પ્રકરણ - ૨નિષ્ફળતાનો ઈતિહાસકુર્લાની એ સાંકડી ગલીઓમાં રાતનો સન્નાટો પ્રસરેલો હતો, પણ આર્યનના મગજમાં વિચારોનું તોફાન શમવાનું નામ નહોતું ...
પ્રકરણ ૧શૂન્યતાનો નકશોઅરબી સમુદ્રની લહેરો જ્યારે મુંબઈના કિનારાને સ્પર્શે છે, ત્યારે જાણે કોઈ જૂની મિત્રતાનો એક નવો અધ્યાય શરૂ ...
प्रकरण - ६०स्टूडियो में बैठे रोशनकुमारने कहा, "अपनी आंखों की रोशनी वापस आने से मैं उस दिन बहुत ही ...
प्रकरण - ५९मुझे अब ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। मैं ऑपरेशन थियेटर में कुछ भी नहीं देख सकता ...
प्रकरण - ५८जैसे ही मैंने फातिमा के कदमों की आहट सुनी, मैंने फातिमा को अपने पास बुलाया और कहा, ...
प्रकरण - ५७दिवाली का त्यौहार आया,ढेर सारी खुशियाँ लेकर आया।नई उम्मीदें लेकर आया,तिमिरपंथ पे ज्योति लेकर आया।अब दिवाली का ...
प्रकरण - ५६वक्त कहां बीत जाता है, कुछ पता ही नहीं चलता। देखते ही देखते तो दिवाली का समय ...
प्रकरण - ५५दर्शिनी और समीर की सगाई तय करने के बाद, जब सभी लोग अपने-अपने काम पर चले गए ...
प्रकरण - ५४मुझे एवॉर्ड मिलने की खुशी में मेरे परिवारने मुझे एक सर्प्राइज पार्टी दी थी। हम सभी उस ...
प्रकरण - ५३मैं और फातिमा अभी तो रईश के बारे में बात ही कर ही रहे थे कि रईश ...