कुछ हफ्ते बीत चुके थे। संस्कृति का पेट थोड़ा-सा दिखने लगा था।कार्तिक अब पहले से भी ज्यादा ओवरप्रोटेक्टिव हो ...
शुभिका बिल्कुल चुप बैठी थी। उसके हाथों पर हल्दी लगाई जा रही थी…और सामने सोफे पर विक्रांत शर्मा बैठा ...
सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल चुकी थी। सृष्टि अभी भी थोड़ी झिझकी हुई थी। वो उठकर बैठ ...
डॉक्टर के कमरे में हल्की-सी शांति थी। संस्कृति बेड पर लेटी थी और कार्तिक उसके पास कुर्सी पर बैठा ...
बारिश इतनी तेज़ थी कि सड़कें धुंधली पड़ चुकी थीं…लाल जोड़े में लिपटी एक लड़की नंगे पाँव भाग रही ...
पर कहानी यहीं शांत नहीं हुई। अतीत कभी-कभी दरवाज़ा खटखटाकर नहीं आता, सीधे तोड़कर अंदर घुसता है। जिस जगह ...
संस्कृति अभी भी सोफे पर बैठी थी। पारो उसके सामने कुर्सी खींचकर बैठ गई। उसके चेहरे पर अब चिंता ...
सुबह का समय था। घर में अजीब सी चुप्पी थी।कबीर ने बिना बहस किए धीरे से कहा,सृष्टि… हमें डॉक्टर ...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। स्विट्जरलैंड की ठंडी हवा कमरे में तैर रही थी। ...
कबीर कुछ बोलने ही वाला था। उसके होंठ खुले…शब्द जैसे बाहर आने को तैयार थे।तभी सृष्टि की धीमी लेकिन ...