प्रथम अध्याय: अनकहे अल्फाज़ और रात का सन्नाटारात के ढाई बज रहे थे। कमरे की खिड़की से आती हल्की ...
अध्याय 1: ख़ामोश कमरा और चाय का कपघड़ी की टिक-टिक आवाज़ उस छोटे से कमरे के सन्नाटे को चीर ...
अध्याय 1: धुंधलाता आसमानशहर के पश्चिमी छोर पर बसी 'शांति कॉलोनी' की तंग गलियों में सुबह का सूरज अक्सर ...
भाग 1: सपनों का शहर और मासूमियतदिल्ली का सुबह का मौसम हमेशा से एक अजीब सी हकीकत और ख़्वाबों ...
अध्याय 1: धुंध में लिपटा अतीत"यह उन दिनों की बात है..."जब कसौली के पहाड़ों पर धुंध इतनी गहरी होती ...
अध्याय 1: रात का आशियानामुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, महाबलेश्वर के शांत पहाड़ों के बीच 'इरविन कॉटेज' ...
हिमाचल के सुदूर पहाड़ों में बसा ‘कुफरी-वैली’ का वह हिस्सा हर साल नवंबर आते-आते बाकी दुनिया से पूरी तरह ...
अध्याय 1: ख़ामोशी के साएरात के बारह बज चुके थे। साहिबाबाद की उस तंग और अंधेरी गली में सन्नाटा ...
रात का भारी सन्नाटा अब ढलने लगा था और सुबह की हल्की, ठंडी रोशनी कमरे के भारी पर्दों के ...
पुराने वेयरहाउस में फैली सीलन और धूल की गंध के बीच सन्नाटा किसी गहरे तूफ़ान का अहसास करा रहा ...