भाग दो"चिठ्ठी का इन्तजार"मोहन को गए हुए तीन बरस हो चुके थे।तीन बरस — कहने को तो बस तीन ...
"चिठ्ठी का इंतजार"एक ज़माना था…जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों से मापा जाता था।उस छोटे ...
“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर ...
प्रश्न 1: बार-बार असफलता क्यों मिलती है?कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — भगवद गीता 2.47️ फल नहीं, कर्म पर ध्यान ...
प्रस्तावनाएक तरफ़ा इश्क़…वह प्रेम जो पूरा नहीं होता, फिर भी सबसे गहरा होता है।जो दिल में बसता है पर ...
"AI का नाम होगा और इंसान बदनाम होगा"कभी यह वाक्य एक मज़ाक जैसा लगता था, लेकिन आज की दुनिया ...
एपिसोड 6तन्हाईहर प्रेम का अर्थ साथ नहीं होता, समझ भी होना होता हैंसुबह की धूप खिड़की के पर्दों से ...
एपिसोड 5तन्हाईप्रेम के अपराधबोध और आत्ममंथनसुबह की वह धूप जैसे अपराधबोध का परदा उठाने आई थी, संध्या बंगले के ...
एपिसोड 4तन्हाईशरीर और आत्मा का एक होनाशाम ढल चुकी थी बाहर आसमान में काले बादलों की परतें किसी अनकहे ...
एपिसोड 3तन्हाईभावनाओं की सीमाएँ और समाज का भयसंध्या के ऑफिस में अब हर दिन कुछ अलग महसूस होता था, ...