रात का खाना खत्म हो चुका था। पूरा परिवार हॉल में बैठा था।सिद्धिदात्री, रितांश और रितांशी अपनी-अपनी किताबों में ...
तीनों का प्यार अब एक सा हो गया था…अलग-अलग नहीं…बल्कि एक ही डोर में बंधा हुआ। काफी दिनों बाद…तीनों ...
संयोगिता दीवार से टिककर बैठी थी। उसकी घायल बाँह से अब भी खून बह रहा था। लेकिन उसके चेहरे ...
रात का समय है। हवेली में गहरा सन्नाटा है।बाहर तेज़ हवा चल रही है, बादलों के बीच से कभी-कभी ...
कृष्णा कुछ पल तक चुप खड़ा रहा। उसकी आँखों में एक गहरी शांति थी। वह धीरे-धीरे सिद्धिका के करीब ...
घर आज कुछ ज़्यादा ही शांत था…कबीर किसी काम से बाहर गया हुआ था। किचन की हलचल खत्म हो ...
(रात का सन्नाटा फैला हुआ है। बाहर ठंडी हवा बह रही है।कमरे में हल्की पीली रौशनी जल रही है। ...
कई दिनों बाद...अग्निहोत्री परिवार के घर में फिर से हँसी लौट आई थी। सालों बाद घर पूरा लग रहा ...
अगले दिन सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी।श्रेया की नींद धीरे-धीरे खुली। उसने हल्का सा हिलना ...
(सिमरन धीरे-धीरे आँखें खोलती है।वो करवट बदलती है — तभी देखती है, सामने करण खड़ा है।उसकी लाल आँखें हल्के ...