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बारह बजे के बाद - 4

by Alok Mishra
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अध्याय – 4 : गायब डायरी पुलिस मुख्यालय की घड़ी रात के ग्यारह बजा रही थी।पुलिस अधीक्षक आर्यन ...

बारह बजे के बाद - 3

by Alok Mishra
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अध्याय – 3 : झूठ की पहली परतपहली जनवरी की दोपहर। मंत्री महेश्वर प्रताप सिंह की हत्या की खबर ...

बारह बजे के बाद - 2

by Alok Mishra
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अध्याय – 2 : सुबह का पहला शव पहली जनवरी की सुबह शहर अभी भी पिछली रात के ...

बारह बजे के बाद - 1

by Alok Mishra
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अध्याय 1 : बारह बजने से पहलेसर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा रहा था। हर सड़क ...

भीड़ में अकेली - 4

by Alok Mishra
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अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, शायद आज ...

भीड़ में अकेली - 3

by Alok Mishra
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अध्याय–3 : चैट की आदत कहते हैं कि मनुष्य किसी भी आदत का बंदी बन सकता है। किसी ...

भीड़ में अकेली - 2

by Alok Mishra
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अध्याय–2 : एक घर, जहाँ सन्नाटा रहता है सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से कुछ क्षण ...

भीड़ में अकेली - 1

by Alok Mishra
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भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों ...

प्रेम

by Alok Mishra
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उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा ...

मछलीवाली

by Alok Mishra
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मछलीवाली "मच्छी लेलो मच्छी......... । " उमा जोर से हांका लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ...