वंशिका ने एक नई रणनीति अपनाई। उसने घर पर रुकना कम कर दिया और अपना ज़्यादा से ज़्यादा समय ...
वंशिका जानती थी कि लोग कहेंगे—"मर्द तो मासूम होता है, वह तो फिसल गया, औरत ने ही उसे संभाला ...
वंशिका अपने अंधेरे कमरे में अकेले बैठी थी। पंखे की आवाज़ उसे किसी पुराने जख्म को कुरेदने जैसी लग ...
शाम ढलते ही जब भूपेंद्र और काया घर लौटे, तो घर की हवा में एक अजीब सी भारीपन थी। ...
आधी रात के उस सन्नाटे में, जब भूपेंद्र और काया एक-दूसरे के वजूद में खोए हुए थे, अचानक पास ...
शाम का धुंधलका गहराने लगा था। आसमान में नारंगी और बैंगनी रंग की लकीरें उभर आई थीं। घर में ...
अगली सुबह जब घर के सदस्य डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के लिए इकट्ठा हुए, तो सबकी आँखें फटी की ...
बाजार से लौटते वक्त काया के कदम हवा में थे, लेकिन दिमाग सचेत था। उसे पता था कि अगर ...
अगले कुछ दिन घर के भीतर एक अजीब से भारीपन में बीते। ऊपर से सब कुछ शांत दिखता था—वही ...
जिम में सुबह की गहमागहमी अपने चरम पर थी। ट्रेडमिल के चलने की आवाज़ें और भारी संगीत के बीच ...