RAAHULL SHARMA stories download free PDF

अवनि एक अटूट विश्वास - 18

by RAAHULL SHARMA
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वह काबिल-ए-तारीफ है। लेकिन सबसे अच्छी बात जानते हो क्या है? इतनी शोहरत के बाद भी वह बहुत ही ...

प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 18

by RAAHULL SHARMA
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फोन कटने के बाद श्मशान घाट पर सन्नाटा इतना गहरा था कि किसी के सांस लेने की आवाज भी ...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 20

by RAAHULL SHARMA
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तहखाने की गूंज और रूपमती का बदला रूपदेवपुर के उस अंधेरे, सीलन भरे और सील किए गए गुप्त तहखाने ...

रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 18

by RAAHULL SHARMA
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लंच ब्रेक: खामोशी के पीछे का शोरलंच की घंटी बजते ही पूरी क्लास में एक अजीब सी हलचल मच ...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 19

by RAAHULL SHARMA
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उधर हजारों फीट की ऊंचाई पर आसमान को चीरता हुआ देवपुर के शाही परिवार का लग्जरी 'प्राइवेट जेट' भारत ...

प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 17

by RAAHULL SHARMA
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चट्टोपाध्याय और अब्दुल कासिम का गुस्सा सातवें आसमान पर था।वे लगातार चिल्लाते हुए कमिश्नर भाटी, अंकुर और पंखुड़ी की ...

अवनि एक अटूट विश्वास - 17

by RAAHULL SHARMA
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माँ: "चलो बेटा, हमारे साथ चलो। अब यहाँ रुकने का मतलब सिर्फ अपनी और बेइज़्ज़ती करवाना है।हमारी दिल्ली की ...

रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 17

by RAAHULL SHARMA
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प्रोफेसर ने नजरें झुका लीं और ब्लैकबोर्ड पर लिखने का बहाना करने लगे।क्लासरूम में दहशत का सायाप्रोफेसर ब्लैकबोर्ड की ...

1926 की अमावस की वो खौफनाक रात - 18

by RAAHULL SHARMA
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मानसिंह की घबराहट और अनिष्ट की आशंकाताले पर रज्जू का खून बिखरा पड़ा था।उसकी आँखें बाहर लटक रही थीं ...

प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 16

by RAAHULL SHARMA
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पंखुड़ी: "अंकुर, अगर सर यहां होते तो वह कम से कम पुलिस फोर्स की कमान संभाल रहे होते। यहाँ ...