prem chand hembram stories download free PDF

तपती दोपहरी

by prem chand hembram

तपती दोपहरीबैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी ...

जीवंत देवता

by prem chand hembram
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जीवंत देवताअदालत खचाखच भरी थी…पर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था—जैसे दीवारें भी आज कुछ अलग सुनने को ...

मानवता की जीत

by prem chand hembram
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मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज ...

एक छोटी सी भूल

by prem chand hembram
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एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील ...

विचारों का संग्राम

by prem chand hembram
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विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित ...

भूतों की बारात में झूमर

by prem chand hembram
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भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से ...

अपूर्ण शिक्षा :- एक घातक परिणाम

by prem chand hembram
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सत्-चरित्र: सृष्टि का मूल अस्तित्वक्या आपने कभी गंभीरता से विचार किया है कि किसी समाज, राष्ट्र या सम्पूर्ण सृष्टि ...

भारतीय नारी : सृष्टि की उद्घाता

by prem chand hembram
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भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया ...

बच्चों से प्रेम या धोखा ?

by prem chand hembram
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बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि ...

जब मटकू को मिला भोंपू

by prem chand hembram
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जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं ...