Nitya Oswal stories download free PDF

अमृत वाणी - संत वाणी - 29

by Nitya Oswal
  • 54

भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 28

by Nitya Oswal
  • 405

संत गुरु अर्जुन देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के लालच और दिखावे को छोड़कर निष्काम भाव ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 27

by Nitya Oswal
  • (0/5)
  • 792

“ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या, जीवो ब्रह्मैव नापरः।अनेन वेद्यं सच्छास्त्रं, इति वेदान्त डिण्डिमः॥”“केवल ब्रह्म ही सत्य है, यह जगत मिथ्या ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 26

by Nitya Oswal
  • (5/5)
  • 1k

संत श्रीसाईं बाबा की यह वाणी किसी भी जीव की भूख को शांत करने और अपनी क्षमता के अनुसार ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 25

by Nitya Oswal
  • (5/5)
  • 1.1k

संत गुरु नानक देव जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के अन्याय और लालच को छोड़कर अपनी ईमानदारी ...

क्या भाग्य सच में होता है?

by Nitya Oswal
  • (0/5)
  • 1k

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 24

by Nitya Oswal
  • (0/5)
  • 1.3k

संत कबीरदास जी का यह दोहा समाज में ज्ञान और व्यवहार के गहरे अंतर को समझाकर जीवन को पूरी ...

दान किस तरह से देना चाहिए?

by Nitya Oswal
  • (5/5)
  • 1.2k

यदि हमारे पास अतिरिक्त धन हो और हम उसे दान में देते है, तब भीतर कैसा भाव होना चाहिए, ...

अमृत वाणी - संत वाणी - 23

by Nitya Oswal
  • (5/5)
  • 1.3k

“जे जे भेटे भूत, ते ते मानिजे भगवंत।हा भक्तीचा पैं गा गाभा, जाणिजे सर्वथा॥” — संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी)( अनुवाद: ...

दान कहाँ और कितना देना चाहिए?

by Nitya Oswal
  • (0/5)
  • 1.3k

इस काल में दान बहुत सोच-समझकर देने जैसा है। पहले के ज़माने में सच्चा धन आता था, इसलिए दान ...