आखिर वह दिन आ गया जब इस कहानी का आखिरी पड़ाव हम सब का इंतज़ार कर रहा था । ...
उन पलों में स्वप्निल सब भूल गया ... श्राप ... शंखचूड़नी ....... तभी लागातार बजते मोबाइल के रिंग ने ...
हाय ऑल ! इट्स मी अगेन विधि आहूजा ! शर्लिन ने मुझे घुँघरू और श्राप की सारी कहानी सुनाई ...
घुँघरू के प्रति अपने असीम अनुराग को मैंने भक्ति के रूप में बदल दिया था और अपनी देवी को ...
अनन्त देव की सहायता से मैंने उसके रहने की व्यवस्था जंगल के निकटतम गाँव वाराही में कर दी। घुँघरू ...
शर्लिन स्वप्निल की दी हुई डायरी रख कर भूल गई थी। उसे उस डायरी की याद तब आई जब ...
चॉंद सिंदूरी आसमां में इतराने लगा था, बड़ी मनभावन जगह थी। निर्जन पहाड़ियों से होकर एक नदी एक छोटी ...
कॉफ़ी कॉर्नर में एक नौजवान जोड़ा बैठा था। वह जोड़ा इतना हसीन था कि हर किसी की नज़र उन ...
वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को ...
हैलो फ्रेंड्स ! मैं हूँ विधि आहूजा! ओह ! अच्छा तो आप ये सोच रहे हैं कि मैं आखिर ...