सब इतना उलझा हुआ क्यों है? यह सवाल अक्सर उन पलों में उठता है जब ज़िंदगी अचानक अपनी रफ्तार ...
उसे उसकी बचकानी बातें पसंद नहीं थीं...कुछ रिश्ते समझदारी से नहीं, किस्मत की जिद से बनते हैं।कुछ लोग हमारी ...
वो लड़की जो कभी थी ही नहींरात के ग्यारह बज रहे थे। लखनऊ से बाहर, एक छोटे से कस्बे ...
बिना अलविदा केकभी-कभी जिंदगी में वो पल आते हैं, जब आप फोन पर स्क्रॉल कर रहे होते हैं, और ...
घर जो कभी बेचा नहीं गयाशहर के सबसे चमकदार इलाके में, जहां हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें आसमान को चीर ...
उस शाम की चाय (जो मैं खुद से कह नहीं पाई)वाराणसी की शामें कभी पूरी तरह शाम नहीं होतीं।सूरज ...
की वो भागती-दौड़ती शामें।ट्रैफिक की लंबी कतारें, हॉर्न की आवाजें, और हवा में घुली हुई चाय की खुशबू।आरव मल्होत्रा, ...
कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड ...
बचपन की आख़िरी चिट्ठी(एक हिस्सा, पर पूरी कहानी)हमारा पहला दिन था प्लेस्कूल का।मैं नीली फ्रॉक में थी, नैना पीले ...
नमस्ते दोस्तों! ये कहानी उन सबके लिए है जो रात के तीन बजे छत पर खड़े होकर सोचते हैं ...