CHIRANJIT TEWARY stories download free PDF

तेरे मेरे दरमियान - 87

by CHIRANJIT TEWARY

जानवी :- मैंने तो उसे छोड़ दिया था, पर फिर भी मुझे उसकी इतनी फिक्र क्यों हो रही है ...

तेरे मेरे दरमियान - 86

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य को परेशान दैखकर पूनम आदित्य के पास जाती है , आदित्य अपने मां , पापा और भाई को ...

तेरे मेरे दरमियान - 85

by CHIRANJIT TEWARY
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अशोक :- कोई बात नही बेटा । तु समझ गयी पर बेटा आज के जमाने मे तो बेटीयां अपने ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 63

by CHIRANJIT TEWARY
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आलोक का नाम सुनते ही संपूर्णा का चैहरा खुशी से लाल हो जाता है। संपूर्णा अपनी खुशी को छिपा ...

तेरे मेरे दरमियान - 84

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य: - ये झुट है मॉय लॉर्ड । ये लड़की झुट बोल रही है ।जानवी :- तो क्या है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 62

by CHIRANJIT TEWARY
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वर्शाली सरमाते हूए एकांश से कहती है--> एकांश जी ! मैं भी आपसे बहुत प्रेम करती हूं । मेरा ...

तेरे मेरे दरमियान - 83

by CHIRANJIT TEWARY
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विकास :- छी छी छी ... आदित्य , बेचारा दैखो कैसी शकल हो गयी है बेचारे की । क्या ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 61

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश वर्षाली के हाथ को पकड़कर जैसे ही कुछ कहने वाला होता है। के एकांश को पता चलता है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 60

by CHIRANJIT TEWARY
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तभी संपूर्णा आलोक से धिरे से कहती है--> मैं अब संतुष्ट होने वाली हूँ ।जिसे सुनकर आलोक की रफतार ...

तेरे मेरे दरमियान - 82

by CHIRANJIT TEWARY
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मोनिका :- "मैं कह रही हूँ—तुम जानवी से शादी कर लो।"कमरे में जैसे हवा जम गई।विकास :- "पागल हो ...