Jeetendra stories download free PDF

तुम्हारे बिना भी तुम।

by A
  • 444

रोहन ने उस दिन पहली बार घर का दरवाज़ा बहुत धीरे खोला था।जैसे अंदर कोई सो रहा हो।जैसे हल्की ...

भूला हुआ स्टेशन।

by A
  • 747

बारिश का मौसम था। और बारिश भी ऐसी जो बस गिरती नहीं थी। बल्कि छत पर बैठकर कान के ...

सपनों में आने वाला प्यार।

by A
  • 441

रात के सन्नाटे में जब शहर की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। तब बहुत सी बातें ऐसी लगती हैं ...

चाँदनी के उस पार।

by A
  • 831

समय की बात है, जब पहाड़ों के पीछे एक ऐसा राज्य था जिसका नाम लोग धीरे से लेते थे। ...

समय का सौदागर।

by A
  • 735

शहर के पुराने हिस्से में एक बहुत छोटी-सी घड़ी की दुकान थी। बाहर से देखने पर वह दुकान किसी ...

हार के बाद की जीत

by A
  • (0/5)
  • 822

राघव के लिए वह दिन सिर्फ एक हार नहीं था, बल्कि जैसे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ हो गई ...

बेवजह की महोब्बत।

by A
  • 795

का समय था। शहर की पुरानी गलियों में हल्की ठंडी हवा बह रही थी। सड़क किनारे लगे पीपल के ...

अनकही देहलीज़

by A
  • 1.8k

अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल से नज़रें नहीं हटाईं। खिड़की ...

असली कातिल।

by A
  • 3.7k

बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन्नाटा और ...

परछाइयों का शहर

by A
  • 2k

"क्या तुम्हें सच में लगता है कि तुम यहाँ से वापस जा पाओगे?"अंधेरे कमरे में यह आवाज़ किसी सूखे ...