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भीड़ में अकेली - 1

by Alok Mishra

भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों ...

प्रेम

by Alok Mishra
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उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा ...

मछलीवाली

by Alok Mishra
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मछलीवाली "मच्छी लेलो मच्छी......... । " उमा जोर से हांका लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ...

दोस्ती

by Alok Mishra
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सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस ...

गाठें

by Alok Mishra
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उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी ...

Counterfeit Coin

by Alok Mishra
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Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for ...

खोंटा सिक्का

by Alok Mishra
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शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर ...

Between truth and lies

by Alok Mishra
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Between Truth and LiesUma was married, around thirty-eight years old. A free-spirited woman. Her husband worked out of town ...

सच और झूठ के मध्य

by Alok Mishra
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उमेश अब पीठ से हाथ सामने ले आया और धीरे से उभारों को सहलाने लगा । कमरा शांत था ...

संवाद खुद का खुद से

by Alok Mishra
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जब स्वयम् से ही साक्षात्कार होता है। जब खुद का दिल चीत्कार भरता है। बस तब ही कागज ...