદ  સાથે તેણે બોક્સ ખોલ્યું. પણ અંદર શું હતું? સોનાં-ચાંદી નહીં… રૂપિયા  પૈસા પણ નહિ... જય,ઝવેરાત કે મિલ્કતો નો ઉલ્લેખપત્ર પણ નહિ... પણ એક જૂનું દર્પણ. વીર ગુસ્સે ભરાઈ ગયો. “આ શું મજાક છે?” એ ચીસો પાડવા લાગ્યો વેરાન ટાપુ માં તેની ચીસો શાંત બની વિખેરાય ગઈ પણ જ્યારે તેણે દર્પણમાં પોતાનો ચહેરો જોયો, ત્યારે તેને સમજાયું કે તે પહેલાં જેવો રહ્યો જ નથી. એની આંખોમાં હવે ભય નહોતો, પરંતુ આત્મવિશ્વાસ હતો. એની અંદર એક નવી શક્તિ જન્મી હતી. દરિયો ખેડવાનો અનુભવ હતો. ત્યારે જ તેને સમજાયું… ખજાનો  સોનામાં નહોતો, ખજાનો તો એની અંદર હતો.

Raj Phulware

IshqKeAlfaaz मी अचानक मेलो तर...

mamta

hamari samasya bhi is surya ki tarah hai aati bhi hai or chali bhi jati hai isli jindagi choti hai samasya bahut hai use par karke haste rahiye😀🌄🤗 - mamta

બદનામ રાજા

लंबे सफर निकले लोगों को, रास्ते में मिले लोगों के, ज्यादा करीब नहीं जाना चाहिए... 🌸

Piyush Goel

https://indiatimesnow.in/piyush-kumar-goel-the-record-breaking-author-redefining-the-art-of-writing/

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