Jeetendra stories download free PDF

लिव इन का रिश्ता।

by A
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"चाय में चीनी कम है, या शायद आज मेरा ही मूड ठीक नहीं," माधव ने खिड़की के बाहर उड़ते ...

बेटे की चाह

by A
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ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर ...

बलि का बकरा

by A
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गाँव की पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। सूरज ढलने को था, लेकिन हवा में एक अजीब सी तपन ...

जीरो बेरोजगारी

by A
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शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी। निखिल ...

आजाद सवेरा

by A
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कोहरे की चादर ने पूरी घाटी को ढका हुआ था। दूर कहीं से आती हुई झरनों की आवाज सन्नाटे ...

कोख का संघर्ष

by A
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भाग 1: विश्वास की दरारसुहानी खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रही थी, लेकिन ...

प्यार, परांठे और पंगा

by A
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शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में कबीर खुद को एक सुलझा हुआ इंसान समझता था, लेकिन सच तो यह ...

पिंजरे के बाहर का आकाश

by A
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शहर की चकाचौंध से दूर एक मध्यमवर्गीय अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी अदिति अपनी कॉफी के कप से उठती ...

सर्दियों की धूप और तुम्हारी यादें

by A
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दिसंबर की वह सुबह कड़ाके की ठंड लेकर आई थी। शिमला की पहाड़ियों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी ...

उम्मीद की एक नई किरण

by A
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शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक पुराने जर्जर मकान की बालकनी में बैठे अविनाश के चेहरे पर गहरी चिंता ...