Vrajesh Shashikant Dave stories download free PDF

अन्तर्निहित - 28

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 258

[28]“तो अब आप पदयात्रा पर जाना चाहते हो श्रीमान शैल?” अधिकारी ने व्यंग रचा। शैल ने उस व्यंग को ...

अन्तर्निहित - 27

by Vrajesh Shashikant Dave
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[27]“घटना स्थल पर भी कुछ नहीं मिला, शैल?”“मिलता भी कैसे?”“क्यों?”“वह स्थल घटना स्थल है ही नहीं।”“क्या कह रहे हो? ...

अन्तर्निहित - 26

by Vrajesh Shashikant Dave
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[26]“दो दिन से हमने कुछ भी नहीं किया है। इस प्रकार बैठे रहने से तो कार्य आगे बढ़ेगा ही ...

अन्तर्निहित - 25

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 894

[25]शैल के फोन की घंटी बजी, “महाशय, यहाँ वत्सर के मंदिर से सारे पत्रकारों को तो वत्सर ने भगा ...

अन्तर्निहित - 24

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 702

[24]“डीएनए परीक्षण आरंभ हो चुका है। आठ दिनों में रिपोर्ट या जाएगा।”“तब तक क्या करने का सोचा है, शैल ...

अन्तर्निहित - 23

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 696

[23]“शैल जी, मृतदेह के विषय में कुछ ज्ञात हुआ क्या?”“क्या ज्ञात करना चाहती हो?”“यही कि वह व्यक्ति कौन थी? ...

अन्तर्निहित - 22

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 942

[22]“क्या हुआ सारा जी?”“ऐसा कभी मत करना। यदि यह मंजूषा बंद कर दी गई तो ..।” सारा आगे बोल ...

अन्तर्निहित - 21

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 978

[21]येला की कार्यशाला में भोजन के उपरांत सारा तथा शैल चिंतन करने लगे कि अब इस मंजूषा में आगे ...

अन्तर्निहित - 20

by Vrajesh Shashikant Dave
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[20]“तो वत्सर, आगे क्या हुआ? बताओ।” सारा ने पूछा।वत्सर ने गहन सांस ली। अभी भी उसकी दृष्टि व्योम में ...

अन्तर्निहित - 19

by Vrajesh Shashikant Dave
  • 939

[19]संध्या हो गई। शैल, सारा, वत्सर और येला एक कक्ष में जमा हो गए। शैल ने सारा का स्वागत ...