आधुनिकता की अंधी दौड़ में जब शहर के कंक्रीट के मकान ऊंचे होते जा रहे थे, तब गाँव के ...
समाज के ताने और नई परीक्षालेखक: निशा चौधरीअस्पताल से घर आने के बाद रोहन और सुनीता का रिश्ता पूरी ...
भाग 1: असफलता की रात और वो आखिरी खतकमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की हर टिक-टिक ...
भाग 1: अनचाही आहट"सौतेली माँ कभी किसी की अपनी नहीं हो सकती, रोहन... वो सिर्फ तुम्हारे पापा के पैसे ...
"क्या किस्मत वाकई पहले से लिखी होती है? या फिर हमारी एक जिद इसे पूरी तरह बदल सकती है? ...
"पिता जी ने अपनी ज़िंदगी की आखिरी जमापूंजी भी दांव पर लगा दी थी, लेकिन क्या रोशनी उनका यह ...
पहाड़ की बर्फीली चोटियों पर जब तेज़ ठंडी हवाएँ चलतीं, तो ऐसा लगता मानो सुइयाँ जिस्म में चुभ रही ...
अरे बहू! ज़रा चाय तो बनाना, और हाँ, मलाई मत डालना," मालती जी ने अपनी जगह से ही आवाज़ ...
शाम के ढलते ही जब आँगन में पुरानी साइकिल की वही जानी-पहचानी चैन की आवाज़ गूँजती, तो पूरे घर ...
अस्पताल के उस ठंडे कमरे में फैली गहरी खामोशी को अचानक रीना की भारी सिसकियों ने तोड़ दिया। रीना ...