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धड़कने दिल की - 9

by Shravan Gore
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'धड़ाम!'लोहे के विशाल भारी कपाट गिरने की गूंज उस संकरी, नम सुरंग में गूंज उठी। सीलन, सड़ी हुई काई ...

धड़कने दिल की - 8

by Shravan Gore
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कैमरे के शटर की हल्की सी 'क्लिक' आवाज ने उस दोपहर के सन्नाटे को एक मीठे सुकून से भर ...

धड़कने दिल की - 7

by Shravan Gore
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'धांय!'गोली की गूंज वेयरहाउस की हर लोहे की चादर से टकराकर एक भयानक सन्नाटे में बदल गई। बारूद की ...

धड़कने दिल की - 6

by Shravan Gore
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काले, बदबूदार बोरे के भीतर सांस लेना किसी जलते हुए तवे पर फेफड़े रखने जैसा था। गाड़ी के झटकों ...

धड़कने दिल की - 5

by Shravan Gore
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ऑटो रिक्शा बांद्रा की संकरी, गीली गलियों में हिचकोले खाते हुए आगे बढ़ रहा था। बाहर की धुंधली पीली ...

धड़कने दिल की - 4

by Shravan Gore
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लाइब्रेरी के भारी शीशम के दरवाजों पर लोहे की सांकल गिरने की गूंज सन्नाटे में दूर तक तैर गई। ...

धड़कने दिल की - 3

by Shravan Gore
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लाइब्रेरी के सबसे अंधेरे कोने में हवा जैसे बर्फ बन चुकी थी। आर्काइव सेक्शन की ऊंची, महोगनी की पुरानी ...

धड़कने दिल की - 2

by Shravan Gore
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दोपहर ढल चुकी थी, लेकिन सेंट जेवियर्स कॉलेज के गलियारों में तनाव की एक खामोश परत तैर रही थी। ...

धड़कने दिल की - 1

by Shravan Gore
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मुंबई शहर की सुबह की हवा में एक अजीब सी रवानी होती है. समंदर की नमी जब पुरानी इमारतों ...

धड़कने दिल की

by Shravan Gore
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कल्पना कीजिए एक ऐसी स्टोरी जिसमें आदित्य और सिया की रोमांटिक पल हैं| और थ्रिलर काले साम्राज्य की, जिसकी ...